साइनस क्या होता है ?(What is sinus?)

साइनस क्या होता है ?

साइनस की समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है हमारे सिर में बहुत सारे छिद्र पाए जाते हैं इन छिद्रों को साइनस कहते हैं| यह हमारी सांस लेने में मदद करते हैं| नासा के छिद्रों में पीले रंग का बलगम जम जाने पर सांस लेने में कठिनाई हो सकती है |साइनस की समस्या को ही साइनोसाइटिस (sinusitis)के नाम से जाना जाता है| सर्दियों में साइनस की समस्या अधिक होती है जैसे- जुखाम होना, गले में खराश होना, नाक बहना ,नाक बंद होना आदि लक्षण नजर आते हैं|

छिद्रों में इंफेक्शन होने के कारण नाक के आसपास की जगह जैसे- सिर, माथा, गालों मे दर्द होने का अनुभव होने लगता है| नाक की हड्डी बढ़ना, एलर्जी होना आदि कारणों से भी साइनस की समस्या हो जाती है|

साइनस(sinus)
साइनस(sinus)

साइनस के लक्षण (Sinus symptoms)

  • साइनस रोग मे व्यक्ति के सिर में लगातार दर्द रहता है और दवाई लेने पर भी ठीक नहीं होता|
  • साइनस रोग मे व्यक्ति को बुखार और बेचैनी का अनुभव होता है|
  • साइनस रोग मे व्यक्ति की नाक से पीला लिक्विड गिरता है|
  • साइनस रोग मे आंखों के आसपास के हिस्से में दर्द और सूजन होना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस रोग मे व्यक्ति के बाल सफेद हो जाना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस रोग मे नाक का बहना और खांसी होना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस की जगह को दबाने पर दर्द का अनुभव होने जैसी परेशानियां होती है|

साइनस के कारण(Sinus causes)

हमारी सिर में कई प्रकार के छिद्र पाए जाते हैं जो सांस लेने में हमारी मदद करते हैं| इन छिद्रोको साइनस कहते हैं| इन छिद्रो के प्रभावित होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया, फंगल इनफेक्शन, वायरल है आइए जानते हैं किन कारणों से साइनस की समस्या उत्पन्न होती है|

1.जुखामसाइनस का सबसे मुख्य कारण जुखाम है| इस रोग में नाक से पीला रंग का लिक्विड निकलता है और सांस लेने में भी कठिनाई का अनुभव होता है| किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से भी जुखाम होने की आशंका बढ़ने लगती है|

2.नाक की हड्डी का बढ़ना- किशोरावस्था में नाक पर चोट लगने के कारण नाक की हड्डी बढ़ जाती है यह टेढ़ी हो जाती है जिसके कारण साइनस की समस्या पैदा हो जाती है| हड्डी का टेढ़ा होना नाक के छिद्र को प्रभावित करता है जिससे व्यक्ति साइनस का शिकार हो जाते हैं|

3.अस्थमा- अस्थमा साइनस होने का मुख्य कारण है जो फेफड़ों और श्वास नली को प्रभावित करता है अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है जिससे व्यक्ति ठीक से सांस नहीं ले पाता और उसकी साइनस की समस्या होने की आशंका बढ़ने लगती है|

4.एलर्जी दूषित वायु के संपर्क में आने से लोगों को नाक से संबंधित एलर्जी की शिकायत रहती है नाक का बहना, गले में दर्द, सिर दर्द यह सब लक्षण सामने आते हैं तो तुरंत ही चिकित्सक से इलाज करवाएं|

5.खानपान- पोस्टिक भोजन ने खाने पर पाचन तंत्र नली प्रभावित होती है जो आगे चलकर साइनस की समस्या का कारण बनती है|

साइनस के घरेलू उपचार (Sinus home remedies)

1.टमाटर का रस-टमाटर के रस में  एक चम्मच नींबू का रस और नमक को मिलाकर  उबाल ले ठंडा होने के बाद इसका सेवन करें टमाटर का रस टमाटर के रस का सेवन करने से बलगम की परत पतली होती है जिससे नाक बहना बंद हो जाता है टमाटर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे आसपास के अंगों में सूजन भी कम होती है|

2.तिल का तेल– तिल का तेल साइनस की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| तिल के तेल की कुछ बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से यह समस्या दूर होती है|

3.सेब का सिरका –एक गिलास गुनगुने पानी में दो से तीन चम्मच सेब का सिरका मिलाकर प्रतिदिन दो से तीन बार सेवन करने से आपके साइनस की समस्या दूर होती है|

4.प्याज-एक प्याज को काटकर कर 15 मिनट उबलते पानी में डालकर उसके बाद एक तोलिए के साथ अपने सिर को ढक कर भाप लेने से नसिका मार्ग की जीवाणु नष्ट होते हैं जिससे साइनस की समस्या दूर होती है|

5.हल्दी-हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं हल्दी का भोजन में सेवन करने से साइनस की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है और चाय में हल्दी डालकर पीने से भी आराम महसूस होता है|

