मासिक धर्म

मासिक धर्म मे स्त्रियों में योनि मार्ग से रक्त स्त्राव होने लगता है|स्त्रियां जब योन अवस्था में प्रवेश करने लगती है तब पहली बार मासिक धर्म शुरू होता है यह स्त्राव योनि मार्ग से महीने में एक बार एक निश्चित अवधि में होता है जो प्राय 3 से 4 दिन तक रहता है कई स्त्रियों में यह 6 या 7 दिन तक भी रहता है|

मासिक धर्म
मासिक धर्म

मासिक धर्म का समय

किसी स्त्री को प्रथम मासिक धर्म के बाद दूसरा मासिक धर्म 24 दिन तो किसी को 28 दिन में होता है| उस स्थिति को ऋतु चक्र के अनुसार नियत समय पर होना जरूरी है इस क्रिया से स्त्रियों का गर्भाशय एवं प्रजनन संस्थान शुद्ध स्वच्छ और स्वस्थ होकर गर्भाधान के लिए उपयुक्त क्षेत्र बने रहते हैं और स्त्रियों का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है|

जब गर्भाशय या प्रजनन संस्थान किसी कारण से रोग से ग्रस्त हो जाते हैं तो ऋतु चक्र बिगड़ जाता है और उन्हें अनेक प्रकार की मानसिक और शारीरिक तौर पर कष्ट पहुंचने लगता है जैसे-मासिक धर्म का अनियमित आना, मासिक धर्म का कष्ट से आना|

  1. अनियमित मासिक धर्म
  2. मासिक धर्म का कष्ट से आना
  1. अनियमित मासिक धर्म-स्त्रियों को मासिक धर्म 28 दिन के बाद हुआ करता है लेकिन कई औरतों में 24 दिन के बाद हो जाता है और कईयों को 32 दिन के बाद हो जाता है अगर मासिक धर्म 28 या 32 दिन के बाद आए तो वह नियम अनुसार नहीं है|मासिक धर्म को समय पर लाने के लिए डोडा कपास का गुड्डा , 28 ग्राम गुदा अमलताश , 30 ग्राम सौंफ , तुखम , गाजर , सोया , गुलाब , फशा , 1010 ग्राम पुराना गुड , 30 ग्राम से 240 ग्राम पानी में आंच पर पकाएं जब पानी एक पाव रह जाए तो छानकर पिलाएं माहवारी खुलकर आएगी गर्भवती स्त्री को ने पिलाएं वरना गर्भ गिर जाएगा|
  2. मासिक धर्म का कष्ट से आना-इस रोग में औरतों के मासिक धर्म के आरंभ होने से 1 दिन या 1 सप्ताह पहले ही पेट में दर्द शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे सिर दर्द , सिर चकराना और बेचैनी बढ़ जाती है|इस रोग में जंगली अखरोट की मिंगी आवश्यकता के अनुसार लेकर बारीक पीस लें और उसमें पुराना गुड़ मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना ले गुड अधिक पुराना नहीं हो यदि पीड़ा अधिक हो तो दो गोली नहीं तो एक गोली गर्म दूध के साथ खिलाएं|

मासिक धर्म के लक्षण यानी पूर्व चिन्ह

  1. जब स्त्री को मासिक स्त्राव होने लगता है तो उसके पेट में भारीपन , कमर में दर्द , बेचैनी और थकावट और सोच की बार बार इच्छा होती है इनमें से कुछ भी लक्षण दिखाई दे तो यह समझ जाना चाहिए कि मासिक धर्म होने को है|
  2. शुद्ध राज यानि खुन जब कपड़े पर लगा हुआ दाग धोने से छूट जाए और मासिक स्त्राव आने पर दर्द का अनुभव न हो और खून का रंग लाख के समान हो और दुर्गंध से रहित हो तो वह राज शुद्ध कहलाता है|
  3. जब मासिक स्त्राव में खून का रंग काला , पीला आदि अनेक रंगो का हो और कम या अधिक मात्रा में जल्दी या देर से हो या रुक रुक कर आए और रक्त स्त्राव के समय जलन व खुजली का अनुभव हो तो समझ जाना चाहिए कि वह अशुद्ध रक्त है|

मासिक धर्म में दर्द

  1. कम नींद लेना भी पीरियड में दर्द का मुख्य कारण बन सकता है अगर कम हो रही है तो आपका शरीर सिस्टम बिगड़ सकता है|
  2. एल्कोहल यानी शराब ने सिर्फ आपके शरीर में पानी की कमी कर देता है बल्कि इसका सेवन करने से मैग्नीशियम का सत्र भी कम हो जाता है मैग्नीशियम की कमी से मासिक धर्म में दर्द का सादा अनुभव होता है|
  3. कैफ़ीन ड्रिंक्स, कैफिन ड्रिंक्स मतलब कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए|कॉफी का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्म में दर्द का अनुभव ज्यादा होता है|
  4. धूम्रपान करना भी मासिक धर्म के दिनों में दर्द होने का मुख्य कारण है|

मासिक धर्म न होने के कारण

  1. प्रकृति के नियम के अनुसार 40 से 50 वर्ष की आयु में हमेशा के लिए मासिक धर्म का होना बंद हो जाता है और शरीर में खून का दौरा भी कम हो जाता है|गर्भाश्य से न होने के कारण भग का मुंह बंद होने से भग का मुंह अत्यंत कम होने से और योनि छिद्र् न होने से मासिक धर्म नहीं होता परन्तु इनमें से योनि छिद्र काटकर रक्त स्त्राव जारी किया जा सकता है|
  2. खून में कमी होने से, स्त्रियों में सोम रोग हो जाने पर या छोटी या उम्र में विवाह करने से और मासिक धर्म के दिनों में स्नान करने से या अन्य रोग के कारण क्षण हो जाने पर मासिक धर्म नहीं होता|
  3. भोजन ठीक प्रकार से हजम ना होने से शारीरिक कमजोरी होने के कारण या दिन में सोने और रात को जागने के कारण और गर्म वस्तुओं के सेवन करने से मासिक धर्म में रुकावट आ जाती है|गर्भवती हो जाने के बाद भी मासिक धर्म नहीं होता और बच्चे को दूध पिलाते रहने की अवस्था में भी मासिक धर्म नहीं होता|

मासिक धर्म लाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. जिन स्त्रियों को शरीर की कमजोरी और रक्त की कमी के कारण मासिक धर्म नहीं होता उन्हें खून बढ़ाने में कमजोरी को दूर करने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए|
  2. यदि किसी रोग के कारण मासिक धर्म रुका हो तो उस रोग की चिकित्सा करने के बाद ही मासिक जारी करने के उपाय करने चाहिए|
  3. एक तोला काले तिलों को आधा सेर पानी के साथ कलईदार बर्तन में पकाएं छटा हिस्सा 6 शेष रह जाने पर एक तोला पुराना गुड़ मिलाकर मासिक धर्म होने से 5 दिन पहले सुबह पीना चाहिए मासिक धर्म आना शुरू हो जाएगा|
  4. श्वेत वलाल चंदन का काढा बनाकर पीने से दुर्गंध वाला मासिक भी ठीक हो जाता है|
  5. गाजर का हलवा का सेवन करने से मासिक धर्म समय पर आ जाता है|
  6. काली जीरी , सौठ् ,एलुआ , अंडी की मिंगी प्रत्येक दिन 3 मासी लेकर पीस लें  और गर्म करके योनि में चार-पांच दिन लगाएं इसे तुरंत ही लाभ होगा|
  7. 1 सप्ताह तक कलौंजी , मजीठ , मूर इनको पीसकर सेवन करें और ऊपर से गुनगुना दूध पिए मासिक धर्म होने में लाभ मिलेगा|
  8. अजवाइन, पुदीना ,इलायची और सौंफ इन चारों को अर्क समान मात्रा में लेकर एक छटांक की मात्रा से मासिक के समय पीने से मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाएगी|
  9. कमर तक गुनगुने पानी में बैठे और पेट पर सेक करने के बाद तारपीन के तेल की मालिश करें इससे मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाएगी|

अति आर्तव की चिकित्सा

  1. नागकेसर , कमल केसर, पीपल की लाख दो दो माशी और मिश्री 6 माह से सब को मिलाकर फाकने से अति आतंक की समस्या दूर हो जाती है पीली मिट्टी की पट्टी पेट पर रखने से रक्त स्त्राव बंद हो जाता है|
  2. अशोकारिष्ट पीने से लाभ होता है|
  3. मासिक धर्म में अधिक रक्त आने के समय स्त्रियों का सिराना नीचा रखना चाहिए और चारपाई के पाइ का भाग ऊंचा रखना चाहिए|
  4. अफीम एक माशा कपूर 6 रत्ती दोनों जलसे खरल करके मूंग के बराबर गोली बना ले और  गर्म पानी के साथ ले|