निमोनिया

निमोनिया एक तरह का छाती या फेफड़े का इनफेक्शन है, जो एक या फिर दोनों फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है और तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे खांसी होती है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। निमोनिया सर्दी-जुकाम या फ्लू के बाद हो सकता है, विशेषकर सर्दियों के महीनों में। यह बहुत से संभावित विषाणुओं और जीवाणुओं की वजह से हो सकता है। शिशुओं और छोटे बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (आरएसवी) नामक विषाणु वायरल निमोनिया का सबसे आम कारण है।निमोनिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह शिशुओं और छोटे बच्चों मे अधिक आम व गंभीर हो सकता है।

फेफड़े का इनफेक्शन
फेफड़े का इनफेक्शन

निमोनिया के विभिन्न प्रकार

  1. लोबर निमोनिया :लोबर निमोनिया फेफड़ों के एक या अधिक भाग को प्रभावित करता है।
  2. ब्रोंकाइल निमोनिया :यह दोनों फेफड़ों में चकत्ते बना देता है।

निमोनिया होने के लक्षण

  • खांसी के साथ बलगम आना।
  • खांसते समय छाती में दर्द होना।
  • उल्टी या दस्त होना।
  • भूख में कमी होना।
  • थकान होना।
  • बुखार होना।

निमोनिया होने के कारण

निमोनिया होने के तीन कारण हो सकते हैं बैक्टीरिया, वायरस और कभी-कभी कवक फंगी के कारण होता है ज्यादातर मामलों में ही निमोनिया बैक्टीरिया के कारण होता है लेकिन वायरल निमोनिया बच्चे को सबसे अधिक प्रभावित करता है|

  • इम्यून सिस्टम कमजोर होना भी निमोनिया का महत्वपूर्ण कारण है|
  • वायरल इनफेक्शन जैसे सर्दी बुखार खांसी और इन्फ्लूएंजा के कारण भी निमोनिया हो सकता है|
  • गले में कफ की समस्या होना भी निमोनिया का कारण बन सकता है|
  • इम्यून सिस्टम कमजोर होना भी निमोनिया का महत्वपूर्ण कारण है|
  • वायरल इनफेक्शन जैसे सर्दी बुखार खांसी और इन्फ्लूएंजा के कारण भी निमोनिया हो सकता है|

बच्चों में निमोनिया के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. हल्दी : बच्चे को निमोनिया में आराम दिलाने के लिए हल्दी काफी फायदेमंद मानी जाती है। हल्दी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो कई बीमारियों से दूर रखने में मदद करते हैं। निमोनिया होने पर थोड़ी-सी हल्दी गुनगुने पानी में मिलाएं और बच्चे की छाती पर लगाएं। इससे बच्चे को राहत मिलेगी।
  2. लहसुन का पेस्ट :लहसुन को भी निमोनिया के लिए कारगर माना जाता है।इसके लिए लहसुन की कुछ कलियों को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और रात को सोनेसे पहले बच्चे की छाती पर लगाएं। इससे बच्चे के शरीर को गर्माहट मिलेगी और कफ बाहर निकल जाएगा।
  3. लौंग :इसके लिए एक गिलास पानी में 5-6 लौंग, काली मिर्च और एक ग्राम सोडा डालकर उबाल लें। इस मिश्रण को दिन में दो बार अपने बच्चे को दें।इसकेअलावा, लौंग का तेल छाती पर लगाने से भी बच्चे को राहत मिल सकती है।
  4. तुलसी :तुलसी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।तुलसी की कुछ पत्तियों को पीस कर उसका रस थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में दो बारबच्चे को पिलाने से निमोनिया में राहत मिलती है।
  5. प्रदूषण से दूर रखें :श्वसन संबंधी समस्या दूर रहे, इसकेलिए जरूरी है कि आप अपने बच्चे को धूल-मिट्टी व प्रदूषण वाली जगह से दूररखें। बच्चे को उस माहौल में न रहने दें, जहां आस पास लोग धूम्रपान करते हों। इससे उन्हें सांस संबंधी परेशानियां जल्दी पकड़ सकती हैं।
  6. पर्याप्त पोषण दें : किसी भी तरह की बीमारी से बचने केलिए जरूरी है कि बच्चे को पर्याप्त पोषण दिया जाए, ताकि उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बने और वो बीमारियों से लड़ सके। अगर बच्चा छह महीने से कम का है, तो उसे नियमित रूप से स्तनपान कराएं, क्योंकि स्तन दूध में एंटीबॉडीज होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं। वहीं, अगर बच्चा ठोस आहार खाता है, तो उसे जरूरी पोषक चीजें भरपूर मात्रा में खिलाएं।
  7. संपूर्ण टीकाकरण :बच्चे को निमोनिया से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे बचपन में सभी जरूरी टीके लगें।
  8. छींकते-खांसते समय हमेशा मुंह और नाक को ढक लें। इसके अलावा, समय-समय पर बच्चे के हाथ भी धोती रहें।
  9. भीड-भाड़ वाली जगह से दूर रहें :बच्चों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है|
लौंग
लौंग