6.अदरक-अदरक अपनी सूजन कम करने वाले गुणों के कारण साइनस की आवाज में कारगर है अदरक और थोड़ी देर के लिए पानी में उबालकर फिर छान्कर उसी पानी में शहद मिलाकर पीने से साइनस की  समस्या से निजात पाया जा सकता है|

ginger
अदरक ( ginger )

7.तुलसी-तुलसी के पत्तों में एंटीफंगल और बैक्टीरिया से लड़ने की एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं इसलिए प्रति दिन की आहार में पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से साइनस से छुटकारा मिलता है|

8.दालचीनी-दालचीनी अपने सूजन कम करने के गुणों के कारण प्रसिद्ध है एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद का सेवन करने से साइनस की समस्या दूर होती है|

9.लहसुन– लहसुन साइनस संक्रमण केरोगाणुओ को नष्ट करता है लहसुन को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना कर भाप लेने से साइनस की समस्या दूर होती है|

Garlic
लहसुन ( Garlic )

10.नीलगिरी का तेल  -उबलते पानी में नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें डालकर उस पानी में  उबाले और फिर पानी को  सोख ले और फिर अच्छी तरह तोलिए को नीचोड़कर  माथे पर रखें इससे साइनस की समस्या से राहत मिलेगी|

साइनस की दवा (sinus antibiotic)


बैक्टीरियल साइनसिसिस का आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। एलर्जी साइनसाइटिस के प्रारंभिक उपचार से माध्यमिक बैक्टीरिया साइनस को रोका जा सकता है। साइनसाइटिस और साइनस के घरेलू उपचार में एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल और अन्य), डिकॉन्गेस्टेंट और म्यूकोलाईटिक्स जैसी ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं शामिल हैं।

साइनस के इलाज के लिए दवा लेने भी जरूरी होती है लेकिन कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना यह बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है शुरुआत में साइनस के लक्षण नजर आने पर इसका इलाज संभव है लेकिन वक्त रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो ऑपरेशन होने की संभावना बढ़ जाती है ऑपरेशन करवाने के बाद इलाज जारी रखना चाहिए अन्यथा साइनस की समस्या फिर से उत्पन्न हो सकती है|


साइनसाइटिस न केवल तीव्र संक्रमण या सूजन है, बल्कि बार-बार साइनसाइटिस होने की अंतर्निहित प्रवृत्ति भी है। बार-बार ऊपरी श्वसन संक्रमण या साइनसाइटिस की व्यक्तिगत प्रवृत्ति को व्यक्तिवादी उपचार के होम्योपैथिक दृष्टिकोण के साथ सबसे अच्छा इलाज किया जा सकता है। आवर्ती साइनसिसिस होम्योपैथी के साथ अद्भुत उपचार करता है। होम्योपैथी तीव्र संक्रमण के साथ-साथ संक्रमण या एलर्जी की प्रवृत्ति का इलाज करती है। यदि होम्योपैथिक विकल्प को अपनाया जाए तो एंटीबायोटिक्स और साइनस सर्जरी से बचना लगभग हमेशा संभव है। साइनोसाइटिस के लिए होम्योपैथी का जोरदार सुझाव दिया गया है।

साइनस संक्रमण के लिए होम्योपैथिक उपचार(sinus infection treatment in homeopathy)

1.सिलिसियासाइनस के कारण सिर दर्द का इलाज सिलीसिया के साथ किया जाता है सिलीसिया का उपयोग करने के लिए नासा के छिद्रो में निर्वहन कठिन कवरिंग में बंद हो जाता है।5-5 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए ।

2.बेलाडोना: यह निर्वहन को आसान बनती है और साइनस सिरदर्द के लिए शीर्ष होम्योपैथिक समाधान है: सामान्य होम्योपैथिक पर्चे बेलाडोना साइनस रोगों के लिए एकदम सही होम्योपैथिक उपचार में से एक है जब साइनस सिरदर्द परेशान निर्वहन की वजह से है. बेलाडोना असाधारण रूप से उपयोगी होता है जब एक साइनसिसिटिस रोगी क्रूर सिरदर्द से ग्रस्त होता है. सिर को मजबूती से या वजन लागू करने से रोगी को सिरदर्द से उन्मूलन मिल सकता है|

3.काली बिच्रोम: साइनसिसिटिस के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक समाधान एक बार फिर गले में छोड़ने के साथ होता हैं|5-5 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए ।

होमयोपथी मे ईलाज

होम्योपैथी में साइनस के इलाज के लिए इस तरह की दवाएं दी जाती हैं जिनसे सिरदर्द में आराम मिले और कैविटी में भरा बलगम जुकाम के जरिए बाहर निकले।ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक देता है। जब साइनस की प्रॉब्लम पहली बार हो तब ये दवाएं 1 से 2 हफ्ते चलती हैं। जब साइनस की प्रॉब्लम बार-बार हो या बीमारी पुरानी हो जाए तो दवाएं 3 से 6 महीने तक दी जाती हैं।