प्रारंभिक गर्भपात क्या है

प्रारंभिक गर्भपात की समस्या एक आम समस्या बन गई है |स्त्री द्वारा धारण किया गया गर्भ समय से पहले गिर जाए तो उसे प्रारंभिक गर्भपात कहते हैं | प्रारंभिक गर्भपात जितना शारीरिक रूप से तकलीफ देता है उतना ही मानसिक रूप से महिला को कमजोर बना देता है ऐसे में जरूरी है कि जिस महिला का गर्भपात हुआ हो उसे मानसिक रूप से उबरने में उसकी मदद की जाए जिस स्त्री को लगातार तीन बार गर्भपात हो जाते हैं उस महिला को गर्भपात से पीड़ित कहा जाता है| 5 में से एक गर्भवती महिला का गर्भावस्था के 20 वें सप्ताह से पहले गर्भपात हो जाता है|

गर्भपात
प्रारंभिक गर्भपात

प्रारंभिक गर्भपात के लक्षण

  1. योनि से रक्तस्राव-योनि से रक्तस्राव आमतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में हल्की ब्लीडिंग होना सामान्य होता है| चिंता का विषय तब है जब आप को थको के साथ ज्यादा ब्लीडिंग हो और ब्लडिंग के दौरान ब्लड का रंग बुरा या गहरे लाल होतो यह गर्भ गिरने का लक्षण है|
  2. पीठ में दर्द –पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना प्रारंभिक गर्भपात का संकेत हो सकता है| जब गर्भ गिरने को होता है तब जलन पसलियों में , पेट में दर्द प्रदर या पेशाब रुक जाए तो समझ लेना चाहिए कि गर्भ गिरने के लक्षण है|
  3. कई बार आधा गर्भपात हो जाता है और आधा अंदर ही रह जाता है तो ऐसे में पूरा गर्भपात डॉक्टर से करवाना आवश्यक है|

गर्भ गिरने के कारण

  1. पेट पर बहुत ज्यादा दबाव पडना-गर्भावस्था के दौरान महिला के पेट पर चोट लगती है तो गर्भपात भी हो सकता है|
  2. योनि में किसी तरह का संक्रमण होना-महिलाओं की योनि में संक्रमण होना सामान्य बात है| ऐसे में बार-बार होने वाला योनि संक्रमण प्रारंभिक गर्भपात का मुख्य कारण बन सकता है|
  3. इम्यूनोलॉजी डिसऑर्डर– कई बार इम्यूनोलॉजी डिसऑर्डर में अस्थमा , एलर्जी , थायराइड या मधुमेह जैसी समस्याएं हो सकती है जिनके कारण गर्भाशय में बच्चे का विकास नहीं हो पाता है इस वजह से भी प्रारंभिक गर्भपात हो सकता है|
  4. गर्भाशय सामान्यता– जब महिला के गर्भाशय का आकार असामान्य होता है तो गर्भपात की स्थिति बन सकती है ऐसे में बच्चे का विकास नहीं हो पाता|

प्रारंभिक गर्भपात रोकने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  • आंवले के मुरब्बे की एक गुठली चांदी के वर्क में लपेटकर खिलाएं और बराबर सेवन कराते रहने से गर्भपात होने से बचाव रहता है|
  • भौरी के घर की मिट्टी , मोगरे के फूल , लज्जा बनती धाय के फूल , पीला गेरू , सोता और शुद्ध राल इनमें से जितनी भी चीजें मिल सके उन सब का बारीक चूर्ण करके शहद में मिलाकर जुटाने से गिरता हुआ गरम रुक जाता है|
  • गोखरु , मुलहठी , पियाबासा इनके कलक से दूध पकाकर पीने से गर् गर्भवती महिला का दर्द शांत हो जाता है|
  • नीले कमल , लाल कमल , नीलेश्वर सफेद , बबूल और मुलहठी इन का काढ़ा बनाकर पीने से बार बार गर्भ से आने वाला खून रुक जाता है|
  • शहद और बकरी के दूध में कुम्हार के हाथ की मिट्टी मिलाकर खाने से गिरता हुआ गर्भ ठहर जाता है|
  • कबूतर की बीट, शाली चावलों के जल के साथ पीने से गर्भपात के उपद्रव दूर हो जाते हैं|
  • सिंघाड़ा , कमल , केसर , दाख , कसेरू , मुलहठी और मिश्री इनको गाय के दूध में पीसकर पीने से गर्भस्त्राव बंद हो जाता है|
  • गर्भवती महिला की कमर में अकेला कोहरबा बांध देने से गर्भ नहीं गिरता इसी कोहरबा को गले में बांधने से कमल वायु आराम हो जाती है और छाती पर रखने से प्लेग भाग जाता है|
  • अगर गर्भ में चलाएं मान हो तो गाय के दूध में कच्चे गूलर पका कर पीने से लाभ मिलता है|
  • सिंघाड़े, कसेरू ,कमल  और मुलेठी इनको पीस छान और मिश्री मिलाकर दूध के साथ पीने से गर्भस्त्राव आदि उपकरण नष्ट हो जाते हैं|
  • गर्भवती महिला के बाए हाथ में जम्मू रद्द की अंगूठी पहना देने से खून बहना या रक्त स्त्राव होना बंद हो जाता है|
मुलेठी
मुलेठी

प्रारंभिक गर्भपात के बाद सावधानियां

  • प्रारंभिक गर्भपात के बाद महिला की देखभाल और अच्छी तरह करने की जरूरत होती है|
  • प्रारंभिक गर्भपात के दौरान थोड़े समय तक यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए |
  • गर्भावस्था के दौरान जब तक आप के दो मासिक धर्म की धातु प्रक्रिया पूरी ना हो जाए तब तक दूसरी गर्भावस्था को शुरू करने के बारे में न सोचे|
  • अगर प्रारंभिक गर्भपात के बाद महिला को बुखार आ जाता है तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लें|
  • धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए|