मिर्गी (epilepsy)

मिर्गी

मिर्गी एक मस्तिष्क का विकार है जिसमें लोगों को दौरे का अनुभव होता है मिर्गी यानी एपिलेप्सी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं|मरीज के दिमाग में कई तरह की तरंगें पैदा होने लगती हैं और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और मरीज कुछ देर के लिए बेहोश हो जाता है|डब्ल्यूएचओ के अनुसार पूरी दुनिया में 5 करोड लोग मिर्गी से पीड़ित हैं इसका प्रभाव शरीर के किसी एक हिस्से पर देखने को मिल सकता है जैसे हाथ या पैर पर|

पुरुषों में निम्नलिखित स्थितियों में दौरा पड़ने की संभावना बढ़ती है जैसे-शराब का सेवन करना , तनाव होना , पर्याप्त नींद न लेना, ब्लड प्रेशर का कम हो जाना इत्यादि कारणों में मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं|

मिर्गी के प्रकार (Epilepsy types)

मिर्गी के चार प्रकार होते हैं

1.सामान्यीकृत मिर्गी-सामान्यीकृत मिर्गी यदि आपके पास इस प्रकार की मिर्गी है, तो दौरे मस्तिष्क के दोनों किनारों पर शुरू होते हैं ।अगर पूरे दिमाग में करंट फैलता है और मरीज बेहोश हो जाता है। यह सबके कॉमन है।

 मिर्गी के इस प्रकार के दो मूल प्रकार के दौरे होते हैं:

  • सामान्यीकृत मोटर बरामदगी- इन्हें “ग्रैंड माल” बरामदगी कहा जाता था। वे आपके शरीर को उन तरीकों से स्थानांतरित करने का कारण बनते हैं जिन्हें आप कभी-कभी नाटकीय रूप से नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। टॉनिक-क्लोनिक दौरे एक उदाहरण हैं। जब यह हिट होता है, तो आप चेतना खो देते हैं और आपकी मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं और झटका लगता है। अन्य प्रकार के बारे में आप अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं जिसमें क्लोनिक, टॉनिक और मायोक्लोनिक शामिल हैं।
  • सामान्यीकृत गैर-मोटर (या अनुपस्थिति) बरामदगी- उन्हें “पेटिट माल” बरामदगी कहा जाता था। कुछ विशिष्ट प्रकार जिन्हें आप सुन सकते हैं अपने चिकित्सक का उल्लेख विशिष्ट, atypical और मायोक्लोनिक हैं।

2.फोकल मिर्गी-फोकल मिर्गी इस प्रकार की मिर्गी में, मस्तिष्क के एक तरफ एक विशेष क्षेत्र (या मस्तिष्क कोशिकाओं के नेटवर्क) में दौरे विकसित होते हैं। इन्हें “आंशिक बरामदगी” कहा जाता था।इसमें करंट शरीर के एक हिस्से से निकलता है और उसी हिस्से में रहता है।

3.सामान्यीकृत और फोकल मिर्गी-सामान्यीकृत और फोकल मिर्गी जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह एक प्रकार की मिर्गी है जिसमें लोगों को सामान्य और फोकल दौरे दोनों होते हैं। इसमें मरीज कोई हरकत नहीं करता। गुमसुम बैठा रहता है। हाथ हिलने लगता या मुंह हिलाने लगता है लेकिन बात नहीं करता।

4.अज्ञात यदि सामान्यीकृत या फोकल मिर्गी-अज्ञात यदि सामान्यीकृत या फोकल मिर्गी कभी-कभी, डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी व्यक्ति को मिर्गी है, लेकिन वे नहीं जानते कि बरामदगी फोकल या सामान्यीकृत है या नहीं। यह तब हो सकता है जब आप अकेले थे जब आपके पास दौरे थे, इसलिए कोई भी वर्णन नहीं कर सकता कि क्या हुआ। यदि आपका परीक्षण परिणाम स्पष्ट नहीं हैं, तो आपका डॉक्टर आपके मिर्गी के प्रकार को “अज्ञात या सामान्य और फोकल मिर्गी” के रूप में वर्गीकृत कर सकता है।

मिर्गी के लक्षण (epilepsy symptoms)

  • व्यक्ति की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है
  • व्यक्ति बेहोश हो जाता है
  • व्यक्ति अचानक गिरकर बेहोश हो जाता है
  • मुंह से झाग निकल जाना
  • हाथ पांव में झटके आना
  • चेहरे का नीला पड़ जाना
  • मरीज का दांतो को चबा लेना
  • कपड़ों में पेशाब निकलना

मिर्गी के कारण (epilepsy causes)

  1. जेनेटिक –जेनेटिक इस रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जींस की समस्या के कारण दिमाग की नसें ठीक से काम नहीं कर रही हो तो मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं|
  2. सिर पर गंभीर चोट -सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण भी मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है और दौरे पड़ने लगते हैं|
  3. ऑटिज्म-ऑटिज्म की वजह से भी बच्चों और बुजुर्गों में मिर्गी के दौरे पड़ने की संभावना बढ़ जाती है बढ़ती उम्र के साथ यह रोग होने लगता है|
  4. ब्रेन टयूमर-ब्रेन ट्यूमर की समस्या होने पर भी मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं|
  5. रक्त स्त्राव- मस्तिष्क में रक्त स्त्राव या खून का थक्का जम जाने के कारण में मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं यह समानता है मस्तिष्क की कमजोरी के कारण होता है|
  6. संक्रमण –मस्तिष्क में संक्रमण होने के कारण भी मिर्गी के दौरे पड़ने की आशंका बढ़ जाती है|
  7. गर्भावस्था-गर्भावस्था की जटिलताओं के कारण स्त्री में हुए मानसिक संक्रमण से भी मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं|

मिर्गी से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. तुलसी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक करते हैं| तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से रोगी को मिर्गी से निजात मिलता है| तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघने  से मिर्गी के रोगी को आराम मिलता है।
  2. प्रोटीन युक्त आहार मिर्गी के रोगी को प्रोटीन और विटामिन युक्त आहार लेना चाहिए सुबह सुबह उठकर मिर्गी के रोगी को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला के चूर्ण का सेवन करना चाहिए|
  3. बकरी का दूध मिर्गी के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है एक कप दूध में चौथाई कप मेहंदी के पत्तों का रस मिलाकर प्रतिदिन खाना खाने के बाद दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करना चाहिए इससे मिर्गी रोग से निजात मिलता है|
  4. शहतूत और अंगूर के रस का सेवन मिर्गी के रोगी के लिए काफी लाभदायक है प्रतिदिन सुबह खाली पेट आधा किलो शहतूत और अंगूर का रस का सेवन करना चाहिए|
  5. प्याज के रस के साथ थोड़ा सा पानी मिलाकर पीना मिर्गी के रोगी के लिए लाभदायक है।
  6. मिर्गी के रोगी को अखरोट का सेवन करना चाहिए यह मस्तिष्क को मजबूत बना देता है और मिलने से भी छुटकारा मिलता है|
  7. बादाम को भिगोकर सुबह छील कर खाने से मिर्गी की समस्या दूर होती हैं|
अखरोट
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