बवासीर का ईलाज

बवासीर का ईलाज

बवासीर

बवासीर एक खतरनाक बीमारी है गुदा के पास सूजन नसों को बवासीर के रूप में जाना जाता है। बवासीर दो प्रकार की होती है| बवासीर को आम भाषा में खूनी और बादी बवासीर भी कहते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

1.खूनी बवासीर- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती सिर्फ खून आता है इसका मुख्य कारण मस्सा है जो अंदर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है|

2.बादी बवासीर- बादी बवासीर होने पर पेट खराब रहता है व गैस बन जाती है| कब्ज बनी रहती है| बवासीर की वजह से पेट खराब रहता है इस में दर्द, जलन ,खुजली व शरीर में बेचैनी इत्यादि यह लक्षण सामने आते हैं|

बवासीर
बवासीर

बवासीर के लक्षण

  • मल त्याग करते समय गुदाद्वार में दर्द सा महसूस होना|
  • बवासीर होने पर कई बार रोगी को मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगता है कि उसका पेट अभी साफ नहीं हुआ |यह बवासीर के मस्से होने का प्रथम लक्षण  है|
  • मल त्याग शौच करते समय गुदाद्वार में खून निकलना बवासीर का  मुख्य कारण है|
  • गुदाद्वार की नसों में जब किसी कारण वश दबाव पड़ता है तो उन में सूजन आ जाती है जिसे हम मस्सा कहते हैं|
  • बवासीर होने पर गुदाद्वार में से श्लेष्मा भी निकलता है|
  • गुदा के आसपास चरम खुजली।

बवासीर के कारण

  1. रक्त -इसे खुनी बवासीर भी कहते हैं इसमें रक्त गिरता है|
  2. कड़वा खट्टा नमकीन वस्तुओं को अधिक आना, अधिक कसरत करना ,धूप में अधिक रहना , गरम देश में रहना व गरम पदार्थों का खाना आदि मुख्य कारण है|
  3. दवाओं का सेवन करना अत्यधिक दवाओं का सेवन करने से भी बवासीर हो जाता है
  4. भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी बवासीर हो जाता है|
  5. अधिक तला या मसालेदार भोजन खाने से भी बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  6. प्रसव  के दौरान भी बवासीर होने  की संभावना बढ़ जाती है

बवासीर को दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

1.प्याज के रस में घी और चीनी मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|

2.काले तिल 1 तोला तोले भर मक्खन में मिलाकर सुबह सुबह रोज खाने से 8 दिन में खूनी बवासीर आराम हो जाती है|

3.जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर और सेंधा नमक डालकर रोटी के साथ 8 दिन खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|असीस, कूड़े की छाल ,इंद्रजौ और रसौत इनके चूर्ण को शहद में मिलाकरचावलों के पानी के साथ लेने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है|

Broccoli
Broccoli( जंगली गोभी )

4.काले तिलों का चूर्ण, नागकेसर और मिश्री इन सब को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

5.नागकेसर और मिश्री छह- छह माशे से लेकर 9 माशे ताजा मक्खन में मिलाकर सुबह शाम खाने से 7 दिन में खाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है|

6.कड़वी नीम के पके हुए फलों को गुदा 3 माह लेकर 6 माशे से गुड में मिलाकर 7 दिन तक खाने से बवासीर में आराम मिलता है|प्याज के महीन टुकड़े करके धूप में सुखा लें| सुखे टुकड़ों में से एक तोला प्याज लेकर घी मे तले फिर उसमें एक माशे  तिल और दो तोले मिश्री मिलाकर हर रोज सेवन करें इससे बवासीर में आराम मिलता है|कमल का नरम पत्ता पीसकर मिश्री के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

7.सवेरे ही बकरी का दूध पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

8.गेंदे की पत्तियां 6 मासी से 1 तोले तक और काली मिर्च 2 मासी से 3 मासी तक  इकट्ठा कर ले और पीस छानकर पी जाए इससे बवासीर का खून बंद हो जाता है|

9.कमल की केसर, शहद,ताजा मक्खन, चीनी और नागकेसर सब को एक में मिलाकर खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

10.आम की कोपल पानी में पीस जानकर थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

11.एक नारियल के ऊपर का छिलका लेकर जलाएं और उसकी राख के बराबर शक्कर मिलाकर तीन खुराक बनाए| इसको एक- एक खुराक हर रोज सेवन करने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

किडनी स्टोन यानी पथरी( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन ( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन यानी पथरी एक छोटे आकार का पत्थर होता है जो कैलशियम मिनिरल्स सॉल्ट और अन्य अक्ष आर्य तत्वों के मिलने से धीरे-धीरे बड़े कठोर पत्थर के रूप में मूत्र मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है जो किडनी स्टोन छोटी होती है किडनी स्टोन आसानी से मूत्र वाहिनी से बाहर निकल जाती है लेकिन जब यह बड़ी हो जाती है तो पेट के निचले हिस्से में दर्द होना शुरू हो जाता है और सूजन आ जाती है जिससे मूत्र मार्ग में संक्रमण हो जाता है|

kidney stone
किडनी स्टोन ( kidney stone )

किडनी स्टोन के लक्षण(kidney stone symptoms)

  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों का यूरिन गुलाबी लाल या भूरे रंग का आने लगता है पेशाब करने में दिक्कत आ सकती है|
  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों को पेट के निचले हिस्से में दर्द रहने लगता है और यह दर्द कुछ मिनटों या घंटों तक बना रहता है|
  • किडनी स्टोन के शुरूआती लक्षण में से  एक है उल्टी आना उल्टी दो कारणों से बाहर आती है |पहला स्टोन की स्थानांतरण के कारण और दूसरा किडनी शरीर के अंदर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है|
  • किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति का यूरिन मटमैला और बदबूदार होता है|
  • इस रोग में तेज बुखार और ठंड लगने की संभावना होती है|
  • किडनी स्टोन के बड़ा होने पर यह मूत्राशय को ब्लॉक कर देती है जिससे किडनी में दर्दनाक सूजन पैदा हो जाती है और पेट और कमर में दर्द का अनुभव होने लगता है|
  • किडनी स्टोन बड़ा होने पर व्यक्ति को बैठने में परेशानी हो सकती है|
  • किडनी स्टोन के मूत्र मार्ग से मूत्राशय में चले जाने पर बेहद दर्दनाक होता है|

किडनी स्टोन के कारण (Kidney stone causes)

1.प्रोस्टेड फूड का अधिक सेवन करने से-

प्रोस्टेडफूड का अधिक सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है प्रोस्टेड में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जिससे मूत्र मार्ग में सोडियम की मात्रा बढ़ती है| साथ ही साथ कैल्शियम का अधिक उत्सर्जन होने लगता है |प्रोस्टेट फूड में फाइबर की मात्रा कम होती है जिससे यूरिक एसिड की प्रक्रिया में रुकावट आती है|

2.सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने से-

सॉफ्ट ड्रिंक्स और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से शरीर में कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कैल्शियम के उत्सर्जन की संभावना बढ़ जाती है जो किडनी स्टोन का कारण बनती है|

पानी की कमी से पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन कम करने से शरीर में किडनी स्टोन रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है|

3.अनुवांशिकता-कुछ लोगों को अनुवांशिकता के कारण गुर्दे की पथरी की समस्या हो जाती है| कैल्शियम का स्तर बढ़ने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है|

4.मोटापा -किडनी स्टोन का मुख्य कारण मोटापा है|

5.दवाओं का सेवन करने से– कैल्शियम वाली एंटासिड लेने वाले लोगों की मूत्र में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है| विटामिन डी से भी कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है इसके कारण किडनी स्टोन की समस्या उत्पन्न होती है|

6.सिगरेट- सिगरेट किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है जिससे वे काम करना भी बंद कर देती हैं धूम्रपान करने से धमनियां कड़ी हो जाती है जिससे किडनी के रक्त प्रभाव में रुकावट पैदा होती है और उसके कार्य करने की क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है|

7.सोडियम का अधिक सेवन किडनी रोग होने पर हमें सोडियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए  सोडियम सीधे किडनी को प्रभावित करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बनाए रखने में मदद करता है |

8.अत्यधिक शराब का सेवन शराब का सेवन करने से किडनी की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लगती है और किडनी के आकार में वृद्धि हो सकती है|

(किडनी स्टोन के लिए आयुर्वेदिक उपाय)Kidney stone treatment

1. किडनी स्टोन रोग से बचने के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए|

2.प्रतिदिन 5 से 6 महीने तक तुलसी के रस में शहद मिलाकर पीने से किडनी स्टोन आसानी से पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाता है|

3.अनार और उसके जूस का सेवन करने से किडनी स्टोन से बचा जा सकता है|

4. तरबूज में पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पानी की कमी को पूरा करता है यह मूत्र मार्ग में एसिड की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद करता है|

5. नींबू का रस, चार टुकड़े तरबूज के, चार बर्फ के टुकड़े, एक संतरा आदि सबको पीसकर जूस बना लें और रोजाना इसका सेवन करें|

6.करेले का जूस के रूप में सेवन करें| प्रतिदिन एक गिलास करेले का जूस पिए|

7.प्रतिदिन एक गिलास मूली का रस पीने से पथरी  जल्दी 21 दिनों के भीतर निकल जाती है|

8.प्रतिदिन पत्थरचट्टा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिएं 15 दिन में किडनी स्टोन नामक रोग से आराम मिल जाएगा|

9.प्रतिदिन एक गिलास अजवाइन का जूस पीने से भी किडनी स्टोन की समस्या खत्म हो जाती है|

10. नारियल पानी का सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या दूर होती है |

Ajwain
अजवाइन ( Ajwain )

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer)

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer )

प्रोस्टेट या गदूद एक सेब के आकार का यौन अंग होता है |प्रोस्टेट शरीर में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है यह केवल पुरुषों में पाई जाती जो उनके प्रजनन प्रणाली का एक अंग है| पुरुष ग्रंथि मूत्र मार्ग के चारों ओर होती है |मूत्र मार्ग मूत्र को मूत्राशय से लिंग के रास्ते से बाहर निकालता है| पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 25 साल की उम्र के बाद बढ़ने लगता है| कई अवस्थाओं में प्रोस्टेट का आकार सामान्य से अधिक होता है| प्रोस्टेट की कोशिकाएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं| जिससे यह ग्रंथि सामान्य से ज्यादा बढ़ने लगती है |इससे मुत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है और कई समस्याएं उत्पन्न  होती है |प्रोस्टेट ग्रंथि को दो भागों में बांटा जाता है दाएं और बाएं| एक व्यस्क पुरुष में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 3 सेंटीमीटर मोटा और 4 सेंटीमीटर चौड़ा होता है और इसका वेट यानी वजन 20 ग्राम तक हो सकता है|

