मैकुलर डिजनरेशन (चकत्तेदार अध: पतन)

मैकुलर डिजनरेशन इसी मैक्युला के  क्षतिग्रस्त होने के कारण क्षतिग्रस्त  होने वाली एक सामान्य आंख की बीमारी है इससे कुछ लोगों को अंधापन होने की संभावना हो सकती है| आंख का मैक्यूला पेनी और केंद्रित नजर के लिए आवश्यक होता है यह रेटीना के केंद्र के पास एक छोटे से निशान के रूप में दिखाई देता है| मैक्युला हमारी आंख की सीध में आने वाली किसी भी वस्तु को देखने में हमारी सहायता करता है|

मैकुलर डिजनरेशन
मैकुलर डिजनरेशन

मैकुलर डिजनरेशन के प्रकार

मैकुलर डीजंनरेशन दो प्रकार का होता है:-

  • ड्राई मैकुलर डिजनरेशन
  • वेट मैकुलर डिजनरेशन
  • ड्राई मैकुलर डिजनरेशन-ड्राई मैकुलर डिजनेरेशन में आँख के मैक्युला में एक पीले रंग का पदार्थ इकट्ठा हो जाता है जिसे ड्रुसन (पीले रंग के गुच्छे ) कहा जाता है। यदि यह गुच्छे कम होते हैं, तो इससे देखने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन यदि इनका आकार बढ़ जाता हैं तो व्यक्ति को  किसी चीज को ध्यान से देखते समय कम दिखाई देने लगता है। यदि यह समस्या सामान्य से कहीं ज़्यादा बढ़ जाए तो आँखों के उस हिस्से की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं , इस स्थिति में व्यक्ति की केंद्रीय दृष्टि  बहुत कम हो जाती है।
  • वेट मैकुलर डिजनरेशन-यह वह अवस्था होती है, जिसमें मैक्युला के नीचे कोरोज़ से रक्त वाहिकाओं की असामान्य बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस स्थिति को कोरोएडियल नेवस्क्यराइजेशन कहा जाता है। अत्यधिक फुलाव के कारण इन रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुँच जाती है और इससे रेटिना में रक्त और तरल का रिसाव होना शुरू हो जाता है। इसके कारण आँखों की सतह पर लहरदार पंक्तियों के साथ-साथ जगह-जगह चकते बन जाते हैं। इसके कारण भी व्यक्ति के देखने की क्षमता कम हो जाती है|

मैक्युला डिजनरेशन के लक्षण

  • गीले धब्बेदार अध: पतन में सबसे आम लक्षण है सीधी रेखाएं जो टेढ़ी या लहराती दिखाई देती हैं। इसका परिणाम तब होता है जब लीक हुई रक्त वाहिकाओं से द्रव भीतर इकट्ठा होता है और मैक्युला को विकृत करता है, दृष्टि को विकृत करता है। दृष्टि के मध्य क्षेत्र में ग्रे या काले रंग के बड़े क्षेत्र भी हो सकते हैं। केंद्रीय दृष्टि थोड़े समय के लिए कम हो सकती है।
  • अपने सामने की वस्तुओं को देखने में दिक्कत महसूस होना|
  • इस रोग में व्यक्ति की नजर कमजोर हो जाती है और उसे कभी धुंधला और कभी साफ दिखाई देने लगता है|
  • वस्तुएं सामान्य आकार की तुलना में छोटी दिखाई देने लगती है|
  • आंखों का लाल होना और दर्द होना इस रोग का मुख्य लक्षण है|

मैकुलर डिजनरेशन के कारण

  • उम्र– बढ़ती उम्र के साथ इस रोग के होने की संभावना बढ़ती रहती है पूरा से 70 वर्ष की आयु के बीच यह समस्या आम हो जाती है|
  • धूम्रपान- बीड़ी , सिगरेट , शराब , तंबाकू , गुटखा आदि का सेवन करने से इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|धूम्रपान करने से व्यक्ति की रेटिना पर बहुत बुरा असर पड़ता है|धूम्रपान कैंसर ही नहीं बल्कि आंखों की रोशनी का भी कारण बनता है|
  • हृदय रोग- जो व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित हो उनमें इस रोग के होने की आशंका बनी रहती है|
  • तनाव-बीमारी होने की अवस्था में व्यक्ति को तनाव जैसी समस्याएं हो सकती है| मैकुलर डिजनरेशन का शुरुआती लक्षण तनाव है|

आंखों के धब्बे दार विकार की रोकथाम के उपाय

  • धूम्रपान न करें– धूम्रपान करना मैकुलर डिजनरेशन का मुख्य कारण है धूम्रपान करने से आंखों के धब्बे दार विकार होने की संभावना बनी रहती है इसलिए धूम्रपान का सेवन न करें|
  • पोषण– हमें प्रतिदिन की आहार में पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए| खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां , ताजे फल का सेवन करें क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट मात्रा होती है जो हमें बीमारियों से बचाती है|
  • मछली का सेवन- अपने प्रतिदिन के बाहर में मछली का सेवन कीजिए क्योंकि इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा पाई जाती है जो ड्राइ मैकुलर डिजनरेशन होने की संभावना को कम करती है|
  • विटामिन और जिंक का सेवन– विटामिन और जिंक का सेवन करने से आंखों की रोशनी को समाप्त होने से बचा सकते हैं|
  • अखरोट का सेवन- अपने प्रति दिन की आहार में अखरोट को शामिल करें इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा होती है जो हमें आंखों के रोगो को होने से बचाती है|
  • सर्जरी के द्वारा- अगर किसी व्यक्ति को हुई है विकार दोनों आंखों में हो गया है तो टेलीस्कोपिक लेंस का प्रयोग करके आंखों की रोशनी को बढ़ाया जा सकता है|
अखरोट
अखरोट