साइनस क्या होता है? ( What is sinus )

साइनस क्या होता है ?(What is sinus?)

साइनस क्या होता है ?

साइनस की समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है हमारे सिर में बहुत सारे छिद्र पाए जाते हैं इन छिद्रों को साइनस कहते हैं| यह हमारी सांस लेने में मदद करते हैं| नासा के छिद्रों में पीले रंग का बलगम जम जाने पर सांस लेने में कठिनाई हो सकती है |साइनस की समस्या को ही साइनोसाइटिस (sinusitis)के नाम से जाना जाता है| सर्दियों में साइनस की समस्या अधिक होती है जैसे- जुखाम होना, गले में खराश होना, नाक बहना ,नाक बंद होना आदि लक्षण नजर आते हैं|

छिद्रों में इंफेक्शन होने के कारण नाक के आसपास की जगह जैसे- सिर, माथा, गालों मे दर्द होने का अनुभव होने लगता है| नाक की हड्डी बढ़ना, एलर्जी होना आदि कारणों से भी साइनस की समस्या हो जाती है|

साइनस(sinus)
साइनस(sinus)

साइनस के लक्षण (Sinus symptoms)

  • साइनस रोग मे व्यक्ति के सिर में लगातार दर्द रहता है और दवाई लेने पर भी ठीक नहीं होता|
  • साइनस रोग मे व्यक्ति को बुखार और बेचैनी का अनुभव होता है|
  • साइनस रोग मे व्यक्ति की नाक से पीला लिक्विड गिरता है|
  • साइनस रोग मे आंखों के आसपास के हिस्से में दर्द और सूजन होना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस रोग मे व्यक्ति के बाल सफेद हो जाना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस रोग मे नाक का बहना और खांसी होना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस की जगह को दबाने पर दर्द का अनुभव होने जैसी परेशानियां होती है|

साइनस के कारण(Sinus causes)

हमारी सिर में कई प्रकार के छिद्र पाए जाते हैं जो सांस लेने में हमारी मदद करते हैं| इन छिद्रोको साइनस कहते हैं| इन छिद्रो के प्रभावित होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया, फंगल इनफेक्शन, वायरल है आइए जानते हैं किन कारणों से साइनस की समस्या उत्पन्न होती है|

1.जुखामसाइनस का सबसे मुख्य कारण जुखाम है| इस रोग में नाक से पीला रंग का लिक्विड निकलता है और सांस लेने में भी कठिनाई का अनुभव होता है| किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से भी जुखाम होने की आशंका बढ़ने लगती है|

2.नाक की हड्डी का बढ़ना- किशोरावस्था में नाक पर चोट लगने के कारण नाक की हड्डी बढ़ जाती है यह टेढ़ी हो जाती है जिसके कारण साइनस की समस्या पैदा हो जाती है| हड्डी का टेढ़ा होना नाक के छिद्र को प्रभावित करता है जिससे व्यक्ति साइनस का शिकार हो जाते हैं|

3.अस्थमा- अस्थमा साइनस होने का मुख्य कारण है जो फेफड़ों और श्वास नली को प्रभावित करता है अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है जिससे व्यक्ति ठीक से सांस नहीं ले पाता और उसकी साइनस की समस्या होने की आशंका बढ़ने लगती है|

4.एलर्जी दूषित वायु के संपर्क में आने से लोगों को नाक से संबंधित एलर्जी की शिकायत रहती है नाक का बहना, गले में दर्द, सिर दर्द यह सब लक्षण सामने आते हैं तो तुरंत ही चिकित्सक से इलाज करवाएं|

5.खानपान- पोस्टिक भोजन ने खाने पर पाचन तंत्र नली प्रभावित होती है जो आगे चलकर साइनस की समस्या का कारण बनती है|

साइनस के घरेलू उपचार (Sinus home remedies)

1.टमाटर का रस-टमाटर के रस में  एक चम्मच नींबू का रस और नमक को मिलाकर  उबाल ले ठंडा होने के बाद इसका सेवन करें टमाटर का रस टमाटर के रस का सेवन करने से बलगम की परत पतली होती है जिससे नाक बहना बंद हो जाता है टमाटर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे आसपास के अंगों में सूजन भी कम होती है|

2.तिल का तेल– तिल का तेल साइनस की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| तिल के तेल की कुछ बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से यह समस्या दूर होती है|