Prostate_Cancer
प्रोस्टेट कैंसर ( Prostate_Cancer )

प्रोस्टेट कैंसर की घटना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है |प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं से बनने वाला कैंसर होता है| प्रोस्टेट कैंसर बहुत धीरे बढ़ता है| शुरुआत में तो इसके लक्षण दिखाई नहीं देते |जब यह लास्ट स्टेज पर पहुंचता है लक्षण दिखाई देने लगते हैं और कई बार मरीजों को यह पता भी नहीं लगता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है| व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है|

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण(Prostate cancer symptoms)

  • पेशाब का बार बार आना|
  • पेशाब करने की इच्छा बार बार होना और निष्कासित करते वक्त मूत्र में रुकावट होना|
  • कई बार मूत्र के साथ रक्त का निकलना इस रोग का मुख्य लक्षण है|
  • पेशाब करने के दौरान जलन और कठिनाई का अनुभव होना और मूत्र की बूंद टपकना|
  • कमर में दर्द होना कूल्हो  और जांघ की ऊपरी सतह में दर्द होना|
  • लगातार वजन कम होना भी प्रॉस्टेट कैंसर का लक्षण है। शरीर का वजन तेजी से कम होना भी कैंसर की ओर इशारा है।
  •  जब पाचन क्रिया सही तरह से काम न करे तो समझ लेना चाहिए कि आप प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में हैं। वहीं प्रॉस्टेट कैंसर से व्यक्ति के शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
  • शरीर के किसी भी हिस्से में दर्दहोना इस रोग का मुख्य लक्षण है|

प्रोस्टेट कैंसर के कारण(Prostate cancer causes)

  • अनुवांशिकता– अगर आपके परिवार में पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर था तो  आपको इस रोग के होने की संभावना बढ़ सकती है|
  • बढ़ती उम्र– उम्र के बढ़ने के साथ-साथ प्रोस्टेट कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है| यह 25 वर्ष की उम्र के बाद होने लग जाता है|
  • हारमोंस में परिवर्तनप्रोस्टेट कैंसर का मुख्य कारण हारमोंस में परिवर्तन होना है| वसा हार्मोन का उत्पादन और शरीर में ऊंचाहार टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन  प्रोस्टेट कैंसर होने का मुख्य कारण है|
  • धूम्रपान– धूम्रपान करना ,बीड़ी सिगरेट शराब का सेवन करने से भी पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है| यह कैंसर धीरे धीरे फैलने लगता है| शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते इसलिए कई पुरुषों को पता भी नहीं लग पाता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है|
  • केमिकल्स के संपर्क में आना केमिकल्स के संपर्क में आने से भी पुरुष इस रोग का शिकार हो जाते हैं|
  • आहार कारक-मछली मांस सोयाबीन उत्पाद चावल डेयरी उत्पादों का सेवन करते रहने से भी प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका बनी रहती है|

प्रोस्टेटकैंसर स्टेजिज(Prostate cancer stages)

प्रोस्टेट कैंसर को चार चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

स्टेज 1. पहले चरण में कैंसर बहुत छोटा होता है और पुरुष ग्रंथि तक ही सीमित रहता है|

स्टेज2.दूसरे चरण में कैंसर पुरुष ग्रंथि में ही होता है लेकिन इसका आकार बड़ा हो जाता है|

स्टेज3.तीसरे चरण में कैंसर प्रोस्टेट के बाहर फैल चुका है और वीर्य को ले जाने वाली ट्यूब्स तक फैल जाता है|

स्टेज4. चौथे चरण में कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि से बाहर के नजदीक ढांचे जैसे लसिका ग्रंथि मूत्राशय या फिर हड्डियों या लीवर जैसे दूर के अंगों में फैल जाता है|

प्रोस्टेट कैंसर किस उम्र के लोगों को होता है?(Prostate cancer age)

प्रोस्टेट कैंसर के बारे मे सबसे पहले हमने यह जाना कि प्रोस्टेट कैंसर किन कारणों की वजह से होता है उम्र के बढ़ने के साथ-साथ इस रोग के होने की आशंका बढ़ जाती है यह रोग 25 वर्ष की आयु के बाद होने लगता है 40 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में यह रोग कम देखने को मिलता है लेकिन 60 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है|

प्रोस्टेट कैंसर के लिए टेस्ट(Prostate cancer test)

1.PSA  Testरक्त परीक्षण(prostate Specific Antigen)

प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए प्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन(prostate Specific Antigen)नामक टेस्ट किया जाता है प्रोस्टेट नामक रसायन का स्तर बढ़ जाने पर प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी नामक टेस्ट किया जाता है पता लगाया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर इतनी शीघ्रता से फैल रहा है| पीएसी के आधार पर ही डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं प्रोस्टेट कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित न करें इसके लिए सीटी स्कैन  बोन स्कैन टेस्ट भी किया जाता है|

1.PSAप्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांचने के लिए खून का एक सैंपल लिया जाता है| पीएसए प्रोस्टेट द्वारा बनाया गया एक प्रोटीन है प्रोस्टेट के कैंसर से ग्रस्त पुरुषों के खून में पीएसए के बढ़े हुए सतर होते हैं प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित कुछ पुरुषों में सामान्य पीएसए होता है| पीएसए का सामान्य से ऊंचा  स्तर प्रोस्टेट का कैंसर के कारण हो सकता है| ऐसा मानने पीएसएस ऊपर वाले पुरुषों को आमतौर पर औरपरीक्षणों के लिए भेजा जाता है।

2.बायोप्सी-एक बायोप्सी शरीर से लिया गया ऊतक का एक नमूना है ताकि इसे और अधिक बारीकी से जांच की जा सके।बायोप्सी एक सुई से ली जाती है जोकि पीछे के मार्ग  की दीवार से डाली जाती है इसे TRUS बायोप्सी कहते हैं| बायोप्सी अल्ट्रासाउंड के साथ ही की जाती है| बायोप्सी वृषण के पीछे की त्वचा से भी ली जा सकती है| इसे ट्रांसपेरिनियल बायोप्सी कहते हैंऐसा भी हो सकता है कि प्रोस्टेट में कैंसर हो पर वह बायोप्सी से पता नहीं लगाया जाए ऐसे कैंसर का पता लगाने के लिए एमआरआई स्कैन भी किया जा सकता है फिर बायोप्सी को फिर से करना पड़ सकता है यदि पीएसए का सत्र बढ़ने लगे तो बायोप्सी को फिर से किया जा सकता है|

3.MRI(Magnetic Resonance Imaging)-एमआरआई के लिए शक्तिशाली चुंबक  रेडियो किरणों और कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है जिसकी मदद से शरीर की जानकारी को विस्तृत तस्वीरों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल शरीर के लगभग हर हिस्से को जांचने के लिए किया जाता है जैसे अंदरुनी अंग लीवर गर्भाशय और पुरुष ग्रंथि आदि की जांच की जाती है|

अतिरिक्त जांच यदि बायोप्सी में पता लग जाता है कि कैंसर है तो वह प्रोस्टेट ग्रंथि से आगे फैला है या नहीं इसका पता करने के लिए अतिरिक्त टेस्टों की आवश्यकता पड़ सकती है| जिम में शामिल है :हड्डियों का स्कैन, सीटी स्कैन ,एक्स रे|

प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1.लहसुन– लहसुन में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं जैसे कि विटामिन सी विटामिन बी जो प्रोस्टेट कैंसर को होने से रोकते हैं|

2.ब्रोकली– ब्रोकली के अंकुर मे पाया जाने वाला फाइटोकेमिकल्स कैंसर के कीटाणुओं से लड़ने में हमारी मदद करता है इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन करना चाहिए|

ब्रोकली
ब्रोकली

3.अमरूद– अमरूद मे लाइकोपिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो कैंसर से लड़ने में हमारी मदद करता है|

4.सोयाबीन– प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन अपने आहार में सोयाबीन का सेवन करना चाहिए|

5.एलोवेरा– एलोवेरा में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन एलोवेरा का सेवन करना चाहिए|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

6.ग्रीन टी-प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करने से हम कैंसर होने से बच सकते हैं|

7.अंगूर– अंगूर में पोरंथोसाइनिडीसभरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे ट्रोजन के निर्माण में कमी होती है और हमें कैंसर रोग से निजात मिलता है|                                                                                                              

मधुमेह

मधुमेह

मधुमेह को धीमी मौत भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के शरीर को पकड़ ले तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं। इस बीमारी का जो सबसे बुरा पक्ष है वह यह है कि यह शरीर में अन्य कई बीमारियों को भी निमंत्रण देती है। मधुमेह रोगियों को आंखों में दिक्कत, किडनी और लीवर की बीमारी और पैरों में दिक्कत होना आम है। पहले यह बीमारी चालीस की उम्र के बाद ही होती थी लेकिन आजकल बच्चों में भी इसका मिलना चिंता का एक बड़ा कारण हो गया है। 

यह रोग महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होता है।शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से हार्मोनल बदलाव होता है और कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। इससे धमनी में रुकावट आ सकती है या हार्ट अटैक हो सकता है। स्ट्रोक का खतरा भी मधुमेह रोगी को बढ़ जाता है। डायबिटीज का लंबे समय तक इलाज न करने पर यह आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे व्यक्ति हमेशा केलिए अंधा भी हो सकता है।

मधुमेह
मधुमेह

मधुमेह के लक्षण

  • ज्यादा प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब का आना
  • आँखों की रौशनी कम होना
  • कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना
  • हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म
  • बार-बार फोड़े-फुंसियां निकलना
  • चक्कर आना
  • इंसुलिन बनना बंद होने से शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण सिर दर्द होने लगता है
  • मधुमेह में महिलाओं को कई बार कम दिखने लगता है और कभी घुंधला दिखाई पड़ता है।

मधुमेह होने के कारण

मधुमेह के कारण जेनेटिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधी और पर्यावरणीय कारकों के आधार पर अलग-अलग होते हैं। शुगर का कोई निश्चित कारण नहीं है। हर व्यक्ति के लिए इसके प्रकार और कारण भिन्न होते हैं।

इंसुलिन प्रतिरोध: शुगर आम तौर पर इंसुलिन प्रतिरोध से शुरू होता है। ये ऐसी स्थिति होती है जिसमें मांसपेशियों, यकृत और वसा कोशिकाओं में इंसुलिनअच्छी तरह से प्रयोग नहीं हो पाता है।

