काली खांसी

आइए, पहले यह जानते हैं कि बच्चों को खांसी होने के पीछे मुख्य वजह क्या है।जब किसी अवरोध के कारण वायुमार्ग बंद होने लगता है, तो खांसने से यह अवरोध हटता है और गले को राहत पहुंचती है। खांसी किसी भी हानिकारक पदार्थ जैसे धूल या खाद्य कणों को साफ करने में मदद करती है, जो किसी वजह से सांस केसाथ अंदर चले जाते हैं। यह श्वसन तंत्र के अतिरिक्त स्राव जैसे बलगम को भी दूर करने में मदद करता है। जब स्राव होता है, तो इसे गीली खांसी के रूप में जाना जाता है, वर्ना इसे सूखी खांसी कहा जाता है।

काली खांसी के लक्षण

काली खांसी एक खतरनाक बीमारी है क्योंकि ये संक्रामक होती है यानि इस बीमारी के वायरस हवा के जरिये एक इंसान से दूसरे तक पहुंचते हैं। इस रोग का कारण हिमोफाइलस परटुसिस नाम के जीवाणु होते हैं। ये जीवाणु रोगी को छूने, साथ खाने और उसकी खांसी के संपर्क में आने से आपको भी हो सकता है। तो आइये आज हम आपको बताते है इस बीमारी से जुड़े लक्षण और इसके उपचार के बारे में।

  • काली खांसी में रोगी को लगातार जोर-जोर से खांसी आती है। खांसते-खांसते रोगी को कई बार उल्टी भी होने लगतीहै और सीने में तेज जलन महसूस होने लगती है।थोड़ी-थोड़ी देर पर खांसी आती ही रहती है इसलिए रोगी का हाल बुरा हो जाता है और उसकी सांस रुकने लगती है। कई बार इस तरह की खांसियों के कुछ और कारण भी हो सकते हैं जैसे टीबी, दमा, फेफड़ों का संक्रमण, अस्थमा आदि। इसलिए इस प्रकार की खांसी होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है ताकि आप खांसी का कारण जान सकें।

काली खांसी होने का कारण

बच्चों को खांसी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। नीचे हम नवजात शिशुओं और बच्चों में होने वाली खांसी के 10 कारण बता रहे हैं :

  1. सामान्य खांसी: यह आम खांसी होती है और जब ठीक होने लगती है, तो सूखी खांसी रूप लेकर खत्म हो जाती है। सामान्य खांसी के लिए कई वायरस जिम्मेदार होते हैं, जिनमें राइनोवायरस सबसे आम है।
  2. काली खांसी: इसमें खांसी के साथ बलगम भी निकलता है। इसी के साथ लंबी सांस लेते समय आवाज भीआती है। बोर्डेटेला पर्टुसिस बैक्टीरिया के कारण काली खांसी होती है, जोकभी कुछ दिन, तो कभी महीनों तक बनी रहती है।
  3. क्रुप: यह वायुमार्ग में सूजन आने के कारण होने वाली खांसी है। इस वजह से बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होती है।
  4. लंग या साइनस संक्रमण: फेफड़ों के संक्रमण से फेफड़ों में कफ बनने लगता है, जिससे गीली खांसी होती है। वहीं, साइनस इन्फेक्शन से भी कफ बनता है और गले में आने लगता है। फेफड़ों में संक्रमण होने के निम्न कारण हो सकते हैं :शिशुओं और बच्चों को होने वाले फेफड़े के संक्रमण को ब्रोंकियोलाइटिस कहते हैं, जिससे फेफड़ों के अंदर छोटे वायुमार्ग संक्रमित हो जाते हैं।ब्रोंकियोलाइटिस का सबसे आम कारण रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस (आरएसवी) है|कई वायरस और बैक्टीरिया साइनस के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। जब संक्रमित स्राव नाक से गले तक जाता है (पोस्ट-नेसल ड्रिप), तो वो गले में जलन पैदाकरते हैं और खांसी होती है।
  5. एलर्जी :बच्चे को एलर्जी होने पर भी खांसी की समस्या हो सकती है। अधिकतर बच्चों को धूल-मिट्टी से एलर्जी होती है, जिस कारण खांसी हो सकती है।
  6. अस्थमा :अस्थमा भी खांसी का एक कारण हो सकता है। इसमें छाती में भारीपन महसूस होता है और सांस लेने में तकलीफ होती है।
  7. टीबी :टीबी की बीमारी भी खांसी का मुख्य कारण हो सकती है। अगर लंबे समय से खांसीहो रही है और इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रही है, तो यह टीबी का संकेत होसकता है।
  8. गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स :इसके कारण होने वालीखांसी गीली होगी, लेकिन इसमें बलगम नहीं बनता। गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स के कारण खांसी तब होती है, जब पेट का एसिड भोजन नलिका में पहुंचकर गले मेंजाता है। ऐसे में बच्चे को डकार और हिचकियों की समस्या हो सकती है।
  9. सिस्टिक फाइब्रोसिस :इस कारण लगातार खांसी होती है, जिसमें काफी सारा बलगम बाहर आता है जो टिशू बलगम, पसीना और पाचन रस बनाते हैं, सिस्टिक फाइब्रोसिस से इन्हें नुकसान पहुंचता है।
  10. एस्पिरेशन :यह कुछ भी खाने या पीनी के बाद अचानक से होने वाली खांसी है। इसके अलावा, अगर बच्चे के गले में कुछ फस जाए, तो भी ऐसी खांसी हो सकती है।

