बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (बीपीडी) को विभाज्य व्यक्तित्व विकार के नाम से भी जाना जाता है यह एक ऐसा मनोवैज्ञानिक विकार है| जिसमें व्यक्ति के व्यवहार  में अचानक से परिवर्तन आने लगता है| बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से ग्रस्त व्यक्ति अपने आवेग पर नियंत्रण नहीं रख पाते और जल्दी से आवेग में आ जाते हैं| ऐसे व्यक्तियों को महसूस होता है कि लोग उनसे ठीक तरह से व्यवहार नहीं करते|इस रोग के होने पर व्यक्ति की भावनाओं में उतार-चढ़ाव होने लगता है| व्यक्ति के मन की स्थिति ऐसी हो जाती है कि वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लग जाता है और अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख पाता|इस रोग से पीड़ित होने पर व्यक्ति दूसरों को धमकी देने लगते हैं और आतम हत्या करने का प्रयास भी कर सकते हैं| व्यक्ति अपने एहसासों को भी नहीं पहचानता जो लोग व्यक्तिगत विकार से ग्रस्त होते हैं| उनका भावनात्मक व्यवहार सामान्य लोगों की अपेक्षा भिन्न होता है और उसकी आवेग नियंत्रण की क्षमता भी लोगों से भिन्न हो सकती है इसकी किशोरावस्था में ही शुरुआत हो जाती है|

इस रोग की शुरुआत किशोरावस्था में ही हो जाती है पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह बीमारी अधिक देखने को मिलती है लगभग 75% महिलाएं इस रोग से पीड़ित हैं कई स्थितियों में विभाज्य व्यक्तित्व विकार की बीमारी युवावस्था में भी हो सकती है और उम्र के ढलने के साथ साथ ठीक भी हो जाती है|

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के लक्षण

  • बीपीडीसे ग्रस्त व्यक्ति खुद को नुकसान पहुंचाने लगता है
  • उनके आवेग पूर्ण व्यवहार करने के कारण बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास कर सकते हैं
  •   बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं
  •   बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति की भावना अस्थिर होती है
  •   बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति की वैवाहिक जीवन में अस्थिरता होती है
  •   बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन आ जाता है
  • बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति अपने आवेग पर नियंत्रण नहीं रख पाते और जल्दी से आवेग में आ जाते हैं
  • बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति अपने आप को काबिल नहीं समझते और उन्हें महसूस होता है कि लोग उनसे ठीक तरह से बर्ताव नहीं करते
  • बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति को अपने क्रोध पर नियंत्रण करने में कठिनाई का अनुभव होता है
  •   बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति लंबे समय तक इंपल्सिव रहते हैं और उनकी भावनाओं में उतार-चढ़ाव होने लगता है
  • बीपीडी से ग्रस्त व्यक्ति खाली-खाली महसूस करने लगता है

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के कारण

  1. अनुवांशिकता- बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर होने की अनुवांशिक कारण भी होते हैं अगर आपके परिवार के सदस्य माता या पिता इस रोग से पीड़ित है तो बच्चों में इस रोग के होने की संभावना ज्यादा होती हैक्योंकि माता पिता से जीन बच्चों मेंआते हैं |
  2. वातावरण की प्रतिक्रिया-बचपन में होने वाली घटनाएं जैसे शारीरिक रूप से प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न बीपीडी होने का मुख्य कारण है शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बाद बड़े होने पर बच्चे यह नहीं समझ पाते कि उन्हें किस परिस्थिति में कैसे व्यवहार करना चाहिए|
  3. तनाव-तनाव बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर होने का मुख्य कारण है प्रतिदिन की गतिविधियों में होने वाले बदलाव जैसे परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होना या कोई मानसिक तनाव इस बीमारी का कारण बनता है|
  4. द्रव्य पदार्थों का सेवन- द्रव्य पदार्थों का सेवन करने से व्यक्तिगत विकार जैसे रोग हो जाते हैं|
  5. भावनात्मक परिवर्तन-जो लोग व्यक्तिगत विकार से ग्रस्त होते हैं उनका भावनात्मक व्यवहार सामान्य लोगों की अपेक्षा भिन्न होता है और उसकी आवेग नियंत्रण की क्षमता भी लोगों से भिन्न हो सकती है इसकी किशोरावस्था में ही शुरुआत हो जाती है|

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर दवाई

  • एंटी डिप्रेसेंट दवाई(Antidepressants Medications)-एंटी डिप्रेसेंट जैसे सिलेक्टिव सेरोटोनिन, मोनो अमीन ऑक्सीडेस इन्हींबीटर्स आदि दवाओं को थेरेपी की रूप में प्रयोग में लाया जाता है|एंटीडिप्रेसेंट दवाओं का प्रयोग करने से अनिद्रा, नपुंसकता ,थकान ,कब्ज जैसी समस्याओं के लक्षणों में कमी ला सकते हैं
  • मूड स्टेबलाइजर(Mood Stabilizers) – मूड स्टेबलाइजर और ए टिपिकल एंटीसाइकोटिक आदित्य हवाओं को थेरेपी के रूप में प्रयोग में लाया जाता है और तनाव को कम किया जा सकता हैमूड स्टेबलाइजर दवाई मूड स्विंग को नियंत्रण में रखने में सहायता करती है
  • विरोधी चिंता दवाई(Anti-Anxiety Medication)-इन दवाइयों का प्रयोग मतली उल्टी कब बेचैनी घबराहट आदि लक्षणों को कम करने के लिए किया जाता है
  • लिथियम और एंटीकन्वलसेंट्स दवाई– ऐसी दवाओं को प्रयोग में लाने से डिप्रेशन को ठीक किया जा सकता है और यह द्वाए मूड स्विंग्स को नियंत्रण करने में भी सहायक है
  • एंटीसाइकोटिक्स दवाई(Anti-psychotic medications)- एंटीसाइकोटिक्स दवाओं को भी थेरेपी के रूप में प्रयोग में लाया जाता है यह दवाई विभाज्य व्यक्तित्व विकार के लक्षणों को कम करने में सहायक है|