डिमेंशिया (मनोभ्रंश)

डिमेंशिया

डिमेंशिया (Dementia) किसी विशेष बीमारी का नाम नहीं, बल्कि के लक्षणों के समूह का नाम है, जो मस्तिष्क की हानि से सम्बंधित है|लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं यह मुख्यत याददाश्त की समस्या है| डिमेंशिया के लक्षण चिंताजनक होते हैं जो कई रोगों के कारण पैदा होते हैं| यह सभी लोग मस्तिष्क को हानि पहुंचाते हैं क्योंकि हम सभी कामों के लिए अपने मस्तिष्क पर निर्भर है|अधिवेशन से पीड़ित व्यक्ति अपने दैनिक कार्य ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं| कभी-कभी वे यह भी भूल जाते हैं कि वह किस शहर में है ,कौन सा साल महीना चल रहा है| डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है और व्यक्ति की स्थिति खराब हो जाती है| बढ़ती उम्र के चलते उन्हें काम में भी दिक्कत आने लगती है जैसे -चल पाना , बात करना , ठीक ढंग से खाना-पीना छोटी चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर करते हैं|

जब डिमेंशिया के लक्षण आने शुरू हो जाते हैं तब परिवार के लोग यह नहीं समझ पाते कि व्यक्ति अजीब तरह से क्यों व्यवहार कर रहा है इसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और वे डिमेंशिया का शिकार हो जाता है|

डिमेंशिया
डिमेंशिया

डिमेंशिया के प्रकार (Dementia types)

  1. अल्जाइमर रोग- डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है|अल्जाइमर रोग इस रोग के होने के कारण व्यक्ति की मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे व्यक्ति में मस्तिष्क का आकार घटता जाता है|
  2. मिश्रित डिमेंशिया- इसमें व्यक्ति को एक ही समय में अल्जाइमर रोग और वैस्कुलर डिमेंशिया दोनों हो सकते हैं|
  3. लेवी बॉडीज डिमेंशिया – इसमें व्यक्ति की याददाश्त में कमी , भ्रम , असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है|
  4. पार्किंसंस रोग: यह वह रोग है जिसमें तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुँचती है  जो डिमेंशिया पैदा कर सकती है|बाद में अल्जाइमर का रुप धारन कर लेती है इस बीमारी के कारण अन्य गतिविधियों में कठिनाई होने लगती है. मगर इसके कारण कुछ लोगों को डिमेंशिया भी हो जाता है|
  5. फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया-यह डिमेंशिया का वह प्रकार है जिसमें व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है और व्यक्ति को बोलने में भी कठिनाई हो सकती है इसमें व्यक्ति के सोचने समझने की क्षमता भी कम हो जाती है|

डिमेंशिया के लक्षण (Dementia symptoms)

  • व्यक्ति के रोजमर्रा के कामों में भी कर आने लगती है
  • इस रोग में व्यक्ति का व्यवहार सामान्य नहीं रहता वह अजीब सा व्यवहार करने लगता है
  • जरूरी चीजें भूल जाना और याददाश्त का कमजोर होना
  • छोटी-छोटी समस्याओं को भी न सुलझा पाना
  • सोचने में कठिनाई का अनुभव होना
  • ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • कोई भी चित्र देखकर न पहचान पाना की यह क्या है

डिमेंशिया के कारण (Dementia causes)

  1. डिमेंशिया रोग का मुख्य कारण अल्जाइमर रोग है अल्जाइमर जैसी बीमारी से मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो जाता है और व्यक्ति सब कामों के लिए दूसरे पर निर्भर करता है|
  2. डिमेंशिया सिर की चोट, स्ट्रोक, मस्तिष्क ट्यूमर या एचआईवी संक्रमण के कारण भी हो सकता है|
  3. मस्तिष्क की कोशिकाओं में अधिकांश परिवर्तन होता है जो डिमेंशिया का मुख्य कारण है|

डिमेंशिया के तीन चरण होते हैं प्रारंभिक ,मध्यम और अंतिम

1.प्रारंभिक-इस अवस्था में व्यक्ति के मस्तिष्क को ज्यादा हानि नहीं पहुंचती और वह अपने काम स्वयं कर लेता है इस रोग में लक्षणों पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को डिमेंशिया किस रोग के कारण हुआ है अगर अल्जाइमर रोग है तो व्यक्ति के बोलने की क्षमता कम हो जाती है अगर फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया हैं तो व्यक्ति के बोली में दिक्कत और स्वभाव में परिवर्तन आ आ जाता है इसमें व्यक्ति को पता नहीं लगता है किस रोग के लक्षण है इसलिए डॉक्टर से तुरंत ही सलाह लेनी चाहिए|

प्रारंभिक अवस्था के लक्षण

  • इसमें व्यक्ति की यादाश्त कमजोर हो जाती है और उन्हें हाल में हुई बातें याद  भी नहीं रहती
  • उनके सोचने समझने की क्षमता कम हो जाती है उन्हें बोलने में कठिनाई महसूस होती है
  • हिसाब रखने में और पैसे गिनने में दिक्कत आती है
  • ऐसे लोग चुपचाप सहमे हुए रहते हैं लोगों से मिलना पसंद नहीं करते

2.मध्य अवस्था-डिमेंशिया के बीच की अवस्था में आते आते परिवार वालों को व्यक्ति की परेशानियां यानी लक्षण नजर आने लगते हैं और व्यक्ति असमंजस में पड़ जाता है व्यक्ति के स्वभाव में बदलाव आ जाता है धीरे-धीरे उनके काम करने की क्षमता भी कम हो जाती है वह दूसरों पर निर्भर रहने लगता है ऐसे व्यक्ति अकेले रहना पसंद करते हैं|

3.अंतिम अवस्था-इस अवस्था तक पहुंचने पर डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में बहुत हानि फैल जाती है और व्यक्ति के चलने फिरने बात करनी मैं बदलाव आ जाता है और वह लाचार हो जाते हैं वे सभी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं ऐसी व्यक्तियों को खुद खाना खाने में भी कठिनाई का अनुभव होता है|

अंतिम अवस्था के लक्षण

  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपनी मल मूत्र पर नियंत्रण खो देते हैं|
  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपनी दिनचर्या के काम नहीं कर पाते|
  • उन्हें खाने-पीने में भी दिक्कत होती है और खाने के कारण फेफड़ों में चले जाने से कई बार फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है|
  • अंत में पूरी तरह से बिस्तर पकड़ लेते हैं और इससे व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना भी बढ़ जाती है|