बवासीर का ईलाज

बवासीर का ईलाज

बवासीर

बवासीर एक खतरनाक बीमारी है गुदा के पास सूजन नसों को बवासीर के रूप में जाना जाता है। बवासीर दो प्रकार की होती है| बवासीर को आम भाषा में खूनी और बादी बवासीर भी कहते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

1.खूनी बवासीर- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती सिर्फ खून आता है इसका मुख्य कारण मस्सा है जो अंदर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है|

2.बादी बवासीर- बादी बवासीर होने पर पेट खराब रहता है व गैस बन जाती है| कब्ज बनी रहती है| बवासीर की वजह से पेट खराब रहता है इस में दर्द, जलन ,खुजली व शरीर में बेचैनी इत्यादि यह लक्षण सामने आते हैं|

बवासीर
बवासीर

बवासीर के लक्षण

  • मल त्याग करते समय गुदाद्वार में दर्द सा महसूस होना|
  • बवासीर होने पर कई बार रोगी को मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगता है कि उसका पेट अभी साफ नहीं हुआ |यह बवासीर के मस्से होने का प्रथम लक्षण  है|
  • मल त्याग शौच करते समय गुदाद्वार में खून निकलना बवासीर का  मुख्य कारण है|
  • गुदाद्वार की नसों में जब किसी कारण वश दबाव पड़ता है तो उन में सूजन आ जाती है जिसे हम मस्सा कहते हैं|
  • बवासीर होने पर गुदाद्वार में से श्लेष्मा भी निकलता है|
  • गुदा के आसपास चरम खुजली।

बवासीर के कारण

  1. रक्त -इसे खुनी बवासीर भी कहते हैं इसमें रक्त गिरता है|
  2. कड़वा खट्टा नमकीन वस्तुओं को अधिक आना, अधिक कसरत करना ,धूप में अधिक रहना , गरम देश में रहना व गरम पदार्थों का खाना आदि मुख्य कारण है|
  3. दवाओं का सेवन करना अत्यधिक दवाओं का सेवन करने से भी बवासीर हो जाता है
  4. भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी बवासीर हो जाता है|
  5. अधिक तला या मसालेदार भोजन खाने से भी बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  6. प्रसव  के दौरान भी बवासीर होने  की संभावना बढ़ जाती है

बवासीर को दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

1.प्याज के रस में घी और चीनी मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|

2.काले तिल 1 तोला तोले भर मक्खन में मिलाकर सुबह सुबह रोज खाने से 8 दिन में खूनी बवासीर आराम हो जाती है|

3.जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर और सेंधा नमक डालकर रोटी के साथ 8 दिन खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|असीस, कूड़े की छाल ,इंद्रजौ और रसौत इनके चूर्ण को शहद में मिलाकरचावलों के पानी के साथ लेने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है|

Broccoli
Broccoli( जंगली गोभी )

4.काले तिलों का चूर्ण, नागकेसर और मिश्री इन सब को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

5.नागकेसर और मिश्री छह- छह माशे से लेकर 9 माशे ताजा मक्खन में मिलाकर सुबह शाम खाने से 7 दिन में खाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है|

6.कड़वी नीम के पके हुए फलों को गुदा 3 माह लेकर 6 माशे से गुड में मिलाकर 7 दिन तक खाने से बवासीर में आराम मिलता है|प्याज के महीन टुकड़े करके धूप में सुखा लें| सुखे टुकड़ों में से एक तोला प्याज लेकर घी मे तले फिर उसमें एक माशे  तिल और दो तोले मिश्री मिलाकर हर रोज सेवन करें इससे बवासीर में आराम मिलता है|कमल का नरम पत्ता पीसकर मिश्री के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

7.सवेरे ही बकरी का दूध पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

8.गेंदे की पत्तियां 6 मासी से 1 तोले तक और काली मिर्च 2 मासी से 3 मासी तक  इकट्ठा कर ले और पीस छानकर पी जाए इससे बवासीर का खून बंद हो जाता है|