3.सेब का सिरका –एक गिलास गुनगुने पानी में दो से तीन चम्मच सेब का सिरका मिलाकर प्रतिदिन दो से तीन बार सेवन करने से आपके साइनस की समस्या दूर होती है|

4.प्याज-एक प्याज को काटकर कर 15 मिनट उबलते पानी में डालकर उसके बाद एक तोलिए के साथ अपने सिर को ढक कर भाप लेने से नसिका मार्ग की जीवाणु नष्ट होते हैं जिससे साइनस की समस्या दूर होती है|

5.हल्दी-हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं हल्दी का भोजन में सेवन करने से साइनस की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है और चाय में हल्दी डालकर पीने से भी आराम महसूस होता है|

6.अदरक-अदरक अपनी सूजन कम करने वाले गुणों के कारण साइनस की आवाज में कारगर है अदरक और थोड़ी देर के लिए पानी में उबालकर फिर छान्कर उसी पानी में शहद मिलाकर पीने से साइनस की  समस्या से निजात पाया जा सकता है|

ginger
अदरक ( ginger )

7.तुलसी-तुलसी के पत्तों में एंटीफंगल और बैक्टीरिया से लड़ने की एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं इसलिए प्रति दिन की आहार में पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से साइनस से छुटकारा मिलता है|

8.दालचीनी-दालचीनी अपने सूजन कम करने के गुणों के कारण प्रसिद्ध है एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद का सेवन करने से साइनस की समस्या दूर होती है|

9.लहसुन– लहसुन साइनस संक्रमण केरोगाणुओ को नष्ट करता है लहसुन को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना कर भाप लेने से साइनस की समस्या दूर होती है|

Garlic
लहसुन ( Garlic )

10.नीलगिरी का तेल  -उबलते पानी में नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें डालकर उस पानी में  उबाले और फिर पानी को  सोख ले और फिर अच्छी तरह तोलिए को नीचोड़कर  माथे पर रखें इससे साइनस की समस्या से राहत मिलेगी|

साइनस की दवा (sinus antibiotic)


बैक्टीरियल साइनसिसिस का आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। एलर्जी साइनसाइटिस के प्रारंभिक उपचार से माध्यमिक बैक्टीरिया साइनस को रोका जा सकता है। साइनसाइटिस और साइनस के घरेलू उपचार में एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल और अन्य), डिकॉन्गेस्टेंट और म्यूकोलाईटिक्स जैसी ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं शामिल हैं।

साइनस के इलाज के लिए दवा लेने भी जरूरी होती है लेकिन कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना यह बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है शुरुआत में साइनस के लक्षण नजर आने पर इसका इलाज संभव है लेकिन वक्त रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो ऑपरेशन होने की संभावना बढ़ जाती है ऑपरेशन करवाने के बाद इलाज जारी रखना चाहिए अन्यथा साइनस की समस्या फिर से उत्पन्न हो सकती है|


साइनसाइटिस न केवल तीव्र संक्रमण या सूजन है, बल्कि बार-बार साइनसाइटिस होने की अंतर्निहित प्रवृत्ति भी है। बार-बार ऊपरी श्वसन संक्रमण या साइनसाइटिस की व्यक्तिगत प्रवृत्ति को व्यक्तिवादी उपचार के होम्योपैथिक दृष्टिकोण के साथ सबसे अच्छा इलाज किया जा सकता है। आवर्ती साइनसिसिस होम्योपैथी के साथ अद्भुत उपचार करता है। होम्योपैथी तीव्र संक्रमण के साथ-साथ संक्रमण या एलर्जी की प्रवृत्ति का इलाज करती है। यदि होम्योपैथिक विकल्प को अपनाया जाए तो एंटीबायोटिक्स और साइनस सर्जरी से बचना लगभग हमेशा संभव है। साइनोसाइटिस के लिए होम्योपैथी का जोरदार सुझाव दिया गया है।

साइनस संक्रमण के लिए होम्योपैथिक उपचार(sinus infection treatment in homeopathy)

1.सिलिसियासाइनस के कारण सिर दर्द का इलाज सिलीसिया के साथ किया जाता है सिलीसिया का उपयोग करने के लिए नासा के छिद्रो में निर्वहन कठिन कवरिंग में बंद हो जाता है।5-5 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए ।