काली खांसी को जड़ से खत्म करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. तुलसी के पत्ते –तुलसी के पत्ते भी खांसी-जुकाम में बहुत फायदेमंद होते हैं। काली खांसी से राहत के लिए तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बना लें और इसे दिन में तीन बार चूसें। ये छोटी गोलियां आपकी खांसी को मिटाकर आपका गला साफ कर देंगी।
  2. लहसुन –लहसुन सर्दी, जुकाम और खांसी तीनों के इलाज के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। रोजाना खाने में लहसुन के प्रयोग से आप इन रोगों से दूर रह सकते हैं।काली खांसी से छुटकारे के लिए लहसुन की 5-6 कलियों को छीलकर बारीक काट लें औरउन्हें पानी में डालकर उबाल लें। अब इस पानी से भाप लें। रोज ऐसा करने से 8-10 दिन में काली खांसी जड़ से खत्म हो जाती है।
  3. बादाम- बादाम भी काली खांसी के इलाज में कारगर है।बच्चों की काली खांसी में तीन-चार बादाम रात को पानी में भिगाकर रख दें। सुबह बादाम के छिलके उतार लें और इसे एक कली लहसुन और थोड़ी सी मिश्री के साथ पीस लें। अब इस पेस्ट की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर बच्चे को खिलाएं। इससे खांसी में आराम मिलेगा।
  4. शहद-शहद भी सर्दी–खांसी ठीक करने के उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है। एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को आधा चम्मच शहद दूध में मिलाकर दिन में दो बार दिया जा सकता है।
  5. नींबू-विटामिन सी से भरपूर होने के कारण नींबू शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक होता है। नींबू के रस में थोड़ा सा शहद और बहुत सारा पानी मिलकर अगर एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को पिलाया जाये तो उससे छोटे बच्चों को सर्दी–खांसी में बहुत आराम आएगा।
  6. दालचीनी-दालचीनी एक प्रभावशाली एंटी बैक्टीरिया, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरिया के गुणों से भरपूर होने के कारण बहुत फायदेकी चीज है। एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को यह बहुत आराम से दी जा सकती है। एक चम्मच शहद में ¼ चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर बच्चे को हर चार घंटे के अंतराल पर दें। जैसे ही सर्दी खांसी की शुरुआत हो तो यह मिक्स्चर देने से तुरंत आराम आ जाता है। 
  7. हल्दी-नवजात शिशुओं के लिए इस उपाय के रूप में सूखी हल्दी का एक छोटा टुकड़ा ले लें औरइसे मोमबत्ती या फिर छोटे दिये की लौ में हल्का सा जला दें। इसके बाद बच्चे को इस जली हुई हल्दी के धुएँ को एक मिनट तक सुंघाएँ । घबराएँ नहीं, यहधुआँ एक पतले धागे की तरह होता है इसलिए बच्चे को इससे कोई खतरा नहीं होगा। याद रखें की दो वर्ष से ऊपर के बच्चों को थोड़ी सी हल्दी दूध में मिलाकर भी दी जा सकती है।बच्चों की सर्दी खांसी ठीक करने का यह एक अच्छा उपाय है।
  8. विक्स वेपोरब-ठीक करने के लिए विक्स एक बहुत अच्छा उपाय है । बच्चे के पाँव में इसकी मालिश करके उसे मोज़े पहना दें। अगर चाहें तो इसकी मालिश छाती और गले पर भी कर दें।
  9. भाप दें-बहुत बच्चों को कभी भी भाप उस तरह नहीं दी जाती है जैसे हम वयस्क व्यक्ति कोदेते हैं। इसके लिए आप कमरे में के बाल्टी या बाथरूम में बाथटब गरम पानी से भर लें। ऐसे में छोटे बच्चे को अपनी बाँहों में लेकर भाप के वातावरण मेंखड़े हो जाएँ । इससे छाती में जमा बलगम आसानी से ढीला पड़ सकता है ।नन्हें बच्चों की सर्दी–खांसी में इससे बहुत जल्दी आराम आने की संभावना होती है।
हल्दी
हल्दी