बच्चों में दस्त (Diarrhea)

बच्चों में दस्त

बच्चों में दस्त की समस्या को अतिसार भी कहते हैं|यदि आपके बच्चों की पू अचानक बहुत कम या बहुत अधिक पानी होती है, औरअधिक लगता और विपुल होती है, तो आपके बच्चों में दस्त की समस्या हो सकती है|इसका अंग्रेजी नाम Diarrhea है|

बच्चों के मल या पू की स्थिति आमतौर पर बच्चों के आहार के साथ उतरावचढ़ाव होती है, जो बनावट, रंग और पू की गंध को प्रभावित कर सकती है| बोतलद्वारा दूध पिलाए गये बच्चे सामान्य रूप से स्तनपान वाले बच्चों की तुलनामें सामान्यत मजबूत गंध पू होते है| उदाहरण के तौर पर एक व्यस्क की मल केमुकाबले, बच्चे को पहली बार कम ठोस लग सकता है|

बच्चों में दस्त के लक्षण

बच्चों में दस्त होने का सबसे आम कारण एक विषाणु है, जिसका नाम है रोटावायरस। यह विषाणु अंतड़ियों को संक्रमित करता है, जिससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस होता है। यह आंत की अंदरुनी परत को क्षति पहुंचाता है। इस क्षतिग्रस्त परत से तरल पदार्थ का रिसाव होता है और पोषक तत्वों का समाहन किए बिना भोजन इसमें से निकल जाता है। कुछ मामलों में रोटावायरस गंभीर मल संक्रमण और शरीरमें पानी की कमी की वजह से होता है (डिहाइड्रेशन) का कारण बन सकता है।

रोटावायरस से सुरक्षा के लिए शिशु के टीकाकारण के तहत टीका लगाया जाएगा। यह एक अनिवार्य टीका है। शिशु को कौन सी वैक्सीन लगाई जा रही है, इसे देखते हुए उसे दो या तीन खुराक मिलनी चाहिए। पहली खुराक उसे छह से आठ हफ्ते की उम्र में मिलनी ​चाहिए, दूसरी खुराक 10 से 16 हफ्तों के बीच और तीसरी खुराक करीब 14 से 24 हफ्तों के बीच लगनी चाहिए।

ध्यान रखें कि छह हफ्ते से कम उम्र और चार महीने से अधिक उम्र के शिशु को इस टीके की पहली खुराक नहीं दी जा सकती है। यदि आपने यह टीका शिशु को नहीं लगवाया है, तो शिशु के डॉक्टर से बात करें।

बच्चों में दस्त के कारण

  • सबसे आम कारण है, की एक बच्चों में दस्त होता है, जब वायरस से संक्रमण होता है| इसे गैस्ट्रोएंटेरिटिस के रूप में संदर्भित किया जाता है, और उल्टी के साथ या इसके बिना हो सकता है| गैस्ट्रोएंटेरिटिस भी वैक्टीरिया यापरजीवी के संपर्क के कारण हो सकता है|
  • वायरस, वैक्टीरिया या परजीवी बच्चे को दुसरे व्यक्ति से संपर्क दूषित भोजन या पानी के उपयोग के माध्यम से या अगर एक शौचालय जैसे-दूषित सतह को छूता है, और उसके बाद मुह में हाथ डालता है तो उसको पारित किया जा सकता है|

मुझे डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

अगर शिशु में नीचे दिए गए ये लक्षण दिखाई दें, तो आपको शिशु के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालांकि ये लक्षण इतने आम नहीं हैं, मगर फिर भी इन पर ध्यान देने की जरुरत है। जैसे कि:

  • उल्टी, जो 24 घंटो से ज्यादा जारी रहे
  • बुखार, जो 24 घंटो से ज्यादा जारी रहे
  • शिशु कोई तरल पदार्थ नहीं ले रहा है
  • उसके मल में खून आ रहा है
  • काला मल
  • पेट पर सूजन
  • अत्याधिक रोना