2.बेलाडोना: यह निर्वहन को आसान बनती है और साइनस सिरदर्द के लिए शीर्ष होम्योपैथिक समाधान है: सामान्य होम्योपैथिक पर्चे बेलाडोना साइनस रोगों के लिए एकदम सही होम्योपैथिक उपचार में से एक है जब साइनस सिरदर्द परेशान निर्वहन की वजह से है. बेलाडोना असाधारण रूप से उपयोगी होता है जब एक साइनसिसिटिस रोगी क्रूर सिरदर्द से ग्रस्त होता है. सिर को मजबूती से या वजन लागू करने से रोगी को सिरदर्द से उन्मूलन मिल सकता है|

3.काली बिच्रोम: साइनसिसिटिस के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक समाधान एक बार फिर गले में छोड़ने के साथ होता हैं|5-5 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए ।

होमयोपथी मे ईलाज

होम्योपैथी में साइनस के इलाज के लिए इस तरह की दवाएं दी जाती हैं जिनसे सिरदर्द में आराम मिले और कैविटी में भरा बलगम जुकाम के जरिए बाहर निकले।ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक देता है। जब साइनस की प्रॉब्लम पहली बार हो तब ये दवाएं 1 से 2 हफ्ते चलती हैं। जब साइनस की प्रॉब्लम बार-बार हो या बीमारी पुरानी हो जाए तो दवाएं 3 से 6 महीने तक दी जाती हैं।

धूम्रपान(smoking)

धूम्रपान(smoking)

धूम्रपान

धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों की समस्या की संभावना महिलाओ की अपेक्षा पुरुषो मे कहीं अधिक होती है। सिगरेट में मौजूद जीव-विष रूपी पदार्थ हमारे फेफड़ों तक ऑक्सीजन को जाने से रोकते हैं जिसके कारण हमें कफ और खांसी के साथ-साथ बीमारी का रुप धारन कर लेती है |फेफड़ों के कैंसर से संबंधित 90 प्रतिशत मामलों में यह पायागया है कि ये कैंसर धूम्रपान के कारण ही होता है। 

धूम्रपान
धूम्रपान ( smoking)

धूम्रपान होने के कारण (Causes of smoking)

  • सिगरेट में मौजूद केमिकल्स के कारण फेफड़ों की ऊपरी सतह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त व लकवाग्रसत हो जाती है।
  • धूम्रपान के कारण श्वास नली संकरी हो जाती है, जिससे फ्लेम की समस्या बढ़ जाती है और सांस लेने में भी तकलीफ होती है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड, एक प्रकार का जहर है जो रक्त में पहुंचने के साथ ही शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यह सिगरेट में मौजूद होता है। 

धूम्रपान के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव (Short term effects of smoking)

  1. रक्त वाहिकाओं से रोग-सिगरेट में निकोटिन रक्त वाहिकाओं को कम करने का कारण बनता है यानी रक्त प्रवाह कम हो जाता है इसके साथ ही आपकी त्वचा को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती|
  2. स्व-प्रतिरक्षित रोग-मनुष्य के शरीर में रोगों और अन्य प्रकार के इन्फेक्शन से लड़ने की शक्ति होती है जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली कहते हैं और इस प्रणाली से जुड़े रोगों को स्व-प्रतिरक्षित रोग कहते हैं। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति का प्रतिरक्षा प्रणाली धीरे-धीरे कमज़ोर हो जाती है |
  3. हड्डियों में कमज़ोरीधूम्रपान से  ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इसमें हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती है और कुछ भी हादसा होने पर हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर धूम्रपान करने वाले बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों में इस रोग के होने की सम्भाव्ना ब्ढ जाती है|
  4. आँखों में मोतियाबिंद –धूम्रपान करने से  आंखों में मोतियाबिंद नामक रोग हो जाता है |आँखों के रेटिना के मध्य भाग में इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। आँखों की देखने की शक्ति कम हो जाती और धुंधलापन सा दीखता है।
  5. फेफ्डो क कैंसरधूम्रपान करने से व्यक्तियों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है |धूम्रपान करने से सबसे ज्यादा प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता हैक्योंकिसबसे पहले सिगरेट से निकलने वाला धुआं फेफड़ों में ही जाता है |धूम्रपान करने से फेफड़ों में पानी पड़ने की संभावना बढ़ जाती है |
धूम्रपान
धूम्रपान (smoking)

धूम्रपान के बारे मे ध्यान रखने योग्य कुछ बाते (Smoking facts)