9.कमल की केसर, शहद,ताजा मक्खन, चीनी और नागकेसर सब को एक में मिलाकर खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

10.आम की कोपल पानी में पीस जानकर थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

11.एक नारियल के ऊपर का छिलका लेकर जलाएं और उसकी राख के बराबर शक्कर मिलाकर तीन खुराक बनाए| इसको एक- एक खुराक हर रोज सेवन करने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है (What is Bronchitis Disease)

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है (What is Bronchitis Disease)

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है ?ब्रोंकाइटिस एक श्वसन संबंधी बीमारी है इसमें मुंह और नाक और फेफड़ों के बीच हवा के मार्ग सूज जाते हैं ब्रोंकाइटिस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों में फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है और वायु मार्ग पर कफ का निर्माण होने लगता है ब्रोंकाइटिस फेफड़ों की लंबी अवधि तक रहने वाली बीमारी है ब्रोंकाइटिस फेफड़ों में होने वाले रोगों  सीओपीडी या लंबे समय तक रहने वाले फुसफुस रोग कहते हैं मे से एक है क्रानिक ब्रोंकाइटिस एक गम्भीर बीमारी है जिसमें श्वासनलि मे निरन्तर जलन या सूजन रहती हैं और अकसर यह सिगरेट के सेवन से होता हैं। ब्रोंकाइटिस में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है

ब्रोंकाइटिस (दमा) फेफड़ों की एक बीमारी है जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। ब्रोंकाइटिस को अस्थमा के नाम से भी जाना जाता है ब्रोंकाइटिस होने पर श्वास नलियों में सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। श्वसन नली में सिकुड़न के चलते रोगी को सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्‍याएं होने लगती हैं। लक्षणों के आधार अस्थमा के दो प्रकार होते हैं- बाहरी और आंतरिक अस्थमा। 

bronchitis
ब्रोंकाइटिस (bronchitis)

ब्रोंकाइटिस तीन प्रकार का होता है (Three types of bronchitis )

1.एक्यून ब्रोंकाइटिस-फ्लू के कारण होने वाली खांसी जैसे – ब्रोंकाइटिस को एक्यून ब्रोंकाइटिस कहते हैं |इसकी अवधि 3 सप्ताह की होती है|

2.क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस– यह सिगरेट शराब आदि का सेवन करने से सांस की नली में सिकुड़न के कारण होती है इसकी अवधि 2 वर्षों तक होती है|

3.एलर्जीक ब्रोंकाइटिस-इसे अस्थमा के नाम से भी जाना जाता है|

ब्रोंकाइटिस के लक्षण (bronchitis symptoms)

  • इस रोग में व्यक्ति को शरीर में दर्द और थकान का अनुभव होता है|
  • व्यक्ति के गले में खराश हो जाती है|
  • नाक का बहना|
  • इसमें व्यक्ति को लगातार बुखार और खांसी रहता है|
  • व्यक्ति को खांसी के साथ बलगम में खून आने लगता है|
  • मांसपेशियों में दर्द होना|
  • इस रोग में व्यक्ति को गहरी सांस लेते हुए सीने में दर्द का अनुभव होता है|
  • छाती में जकड़न यह बेचैनी का अनुभव होता है|

ब्रोंकाइटिस के कारण(bronchitis causes)

ब्रोंकाइटिस के प्रमुख कारणों में सिगरेट धूम्रपान, सल्फर डी-ऑक्साइड के उच्च स्तर के संपर्क और वातावरण में अन्य प्रदूषकों के संपर्क में शामिल हैं।

1.वायरल संक्रमण– यह वह वायरस जो आम सर्दी या फ्लू करते हैं ब्रोंकाइटिस का भी कारण बन सकते हैं|

2.उत्तेजक पदार्थ -उत्तेजक पदार्थ जैसे धुआं रासायनिक धुएं में सांस लेने से आपकी वायु मार्ग में सूजन पैदा हो जाती है जिससे एक्यूट ब्रोंकाइटिस हो सकता है|