मधुमेह से बचाव के यह कुछ उपाय

  1. दिन में तीन समय खाने की बजाय उतने ही खाने को छह या सात बार में खाएं। 
  2. गेहूं और जौ 2-2 किलो की मात्रा में लेकर एक किलो चने के साथ पिसवा लें। इस आटे की बनी चपातियां ही भोजन में खाएं।
  3. मधुमेह रोगियों को अपने भोजन में करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, ब्रौकोली, टमाटर, बंद गोभी और पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।
  4. मेथी दाना रात को भिगो दें और सुबह प्रतिदिन खाली पेट उसे खाना चाहिए।
  5. फलों में जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, खरबूजा, कच्चा अमरूद, संतरा, मौसमी, जायफल, नाशपाती को शामिल करें। आम, केला, सेब, खजूर तथा अंगूर नहींखाना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर ज्यादा होता है
  6. कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। भोजन में मीठे को बिलकुल खत्म कर दें। सब्जियां, ताज़े फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पादों और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपनेभोजन में शामिल कीजिये।
  7. अपने ग्लूकोज स्तर को जांचें और भोजन से पहले यह 100 और भोजन के बाद 125 सेज्यादा है तो सतर्क हो जाएं। हर तीन महीने पर HbA1c टेस्ट कराते रहें ताकिआपके शरीर में शुगर के वास्तविक स्तर का पता चलता रहे। उसी के अनुरूप आप डॉक्टर से परामर्श कर दवाइयां लें|

मधुमेह के लिए योगासन

  1. कपालभात‍ि :  अगर मधुमेह रोगी कपालभाति को नियमित रूप से करता है तो उसे काफी लाभ होता है। इसको करने के लिये जमीन पर सीधे बैठ जाएं और नाक से सांस को तेजी से बाहर की ओर छोड़ें। यह करते समय पेट को भी अंदर की ओर संकुचित करें। फिर तुरंत ही नाक से सांस को अंदर खींचे और पेट को बाहर निकालें। इस क्रिया को रोजाना 40 से 400बार करें।
  2. अनुलोम-विलोम प्राणायाम : इसे करने के लिये जमीन पर आराम से बैठ जाएं।दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छेद को बंद कर लें और नाक के बाएं छेदसे 4 तक की गिनती में सांस को भरे और फिर बायीं नाक को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाएं नाक से अंगूठे को हटा दें औरदाएं नाक से सांस को बाहर निकालें। अब दाएं नाक से ही सांस को 4 की गिनती तक भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नाक खोलकर सांस को 8 की गिनती मेंबाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक कर सकते है।

माइग्रेन

माइग्रेन

माइग्रेन की समस्या इन दिनों काफी आम हो चुकी है।इसकी सबसे बड़ी वजह है अनियमित दिनचर्या, खान-पान की गलत आदतें व तनावलेना।माइग्रेन में सिरदर्द की समस्या सबसे ज्यादा होती है। माइग्रेन के शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।इसमें असहनीय दर्द होता है।माइग्रेनका दर्द 2 घंटे से लेकर कई दिनों तक बना रहता है।माइग्रेन के कारण दिमाग का खून का संचार तेजी से होने लगता है। जो कि सिरदर्द का कारण बनता है।सिर के दाएं तो कभी बाएं हिस्से में अचानक उठने वाला दर्द को माइग्रेन कहा जाता है।पुरुषों की बजाए महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है।महिलाओं में दर्द की तीव्रता भी अधिक होती है। माइग्रेन का उपचार दर्द की तीव्रता पर भी निर्भर करता है।

आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है।  इसमें दर्द 2 से 72 घंटेतक हो सकता है। लोग समझते हैं कि माइग्रेन सिर्फ सिर के आधे हिस्से में तहोता है, लेकिन ऐसा नहीं है।माइग्रेन आधे, पूरे या सिर के किसी भी भाग में हो सकता है।आइये जानते है माइग्रेन होने पर क्या क्या लक्षण नज़र आते है|

माइग्रेन
माइग्रेन

माइग्रेन के प्रकार

माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं

  1. कॉमन माइग्रेन-कॉमन माइग्रेन में सिर के एक हिस्से में हल्का या बहुत तेज दर्द शुरू होकर पूरे सिर में फैल जाता है। यह दर्द 4 से 72 घंटे तक रह सकता है।
  2. औरा माइग्रेन- इसमे दर्द कॉमन माइग्रेन की तरह ही होता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति को चेतावनी के लक्षण पहले से दिखने लगते हैं। ऑरा यानी चमक कौंधना , काले धब्बे दिखना, चीजें घूमती हुई नजर आना, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट, बोलने के समय कठिनाई महसूस करना जैसा प्रतीत होगा। 

माइग्रेन होने के लक्षण

  • माइग्रेन एक प्रकार का दीर्घकालिक सिरदर्द है, जिसमें कई घंटों या कई दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। इस दौरान सिरदर्द , जी मिचलाने, उल्टी, कानों काबजना, सुनने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • माइग्रेन एक प्रकार का दीर्घकालिक सिरदर्द है, जिसमें कई घंटों या कई दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। इस दौरान सिरदर्द , जी मिचलाने, उल्टी, कानों का बजना, सुनने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • नींद अच्छे से न आना।
  • माइग्रेन होने से पहले खाने का अधिक मन होना।
  • बार-बार पेशाब आना।
  • माइग्रेन होने पर जी मचलने लगता है, शरीर असहज महसूस करने लगता है।
  • सिर में भारी पन होने लगता है ।
  • सिर के पीछे की भाग जो गर्दन से सटा होता है उसमे दर्द महसूस करना।
  • तेज रोशनी से आंख में जोर पड़ना ।
  • ज्यादा आवाज या शोर होने पर चिड़चिड़ापन महसूस करना।
  • हर वक्त तनाव में रहना। 
  • माइग्रेन के कारण आंखों में भी तकलीफ रहती है।

माइग्रेन होने के कारण

  1. तनाव-ध्यान करने से तनाव कम होता है हमें प्रतिदिन 20 से 40 मिनट तक ध्यान करना चाहिए|
  2. मन और शरीर की थकावट-ध्यान करने से मन और शरीर की थकावट भी दूर होती है यह आपको पूरी तरह विश्राम देता है|
  3. नींद का पूरा नहीं होना-प्रतिदिन ध्यान करने से आपकी नींद की गुणवत्ता बढ़ती है लंबे समय तक काम करना और अत्यधिक काम करने की आदत आदि सभी बहाने है रात को देर से सोने के|
  4. फोन पर ज्यादा देर बात करना-यह भी सिर दर्द का मुख्य कारण है जब भी आपको चक्कर आने लगे तो थोड़ी देर ध्यान कर लेना चाहिए इससे आपका तनाव दूर होगा|
  5. जरूरत से ज्यादा सोचना-टेंशन होना भी सिर दर्द का मुख्य कारण है हमें जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कर देना चाहिए|

माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए उपचार

  1. प्रोटीन युक्त आहार-माइग्रेन से बचने के लिए प्रोटीन युक्त आहार ले इसके अलावा हरी सब्जियों को रोजाना सेवन करें|
  2. अच्छी नींद-कम से कम 8 घंटे सोना जरूरी है|
  3. योग करना-माइग्रेन होने पर योग पर ध्यान दें इससे तनाव कम होगा|प्रोटीन युक्त युक्त आहार जैसे-दूध,दही,पनीर,दाल इत्यादि का सेवन करें|
  4. शांति बनाए रखना-दिमाग को शांत बनाए रखना बेहद जरूरी है इससे आपके मस्तिष्क को आराम मिलता है और दर्द भी भी छुटकारा मिलता है|
  5. तुलसी का रस-तुलसी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर खाने के पहले या खाने का बाद सेवन करने से माइग्रेन में काफी लाभ होगा।

माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय

  • रोज 10 से 12 बादाम खाएं। यह माइग्रेन का बढिया उपचार है।
  • रोज सुबह-शाम एक गिलास अंगूर का रस पीयें। यह काफी कारगार उपाय है।
  • बंदगोभी को पीसकर इस पेस्ट को एक सूती कपडे में ठीक ढंग से बिछाकर माथे में बांधें। और जब पेस्ट सूखने लगे तो नया पेस्ट बनाकर पट्टी बांधें। इससे आपको सर दर्द से काफी फायदा मिलेगा।
  • माथे में नींबू के छिलके का पेस्ट बना कर बांधें काफी आराम मिलेगा।
  • गाय का शुद्ध ताजा घी सुबह-शाम दो-चार बूंद नाक में रुई से टपकाने से माइग्रेन से काफी राहत मिलेगी।
  • गाजर का रस और पालक के रस को मिलाकर पीए। इससे आपको फायदा मिलेगा।

मासिक धर्म

मासिक धर्म

मासिक धर्म मे स्त्रियों में योनि मार्ग से रक्त स्त्राव होने लगता है|स्त्रियां जब योन अवस्था में प्रवेश करने लगती है तब पहली बार मासिक धर्म शुरू होता है यह स्त्राव योनि मार्ग से महीने में एक बार एक निश्चित अवधि में होता है जो प्राय 3 से 4 दिन तक रहता है कई स्त्रियों में यह 6 या 7 दिन तक भी रहता है|

मासिक धर्म
मासिक धर्म

मासिक धर्म का समय

किसी स्त्री को प्रथम मासिक धर्म के बाद दूसरा मासिक धर्म 24 दिन तो किसी को 28 दिन में होता है| उस स्थिति को ऋतु चक्र के अनुसार नियत समय पर होना जरूरी है इस क्रिया से स्त्रियों का गर्भाशय एवं प्रजनन संस्थान शुद्ध स्वच्छ और स्वस्थ होकर गर्भाधान के लिए उपयुक्त क्षेत्र बने रहते हैं और स्त्रियों का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है|

जब गर्भाशय या प्रजनन संस्थान किसी कारण से रोग से ग्रस्त हो जाते हैं तो ऋतु चक्र बिगड़ जाता है और उन्हें अनेक प्रकार की मानसिक और शारीरिक तौर पर कष्ट पहुंचने लगता है जैसे-मासिक धर्म का अनियमित आना, मासिक धर्म का कष्ट से आना|

  1. अनियमित मासिक धर्म
  2. मासिक धर्म का कष्ट से आना
  1. अनियमित मासिक धर्म-स्त्रियों को मासिक धर्म 28 दिन के बाद हुआ करता है लेकिन कई औरतों में 24 दिन के बाद हो जाता है और कईयों को 32 दिन के बाद हो जाता है अगर मासिक धर्म 28 या 32 दिन के बाद आए तो वह नियम अनुसार नहीं है|मासिक धर्म को समय पर लाने के लिए डोडा कपास का गुड्डा , 28 ग्राम गुदा अमलताश , 30 ग्राम सौंफ , तुखम , गाजर , सोया , गुलाब , फशा , 1010 ग्राम पुराना गुड , 30 ग्राम से 240 ग्राम पानी में आंच पर पकाएं जब पानी एक पाव रह जाए तो छानकर पिलाएं माहवारी खुलकर आएगी गर्भवती स्त्री को ने पिलाएं वरना गर्भ गिर जाएगा|
  2. मासिक धर्म का कष्ट से आना-इस रोग में औरतों के मासिक धर्म के आरंभ होने से 1 दिन या 1 सप्ताह पहले ही पेट में दर्द शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे सिर दर्द , सिर चकराना और बेचैनी बढ़ जाती है|इस रोग में जंगली अखरोट की मिंगी आवश्यकता के अनुसार लेकर बारीक पीस लें और उसमें पुराना गुड़ मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना ले गुड अधिक पुराना नहीं हो यदि पीड़ा अधिक हो तो दो गोली नहीं तो एक गोली गर्म दूध के साथ खिलाएं|

