उदर रोग

 उदर रोग का तात्पर्य संबंधित रोगों की है यह रोग कब्जियत यानी मंदाग्नि से पैदा होता है इसके अनेक रूप होते है अफारा , कमजोरी अग्नि का मंदा पन सूजन अंगों में गिलानी ,मल का रुकना  , जलन होना|

उदर रोग के लक्षण

बच्चों और वयस्कों में उदर रोग के लक्षण अलग-अलग होते हैं वयस्कों के लिए सबसे आम संकेत है जैसे-

  • इस रोग में व्यक्ति को थकान का अनुभव होता है|
  • इस रोग में व्यक्ति का वजन घट जाता है|
  • इस रोग में व्यक्ति के पेट में गैस यानी कब्ज और व्यक्ति को उल्टी का भी अनुभव हो सकता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को दस्त लग जाते हैं|
  • इस रोग में व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को पेशाब और सीने में जलन का एहसास होता है |

उदर रोग के कारण

  1.   मूत्राघात-: अत्यंत तीव्रता से गमन धूप में चलना , मल मूत्र के वेग को रोकना , अधिक शर्म दूषित योनि वाली स्त्रियों के सहवास खट्टी वस्तुओं का सेवन और चोट लगने से स्त्री पुरुषों की मूत्र इंद्री में जख्म और वीर्य क्षीण होने लगता है इसी को मूत्रघात कहते हैं|

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • शराब में काला नमक मिलाकर पीने से मूत्रघातरोग आराम हो जाता है
  • गोखरू , अरंडी , कीचड़ और शतावर को दूध में औटा कर पीने से आराम हो जाते हैं |
  • गुड , घी और दूध इनको मिलाकर पीने से  पेशाब के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं|
  • सफेद चंदन को चावलों के जल में घिसकर और मिश्री मिलाकर पीने और औटाये  हुए दूध को शीतल करके उसके साथ भोजन करने से खून समेत उषण वात रोग नष्ट हो जाता है|
  • लोहे की भसम महीन पीसकर और शहद में मिलाकर 3 दिन खाने से इस रोग में आराम मिलता है|
  • मिश्री पीसकर दही के तोड़ के साथ खाने से सब तरह के मूत्र कृचछरोग आराम हो जाते हैं|
  • आमलोके छह मासे चूर्ण में गुड मिलाकर खाने से सब तरह के रोग नष्ट हो जाते हैं|

2.प्लीहा रोग-प्लीहा  पीलली को कहते हैं रुधिर एवं कफ के दूषित हो जाने से मलेरिया आदि जबर से अत्यधिक कुनैन सेवन से या जबर में खाने से इसकी वृद्धि होती है |

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • यदि तिल्ली में दर्द अत्यधिक हो तो दर्द का नाश करने का उपाय करना चाहिए जैसे गर्म जल से सेक करे|
  • प्लीहा चिकित्सा में रोगी का पेट साफ करना आवश्यक होता है इसका पहले उपाय करना चाहिए नई तिल्लीवाले को दस्तावर दवा दे सकते हैं पर पुरानीतिल्लीमें द्स्तावरदवा या जुलाब देना हानिकारक होता है|
  • मूली के बीज पीसकर सिरके में मिलाकर खाने से तिल्ली गल जाती है|
  • लड़के का तीन चुल्लू पेशाब सवेरे नित्य कुछ दिन तक पीने से रोग नष्ट हो जाता है|
  • झाऊ की पत्तियां लाकर सुखा ले और पीस छान ले फिर बराबर की शक्कर मिलाकर रख दे इनमें से 4 माशे दवा नित्य खाने से तिल्ली आराम हो जाती है|
  • ऊंटनी का दूध और पेशाब पीने से तिल्ली आराम हो जाती है|
  • नमदें का टुकड़ा सिरके में भिगोकर तिल्ली पर बांधने से तिल्ली रोग आराम हो जाता है
  • अजवाइन खाने से भी तिल्ली रोग नष्ट हो जाता है|
  • काली मिर्च .टी पीपर भुनी फिटकरी ,गुना सहागा ,अजवाइन, कटाई खारी नॉन, लाहोरी नून ,आमा हल्दी और जवाखार बराबर बराबर लेकर  पीस छानकर पानी के साथ खरल करें और जंगली बेर के समान गोलियां बनाकर खाने से लाभ होता है|

3.यकृत रोग-प्लीहा और यकृत एक ही कारण से बढ़ते हैं इसके अतिरिक्त अधिक शराब पीने और बवासीर आदि के रोगों का खून बहना आदि के बंद हो जाने से भी यकृत बढ़ता है अंग्रेजी में इसे लीवर कहते हैं जब यह बढ़ता है तो अनेक रोगों को साथ लेकर आता है बच्चों में यह रोग अधिक होता है|