3.बैक्टीरिया का संक्रमण– बैक्टीरिया की वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल ब्रोंकाइटिस विकसित हो जाता है|

4: धूम्रपान करना– बीड़ी सिगरेट शराब तंबाकू का सेवन करने से कई बार ब्रोंकाइटिस होने की समस्या उत्पन्न हो जाती है|

5.अनुवांशिकता-यदि आपके परिवार के किसी सदस्य को यह रोग है तो आप भी ब्रोंकाइटिस का शिकार हो सकते हैं|

6.व्यायाम करना-अधिक व्यायाम करने से भी इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

ब्रोंकाइटिस का आयुर्वेदिक इलाज

Garlic
लहसुन ( Garlic )
  1. लहसुन-लहसुनअस्थमा के इलाज में काफी लाभदायक है 50 मिलीलीटर बॉयज में लहसुन की 7 से 8 कलियां उबालें और प्रतिदिन इस पेस्ट का सेवन करने से अस्थमा में आराम मिलता है|
  2. अदरक– अदरक की चाय में लहसुन की तीन कलियां पीसकर मिलाकर पीने से अस्थमा रोग में आराम मिलता है|
  3. अजवाइन– पानी में अजवाइन मिलाकर उबालें और इसकी भाप ले यह घरेलू नुस्खा काफी फायदेमंद है|
  4. लोंग-5 से 6 लोग ले और डेढ़ सौ मिलीलीटर पानी में 5 मिनट तक उबालें| इस मिश्रण को ठंडा होने पर उसमें शहद मिलाएं और गरम-गरम पी लें प्रतिदिन इस मिश्रण का सेवन करने से लाभ मिलता है|
  5. मेथी दाना– एक चम्मच मेथी दाना और एक कप पानी उबाले प्रतिदिन इस मिश्रण का सेवन करने से आपको लाभ अवश्य मिलेगा|
ginger
अदरक ( ginger )

हीमोग्लोबिन (hemoglobin)

हीमोग्लोबिन (hemoglobin)

 हीमोग्लोबिन

हिमोग्लोबिन हमारी रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला लो युक्त प्रोटीन है| यह हमारे शरीर में ऑक्सीजन के प्रभाव को संतुलित करता है| हिमोग्लोबिन हमारी कोशिकाओं से कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक लाने का कार्य करता है और ऑक्सीजन को फेफड़ों से उतको तक पहुंचाने का कार्य करता है |जब  हिमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है तो हमारा शरीर कई बीमारियों का शिकार हो सकता है जैसे- चक्कर आना, आंखों का पीलापन, दिल की धड़कन का असामान्य होना आदि लक्षण सामने आते है।हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से आप एनीमिया के शिकार हो सकते हैं यानी आपके शरीर में खून की कमी आ जाती है|

हिमोग्लोबिन के लक्षण(Low hemoglobin symptoms)

  • व्यक्ति को थकान होने लगती है और उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता|
  • व्यक्ति की आंखों में पीलापन आ जाता है| हाथ की हथेलियों और नाखूनों में भी पीलापन नजर आ सकता है|
  • व्यक्ति का अचानक से वजन घटने लगता है|
  • बालों का झड़ना|
  • दिल की धड़कन क असामान्य हो जाना और थोड़ा सा चलने पर सांस फूलने लगती है|
  • लगातार सिरदर्द रहने लगता है|
  • हाथों और पैरों का सुन्न पड़ जाना|
  • सीने में जलन और दर्द होने लगता है|
  • पीरियड्स में रक्त स्त्राव होना और शरीर में कमजोरी आना जैसे लक्षण होते हैं|

हिमोग्लोबिन की कमी के कारण(Low hemoglobin causes)

1.आयरन की कमी– शरीर में आयरन की कमी होने से खून की कमी हो जाती है जिसके कारण रक्त कोशिकाएं भी  और कमजोर पड़ जाती है जिससे ऑकसीजन का प्रवाह ठीक ढंग से नहीं हो पाता इससे हमारे कार्य करने की क्षमता भी कम हो जाती है|

