पीलिया(jaundice)

पीलिया होने का मुख्य कारण बिलीरुबिन नामक पदार्थ है| बिलीरुबिन पीले रंग का पदार्थ होता है जो रक्त में पाया जाता है शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती है जिसके कारण बिलीरुबिन के स्तर में वृद्धि होने लगती है जो पीलिया होने का कारण बनता है| बिलीरुबिन का सामान्य सतर मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने में हमारी सहायता करता है|

पीलिया को जोंडिस के नाम से भी जाना जाता है जो लोग मलेरिया , थैलासीमिया और ऑटोइम्यून से ग्रस्त होते है उन लोगों में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगती है और बिलीरुबिन के सत्तर में वृद्धि होती है जो पीलिया होने का कारण बनता है| पित्त नलिका में रुकावट आने के कारण भी बच्चों को पीलिया हो सकता है| नवजात शिशु और मां का ब्लड ग्रुप भिन्न होने पर भी बच्चों को पीलिया होने का खतरा बना रहता है| शिशु बच्चों में पीलिया होने पर त्वचा और आंखों का पीला पड़ जाना , पेट में दर्द रहना , नाखूनों का पीला होना , पेशाब का रंग पीला पड़ना और चेहरे की त्वचा पीली पढ़ना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|शिशु बच्चों में पीलिया अधिक हो जाता है| शिशु बच्चों में पीलिया होना अधिक चिंता का विषय नहीं है लेकिन वयस्कों में पीलिया होना चिंताजनक विषय बन जाता है|

पीलिया
पीलिया

पीलिया के प्रकार(jaundice types)

  1. हेमॉलिटिक जॉन्डिस-लाल रक्त कोशिकाओं के समय से पहले टूट जाने पर बिलीरुबिन केस्तर में इतनी ज्यादा वृद्धि हो जाती है कि लिवर ठीक ढंग से कार्य नहीं करता| बिलीरुबिन के स्तर में वृद्धि होना पीलिया होने का कारण बनता है| आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है जिसे हेमॉलिटिक पीलिया कहा जाता है|
  2. हैपेटॉसेल्यूलर जॉन्डिस-शिशु बच्चों में एंजाइम की परिपक्वता की कमी होने के कारण उनका लिवर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता जो पीलिया होने का कारण बनता है और वयस्कों में शराब का सेवन करने से पेट में दाहिने ओर पाए जाने वाली थैली जिसमें पाचन रस होता है यानी यकृत पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसे रोग हो जाते हैं जो बिलीरुबिन के स्तर को कमजोर करते हैं और पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है|
  3. पोस्ट हैपेटिक जॉन्डिस-पित्त नलिका में रुकावट आने के कारण भी पीलिया हो सकता है शरीर में पित्त नलिकाए संकीर्ण हो जाती है जिसके कारण बिलीरुबिन युक्त पित्त निकलने लग जाता है और पीलिया होने का कारण बन जाता है|

पीलिया के लक्षण(symptoms of jaundice)

  • शरीर में खुजली होना
  • वजन का कम होना
  • भूख न लगना
  • पेशाब का रंग पीला पड़ जाना
  • स्किन और आंखों मे पीलापन आना
  • पेट में दर्द होना
  • थकान और कमजोरी का अनुभव होना
  • लगातार बुखार रहना जैसे लक्षण नजर आते हैं
  • नाखूनों का रंग पीला होना
  • बिलीरुबिन का सतर बढ़ने से त्वचा आंखों में और नाखूनों का रंग पीला पड़ना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं
  • सिर दर्द होना
  • कब्ज होना और उल्टी आना
  • चेहरे की त्वचा पीली पड़ना

पीलिया के कारण(jaundice causes)

