बवासीर का ईलाज

बवासीर का ईलाज

बवासीर

बवासीर एक खतरनाक बीमारी है गुदा के पास सूजन नसों को बवासीर के रूप में जाना जाता है। बवासीर दो प्रकार की होती है| बवासीर को आम भाषा में खूनी और बादी बवासीर भी कहते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

1.खूनी बवासीर- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती सिर्फ खून आता है इसका मुख्य कारण मस्सा है जो अंदर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है|

2.बादी बवासीर- बादी बवासीर होने पर पेट खराब रहता है व गैस बन जाती है| कब्ज बनी रहती है| बवासीर की वजह से पेट खराब रहता है इस में दर्द, जलन ,खुजली व शरीर में बेचैनी इत्यादि यह लक्षण सामने आते हैं|

बवासीर
बवासीर

बवासीर के लक्षण

  • मल त्याग करते समय गुदाद्वार में दर्द सा महसूस होना|
  • बवासीर होने पर कई बार रोगी को मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगता है कि उसका पेट अभी साफ नहीं हुआ |यह बवासीर के मस्से होने का प्रथम लक्षण  है|
  • मल त्याग शौच करते समय गुदाद्वार में खून निकलना बवासीर का  मुख्य कारण है|
  • गुदाद्वार की नसों में जब किसी कारण वश दबाव पड़ता है तो उन में सूजन आ जाती है जिसे हम मस्सा कहते हैं|
  • बवासीर होने पर गुदाद्वार में से श्लेष्मा भी निकलता है|
  • गुदा के आसपास चरम खुजली।

बवासीर के कारण

  1. रक्त -इसे खुनी बवासीर भी कहते हैं इसमें रक्त गिरता है|
  2. कड़वा खट्टा नमकीन वस्तुओं को अधिक आना, अधिक कसरत करना ,धूप में अधिक रहना , गरम देश में रहना व गरम पदार्थों का खाना आदि मुख्य कारण है|
  3. दवाओं का सेवन करना अत्यधिक दवाओं का सेवन करने से भी बवासीर हो जाता है
  4. भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी बवासीर हो जाता है|
  5. अधिक तला या मसालेदार भोजन खाने से भी बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  6. प्रसव  के दौरान भी बवासीर होने  की संभावना बढ़ जाती है

बवासीर को दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

1.प्याज के रस में घी और चीनी मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|

2.काले तिल 1 तोला तोले भर मक्खन में मिलाकर सुबह सुबह रोज खाने से 8 दिन में खूनी बवासीर आराम हो जाती है|

3.जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर और सेंधा नमक डालकर रोटी के साथ 8 दिन खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|असीस, कूड़े की छाल ,इंद्रजौ और रसौत इनके चूर्ण को शहद में मिलाकरचावलों के पानी के साथ लेने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है|

Broccoli
Broccoli( जंगली गोभी )

4.काले तिलों का चूर्ण, नागकेसर और मिश्री इन सब को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

5.नागकेसर और मिश्री छह- छह माशे से लेकर 9 माशे ताजा मक्खन में मिलाकर सुबह शाम खाने से 7 दिन में खाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है|

6.कड़वी नीम के पके हुए फलों को गुदा 3 माह लेकर 6 माशे से गुड में मिलाकर 7 दिन तक खाने से बवासीर में आराम मिलता है|प्याज के महीन टुकड़े करके धूप में सुखा लें| सुखे टुकड़ों में से एक तोला प्याज लेकर घी मे तले फिर उसमें एक माशे  तिल और दो तोले मिश्री मिलाकर हर रोज सेवन करें इससे बवासीर में आराम मिलता है|कमल का नरम पत्ता पीसकर मिश्री के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

7.सवेरे ही बकरी का दूध पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

8.गेंदे की पत्तियां 6 मासी से 1 तोले तक और काली मिर्च 2 मासी से 3 मासी तक  इकट्ठा कर ले और पीस छानकर पी जाए इससे बवासीर का खून बंद हो जाता है|

9.कमल की केसर, शहद,ताजा मक्खन, चीनी और नागकेसर सब को एक में मिलाकर खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

10.आम की कोपल पानी में पीस जानकर थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

11.एक नारियल के ऊपर का छिलका लेकर जलाएं और उसकी राख के बराबर शक्कर मिलाकर तीन खुराक बनाए| इसको एक- एक खुराक हर रोज सेवन करने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

किडनी स्टोन यानी पथरी( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन ( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन यानी पथरी एक छोटे आकार का पत्थर होता है जो कैलशियम मिनिरल्स सॉल्ट और अन्य अक्ष आर्य तत्वों के मिलने से धीरे-धीरे बड़े कठोर पत्थर के रूप में मूत्र मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है जो किडनी स्टोन छोटी होती है किडनी स्टोन आसानी से मूत्र वाहिनी से बाहर निकल जाती है लेकिन जब यह बड़ी हो जाती है तो पेट के निचले हिस्से में दर्द होना शुरू हो जाता है और सूजन आ जाती है जिससे मूत्र मार्ग में संक्रमण हो जाता है|

kidney stone
किडनी स्टोन ( kidney stone )

किडनी स्टोन के लक्षण(kidney stone symptoms)

  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों का यूरिन गुलाबी लाल या भूरे रंग का आने लगता है पेशाब करने में दिक्कत आ सकती है|
  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों को पेट के निचले हिस्से में दर्द रहने लगता है और यह दर्द कुछ मिनटों या घंटों तक बना रहता है|
  • किडनी स्टोन के शुरूआती लक्षण में से  एक है उल्टी आना उल्टी दो कारणों से बाहर आती है |पहला स्टोन की स्थानांतरण के कारण और दूसरा किडनी शरीर के अंदर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है|
  • किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति का यूरिन मटमैला और बदबूदार होता है|
  • इस रोग में तेज बुखार और ठंड लगने की संभावना होती है|
  • किडनी स्टोन के बड़ा होने पर यह मूत्राशय को ब्लॉक कर देती है जिससे किडनी में दर्दनाक सूजन पैदा हो जाती है और पेट और कमर में दर्द का अनुभव होने लगता है|
  • किडनी स्टोन बड़ा होने पर व्यक्ति को बैठने में परेशानी हो सकती है|
  • किडनी स्टोन के मूत्र मार्ग से मूत्राशय में चले जाने पर बेहद दर्दनाक होता है|

किडनी स्टोन के कारण (Kidney stone causes)

1.प्रोस्टेड फूड का अधिक सेवन करने से-

प्रोस्टेडफूड का अधिक सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है प्रोस्टेड में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जिससे मूत्र मार्ग में सोडियम की मात्रा बढ़ती है| साथ ही साथ कैल्शियम का अधिक उत्सर्जन होने लगता है |प्रोस्टेट फूड में फाइबर की मात्रा कम होती है जिससे यूरिक एसिड की प्रक्रिया में रुकावट आती है|

2.सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने से-

सॉफ्ट ड्रिंक्स और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से शरीर में कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कैल्शियम के उत्सर्जन की संभावना बढ़ जाती है जो किडनी स्टोन का कारण बनती है|

पानी की कमी से पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन कम करने से शरीर में किडनी स्टोन रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है|

3.अनुवांशिकता-कुछ लोगों को अनुवांशिकता के कारण गुर्दे की पथरी की समस्या हो जाती है| कैल्शियम का स्तर बढ़ने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है|

4.मोटापा -किडनी स्टोन का मुख्य कारण मोटापा है|

5.दवाओं का सेवन करने से– कैल्शियम वाली एंटासिड लेने वाले लोगों की मूत्र में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है| विटामिन डी से भी कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है इसके कारण किडनी स्टोन की समस्या उत्पन्न होती है|

6.सिगरेट- सिगरेट किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है जिससे वे काम करना भी बंद कर देती हैं धूम्रपान करने से धमनियां कड़ी हो जाती है जिससे किडनी के रक्त प्रभाव में रुकावट पैदा होती है और उसके कार्य करने की क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है|

7.सोडियम का अधिक सेवन किडनी रोग होने पर हमें सोडियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए  सोडियम सीधे किडनी को प्रभावित करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बनाए रखने में मदद करता है |

8.अत्यधिक शराब का सेवन शराब का सेवन करने से किडनी की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लगती है और किडनी के आकार में वृद्धि हो सकती है|

(किडनी स्टोन के लिए आयुर्वेदिक उपाय)Kidney stone treatment

1. किडनी स्टोन रोग से बचने के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए|

2.प्रतिदिन 5 से 6 महीने तक तुलसी के रस में शहद मिलाकर पीने से किडनी स्टोन आसानी से पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाता है|

3.अनार और उसके जूस का सेवन करने से किडनी स्टोन से बचा जा सकता है|

4. तरबूज में पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पानी की कमी को पूरा करता है यह मूत्र मार्ग में एसिड की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद करता है|

5. नींबू का रस, चार टुकड़े तरबूज के, चार बर्फ के टुकड़े, एक संतरा आदि सबको पीसकर जूस बना लें और रोजाना इसका सेवन करें|

6.करेले का जूस के रूप में सेवन करें| प्रतिदिन एक गिलास करेले का जूस पिए|

7.प्रतिदिन एक गिलास मूली का रस पीने से पथरी  जल्दी 21 दिनों के भीतर निकल जाती है|

8.प्रतिदिन पत्थरचट्टा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिएं 15 दिन में किडनी स्टोन नामक रोग से आराम मिल जाएगा|

9.प्रतिदिन एक गिलास अजवाइन का जूस पीने से भी किडनी स्टोन की समस्या खत्म हो जाती है|

10. नारियल पानी का सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या दूर होती है |

Ajwain
अजवाइन ( Ajwain )

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer)

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer )

प्रोस्टेट या गदूद एक सेब के आकार का यौन अंग होता है |प्रोस्टेट शरीर में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है यह केवल पुरुषों में पाई जाती जो उनके प्रजनन प्रणाली का एक अंग है| पुरुष ग्रंथि मूत्र मार्ग के चारों ओर होती है |मूत्र मार्ग मूत्र को मूत्राशय से लिंग के रास्ते से बाहर निकालता है| पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 25 साल की उम्र के बाद बढ़ने लगता है| कई अवस्थाओं में प्रोस्टेट का आकार सामान्य से अधिक होता है| प्रोस्टेट की कोशिकाएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं| जिससे यह ग्रंथि सामान्य से ज्यादा बढ़ने लगती है |इससे मुत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है और कई समस्याएं उत्पन्न  होती है |प्रोस्टेट ग्रंथि को दो भागों में बांटा जाता है दाएं और बाएं| एक व्यस्क पुरुष में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 3 सेंटीमीटर मोटा और 4 सेंटीमीटर चौड़ा होता है और इसका वेट यानी वजन 20 ग्राम तक हो सकता है|

Prostate_Cancer
प्रोस्टेट कैंसर ( Prostate_Cancer )

प्रोस्टेट कैंसर की घटना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है |प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं से बनने वाला कैंसर होता है| प्रोस्टेट कैंसर बहुत धीरे बढ़ता है| शुरुआत में तो इसके लक्षण दिखाई नहीं देते |जब यह लास्ट स्टेज पर पहुंचता है लक्षण दिखाई देने लगते हैं और कई बार मरीजों को यह पता भी नहीं लगता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है| व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है|

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण(Prostate cancer symptoms)

  • पेशाब का बार बार आना|
  • पेशाब करने की इच्छा बार बार होना और निष्कासित करते वक्त मूत्र में रुकावट होना|
  • कई बार मूत्र के साथ रक्त का निकलना इस रोग का मुख्य लक्षण है|
  • पेशाब करने के दौरान जलन और कठिनाई का अनुभव होना और मूत्र की बूंद टपकना|
  • कमर में दर्द होना कूल्हो  और जांघ की ऊपरी सतह में दर्द होना|
  • लगातार वजन कम होना भी प्रॉस्टेट कैंसर का लक्षण है। शरीर का वजन तेजी से कम होना भी कैंसर की ओर इशारा है।
  •  जब पाचन क्रिया सही तरह से काम न करे तो समझ लेना चाहिए कि आप प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में हैं। वहीं प्रॉस्टेट कैंसर से व्यक्ति के शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
  • शरीर के किसी भी हिस्से में दर्दहोना इस रोग का मुख्य लक्षण है|

प्रोस्टेट कैंसर के कारण(Prostate cancer causes)

  • अनुवांशिकता– अगर आपके परिवार में पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर था तो  आपको इस रोग के होने की संभावना बढ़ सकती है|
  • बढ़ती उम्र– उम्र के बढ़ने के साथ-साथ प्रोस्टेट कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है| यह 25 वर्ष की उम्र के बाद होने लग जाता है|
  • हारमोंस में परिवर्तनप्रोस्टेट कैंसर का मुख्य कारण हारमोंस में परिवर्तन होना है| वसा हार्मोन का उत्पादन और शरीर में ऊंचाहार टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन  प्रोस्टेट कैंसर होने का मुख्य कारण है|
  • धूम्रपान– धूम्रपान करना ,बीड़ी सिगरेट शराब का सेवन करने से भी पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है| यह कैंसर धीरे धीरे फैलने लगता है| शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते इसलिए कई पुरुषों को पता भी नहीं लग पाता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है|
  • केमिकल्स के संपर्क में आना केमिकल्स के संपर्क में आने से भी पुरुष इस रोग का शिकार हो जाते हैं|
  • आहार कारक-मछली मांस सोयाबीन उत्पाद चावल डेयरी उत्पादों का सेवन करते रहने से भी प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका बनी रहती है|