मासिक धर्म के लक्षण यानी पूर्व चिन्ह

  1. जब स्त्री को मासिक स्त्राव होने लगता है तो उसके पेट में भारीपन , कमर में दर्द , बेचैनी और थकावट और सोच की बार बार इच्छा होती है इनमें से कुछ भी लक्षण दिखाई दे तो यह समझ जाना चाहिए कि मासिक धर्म होने को है|
  2. शुद्ध राज यानि खुन जब कपड़े पर लगा हुआ दाग धोने से छूट जाए और मासिक स्त्राव आने पर दर्द का अनुभव न हो और खून का रंग लाख के समान हो और दुर्गंध से रहित हो तो वह राज शुद्ध कहलाता है|
  3. जब मासिक स्त्राव में खून का रंग काला , पीला आदि अनेक रंगो का हो और कम या अधिक मात्रा में जल्दी या देर से हो या रुक रुक कर आए और रक्त स्त्राव के समय जलन व खुजली का अनुभव हो तो समझ जाना चाहिए कि वह अशुद्ध रक्त है|

मासिक धर्म में दर्द

  1. कम नींद लेना भी पीरियड में दर्द का मुख्य कारण बन सकता है अगर कम हो रही है तो आपका शरीर सिस्टम बिगड़ सकता है|
  2. एल्कोहल यानी शराब ने सिर्फ आपके शरीर में पानी की कमी कर देता है बल्कि इसका सेवन करने से मैग्नीशियम का सत्र भी कम हो जाता है मैग्नीशियम की कमी से मासिक धर्म में दर्द का सादा अनुभव होता है|
  3. कैफ़ीन ड्रिंक्स, कैफिन ड्रिंक्स मतलब कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए|कॉफी का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्म में दर्द का अनुभव ज्यादा होता है|
  4. धूम्रपान करना भी मासिक धर्म के दिनों में दर्द होने का मुख्य कारण है|

मासिक धर्म न होने के कारण

  1. प्रकृति के नियम के अनुसार 40 से 50 वर्ष की आयु में हमेशा के लिए मासिक धर्म का होना बंद हो जाता है और शरीर में खून का दौरा भी कम हो जाता है|गर्भाश्य से न होने के कारण भग का मुंह बंद होने से भग का मुंह अत्यंत कम होने से और योनि छिद्र् न होने से मासिक धर्म नहीं होता परन्तु इनमें से योनि छिद्र काटकर रक्त स्त्राव जारी किया जा सकता है|
  2. खून में कमी होने से, स्त्रियों में सोम रोग हो जाने पर या छोटी या उम्र में विवाह करने से और मासिक धर्म के दिनों में स्नान करने से या अन्य रोग के कारण क्षण हो जाने पर मासिक धर्म नहीं होता|
  3. भोजन ठीक प्रकार से हजम ना होने से शारीरिक कमजोरी होने के कारण या दिन में सोने और रात को जागने के कारण और गर्म वस्तुओं के सेवन करने से मासिक धर्म में रुकावट आ जाती है|गर्भवती हो जाने के बाद भी मासिक धर्म नहीं होता और बच्चे को दूध पिलाते रहने की अवस्था में भी मासिक धर्म नहीं होता|

मासिक धर्म लाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. जिन स्त्रियों को शरीर की कमजोरी और रक्त की कमी के कारण मासिक धर्म नहीं होता उन्हें खून बढ़ाने में कमजोरी को दूर करने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए|
  2. यदि किसी रोग के कारण मासिक धर्म रुका हो तो उस रोग की चिकित्सा करने के बाद ही मासिक जारी करने के उपाय करने चाहिए|
  3. एक तोला काले तिलों को आधा सेर पानी के साथ कलईदार बर्तन में पकाएं छटा हिस्सा 6 शेष रह जाने पर एक तोला पुराना गुड़ मिलाकर मासिक धर्म होने से 5 दिन पहले सुबह पीना चाहिए मासिक धर्म आना शुरू हो जाएगा|
  4. श्वेत वलाल चंदन का काढा बनाकर पीने से दुर्गंध वाला मासिक भी ठीक हो जाता है|
  5. गाजर का हलवा का सेवन करने से मासिक धर्म समय पर आ जाता है|
  6. काली जीरी , सौठ् ,एलुआ , अंडी की मिंगी प्रत्येक दिन 3 मासी लेकर पीस लें  और गर्म करके योनि में चार-पांच दिन लगाएं इसे तुरंत ही लाभ होगा|
  7. 1 सप्ताह तक कलौंजी , मजीठ , मूर इनको पीसकर सेवन करें और ऊपर से गुनगुना दूध पिए मासिक धर्म होने में लाभ मिलेगा|
  8. अजवाइन, पुदीना ,इलायची और सौंफ इन चारों को अर्क समान मात्रा में लेकर एक छटांक की मात्रा से मासिक के समय पीने से मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाएगी|
  9. कमर तक गुनगुने पानी में बैठे और पेट पर सेक करने के बाद तारपीन के तेल की मालिश करें इससे मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाएगी|

अति आर्तव की चिकित्सा

  1. नागकेसर , कमल केसर, पीपल की लाख दो दो माशी और मिश्री 6 माह से सब को मिलाकर फाकने से अति आतंक की समस्या दूर हो जाती है पीली मिट्टी की पट्टी पेट पर रखने से रक्त स्त्राव बंद हो जाता है|
  2. अशोकारिष्ट पीने से लाभ होता है|
  3. मासिक धर्म में अधिक रक्त आने के समय स्त्रियों का सिराना नीचा रखना चाहिए और चारपाई के पाइ का भाग ऊंचा रखना चाहिए|
  4. अफीम एक माशा कपूर 6 रत्ती दोनों जलसे खरल करके मूंग के बराबर गोली बना ले और  गर्म पानी के साथ ले|

ट्यूबरकुलोसिस

ट्यूबरकुलोसिस

ट्यूबरकुलोसिस (क्षय रोग, तपेदिक या टीबी )यह रोग महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक होता है|ट्यूबरकुलोसिस हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से होता है| तंबाकू ,बीड़ी ,सिगरेट, शराब ,धूम्रपान का सेवन करने से पुरुषों को टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है| ट्यूबरकुलोसिस एक खतरनाक बीमारी है अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह मृत्यु का कारण भी बन सकती है|

ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। यह अनुवांशिक स्थिति हो सकती है यानी हर के किसी भी व्यक्ति को यह रोग होने पर दूसरे व्यक्ति को यही रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है|

टीबी
टीबी

ट्यूबरकुलोसिस के लक्षण

  1. सांस लेने में कठिनाई-टीबी होने पर व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है इसे व्यक्ति की सांसे फूलने लगती है और शरीर की हड्डियों मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम में समस्याएं उत्पन्न हो जाती है|
  2. भूख न लगना-यह रोग होने पर व्यक्ति को भूख कम लगती है व्यक्ति खाने पीने में रुचि नहीं रखता|
  3. वजन घटना– क्षय रोग होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से घटने लगता है|
  4. बुखार- बुखार टीबी का मुख्य टीवी के रोगी को हमेशा बुखार रहता है लक्षण है अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह व्यक्ति की जान भी ले सकता है|
  5. थकावट– क्षय रोग होने पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और व्यक्ति को थकान का अनुभव होता है|
  6. खांसीट्यूबरकुलोसिस रोग होने पर व्यक्ति को लगातार खांसी आती है कई बार खांसी के साथ खून भी आने लगता है|

ट्यूबरकुलोसिस होने के कारण

  • प्रतिरोधक क्षमता कम होने से– शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने से होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • अनुवांशिकता-यह अनुवांशिक स्थिति हो सकती है यानी हर के किसी भी व्यक्ति को यह रोग होने पर दूसरे व्यक्ति को यही रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है|
  • नशीली दवाओं से-नशीली दवाओं का सेवन करने से यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • रोगी के संपर्क से- किसी भी से रोगी के संपर्क में आने से यह रोग फैलता है |
  • खान-पान और रहन-सहन से: जिन व्यक्तियों के खानपान और अनशन का तरीका सही नहीं होता उन्हें यह रोग होने की संभावना ज्यादा होती है|
  • बैक्टीरिया द्वाराट्यूबरकुलोसिस माइकोबैक्टेरियम बैक्टीरिया के कारण होता है यह  बैक्टीरिया जोड़ों , मेरुदंड , हड्डियों आदि पर प्रभाव डालता है
  • कुपोषण द्वारा– वजन कम होने से टीवी के बैक्टीरिया शरीर पर बुरे प्रभाव डालते हैं|
  • धूम्रपान करना बीड़ी सिगरेट शराब तंबाकू का सेवन करने से ट्यूबरकुलोसिस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

ट्यूबरकुलोसिस को खत्म करने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. लहसुन– इस में सल्फ्यूरिक एसिड पाया जाता है यह टीबी के कीटाणुओं को नष्ट करने में हमारी सहायता करता है| एक चम्मच मैसूर एक कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालें जब यह पेस्ट एक चौथाई रह जाए तो इसका दिन में तीन बार सेवन करने से टीवी के रोग से राहत मिलती है|
  2. आंवला– कच्चे आंवले को पीसकर और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करने से टीबी के रोग से राहत मिलती है
  3. काली मिर्च– काली मिर्च का सेवन करने से फेफड़ों में हुई खांसी दूर हो जाती है थोड़े से मक्खन में 4 से 5 काली मिर्च फ्राई करें और उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर इस का मिश्रण बना लें इस मिश्रण का प्रतिदिन सेवन करें|
  4. अखरोट– अखरोट का सेवन करने से हमें इस रोग से आराम मिलता है अखरोट को पीसकर पाउडर बना लें इसमें कुछ लहसुन की कलिओ का पेस्ट और मक्खन मिलाकर खाए|
  5. केला-1 पके हुए केले को मसलकर नारियल पानी में मिलाकर इस्मे शहद और दही मिलाएं। इसे दिन में दोसे तीन बार खाने से रोगी को फायदा होता है। इसके अलावा कच्चे केले का जूस बनाकर भी रोजाना पीना भी लाभ्दाय्क है|
  6. संतरा-इसके लिए ताजा संतरे के जूस में नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करेया संतरा खाने से भी टीबी के रोगी को फायदा होता है।
अखरोट
अखरोट