  1. पांच सिगरेट से अगर निकोटीन को निकाल कर अलग से खाया जाए तो खाने वाले की पांच मिनट में मौत हो सकती है। 
  2. सिगरेट पीने की वज़ह से दिल के दौरे,दमा होने और कैंसर होने या खासकर फेफड़ों का कैंसर होने की सम्भाव्ना ब्ढ जाती है|
  3. जिन बच्चों के माँ-बाप सिगरेट पीते हैं उनको पैदा होने के एक-दो साल के अंदर ही निमोनिया होने की सम्भाव्ना ब्ढ जाती है|
  4. सिगरेट के धुएँ केनिकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड और दूसरे विषैले रसायन, माँ के खून के ज़रिए बच्चे तक पहुँचते रहते हैं जिससे गर्भपात हो स्क्ता है|
  5. मूत्र में पाया जाने वाला कैमिकल कंपाउंड यूरिया नाइट्रेट का इस्तेमाल सिगरेट का फ्लेवर बढाने के लिए किया जाता है। 
  6. सिगरेट में केडमिम (CADMIUM) नामक रसायन पाया जाता है यही केडमिम बैटरी में भी पाया जाता है। बैटरी को तोड़ने पर जो काला टार निकलता है उसमे केडमिम निहित होता है।
  7. अगर आप एक दिन में सिगरेट का एक पैकेट पीते हैं तो उससे निकलने वाला रेडिएशन छाती के 200 एक्सरे के जितना होगा।
  8. 1सिगरेट बीड़ी छोड़ने के 8 घंटे बाद शरीर से कार्बन मोनोऑक्साइड बाहर निकल जाती है 5 दिनों बाद शरीर में मौजूद सारी निकोटिन बाहर निकल जाती है एक हफ्ते बाद खाने पीने की चीजों में स्वाद आने लगता है |3 हफ्ते बाद फेफड़े 30% बेहतर काम करने लगते हैं |
  9. धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की उमर धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति की तुलना में बीएफ से 25% कम हो सकती है |
  10. सिगरेट बीड़ी पीना छोड़ कर आप हार्ट अटैक के खतरे को 50% तक कम कर सकते हैं |
  11. दुनिया में हर साल तंबाकू का सेवन करने से 700000 लोग मरते हैं और इन 60 लॉक लोगों में से 1000000 लोग भारत के होते हैं इसका मतलब हर दिन भारत में 35 00 मौतें तंबाकू का सेवन करने से होते हैं |
  12. तंबाकू कानूनी तौर पर बिकने वाला ऐसा पदार्थ है जिसका निर्देशों के अनुसार सेवन करने से भी दुनिया में हर्ष 6 सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है |

धूम्रपान से जुड़े कुछ तथ्य (Smoking quotes)

  • तजुर्बा कभी-कभी किस्मत से भी मार खाता है यह देखना है तो आंधी में सिगरेट जला ते लड़कों को देखना|
  • यह धूम्रपान की आदत आसानी से कहा छूट पाती है पहले सिगरेट हम फूंकते हैं फिर सिगरेट हमें फुक जाती है|
  • भारत में हर साल  10 लाख लोग सिगरेट तंबाकू छोड़ देते हैं क्योंकि ऐसा करने के लिए मैं जिंदा ही नहीं बचते|
  • तंबाकू का नशा अनमोल जीवन की दुर्दशा|
  • आप सिगरेट को नहीं सिगरेट आपको पीती है इसका नतीजा सिर्फ मौत है|
  • सिगरेट जलाई थी तेरी याद भुलाने को मगर कंबख्त धुए ने तेरी तस्वीर बना डाली|
  • 31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस|
  • नशा छोड़ दो वरना वह आपको निकल जाएगा|
  • तंबाकू को जिसने गले लगाया मौत को उसने पास बुलाया|
  • धूम्रपान घातक है |

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer)

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer )

प्रोस्टेट या गदूद एक सेब के आकार का यौन अंग होता है |प्रोस्टेट शरीर में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है यह केवल पुरुषों में पाई जाती जो उनके प्रजनन प्रणाली का एक अंग है| पुरुष ग्रंथि मूत्र मार्ग के चारों ओर होती है |मूत्र मार्ग मूत्र को मूत्राशय से लिंग के रास्ते से बाहर निकालता है| पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 25 साल की उम्र के बाद बढ़ने लगता है| कई अवस्थाओं में प्रोस्टेट का आकार सामान्य से अधिक होता है| प्रोस्टेट की कोशिकाएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं| जिससे यह ग्रंथि सामान्य से ज्यादा बढ़ने लगती है |इससे मुत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है और कई समस्याएं उत्पन्न  होती है |प्रोस्टेट ग्रंथि को दो भागों में बांटा जाता है दाएं और बाएं| एक व्यस्क पुरुष में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 3 सेंटीमीटर मोटा और 4 सेंटीमीटर चौड़ा होता है और इसका वेट यानी वजन 20 ग्राम तक हो सकता है|

