स्वप्रतिरक्षित रोग (ऑटोइम्‍यून )

स्वप्रतिरक्षित रोग

स्वप्रतिरक्षित रोग का सबसे सामान्‍य लक्षण है | सूजन ,थकान ,जोड़ों में दर्द , स्किन रैशेज़ और पाचन संबंधित परेशानियां आदि ऑटोइम्‍यून विकार की निशानी हैं। कई लोगों को ऑटोइम्‍यून विकार की वजह ये इस तरह की दिक्‍कतें आती हैं।ऑटोइम्यून बीमारी आपके पूरे शरीर में होती है। इतना ही नहीं इस बीमारी के कारण आपको रूमेटाइड अर्थराइटिस, टाइप1 डायबिटीज, थायराइड समस्‍या, ल्‍यूपस, सोराइसिस, जैसी कई बीमारियां हो सकती है|

स्वप्रतिरक्षित रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक होता है इसका एक कारण महिलाओं के हार्मोंस भी होते हैं। माना कि महिलाएं इस तरह के रोगों की चपेट में ज्‍यादा आती हैं लेकिन ऐसा नहीं है पुरुषों को स्वप्रतिरक्षित रोग बिलकुल भी नहीं होते हैं।

आजकल ऑटोइम्‍यून बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं और खासतौर पर महिलाएं इसका शिकार हो रही हैं।महिलाओं में ये रोग प्रजनन की उम्र से शुरु हो जाता है।

स्वप्रतिरक्षित रोग के लक्षण(Autoimmune symptoms )

  • मांसपेशियों में कमजोरी होना|
  • पेट में दर्द होना और पेट के निचले भाग में सूजन आना|
  • जोड़ों में दर्द होना|
  • वजन का कम होना|
  • हमेशा थका हुआ महसूस करना|
  • हाथ और पैरों का सुन हो जाना|

कारण(Autoimmune causes)

  1. इम्‍यून सिस्‍टम डिस्‍ऑर्डर किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। ऐसे कई तरह के ऑटोइम्‍यून रोग हैं जिनमें इम्‍यून सिस्‍टम गलती से खुद ही शरीर के अंगों और ऊतकों पर हमला कर देता है|
  2. इम्‍यून सिस्‍टम डिस्‍ऑर्डर किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। ऐसे कई तरह के ऑटोइम्‍यून रोग हैं जिनमें इम्‍यून सिजब इम्‍यून सिस्‍टम के साथ कुछ गलत होता है और ये खुद ही अपनी स्‍वस्‍थ कोशिकाओं पर हमला करना शुरु कर देता है तो इसे ऑटोइम्‍यून रिस्‍पॉन्‍स कहा जाता है। शरीर की इम्‍युनिटी सामान्‍य कार्य करने के दौरान कैंसर में तब्‍दील होने वाले कीटाणुओं और नुकसानदायक कोशिकाओं को नष्‍ट करती है।

ऑटोइम्यून को रोकने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(Autoimmune Diseases diet)

  1. विटामिन डी एक ऐसा पोषक तत्व है जो ऑटोइम्यून डिजीज को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है विटामिन डी लेने का सबसे सुरक्षित तरीका सूरज की रोशनी में कुछ देर बैठना है|
  2. विटामिन डी हमें संक्रमण से लड़ने के लिए क्षमता प्रदान करता है|
  3. आप जितना आराम करेंगे आपके शरीर को उतनी ही एनर्जी प्राप्त होगी और आपका इम्यून सिस्टम भी ठीक रहेगा|
  4. तनाव से दूर रहे तनाव से पाचन तंत्र प्रभावित होने के कारण आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है और आप कई बीमारियों की चपेट में आने लगते हैं तनाव के कारण कोलेस्ट्रोल नामक हार्मोन मोटापा हृदय रोग कैंसर आदि बीमारियों के होने की संभावना रहती है|
  5. ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनोलिक नामक तत्‍व में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह अर्थराइटिस से संबंधित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में परिवर्तन के लिए प्रेरित करता है।  मछली के तेल में महत्वपूर्ण ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है। ये फैट शरीर में सूजन को कम करने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कम करने में मददगार होता है। 
  6. हल्दी ऑटोइम्यून डिजीज से लड़ने में मदद करती है।हल्दी में कुरकुमिन होता है जो सूजन को कम करके ऑटोइम्यून डिजीज से लड़ने के लिए एंजाइम के उत्पादन को बढ़ाते हैं। यह अर्थराइटिस जैसी डिजीज को दूर करने में मदद करता है। इसका सेवन करने के लिए 1 कप दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर गर्म करके सोने से पहले पिएं।
  7. अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण ऑटोइम्यून डिजीज से लड़ने में मदद करते हैं। अदरक का सेवन करने के लिए आधाकप पानी में आधा चम्मच कद्दूकस करा हुआ अदरक डालकर 5-7 मिनट तक पानी को गरम करके  पानी को छानकर उसमें नींबू का रस और स्वाद अनुसार शहद मिलाकर दिन में 2-4 बार पिएं।
  8. सेब का सिरकाऑटोइम्यून डिजीज के लिए सेब के सिरके का सेवन लाभकारी होता है। इसमें विटामिन बी5 काफी मात्रा मेहोता है जो सूजन और दर्द को कम करता है। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम और फॉस्फोकस होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं।  इसका सेवन करने के लिए 1 चम्मच सेब का सिरका, 1 टुकड़ा अदरक एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर इसे  मिक्स करें। उसके बाद 1 चम्मच शहद मिलाएं।
  9. एलोवेरा जेल में सेलिसिलिक एसिड और ल्यूपिओल होता है जो दर्द कम करने के लिए केमिकल होता है इसके साथ ही यह एक फैटी एसिड होता है जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द के लिए प्रभावी होता है। एलोवेरा का सेवन करने के लिए ताजी एलोवेरा के पत्ते से जेल निकालकर 1 गिलास पानी में 2 चम्मच एलोवेरा जेल और नींबू का रस मिलाकर ब्लेंड कर लें। उसके बाद इसका सेवन करें।
  10. अनुलोम विलोम करें यह आपके शरीर के उर्जा चैनलों को खाली करने और शुद्ध करने में मददगार साबित होता है यह आपके फेफड़ों को स्वस्थ रखता है और तनाव को भी कम करता है यह नर्वस सिस्टम को जिले में लाता है जिससे आप को शांति का अनुभव होता है|
  11. ऑटोइम्यून से बचने के लिए हमें ध्यान करना चाहिए ऑटोइम्यून वाले लोग डिप्रेशन जैसी समस्याओं का अनुभव करते हैं ध्यान लगाने से हम इन बीमारियों को होने से रोक सकते हैं|
अदरक
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