प्रोस्टेटकैंसर स्टेजिज(Prostate cancer stages)

प्रोस्टेट कैंसर को चार चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

स्टेज 1. पहले चरण में कैंसर बहुत छोटा होता है और पुरुष ग्रंथि तक ही सीमित रहता है|

स्टेज2.दूसरे चरण में कैंसर पुरुष ग्रंथि में ही होता है लेकिन इसका आकार बड़ा हो जाता है|

स्टेज3.तीसरे चरण में कैंसर प्रोस्टेट के बाहर फैल चुका है और वीर्य को ले जाने वाली ट्यूब्स तक फैल जाता है|

स्टेज4. चौथे चरण में कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि से बाहर के नजदीक ढांचे जैसे लसिका ग्रंथि मूत्राशय या फिर हड्डियों या लीवर जैसे दूर के अंगों में फैल जाता है|

प्रोस्टेट कैंसर किस उम्र के लोगों को होता है?(Prostate cancer age)

प्रोस्टेट कैंसर के बारे मे सबसे पहले हमने यह जाना कि प्रोस्टेट कैंसर किन कारणों की वजह से होता है उम्र के बढ़ने के साथ-साथ इस रोग के होने की आशंका बढ़ जाती है यह रोग 25 वर्ष की आयु के बाद होने लगता है 40 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में यह रोग कम देखने को मिलता है लेकिन 60 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है|

प्रोस्टेट कैंसर के लिए टेस्ट(Prostate cancer test)

1.PSA  Testरक्त परीक्षण(prostate Specific Antigen)

प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए प्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन(prostate Specific Antigen)नामक टेस्ट किया जाता है प्रोस्टेट नामक रसायन का स्तर बढ़ जाने पर प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी नामक टेस्ट किया जाता है पता लगाया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर इतनी शीघ्रता से फैल रहा है| पीएसी के आधार पर ही डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं प्रोस्टेट कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित न करें इसके लिए सीटी स्कैन  बोन स्कैन टेस्ट भी किया जाता है|

1.PSAप्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांचने के लिए खून का एक सैंपल लिया जाता है| पीएसए प्रोस्टेट द्वारा बनाया गया एक प्रोटीन है प्रोस्टेट के कैंसर से ग्रस्त पुरुषों के खून में पीएसए के बढ़े हुए सतर होते हैं प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित कुछ पुरुषों में सामान्य पीएसए होता है| पीएसए का सामान्य से ऊंचा  स्तर प्रोस्टेट का कैंसर के कारण हो सकता है| ऐसा मानने पीएसएस ऊपर वाले पुरुषों को आमतौर पर औरपरीक्षणों के लिए भेजा जाता है।

2.बायोप्सी-एक बायोप्सी शरीर से लिया गया ऊतक का एक नमूना है ताकि इसे और अधिक बारीकी से जांच की जा सके।बायोप्सी एक सुई से ली जाती है जोकि पीछे के मार्ग  की दीवार से डाली जाती है इसे TRUS बायोप्सी कहते हैं| बायोप्सी अल्ट्रासाउंड के साथ ही की जाती है| बायोप्सी वृषण के पीछे की त्वचा से भी ली जा सकती है| इसे ट्रांसपेरिनियल बायोप्सी कहते हैंऐसा भी हो सकता है कि प्रोस्टेट में कैंसर हो पर वह बायोप्सी से पता नहीं लगाया जाए ऐसे कैंसर का पता लगाने के लिए एमआरआई स्कैन भी किया जा सकता है फिर बायोप्सी को फिर से करना पड़ सकता है यदि पीएसए का सत्र बढ़ने लगे तो बायोप्सी को फिर से किया जा सकता है|

3.MRI(Magnetic Resonance Imaging)-एमआरआई के लिए शक्तिशाली चुंबक  रेडियो किरणों और कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है जिसकी मदद से शरीर की जानकारी को विस्तृत तस्वीरों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल शरीर के लगभग हर हिस्से को जांचने के लिए किया जाता है जैसे अंदरुनी अंग लीवर गर्भाशय और पुरुष ग्रंथि आदि की जांच की जाती है|

अतिरिक्त जांच यदि बायोप्सी में पता लग जाता है कि कैंसर है तो वह प्रोस्टेट ग्रंथि से आगे फैला है या नहीं इसका पता करने के लिए अतिरिक्त टेस्टों की आवश्यकता पड़ सकती है| जिम में शामिल है :हड्डियों का स्कैन, सीटी स्कैन ,एक्स रे|

प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1.लहसुन– लहसुन में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं जैसे कि विटामिन सी विटामिन बी जो प्रोस्टेट कैंसर को होने से रोकते हैं|

2.ब्रोकली– ब्रोकली के अंकुर मे पाया जाने वाला फाइटोकेमिकल्स कैंसर के कीटाणुओं से लड़ने में हमारी मदद करता है इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन करना चाहिए|

ब्रोकली
ब्रोकली

3.अमरूद– अमरूद मे लाइकोपिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो कैंसर से लड़ने में हमारी मदद करता है|

4.सोयाबीन– प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन अपने आहार में सोयाबीन का सेवन करना चाहिए|

5.एलोवेरा– एलोवेरा में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन एलोवेरा का सेवन करना चाहिए|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

6.ग्रीन टी-प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करने से हम कैंसर होने से बच सकते हैं|

7.अंगूर– अंगूर में पोरंथोसाइनिडीसभरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे ट्रोजन के निर्माण में कमी होती है और हमें कैंसर रोग से निजात मिलता है|                                                                                                              

स्किन एलर्जी(Skin allergy)

स्किनएलर्जी (Skin allergy)

स्किनएलर्जी

स्किन एलर्जी की समस्या एक आम समस्या बन गई है किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से या उसको छूने से जो पहले से स्किन एलर्जी से ग्रस्त हो आपको भी यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है धूल मिट्टीकेकणों के कारण और खान पान में मिलावट केकारण स्किन एलर्जी होने की संभावना बढ़ रही है त्वचा रोग होने के कारण त्वचा पर लाल दाने होना ,दाद ,खाज खुजली ,छाले या पित्त होना आदि लक्षण नजर आने लगते हैं दवाइयों का सेवन करने से भी स्किन एलर्जी की समस्या खत्म नहीं होती कोई व्यक्ति एक बार स्किन एलर्जी की समस्या का शिकार हो जाए तो वहआसानी से इस समस्या से निजात नहीं पा सकता|

स्किनएलर्जी के लक्षण (Skin allergy symptoms)

  • स्किन पर लाल चकत्ते होना या लाल दाने होना
  • स्किन पर खुजली और जलन होना
  • स्किन में खिंचाव पैदा होना स्किन पर लाल निशानों का पड़ना
  • स्किन पर रैशेज पड़ना
  • स्किन पर पपड़ी का जम जाना
  • स्किन में कांटे बन्ना और सूजन आना
skin allergy
स्किनएलर्जी (skin allergy)

स्किनएलर्जी के कारण(Skin allergy causes)

1.खानपान-

खाद्यपदार्थोंसेएलर्जी-कुछ खाद्य पदार्थों जैसे गाय के दूध ,मछली या फिर अंडे आदि का सेवन करने से आपको स्किन एलर्जी हो सकती है खाद्य पदार्थों का सेवन करने सेआपके शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है|

2.प्रदूषण से एलर्जी– कारखानों व चिमनीओं से निकलने वाला धुआं हवा और पानी को दूषित कर देते हैं हवा और पानी के संपर्क में आने से स्किन एलर्जी होने लगती है|

3.अनुवांशिकता-अगरआपके परिवार में किसी व्यक्ति को कोई एलर्जी है ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से भीआपको स्किन एलर्जी हो सकती है|

4.कीटपतंग-घर के आस-पास कॉकरोच ,मकड़ी, डेंगू ,टीडीआदि के काटने से स्किन एलर्जी हो सकती है|

5.जानवरों से एलर्जी -कुछ जानवरों की त्वचा की कोशिकाओं से हमारे शरीर पर हानिकारक परभाव पड़ता है जिसे स्किन एलर्जी होने की संभावना बढ़जाती है|

6.धातुसेएलर्जी -कुछ लोगों को सोना ,चांदी ,हीरा ,एलुमिनियम आदि को पहनने से एलर्जी होने लगती है|

7.नकलीगहने -कुछ महिलाओं को नकली धातु के गहनों को पहनने से एलर्जी होने लगती है|

8.धूम्रपान- धूम्रपान मे निकोटीन नामक पदार्थ होता है निकोटीन का हमारे शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जो एलर्जी होने का कारण बनता है|

9.डिटर्जेंट वाले साबुन-डिटर्जेंट वाले साबुन का प्रयोग करने से एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है|

स्किनएलर्जी के प्रकार(Skin allergy types)

1.एक्जिमा-एग्जिमा स्किन एलर्जी से संबंधित बीमारी है जिसका असर पुरुषों से ज्यादा बच्चों पर पड़ता है जिसके कारण स्किन में जलन और सूजन जैसी समस्याएं होती है यह बीमारी अस्थमा एलर्जी राइनाइटिस से संबंधित है|

2.कांटैक्ट डर्मेटाइटिस– जब स्किन निखिल जैसी मिश्र धातु के संपर्क में आती है तो उस दिन पर मिश्र धातु का हानिकारक प्रभाव पड़ता है जैसे लाल दाने होना ,स्किन में खुजली और जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं|

3।पित्ती –यह भी एलर्जी से संबंधित समस्या है जिसके कारण त्वचा के नीचे रक्त वाहिकाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है और रक्त वाहिकाओं में सूजन आने लगती है|

4.एनजीओडिमा– एनजीओडिमा त्वचा से संबंधित रोगों का मुख्य प्रकार है इसमें त्वचा की गहराई में सूजन आने लगती है और लाल चकत्ते होने लगते हैं इसका मुख्य प्रभाव होठों और पलकों पर पड़ता है|

स्किनएलर्जी को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय (Skin allergy treatment)

1.नीम-नीम में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं इसलिए नीम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर पीस लेंऔर इस मिश्रण को प्रभावित त्वचा पर लगाएं और थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से धोले ऐसा करने सेआपको लाभ मिलेगा|

Ne em
नीम ( Ne em )

2.नारियलतेल-नारियल में एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं इसलिए नारियल के तेल को हल्का सा गर्म करके सोने से पहले लगाएं ऐसा करने सेआपको स्किन एलर्जी से निजात मिलेगा

3.नींबूकारस-नींबू का रस स्किनएलर्जी के निवारण के लिए बहुत लाभदायक है इसलिए प्रभावित स्थान पर नींबू का रस थोड़ी देर लगा रहने दें और फिर धोले

4.एलोवेरा-एलोवेरा में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो त्वचा के रोगों से लड़ने में हमारी मदद करते हैं एलोवेरा की जेल को निकालकर स्किनएलर्जी वाले स्थान पर लगाएं ऐसा करने से आपको राहत मिलेगी

5.फिटकरी-हल्की सी फिटकरी में नारियल का तेल मिलाकर इसका मिश्रण बना लें और इसे स्किन एलर्जी वाले स्थान पर लगाएं ऐसा करने से स्किनएलर्जी की समस्या जल्दी दूर होगी

6.पपीता-पपीते में एंजाइम पाए जाते हैं इसलिए पपीते की फाइबर यानी गुर्दे को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाएं और थोड़ी देर बाद धोले ऐसा करने से आपको स्किनएलर्जी से निजात मिलेगा

7.पानीकासेवन-हमें प्रतिदिन अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ यूरिन के साथ बाहर निकल जाते हैं इसलिएज्यादापानीपीनेसेस्किनएलर्जीकीसमस्यादूरहोतीहै

8.ओलिवऑयल –ऑलिवऑयलकोस्किनएलर्जीवालेस्थानपरलगानेसेखुजलीकीसमस्यादूरहोतीहै

स्किनएलर्जी टेस्ट(Skin allergy test)

स्किनएलर्जी एक संवेदनशील प्रतिक्रिया है जो पदार्थ शरीर के संपर्क में आते हैं ऐसे पदार्थों के खिलाफ प्रतिक्रिया प्रतिरक्षा प्रणाली की जाती है एलर्जी टेस्ट दो प्रकार से किया जाता है जिसमें स्किन टेस्ट और ब्लड टेस्ट शामिल है एलर्जी टेस्ट से यह पता लगाया जाता है कि आपको किस चीज से एलर्जी है|