Prostate_Cancer
प्रोस्टेट कैंसर ( Prostate_Cancer )

प्रोस्टेट कैंसर की घटना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है |प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं से बनने वाला कैंसर होता है| प्रोस्टेट कैंसर बहुत धीरे बढ़ता है| शुरुआत में तो इसके लक्षण दिखाई नहीं देते |जब यह लास्ट स्टेज पर पहुंचता है लक्षण दिखाई देने लगते हैं और कई बार मरीजों को यह पता भी नहीं लगता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है| व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है|

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण(Prostate cancer symptoms)

  • पेशाब का बार बार आना|
  • पेशाब करने की इच्छा बार बार होना और निष्कासित करते वक्त मूत्र में रुकावट होना|
  • कई बार मूत्र के साथ रक्त का निकलना इस रोग का मुख्य लक्षण है|
  • पेशाब करने के दौरान जलन और कठिनाई का अनुभव होना और मूत्र की बूंद टपकना|
  • कमर में दर्द होना कूल्हो  और जांघ की ऊपरी सतह में दर्द होना|
  • लगातार वजन कम होना भी प्रॉस्टेट कैंसर का लक्षण है। शरीर का वजन तेजी से कम होना भी कैंसर की ओर इशारा है।
  •  जब पाचन क्रिया सही तरह से काम न करे तो समझ लेना चाहिए कि आप प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में हैं। वहीं प्रॉस्टेट कैंसर से व्यक्ति के शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
  • शरीर के किसी भी हिस्से में दर्दहोना इस रोग का मुख्य लक्षण है|

प्रोस्टेट कैंसर के कारण(Prostate cancer causes)

  • अनुवांशिकता– अगर आपके परिवार में पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर था तो  आपको इस रोग के होने की संभावना बढ़ सकती है|
  • बढ़ती उम्र– उम्र के बढ़ने के साथ-साथ प्रोस्टेट कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है| यह 25 वर्ष की उम्र के बाद होने लग जाता है|
  • हारमोंस में परिवर्तनप्रोस्टेट कैंसर का मुख्य कारण हारमोंस में परिवर्तन होना है| वसा हार्मोन का उत्पादन और शरीर में ऊंचाहार टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन  प्रोस्टेट कैंसर होने का मुख्य कारण है|
  • धूम्रपान– धूम्रपान करना ,बीड़ी सिगरेट शराब का सेवन करने से भी पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है| यह कैंसर धीरे धीरे फैलने लगता है| शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते इसलिए कई पुरुषों को पता भी नहीं लग पाता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है|
  • केमिकल्स के संपर्क में आना केमिकल्स के संपर्क में आने से भी पुरुष इस रोग का शिकार हो जाते हैं|
  • आहार कारक-मछली मांस सोयाबीन उत्पाद चावल डेयरी उत्पादों का सेवन करते रहने से भी प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका बनी रहती है|

प्रोस्टेटकैंसर स्टेजिज(Prostate cancer stages)

प्रोस्टेट कैंसर को चार चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

स्टेज 1. पहले चरण में कैंसर बहुत छोटा होता है और पुरुष ग्रंथि तक ही सीमित रहता है|

स्टेज2.दूसरे चरण में कैंसर पुरुष ग्रंथि में ही होता है लेकिन इसका आकार बड़ा हो जाता है|

स्टेज3.तीसरे चरण में कैंसर प्रोस्टेट के बाहर फैल चुका है और वीर्य को ले जाने वाली ट्यूब्स तक फैल जाता है|

स्टेज4. चौथे चरण में कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि से बाहर के नजदीक ढांचे जैसे लसिका ग्रंथि मूत्राशय या फिर हड्डियों या लीवर जैसे दूर के अंगों में फैल जाता है|

प्रोस्टेट कैंसर किस उम्र के लोगों को होता है?(Prostate cancer age)