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या ‘पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर’ यानि P COD/P COS ” इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण उत्पन्न होती हैं। साथ ही यह जैनेटिकली भी होती है। शरीर में अधिक चर्बी होने की वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है,जिससे ओवरी में सिस्ट बनता है। वर्तमान में देखें तो हर दस में से एक प्रसव उम्र की महिला इसका शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जो महिलाएं तनाव भरा जीवन व्यतीत करती हैं उनमें पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है।

शरीर में कुछ असामान्यता जैसे -जलन ,सूजन  महसूस हो, तो यह हार्मोन के असंतुलन के कारण भी हो सकता है। अलग-अलग मानसिक परिस्थि‍तियों से गुजरने पर शरीर के आंतरिक अंगों में संबंधि‍त हार्मोन का सक्रिय होना सामान्य बात है। साथ ही महिलाओं में प्रेग्नेंसी, मासिक धर्मऔर मेनोपॉज के समय भी हार्मोन का स्त्राव और बदलाव होता है। लेकिन कभी-कभी  स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण

  1. महिलाओं में मासिक धर्म की समयावधि‍ में परिवर्तन हार्मोन्स के कारण होता है। सामान्यत: 24 से 28 दिन के अंदर शुरू होने वाला मासिक धर्मसमय पर नहीं हो रहा हो, तो यह एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन्स की अधि‍कता या कमी के कारण हो सकता है। यह पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के मुख्य लक्षण है
  2. पर्याप्त नींद नहीं ले पाना भी हार्मोन असंतुलन का लक्षण है ओवरी से स्त्रावित होने वाला हार्मोन प्रोजेस्टेरॉन आपको नींद लेने के लिए प्रेरित करता है। 
  3. महिलाओं में मासिक धर्म के समय चेहरे पर मुहांसों की समस्या होना सामान्य है अगर मुंहासे या पिंपल्स हटने का नाम ले ले तो यह हार्मोन में असंतुलन हो सकता है
  4. हार्मोन असंतुलन के कारण थकान का अनुभव भी हो सकता है
  5. एस्ट्रोजन की सतह में कमी आने के कारण व्यक्ति अपने स्वभाव में चिड़चिड़ापन महसूस करता है साथ ही आपका वजन तेजी से बढ़ सकता है यह हार्मोन असंतुलन का मुख्य लक्षण है
  6. स्ट्रेस के कारण जो हार्मोंस में बदलाव होता है, उससे कई समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें से पाचन से जुड़ी समस्या भी एक है. गैस, बदहज़मी या कब्ज़ की समस्या हार्मोंस में बदलाव का संकेत भी हो सकती है. 
  7. अचानक रात को तेज़ गर्मी व पसीना आने का मतलब है हार्मोंस में परिवर्तन हो रहा है. यह ख़ासतौर से मेनोपॉज़ के समय होता है, जब हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं|

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण

  • अनुवांशिकता– हारमोंस में असंतुलन इस बीमारी का मुख्य कारण है लेकिन अगर  आपकी मां को यह समस्या रही है तो संभावना है कि आप इस रोग की चपेट में आ सकते हैं|
  • पुरुष हार्मोन -पीसीओएस की स्थिति में पुरुष हार्मोन का अत्यधिक मात्रा में उत्पादन होता है, जिस कारण ओव्यूलेशन प्रक्रिया के दौरान अंडाणु बाहर नहीं निकल पाते हैं। इस स्थिति को हाइपरएंड्रोजनिसम कहा जाता है |
  • इंसुलिन– इंसुलिन इस बीमारी का मुख्य कारण है शरीर में मौजूद इंसुलिन हार्मोन, शुगर, स्टार्च व भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करता है। जब इंसुलिन असंतुलित हो जाता है, तो एंड्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है और ओव्यूलेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप महिलाओं को पीसीओएस का सामना करना पड़ता है |

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिएआयुर्वेदिकनुस्खे

  1. अदरक , लहसुन , काली मिर्च , जीरा , कड़ी पत्ता आदि में हार्मोन को संतुलित रखने के गुण होते हैं इन सभी को प्रतिदिन डाइट में शामिल करना चाहिए|
  2. हल्दी हारमोंस को संतुलित रखने में मददगार साबित हुई है|
  3. दही शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखता है और हारमोंस को भी संतुलित रखता है इम्यूनिटी सिस्टम को भी बढ़ाता है|
  4. पानी को अत्यधिक मात्रा में पीना चाहिए क्योंकि हाइड्रेशन के कारण हार्मोन का निर्माण अत्यधिक होने लगता है|
  5. बादाम में प्रोटीन फाइबर और कई तरह के पोषक तत्व होते हैं बादाम का सेवन करना चाहिए|
  6. अखरोट में मेलाटोनिन होता है यह एक तरह का हार्मोन होता है जो पर्याप्त मात्रा में नींद में सहायक होता है|
  7. ग्रीन टी हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करके फैट्स भी बर्न करती है|
  8. फूल गोभी और पत्ता गोभी सब्जियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा होती है जो टॉक्सिन को कंट्रोल करके हारमोंस में संतुलन बनाए रखते हैं|
हल्दी
हल्दी

उदर रोग

उदर रोग

 उदर रोग का तात्पर्य संबंधित रोगों की है यह रोग कब्जियत यानी मंदाग्नि से पैदा होता है इसके अनेक रूप होते है अफारा , कमजोरी अग्नि का मंदा पन सूजन अंगों में गिलानी ,मल का रुकना  , जलन होना|

उदर रोग के लक्षण

बच्चों और वयस्कों में उदर रोग के लक्षण अलग-अलग होते हैं वयस्कों के लिए सबसे आम संकेत है जैसे-

  • इस रोग में व्यक्ति को थकान का अनुभव होता है|
  • इस रोग में व्यक्ति का वजन घट जाता है|
  • इस रोग में व्यक्ति के पेट में गैस यानी कब्ज और व्यक्ति को उल्टी का भी अनुभव हो सकता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को दस्त लग जाते हैं|
  • इस रोग में व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को पेशाब और सीने में जलन का एहसास होता है |

उदर रोग के कारण

  1.   मूत्राघात-: अत्यंत तीव्रता से गमन धूप में चलना , मल मूत्र के वेग को रोकना , अधिक शर्म दूषित योनि वाली स्त्रियों के सहवास खट्टी वस्तुओं का सेवन और चोट लगने से स्त्री पुरुषों की मूत्र इंद्री में जख्म और वीर्य क्षीण होने लगता है इसी को मूत्रघात कहते हैं|

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • शराब में काला नमक मिलाकर पीने से मूत्रघातरोग आराम हो जाता है
  • गोखरू , अरंडी , कीचड़ और शतावर को दूध में औटा कर पीने से आराम हो जाते हैं |
  • गुड , घी और दूध इनको मिलाकर पीने से  पेशाब के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं|
  • सफेद चंदन को चावलों के जल में घिसकर और मिश्री मिलाकर पीने और औटाये  हुए दूध को शीतल करके उसके साथ भोजन करने से खून समेत उषण वात रोग नष्ट हो जाता है|
  • लोहे की भसम महीन पीसकर और शहद में मिलाकर 3 दिन खाने से इस रोग में आराम मिलता है|
  • मिश्री पीसकर दही के तोड़ के साथ खाने से सब तरह के मूत्र कृचछरोग आराम हो जाते हैं|
  • आमलोके छह मासे चूर्ण में गुड मिलाकर खाने से सब तरह के रोग नष्ट हो जाते हैं|

2.प्लीहा रोग-प्लीहा  पीलली को कहते हैं रुधिर एवं कफ के दूषित हो जाने से मलेरिया आदि जबर से अत्यधिक कुनैन सेवन से या जबर में खाने से इसकी वृद्धि होती है |

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • यदि तिल्ली में दर्द अत्यधिक हो तो दर्द का नाश करने का उपाय करना चाहिए जैसे गर्म जल से सेक करे|
  • प्लीहा चिकित्सा में रोगी का पेट साफ करना आवश्यक होता है इसका पहले उपाय करना चाहिए नई तिल्लीवाले को दस्तावर दवा दे सकते हैं पर पुरानीतिल्लीमें द्स्तावरदवा या जुलाब देना हानिकारक होता है|
  • मूली के बीज पीसकर सिरके में मिलाकर खाने से तिल्ली गल जाती है|
  • लड़के का तीन चुल्लू पेशाब सवेरे नित्य कुछ दिन तक पीने से रोग नष्ट हो जाता है|
  • झाऊ की पत्तियां लाकर सुखा ले और पीस छान ले फिर बराबर की शक्कर मिलाकर रख दे इनमें से 4 माशे दवा नित्य खाने से तिल्ली आराम हो जाती है|
  • ऊंटनी का दूध और पेशाब पीने से तिल्ली आराम हो जाती है|
  • नमदें का टुकड़ा सिरके में भिगोकर तिल्ली पर बांधने से तिल्ली रोग आराम हो जाता है
  • अजवाइन खाने से भी तिल्ली रोग नष्ट हो जाता है|
  • काली मिर्च .टी पीपर भुनी फिटकरी ,गुना सहागा ,अजवाइन, कटाई खारी नॉन, लाहोरी नून ,आमा हल्दी और जवाखार बराबर बराबर लेकर  पीस छानकर पानी के साथ खरल करें और जंगली बेर के समान गोलियां बनाकर खाने से लाभ होता है|

3.यकृत रोग-प्लीहा और यकृत एक ही कारण से बढ़ते हैं इसके अतिरिक्त अधिक शराब पीने और बवासीर आदि के रोगों का खून बहना आदि के बंद हो जाने से भी यकृत बढ़ता है अंग्रेजी में इसे लीवर कहते हैं जब यह बढ़ता है तो अनेक रोगों को साथ लेकर आता है बच्चों में यह रोग अधिक होता है|

यकृत
यकृत

यकृत चिकित्सा आयुर्वेदिक नुस्खे

  • यकृत के बढ़ जाने से उसमें पीड़ा मालूम हो तो उस पर बारंबार अलसी की  पुलिटस बांधने से लाभ होता है
  • अगर यकृत की खराबी से पित्त बहुत ही बढ़ गया हो नेत्र मुख मल मूत्र पीले पड़ गए हो तो आमले गिलोय और हर्ट के दो तोले काडे में दो रत्ती मंडूर भस्म डालकर पीने अथवा कासनी और मकोय के दो तोले सवरस में जरा सा शहद मिलाकर पीने से लाभ मिलता है|
  • चार रती घीक्वार के रस में दो रत्ती हल्दी का चूर्ण और दो रत्ती से धानमक का चूर्ण मिलाकर सवेरे शाम खाने से यकृत का बढ़ना बंद हो जाता है|
  • यकृत और प्लीहा की सूजन पर मकोय और पुनर्नवा का सबरस गरम लेप करने या तारपीन के तेल में कपड़ा भिगोकर सूजन पर रखने से यकृत और तिल्ली की सूजन नष्ट हो जाती है|
  • करेले के फल या पत्तों के रस में जरा सा शहद मिलाकर पीने से यकृत और प्लीहा की  विकृति नष्ट हो जाती है|