एलर्जीटेस्टकेप्रकार:-

1.स्किनटेस्ट-.स्किन टेस्ट में एलर्जी पदार्थ को रोगी की त्वचा के संपर्क में लाया जाता है और परीक्षण किया जाता है कि प्रतिक्रिया होती है या नहीं| एलर्जी स्किन टेस्ट का रिजल्ट कुछ ही घंटों में पता लग जाता है स्किन टेस्ट तीन प्रकार के होते हैंजिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

  • स्किनप्रिकटेस्ट– इस टेस्ट में एलर्जी पदार्थ की कुछ बूंदे इंजेक्शन के द्वारा त्वचा के अंदर भेजी जाती है अगर त्वचा पर हानिकारक प्रभाव जैसे खुजली सूजन आदि दिखने लगता है तो यह माना जाता है कि व्यक्ति को इन पदार्थों से एलर्जी है|
  • इंट्राडर्मलटेस्ट-जब किसी एलर्जी पदार्थ की कुछ बूंदें इंजेक्शन के माध्यम से त्वचा के अंदर डाली जाती है अगर मरीज कोई प्रतिक्रिया नहीं करता तो इंट्रेडर्मल टेस्ट का उपयोग किया जाता है|
  • स्किनपैचटेस्ट-इस टेस्ट में अर्जित पदार्थ को एक पेड़ पर लगाकर उसे स्किन पर बांध दिया जाता है कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस स्किन से संबंधित रोग का पता लगाने के लिए इस टेस्ट का उपयोग किया जाता है|

2.ब्लडटेस्ट-ब्लड टेस्ट में व्यक्ति के खून की कुछ मात्रा इंजेक्शन के द्वारा ली जातीहै ब्लड टेस्ट खून में एंटीबॉडीज नामकपदार्थ के स्तर का मापन करता है एलर्जी टेस्ट के द्वारा अगर आपको त्वचा संबंधी संक्रमण हैतो उसका पता लगाया जा सकता हैअस्थमा रोग कीजांच के लिए भी एलर्जी ब्लड टेस्ट का उपयोग किया जाता है|

एग्जिमा का घरेलू उपचार ( Eczema treatment )

एग्जिमा का घरेलू उपचार ( Eczema treatment )

एग्जिमा का घरेलू उपचार

एग्जिमा एक चर्म रोग है जिसमें व्यक्ति को निरंतर खुजली रहने लगती है यह ज्यादातर बुजुर्गों में पाया जाता है यह रोग होने पर व्यक्ति को खुजली होने लगती है और त्वचा पर लाल चकत्ते निकल आते हैं लाल चकतों के फूट जाने पर उनमें से द्रव्य पदार्थ निकलता रहता है|एग्जिमा का घरेलू उपचार करने पर इस रोग से निजात पाया जा सकता है|

एग्जिमा होने पर त्वचा मोटी , खुरदरी और शुष्क होने लगती है और प्रभावित क्षेत्र में गांठ पड़ने लग जाती है| यह रोग डर्मेटाइटिस के नाम से भी जाना जाता है |यह मुख्य रूप से खून की खराबी के कारण होता है और इसका सही समय पर इलाज न करवाने पर यह तेजी से फैलने लगता है यह किसी भी उम्र के पुरुष या महिलाओं को प्रभावित कर सकता है|

एग्जिमा रोग के लक्षण(Eczema symptoms)

  • इस रोग में व्यक्ति को खुजली होने लगती है और चमड़ी का रंग लाल हो जाता है|
  • चमड़ी सूखी पड़ जाती है और उसमें से पपडी निकलने लगती है|
  • त्वचा पर फफोले हो जाते है जिनसे द्रव का रिसाव निकलने लगता है|
  • समय के साथ त्वचा मोटी हो सकती है और त्वचा में कठोरता का अनुभव होने लगता है|
  • न्यूक्लियर एग्जिमा मेरी त्वचा के छोटे हिस्से में जलन होने लगती हैं|
Eczema
एग्जिमा (Eczema)

एग्जिमा होने के कारण(Eczema causes)

1.अनुवांशिकता-अगर माता-पिता या दोनों में से एक कोई भी इस त्वचा के रोग से पीड़ित है तो संतान में एग्जिमा होने की संभावना बढ़ जाती है और वह उस का शिकार हो जाता है|

2.हार्मोन में परिवर्तन– हार्मोन के सतर में बदलाव आने के कारण मासिक धर्म होने की स्थिति में यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|

3.एलर्जी एलर्जी इस रोग का मुख्य कारण है किसी व्यक्ति के संपर्क में आने से जो इस रोग से पीड़ित हो तक इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है

4.तनाव-तनाव एग्जिमा होने का मुख्य कारण है तनाव एग्जिमा के लक्षणों को खराब कर सकता है|

5.खाद्य पदार्थ –सोया, गेहूं, उत्पाद, अंडे जैसे कुछ खाद्य पदार्थ एग्जिमा होने के मुख्य कारण है खाद्य पदार्थों का सेवन करने से एग्जिमा होने की संभावना बढ़ जाती है|

6.गरम तापमान-गर्मी के कारण भी त्वचा एग्जिमा रोग से पीड़ित हो जाती है|

7.सूक्ष्म जीव- बैक्टीरिया और वायरल एग्जिमा रोग के होने की मुख्य कारण हैं|

एग्जिमा के प्रकार(Eczema types)

1.एटॉपिक डर्मेटाइटिस-अटोपिक डर्मेटाइटिस एग्जिमा का सबसे सामान्य प्रकार है जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा की शिकायत रहती है उन लोगों में इस रोग के होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है|

2.एलर्जी संपर्क त्वचा रोग-जब भी कोई रासायनिक पदार्थ हम बॉडी के ऊपरी हिस्से में बार बार प्रयोग में लाते हैं तो बॉडी में एलर्जी होना शुरू हो जाती है और त्वचा में उसे सूजन आना शुरू हो जाती है पदार्थ के ज्यादा यूज होने पर त्वचा को नुकसान होना शुरू होता है|

3.नुम्मूलर एकिज्मा-इस रोग में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गोल आकार का लाल निशान बनना शुरू हो जाता है यह अक्षर पैरों के पैर हाथों के पीछे की कलाई और पीठ के निचले हिस्से में ज्यादा होता है|

4.स्टैसिस डर्मेटाइटिस-इस तरह के रोग में अक्सर शरीर के ऊपर भूरे रंग के दाग हो जाते हैं यह रोग ज्यादातर उन लोगों में होता है जिनकी निचले पैरों की नसों से दिल तक रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से नहीं हो पाता यह रोग शीघ्रता से फैलता है|

5.डिशीडॉटिक एग्जिमा-इस रोग के शुरुआती लक्षणों में खुजली होने लगती है फिर हाथों और पैरों पर लाल चकते बनने शुरू हो जाते हैं फफोले भी बन जाते हैं जिनमें से द्रव्य रिसाव निकलने लगता है|

6.न्यूरोड्मार्टाइटिस-इस तरह के रोग में त्वचा के ऊपर दाग हो जाता है और दाग वाली जगह पर जलन तथा हद से ज्यादा खुजली होती है एग्जिमा ज्यादातर गर्दन के पीछे या पीठ सिर में कलाई जननेंद्रिय और कान के अंदर वाले हिस्सों को ज्यादा प्रभावित करता है|

7..सेब्रेरिक -डेंड्फ की तरह पैदा होता है बच्चों में यह सिर को प्रभावित करता है और वैष्णो मैया जाकर कान के क्षेत्र दोहे नाक के बाजू के एरिया को ज्यादा प्रभावित करता है|

एग्जिमा का घरेलू उपचार (Eczema treatment)

1.एग्जिमा के रोग से छुटकारा पाने के लिए विभिन्न प्रकार की दवाइयों और विचारों की आवश्यकता पड़ती है जिनका वर्णन इस प्रकार से है|

2.एंटीहिस्टामाइन दवाओं जैसे – डीफेनहाइड्रेमाइन आदि का सेवन करने से हमें खुजली के दर्द से राहत मिलती है|

3.हाइड्रोकॉर्टिसोन मरहम का सेवन करने से एग्जिमा से हमें निजात मिलता है|

4.डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्रीम को लगाने की सलाह देते हैं यह खुजली को कम करने में हमारी मदद करती है|

5.जब रोगी को घरेलू उपचारों के द्वारा आराम नहीं मिलता तब वह लाइट थेरेपी से उपचार करने की जरूरत पड़ती है इस थेरेपी में कृत्रिम पेरा बैंगनी ए और संकीर्ण बेड पेरा बैंगनी बी नियंत्रित मात्रा के साथ उपचार किया जाता है|

एग्जिमा के रोग से निजात पाने के लिए घरेलू उपाय

1.एलोवेरा -विटामिन ई के तेल के साथ एलोवेरा मिलाकर लगाने से खुजली कम होने लगती है एलोवेरा का प्रयोग करने से हमारी त्वचा को पोषण मिलता है इसके लिए एलोवेरा की पत्तियों से जेल निकाल कर उसमें कैप्सूल से विटामिन ई के तेल को निकाल कर दोनों को मिला लें और जहां पर खुजली है वहां लगाने से आराम मिलता है|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

2. नीम का तेल– नीम के तेल में एंटी इन्फ्लेमेटरी कंपाउंड होते हैं जैतून के तेल में नीम के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से एग्जिमा के रोग से हमें निजात मिलता है

3. शहद और दालचीनी-शहद और दालचीनी में भी एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं |एक चम्मच शहद एक चम्मच दालचीनी को अच्छी तरह से मिलाकर उसका मिश्रण तैयार करले अब इस मिश्रण को खुजली वाले स्थान पर लगाएं शहद त्वचा की जलन को कम करता है|

एक्जिमा के रोग से निजात पाने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

Neem
नीम ( Ne em )
  • हरड़– गाय के मूत्र में कुछ हरण को पीसकर इसका मिश्रण बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाने से एग्जिमा के रोग से निजात मिलता है
  • नीम– नीम के पत्तों का रस निकालकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर उसका सुबह शाम सेवन करने से एग्जिमा में खून की खराबी की समस्या दूर होती है
  • साफी– यह एक जड़ी बूटी यानी औषधि है जिसका खाली पेट सेवन करने से एक्जिमा में  लाभ मिलता है
  • काले चनो को पानी में पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाने से खुजली दूर होती है
  • एक चम्मच त्रिफला का चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर इसका सुबह शाम सेवन करने से एग्जिमा के रोग से हमें राहत मिलती है
  • नीम के पत्तों को पानी में उबालकर ठंडा हो जाने पर उस पानी से नहाए और नीम की तेल की मालिश करने से एग्जिमा रोग से हमें राहत मिलती है
  • हल्दी को पीसकर सरसों के तेल में पकाकर जब हल्दी जल जाए तब उसे छानकर प्रभावित स्थान पर लगाने से एग्जिमा रोग से निजात मिलता है
  • नीम की छाल, पीपल की छाल, गिलोय इन सब की थोड़ी-थोड़ी मात्रा लेकर कुछ पानी में पकाकर इसका काढ़ा बना ले इसका काडे का सुबह-शाम सेवन करने से यह रोग जड़ से खत्म होता है

स्वपनदोष का इलाज (स्वपन-परमेह)

स्वपनदोष का इलाज ( स्वपन-परमेह)

स्वपनदोष का इलाज

स्वपनदोष ऐसी स्थिति है जिसमें गहरी नींद में सोते वक्त स्वपन देखने के कारण लिंग से वीर्यस्खलन  हो जाता है ऐसी प्रक्रिया को स्वपनदोष कहा जाता है| स्वपनदोष का इलाज सही समय पर ना किया जाए तो यह गंभीर रूप धारण कर सकती है| समान रूप से यह सेक्स संबंधी सपने देखने के कारण होता है| वीर्य स्खलन होने की प्रक्रिया मस्तिष्क की होती है यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि आप सेक्स की कल्पना कर रही है या वास्तविक स्थिति में है|

वीर्य निकलने की अवस्था उन लोगों में अधिक देखी जाती है जिन्होंने यौन संबंध नहीं स्थापित किए स्वपनदोष की समस्या आम होती जा रही है| आजकल बहुत से पुरुष स्थिति का सामना कर रहे हैं और नींद व्यवस्था में ही उनका वीर्य स्खलन होने लगता है जो पुरुष अश्लील फिल्में देखने के शौकीन होते हैं उनमें यह समस्या अधिक देखी जाती है|

स्वपनदोष होने के लक्षण

  • भूख का कम हो जाना|
  • पेशाब में जलन होना|
  • पैरों के तलवों में पसीना आना,हाथों और पैरों का सुन्न हो जाना|
  • बालों का सफेद हो जाना और बालों का झड़ना|
  • दिल का धड़कना या धक- धक करना|
  • कमर में दर्द रहना , सीधा बैठा रह जाना|
  • किसी भी काम में मन का न लगना और आंखों में आलस्य और नींद भरी रहना|
  • दांतों और जोड़ों में सूजन आ जाना|
  • काले घेरे पड़ना, आंखों की रोशनी कम हो जाना, आंखों का गड्ढे के अंदर घुस जना|
  • लिंग का एक और झुक जाना और छोटा हो जाना|
  • गले में खराश और खांसी जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|

