पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या ‘पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर’ यानि P COD/P COS ” इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण उत्पन्न होती हैं। साथ ही यह जैनेटिकली भी होती है। शरीर में अधिक चर्बी होने की वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है,जिससे ओवरी में सिस्ट बनता है। वर्तमान में देखें तो हर दस में से एक प्रसव उम्र की महिला इसका शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जो महिलाएं तनाव भरा जीवन व्यतीत करती हैं उनमें पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है।

शरीर में कुछ असामान्यता जैसे -जलन ,सूजन  महसूस हो, तो यह हार्मोन के असंतुलन के कारण भी हो सकता है। अलग-अलग मानसिक परिस्थि‍तियों से गुजरने पर शरीर के आंतरिक अंगों में संबंधि‍त हार्मोन का सक्रिय होना सामान्य बात है। साथ ही महिलाओं में प्रेग्नेंसी, मासिक धर्मऔर मेनोपॉज के समय भी हार्मोन का स्त्राव और बदलाव होता है। लेकिन कभी-कभी  स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण

  1. महिलाओं में मासिक धर्म की समयावधि‍ में परिवर्तन हार्मोन्स के कारण होता है। सामान्यत: 24 से 28 दिन के अंदर शुरू होने वाला मासिक धर्मसमय पर नहीं हो रहा हो, तो यह एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन्स की अधि‍कता या कमी के कारण हो सकता है। यह पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के मुख्य लक्षण है
  2. पर्याप्त नींद नहीं ले पाना भी हार्मोन असंतुलन का लक्षण है ओवरी से स्त्रावित होने वाला हार्मोन प्रोजेस्टेरॉन आपको नींद लेने के लिए प्रेरित करता है। 
  3. महिलाओं में मासिक धर्म के समय चेहरे पर मुहांसों की समस्या होना सामान्य है अगर मुंहासे या पिंपल्स हटने का नाम ले ले तो यह हार्मोन में असंतुलन हो सकता है
  4. हार्मोन असंतुलन के कारण थकान का अनुभव भी हो सकता है
  5. एस्ट्रोजन की सतह में कमी आने के कारण व्यक्ति अपने स्वभाव में चिड़चिड़ापन महसूस करता है साथ ही आपका वजन तेजी से बढ़ सकता है यह हार्मोन असंतुलन का मुख्य लक्षण है
  6. स्ट्रेस के कारण जो हार्मोंस में बदलाव होता है, उससे कई समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें से पाचन से जुड़ी समस्या भी एक है. गैस, बदहज़मी या कब्ज़ की समस्या हार्मोंस में बदलाव का संकेत भी हो सकती है. 
  7. अचानक रात को तेज़ गर्मी व पसीना आने का मतलब है हार्मोंस में परिवर्तन हो रहा है. यह ख़ासतौर से मेनोपॉज़ के समय होता है, जब हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं|

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण

  • अनुवांशिकता– हारमोंस में असंतुलन इस बीमारी का मुख्य कारण है लेकिन अगर  आपकी मां को यह समस्या रही है तो संभावना है कि आप इस रोग की चपेट में आ सकते हैं|
  • पुरुष हार्मोन -पीसीओएस की स्थिति में पुरुष हार्मोन का अत्यधिक मात्रा में उत्पादन होता है, जिस कारण ओव्यूलेशन प्रक्रिया के दौरान अंडाणु बाहर नहीं निकल पाते हैं। इस स्थिति को हाइपरएंड्रोजनिसम कहा जाता है |
  • इंसुलिन– इंसुलिन इस बीमारी का मुख्य कारण है शरीर में मौजूद इंसुलिन हार्मोन, शुगर, स्टार्च व भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करता है। जब इंसुलिन असंतुलित हो जाता है, तो एंड्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है और ओव्यूलेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप महिलाओं को पीसीओएस का सामना करना पड़ता है |

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिएआयुर्वेदिकनुस्खे

  1. अदरक , लहसुन , काली मिर्च , जीरा , कड़ी पत्ता आदि में हार्मोन को संतुलित रखने के गुण होते हैं इन सभी को प्रतिदिन डाइट में शामिल करना चाहिए|
  2. हल्दी हारमोंस को संतुलित रखने में मददगार साबित हुई है|
  3. दही शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखता है और हारमोंस को भी संतुलित रखता है इम्यूनिटी सिस्टम को भी बढ़ाता है|
  4. पानी को अत्यधिक मात्रा में पीना चाहिए क्योंकि हाइड्रेशन के कारण हार्मोन का निर्माण अत्यधिक होने लगता है|
  5. बादाम में प्रोटीन फाइबर और कई तरह के पोषक तत्व होते हैं बादाम का सेवन करना चाहिए|
  6. अखरोट में मेलाटोनिन होता है यह एक तरह का हार्मोन होता है जो पर्याप्त मात्रा में नींद में सहायक होता है|
  7. ग्रीन टी हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करके फैट्स भी बर्न करती है|
  8. फूल गोभी और पत्ता गोभी सब्जियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा होती है जो टॉक्सिन को कंट्रोल करके हारमोंस में संतुलन बनाए रखते हैं|
हल्दी
हल्दी