  1. अल्कोहल का सेवन- शराब का सेवन करने से पेट में दाहिनी और पाए जाने वाली थैली जिसमें पाचन रस होता है यानी यकृत पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण हेपिटाइटिस और सिरोसिस जैसे रोग हो जाते हैं जो बिलीरुबिन के सतर को कमजोर करने लगते हैं और पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है|
  2. अनुवांशिककारक- जो लोग मलेरिया, थैलासीमिया और ऑटो इम्यून से ग्रस्त है उन लोगों में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगती है और बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि होती है जो पीलिया होने का कारण बनता है|
  3. पित्त नलिका में रुकावट-पित्त नलिका में रुकावट आने के कारण भी पीलिया हो सकता है शरीर में पित्त नलिकाए संकीर्ण हो जाती है जिसके कारण बिलीरुबिन युक्त पित्त निकलने लग जाता है और पीलिया होने का कारण बन जाता है|
  4. ब्लड ग्रुप अलग होना- नवजात शिशु और मां का ब्लड ग्रुप अलग अलग होने पर शिशु को पीलिया होने का खतरा बना रहता है|
  5. स्तनपान –जब शिशु बच्चा स्तनपान नहीं कर पाता और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण बच्चे की आंतों में रुकावट आने के कारण शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती है और बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि होती है जो पीलिया का कारण बनता है|
  6. सेफलोहेमेटोमा- गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु के रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं जबये थक्के खत्म होने लगते हैं तब लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के कारण बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि होती है जिसके कारण शिशु बच्चों में पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है|

पीलिया से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(jaundice treatment)

  1. लहसुन- लहसुन में ऐसीलीन मौजूद होता है लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं इसलिए लहसुन और दो से 3 लोंग को पीसकर इसका प्रतिदिन सेवन करने से पीलिया होने की संभावना कम हो जाती है|
  2. टमाटर- टमाटर में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं इसलिए टमाटर के जूस में स्वाद अनुसार काली मिर्च और नमक मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से पीलिया की समस्या से निजात मिलता है|
  3. नीम- पीलिया से ग्रस्त व्यक्ति को प्रतिदिन नीम के पत्तों का रस पिलाने से पीलिया से निजात मिलता है|
  4. नींबू- पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन नींबू का रस पीनिंग से पीलिया से छुटकारा मिलता है नींबू की शिकंजी लाकर भी आप प्रयोग में ला सकते हैं|
  5. गन्ने का रस– हमें प्रतिदिन एक या दो गिलास गन्ने के रस का सेवन करना चाहिए गन्ने के रस का सेवन करने से बिलीरुबिन के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है और गन्ने का रस पीलिया की समस्या को जड़ से खत्म करता है|
  6. अत्यधिक पानी पीना– हमें प्रतिदिन दो या 3 लीटर पानी पीना चाहिए पानी यकृत को स्वस्थ रखने में सहायक है|
  7. अखरोट -अखरोट में विटामिन ई व फ्लोलिक एसिड पाया जाता है इसलिए अखरोट का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए अखरोट का सेवन करने से यकृत भी स्वस्थ रहता है और बिलीरुबिन का सतर नियंत्रित रहता है|
  8. गिलोय– गिलोय एक प्रकार की जड़ी बूटी है गिलोय की 40 ग्राम रस में 15 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीने से पीलिया रोग में आराम मिलता है गिलोय लीवर की कोशिकाओं का निर्माण करने में भी सहायक है|
  9. जौ पाउडर– गर्म पानी में भुने हुए जौ के पाउडर और शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीने से पीलिया रोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है|
  10. फिटकरी– फिटकरी का सेवन करने से पीलिया को जड़ से खत्म किया जा सकता है इसलिए फिटकरी को पीसकर उसमें थोड़ा सा मक्खन मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से पीलिया रोग जड़ से खत्म होता है|
  11. अरंड के पत्तों का रस-गाय के कच्चे दूध के साथ अरंडी के पत्तों के रस का सेवन करने पर कुछ ही दिनों में पीलिया रोग जड़ से खत्म होता है|
  12. मूली का रस- मूली का रस पीने से पीलिया रोग जड़ से खत्म होता है|
गिलोय
गिलोय