4.उदा व्रत रोग यानी गैस्टिक-शरीर के 13 वेगो को रोकने से एवं काम क्रोध मद लोभ ईर्ष्या द्वेष आदि मानसिक वेगो के आवेश से यह रोग उत्पन्न होता है इसमें उधर के नीचे की ओर चलने वाली अधो वायु चक्कर खाकर ऊपर की ओर बढ़ती है और अपने साथ मल मूत्र या उसकी प्रदूषित हवा वायु भी ऊपर ले जाती है|

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • मन रोकने से पैदा हुए उदा व्रत में यह क्रियाएं हितकारी है दस्ता वर अन्न देना दस्तावर दवा देना तेल दवा देना तेल की मालिश करवाना सेक के पसीने दिलाना एवं गुदा में पिचकारी लगाना|
  • डकार रोकने की उदा व्रत में चिकनाई मिले हुए पदार्थों का धुआं पीना चाहिए तथा शराब में काला नमक और बिजोरा का रस मिलाकर पीना चाहिए|
  • भूख रोकने के उदावत रोग में चिकनी गरम रुचि कारी और मनचाहे पदार्थ थोड़े-थोड़े खानी चाहिए|
  • थकान में सांस रोकने से हुए उदा व्रत में मांस रस के साथ भोजन करना और आराम करना चाहिए|
  • जवा से का काढ़ा बनाकर पीने से उदावत नष्ट हो जाता है|
  • अर्जुन वृक्ष की छाल का काढ़ा पीने से उदा व्रत नष्ट हो जाता है|
  • कटोरी का सवरस पीने से उदावर्त रोग नष्ट हो जाता है|
  • मिश्री  ,दूध, दाख, मुलेठी का रस पीने से यह रोग नष्ट हो जाता है बच का चूर्ण खा कर ऊपर से जल मिला दूध पीने से यह रोग नष्ट हो जाता |

उदर रोग को रोकने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. अदरक , देवदारु और चीते का काढ़ा पीने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  2. जवाखार , सब्जी , चीता , त्रिकुटा ,नीली और पांचों नमक इनको पीसकर और घी में मिलाकर खाने से सब तरह के उदर रोग दूर होते हैं|
  3. पीपलो को थूहर के दूध में भावना देकर उनमें से अपनी शक्ति अनुसार एक से आरंभ करके हजार तक खाने से सभी तरह के उदर रोग दूर हो जाते हैं|
  4. दुर्गंध, करंज के बीज, मूली के बीज, गरहेडूब,की जड़ और शंख भस्म को मिलाकर कांची के साथ पीने से उदर रोग आराम हो जाता है|
  5. इंद्रायण, शंखपुष्पी ,दंती, नीली वृक्ष, त्रिफला, हल्दी ,बायविंडग और कबीला इनका चूर्ण गोमूत्र के साथ पीने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  6. अरंडी का तेल गर्म दूध या जल अथवा गोमूत्र में मिलाकर पीने से सभी तरह के उदर रोग दूर हो जाते हैं|
  7. मालकांगनी का तेल पीने से सभी तरह के उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  8. कनकुष्ठ का चूर्ण गर्म जल के साथ सेवन करने से आठ  तरह के रोग नष्ट रोग नष्ट हो जाते हैं|
  9. पुराने मरकंद को पीसकर उसने दुगनी चावल मिलाकर जल और दूध  मैं खीर बनाकर उस चीज को खाने से वातओ दर सूजन संग्रहणी और पांडु रोग नष्ट हो जातेहै|
  10. 7 दिन तक अन्न जल छोड़कर केवल भैंस का मूत्र दूध मिलाकर पीने से यह रोग नष्ट हो जाता है|
  11. एक चम्मच पुदीने का रस एक कप पानी में मिलाकर पी इससे भी आपको उधर की पीड़ा में काफी राहत महसूस होगी और इसके सेवन से तुरंत आराम मिलता है|
  12. गुनगुने पानी के साथ अजवाइन लेने से भी उधर की पीड़ा से काफी आराम मिलता है इसमें अगर बराबर मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाए तो यह ज्यादा असरदार होता है|

फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में रसौली| यूटरस के अंदर बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉएड  कहते हैं। यह अंगूर के आकार के या खरबूजे के आकार के भी हो सकते हैं ज्यादातर में कैंसर होने का खतरा नहीं होता। 0.2 प्रतिशत मामलों में ही कैंसर होने की सम्भाव्ना होती है|बच्चेदानी या गर्भाशय फाइब्रॉएड वो असामान्य ग्रोथ होती हैं जो किसी महिला के गर्भाशय में विकसित होती है। कभी-कभी ये ट्यूमर काफी बड़े हो जाते हैं और गंभीर पेट का दर्द और हैवी पीरियड फ्लो का कारण बनते हैं। फाइब्रॉएड छोटे हो या फिर यूटरस के बाहर हो तो उसमें किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आएंगे। जो फाइब्रॉएड यूटरस के अंदर कैविटी में आ रहे होते हैं उनकी वजह से हेवी ब्लीडिंग होती है। इन्हें सबम्यूकस फाइब्रॉएड कहते हैं।  ऐसे बड़े फाइब्रॉएड जो यूटरस के साइज और उसकी कैविटी को बड़ा कर देते हैं हेवी ब्लीडिंग का कारण बनते हैं।

फाइब्रॉएड
फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड के प्रकार

गर्भाशय में रसौली के 5प्रकार होते हैं-

  1. इंट्रा मरल फाइब्रॉएड-यह गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार के भीतर दिखाई देता है यह काफी बड़ा हो सकता है और गर्भ में फैल सकता है
  2. सब्सक्राइबर फाइब्रॉएड -यह गर्भाशय के बाहर स्थित होता है जिससे सेरोसा कहते हैं बीच में मांसपेशी परत में विकसित होते हैं यह अन्य फेवरेट की तरह आम नहीं है|
  3. सब मयू कौसल फाइब्रॉएड -सब मयू कौशल फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में रसौली| यूटरस के अंदर बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉएड  कहते हैं। यह अंगूर के आकार के या खरबूजे के आकार के भी हो सकते हैं ज्यादातर में कैंसर होने का खतरा नहीं होता। यह आपके गर्भाशय के बीच में मांसपेशी परत में विकसित होते हैं यह अन्य फेवरेट की तरह आम नहीं है |
  4. पिडनकुलेटेड फाइब्रॉएड-सब्ससिरोज़ल ट्यूमर एक स्टेम विकसित कर सकते हैं, एक पतला आधार जो ट्यूमर का समर्थन करता है।
  5. सर्वाइकल फाइब्रॉएड-यह फाइब्रॉएड गर्भ की गर्दन में विकसित होते हैं, जिसे सर्विक्स नाम से जाना जाता है।

गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षण

  • पेट में दर्द होना|
  • गर्भाशय रक्त स्त्राव फाइब्रॉयड का मुख्य लक्षण है|
  • योनि पर दबाव आने के कारण ज्यादा पेशाब आना|
  • फाइब्रॉयड के कारण ज्यादा ब्लीडिंग होने पर महिलाएं आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से ग्रस्त हो जाती हैं|

गर्भाशय में फाइब्रॉएड के कारण

  1. अनुवांशिकता-अगर आपके परिवार में किसी सदस्य को फाइब्रॉएड है तो आपको भी फाइब्रॉएड होने की संभावना है|
  2. हार्मोन-एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन जो गर्भधारण के लिए प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान गर्भाशय के अस्तर के विकास को प्रोत्साहित करते हैं जिस कारण फाइब्रॉएड अत्यधिक मात्रा में हो जाता हैफाइब्रॉयड हार्मोन उत्पादन में कमी के कारण रजोनिवृत्ति के बाद कम हो जाते हैं|
  3. अन्य वृद्धि कारक– जो पदार्थ कास को प्रभावित करते हैं गर्भाशय फाइब्रॉएड धीरे या तेजी से भी बढ़ सकते हैं कई फाइब्रॉएड जो गर्भावस्था में मौजूद होते हैं या गर्भावस्था के बाद या तो सिकुड़ जाते हैं या खत्म हो जाते हैं क्योंकि गर्भाशय समान ने आकार में वापस आ जाता है
  4. असंतुलित भोजन: अगर आप रेड मीट या फिर जंक फूड ज्यादा खाती हैं और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कम करती हैं, तो आप इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।
  5. आयु:  फाइब्रॉएड प्रजनन काल के दौरान विकसित होते हैं। खासतौर पर 30 की आयु से लेकर 40 की आयु के बीच या फिर रजनोवृत्ति शुरू होने तक इसके होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। माना जाता है कि रजनोवृत्ति शुरू होने के बाद ये कम होने लगते हैं।

गर्भाशय में रसौली को रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

गर्भाशय में रसौली को रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. अदरक-अदरक गर्भाशय फाइब्रॉएड के इलाज के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुई है अदरक गर्भाशय में रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देने में इसका इस्तेमाल किया जाता है रक्त का प्रवाह बढ़ने के कारण गर्भाशय में सूजन कम हो जाती है|
  2. मिल्क थिसल-यह नुस्खा मेटाबॉलिज्म कि मदद कर एस्ट्रोजन से छुटकारा पाने में सहायता करता है एस्ट्रोजन नामक हार्मोन कोशिकाओं को उत्तेजित करता है इसे फाइब्रॉएड में विकास होता है|जड़ी-बूटी से बने मिश्रण की 15 से 20 बूंदे दो-तीन महीनों के लिए ले|
  3. गुग्गुल-यह बहुत ही लाभकारी जड़ी बूटी है फाइब्रॉएड की समस्या होने पर आप इसका सेवन सुबह शाम गुड़ के साथ करें यह नुस्खा आपको आराम दिलाने में सहायक है|
  4. सिंहपर्णी-सिंहपर्णी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी गर्भाशय फाइब्रॉएड के लिए सबसे लाभ्कारीहै। यह लिवर को विषाक्‍त पदार्थों से मुक्‍त कर शरीर से अतिरिक्‍त एस्‍ट्रोजन को साफ करता है। इसे बनाने के लिए 2-3 कप पानी लेकर उसमें सिंहपर्णी की जड़ की तीन चम्‍मच मिलाकर, 15 मिनट के लिए उबालें। फिर इसे हल्‍का ठंडा होने के लिए रख दें। इसे कम से कम 3 महीने के लिए दिन में 3 बार लें। 
अदरक
अदरक

