ट्यूबरकुलोसिस

ट्यूबरकुलोसिस (क्षय रोग, तपेदिक या टीबी )यह रोग महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक होता है|ट्यूबरकुलोसिस हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से होता है| तंबाकू ,बीड़ी ,सिगरेट, शराब ,धूम्रपान का सेवन करने से पुरुषों को टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है| ट्यूबरकुलोसिस एक खतरनाक बीमारी है अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह मृत्यु का कारण भी बन सकती है|

ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। यह अनुवांशिक स्थिति हो सकती है यानी हर के किसी भी व्यक्ति को यह रोग होने पर दूसरे व्यक्ति को यही रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है|

टीबी
टीबी

ट्यूबरकुलोसिस के लक्षण

  1. सांस लेने में कठिनाई-टीबी होने पर व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है इसे व्यक्ति की सांसे फूलने लगती है और शरीर की हड्डियों मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम में समस्याएं उत्पन्न हो जाती है|
  2. भूख न लगना-यह रोग होने पर व्यक्ति को भूख कम लगती है व्यक्ति खाने पीने में रुचि नहीं रखता|
  3. वजन घटना– क्षय रोग होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से घटने लगता है|
  4. बुखार- बुखार टीबी का मुख्य टीवी के रोगी को हमेशा बुखार रहता है लक्षण है अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह व्यक्ति की जान भी ले सकता है|
  5. थकावट– क्षय रोग होने पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और व्यक्ति को थकान का अनुभव होता है|
  6. खांसीट्यूबरकुलोसिस रोग होने पर व्यक्ति को लगातार खांसी आती है कई बार खांसी के साथ खून भी आने लगता है|

ट्यूबरकुलोसिस होने के कारण

  • प्रतिरोधक क्षमता कम होने से– शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने से होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • अनुवांशिकता-यह अनुवांशिक स्थिति हो सकती है यानी हर के किसी भी व्यक्ति को यह रोग होने पर दूसरे व्यक्ति को यही रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है|
  • नशीली दवाओं से-नशीली दवाओं का सेवन करने से यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • रोगी के संपर्क से- किसी भी से रोगी के संपर्क में आने से यह रोग फैलता है |
  • खान-पान और रहन-सहन से: जिन व्यक्तियों के खानपान और अनशन का तरीका सही नहीं होता उन्हें यह रोग होने की संभावना ज्यादा होती है|
  • बैक्टीरिया द्वाराट्यूबरकुलोसिस माइकोबैक्टेरियम बैक्टीरिया के कारण होता है यह  बैक्टीरिया जोड़ों , मेरुदंड , हड्डियों आदि पर प्रभाव डालता है
  • कुपोषण द्वारा– वजन कम होने से टीवी के बैक्टीरिया शरीर पर बुरे प्रभाव डालते हैं|
  • धूम्रपान करना बीड़ी सिगरेट शराब तंबाकू का सेवन करने से ट्यूबरकुलोसिस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

ट्यूबरकुलोसिस को खत्म करने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. लहसुन– इस में सल्फ्यूरिक एसिड पाया जाता है यह टीबी के कीटाणुओं को नष्ट करने में हमारी सहायता करता है| एक चम्मच मैसूर एक कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालें जब यह पेस्ट एक चौथाई रह जाए तो इसका दिन में तीन बार सेवन करने से टीवी के रोग से राहत मिलती है|
  2. आंवला– कच्चे आंवले को पीसकर और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करने से टीबी के रोग से राहत मिलती है
  3. काली मिर्च– काली मिर्च का सेवन करने से फेफड़ों में हुई खांसी दूर हो जाती है थोड़े से मक्खन में 4 से 5 काली मिर्च फ्राई करें और उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर इस का मिश्रण बना लें इस मिश्रण का प्रतिदिन सेवन करें|
  4. अखरोट– अखरोट का सेवन करने से हमें इस रोग से आराम मिलता है अखरोट को पीसकर पाउडर बना लें इसमें कुछ लहसुन की कलिओ का पेस्ट और मक्खन मिलाकर खाए|
  5. केला-1 पके हुए केले को मसलकर नारियल पानी में मिलाकर इस्मे शहद और दही मिलाएं। इसे दिन में दोसे तीन बार खाने से रोगी को फायदा होता है। इसके अलावा कच्चे केले का जूस बनाकर भी रोजाना पीना भी लाभ्दाय्क है|
  6. संतरा-इसके लिए ताजा संतरे के जूस में नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करेया संतरा खाने से भी टीबी के रोगी को फायदा होता है।
अखरोट
अखरोट