मोतियाबिंद

मोतियाबिंद जिसे हम सफेद मोतिया भी कहते हैं जिसमें आंख के प्राकृतिक पारदर्शी लेंस का धुंधलापन हो जाता है| 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों मे यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है |आंखों की दृष्टि को खो देना इस रोग का मुख्य कारण है|कैटरेक्ट आंखों की बीमारी है| मोतियाबिंद को कैटरेक्ट भी कहते हैं| इसमें व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है |चश्मा लगाने की बात भी साफ दिखाई नहीं देता तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेकैटरेक्ट की समस्या 40 साल की उम्र से कम उम्र वालों को भी हो रही है| आश्चर्यजनक रूप से यह रोग सामान्य उम्र 50 से 70 वर्ष के बुजुर्गों में ही होता है|

मोतियाबिंद
मोतियाबिंद

मोतियाबिंद के प्रकार

  1. सबसैप्सुलर मोतियाबिंद जो की लेंस के पीछे की तरफ होता है । मधुमेह वाले लोग या स्टेरॉयड दवाओं की उच्च खुराक लेने वाले लोगों में एक उप-कोशिकीय मोतियाबिंद विकसित होने का अधिक खतरा होता है ।
  2. न्यूक्लियर मोतियाबिंद लेंस के केंद्रीय क्षेत्र (नाभिक) में होता है । न्यूक्लियर मोतियाबिंद आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ- साथ बढ़ता है ।
  3. कॉर्टिकल मोतियाबिंद की विशेषता सफेद,कील जैसी ओपेसिटी होती है जो लेंस की परिधि में शुरू होती है और धीरे धीरे केंद्र की तरफ बढ़ती है  जैसे – एक पहिये का आरा ।

मोतियाबिंद के लक्षण

  1. मोतियाबिंद होने पर चश्मे का नंबर बदलता रहता है चश्मे का नंबर कभी कम होता है तो कभी ज्यादा होता है|
  2. रात में कम दिखना यह रोग होने पर व्यक्ति को रात में देखने की समस्या होती है व्यक्ति को रात में ड्राइविंग करने में परेशानी हो सकती है |
  3. बुजुर्गों में दृष्टि कमजोर होने के कारण रंगों में अंतर न कर पाना इस रोग का मुख्य लक्षण है|
  4. आंखों में धुंधलापन आ जाता है ठीक से दिखाई नहीं देता|हल्की रोशनी का तेज प्रतीत होना|
  5. बुजुर्गों में यह रोग होने के कारण बार-बार चश्मे के नंबर बदलते रहते हैं |
  6. नजर का धुध्ला होना ही कैटरेक्ट की शुरुआत है|

मोतियाबिंद होने के कारण

  1. सिगरेट व शराब धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को मोतियाबिंद होने का खतरा अधिक होता है उन्हें आंखों के न्यूक्लीयर हिस्से में मोतियाबिंद होने का खतरा रहता है जो बाकी की तरह की मोतियाबिंद से ज्यादा दृष्टि को हानि पहुंचाता है|
  2. पर्यावरण कारक लंबे समय तक पर्यावरण लीड के संपर्क में आने से मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है|
  3. उम्र कुछ लोगों में 40 से 50 वर्ष की उम्र में मोतियाबिंद का विकास हो जाता है यह 60 साल की उम्र में दृष्टि को प्रभावित करते हैं|
  4. अनुवांशिकता भी इस रोग का मुख्य कारण है परिवार के किसी सदस्य को यह रोग होने पर आपको मोतियाबिंद होने की संभावनाएं बढ़ जाती है
  5. मधुमेह से ग्रस्त लोगों को मुरतिया भिन्न होने का खतरा बना रहता है जिन लोगों को निकट की दृष्टि की समस्याएं हैं उन्हें मोतियाबिंद होने का खतरा ज्यादा रहता है जिससे आंखों में सूजन भी आ जाती है|
  6. सूर्य के प्रकाश से कम उम्र में ज्यादा सूरज की किरणों के संपर्क में आने से शुरू होने की संभावना बढ़ जाती है|
  7. पोषण की कमी , विटामिन सी , विटामिन ई की कमी से भी यह रोग हो जाता है|

मोतियाबिंद से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

  1. एक चम्मच पिसा हुआ धनिया एक कप पानी में उबालकर छावनी ठंडा होने पर सुबह शाम आंखों में डालने से मोतियाबिंद में आराम मिलता है|
  2. आंवले का रस , गाजर , पालक का सेवन करने से मोतियाबिंद रोग जड़ से खत्म हो जाता है 2 से 3 महीने इनके पदार्थों को प्रतिदिन के सेवन में शामिल करें|
  3. हल्दी में करक्यूमिन नामक रसायन होता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है हल्दी मोतियाबिंद को होने से रोकती है इसलिए हल्दी का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए|
  4. मोतियाबिंद से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय गाय के दूध का नियमित रूप से सेवन करने पर मोतियाबिंद में आराम मिलता है|
  5. एक चम्मच घी 2 काली मिर्च और थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर इन का पेस्ट बना ले और दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करने पर मोतियाबिंद से आराम मिलता है|
  6. दो बूंद प्याज का रस और दो बूंद शहद मिलाकर इसे काजल की तरह रोजाना आंखों में लगाने से मोतियाबिंद की समस्या दूर होती है|
  7. जामुन में एंथोसायनोसाइड्स तथा फ्लेवनाइड्स काफी अधिक होते हैं जो कि रेटिना और आंखों के लैंस की रक्षा करते हैं हालांकि जामुन से मोतियाबिंद पूरी तरह नहीं हटता लेकिन दृष्टि की अस्पष्टता को ठीक किया जा सकता है|
  8. ग्रीन टी से आंखों की रोशनी तेज हो सकती है। रोजाना तीन से चार बार ग्रीन टी पीने आंखों को स्वास्थ्य लाभ होता है। ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट आंखों को नई ताजगी देते हैं।
  9. कच्ची व हरी सब्जियों में पोषक तत्व और विटामिन ए (Vitamin A) की उच्च मात्रा होती है जो कि आंखों के स्वास्थ्य रखने के जरूरी है। अपने दैनिक आहार में कच्ची सब्जियों को शामिल करें। इससे मोतियाबिंद के साथ ही आंखों की अन्य सामान्य समस्याओं से भी निपटा जा सकता है। 
हरी सब्जियाँ
हरी सब्जियाँ