स्वपनदोष के कारण

1.खानपान और कब्ज – स्वपनदोष का मुख्य कारण खानपान है अत्यधिक मैच मसालों का सेवन करने से पेट में कब्ज जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है|

2.दूध से बने पदार्थों का सेवन- कई बार दूध से बने पदार्थ मैं भी मिठाई या गर्म दूध का सेवन करने से पुरुषों में वीर्य स्त्राव की समस्या हो जाती है और खाना खाते ही सो जाने से भी स्वपनदोष की समस्या हो जाती है|

3.पोर्नफिल्मे- पुरुषों के वीर्य स्त्राव का मुख्य कारण अश्लील फिल्में देखना है सेक्स के बारे में सोचने पर भी वीर्य स्त्राव की समस्या उत्पन्न होती है|

4.आकर्षण –पुरुष और स्त्री का आपस में आकर्षण होने पर भी स्वपनदोष हो जाता है|

5.हस्तमैथुन- हैंड प्रैक्टिस करने पर भी पुरुषों में वीर्य स्त्राव होने लगता है|

6.नशीले पदार्थ-नशीले पदार्थों का सेवन करना , तंबाकू , चरस , गांजा आदि नशीले पदार्थों का प्रयोग करने से स्वपनदोष रोग होने लगता है|

7.मानसिक तनाव –मानसिक तनाव भी स्वपनदोष रोग को बनाने का मुख्य कारण है कुछ खाद्य पदार्थ जैसे -अंडे , मांस ,मछली आदि का सेवन करने से स्वपनदोष रोग होने का खतरा बना रहता है|

8.गरम पदार्थो का सेवन –रात को सोते समय गरम पदार्थो जसे – चाय या कॉफी का सेवन नही करना चाहिये गरम पदार्थो का सेवन करने से वीर्य स्त्राव की समस्या उत्पन्न होती है|

स्वपनदोष को दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय

1.केला-भोजन के बाद केले की फली का सेवन करें केले की फली में कुछ बूंद शहद मिलाकर खाएं ऐसा करने से स्वपनदोष रोग नष्ट होता है और वीर्य बढ़ता है और बहना बंद हो जाता है|

2.आंवला-गोखरू ,सूखे आंवले और गिलोय इन तीनों को समान समान मात्रा में लेकर महीन पीस जान कर रख दें इसमें से 2 माशे चूर्ण घी और चीनी में मिलाकर खाने से स्वपनदोष  रोग नष्ट होता है याआंवले के जूस में हल्दी और शहद मिलाकर पीने से स्वपनदोष की समस्या से निजात मिलता है

3.मेथी के बीज-एक चम्मच शहद और दो चम्मच मेथी के बीज के जूस का मिश्रण बना लें और रात को सोने से पहले इस मिश्रण का सेवन करें मेथी के बीज से हार्मोन को संतुलित किया जा सकता है स्वपनदोष की समस्या काफी हद तक दूर होती है|

bad-am
बादाम ( bad-am )

4.बादाम-भीगे हुए बादाम के छिलकों को उतारकर बदाम को पीसकर एक पेस्ट बना लें और रात को सोने से पहले गर्म दूध में बादाम के पेस्ट को मिला कर पीने से स्वपनदोष की समस्या दूर होती है|

5.जो- जो को रात के समय भिगोकर रख दें और अगले दिन सुबह इसमें थोड़ा सा शहद मिला कर पीने से स्वपनदोष रोग से निजात मिलता है|

6.प्याज का रस-प्याज के रस में शहद मिलाकर इसका सेवन करने से स्वपनदोष की समस्या दूर होती है|

7.लहसुन-लहसुन में एलिसिन नामक पदार्थ होता है जिससे रक्त का प्रभाव ठीक ढंग से होता है सुबह उठकर लहसुन की दो तीन कलियां छीलकर खाने से स्वपनदोष रोग दूर होता है|

8.हरड़-हरड़ के चूर्ण में थोड़ा सा शहद मिलाकर इसका सेवन करने से स्वपनदोष दूर होता है|

Bbul
बबूल (Bbul)

9.बबूल –बबूल के नरम पते और कलियां लाकर उन्हें सुखाकर पीस लें अब इस चूर्ण में बराबर की मिश्री मिलाकर रख दे और इसका सुबह शाम पानी के साथ सेवन करने से स्वपनदोष रोग नष्ट हो जाता है|

10.अफीम– अफीम आधी रति, कपूर दो रत्ती और शीतल चीनी का छना हुआ चूर्ण इन तीनों को मिलाकर रात को सोते समय पानी के साथ सेवन करने से यह समस्या दूर होती है|

11.गुलाब-.गुलाब के ताजा फुल मिश्री के साथ खाकर, ऊपर से गाय का दूध पीने से स्वपनदोष रोग नष्ट होता है|

12.मूंगा भस्म-मूंगा भस्म चाटने से भी स्वपनदोष रोग खत्म होता है|

13.गाय का दूध –शुद्ध गंधक और 1 या 2 साल पुराना गुड दोनों को मिलाकर एक तोला खाने और ऊपर से गाय का दूध पीने से यह समस्या दूर होती हैं|

14. चोपचीनी-चोपचीनी का पिसा छना चूर्ण एक तोला, मिश्री एक तोला,घी एक तोला, तीनों को मिलाकर सुबह शाम साथ आठ दिन सेवन करने से लाभ मिलता है|

15.धनिया- धनिया में मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर बने हुए चूर्ण को 5 ग्राम मात्रा में लेकर ताजा ठंडे पानी के साथ सुबह प्रतिदिन सेवन करने से स्वपनदोष रोग नष्ट हो जाता है|

16।इमली-दूध में इमली के बीजों को भिगोकर इमली की निकाली हुई गिरियो में मिश्री मिलाकर मिश्रण बना लें अब इस मिश्रण का सेवन प्रतिदिन करते रहने से स्वपनदोष की रोग की समस्या समाप्त होती है|

17.त्रिफला – त्रिफला के काढ़े को रात को बनाकर रख दें और सुबह इसका सेवन करने से स्वपनदोष समाप्त हो जाता है |

स्वपनदोष रोग होने पर सावधानियां

  • मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए|
  • रात को जल्दी सो जाना चाहिए और सुबह सूर्योदय होने से पहले उठ जाना चाहिए|
  • व्यक्ति को मानसिक तौर पर स्वस्थ होना चाहिए अश्लील और सेक्स संबंधी फिल्मों को नहीं देखना चाहिए|
  • रात को सोने से पहले पेशाब करना ना भूले|
  • अपने मन को शांत रखने के लिए रोगी को ध्यान से योग करना चाहिए|
  • रात को सोते समय चाय या कॉफी नहीं पीनी चाहिए|
  • रात को सोते समय कसे हुए कपड़े नहीं पहने चाहिए|
  • हाथ, पैर और मुंह को ठंडे पानी से धो कर सोना चाहिए|

हस्तमैथुन(Masturbation)

हस्तमैथुन (Masturbation)

हस्तमैथुन

हस्तमैथुन को अंग्रेजी भाषा में हैंड प्रैक्टिस भी कहा जाता हैअधिक लोग हस्तमैथुन को गलत समझते हैं और हस्तमैथुन के टॉपिक पर बात करने में शर्म करते हैं हस्तमैथुन करने से सेहत पर हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन हफ्ते में एक दो बार हस्तमैथुन करने से आप वीर्य स्त्राव की समस्या से निजात पा सकते हैं हस्तमैथुन जिसे आम भाषा में मूठ मारना कहते हैं यानी अपने शरीर के अंगों को छूकर सेक्स की उत्तेजना को महसूस करना है पुरुष अपने हाथों से पेनिस को दबाकर ऊपर नीचे करने की प्रक्रिया करते हैं हस्तमैथुन करने की उम्र 15 से 18 साल के बीच में शुरू हो जाती है, अगर पुरुष और स्त्री आपस में मिलकर हस्तमैथुन करते हैं लेकिन कुछ लोगों को यह प्रक्रिया गलत लगती है हस्तमैथुन हफ्ते में एक दो बार कर लेना चाहिए और लगातार हस्तमैथुन करने से आप इसके आदि हो जाते हैं तो ऐसी स्थिति को सामान्य नहीं कहा जा सकता लगातार हस्तमैथुन करने से फायदे और नुकसान हो सकते हैं|

हस्तमैथुन के फायदे

1.मानसिक तनाव से निजात-आजकल मानसिक तनाव की समस्या एक आम समस्या हो गई है मानसिक तनाव को दूर करने में हस्तमैथुन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, हस्तमैथुन करने से मानसिक तनाव दूर होता है और अच्छा महसूस होता है

2.नींद आना-हस्तमैथुन करने पर ऑक्सीटॉसिन और एंडोर्फिन हार्मोन निकल जाते हैं हारमोंस के निकलने के दौरान बिना किसी चिंता के नींद आ आने लगती है|

3.शीघ्रपतन की समस्या से निजात – यौन संबंध बनाने से पहले हस्तमैथुन करने से आप संभोग का आनंद ले पाएंगे और आपको शीघ्रपतन की समस्या से निजात मिलेगा

4.योनि रोग से सुरक्षा-हस्तमैथुन करने से आप एचआईवी ऐड्स जैसी समस्याओं से बचे रहेंगे

5.वीर्य स्त्राव से छुटकारा – सप्ताह में एक से दो बार हस्तमैथुन करके वीर्य स्त्राव की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं

हस्तमैथुन के साइड इफेक्ट या नुकसान

हस्तमैथुन जीवन का एक हिस्सा है हस्तमैथुन के वैसे तो कोई नुकसान नहीं है लेकिन  ज्यादा हस्तमैथुन करने से साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं आइए जानते हैं हस्तमैथुन करने का हमारे शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है

1.लिंग में सूजन आना- जल्दी -जल्दी हस्तमैथुन करने से वीर्य की पहली निकलने वाला तरल पानी मांसपेशियों में चला जाता है जिसके कारण लिंग में सूजन आ जाती है और यह सुजन तब तक रहती है जब तक तरल पानी रक्त में नहीं चला जाता

2.लिंग की मांसपेशियों का टूटना- कई बार हस्तमैथुन करते समय व्यक्ति अपने लिंग को कसकर दबाती है या मोड़ते हैं ताकि वीर्य बाहर ना निकले लेकिन ऐसा करने से आपके लिंग की मांसपेशियां टूट जाती है और पायरोनी रोग होने पर लिंग टेढ़ा हो जाता है

3.शुक्राणुओं की संख्या में कमी- प्रतिदिन लगातार हस्तमैथुन करने से वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है जिसके कारण आपकी पिता बनने की क्षमता कम हो जाती है

4.शारीरिक कमजोरी- हस्तमैथुन करने से आपके शरीर में कमजोरी आती है ऐसा लगने लगता है जैसे आपकी शरीर की सारी ताकत खत्म हो गई हो

5.मानसिक तनाव होना- हस्तमैथुन करने के बाद आपने बुरा महसूस किया होगा हस्तमैथुन ज्यादा करने से मानसिक तनाव हो सकता है और आप अवसाद का शिकार हो जाते हैं ऐसा करने से कई बार बेचैनी का अनुभव होता है

6.अवैध संबंध बन्ना-कई लोग हस्तमैथुन अधिक करते हैं और लगातार  हस्तमैथुन करने से यौन इच्छाएं बढ़ने लगती है और वे अपराध करने लगते हैं जैसे अवैध संबंध बनाना

7.पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ना- हस्तमैथुन करने पर हमारे पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है और हमारा पाचन तंत्र धीमी गति से कार्य करने लगता है

8.लिंग में उत्तेजना का बंद होना-ज्यादा हस्तमैथुन करने से लिंग के उसको में चोट पहुंचती है और यह उत्तक नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण लिंग में उत्तेजना आना बंद हो जाती है जिससे व्यक्ति मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं|

हस्तमैथुन से होने वाली कमजोरियां

  • बालों का झड़ना
  • ज्यादा हस्तमैथुन करने पर लिंग का टेढ़ा हो जाना
  • समय से पहले ही वीर्य का स्त्राव होने लगता है
  • कमजोरी और थकान का अनुभव होना
  • लिंग में सूजन आ जाना
  • शुक्राणुओं की संख्या में कमी होना
  • लिंग की मांसपेशियों का टूटना

हस्तमैथुन से आई कमजोरी का ईलाज  आयुर्वेदा

1.दूध- दूध का सेवन करने से हस्तमैथुन से आई कमजोरी को दूर किया जा सकता है इसलिए प्रतिदिन कम से कम दो गिलास दूध पीना चाहिए दूध आपके शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है

2.पानी- पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से हस्तमैथुन की कमजोरी को दूर किया जा सकता है पानी का सेवन करने से शारीरिक तनाव और योन की समस्या दूर होती है पानी पीने से रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है

3.अदरक- अदरक में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं अदरक का सेवन करने से हस्तमैथुन  ती हुई कमजोरी को दूर किया जा सकता है  और हस्तमैथुन की उत्तेजना में कमी आती है व रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है