यकृत
यकृत

यकृत चिकित्सा आयुर्वेदिक नुस्खे

  • यकृत के बढ़ जाने से उसमें पीड़ा मालूम हो तो उस पर बारंबार अलसी की  पुलिटस बांधने से लाभ होता है
  • अगर यकृत की खराबी से पित्त बहुत ही बढ़ गया हो नेत्र मुख मल मूत्र पीले पड़ गए हो तो आमले गिलोय और हर्ट के दो तोले काडे में दो रत्ती मंडूर भस्म डालकर पीने अथवा कासनी और मकोय के दो तोले सवरस में जरा सा शहद मिलाकर पीने से लाभ मिलता है|
  • चार रती घीक्वार के रस में दो रत्ती हल्दी का चूर्ण और दो रत्ती से धानमक का चूर्ण मिलाकर सवेरे शाम खाने से यकृत का बढ़ना बंद हो जाता है|
  • यकृत और प्लीहा की सूजन पर मकोय और पुनर्नवा का सबरस गरम लेप करने या तारपीन के तेल में कपड़ा भिगोकर सूजन पर रखने से यकृत और तिल्ली की सूजन नष्ट हो जाती है|
  • करेले के फल या पत्तों के रस में जरा सा शहद मिलाकर पीने से यकृत और प्लीहा की  विकृति नष्ट हो जाती है|

4.उदा व्रत रोग यानी गैस्टिक-शरीर के 13 वेगो को रोकने से एवं काम क्रोध मद लोभ ईर्ष्या द्वेष आदि मानसिक वेगो के आवेश से यह रोग उत्पन्न होता है इसमें उधर के नीचे की ओर चलने वाली अधो वायु चक्कर खाकर ऊपर की ओर बढ़ती है और अपने साथ मल मूत्र या उसकी प्रदूषित हवा वायु भी ऊपर ले जाती है|

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • मन रोकने से पैदा हुए उदा व्रत में यह क्रियाएं हितकारी है दस्ता वर अन्न देना दस्तावर दवा देना तेल दवा देना तेल की मालिश करवाना सेक के पसीने दिलाना एवं गुदा में पिचकारी लगाना|
  • डकार रोकने की उदा व्रत में चिकनाई मिले हुए पदार्थों का धुआं पीना चाहिए तथा शराब में काला नमक और बिजोरा का रस मिलाकर पीना चाहिए|
  • भूख रोकने के उदावत रोग में चिकनी गरम रुचि कारी और मनचाहे पदार्थ थोड़े-थोड़े खानी चाहिए|
  • थकान में सांस रोकने से हुए उदा व्रत में मांस रस के साथ भोजन करना और आराम करना चाहिए|
  • जवा से का काढ़ा बनाकर पीने से उदावत नष्ट हो जाता है|
  • अर्जुन वृक्ष की छाल का काढ़ा पीने से उदा व्रत नष्ट हो जाता है|
  • कटोरी का सवरस पीने से उदावर्त रोग नष्ट हो जाता है|
  • मिश्री  ,दूध, दाख, मुलेठी का रस पीने से यह रोग नष्ट हो जाता है बच का चूर्ण खा कर ऊपर से जल मिला दूध पीने से यह रोग नष्ट हो जाता |

उदर रोग को रोकने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. अदरक , देवदारु और चीते का काढ़ा पीने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  2. जवाखार , सब्जी , चीता , त्रिकुटा ,नीली और पांचों नमक इनको पीसकर और घी में मिलाकर खाने से सब तरह के उदर रोग दूर होते हैं|
  3. पीपलो को थूहर के दूध में भावना देकर उनमें से अपनी शक्ति अनुसार एक से आरंभ करके हजार तक खाने से सभी तरह के उदर रोग दूर हो जाते हैं|
  4. दुर्गंध, करंज के बीज, मूली के बीज, गरहेडूब,की जड़ और शंख भस्म को मिलाकर कांची के साथ पीने से उदर रोग आराम हो जाता है|
  5. इंद्रायण, शंखपुष्पी ,दंती, नीली वृक्ष, त्रिफला, हल्दी ,बायविंडग और कबीला इनका चूर्ण गोमूत्र के साथ पीने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  6. अरंडी का तेल गर्म दूध या जल अथवा गोमूत्र में मिलाकर पीने से सभी तरह के उदर रोग दूर हो जाते हैं|
  7. मालकांगनी का तेल पीने से सभी तरह के उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  8. कनकुष्ठ का चूर्ण गर्म जल के साथ सेवन करने से आठ  तरह के रोग नष्ट रोग नष्ट हो जाते हैं|
  9. पुराने मरकंद को पीसकर उसने दुगनी चावल मिलाकर जल और दूध  मैं खीर बनाकर उस चीज को खाने से वातओ दर सूजन संग्रहणी और पांडु रोग नष्ट हो जातेहै|
  10. 7 दिन तक अन्न जल छोड़कर केवल भैंस का मूत्र दूध मिलाकर पीने से यह रोग नष्ट हो जाता है|
  11. एक चम्मच पुदीने का रस एक कप पानी में मिलाकर पी इससे भी आपको उधर की पीड़ा में काफी राहत महसूस होगी और इसके सेवन से तुरंत आराम मिलता है|
  12. गुनगुने पानी के साथ अजवाइन लेने से भी उधर की पीड़ा से काफी आराम मिलता है इसमें अगर बराबर मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाए तो यह ज्यादा असरदार होता है|