प्रोस्टेट कैंसर के बारे मे सबसे पहले हमने यह जाना कि प्रोस्टेट कैंसर किन कारणों की वजह से होता है उम्र के बढ़ने के साथ-साथ इस रोग के होने की आशंका बढ़ जाती है यह रोग 25 वर्ष की आयु के बाद होने लगता है 40 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में यह रोग कम देखने को मिलता है लेकिन 60 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है|

प्रोस्टेट कैंसर के लिए टेस्ट(Prostate cancer test)

1.PSA  Testरक्त परीक्षण(prostate Specific Antigen)

प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए प्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन(prostate Specific Antigen)नामक टेस्ट किया जाता है प्रोस्टेट नामक रसायन का स्तर बढ़ जाने पर प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी नामक टेस्ट किया जाता है पता लगाया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर इतनी शीघ्रता से फैल रहा है| पीएसी के आधार पर ही डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं प्रोस्टेट कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित न करें इसके लिए सीटी स्कैन  बोन स्कैन टेस्ट भी किया जाता है|

1.PSAप्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांचने के लिए खून का एक सैंपल लिया जाता है| पीएसए प्रोस्टेट द्वारा बनाया गया एक प्रोटीन है प्रोस्टेट के कैंसर से ग्रस्त पुरुषों के खून में पीएसए के बढ़े हुए सतर होते हैं प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित कुछ पुरुषों में सामान्य पीएसए होता है| पीएसए का सामान्य से ऊंचा  स्तर प्रोस्टेट का कैंसर के कारण हो सकता है| ऐसा मानने पीएसएस ऊपर वाले पुरुषों को आमतौर पर औरपरीक्षणों के लिए भेजा जाता है।

2.बायोप्सी-एक बायोप्सी शरीर से लिया गया ऊतक का एक नमूना है ताकि इसे और अधिक बारीकी से जांच की जा सके।बायोप्सी एक सुई से ली जाती है जोकि पीछे के मार्ग  की दीवार से डाली जाती है इसे TRUS बायोप्सी कहते हैं| बायोप्सी अल्ट्रासाउंड के साथ ही की जाती है| बायोप्सी वृषण के पीछे की त्वचा से भी ली जा सकती है| इसे ट्रांसपेरिनियल बायोप्सी कहते हैंऐसा भी हो सकता है कि प्रोस्टेट में कैंसर हो पर वह बायोप्सी से पता नहीं लगाया जाए ऐसे कैंसर का पता लगाने के लिए एमआरआई स्कैन भी किया जा सकता है फिर बायोप्सी को फिर से करना पड़ सकता है यदि पीएसए का सत्र बढ़ने लगे तो बायोप्सी को फिर से किया जा सकता है|

3.MRI(Magnetic Resonance Imaging)-एमआरआई के लिए शक्तिशाली चुंबक  रेडियो किरणों और कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है जिसकी मदद से शरीर की जानकारी को विस्तृत तस्वीरों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल शरीर के लगभग हर हिस्से को जांचने के लिए किया जाता है जैसे अंदरुनी अंग लीवर गर्भाशय और पुरुष ग्रंथि आदि की जांच की जाती है|

अतिरिक्त जांच यदि बायोप्सी में पता लग जाता है कि कैंसर है तो वह प्रोस्टेट ग्रंथि से आगे फैला है या नहीं इसका पता करने के लिए अतिरिक्त टेस्टों की आवश्यकता पड़ सकती है| जिम में शामिल है :हड्डियों का स्कैन, सीटी स्कैन ,एक्स रे|

प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1.लहसुन– लहसुन में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं जैसे कि विटामिन सी विटामिन बी जो प्रोस्टेट कैंसर को होने से रोकते हैं|

2.ब्रोकली– ब्रोकली के अंकुर मे पाया जाने वाला फाइटोकेमिकल्स कैंसर के कीटाणुओं से लड़ने में हमारी मदद करता है इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन करना चाहिए|

ब्रोकली
ब्रोकली

3.अमरूद– अमरूद मे लाइकोपिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो कैंसर से लड़ने में हमारी मदद करता है|

4.सोयाबीन– प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन अपने आहार में सोयाबीन का सेवन करना चाहिए|

5.एलोवेरा– एलोवेरा में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन एलोवेरा का सेवन करना चाहिए|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

6.ग्रीन टी-प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करने से हम कैंसर होने से बच सकते हैं|

7.अंगूर– अंगूर में पोरंथोसाइनिडीसभरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे ट्रोजन के निर्माण में कमी होती है और हमें कैंसर रोग से निजात मिलता है|                                                                                                              