4.संतुलित आहार अपने प्रतिदिन के आहार में फल और हरी सब्जियों, मूंगफली को शामिल करें

5.केला- केले में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं केले को काटकर उसमें शहद लगाकर सेवन करने से हस्तमैथुन की कमजोरी को कुछ हद तक दूर किया जा सकता है

6.जामुन की गुठली- जामुन की गुठली को सुखाकर पीस लें और इस मिश्रण का प्रतिदिन पानी के साथ सेवन करने से हस्तमैथुन की कमजोरी काफी हद तक दूर होती

7.सेब अपने प्रति दिन की आहार में सेब को शामिल करें

8.व्यायाम करना- प्रतिदिन व्यायाम करने से हस्तमैथुन से आई कमजोरी को दूर किया जा सकता है

बालों का झड़ना (Hair loss issue)

बालों का झड़ना (Hair loss issue)

बालों का झड़ना

बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गई है यह समस्या महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है इन बालों के झड़ने और पथरी होने की समस्या महिलाओं में भी कम नहीं है|  इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं| कम बाल होने के कारण इंसान उम्र में भी अधिक दिखने लगता है|

 बालों का झड़ना और गंजेपन की समस्या से  हर कोई जूझ रहा है| बाल झड़ने की समस्या को डॉक्टरी भाषा में एलोपेसिया कहा जाता है| एलोपेसिया होने की समस्या कुछ लोगों में जेनेटिक होती है |वहीं इसके कुछ कारण भी होते हैं जैसे- पर्याप्त नींद न लेना, खानपान आदि प्रतिदिन 100 बालों का झड़ना सामान्य है क्योंकि उनकी जगह पर नए बाल आ जाते हैं और अगर बाल सिर्फ झड़ने लगते हैं और नहीं आते तो या चिंताजनक विषय बन जाता है और लोग गंजेपन का शिकार हो जाते हैं| आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन ने मिलने से भी बाल झड़ने लगते हैं और तनाव होने के कारण भी बाल झड़ने की समस्या हो जाती है|

बालों के झड़ने के कारण(Hair loss causes)

1.विटामिन बी– विटामिन बी की कमी शरीर में विटामिन बी की कमी के कारण बाल झड़ने लगते हैं क्योंकि विटामिन बी का सीधा असर बालों पर पड़ता है|

2.जिंक की कमी-जिंक एक खनिज पदार्थ है जो ऊतकों के विकास में मदद करता है शरीर में जिंक की कमी होने के कारण बाल कमजोर होने लगते हैं और टूटने लगते हैं जिंक की कमी से शरीर में प्रोटीन की कमी भी होने लगती है

3.प्रोटीन की कमी– शरीर में प्रोटीन की कमी के कारण बाल झड़ने लगते हैं |प्रोटीन बालों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| इसलिए हमें प्रतिदिन की आहार में मुर्गी मछली बींस सोया उत्पादकों दही अंडों को शामिल करना चाहिए|

4.धूम्रपान-धूम्रपान में जीनो टॉक्सिकेंट्स पाई जाती है जो बालों के रोम के डीएनए को नष्ट कर देते हैं जिसके कारण बालों के झड़ने की समस्या उत्पन्न होती है|

5.मानसिक तनाव– अगर आप किसी बात को लेकर टेंशन में है तो मानसिक तनाव होने के कारण आपके बालों के झड़ने की समस्या उत्पन्न हो सकती है|

6.जंक फूड-जंक फूड का सेवन करने से हमारी बॉडी को पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिलता जिसके कारण बाल झड़ने की समस्या हो जाती है|

7.अचानक वजन कम होना -अचानक वजन कम होने पर शारीरिक तनाव बढ़ने लगता है|

8.कीमो थेरेपी- कैंसर की बीमारी होने पर बाल झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है जिससे आप गंजेपन का शिकार हो जाते हैं|

9.बाल खींचना– बाल खींचने की आदत से भी बाल कमजोर होने लगते हैं इसमें व्यक्ति खुद पर ही काबू नहीं रख पाता|

10.ल्यूपस रोग-यह एक प्रकार की ऑटोइम्यून बीमारी है इसमें हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ ऊतकों पर हमला करती है और सूजन की समस्या उत्पन्न होती है जिससे बाल झड़ने लगते हैं|

11.हाइपोथायरायडिज्म के कारण-हाइपोथाइरॉएडिज्म गले में उपस्थित ग्रंथी में वृद्धि के कारण होता है | यह ग्रंथि शरीर की मेटाबोलिक प्रक्रिया वृद्धि और विकास में मदद करती है जब यह ठीक ढंग से कार्य नहीं करती तो बालों के झड़ने की समस्या पैदा हो जाती है|

12.हारमोंस में परिवर्तन– पुरूशो में हारमोंस में परिवर्तन आने के कारण भी बाल झड़ने की समस्या हो सकती है जिससे व्यक्ति गंजेपन का शिकार हो जाते हैं|

13.विटामिन बी की कमी– विटामिन बी की कमी से बीमार झड़ने लगते हैं क्योंकि विटामिन डी का सीधा असर बालों पर पड़ता है इसलिए हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में हो जैसे-बादाम , अंडा , अखरोट आदि को प्रतिदिन की आहार में शामिल करना चाहिए|

13.अवसाद रोधी दवा– अवसाद रोधी दवाओं का सीधा असर बालों पर पड़ता है यह बालों के झड़ने का मुख्य कारण है|

14.पोषक तत्वों की कमी– पोषक तत्वों की कमी बाल झड़ने का मुख्य कारण है| हमें प्रतिदिन अपने संतुलित आहार में पोषण युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमे विटामिन पर्याप्त मात्रा में हो जैसे- बादाम , अंडा , मछली ब्राउन राइस ब्रोकली इत्यादि।

अलग-अलग तरह के शैंपू अलग-अलग तरह के शेंपू प्रयोग में लाने से केमिकल्स के कारण बाल झड़ने की समस्या हो जाती है|

बालों के झड़ने की आयुर्वेदिक उपाय (Hair loss remedies)

1.आंवला रीठा– आंवला , रीठा बालों को झड़ने से रोकने के लिए मददगार साबित हुआ है|आंवले में विटामिन से भरपूर मात्रा में पाया जाता है| आंवला रीठाको रात को पानी में भिगोकर सुबह इससे बालों को धोने से बाल मजबूत होते हैं और बाल झड़ने की समस्या खत्म होती है|

2.प्याज का रस– प्याज में सल्फर की मात्रा पाई जाती है जो ब्लड सरकुलेशन बढ़ाने में आप की मदद करता है और आपके बालों को झड़ने से रोकता है| प्याज का रस बालों के स्कैल्प में लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दे और फिर धो ले ऐसा करने से आप बालों के झड़ने की समस्या से निजात पा सकते हैं|

3.जैतून का तेल-जैतून के तेल की बालों में मसाज करने से बालों के झड़ने की समस्या जड़ से खत्म होती है और यह बालों को मजबूत ही बनाते हैं|

4.दही और नींबू-आधा गिलास दही में थोड़ा सा नींबू मिलाकर पेस्ट बना लीजिए| अब इस पेस्ट को बालों के स्कैल्प में लगाएं इससे आपके बालों के झड़ने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी और डैंड्रफ की समस्या भी दूर होगी|

5.बादाम रोगन शिरीन- बादाम रोगन शिरीन तेल से तेल की मसाज करने से ब्लड सरकुलेशन अच्छे से हो जाता है और बाल झड़ने की समस्या खत्म होती है |सप्ताह में दो से तीन बार इस तेल की मालिश करने से आगे बाल झड़ना बंद हो जाएंगे|

6.धनिया– धनिया की पत्तियों के रस में दोगुना तिल का तेल मिलाकर उबालें की रस जल कर तेल  रह जाए फिर छानकर बोतल में रख दें और प्रतिदिन इस तेल से मालिश करें इससे आपके बाल झड़ने की समस्या खत्म होगी|

विटामिंस की कमी से झड़ने लगते हैं बाल (Hair loss vitamins)

उम्र के बढ़ने के साथ-साथ हमारे बालों के झड़ने की समस्या भी बढ़ने लगती है| बालों को झड़ने से रोकने के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें विटामिन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है| विटामिन  बालों को पोषण देने में हमारी मदद करते हैं जिससे जड़े मजबूत होती है और बाल झड़ने की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो जाती है| आइए जानते हैं कौन से विटामिन से बालों के झड़ने की समस्या को जड़ से खत्म करने में लाभदायक है|

1.विटामिन ए विटामिन ए में कुछ एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिससे बालों में नमी रहती है और  बालों के रूखी होने की समस्या भी खत्म होती है |कुछ खाद्य पदार्थ जैसे पालक दूध अंडे गाजर आम आदि मे पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है इसलिए इन खाद्य पदार्थों को अपने प्रतिदिन के आहार में शामिल करना चाहिए|

2.विटामिन बी 7- अखरोट, बादाम ,अंडा ,फूलगोभी आदि में काफी मात्रा में विटामिन b7 की मात्रा पाई जाती है इसलिए इन्हें प्रतिदिन की आहार में शामिल करना चाहिए |इससे आपके बाल जल्दी लंबे और मजबूत बनेंगे|

3.विटामिन सी– विटामिन सी प्राप्त करने के लिए नींबू, अमरुद ,स्ट्रौबरी जैसे फलों को उपयोग में लाना चाहिए यह बालों को सफेद होने से रोकता है और इसे रूखे पन की समस्या भी खत्म होती है और बालों का विकास होने लगता है|

4.विटामिन डी-विटामिन डी हमें धूप से प्राप्त होता है जिससे आपके बाल लंबे घने और मोटे होने लगते हैं|

5.विटामिन ई–मछली, बादाम, पालक,बींस ,दूध ,सूरजमुखी का बीज आधी का सेवन करने से विटामिन ई की प्राप्ति होती है |इस्लिए इन्हे प्रतिदिन के आहार में शामिल करें ऐसा करने से बाल चमकदार बनते हैं|

6.फोलिक एसिड-ब्रोकली ,ब्राउन,राइस ,हरी सब्जियां आदि का प्रतिदिन के आहार सेवन करना चाहिए जिससे आपके बाल मजबूत बनते हैं और बाल झड़ने की समस्या भी कम होती है|

हेयर फॉल सलूशन(Hair fall solution)

1.हमारे शरीर में पानी की कमी के कारण बालों के झड़ने की समस्या पैदा हो जाती है| हमें प्रतिदिन 2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए यह बालों को स्वस्थ रखता है|

2.गीले बालों में कंघी का ज्यादा  प्रयोग करने से बाल झड़ने की समस्या हो जाती है जिससे बालों को नुकसान पहुंचता है | इसलिए अपनी उंगलियों का इस्तेमाल करें ऐसा करने से बाल कम झड़ते हैं|

3.प्याज का रस प्याज के रस में सल्फर पाया जाता है जिससे ब्लड सरकुलेशन बढ़ता है और आपके बाल झड़ने कम हो जाते हैं रात को सोने से पहले प्याज का रस बालों में लगाएं और सुबह बालों को धो ले हफ्ते में दो-तीन बार ऐसा करने से आपके बालों के झड़ने की समस्या से निजात मिलेगा|

4.बीड़ी सिगरेट तंबाकू का सेवन करने से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है जिससे बालों झड़ने की समस्या हो जाती है | इसलिए शराब का सेवन कम करें|

5.बालों में पसीना आने के कारण भी बाल झड़ने लगते हैं और आप गंजेपन का शिकार हो जाते हैं |इसलिए लंबे बालों  को कटवाएऔर बालो मे पसीना न आने दे|

6.हमें प्रतिदिन शारीरिक व्यायाम करना चाहिए जिससे हार्मोन के सत्र में संतुलन बना रहता है और आपका मानसिक तनाव भी कम होगा जिससे बाल झड़ना भी बंद हो जाएंगे|

7.धनिया की पत्तियों के रस में दोगुना तिल का तेल मिलाकर उबालें की रस जल कर तेल  रह जाए फिर छानकर बोतल में रख दें और प्रतिदिन इस तेल से मालिश करें इससे आपके बाल झड़ने की समस्या खत्म होगी|

8.नींबू के रस की सिर में मालिश करने थोड़ी देर बाद बालों को धो लें ऐसा करने से बाल तेजी से लंबे होने लगते हैं|

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urineri tract infection)

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urineri tract infection)

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

यूरिन इन्फेक्शन को यूटीआई भी कहते हैं यह इंफेक्शन पेशाब से संबंधित अंगों में होता है जब कुछ कीटाणु मूत्रमार्ग से यूरिन में चले जाते हैं तो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो जाता है सबसे पहले किडनी पर असर पड़ता है और किडनी में सूजन आ जाती है यह इनफेक्शन ब्लड सरकुलेशन के सारे बाकी अंगों तक भी पहुंच सकता है उन्हें डैमेज कर सकता है|

