हकलाने की समस्या (Stammer)

हकलाने की समस्या एक आम समस्या बन गई है| लड़कियों की तुलना में लड़कों में यह समस्या 5 गुना अधिक देखने को मिलती है| ज्यादातर मामलों में इस समस्या का इलाज संभव है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा अटक अटक कर बोलता है और आवाज साफ नहीं आती यह समस्या 3 से 7 वर्ष के छोटे बच्चों में अधिक देखने को मिलती है| कई बार बच्चे दूध लाने भी लगते हैं| हमें कई शब्द समझ में नहीं आते कि वह क्या बोल रहे हैं| हकलाने का मुख्य कारण मानसिक रूप से भाषा कौशल तंत्रिकाओं का विकास न होना है| छोटी उम्र में ही हकलाने की समस्या का इलाज संभव है|अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो बढ़ती उम्र के चलते यह गंभीर समस्या का कारण बन सकता है|

कई बच्चों का विकास होने के साथ-साथ उनके हकलाने की समस्या दूर हो जाती है| अगर किसी बच्ची में 8 से 10 वर्ष की उम्र में हकलाने की समस्या होती है तो वयस्कता में भी यह समस्या बनी रहती है| हकलाने पर बच्चे अपना आत्मविश्वास खो देते है, शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं और अपने शब्द कहने से हिचकी चाते हैं|

हकलाने की समस्या के प्रकार (types of stammering)

हकलाने के दो मुख्य प्रकार हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है :

  1. विकासात्मक हकलाना – हकलाने का सबसे आम प्रकार; यह बचपन में होता है जब भाषण और भाषा कौशल तेजी से विकसित हो रहे होते हैं|
  2. देर से शुरू होने वाला हकलाना – बड़े बच्चों और वयस्कों में सिर की चोट, स्ट्रोक या एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल स्थिति के परिणामस्वरूप होता है|यह कुछ दवाओं या मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक आघात के कारण भी हो सकता है|

हकलाने की समस्या के लक्षण (stammering symptoms)

  • बोलते समय अपनी बात को अटक कर कहना
  • बच्चों की ध्वनि अवरुद्ध हो जाना
  • बोलते समय तेजी से आंखें बिचना
  • जबड़े का हिलना
  • कुछ शब्दों को बोलने से पहले हिचकिचाना
  • कुछ शब्दों की तेज गति से बोलने पर हिचकिचाहट महसूस करना
  • होठों पर कंपन होना
  • बोलते समय आंखों का झपकना
  • किसी शब्द को पुराने कर पाने से पहले ही अटक जाना
  • शब्दों के साथ लंबे समय तक ध्वनि बन्ना
  • पैरों का दोहन
  • चेहरे का कस जाना
  • शब्दों को बार-बार दोहराना

हकलाने की समस्या के कारण (stammering causes)

  1. न्यूरोजेनिक हकलाना-यह निम्नलिखित कारणों जैसे सिर में चोट टयूमर मस्तिष्क में रक्त का प्रभाव होना आदि से होता है यह तब होता है जब मस्तिष्क और भाषा कौशल तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के बीच संकेत ठीक ढंग से काम नहीं करते हैं|
  2. अनुवांशिकता-यदि परिवार के किसी सदस्य माता या पिता को हकलाने की समस्या है तो बच्चे में हकलाने की संभावना ज्यादा हो सकती है|
  3. भौतिक कारक– तनावग्रस्त या थकावट होने पर हकलाने  जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है|
  4. भाषाई कारक- बच्चों के हकलाने का मुख्य कारण है जब बच्चे कठिन शब्द को बोलने का प्रयास करते हैं तब हकलाने लगते हैं|
  5. पर्यावरणीय कारक- पर्यावरणीय कारक हकलाने की समस्या का मुख्य कारण है जब बच्चों को किसी से फोन पर बात करते वक्त फोन नंबर या एड्रेस बताना हो तो हकलाने की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं|
  6. मनोवैज्ञानिक कारक- मनोवैज्ञानिक कारक उन लोगों के लिए हकलाने की समस्या गंभीर बना सकते हैं जो पहले से ही हकलाते हैं जब लोगों के बोलने पर शर्म महसूस करना उनकी हकलाने की प्रक्रिया को दर्शाती है|
  7. विकासात्मक कारक- जब बच्चे का मानसिक रूप से या भाषा कौशल तंत्रिका ओं का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाता तब बच्चे में हकलाने की समस्या उत्पन्न होती है कुछ बच्चों में या कल आने के लक्षण दिखाई देते हैं 3 से 7 साल तक के बच्चों में हकलाने की समस्या दिखाई देती है अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप धारण कर लेती है|

हकलाने की समस्या का परीक्षण (stammering diagnosis)

एसएलपी हकलाने की समस्या का परीक्षण करने के लिए व्यक्ति को एसएलपी यानी भाषण भाषा रोग विज्ञानी द्वारा जांच करवानी चाहिए एसएलपी जांच करता है कि व्यक्ति को बोलने पर कितनी बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है| एसएलपी व्यक्ति की प्रतिदिन की गतिविधियों और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है एसएलपी इस बात की जांच करता है कि हकलाने की समस्या किन कारणों से हुई है|

हकलाने की समस्या के आयुर्वेदिक उपाय (stammering treatment)

  1. बादाम-रात को 10 से 15 बादाम भिगोकर रख दें और सुबह भीगे हुए बादाम का का छिलका उतार कर बदाम को पीस लें और थोड़ा सा मक्खन बादाम के पाउडर में मिलाकर प्रतिदिन इसका सेवन करने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  2. काली मिर्च और मिश्री-चार से पांच काली मिर्च लेकर उसमें बादाम का पाउडर और थोड़ी सी मिश्री मिलाकर प्रतिदिन खाने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  3. अदरक-एक चम्मच अदरक के रस में एक चम्मच शहद मिला कर बच्चे को चटाने से बच्चों का दूध लाना दूर होता है|
  4. छुआरा-बच्चों को रात को सोने से पहले दूध में छुहारा उबालकर पिलाने से हकलाने की समस्या दूर हो जाएगी|
  5. आंवला-कच्चे आंवले का सेवन करने से बच्चों की हकलाने की समस्या दूर होती है इसलिए सुबह खाली पेट एक चम्मच आंवले के पाउडर में एक चम्मच देसी घी मिलाकर बच्चों को खिलाने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  6. गाय का देसी घी- बच्चे की हकलाने की समस्या दूर करने के लिए प्रतिदिन सुबह गाय का देसी घी बच्चे को खिला दे|
  7. दालचीनी –दालचीनी के टुकड़े को में डालकर चूसने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  8. फुला सुहागा- शहद में फुला सुहागा मिलाकर बच्चे की जीभ पर रगड़ने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  9. ब्राह्मी तेल- ब्राह्मी तेल से आधा घंटा तेल की मालिश करें ऐसा करने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  10. हरा धनिया- धनिया के पाउडर में अमलतास का गूदा निकालकर पानी के साथ पीसकर मिला ले इस मिश्रण से कुल्ला करते रहने से हकलाने की समस्या जड़ से खत्म हो जाती है|
काली मिर्च
काली मिर्च