2.रेड ब्लड सेल्स का देरी से नष्ट होना-जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर उनके निर्माण की सबसे अधिक होती है तब एनीमिया की समस्या उत्पन्न होती है|

3.रेड ब्लड सेल्स की संख्या का कम होना– शरीर में रेड ब्लड सेल्स या हिमोग्लोबिन की संख्या कम होने पर हम कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं जैसे एनीमिया की समस्या|

4.अन्य बीमारी में खून का बहना– एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं के प्रसव के दौरान खून बहने लगता है ना और महिला की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है|

5.गर्भावस्था के दौरान– गर्भवती महिलाओं को बढ़ते शिशु के लिए रखने का निर्माण करना पड़ता है कई महिलाओं को गर्भावस्था में एनीमिया होने की समस्या की संभावना बढ़ जाती है|

6.विटामिन की कमी– शरीर में विटामिन B12 की कमी के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने लगती है जिससे खून की कमी हो जाती है|इसके साथ- साथ शरीर में मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम की कमी के कारण भी खून में कमी आ जाती है

हीमोग्लोबिन क्या है, आपकी बॉडी में कितना लोहा होना चाहिए?(Low hemoglobin levels)

हड्डियों की अंदरूनी भाग में पाया जाने वाला अस्थि मज्जा है अस्थि मजा में लाल रक्त कण पाए जाते हैं 1 क्यूबिक मिलीलीटर रक्त में लगभग 5000000 रक्त लाल रक्त कण मौजूद होते हैं एक बूंद खून को सूक्ष्म दर्शी से देखने पर लाल रक्त कण गोल लग जाते हैं जो किनारे पर मोटे और बीच में से पतले दिखाई देते हैं|

लाल रक्त कणों के अंदर हीमोग्लोबिन पाया जाता है लाल रक्त कणों के अंदर 30 से 35% भाग हीमोग्लोबिन का होता है।

लाल रक्त कणिकाएँ (Red Blood Cells)
लाल रक्त कणिकाएँ (Red Blood Cells)

मानव शरीर में लोहे की मात्रा-मानव शरीर के कुल वजन का 0.004 प्रतिशत भाग लोहा होता है। इसकी कुल मात्रा शरीर के वजन के अनुसार 3 से 5 ग्राम होती है। इसका 70 प्रतिशत भाग रक्त में लाल कणों के अंदर मौजूद हीमोग्लोबिन में, 4 प्रतिशत भाग मांसपेशियों के प्रोटीन मायोग्लोबिन में, 25 प्रतिशत भाग लीवर में, अस्थिमज्जा, प्लीहा व गुर्दे में संचित भंडार के रूप में तथा शेष 1 प्रतिशत भाग रक्त प्लाज्मा के तरल अंश व कोशिकाओं के एंजाइम्स में रहता है।

हिमोग्लोबिन की कमी को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(Low hemoglobin treatment)

  1. अंकुरित आहार –प्रतिदिन सुबह उठकर अंकुरित अनाज जैसी मूंग चना और गेहूं आदि में नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन करने से हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है।
  2. तिल-तिल का सेवन प्रतिदिन अपने आहार में करने से हिमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है और एनीमिया की समस्या दूर होती है।
  3. गुड-प्रतिदिन अपने आहार मे खाने के बाद गुड़ का सेवन करें ऐसा करने से शरीर में खून की कमी नहीं होगी और हीमोग्लोबिन लेवल में बढ़ोतरी होगी।
  4. अखरोट-अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा पाई जाती है अखरोट में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है इसलिए अखरोट का सेवन करने से हिमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है और खून की कमी नहीं होती।
  5. बादाम- बादाम में मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है जिससे हीमोग्लोबिन की कमी दूर होती है।
  6. अंजीर –अंजीर में विटामिंस, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, सोडियम व पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है इसलिए अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह उसका सेवन करने से हिमोग्लोबिन की लेवल में बढ़ोतरी होती है।
  7. सेब –सेब का सेवन करने से हिमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है इसलिए प्रतिदिन अपने आहार में सेब को शामिल करना चाहिए।
  8. अनार –अनार कैल्शियम, विटामिन सी और आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है इसलिए गुनगुने दूध में दो चम्मच अनार का पाउडर डालकर पीने से हीमोग्लोबिन की कमी की समस्या दूर होती है।
  9. नींबू -नींबू का सेवन करने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है क्योंकि नींबू में विटामिन से भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