वजन कम होना (Weight loss)

वजन कम होना (Weight loss)

वजन कम होना महिलाओं के लिए एक आम समस्या हो गई है| किसी का वजन कम होता है तो वह उसे बढ़ाकर फिट होना चाहता है और अगर किसी का वजन ज्यादा होता है तो वह इसे घटाकर फिट होने की कोशिश करता है|आप डाइटिंग नहीं कर रहे, आप वज़न घटाने के लिए वर्कआउट भी नहीं कर रहे तब भी तेज़ी से आपका वज़न घटता जा रहा है।  बिना किसी कोशिश के वजन घटना और थकान बहुत सी बीमारियों के दो आम लक्षण हैं।वजन का तेजी से घटना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।अचानक वजन घटने से आपकी जीवन प्रक्रिया में परिवर्तन आ सकता है पर्याप्त नींद न होना भूख कम लगना समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है|

वजन कम होने के कारण (Weight loss reasons)

  1. डायबिटीज –डायबिटीज एक मेटाबॉलिक समस्या है|व्यक्ति के शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता हैऔर रोगियों में इंसुलिन का उत्पादन नहीं होता है|इसके दो कारण हो सकते हैं, या तो ये कि आपके शरीर में इंसुलिन का निर्माण न हो पा रहा हो या फिर आपका शरीर इंसुलिन के लिए प्रतिक्रिया नहीं कर पा रहा हो, या फिर ये दोनों ही कारण हो सकते हैं। वज़न कम होना ,भूख क्म लग्ना इत्यादि इस रोग के मुख्य लक्षणहैं|
  2. थॉयराइड –थॉयराइड होने पर महिलाओं का वजन कम होने लगता है| थायरॉयड ग्लैंड हार्मोन थायरॉयड का निर्माण करते हैं जो कि शरीर का मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करते हैं। इसलिए थायरॉयड के कारण वजन पर प्रभाव हो सकता है। अगर मेटाबोलिज्म बढ़ जाता है तो शरीर का वजन कम होने लगता है उदाहरण के लिए, आपके दिल की धड़कन, जल्दी कैलोरी बर्न करते हैं और पाचन क्रिया। ये शरीर में कैल्शियम के स्तर को भी नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉयड ग्लैंड बहुत अधिक थायरॉयड का निर्माण कर देते हैं तो उस स्थिति को हाइपरथायरॉयडिज़्म कहते हैं।
  3. ट्यूबरक्लॉसिस यानी टीबी-तपेदिक संक्रामक रोग होता है जो माइकोबैक्टिरीअम ट्यूबरक्लॉसिस नामक जीवाणु के कारण होता है।ट्यूबरकुलोसिस के कारण भी तेजी से वजन घटने लगता है टीवी होने का सबसे पहला लक्षण लगातार 2 सप्ताह तक खांसी आना ,रात में सोते वक्त पसीना होना थकान और सीने में दर्द के मुख्य लक्षण है|
  4.  कैंसर-कैंसर होने पर महिलाओं का वजन तेजी से घटने लगता है और शरीर कमजोर दिखने लगता है|कैंसर एक खतरनाक बीमारी है और इसका समय पर पता नहीं लगाया जाए तो यह गंभीर रूप धारण कर सकती है|वज़न कम होना , थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में बिना किसी कारण दर्द, रात में पसीने आना, त्वचा में परिवर्तन आदि।
  5. आंत में सूजन-आईबीडी (inflammatory bowel disease) भी कहा जाता है। इसमें आंतों में सूजन आ जाती है जिससे पेट में दर्द होता है और कुपोषण की समस्या भी हो जाती है।पेट में दर्द और ऐंठन, कम भूथ लगना, वज़न घटनाआदि मुख्य लक्षण है|
  6. फेफड़ों की बीमारियां (सीओपीडी)-इस बीमारी के होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से घटने लगता है|व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नली ब्लॉक ईयर में सूजन आ जाती है जिसके कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है|

वजन कम करना चाहते हैं तो सुबह उठकर ये एक्सरसाइज करे(Weight loss exercise)

वजन कम करने के लिए योग एक्सरसाइज, डाइटिंग करने पड़ते हैं| वजन कम करने के लिए सबसे अच्छा तरीका सुबह उठकर एक्सरसाइज करना होता है। सुबह के समय शरीर में ऊर्जा होने की वजह से आप ज्यादा देर तक एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। कुछ एक्सरसाइज को रोजाना सुबह करके जल्द से जल्द वजन कम किया जा सकता है। आइए उन एक्सरसाइजस के बारे में जानते हैं जिससे हम जल्दी से अपना वजन कम कर सकते हैं|

  1. स्ट्रेचिंग:अपनी जीवनशैली में अगर आप स्ट्रेचिंग कर लेते हैं तो यह आपकी मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के साथ जोड़ों में दर्द को दूर करते हैं। स्ट्रेचिंग करने से मसल्स टोन होती हैं।
  2. किक बॉक्सिंग:वजन कम करने और आपके शरीर को मजबूत बनाने के लिए किक बॉक्सिंग फायदेमंद होती है। सुबह किक बॉक्सिंग करने से यह फैट को बर्न करता है जिससे आपको एक्सरसाइज करने के लिए ताकत मिलती है।
  3. सूर्य नमस्कार –रोजाना सुबह उठकर सूर्य के सामने बैठकर सूर्य नमस्कार करने से आपका वजन तेजी से कम होने लगता है सूर्य नमस्कार में अलग-अलग प्रकार के आसन होते हैं|
  4. वॉकिंग –शायद आप यह बात नहीं जानते कि सुबह उठकर खाली पेट वह करने से आपको बहुत फायदे हैं अगर आप सुबह उठकर प्रतिदिन 30 से 40 मिनट वॉकिंग करें तो यह आपकी कैलोरी को घटा देता है| सुबह उठकर पार्क में वॉकिंग करने पर आपको शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है साथ ही आपका वजन भी कम होने लगता है|वॉकिंग करने से आपका शरीर स्वस्थ रहता है।
  5. स्क्वाट-तेजी से वजन कम करने के लिए यह बहुत फेमस एक्सरसाइज है इस एक्सरसाइज को करने से आपकी बॉडी का वेट कंट्रोल होता है इसी प्रतिदिन ट्राई करें|
  6. Crunches –इस एक्सरसाइज में आप कमर के बल लेट जाएं और अपने घुटनों को मोर ले अब दोनों हाथों को सर के पीछे ले जाएं और अपने कंधों को ऊपर उठाएं फिर वापस नीचे लाए फिर ऊपर करें यह एक्सरसाइज रेगुलर करेंक्रंचिंग एक्सरसाइज प्रतिदिन करने से आप अपने वजन को घटा सकते हैं क्रंचिंग एक्सरसाइज खाली पेट ही करें खाना खाने के बाद एक्सरसाइज करने फिल्म से आपके पेट की समस्या उत्पन्न हो सकती है|

वजन कम करने के आयुर्वेदिक नुस्खे(Weight loss home remedies)

  1. शहद और नींबू– एक गिलास हल्के गर्म पानी में शहद, नींबू का रस और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं। इस मिश्रण को हर सुबह खाली पेट लें। नींबू और शहद को एक साथ मिलाकर पीने से वजन कम होता है।
  2. ग्रीनटी –ग्रीन टी एक बहुत ही अच्छा एंटीऑक्सीडेंट जिससे आपका वजन तेजी से कम होने लगता है| ग्रीन टी में विशेष प्रकार के पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जिससे शरीर में फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है।
  3. लोकी- सुबह नाश्ते में लौकी का सेवन करने से आपका वजन तेजी से कम होने लगेगा और आपकी त्वचा में भी निखार आएगा 200 ग्राम लौकी के जूस में 25 ग्राम कैलोरी ही होती है जो आपकी फैट को बर्न करने में मदद करती है|
  4. बंद गोभी- बंद गोभी का सेवन करने से आपका वजन कम होने लगता है बंदगोभी में 33 कैलोरी होती है जो हमारे फैट को बर्न करते हैं बंद गोभी से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह वर्षा की मात्रा को कम करता है|
  5. सौंफ-वजन घटाने के लिए सौंफ बहुत फायदेमंद है|सौंफ को रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट इस पानी को छानकर पी ले आपका वजन तेजी से कम होने लगेगा|

यीस्ट संक्रमण

यीस्ट संक्रमण

यीस्ट संक्रमण अधिकतर जननांगों में होने वाला फंगल इनफेक्शन है इसके कारण खुजली जैसे रोग होते हैं पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह रोग अधिक देखने को मिलता है योनि में यीस्ट संक्रमण तब होता है जब कैंडिडा एलबीकैंस जो एक प्रकार का इष्ट है आपके पाचन तंत्र या योनि में पाया जाता है यह फंगल संख्या में तेजी से वृद्धि करता है और योनि के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है|

यीस्ट संक्रमण
यीस्ट संक्रमण

यीस्ट संक्रमण के लक्षण

  • योनी में खुजली या जलन का अनुभव होना
  • योनी में दर्द का अनुभव होना
  • सेक्स के समय दर्द का अनुभव होना
  • योनी पर लाल दानों का होना
  • योनी में सूजन आ जाती है
  • योनी में खुजली के दौरान योनि के आसपास सूजन आ जाना
  • योनी से कभी कभी सफेद पानी का निकलना भी मुख्य लक्षण है

यीस्ट संक्रमण के कारण

  1. गर्भावस्था-गर्भावस्था में योनि यीस्ट संक्रमण का मुख्य कारण एस्ट्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर है|
  2. शुगर- जिन महिलाओं में शुगर की मात्रा ज्यादा है उन महिलाओं को फंगल इंफेक्शन होने का ज्यादा खतरा बना रहता है और महिलाओं के हार्मोन संतुलन में परिवर्तन आता है|
  3. एंटीबायोटिक्स-अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना आपकी योनि में पाए जाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है यह यीस्ट संक्रमण का मुख्य कारण है|
  4. माहवारी- मासिक धर्म के चक्र के दौरान हार्मोन के सतर में परिवर्तन आपकी योनि की त्वचा प्रभावित करता है यह यीस्ट संक्रमण  का मुख्य कारण है|
  5. पर्याप्त नींद न लेना –अधिक तनाव में रहने से और पर्याप्त नींद ना लेने से हमारे शरीर का हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है जिससे फंगल संक्रमण होने की आशंका रहती है जिन महिलाओं को पहले ही फंगल संक्रमण है उन्हें योन संबंध नहीं बनाना चाहिए|