मूत्र असंयमिता यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी एक बीमारी है इस बीमारी में व्यक्ति का यूरिन कभी भी निकल सकता है क्योंकि वह अपनी यूरिन पर नियंत्रण नहीं रख पाता दुनिया भर में करोड़ों लोग इस समस्या से पीड़ित हैं पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है|

मूत्र असंयमिता के प्रकार (Incontinence  types)

मूत्र असंयमिता के प्रकार- इसके  चार प्रकार के होते हैं:-

1.स्ट्रेस इंकंटिनेंस(stress incontinence)-इस रोग में व्यक्ति की पेट की निचली मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और वह अपने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रख पाता |यह  हंसने ,छिंक्ने और खासने के कारण हो सकता है| गर्भावस्था और शिशु का जन्म होना इस रोग का मुख्य कारण हो सकता है|

2. ओवरफ्लो इंकंटिनेंस(overflow incontinence)-इस रोग में व्यक्ति अपना मूत्राशय पूरी तरह से खाली करने में असमर्थ हो जाता है इसका मुख्य कारण है ट्यूमर और कमजोर मांसपेशियां और मूत्राशय पूरा भरने के बाद मुत्र लिक होने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है|

3. अर्ज इंकंटिनेंस (urge incontinence)-इस रोग में व्यक्ति को शौचालय तक पहुंचने की बहुत जल्दी रहती है और वह अपने मूत्र पर काबू नहीं रख पाता है फिर लीकेज की समस्या उत्पन्न होती है इसका मुख्य कारण है मांसपेशियों का कमजोर होना और नर्वस सिस्टम में नुकसान होना|

4. फंक्शनस इंकंटिनेंस(functions incontinence)-जब आप समय पर बाथरूम जाने के लिए पर्याप्त रूप से संचार नहीं कर सकते अर्थराइटिस जैसी समस्या के कारण यह परिस्थिति उत्पन्न होती है|

(मूत्रअसंयमिता) पेशाब  न  रोक पाने के लक्षण(Incontinence symptoms)

  • पेशाब करने में जलन और कठिनाई का अनुभव होता है
  • बार बार पेशाब का लगना लेकिन मूत्र का निकलना
  • मूत्र का रंग भूरे रंग का होना
  • कई बार मूत्र के साथ खून का आ जाना
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना इस रोग का मुख्य लक्षण है
  • गंध वाला भूरे रंग का पेशाब आना
  • इस रोग मे व्यक्ति को थकान और कमजोरी का अनुभव होता है
  • जब इनफेक्शन किड्नी तक पहुंच जाए तब बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है

मूत्रअसंयमिता  के कारण(Incontinence causes)

1.गर्भावस्था-हारमोंस में बदलाव से भी तनाव अस्मिता हो सकती है|

2.शिशु का जन्म होना– बच्चे को जन्म देने पर पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है जिस कारण मूत्राशय असंयमिता की समस्या उत्पन्न होती है|

3.अनुवांशिकता– अगर परिवार में मूत्रअसंयमिता की समस्या है तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

4.वजन ज्यादा होना-वजन ज्यादा होने से मूत्राशय की आस-पास की नसों पर दबाव पड़ने लगता है जिससे मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है हंसने  और खासी करते समय पेशाब में पेशाब पर नियंत्रण नहीं रख पाते|

5.धूम्रपान- धूम्रपान तंबाकू ,बीड़ी ,सिगरेट, शराब ,गुटखा पीने से इस रोग के होने की संभावनाएं बढ़ जाती है|

6.बढ़ती उम्र-जैसे-जैसे उम्र बढ़ने लगती है वैसे-वैसे  मूत्राशय की अक्षमता भी कम होने लगती है, अथवा मूत्र के नियंत्रित करने की शक्ति कम हो जाती है|

मूत्र असंयमिता की समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1.विटामिन सी-विटामिन सी का सेवन ऐसी फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिसमे विटामिन से भरपूर मात्रा में ही हो आंवले और संतरे हमें विटामिन से भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए इसका सेवन करें|

2.अधिक मात्रा में पानी का सेवन– पानी की कमी होने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है मन का रंग गुलाबी , बुरा और पीले रंग का हो जाता है इसलिए अधिक से अधिक मात्रा में पानी पिए|

3.विटामिन डी– मछली दूध अंडे की जर्दी इन सब में विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए इन पदार्थों का सेवन करें वह प्रतिदिन के आहार में शामिल करें सूरज की रोशनी से भी हमें विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मिलता है|

4.सेब का सिरका– यह मूत्र अस्यमिता की समस्या को नियंत्रित करता है यह आपके शरीर के विषाक्त पदार्थों को हटाकर मूत्राशय में संक्रमण को दूर करने में आपकी मदद करता है एक गिलास पानी में एक से दो चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर इसका दिन में दो से तीन बार सेवन करें|

5.कलीवर-यह एक प्रकार की ओषधि है यह मूत्र असयमिता के लिए एक टॉनिक के रूप में काम करता है एक कप गर्म पानी में इस जड़ी बूटी के दो से तीन चम्मच मिलाकर थोड़ी देर के लिए रख दे फिर इस मिश्रण को दिन में दो से तीन बार प्रयोग में लाएं|

मूत्र असंयमिता की समस्या से बचने के लिए उपाय:

इस समस्या से बचने के लिए आप इन सब पदार्थों का सेवन बंद कर दें जिन का वर्णन किस प्रकार से है

  • कैफ़ीन-कैफ़ीन में ड्यूरेटिक गुण होते हैं जिनकी वजह से ब्लैडर पर बुरा असर पड़ता है और उसकी मूत्र रॉकी रखने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए कॉफी का सेवन कम कर दे
  • शुगर-अगर आप मीठी चीजों का ज्यादा सेवन कर रहे हैं तो यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए शहद जैसी मीठी चीजों का सेवन कम कर दें
  • कोल्ड ड्रिंक्स– कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से बार बार पेशाब आने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है ब्लेडर पर बुरा असर पड़ता है और उसकी मित्र को रोके रखने की क्षमता भी कम हो जाती है
  • शराब-शराब में ड्यूरेटिक गुण होते हैं जिनकी वजह से आपको बार बार पेशाब लगने की समस्या उत्पन्न होती है इसलिए शराब का कम सेवन करें
  • पेय पदार्थ– अधिक मात्रा में पानी पीने के कारण यह समस्या हो जाती है पेय पदार्थों का सेवन न करने से डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है इसलिए भी पदार्थों का सेवन पूरी तरह से बंद न करने की बजाय कम सेवन करें

एसिडिटी (Acidity)

एसिडिटी (Acidity)

एसिडिटी

एसिडिटी की समस्या पेट से संबंधित एक आम समस्या है गर्मी में एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है, पाचन करने वाले किसी भी अंग में कोई खराबी हो जाने के कारण पेट से संबंधित समस्याएं शुरू हो जाती है खट्टी डकार आना, सीने में जलन होना , उल्टी आना, पेशाब में जलन आदि एसिडिटी के मुख्य लक्षण है जिनकी पाचन शक्ति खराब होती है उन्हें एसिडिटी की समस्या अधिक रहती है पेट में हाइड्रो क्लोरिक एसिड पाया जाता है जो खाने कोर्ट छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करता है और यह भोजन नली के संपर्क में नहीं आता कई बार विकृति आने पर भोजन नली अपने आप खुल जाती है और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन नली में पहुंच जाता है जिसके कारण सीने में जलन पेट से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती है एसिडिटी के रोगियों में कब्ज जैसी समस्याएं देखने को मिलती है|

एसिडिटी के लक्षण(Acidity symptoms)

  • गले में जलन और बेचैनी का अनुभव होना
  • पेट और सीने में जलन होना एसिडिटी रोग का लक्षण है
  • मछली या उल्टी आना भी एसिडिटी रोग का लक्षण है
  • गले की समस्याएं जैसे गले में खराश होना कई बार सीने में जलन के कारण पेट का अम्लीय द्रव गले तक वापस आ जाता है जिससे खट्टी डकार आने लगती है
  • लगातार सूखी खांसी आना भी एसिडिटी रोग का लक्षण है
  • वजन का घटना
  • कब्ज की शिकायत होना
  • पेट में गैस बन जाने के कारण पेट का फूलना एसिडिटी रोग का मुख्य लक्षण है
  • मुंह में सफेद परत का जमा हो जाना

एसिडिटी क्यों होती है (Acidity causes)

  1. धूम्रपान– धूम्रपान और शराब का सेवन करने से अमाशय में बहुत अधिक मात्रा में एसिडिटी बढ़ जाती है इसलिए धूम्रपान का कम सेवन करना चाहिए|
  2. तनाव– मनुष्य के शरीर में किसी भी बात को लेकर चिंता बढ़ती है और मन में तनाव बढ़ता है तो अमाशय में एसिड निकलने की मात्रा भी बढ़ जाती है|
  3. चटपटा और मसालेदार भोजन– चटपटा और मसालेदार भोजन खाने से एसिडिटी होने लगती है और खट्टी डकार आने लगती है जिसे सीने में जलन पेट से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती है|
  4. मांसाहारी खाना– मांसाहारी खाने में फैट की मात्रा ज्यादा होती है ऊपर से उससे बनाने के लिए तेल जैसे खाद्य पदार्थ का उपयोग किया जाता है जिस से एसिडिटी होने की संभावना बढ़ जाती है|
  5. रसायनों के संपर्क में आने से– किसानों की कीटनाशक और उर्वरक रसायन के संपर्क में आने से पेट में एसिडिटी होने की आशंका बढ़ जाती है|

एसिड रिफ्लक्स के लक्षण (Acid re flux symptoms)

  • एसिड रिफ्लक्स की समस्या होने पर पाचन क्रिया ठीक नहीं रहती और सीने में छाती में जलन होने लगती है
  • पेट के निचले हिस्से में जलन का महसूस होना
  • मूह मे वापिस भोजन के आने से डकारे आने लगती है
  • कई बार व्यक्ति को घबराहट भी होने लगती है

एसिड रिफ्लक्स के लिए घरेलू उपाय (Acid re flux remedies)

  • एसिड रिफ्लक्स होने पर मुलेठी का चूर्ण का सेवन करने से हमें एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है
  • गुड़ में मैगनीशियम होता हैएसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए खाना खाने के तुरंत बाद गुड़ का सेवन करें ऐसा करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए त्रिफला चूर्ण का प्रयोग भी लाभदायक है
  • दूध में मुनक्का डालकर उबाल कर इसे ठंडा करके पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और काली मिर्च मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • कच्चे जीरे को चबाने के बाद आधा गिलास पानी पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • कच्ची सौंफ चबाने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या से निजात मिलता है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या दूर होती है
  • तुलसी एसिड रिफ्लक्स की समस्या को कम करने में लाभदायक है तुलसी के कुछ पत्ते प्रतिदिन सुबह चबाने  से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  •   नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • पुदीने की पत्तियों को पानी में उबालकर पानी का सेवन करने से एसिडिटी में फायदा होता है
  • मूली का सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • नीम की छाल का चूर्ण या नीम की छाल को पानी में भिगोकर रात भर रखने से प्रतिदिन सुबह पानी का छानकर सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
Neem
नीम ( Ne em )

एसिडिटी मे क्या खाना चाहिए (Acid re-flux food to avoid)

  • खरबूजा- खरबूजे पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है इसलिए इसका सेवन करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है और एसिडिटी की समस्या भी भी दूर होती है
  • सौंफ-सौंफ की पत्तियों को खाने से नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • ब्रोकली-ब्रोकली ,गाजर का सेवन करने से पेट और सीने में जलन की समस्या दूर होती है एसिडिटी को भी ठीक करती है
  • पालक– हरी पत्तेदार सब्जियां कैसे पालक को प्रतिदिन की आहार में शामिल करना चाहिए अपनी पालक का प्रतिदिन सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • धनिया-धनिया में पर्याप्त मात्रा में पानी पाया जाता है जिससे एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • अजवाइन– अजवाइन का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से एसिडिटी की समस्या से आराम मिलता है
  • केला-केले का सेवन करने से जलन की समस्या दूर होती है यह प्रति दिन की आहार में केले का सेवन करना चाहिए
  • पाइनएप्पल– पाइनएप्पल में डाइजेस्टिव एंजाइम काफी मात्रा में पाया जाता है जो एसिड के स्तर को कम करता है व एसिडिटी की समस्या से आराम मिलता है
  • अदरक-अदरक में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होती है जो पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं जिससे कब्ज की समस्या दूर होती है

कोलेस्ट्रोल क्या होता है (What is Cholesterol)

कोलेस्ट्रोल क्या होता है? (What is Cholesterol)

कोलेस्ट्रोल क्या होता है ?