10)चुकंदर-चुकंदर की पत्तियों का सेवन करने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है।


सामान्य परिसर(Normal range)

एक हीमोग्लोबिन स्तर को आमतौर पर पूर्ण रक्त गणना (सीबीसी) के एक भाग के रूप में जांचा जाता है, हीमोग्लोबिन की सामान्य सीमा उम्र और लिंग के आधार पर भिन्न होती है। एक वयस्क पुरुष के लिए औसत सीमा 14-18 ग्राम / डीएल और एक वयस्क महिला के लिए 12-16 ग्राम प्रति डेसीलीटर है।

हीमोग्लोबिन संरचना(Hemoglobin structure)

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटीन है जो चार श्रृंखलाओं से बना होता है। इनमें से प्रत्येक श्रृंखला में हीम के रूप में जाना जाने वाला एक यौगिक होता है, जिसमें बदले में लोहा होता है, जो रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन को स्थानांतरित करता है।

Himoglobin Structure
हीमोग्लोबिन संरचना(Hemoglobin structure)

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं के आकार के लिए जिम्मेदार है, जो आमतौर पर डोनट्स की तरह दिखाई देते हैं लेकिन छेद के बजाय एक पतली केंद्र के साथ। जिन स्थितियों में हीमोग्लोबिन असामान्य है, जैसे कि सिकल सेल एनीमिया, लाल रक्त कोशिकाओं के असामान्य आकार के परिणामस्वरूप समस्याएं हो सकती हैं। रक्त के लाल रंग के लिए हीमोग्लोबिन में वर्णक जिम्मेदार है।

ड्रग एलर्जी (Drug allergy)

ड्रग एलर्जी (Drug allergy)

ड्रग एलर्जी

जब दवाओं का सेवन करने से दवाओं के प्रति शरीर कोई हानिकारक प्रतिक्रिया देता है तो इसे ड्रग एलर्जी कहा जाता है ड्रग एलर्जी का पता लगाने के लिए स्किन टेस्ट नामक परीक्षण किया जाता है कई दवाओं के साइड इफेक्ट्स होते हैं कुछ लोगों में एंटी हिस्टामिन दवाइयों का सेवन करने से साइड इफैक्ट्स होने के कारण सांस लेने में दिक्कत ब्लड प्रेशर कम होना त्वचा पर लाल दाने होना, चक्कर आना ,नाक बहना ,आंखों में खुजली होना आदि लक्षण नजर आने लगते हैं|

ड्रग एलर्जी सिम्पटम्स (drug allergy symptoms)

  • सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना|
  • त्वचा पर लाल चकत्ते होना और उम्मीद से द्रव पदार्थ का निकलना|
  • ब्लड प्रेशर कम होना|
  • आंखों में खुजली ,आंखे लाल होना और आंखों से पानी आना|
  • थकावट महसूस करना है जिसके कारण चक्कर आने लगते हैं|

ड्रग एलर्जी के कारण(drug allergy causes)

  1. सल्फा ड्रग्स
  2. कंट्रास्ट डाई
  3. एस्पिरिन और इबुप्रोफेन
  4. अतिगलग्रंथिता के लिए दवाएं
  5. टीके
  6. आक्षेपरोधी
  7. कीमोथेरेपी दवाएं