गायनेकोमैस्टिया का इलाज (Gynecomastia Treatment )

गायनेकोमैस्टिया का इलाज (Gynecomastia Treatment )

गायनेकोमैस्टिया का इलाज

गायनेकोमैस्टिया का इलाज ? गायनेकोमैस्टिया नामक रोग पुरुषों में पाया जाता है | पुरुषों में जब सतन के ऊतकों में सूजन आ जाती है तो उस स्थिति को गायनेकोमैस्टिया कहते हैं| यह समस्या पुरुषों में हार्मोन असंतुलन के कारण होती है |यह टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन के बढ़ने की वजह से होता है| गायनेकोमैस्टिया की वजह से ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना होती है |गायनेकोमैस्टिया होने पर पुरुषों के स्तन उभर आते हैं| 50 वर्ष ऊपर आयु  के पुरुषों में यह समस्या हो सकती है|

गायनेकोमैस्टिया हमेशा से पुरुषों के मानसिक तनाव का कारण रहा है और सही जानकारी व उचित इलाज के आभाव में इससे पहले छुटकारा पाना मुश्किल था, लेकिन कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिए बिना किसी निशान या कॉम्प्लिकेशन के एक दिन में गायनेकोमैस्टिया नामक रोग को रिमूव किया जा सकता है।

Gynecomastia
गायनेकोमैस्टिया (Gynecomastia)

गायनेकोमैस्टिया के लक्षण (Symptoms of Gynecomastia )

  • गायनेकोमैस्टिया रोग के होने पर पुरुषों के स्तनों में सूजन आ जाती है|
  • किशोरावस्था में निपल्स का बड़ा दिखाई देना इसका मुख्य लक्षण है|
  • सामान्य ग्रंथियों के उत्तक और वसा की वृध्दि होना इस रोग के मुख्य लक्षण है|
  • निपल्स से द्रव का निकलना गायनेकोमैस्टिया रोग का मुख्य लक्षण है|
  • ज्ञानेंद्रिय में हार्मोन की अतिरिक्त ए सामान्यता मान्यता हो सकती है या शरीर के बालों में भी परिवर्तन आ सकता है|

गायनेकोमैस्टिया के कारण (Causes of Gynecomastia)

  • अनुवांशिकता –आपके परिवार के किसी भी सदस्य को यह समस्या है तो आप गायनेकोमैस्टिया की चपेट में आ सकते हैं|
  • धूम्रपान करने से-अल्कोहल का सेवन करने से गायनेकोमैस्टिया रोग की होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • मोटापा –मोटापा गायनेकोमैस्टिया नामक रोग का मुख्य कारण है| मोटापे के कारण पुरुषों के सत्नो के आस पास अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है जिस्से यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • उम्र का पड़ाव- गायनेकोमैस्टिया की समस्या जब बच्चे युवावस्था में प्रवेश करते हैं तो यह समस्या उत्पन्न हो जाती है क्योंकि इस दौरान हारमोंस में परिवर्तन होता है | बढ़ती उम्र के साथ-साथ गायनेकोमैस्टिया नामक रोग के होने की संभावना में विकास हो जाता है|

गायनेकोमेमैस्टिया के घरेलू उपाय

1.हल्दी– हल्दी पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने का काम करती है |इसका सेवन करने से पुरुष गायनेकोमैस्टिया की समस्या से बच सकते हैं|

2.अलसी और सोया-अलसी और सोया टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को बढ़ाने में मददगार नहीं होती लेकिन यह एस्ट्रोजन का स्तर कम करने में सहायक होते हैं| अपनी प्रतिदिन के आहार में अलसी के तेल को शामिल करें यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी सहायक है|

3.ओमेगा 3 फैटी एसिड– यह टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायता करता है मछली में 3 फैटी एसिड सबसे ज्यादा पाया जाता है जो गायनेकोमैस्टिया से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुआ है|

4.गुग्गुल– यह जड़ी बूटी है| यह एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने और पुरुष हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में हमारी मदद करती है| इसका उपयोग पुरुषों के स्तन के उसको की सूजन कम हो जाती है|

गायनेकोमैस्टिया सर्जरी (Gynecomastia Surgery)

1.मैस्टेक्टमीसर्जरी-इस सर्जरी में सतन की ग्रंथि उत्तक को काटकर बाहर निकाल दिया जाता है|

