श्वेत प्रदर रोग

 श्वेत प्रदर रोग उस रोग को कहते हैं जिसमें स्त्री का मासिक धर्म अधिक समय तक जारी रहता है या योनि  से सफेद लेस दार पदार्थ के रूप में धातु निकलती रहती है|

अत्यंत मैथुन करने, गर्भपात कराने, दिन में बहुत सोने या कृत्रिम विश का योग होने आदि कारणों से स्त्रियों को श्वेत प्रदर रोग उत्पन्न होता है इस प्रदर रोग के अत्यंत बढ़ने पर जलन कमजोरी मोह मद तृष्णा और बहुत से वात रोग हो जाते हैं|

श्वेत प्रदर रोग
श्वेत प्रदर रोग

 श्वेत प्रदर रोग

सभी महिलाएं व्हाइट डिस्चार्ज या वैजाइनल डिस्चार्ज का अनुभव करती हैं|व्हाइट डिस्चार्ज महिलाओं में होने वाली एक समस्या है। व्हाइट डिस्चार्ज को सफेद पानी भी कहते हैं। व्हाइट डिस्चार्ज (सफेद पानी) सामान्य तौर पर महिलाओं को पीरियड्स के पहले या बाद में होता है।श्वेत प्रदर या सफेद पानी का योनी मार्ग से निकलना ल्यूकोरिया कहलाता है। 

श्वेत प्रदर रोग के प्रकार

श्वेत प्रदर रोग के निम्नलिखित चार प्रकार होते हैं

  1. वातज प्रदर
  2. पितज प्रदर
  3. कफज् प्रदर
  4. सन्निपात्ज प्रदर

1.वातज प्रदर-

अगर वात के कारण प्रदर रोग होता है तो रुखा, लाल झाग दार और थोड़ा- थोड़ा खून बहा करता है|

2.पितज प्रदर-

अगर पित्त के कारण से प्रदर रोग होता है तो पीला, नीला ,काला, लाल और गर्म खून बारंबार बहता है इसमें पित की वजह से  जलन आदि समस्याएं उत्पन्न होती है|

3.कफज् प्रदर-

अगर कफ से प्रदर होता है तो कच्चे रस वाला सेमल आदि के गोंद जैसा चिकना और तुच्छ  धन्य के धोवन के समान कौन रहता है|

4.सन्निपात्ज प्रदर-

वात, पित्त, कफ इन तीनों दोषों के कोप से प्रदर रोग होता है तो शहद घी और हड़ताल के रंग वाली मजाऔर शंख की सी गंध वाला खून बहता है|

श्वेत प्रदर रोग होने के कारण

श्वेत प्रदर का रोग कई बार महिला के अधिक मास मच्छी खाने , चाय पीने , शराब का सेवन करने से भी हो जाता है| मासिक धर्म की अनियमित समय पर होने के कारण भी यह रोग हो सकता है बार बार गर्भधारण करने पर भी यह रोग हो सकता है| इसके अलावा योनि के ऊपरी भाग में किसी प्रकार की फोड़े फुंसी रसोली होने के कारण भी यह रोग हो जाता है|

श्वेत प्रदर रोग के लक्षण

श्वेत प्रदर रोग  के होने पर महिलाओं की योनि मार्ग से गाढ़ा सफेद पानी निकलता है यह पानी चिपचिपा ,हल्का लाल और बदबूदार होता है| यह श्वेत प्रदर के रोग का गंभीर मुख्य लक्षण होता है|

इस रोग के होने पर हाथ पैरों में जलन होती है| इससे महिलाओं की सरल शक्ति भी कम हो जाती है और शारीरिक कमजोरी भी होती है| इस रोग के होने पर शरीर में कैल्शियम की कमी आ जाती है और भूख भी कम लगती है योनि में खुजली ,जलन, यूनिकॉर्न की समस्या उत्पन्न होने की संभावना ज्यादा रहती है|

श्वेत प्रदर रोग को रोकने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. केवल भिंडी का सेवन करने से भी श्वेत प्रदर का रोग ठीक हो जाता हैं| इस रोग को ठीक करने के लिए रोजाना सुबह खाली पेट कच्ची भिंडी का सेवन करें| आपको इस रोग से आराम मिलेगा|
  2. कपास की जड़ चावलों के धोवन में घिसकर पीने से भी श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है|
  3. पके हुए केले की फली दूध में कई बार डाल कर लगातार कुछ दिन खाने से योनि से खून गिरना बंद हो जाता है|
  4. केले के पत्ते खूब महीन पीसकर दूध में खीर बनाकर दो-तीन दिन खाने से प्रदर रोग में लाभ मिलता है|
  5. गिलोय भी  प्रदर रोग को नष्ट करता है|
  6. काला नमक ,सफेद जीरा ,मुलेठी और नीलकमल इनको पीस शंकर दही में मिलाए और जरा सा शहद मिलाकर पी ले इससे बादी से हुआ प्रदर रोग नष्ट हो जाता है| नीलकमल ना मिले तो नीलोफर भी ले सकते हैं चारो चीजे डेढ़-डेढ़ माशे दही चार तोले और शहद 8 माशे लेना चाहिए|
  7. अकेली नागकेसर  को चावलों के धोवन के साथ पीसकर और चीनी मिलाकर पीने से प्रदर रोग नष्ट हो जाता है|
  8. आंवला, हरड़ और रसौत का चूर्ण योनि से ज्यादा खून गिरने और सब तरह के प्रदर रोग को दूर करता है|
  9. नीलकमल ,लाल शाली चावल, अजवाइन, गेरू और जवासा इन सबको बराबर बराबर लेकर पीस जानकर शहद में मिलाकर पीने से प्रदर रोग नष्ट हो जाता है|
  10. कमल की जड़ व वबथुए की जड़ को दूध या पानी में पकाकर 3 दिन पीने से प्रदर रोग शांत हो जाता है|
  11. त्रिफला, देवदारु, दूध, खिले, बच, अडूसा और लाजवंती इन का काढ़ा बनाकर शीतल करके फिर शहद मिलाकर पीने से सब तरह के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  12. मुलेठी, त्रिफला, लोध, शहद, मदिरा, नीम की गिलोय ,ऊंट कटारा,सोरठ की मिट्टी इन सब को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से कब का प्रदर रोग में आराम मिलता है|
  13. नागकेसर को पीसकर और माठा या छाछ में मिलाकर 3 दिन पीने से श्वेत प्रदर रोग में आराम मिलता है|
  14. दारू, हल्दी को सिल पर पीसकर लुगदी बना ले फिर इसमें शहद मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर रोग में आराम मिलता है|
  15. मकोय की जड़ चावलों के धोवन के साथ पीने से पांडू प्रदर रोग नष्ट हो जाता है|
  16. आवलो के कलक को पानी में मिलाकर ऊपर से शहद और मिश्री डालकर पीने से प्रदर रोग मैं आराम मिलता है|
  17. दो तोले अशोक की छाल, गाय के दूध में पकाकर और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दोनों समय लगातार कुछ दिन पीने से रक्त प्रदर में आराम मिलता है|