ड्रग्स से होने वाली एलर्जी का इलाज

1।एंटी हिस्टामिन –जब आपका शरीर किसी एलर्जन पदार्थ के संपर्क में आता है तो वर्जन को हानिकारक पदार्थ समझने लगता है जिसके कारण शरीर में खुजली और त्वचा संबंधी एलर्जी होने लगती है एंटी हिस्टामिन दवाओं का सेवन करने से ड्रग एलर्जी की समस्या दूर होती है और यह है 1 दिन में एक ही बार प्रयोग में लाने पर इसका असर 24 घंटे तक रहता है|

2.नेजल कॉर्टिकोस्टेरॉइड-किसी दवा से एलर्जी होने के कारण श्वसन मार्ग में सूजन आने पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड जैसी दवाओं का सेवन करने से सूजन को खत्म किया जा सकता हैनेजल कॉर्टिकोस्टेरॉइड सप्रे नामक दवाओं का सेवन करने से ड्रग एलर्जी के लक्षण खत्म हो जाते हैं और इनका शरीर पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं भी नहीं पड़ता|

3.ब्रोंकोडाइलेटर- ब्रोंकोडाइलेटर जैसी दवाओं का सेवन करने से एलर्जी के कारण हुई खांसी से निजात मिलता है और आप को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव नहीं होता|

ड्रग एलर्जी टेस्ट(Drug allergy test)

ड्रग एलर्जी एक संवेदनशील प्रतिक्रिया है जो पदार्थ शरीर के संपर्क में आते हैं ऐसे पदार्थों के खिलाफ प्रतिक्रिया प्रतिरक्षा प्रणाली की जाती है|

एलर्जी टेस्ट दो प्रकार से किया जाता है जिसमें स्किन टेस्ट और ब्लड टेस्ट शामिल है एलर्जी टेस्ट से यह पता लगाया जाता है कि आपको किस चीज से एलर्जी है|

एलर्जी टेस्ट के प्रकार:-

1.स्किनटेस्ट-.स्किन टेस्ट में एलर्जी पदार्थ को रोगी की त्वचा के संपर्क में लाया जाता है और परीक्षण किया जाता है कि प्रतिक्रिया होती है या नहीं| एलर्जी स्किन टेस्ट का रिजल्ट कुछ ही घंटों में पता लग जाता है स्किन टेस्ट तीन प्रकार के होते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

  • स्किन प्रिक टेस्ट -इस टेस्ट में एलर्जी पदार्थ की कुछ बूंदे इंजेक्शन के द्वारा त्वचा के अंदर भेजी जाती है अगर त्वचा पर हानिकारक प्रभाव जैसे -खुजली ,सूजन आदि दिखने लगता है तो यह माना जाता है कि व्यक्ति को इन पदार्थों से एलर्जी है|
  • इंट्रा डर्मलटेस्ट-जब किसी एलर्जी पदार्थ की कुछ बूंदें इंजेक्शन के माध्यम से त्वचा के अंदर डाली जाती है अगर मरीज कोई प्रतिक्रिया नहीं करता तो इंट् रेडर्मल टेस्ट का उपयोग किया जाता है|
  • स्किनपैचटेस्ट– इस टेस्ट में अर्जित पदार्थ को एक पेड़ पर लगाकर उसे स्किन पर बांध दिया जाता है कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस स्किन से संबंधित रोग का पता लगाने के लिए इस टेस्ट का उपयोग किया जाता है|

2.ब्लडटेस्ट-ब्लड टेस्ट में व्यक्ति के खून की कुछ मात्रा इंजेक्शन के द्वारा ली जाती है ब्लड टेस्ट खून में एंटी बॉडीज नामक पदार्थ के स्तर का मापन करता है एलर्जी टेस्ट के द्वारा अगर आपको त्वचा संबंधी संक्रमण है तो उसका पता लगाया जा सकता है अस्थमा रोग की जांच के लिए भी एलर्जी ब्लड टेस्ट का उपयोग किया जाता है|

ड्रग एलर्जी को खत्म करने के आयुर्वेदिक उपाय(drug allergy treatment)

