यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urineri tract infection)

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन

यूरिन इन्फेक्शन को यूटीआई भी कहते हैं यह इंफेक्शन पेशाब से संबंधित अंगों में होता है जब कुछ कीटाणु मूत्रमार्ग से यूरिन में चले जाते हैं तो यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हो जाता है सबसे पहले किडनी पर असर पड़ता है और किडनी में सूजन आ जाती है यह इनफेक्शन ब्लड सरकुलेशन के सारे बाकी अंगों तक भी पहुंच सकता है उन्हें डैमेज कर सकता है|

मूत्र असंयमिता यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी एक बीमारी है इस बीमारी में व्यक्ति का यूरिन कभी भी निकल सकता है क्योंकि वह अपनी यूरिन पर नियंत्रण नहीं रख पाता दुनिया भर में करोड़ों लोग इस समस्या से पीड़ित हैं पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है|

मूत्र असंयमिता के प्रकार (Incontinence  types)

मूत्र असंयमिता के प्रकार- इसके  चार प्रकार के होते हैं:-

1.स्ट्रेस इंकंटिनेंस(stress incontinence)-इस रोग में व्यक्ति की पेट की निचली मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और वह अपने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रख पाता |यह  हंसने ,छिंक्ने और खासने के कारण हो सकता है| गर्भावस्था और शिशु का जन्म होना इस रोग का मुख्य कारण हो सकता है|

2. ओवरफ्लो इंकंटिनेंस(overflow incontinence)-इस रोग में व्यक्ति अपना मूत्राशय पूरी तरह से खाली करने में असमर्थ हो जाता है इसका मुख्य कारण है ट्यूमर और कमजोर मांसपेशियां और मूत्राशय पूरा भरने के बाद मुत्र लिक होने की समस्याओं का सामना करना पड़ता है|

3. अर्ज इंकंटिनेंस (urge incontinence)-इस रोग में व्यक्ति को शौचालय तक पहुंचने की बहुत जल्दी रहती है और वह अपने मूत्र पर काबू नहीं रख पाता है फिर लीकेज की समस्या उत्पन्न होती है इसका मुख्य कारण है मांसपेशियों का कमजोर होना और नर्वस सिस्टम में नुकसान होना|

4. फंक्शनस इंकंटिनेंस(functions incontinence)-जब आप समय पर बाथरूम जाने के लिए पर्याप्त रूप से संचार नहीं कर सकते अर्थराइटिस जैसी समस्या के कारण यह परिस्थिति उत्पन्न होती है|

(मूत्रअसंयमिता) पेशाब  न  रोक पाने के लक्षण(Incontinence symptoms)

  • पेशाब करने में जलन और कठिनाई का अनुभव होता है
  • बार बार पेशाब का लगना लेकिन मूत्र का निकलना
  • मूत्र का रंग भूरे रंग का होना
  • कई बार मूत्र के साथ खून का आ जाना
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द होना इस रोग का मुख्य लक्षण है
  • गंध वाला भूरे रंग का पेशाब आना
  • इस रोग मे व्यक्ति को थकान और कमजोरी का अनुभव होता है
  • जब इनफेक्शन किड्नी तक पहुंच जाए तब बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है

मूत्रअसंयमिता  के कारण(Incontinence causes)

1.गर्भावस्था-हारमोंस में बदलाव से भी तनाव अस्मिता हो सकती है|

2.शिशु का जन्म होना– बच्चे को जन्म देने पर पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है जिस कारण मूत्राशय असंयमिता की समस्या उत्पन्न होती है|

3.अनुवांशिकता– अगर परिवार में मूत्रअसंयमिता की समस्या है तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

4.वजन ज्यादा होना-वजन ज्यादा होने से मूत्राशय की आस-पास की नसों पर दबाव पड़ने लगता है जिससे मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है हंसने  और खासी करते समय पेशाब में पेशाब पर नियंत्रण नहीं रख पाते|

5.धूम्रपान- धूम्रपान तंबाकू ,बीड़ी ,सिगरेट, शराब ,गुटखा पीने से इस रोग के होने की संभावनाएं बढ़ जाती है|

6.बढ़ती उम्र-जैसे-जैसे उम्र बढ़ने लगती है वैसे-वैसे  मूत्राशय की अक्षमता भी कम होने लगती है, अथवा मूत्र के नियंत्रित करने की शक्ति कम हो जाती है|

मूत्र असंयमिता की समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1.विटामिन सी-विटामिन सी का सेवन ऐसी फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिसमे विटामिन से भरपूर मात्रा में ही हो आंवले और संतरे हमें विटामिन से भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए इसका सेवन करें|

2.अधिक मात्रा में पानी का सेवन– पानी की कमी होने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है मन का रंग गुलाबी , बुरा और पीले रंग का हो जाता है इसलिए अधिक से अधिक मात्रा में पानी पिए|

3.विटामिन डी– मछली दूध अंडे की जर्दी इन सब में विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए इन पदार्थों का सेवन करें वह प्रतिदिन के आहार में शामिल करें सूरज की रोशनी से भी हमें विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मिलता है|

4.सेब का सिरका– यह मूत्र अस्यमिता की समस्या को नियंत्रित करता है यह आपके शरीर के विषाक्त पदार्थों को हटाकर मूत्राशय में संक्रमण को दूर करने में आपकी मदद करता है एक गिलास पानी में एक से दो चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर इसका दिन में दो से तीन बार सेवन करें|

5.कलीवर-यह एक प्रकार की ओषधि है यह मूत्र असयमिता के लिए एक टॉनिक के रूप में काम करता है एक कप गर्म पानी में इस जड़ी बूटी के दो से तीन चम्मच मिलाकर थोड़ी देर के लिए रख दे फिर इस मिश्रण को दिन में दो से तीन बार प्रयोग में लाएं|

मूत्र असंयमिता की समस्या से बचने के लिए उपाय:

इस समस्या से बचने के लिए आप इन सब पदार्थों का सेवन बंद कर दें जिन का वर्णन किस प्रकार से है

  • कैफ़ीन-कैफ़ीन में ड्यूरेटिक गुण होते हैं जिनकी वजह से ब्लैडर पर बुरा असर पड़ता है और उसकी मूत्र रॉकी रखने की क्षमता कम हो जाती है इसलिए कॉफी का सेवन कम कर दे
  • शुगर-अगर आप मीठी चीजों का ज्यादा सेवन कर रहे हैं तो यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए शहद जैसी मीठी चीजों का सेवन कम कर दें
  • कोल्ड ड्रिंक्स– कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से बार बार पेशाब आने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है ब्लेडर पर बुरा असर पड़ता है और उसकी मित्र को रोके रखने की क्षमता भी कम हो जाती है
  • शराब-शराब में ड्यूरेटिक गुण होते हैं जिनकी वजह से आपको बार बार पेशाब लगने की समस्या उत्पन्न होती है इसलिए शराब का कम सेवन करें
  • पेय पदार्थ– अधिक मात्रा में पानी पीने के कारण यह समस्या हो जाती है पेय पदार्थों का सेवन न करने से डीहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है इसलिए भी पदार्थों का सेवन पूरी तरह से बंद न करने की बजाय कम सेवन करें