चक्कर आने की समस्या (vertigo)

चक्कर आने की समस्या

चक्कर आने की समस्या को वर्टिगो के नाम से जाना जाता है|वर्टिगो का अर्थ है घूमना| असंतुलन होने के कारण व्यक्ति को पसीना आना, जी मिचलाना, चक्कर आना ,उल्टी आना ,बेचैनी होना, धुंधला दिखाई देना ,आंखों के सामने अंधेरा छा जाना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|शरीर में कमजोरी और थकान होने के कारण भी चक्कर आने लगते हैं| हाई ब्लड प्रेशर  होने के कारण भी चक्कर आ जाते हैं| शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी चक्कर आने लगते हैं| वर्टिगो होने पर कुछ लोगों को लक्षणों का अनुभव नहीं होता|चक्कर आने की समस्या के पीछे माइग्रेन मस्तिष्क की चोट मिनियन रोग आदि कारण शामिल होते हैं|कान में संक्रमण होना भी चक्कर आने का मुख्य कारण बन सकता है इसका समय रहते इलाज न किया जाने पर यह गंभीर रूप धारण कर सकती है|

चक्कर आने की समस्या के लक्षण (vertigo symptoms)

  • सिर दर्द होना
  • सिर घूमना
  • आंखों के सामने अंधेरा छा जाने पर चक्कर आना
  • धुंधला दिखाई देना
  • कम सुनाई देना
  • मितली व उल्टी आना
  • बुखार होना जैसे लक्षण नजर आना
  • कानों में ध्वनि का बजना
  • जी मिचलाना
  • बेचैनी और घबराहट का अनुभव होना
  • शरीर में कमजोरी आना
  • पसीना आना
  • खुद पर नियंत्रण न रख पाना
  • आसपास की चीजें घूमती हुई नजराना

चक्कर आने की समस्या के कारण (vertigo causes)

  1. मस्तिष्क की चोट- मस्तिष्क या सिर की चोट लगने पर चक्कर आने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|
  2. वेस्टीबुलर न्यूरोनेटिस- यह संतुलन की नस का वायरल संक्रमण है इस स्थिति में कान में सूजन होती है|
  3. मिनियर का रोग– यह युवाओं में अधिक देखने को मिलता है| कान में मौजूद फ्लुएड जब ज्यादा हो जाता है तो कान में संतुलन बिगड़ जाने पर उल्टियां आने के साथ ही कान में ध्वनि बजने लग जाती है|
  4. मस्तिष्क का ट्यूमर- मस्तिष्क का ट्यूमर भी चक्कर आने का मुख्य कारण बनता है धनिक न्यूरोमा ट्यूमर होने पर ध्वनि तंत्रिका पर प्रभाव पड़ता है जो सिर दर्द का कारण बनता है|
  5. रिकरेंट वेस्टीबुलोपैथी- इसमें मिनियन रोग से संबंधित लक्षण पाए जाते हैं इस रोग में भी उल्टी आने के साथ-साथ कान में घंटियां सुनाई देने लगती है और कान में खिंचाव महसूस होने लगता है और अपने आप ठीक हो जाते हैं बाद में यह मीनियर रोग में बदल जाते हैं इसका इलाज मीनियर रोग की तरह होता है|
  6. कान में संक्रमण- मस्तिष्क या सिर में चोट लग जाने पर और कान में संक्रमण के कारण चक्कर आने जैसी लक्षण नजर आते हैं|
  7. रक्त प्रवाह होना– अचानक से रक्त प्रवाह होने के कारण चक्कर आने लगते हैं|
  8. तनाव- तनाव भी चक्कर आने का मुख्य कारण है शुगर के मरीजों में लो ब्लड प्रेशर के कारण चक्कर आने लगते हैं|

चक्कर आने पर अपनाए जाने वाले आयुर्वेदिक उपाय(vertigo treatments)