यीस्ट संक्रमण से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. योनि में जलन हो तो आंवले के रस में खांड डालकर पिएं|
  2. कफ से दूषित योनी में पीपल,काली मिर्च, सोया, उड़द ,सेंधा नमक इन को पीसकर तर्जनी उंगली के बराबर मोटी बत्ती बनाकर योनी में रखने से लाभ होता है|
  3. गिलोय, हरड़, बहेड़ा, आंवला और जमालगोटा इनके काढ़े की धार बांधकर धोने से योनी की खुजली दूर हो जाती है|
  4. यदि पित से योनी रोग उत्पन्न हुआ हो तो तेल लगाएं ,फाया रखें और पित्त नाशक उपाय करें|
  5. महावारी के बाद स्नान की हुई स्त्री अश्वगंधा को दूध में पकाकर घी डालकर सुबह शाम पिए तो गर्भ रह जाता है|
  6. बोरिक एसिड का प्रयोग योनी में कर सकते हैं इससे फंगल इन्फेक्शन नहीं होता है|
  7. लहसुन का प्रयोग योनी में होने वाले फंगल संक्रमण को रोकता है|
  8. दही मे लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु होता है जो  बैक्टीरिया की संख्या को बढ़ाता है और होने वाले संक्रमण को रोकता है|
  9. पोषक तत्वों से भरपूर फल व सब्जियां खाएं और खूब पानी पीये|
  10. नारियल के तेल के साथ कपूर डालकर योनी में लगाने से  खुजली की समस्या दूर होती है|

फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए उपाय

  1. कॉटन की पेंटी या सूती लेगिंग्स का प्रयोग करें|
  2. सुगंधित सेनेटरी पैड का प्रयोग करने से बचें इस से आपकी योनि में नमी बढ़ेगी जिससे बैक्टीरिया पनपने लगेंगे|
  3. योनी में क्रीम लगाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धो लें|
  4. मासिक धर्म में गीले कपड़ों को पहनने से बचें|
  5. बात टब में स्नान करने से बचें|
  6. ढीले ढाले पेंट्स या स्कर्ट पहने|

योनी छोटी करने की विधि

  • अधिक संभोग करने या अत्यंत संतान होने से या ऐसे ही कुछ अन्य कारणों से योनि बड़ी हो जाती है ऐसी स्थिति में उसे सिकुड़ने के लिए उपाय करने चाहिए
  • बकरी और गाय दोनों के मट्ठे को मिला कर उससे योनि में छींटे लगाएं और इसी से धोया करें
  • गेंदा को जलाकर उसकी राख योनि में रखकर मले परंतु ध्यान रखें कि उसे कपड़े छान कर ले ताकि कोई कठिन अंश में रह जाए अन्यथा मलने से लाभ किबजाए योनि के छिल जाने से हानि भी हो सकती है
  • बढ़िया भांग पीस कर छान लें फिर कपड़े में इस की पोटली बांधकर योनि में रखें
  • माजूफल, धाय के फूल, फिटकरी इनको पीस कर बेर के समान गोली बनाकर योनि में रखें
  • ढाक की छाल, गूलर के फल इनको समान भाग लेकर चूर्ण कर ले फिर शहद और तिल का तेल मिलाकर योनि में लेप कर ले
  • सूखे हुए बैंगन को पीसकर योनि में रखें
  • लोंग को घोड़ी के दूध में भिगोकर सुखा लें बाद को पीसकर योनि में रखें
  • बबूल,बेर, कचनार ,अनार ,नर्सरी इन को बराबर बराबर लेकर जल में औटाय उसी समय एक कपड़ा उसमें भी भिगो ने फिर उस पानी के छींटे दे और वह कपड़ा योनि में रखें

ओवेरियन सिस्ट मीनिंग

ओवेरियन सिस्ट मीनिंग

ओवेरियन सिस्ट मीनिंग महिलाओं में एक आम समस्या है।ओवेरियन सिस्ट मीनिंग एक तरल पदार्थ से भरी हुई थैली है जो महिलाओं के एक या दोनों अण्डाशयों (ovaries) में बन सकता है | यह एक आम बीमारी है जो किसी भी महिला को हो सकती है और ज़्यादातर हानिकारक नहीं होता ओवेरियन सिस्ट यानि अंडाशय के ऊपर एक परत का बन जाना। कई मामलों में यह सिस्ट बिल्कुल सामान्य होती है लेकिन अगर यह परत सामान्य से अधिक मोटी है तो यह मासिक धर्म को प्रभावित करती है साथ ही गर्भावस्था के लिए भी खतरनाक है। कुछ स्थितियों में ओवेरियन सिस्ट कैंसर भी पैदा कर सकती हैं।

ओवेरियन सिस्ट
ओवेरियन सिस्ट

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण

  1. दर्द के साथ पेट पर सूजन – पेट के निचले भाग में दर्द के साथ-साथ सूजन का होना, ओवेरियन सिस्ट का पहला गंभीर लक्षण है। यदि आप अक्सर ऐसा महसूस करती हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर संपर्क करें।
  2. अपचन और जलन – कई बार बहुत कम खाने के बावजूद आप अपना पेट भरा हुआ महसूस करती हैं, तो यह पेट पर पड़ने वाले दबाव के कारण है। इस स्थिति में आप अपचन संबंधी समस्याएं भी महसूस कर सकते हैं।
  3. कमर दर्द –ओवेरियन सिस्ट मे आपकी कमर पर भी दबाव पड़ता है जिसके कारण मासिक धर्म के समान कमर दर्द होना सामान्य हो जाता है।
  4. व्जाइना– ओवेरियन सिस्ट होने पर पेशाब करते समय दर्द या तकलीफ होने के साथ-साथ लगतार यूरिनेशन की समस्या हो सकती है।
  5. मासिक धर्म–ओवेरियन सिस्ट का मुख्य लक्षण लंबे समय तक मासिक धर्म समय पर न होना इस स्थ‍िति में पेट के एकदम निचले भाग में तेज या हल्का दर्द भी हो सकता है।
  6. उल्टी आना – अंडाशय की ऊपरी झिल्ली का झरण नहीं होने पर कई बार उबकाई या ऊल्टी आने की स्थिति भी बन सकती है। इस समय तुरंत देखभाल एवं उपचार की जरुरत होती है ताकि इंफेक्शन न फैले।
  7. वजन बढ़ना – यदि बेहद कम समय में आपका वजन बहुत ज्यादा और तेजी से बढ़ रहा है, तो इसका कारण ओवेरियन सिस्ट भी हो सकता है। इस स्थिति को भांपकर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

ओवेरियन सिस्ट के कारण

  • फॉलिकल सिस्ट: महिलाओं में पीरियड्स के दौरान थैलीनुमा आकृति में बनने वाले अंडो को फॉलिकल कहा जाता है। ये थैली महिलाओं के अंडाशय के अंदर होती है, अधिकतर ये थैली फट जाती है और अंडे बाहर निकल जाते हैं, लेकिन जब ये थैली नहीं फटती है तब अंडाशय में मौजूद तरल पदार्थ सिस्ट या गांठ बना देता है।
  • कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट: आमतौर पर ये फॉलिकल के निकलने के बाद खुद नष्ट हो जाते हैं, अगर ये नष्ट नहीं हो पाते हैं, तो इसमें जगह से ज्यादा तरल इकठ्ठा हो जाता है जो कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट बनने का कारण बन जाता है।
  • पॉलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम – कुछ महिलाओं में पॉलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम भी हो जाता है। इसमें अंडाशय के अंदर कई सारे छोटे-छोटे सिस्ट या गांठ हो जाती है जिसके बढ़ने पर महिलाओं को बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है।

ओवेरियन सिस्ट सर्जरी उपचार

  1. ओवरी सिस्ट (अंडाशय में गांठ) के इलाज से पहले इसकी पुष्टि के लिए सीटी स्कैन या अल्ट्रासांउड जरूर करवाएं।
  2. लेप्रोस्कोपी सर्जरी – अगर आपकी सिस्ट छोटी है तो इस थेरेपी के जरिए डाक्टर्स नाभि के पास एक छोटा सी चीरा लगाकर सिस्ट को बाहर निकाल लेते हैं।
  3. लैपरोटॉमी सर्जरी – अगर आपकी सिस्ट बड़ी है तो डॉक्टर्स उसे लैपरोटॉमी सर्जरी के जरिए नाभि के पास एक बड़ा चीरा लगाकर बाहर निकाल देते हैं। यही नही, अगर सिस्ट की वजह से गर्भाशय या अंडाशय में कैंसर फैलने का खतरा हो तो वो उन दोनों को भी शरीर से बाहर निकाल सकते हैं।
  4. ओवरी सिस्ट (अंडाशय में गांठ) के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही दवाई लें।

ओवेरियन सिस्ट का आयुर्वेदिक इलाज

  1. सेंधा नमक-एक चम्मच सेंधा नमक को पानी से भरे गर्म पानी के टब में डालें। अब इस टब में 30मिनट के लिए अपने निचले भाग को डूबो कर रखे। ऐसा करने से दर्द में आराम मिलता है।
  2. गर्म सिकाई-ओवेरियन सिस्ट में गरम सिकाई करने से हमें रात मिलती है गर्म पानी की बोतल से अपने पेट के निचले हिस्से में 15 से 20 मिनट सिकाई करने से हमें आराम मिलता है
  3. हर्बल चाय- हर्बल चाय अंडाशय मे ओवेरियन सिस्ट के इलाज के लिए बहुत लाभदायक है
  4. सेब का सिरका-सेब का सिरका का प्रयोग ओवेरियन सिस्ट में बहुत कारगर साबित होता है क्योंकि ओवेरियन सिस्ट पोटेशियम की कमी के कारण होता है इसलिए सेब के सिरके का प्रयोग करने से ये पोटेशियम की कमी को पूरा करता है और ओवेरियन सिस्ट को  सिकुड़ने और कम करने में मदद करता है।
  5. अदरक- ओवेरियन सिस्ट में अदरक बहुत फायदेमंद है अदरक गर्म होने से शरीर में गर्माहट उत्पन्न करता है जिससे मासिक धर्म के दौरान होने वाली पीड़ा दूर हो जाती है।
  6. बादाम-बादाम सिस्ट के लिए बहुत लाभदायक होता है। इसमें मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है जिससे ओवेरियन के दर्द से राहत मिलती है। इसलिए भुने हुए बादाम का सेवन करें।
  7. पानी-ओवेरियन सिस्ट से ग्रस्त महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए|
  8. अलसी- अलसी का सेवन करने से ओवेरी सिस्ट की समस्या दूर हो जाती है|
  9. चुकंदर-चुकंदर हमारे शरीर के सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को साफ कर लीवर की क्षमता को बढ़ाता है|
बादाम
बादाम