कोलेस्ट्रोल क्या होता है ?कोलेस्ट्रोल (Cholesterol) रक्त में पाया जाने वाला वसा है जो शरीर की कोशिकाओं का निर्माण करता है और ब्लड सरकुलेशन के रूप में जाना जाता है शरीर में कोलेस्ट्रोल का बढ़ा हुआ सतर कोरोनरी धमनीओं में अवरोध पैदा कर देता हैजब रक्त में इसकी मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, तो रक्त में थक्के जम जाते हैं, जिससे खून गाढ़ा होना, हार्ट अटैक ,आर्टरी ब्लॉकेज और दिल से संबंधित बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती हैयह कोशिकाओं की दीवारों का निर्माण करने और विभिन्न हार्मोंस को बैलेंस करने के लिए भी ज़रूरी होता है|

Cholesterol
कोलेस्ट्रोल क्या होता है ? (what is cholesterol )

कोलेस्ट्रोल के लक्षण(Cholesterol symptoms)

  • व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा पसीना आने लगता है
  • व्यक्ति की सांसे फूलने लगती है
  • इसमें व्यक्ति का सिर लगातार दर्द रहने लगता है यह कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने के कारण होता है
  • व्यक्ति का वजन लगातार बढ़ने लगता है
  • ब्लड प्रेशर का सामान्य से अधिक हो जाना कोलेस्ट्रोल बढ़ने का संकेत होता है
  • व्यक्ति को सीने में दर्द और बेचैनी का अनुभव होने लगता है
  • कोलेस्ट्रोल बढ़ने के कारण व्यक्ति की पीठ घुटनों कमर में अचानक दर्द रहने लगता है
  • व्यक्ति के दिल की धड़कन तेज होने लगती है कोलेस्ट्रोल बढ़ने के कारण दिल तक ब्लड सरकुलेशन ठीक ढंग से नहीं हो पाता जिससे धड़कने तेज होने लगते हैं

कोलस्ट्रोल बढ़ने का कारण(Cholesterol causes)

1.धूम्रपान– सिगरेट शराब का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है जिससे हम हार्ट अटैक , डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो सकते हैं

2.बढ़ती उम्र -उम्र के बढ़ने के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल के स्तर में में परिवर्तन आ जाता है

3.फास्ट फूड का सेवन– फास्ट फूड का सेवन करने से भी कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है

4.वसायुक्त भोजन का सेवन– वसायुक्त भोजन जैसी मछली चिकन आदि का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है

5.अनुवांशिकता-अनुवांशिकता भी कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ाने का मुख्य कारण है यदि आपके परिवार के सदस्यों को उच्च कोलेस्ट्रोल था तो आप भी इस समस्या की चपेट में आ सकते हैं

6.गतिविधि– शारीरिक गतिविधि का न  होना कोलेस्ट्रोल के स्तर को बढ़ा सकता है

कोलेस्ट्रोल का सतर(Cholesterol level)

शरीर में नार्मल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 मिलीग्राम होनी चाहिए कोलेस्ट्रोल रक्त में पाया जाने वाला वसा है कोलेस्ट्रोल शरीर में कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और हारमोंस का निर्माण करने का काम करता है शरीर में कोलेस्ट्रोल का बढ़ा हुआ सतर कोरोनरी धमनीओं में अवरोध पैदा कर देता है जिससे खून गाढ़ा होना, हार्ट अटैक ,आर्टरी ब्लॉकेज और दिल से संबंधित बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है

कोलेस्ट्रॉल का स्तर को बैलेंस बनाने के लिए गुड़ का सेवन करना चाहिए गुड कोरोनरी हार्ट डिजीज को होने से रोकता है और यह कॉलेस्ट्रोल को कोशिकाओं से लीवर में ले जाकर वेट पदार्थों के साथ शरीर से निष्कासित हो जाता है

कोलेस्ट्रोल कैसे कम होता है (How to Cholesterol decrease )

1.टमाटर -टमाटर में लाइकोपीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है

2.बादाम -बादाम खाने से कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम किया जा सकता है यह हरदे को स्वस्थ बनाने में मददगार साबित होता है

cholesterol
बादाम (Ba-dam)

3.सेब का सेवन– सेब में पेक्टिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में हमारी सहायता करती है सेब में एंटी ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो कोलेस्ट्रोल के सतर को कंट्रोल करते हैं

4.अनार -अनार में पोली फेनॉल पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने के साथ-सथ हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है

5.विटामिन सी– विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा को हमें अपने प्रति दिन के आहार में शामिल करना चाहिए जिनमें आंवला, शिमला, मिर्च ,ब्रोकली आदि शामिल है

6.विटामिन ई– जैतून के तेल मे पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है

7.लहसुन-प्रतिदिन सुबह लहसुन की एक दो कलियां छीलकर खाने से कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम किया जा सकता है

8.सुबह का नाश्ता -सुबह के नाश्ते में एक कटोरी ओट्स या उपमा का सेवन करना चाहिए और नाश्ते के बाद एक फल जैसे सेब या पपीते का सेवन करना चाहिए जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को बनाए रखने में हमारी मदद करता है

9.रात का भोजन -जैतून के तेल में तला हुआ चिकन और एक कप ब्राउन राइस का सेवन करना चाहिए जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को बनाए रखता है

उच्च कोलेस्ट्रोल को कम करने के आयुर्वेदिक इलाज(High cholesterol treatment)

1.प्याज– एक चम्मच प्याज के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर का प्रतिदिन सेवन करने से कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है इसके अलावा प्याज लहसुन व अदरक का सेवन प्रतिदिन अपने आहार में करें

2.आंवला- एक चम्मच आंवला के पाउडर को सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में डालकर पीने से कोलेस्ट्रोल के बढ़ते स्तर को कम किया जा सकता है यह बहुत जल्दी असर करता है

3.नारियल का तेल– नारियल के तेल का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल कम होता है

4.संतरे का जूस -संतरे में विटामिन से प्राप्त मात्रा में पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रतिदिन संतरे के जूस का सेवन करने से शरीर में  कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल किया जा सकता है

5.ड्राई फ्रूट्स– ड्राई फ्रूट्स को अपने प्रति दिन की आहार में शामिल करने से कोलस्ट्रोल के सत्र को कम किया जा सकता है

6.व्यायाम करना– प्रतिदिन व्यायाम करने से कोलेस्ट्रोल की सेटिंग को कंट्रोल किया जा सकता है

7.: धनियाधनिया को प्रतिदिन के आर में भोजन के साथ उपयोग में लाया जाना चाहिए

8.गुग्ग्ल-यह एक प्रकार की औश्धि होती है जो उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं

कोलेस्ट्रोल टेस्ट(Cholesterol test)

कोलेस्ट्रोल की स्तर की की जांच करने के लिए ब्लड सैंपल ले जाता है यह टेस्ट अधिकतर सुबह खाली पेट की किया जाता है यदि आप अच्छा कोलेस्ट्रोल यानी एचडीएल और कोलेस्ट्रोल सतर का परीक्षण कर रहे हैं तो आप पहले से खाना खा सकते हैं और यदि आप क्राफ्ट कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल और कोलेस्ट्रोल सतर का परीक्षण कर रहे हैं तो आपको अपने परीक्षण से कुछ घंटे पहले पानी के अलावा कुछ भी नहीं खाना चाहिए|

कोलेस्ट्रोल का टेस्ट 20 साल की उम्र से शुरू हो जाता है महिलाओं को 45 साल की उम्र में इसकी जांच शुरू कर देनी चाहिए और पुरुषों में 35 साल की उम्र में कोलेस्ट्रोल के सतर का परीक्षण करना चाहिए यदि आप मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त है तो हर साल कोलेस्ट्रोल का ऑपरेशन करवाते रहना चाहिए|

टीडीएस (Total dissolved solids)

टीडीएस (Total dissolved solids)

टीडीएस

टीडीएस(Total dissolved solids) एक घुलनशील ठोस पदार्थ है जिसमें अकार्बनिक लवण कैल्शियम ,मैग्नीशियम, सोडियम,पोटैशियम ,बाइकार्बोनेट, क्लोराइड और सफेद और कुछ कार्बनिक पदार्थ पानी में पाए जाते हैं|

टीडीएस का उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं,शुद्ध है या नहीं पानी की अशुद्धियों केवल को भी  मापा जाता है टीडीएस यह भी बताते हैं कि पानी में रासायनिक अशुद्धियां मौजूद है या नहीं पानी में अशुद्धियों को बताने वाला टीडीएस कम होना चाहिए पानी से हमारे शरीर को नमक ,खनिज लवण आदि आवश्यक  तत्व मिलते हैं इसलिए पानी में खनिज पदार्थों का होना भी आवश्यक होता है टीडीएस को एमजी प्रति इकाई मात्रा यानी मिलियन की इकाइयों में निर्धारित की जाती है|

फ्लोराइड से नुकसान देने वाले रसायनों को छोड़ दिया जाए तो पीने के पानी में छोटी मात्रा में खनिज रहनी चाहिए लेकिन इसकी मात्रा जरूरत से अधिक नहीं होनी चाहिए|

पीने के पानी में टीडीएस का क्या महत्व होता है (TDS of drinking water)

आइए जानते हैं टीडीएस क्या है टीडीएस का पीने के पानी में क्या महत्व है और प्यूरीफायर कितने प्रकार के होते हैं और किस तरह से कार्य करते हैं इनका वर्णन इस प्रकार से है:-

पानी के बिना जीवन असंभव है हमारे शरीर मे लगभग 60 से 70 परसेंट पानी की मात्रा उपलब्ध है पानी में विधायक गुण होते हैं जिसके कारण गंदगी आसानी से घुल जाती है पानी की वजह से शरीर  के जहरीले पदार्थ जब भी हम पानी पीते हैं तो, हमें यह देखना चाहिए कि पानी पीने योग्य है या नहीं शुद्ध पानी बे स्वाद  और बिना गंध का होता है|

पानी को  टीडीएस के सतर पर निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है:-

  • मीठा पानी-मीठे पानी में टीडीएस का सतर एमजी या लेटर में व्यक्त किया जाता है मीठे पानी में टीडीएस का सतर 500 मिलीग्राम या लीटर से कम यानी टीडीएस जीरो पॉइंट 5 पीपीटी होना चाहिए|
  • खारा पानी-खारे पानी में टीडीएस का सतर पीपीएम में व्यक्त किया जाता है खारे पानी में टीडीएस का सतर 30000 से 40000 मिलीग्राम मीटर यानी टीडीएस 30 से 40 पीपीटी होना चाहिए|
  • ब्रैकिशपानी-ब्रैकिश पानी में टीडीएस का सतर 500 से 30000 मिलीग्राम लीटर यानी टीडीएस जीरो पॉइंट 5 से 30 पीपीटी होना चाहिए
  • हाइपर सलाइन पानी-इसमें टीडीएस का सतर  40,000 से अधिक मिलीग्राम लीटर यानी टीडीएस 40 पीपीटी या इससे अधिक होना चाहिए|

500 मिलीग्राम लीटर पानी के टीडीएस मुल्य को कठोर माना जाता है और टीडीएस के मूल्य को कम करने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे पानी शुद्ध किया जा सके जैसे- कार्बन फिल्टर आरो यानी रिवर्स ऑस्मोसिस है:-

1RO(reverse osmosis) -आरो को रिवर्स ऑस्मोसिस के नाम से जाना जाता है आरओ वाटर प्यूरीफायर ऐसी तकनीक है  जिसमें  प्रेशर डाल कर  पानी को शुद्ध किया जाता है आरो का उपयोग करने पर घुले हुए ठोस पदार्थ नष्ट हो जाते हैंआरओ वाटर प्यूरीफायर का पानी हर कोई प्रयोग मिला रहा है लेकिन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार आरओ वाटर प्यूरीफायर का पानी का लगातार सेवन करने से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती हैआरो को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है|

  • सेडिमेंट फिल्टर: इसका मुख्य कार्य पानी से रेत धूल के कण निकालकर पानी को शुद्ध करना है|
  • कार्बन फिल्टर: इसका उपयोग पानी के रंग और गंदगी को दूर करने में किया जाता है रिवर्स ऑस्मोसिस मेंब्रेन: इसका उपयोग पानी में पाए जाने वाले सॉलिड पार्टिकल को बाहर करने के लिए किया जाता है|
  • यूवी लैंप: आरो मेंब्रेन पानी में पाई जाने वाली मैग्निशियम , क्लोरीन , आयरन , सोडियम को नष्ट कर देता है जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है यह आरो का मुख्य प्रकार है|

पानी में पाए जाने वाले अकार्बनिक पदार्थ मैग्निशियम, कैलशियम, पोटैशियम  आदि जो निश्चित मात्रा में स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है लेकिन जब इन का स्तर बढ़ जाता है तो यह चिंता का विषय बन जाता है पानी की शुद्धता का पता लगाने के लिए टीडीएस को प्रयोग में लाया जाता है पानी में टीडीएस का सतर 500 पीपीएम तक पीने योग्य है अगर इसका सतर बढ़ जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

2.यू एफ- (UF)अल्ट्रा फिल्ट्रेशन यूएफको अल्ट्रा निस्पंदन के नाम से जाना जाता है यू एस निलंबित ठोस पदार्थ और वजन वाली सामग्री को पानी से बाहर निकाल देता है|

3.यूवी वाटर प्यूरीफायर यह ट्यूब के माध्यम से पानी को शुद्ध करता है इसका उपयोग पानी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवो को मारने के लिए किया जाता है यह पानी को साफ करता है|