  1. आंवला- आंवले में विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है थोड़े से आंवले में 23 काली मिर्च डालकर पेस्ट बनाकर सेवन करने से चक्कर आने की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है|
  2. नींबू– नींबू में विटामिन सी पाया जाता है| चक्कर आने पर एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और एक नींबू निचोड़ कर पीने से चक्कर आने की समस्या दूर होती है और यह शरीर को हाइड्रेट रखता है|
  3. तुलसी- तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं| तुलसी के पत्तों के रस के साथ शहद का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या दूर होती है|
  4. बादाम– बादाम में विटामिन ए और विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में होता है| गर्म दूध के साथ बदाम के पाउडर का सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और चक्कर आने की समस्या से निजात मिलता है|
  5. आयरन– हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें आयरन मौजूद हो जैसे सेब पालक आदि का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या दूर होती है|
  6. अधिक मात्रा में पानी पीना– डिहाइड्रेशन की समस्या होने पर चक्कर आने लगते हैं अधिक मात्रा में पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या को दूर किया जा सकता है|
  7. फोलिक एसिड– हरी सब्जियां जैसे  मूंगफली ,ब्रोकली  आदि में फोलिक एसिड पाया जाता है इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या से निजात मिलता है|
  8. अदरक- अदरक में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं अदरक का सेवन करने से रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है| अदरक के टुकड़ो को खाने की चीजों में शामिल करें|
  9. नारियल पानी- प्रतिदिन नारियल पानी का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या को दूर किया जा सकता है|
  10. खरबूजे के बीज– खरबूजे के बीजों को गाय के घी में भूनकर प्रतिदिन सेवन करने से वर्टिगो की समस्या से निजात मिलता है|
अदरक
अदरक

चक्कर आ जाने पर किए जाने वाले व्यायाम (vertigo exercises)

  1. पश्चिमोत्तानासन- पश्चिमोत्तानासन करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा करके बैठ जाए और अपनी दोनों हाथों को ऊपर उठा कर सीधे कर ले अब धीरे-धीरे आगे की और झुके और अपने दोनों हाथों से पैरों के पंजों को पकड़ ले और अपना सिर घुटनों पर रख दे इस आसन को कुछ सेकंड के लिए करें पश्चिमोत्तानासन करने से मांसपेशियों में आराम मिलता है और तनाव से मुक्ति मिलती है रक्त का प्रवाह भी तेजी से होने लगता है|
  2. हलासन -हलासन में शरीरका आकार हल जैसा बनता है, इसीलिए इसे हलासन कहते हैं। इस आसन को पीठ के बललेटकर किया जाता है। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्णहै।हलासन करने से हाथों गर्दन कंधे की मांसपेशियां मजबूत होती है पर यह आसन तनाव को कम करता है स्त्रियों की रजोनिवृत्ति में मदद करता है|
  3. शवासन -शवासन में शरीरको मुर्दे समान बना लेने के कारण ही इस आसन को शवासन कहा जाता है। यह पीठके बल लेटकर किया जाता है और इससे शारीरिक तथा मानसिक शांति मिलती है।शवासन करने से शरीर की कोशिकाओं का निर्माण होता है यह आसन रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है|
  4. कपालभाति प्राणायाम– कपालभाति प्राणायाम आपके तंत्र तंत्रिकाओं और मस्तिष्क की नसों को ऊर्जाप्रदान करता हैं। यह प्राणायाम मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत अच्छा हैंक्योंकि यह पेट की मासपेशियों को सक्रिय करता हैं। यह प्राणायाम रक्तपरिसंचरण को सुधरता हैं व मन को भी शांति प्रदान करता हैंकपालभाति फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्ट गैसों को बाहर निकालती है यह हृदय और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करती है इसलिए इस श्वसन संबंधी रोगों जैसे अस्थमा के लिए अच्छी है यह आलस्य दूर करती है|
  5. शीर्षासन – सिर के बलकिए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं। इससे पाचनतंत्र ठीक रहता है साथही मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे की स्मरण शक्ति सही रहती है।