1.मुल्तानीमिट्टी– मुल्तानी मिट्टी को पानी में मिलाकर इसका मिश्रण तैयार कर लें और इसको शरीर पर लगा ले और सूखने पर स्नान कर ले इससे आपको खुजली की समस्या से निजात मिल सकता है|

2.कपूर और नारियलतेल-कपूर को पीसकर उसमें नारियल तेल मिलाकर मिश्रण बना लें अब इस मिश्रण को प्रभावित जगह पर लगाएं ऐसा करने सेआराम मिलेगा|

3.बेकिंग सोडा –नहाते समय पानी में बेकिंग सोडे की कुछ मात्रा डालकर नहाने से खुजली से संबंधित समस्या दूर होती है|

4.एलोवेरा –एलोवेरा में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं एलोवेरा में से जेल को निकालकर लाल चकते पर लगाने से जलन और सूजन की समस्या दूर होती है|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

5.कच्चा आलू –आलू की स्लाइस को काटकर प्रभावित स्थान पर रख दें कच्चा आलू घमोरियां होने की स्थिति में बहुत फायदेमंद है और इससे खुजली की समस्या भी दूर होती है|

6.अदरक-अदरक के छिलके को छीलकर उसकी टुकड़े को पीसकर उबलते हुए पानी में थोड़ी देर के लिए भिगो दें इस मिश्रण का सेवन करने से ड्रग एलर्जी की समस्या दूर होती है|

7.पानीकासेवन-हमें प्रतिदिन अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ यूरिन के साथ बाहर निकल जाते हैं इसलिए ज्यादा पानी पीने से स्किन एलर्जी की समस्या दूरहोती है|

8.करौंदा-करौंदे का सेवन करने से हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है सोने के पाउडर में शहद को मिलाकर इसका मिश्रण बनालें और रात को सोने से पहले इसका सेवन करें यह नुस्खा बहुत ही लाभदायक है|

9.चंदन-चंदन में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो घमौरियों के दर्द को कम करने में हमारी मदद करते हैं चंदन के पाउडर मैं थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना ले इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से जलन से राहत मिलती है|

10.अरंडीकातेल-नाक की एलर्जी होने पर आधा कप पानी मे अरंडी के तेल की चार से पांच बूंदें डालकर सुबह खाली पेट पीने से ड्रग एलर्जी की समस्या दूर होती है|

11.नीम- नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं इसलिए नीम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर पीस लें और इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से घमौरिया की समस्या दूर होती है नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करने से खुजली की समस्या दूर होती है|

Ne em
नीम (Ne em )

किडनी स्टोन यानी पथरी( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन ( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन यानी पथरी एक छोटे आकार का पत्थर होता है जो कैलशियम मिनिरल्स सॉल्ट और अन्य अक्ष आर्य तत्वों के मिलने से धीरे-धीरे बड़े कठोर पत्थर के रूप में मूत्र मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है जो किडनी स्टोन छोटी होती है किडनी स्टोन आसानी से मूत्र वाहिनी से बाहर निकल जाती है लेकिन जब यह बड़ी हो जाती है तो पेट के निचले हिस्से में दर्द होना शुरू हो जाता है और सूजन आ जाती है जिससे मूत्र मार्ग में संक्रमण हो जाता है|

kidney stone
किडनी स्टोन ( kidney stone )

किडनी स्टोन के लक्षण(kidney stone symptoms)

  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों का यूरिन गुलाबी लाल या भूरे रंग का आने लगता है पेशाब करने में दिक्कत आ सकती है|
  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों को पेट के निचले हिस्से में दर्द रहने लगता है और यह दर्द कुछ मिनटों या घंटों तक बना रहता है|
  • किडनी स्टोन के शुरूआती लक्षण में से  एक है उल्टी आना उल्टी दो कारणों से बाहर आती है |पहला स्टोन की स्थानांतरण के कारण और दूसरा किडनी शरीर के अंदर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है|
  • किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति का यूरिन मटमैला और बदबूदार होता है|
  • इस रोग में तेज बुखार और ठंड लगने की संभावना होती है|
  • किडनी स्टोन के बड़ा होने पर यह मूत्राशय को ब्लॉक कर देती है जिससे किडनी में दर्दनाक सूजन पैदा हो जाती है और पेट और कमर में दर्द का अनुभव होने लगता है|
  • किडनी स्टोन बड़ा होने पर व्यक्ति को बैठने में परेशानी हो सकती है|
  • किडनी स्टोन के मूत्र मार्ग से मूत्राशय में चले जाने पर बेहद दर्दनाक होता है|

