डाउन सिंड्रोम

डाउन सिंड्रोम एक अनुवांशिक बीमारी है अर्थात इस बीमारी को बौद्धिक विकलांगता भी कहते हैं |इस बीमारी में शिशु बच्चों में शारीरिक और मानसिक विकास बहुत धीरे से होता है और कभी- कभी विकलांगता जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ता है| डाउन सिंड्रोम से पीड़ित रोगी की देखभाल करनी बहुत ही आवश्यक है| इस बीमारी में विकलांगता जीवन भर भी बनी रहती है और इसकी वजह से कई मरीजों की मृत्यु भी हो जाती है|

इस बीमारी में कई शिशु बच्चों का दिमाग भी छोटा होता है इस बीमारी में बच्चा कई बार बात करने में भी असमर्थ हो जाता है|

डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम

डाउन सिंड्रोम के प्रकार

डाउन सिंड्रोम के तीन प्रकार होते हैं-

  1. ट्राई सोमी 21-यह वह स्थिति है जिसमें शरीर में मौजूद प्रत्येक कोशिकाओं में दो की बजाय क्रोमोसोम 21 की तीन कॉपी होती है|
  2. ट्रांसलोकेशन डाउन सिंड्रोम-इस प्रकार के डाउन सिंड्रोम में प्रत्येक कोशिकाओं में पूरा एक किया कुछ अतिरिक्त क्रोमोसोम 21 का भाग मौजूद होता है लेकिन यह स्वयं के बजाय किसी और क्रोमोसोम से जुड़ा होता है|
  3. मोजैक डाउन सिंड्रोम-यह दुर्लभ प्रकार का डाउन सिंड्रोम है जिसमें सिर्फ कुछ ही कोशिकाएं के पास अतिरिक्त क्रोमोसोम 21 होता है| मोजैक डाउन सिंड्रोम से पीड़ित मरीज में अधिक लक्षण दिखायी नहीं देते हैं क्योंकि इसमें सिर्फ कुछ ही कोशिकाओं (cells) के पास अतिरिक्त क्रोमोसोम होता है।

डाउन सिंड्रोम के लक्षण

  • कान और गर्दन छोटे होते है।
  • लचीलापन अधिक होता है।
  • कद भी बहुत छोटा होता है।
  • नाक और चेहरा चपटा होता है।
  • आँखें ऊपर की तरफ झुकी होती है।
  • इसमें रोगी की टांगे पतली होती है|
  • इस रोग में बच्चा कई बार बोलने में भी असमर्थ होता है |
  • इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ मोटापे की समस्या होना भी बहुत आमहोता और वह हृदय रोगों से भी पीड़ित हो सकता है।
  • इस रोग में बच्चे का दिमाग छोटा होता है|
  • चीजों को समझने की कम क्षमता|

डाउन सिंड्रोम होने के कारण

जब शिशु का जन्म होता है तो सामान्य तौर पर वह 46 क्रोमोसोम के साथ जन्म लेता है। 23 क्रोमोसोम पिता से और 23 क्रोमोसोम माता से ग्रहण करता है। लेकिन डाउन सिंड्रोम शिशु में एक क्रोमोसोम अधिक होता है जिसे 21 वां सिंड्रोम कहते है। जिसके कारण शरीर में 47 क्रोमोसोम हो जाते है जो मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न करता है।

डाउन सिंड्रोम से बचने के लिए उपाय

  • मानसिक और बौद्धिक विकास का इलाज करवाने के लिए किसी अच्छे चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और स्पीच थेरेपी और फिजियो थेरेपी जरूर करवानी चाहिए|
  • समय-समय पर बच्चे की सभी प्रकार की जांच करवानी चाहिए |
  • डाउन सिंड्रोम से पीड़ित मरीज का इलाज कराकर और उसे अपना सहयोग देकर उसके जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ ही डाउन सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों को शारीरिक क्रियाओं के लिए दूसरे व्यक्ति के मदद की हमेशा जरूरत पड़ती है।