बच्चों में दस्त को दोबारा होने से ब्चाने के  उपाय

  • अपने शिशु के हाथ भी अक्सर धोना याद रखें। आपका शिशु अपनी उंगलियां मुंह में लेकर डायरिया पैदा करने वाले इनफेक्शन की चपेट में आ सकता है। इसी कारण शिशु के खेलने की जगह पर गंदा पानी या गंदे खिलौने या कोई अन्य दूषित चीज नहीं होनी चाहिए।
  • यदि आपके घर में पालतू जानवर है, तो सुनिश्चित करें कि वे घर में मल त्याग न करें। अस्वस्थ जानवर को पशुओं के डॉक्टर के पास ले जाएं और पूरी तरह ठीक होने तक उसे शिशु के कमरे में न आने दें।
  • साथ ही, खाना बनाने और कच्चे मांस और सब्जियों का काम करने के बाद आप अपने हाथ अवश्य धोएं। सुनिश्चित करें कि आप खाना तैयार करने और पकाने के सुरक्षित तरीकों का पालन करें।
  • अपने शिशु को स्वस्थ रखने के लिए यह जरुरी है कि उसे अच्छा पालन-पोषण मिले। सुनिश्चित करें कि आप शिशु का टीकाकरण समय पर कराएं। यदि आपको टीकों को लेकर कोई चिंता या सवाल हैं तो डॉक्टर से बात करें।

बच्चों में दस्त के लिए घरेलू उपचार

  1. केला-केले में भी पेक्टिन होता है। पेक्टिन, अंतडियों के आस-पास एक सुरक्षात्मक परत का निर्माण करता है तथा अंतडों में मौजूद अधित द्रव पदार्थ को सोखता है। इसके अलावा, केलों में पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है| जोइलेक्ट्रोलाइट्स को घटाने में मदद करते हैं।आप अपने बच्चे को 1 केला खाने को दे सकते है ।
  2. मेथी दाना-मेथी के दाने बहुत गरम होते हैं जिसके कारण इसे दस्त के इलाज में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका इस्तेमाल दस्त से निजात पाने के लिए किया जाता है। इसके लिए आप दिन में 2-3 बार एक चम्मच भिगोए हुए मेथी के दानों को एक कप दही में मिलाकर अपने बच्चे को खिलाये।
  3. दही-दही में लाइव-क्लटर्स; नामक बैक्टीरिया होता है। यह बैक्टीरिया दस्त से छुटकारा पाने के लिए लैक्टिक एसिड को उत्पन्नकरता है तथा अंतडों को एक सुरक्षात्मक कवच प्रदान करता है।आप अपने बच्चे को दही खाने की आदत जरुर डाले। 10 ग्राम दही मे 1 चमच्च खसखस मिलाकर बच्चो को देने से लाभ होता है।
  4. आलू-चावल के अलावा, आलू में भी भारी मात्रा में स्टार्च पाया जाता है। अतः दस्त के इलाज में आलू के फायदेमंद विकल्प साबित होगा।इसके लिए आपको आलूओं को उबालकर खाने की जरुरत है। उबले हुए आलूओं पर मिर्च-मसाला या चाट पाउडर डालकर ना खाएं।साथ ही, इन्हें फ्रेंच फ्राइज़ के रुप में भी ना खिलाये क्योंकि इस तरह उनका पेट और खराब हो सकता है।आपको एक बात पर ध्यान देने की जरुरत है कि दस्त से निजात पाने के लिए आपको स्टार्च की जरुरत है ना कि मसालेदार चटपटे व्यंजनों की।
  5. चायपत्ती-नवजात और छोटे बच्चों को चाय पत्ती को पानी में घोलकर वह पानी एक या दो चम्मच करके पिलाया जा सकता है। इससे भी दस्त रूक जाएंगे।
  6. सौंफ-10ग्राम सोंफ को कुट्कर उबलते हुए पानी मे डाल दे और थंडा कर ले ।थंडा होने के बाद उसे मसलकर छान ले और 1 चम्मच पानी1 या 2 चम्मच दुध मे मिलाकर दिन मे तीन बार बच्चे को पिलाने से मरोड़ , अपच ,पेट फुलना ,दस्त आदि नही होते है।दिन निकलते समय यह सौंफ का पानी बच्चे को पिलाने से बच्चे ठीक रहता है।
  7. अदरक-डायरिया के इलाज में अदरक एक स्वस्थ व प्रभावी विकल्प है। अदरक खाने को पचाने में मदद करता है तथा पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखता है।सोंठ या जायफल आथवा दोनो को पानी मे घिसकर 3 रती सुबह- शाम देने से फायदा होता है|
सौंफ
सौंफ