फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में रसौली| यूटरस के अंदर बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉएड  कहते हैं। यह अंगूर के आकार के या खरबूजे के आकार के भी हो सकते हैं ज्यादातर में कैंसर होने का खतरा नहीं होता। 0.2 प्रतिशत मामलों में ही कैंसर होने की सम्भाव्ना होती है|बच्चेदानी या गर्भाशय फाइब्रॉएड वो असामान्य ग्रोथ होती हैं जो किसी महिला के गर्भाशय में विकसित होती है। कभी-कभी ये ट्यूमर काफी बड़े हो जाते हैं और गंभीर पेट का दर्द और हैवी पीरियड फ्लो का कारण बनते हैं। फाइब्रॉएड छोटे हो या फिर यूटरस के बाहर हो तो उसमें किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आएंगे। जो फाइब्रॉएड यूटरस के अंदर कैविटी में आ रहे होते हैं उनकी वजह से हेवी ब्लीडिंग होती है। इन्हें सबम्यूकस फाइब्रॉएड कहते हैं।  ऐसे बड़े फाइब्रॉएड जो यूटरस के साइज और उसकी कैविटी को बड़ा कर देते हैं हेवी ब्लीडिंग का कारण बनते हैं।

फाइब्रॉएड
फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड के प्रकार

गर्भाशय में रसौली के 5प्रकार होते हैं-

  1. इंट्रा मरल फाइब्रॉएड-यह गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार के भीतर दिखाई देता है यह काफी बड़ा हो सकता है और गर्भ में फैल सकता है
  2. सब्सक्राइबर फाइब्रॉएड -यह गर्भाशय के बाहर स्थित होता है जिससे सेरोसा कहते हैं बीच में मांसपेशी परत में विकसित होते हैं यह अन्य फेवरेट की तरह आम नहीं है|
  3. सब मयू कौसल फाइब्रॉएड -सब मयू कौशल फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में रसौली| यूटरस के अंदर बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉएड  कहते हैं। यह अंगूर के आकार के या खरबूजे के आकार के भी हो सकते हैं ज्यादातर में कैंसर होने का खतरा नहीं होता। यह आपके गर्भाशय के बीच में मांसपेशी परत में विकसित होते हैं यह अन्य फेवरेट की तरह आम नहीं है |
  4. पिडनकुलेटेड फाइब्रॉएड-सब्ससिरोज़ल ट्यूमर एक स्टेम विकसित कर सकते हैं, एक पतला आधार जो ट्यूमर का समर्थन करता है।
  5. सर्वाइकल फाइब्रॉएड-यह फाइब्रॉएड गर्भ की गर्दन में विकसित होते हैं, जिसे सर्विक्स नाम से जाना जाता है।

गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षण

  • पेट में दर्द होना|
  • गर्भाशय रक्त स्त्राव फाइब्रॉयड का मुख्य लक्षण है|
  • योनि पर दबाव आने के कारण ज्यादा पेशाब आना|
  • फाइब्रॉयड के कारण ज्यादा ब्लीडिंग होने पर महिलाएं आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से ग्रस्त हो जाती हैं|

गर्भाशय में फाइब्रॉएड के कारण

  1. अनुवांशिकता-अगर आपके परिवार में किसी सदस्य को फाइब्रॉएड है तो आपको भी फाइब्रॉएड होने की संभावना है|
  2. हार्मोन-एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन जो गर्भधारण के लिए प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान गर्भाशय के अस्तर के विकास को प्रोत्साहित करते हैं जिस कारण फाइब्रॉएड अत्यधिक मात्रा में हो जाता हैफाइब्रॉयड हार्मोन उत्पादन में कमी के कारण रजोनिवृत्ति के बाद कम हो जाते हैं|
  3. अन्य वृद्धि कारक– जो पदार्थ कास को प्रभावित करते हैं गर्भाशय फाइब्रॉएड धीरे या तेजी से भी बढ़ सकते हैं कई फाइब्रॉएड जो गर्भावस्था में मौजूद होते हैं या गर्भावस्था के बाद या तो सिकुड़ जाते हैं या खत्म हो जाते हैं क्योंकि गर्भाशय समान ने आकार में वापस आ जाता है
  4. असंतुलित भोजन: अगर आप रेड मीट या फिर जंक फूड ज्यादा खाती हैं और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कम करती हैं, तो आप इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।
  5. आयु:  फाइब्रॉएड प्रजनन काल के दौरान विकसित होते हैं। खासतौर पर 30 की आयु से लेकर 40 की आयु के बीच या फिर रजनोवृत्ति शुरू होने तक इसके होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। माना जाता है कि रजनोवृत्ति शुरू होने के बाद ये कम होने लगते हैं।

गर्भाशय में रसौली को रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

गर्भाशय में रसौली को रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. अदरक-अदरक गर्भाशय फाइब्रॉएड के इलाज के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुई है अदरक गर्भाशय में रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देने में इसका इस्तेमाल किया जाता है रक्त का प्रवाह बढ़ने के कारण गर्भाशय में सूजन कम हो जाती है|
  2. मिल्क थिसल-यह नुस्खा मेटाबॉलिज्म कि मदद कर एस्ट्रोजन से छुटकारा पाने में सहायता करता है एस्ट्रोजन नामक हार्मोन कोशिकाओं को उत्तेजित करता है इसे फाइब्रॉएड में विकास होता है|जड़ी-बूटी से बने मिश्रण की 15 से 20 बूंदे दो-तीन महीनों के लिए ले|
  3. गुग्गुल-यह बहुत ही लाभकारी जड़ी बूटी है फाइब्रॉएड की समस्या होने पर आप इसका सेवन सुबह शाम गुड़ के साथ करें यह नुस्खा आपको आराम दिलाने में सहायक है|
  4. सिंहपर्णी-सिंहपर्णी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी गर्भाशय फाइब्रॉएड के लिए सबसे लाभ्कारीहै। यह लिवर को विषाक्‍त पदार्थों से मुक्‍त कर शरीर से अतिरिक्‍त एस्‍ट्रोजन को साफ करता है। इसे बनाने के लिए 2-3 कप पानी लेकर उसमें सिंहपर्णी की जड़ की तीन चम्‍मच मिलाकर, 15 मिनट के लिए उबालें। फिर इसे हल्‍का ठंडा होने के लिए रख दें। इसे कम से कम 3 महीने के लिए दिन में 3 बार लें। 
अदरक
अदरक