TDS of drinking water
TDS of drinking water

टीडीएस का सत्तर (TDS quantity)

टीडीएस का उपयोग पानी की शुद्धता को जांचने के लिए किया जाता है और पानी की कठोरता को मापने के लिए टीडीएस मीटर उपकरण को प्रयोग में लाया जाता है पानी में टीडीएस का सतर कम होना चाहिए पानी में टीडीएस कम करने के लिए आरओ प्यूरीफायर यू एफ यूवी अभी तक नीतियों को प्रयोग में लाया जाता है यह पानी के सूक्ष्म जीवो को नष्ट कर देता है और पानी को शुद्ध करता है।

डब्ल्यूएचओ(WHO) वर्ल्ड स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 100 से डेढ़ सौ टीडीएस के पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और हजार टीडीएस से ज्यादा सतर वाला पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है यह व्यक्ति की मृत्यु का कारण भी बन सकता है|

BIS मानक ब्यूरो के अनुसार पानी में टीडीएस का स्तर 500 पीपीएम सही माना गया है अगर पीने के पानी का कोई स्रोत नहीं है तो इसका सतर हजार पीपीएम तक नियंत्रित किया जा सकता है लगभग 300 पीपीएम का पानी पीने की योग्य माना गया है टीडीएस के स्तर को कम करने से पानी के पीएच पर भी असर पड़ सकता है बीआईएस के अनुसार पीएच का सतर 6 .5 से 8 .5 सही माना गया है।

टीडीएस मीटर (TDS Meter)

टीडीएस मीटर पानी की कठोरता को जांचने के लिए टीडीएस मीटर का उपयोग किया जाता है यह एक डिजिटल टीडीएस मीटर है जिससे पानी को शुद्ध किया जाता है टीडीएस मीटर उपकरण की मदद से पानी की टीडीएस स्तर को मापा जाता है इसका प्रयोग हैंड पंप बारिश के पानी नहर का पानी वाटर प्यूरीफायर के पानी आदि की टीडीएस स्तर को मापने के लिए किया जा सकता है टीडीएस का कम सतर हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है|

TDS Meter
टीडीएस मीटर ( TDS Meter )

आरो का पानी पीने के नुकसान (Side effect of RO water)

पानी में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व मौजूद होते हैं जैसे:- मैग्नीशियम , पोटेशियम , कैल्शियम , आयरन आदि मिनरल्स शामिल होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है|

वाटर प्यूरीफायर जब पानी को प्यूरिफाई करता है तो इसमें पोषक तत्व जैसे- मैग्निशियम , पोटैशियम ,आईरन , कैल्शियम आदि मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं और हमारे शरीर को पोषक तत्वों ने मिलने के कारण हम कई तरह की बीमारियों की चपेट में आने लगते हैं जो लोग लंबे समय से वॉटर प्यूरिफाई के पानी का प्रयोग कर रहे हैं उन्हें दिल की बीमारी मानसिक कमजोरी सिरदर्द पाचन क्रिया में समस्या होने लगती है|

1.मांसपेशियों में कमजोरी-आरो के पानी का सेवन करने से पानी में पाए जाने वाले कैल्शियम पूरी तरह से नष्ट हो जाता है और हमारे शरीर को पोषक तत्वों ने मिलने के कारण हड्डियों में कमजोरी आने लगती है और हड्डियों में दर्द देने लगता है इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेता है|

2थकान और कमजोरी का अनुभव -आरो का पानी पीने से पानी में पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट मैग्निशियम , कैलशियम , पोटैशियम नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण हमारे शरीर में ऊर्जा का संचार ठीक ढंग से नहीं हो पाता और हम थकान का अनुभव करते हैं।

3.मानसिक तनाव– आरो के पानी का सेवन करने से मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है भिन्न को नियंत्रित क्रियाशील बनाए रखने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट की आवश्यकता होती है जो प्यूरीफायर के कारण नष्ट हो जाते हैं और मानसिक तनाव के शिकार हो जाते हैं|

4.दिल की बीमारियां –आरो का पानी पीने से दिल से संबंधित बीमारियां होने लगती है जैसे हार्ट अटैक।

आरओ का पानी पीने के फायदे(benefit of RO water)

RO वाटर प्यूरीफायर पानी को प्यूरिफाई कर के सभी अशुद्धियों को नष्ट कर देता है और क्लोरीन जैसी हानिकारक पदार्थों को बाहर निकाल देता है

वॉटर प्यूरीफायर पीने के पानी का भारीपन दूर कर देता है और पानी को प्यूरिफाई करके भूल कर निकाल कर बाहर कर देता है

आरो का पानी पीने से पाचन तंत्र एक तरह से काम करता है इस पानी के सेवन करने से खाना भी अच्छी तरह से बनता है|

एलर्जी नाक की (Allergic rhinitis)

एलर्जी नाक की (Allergic rhinitis)

एलर्जी नाक की

एलर्जी नाक की समस्या एक आम समस्या बन गई है| यह नाक से जुड़ी बीमारी है| यह आजकल सभी लोगों में देखने को मिलती है| हमारी नाक प्रतिदिन की शरीर की क्रियाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| यह सांस के द्वारा शरीर में प्रवेश करने वाले धूल के कणों और हानिकारक पदार्थों को अंदर जाने से रोकती है लेकिन जब यह पदार्थ किसी तरह से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं तो हमारा इम्यून सिस्टम इनके प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करता है और हमें एलर्जी की समस्या होने लगती है|

एलर्जी नाक की एनर्जन  की वजह से होती है इसमें लगातार छीके आना, नाक से पानी बहना और नाक में खुजली होने जैसे लक्षण नजर आते हैं| इसके अलावा बुखार होने की संभावना भी बढ़ जाती है| नाक में होने वाली एलर्जी को एलर्जीक राइनाइटिस कहते हैं| धूल, मिट्टी, प्रदूषण, मौसमी बदलाव और परागकण के शरीर के संपर्क में आने से एलर्जीक राइनाइटिस की समस्या उत्पन्न होती है |यह बीमारी हमारी दिनचर्या को अत्यधिक प्रभावित करती है| इसका सही समय पर इलाज न करने पर अन्य बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है| एलर्जीक राईनाइट्स होने पर अन्य बीमारियों जैसे- साइनस और अस्थमा जैसी-समस्याएं उत्पन्न हो सकती है|

Allergic rhinitis
एलर्जीक राईनाइट्स (Allergic rhinitis)

एलर्जीक राईनाइट्स के लक्षण(Rhinitis symptoms)

  • छींके आना
  • नाक से पानी  बहना
  • आंखों और नाक में खुजली होना
  • लगातार सिर दर्द रहना
  • नाक का बंद होना
  • ग्ले मे खराश और दर्द होना
  • एलर्जी के कारण कुछ लोग अस्थमा बीमारी के शिकार हो जाते हैं और व्यक्ति को सांस लेने मे कठिनाई का अनुभव होता है|
Allergic rhinitis
एलर्जीक राईनाइट्स ( Allergic rhinitis )

एलर्जीक राईनाइट्स के कारण(Rhinitis causes)    

1.परागकण-कुछ लोगों को फूलों के पराग कणों के कारण एलर्जी की समस्या हो सकती है |ऐसे पर्यावरण में जहां अधिक पेड़-पौधे हो वहां आपको एलर्जीक राईनाइट्स होने की संभावना ज्यादा होती है|

2.लाइफ़स्टाइल-आपकी दिनचर्या का आपके स्वास्थ्य पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है| आपके घर की गद्दी और तकिए गंदे होने पर धूलके कण आसानी से शरीर में प्रवेश करने लगते हैं और आपको एलर्जीक राईनाइट्स होने की संभावना बढ़ जाती है|

3.फफूंदफफूंद भी एलर्जी होने का मुख्य कारण है इसलिए अपने बाथरूम और खिड़कियों पर फफूंद न जमने दे |

4.संपर्क में आने सेकिसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से जो इस रोग से पहले से ही ग्रस्त हो आपको इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

5.धूम्रपान गर आपको धूम्रपान से एलर्जी है तो धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने से आपको एलर्जीक राईनाइट्स होने की आशंका होती है|

6.तापमान में अचानक परिवर्तन आने के कारण-तापमान में अचानक परिवर्तन आने के कारण धूल कण किसी भी तरह शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और आप एलर्जीक राईनाइट्स के शिकार हो जाते हैं|

7.मौसम में बदलाव- मौसम में बदलाव आने के कारण एलर्जीक राइनाइटिस होने की संभावना बढ़ती है|

8.खुशबु -ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे –पाउडर,परफ्यूम,साबुन ,शैम्पू आदि का प्रयोग करने से सिर दर्द और नाक की एलर्जी से संबन्धित समस्याएँ उत्पन हो सकती हैं |

9.प्रदूषण से एलर्जी –कारखानो व चिमनियों से निकलने वाला धूँआ, हवा और पानी को दूषित कर देते हैं| हवा और पानी के संपर्क मे आने से एलर्जी होने लगती है |

10.कीटपतंग –घर के आस पास कॉकरोच,मकड़ी, डेंगू,टीडी आदि के काटने से एलर्जी होने लगती है |

11.आनुवांशिकता-अगर आपके घर मे किसी व्यक्ति को कोई एलर्गी है तो ऐसे व्यक्ति के संपर्क मे आने से आपको एलर्जी हो सकती है |

एलर्जीक राइनाइटिस से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे (Rhinitis treatment)

1.भाप लेने सेएक बर्तन में डेढ़ से दो गिलास गरम पानी ले और उसमें 8 से 10 बूंदें किसी भी तेल की डाल ले अब अपने सिर को तौलिए से ढक ले और झुककर भाप को सांस के द्वारा अंदर ले भाप लेने से एलर्जी की समस्या को खत्म किया जा सकता है और यह बंद नाक को खोलने में हमारी मदद करता है|

2.सेब का सिरका एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद और एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से नाक बहने की समस्या से निजात मिलता है और यह सूजन को भी कम करने में सहायक है|

3.हल्दी रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में हल्दी मिलाकर इसका सेवन करने से नाक की एलर्जी की समस्या दूर होती है और यह सूजन को भी कम करता है|

4.अदरक-अदरक में एंटीहिस्टामाइन गुण पाए जाते हैं जो सूजन को कम करने में हमारी मदद करते हैं किसी बर्तन में तो एक गिलास पानी गर्म करके उसमें छोटा सा अदरक का टुकड़ा डालकर उबाल ले जब मैं पानी आधा रह जाए तब उसमें एक चम्मच शहद और एक नींबू का रस मिलाकर पी ले ऐसा करने से एलर्जीक राईनाइटिस की समस्या दूर होती है|

5.अरंडीकातेल-नाक की एलर्जी होने पर आधा कप पानी मे अरंडी के तेल की 4 से 5 बुँदे डालकर सुबह खाली पेट पीने से एलर्जी की समस्या दूर होती है |  

6.लहसुन-लहसुन में एंटीहिस्टामाइन गुण होते हैं इसलिए प्रतिदिन सुबह उठकर लहसुन की दो से तीन कच्ची कलियों को खाने से एलर्जी की समस्या दूर होती है|

7.मुलेठी-मुलेठी का प्रयोग करने से एलर्जीक राइनाइटिस यानी नाक की एलर्जी के उपचार में मदद मिलती है इसलिए एक गिलास पानी में मुलेठी को उबालकर जब उसका पानी आधा रह जाए तब इस पानी का सेवन करें|

8.नींबू और शहद-1 गिलास गुंगुने पानी मे 1 नींबू निचोड़ लें और 1 चममच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से एलर्जी की समस्या से निजात मिलता है और शहद का सेवन करने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकाल आते हैं और वजन भी कम होने लगता है |

 9.ग्रीनटी ग्रीन टी मे शहद मिलाकर इसका सेवन करने से एलर्जी नाक की समस्या से निजात मिलता है|

एलर्जीक राइनाइटिस होने पर सावधानियां

1.घर में वेक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें|

2.धूल कणों और तापमान में परिवर्तन होने पर यह समस्या उत्पन्न होती है इसलिए तब तापमान में अचानक परिवर्तन आने पर बचाव करें|

3..घर से बाहर निकलने पर मुंह पर कपड़ा बांधे और आंखों पर चश्मा लगाएं|

4.गर्म वातावरण से ठंडे वातावरण में प्रवेश न करें|

5.गद्दो औरतकियों पर कवर चढ़ा कर रखें और इन्हें हफ्ते में एक बार तो कर धूप लगवा दें|

6.फफूंद भी एलर्जी होने का मुख्य कारण है इसलिए बाथरूम और खिड़कियों पर फफूंद न जमने दे इसलिए पानी को लीक न होने दे|

7.जिस पदार्थ से हमें एलर्जी है हमें उस पदार्थ के संपर्क में नहीं आना चाहिए|

8.अधिक एलर्जी होने पर दवाओं का सेवन करें|

9.अगर आपको पालतू जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में न रखें और बाल वाले जानवरों से दूर रहें|