किडनी स्टोन के कारण (Kidney stone causes)

1.प्रोस्टेड फूड का अधिक सेवन करने से-

प्रोस्टेडफूड का अधिक सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है प्रोस्टेड में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जिससे मूत्र मार्ग में सोडियम की मात्रा बढ़ती है| साथ ही साथ कैल्शियम का अधिक उत्सर्जन होने लगता है |प्रोस्टेट फूड में फाइबर की मात्रा कम होती है जिससे यूरिक एसिड की प्रक्रिया में रुकावट आती है|

2.सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने से-

सॉफ्ट ड्रिंक्स और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से शरीर में कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कैल्शियम के उत्सर्जन की संभावना बढ़ जाती है जो किडनी स्टोन का कारण बनती है|

पानी की कमी से पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन कम करने से शरीर में किडनी स्टोन रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है|

3.अनुवांशिकता-कुछ लोगों को अनुवांशिकता के कारण गुर्दे की पथरी की समस्या हो जाती है| कैल्शियम का स्तर बढ़ने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है|

4.मोटापा -किडनी स्टोन का मुख्य कारण मोटापा है|

5.दवाओं का सेवन करने से– कैल्शियम वाली एंटासिड लेने वाले लोगों की मूत्र में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है| विटामिन डी से भी कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है इसके कारण किडनी स्टोन की समस्या उत्पन्न होती है|

6.सिगरेट- सिगरेट किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है जिससे वे काम करना भी बंद कर देती हैं धूम्रपान करने से धमनियां कड़ी हो जाती है जिससे किडनी के रक्त प्रभाव में रुकावट पैदा होती है और उसके कार्य करने की क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है|

7.सोडियम का अधिक सेवन किडनी रोग होने पर हमें सोडियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए  सोडियम सीधे किडनी को प्रभावित करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बनाए रखने में मदद करता है |

8.अत्यधिक शराब का सेवन शराब का सेवन करने से किडनी की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लगती है और किडनी के आकार में वृद्धि हो सकती है|

(किडनी स्टोन के लिए आयुर्वेदिक उपाय)Kidney stone treatment

1. किडनी स्टोन रोग से बचने के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए|

2.प्रतिदिन 5 से 6 महीने तक तुलसी के रस में शहद मिलाकर पीने से किडनी स्टोन आसानी से पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाता है|

3.अनार और उसके जूस का सेवन करने से किडनी स्टोन से बचा जा सकता है|

4. तरबूज में पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पानी की कमी को पूरा करता है यह मूत्र मार्ग में एसिड की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद करता है|

5. नींबू का रस, चार टुकड़े तरबूज के, चार बर्फ के टुकड़े, एक संतरा आदि सबको पीसकर जूस बना लें और रोजाना इसका सेवन करें|

6.करेले का जूस के रूप में सेवन करें| प्रतिदिन एक गिलास करेले का जूस पिए|

7.प्रतिदिन एक गिलास मूली का रस पीने से पथरी  जल्दी 21 दिनों के भीतर निकल जाती है|

8.प्रतिदिन पत्थरचट्टा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिएं 15 दिन में किडनी स्टोन नामक रोग से आराम मिल जाएगा|

9.प्रतिदिन एक गिलास अजवाइन का जूस पीने से भी किडनी स्टोन की समस्या खत्म हो जाती है|

10. नारियल पानी का सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या दूर होती है |

Ajwain
अजवाइन ( Ajwain )