2.पुल थ्रू सर्जरी: इस सर्जरी में निप्पल के पास एक छोटे से छेद के  माध्यम से चर्बी और ग्रंथि युक्त टिशूज को बाहर निकाल दिया जाता है| इस सर्जरी से शरीर पर बहुत कम निशान पढ़ते हैं| इस सर्जरी के होने पर साफ सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है अन्यथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है|

Gynecomastia surgery
गायनेकोमैस्टिया सर्जरी (Gynecomastia surgery)

गाइनेकोमैस्टिया से बचाव 

1.बढ़ती उम्र -उम्र बढ़ने के साथ-साथ हारमोंस में बदलाव आता है और गायनेकोमैस्टिया नामक रोग के होने की संभावना दिन प्रतिदिन बढ़ती है|

2.शराब का सेवन न करें– अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से गायनेकोमैस्टिया की समस्या उत्पन्न हो जाती है| इसलिए शराब का सेवन अधिक ना करें|

3.एंटीबायोटिक से -एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से गायनेकोमैस्टिया होने की संभावना बढ़ जाती है| ये हारमोंस को प्रभावित करते हैं| इसकी वजह से पुरुषों के सपनों में बदलाव हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह ले|

4.अनुवांशिकता– आपके परिवार के किसी भी सदस्य को यह समस्या कोई है तो आप गायनेकोमैस्टिया नामक रोग की चपेट में आ सकते हैं|

5.वजन कम करें– मोटापे के कारण भी पुरुषों के सत्नो  में सूजन आ जाती है|

सांस लेने में दिक्कत?

सांस लेने में दिक्कत?

सांस लेने में दिक्कत?

इस रोग में व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है| व्यक्ति की छाती में जकड़न हो जाती है और सांस लेने के दौरान दर्द भी महसूस होता है| वायु मार्ग रुकने के कारण सांस लेने में दिक्कत हो सकती है| सांस की नली जाम हो जाने के कारण भी समस्या हो सकती है |सांस तेज चलना ,गहरी सांस ना ले पाना ,सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना ऐसी कुछ बातें हैं जिनका सामना कभी ना कभी करना पड़ता है| अगर इस रोग का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है|

सांस लेने की बीमारी निम्नलिखित कारणों से हो सकती है जैसे- टीबी के रोग ,स्वाइन फ्लू ,फेफड़ों के रोग ,दिल की बीमारियां, गुर्दों का फेल होना ,मोटापा, बेचैनी और तनाव, खून में कमी आदि कारणों से सांस लेने में कठिनाई का सामना करना आदि|

Asthma_(Lungs)
सांस लेने में दिक्कत (अस्थमा )

सांस लेने में दिक्कत के लक्षण

  • व्यक्ति सांस लेने में कठिनाई का अनुभव करता है|
  • छाती में दर्द होने लगता है|
  • सांस की बीमारी में व्यक्ति कई बार बेहोश भी हो जाता है|
  • छाती में घर-घर आहट की आवाज आने लगती है|
  • सांसे तेज चलना|

सांस लेने में दिक्कत के कारण

सांस की बीमारी निम्नलिखित कारणों से होती है जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

  1. अस्थमा- सांस लेने वाली नली में सूजन आने की वजह से वह संकरी हो जाती है और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है |इसमें व्यक्ति के छाती में कफ जम जाता है और घबराहट जैसी आवाज आने लगती है| रोगी को लगातार खांसी भी रहती है|
  2. दिल की बीमारियां- अगर आपको सांस फूलना, चक्कर आना, सीने में दर्द हो रहा जैसी घटनाओं का अनुभव हो रहा है तो इसका मुख्य कारण पलमोनरी हाइपरटेंशन है| दिल की बीमारी के चलते भी सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है |दिल के रोग, हार्ट अटैक ,एंजाइना आदि में ब्रेथलैसनेस होती है| दिल की मांसपेशियां कमजोर होने पर फेफड़ों पर दबाव पड़ जाता है| हर व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है|
  3. गुर्दों का फेल होना-गुर्दे फेल हो जाने के कारण रक्त में यूरिया का सदर बढ़ जाता है जिससे मुंह से बदबू आने लगती है और इस रोक की पड़ जाने पर व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|
  4. तनाव- चिंता करना भी इस रोग का मुख्य कारण है| जरूरत से ज्यादा सांस लेने पर भी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|
  5. मोटापा-मोटापा बढ़ना सांस लेने में दिक्कत का मुख्य कारण है| मोटे व्यक्ति को दौड़ने में परेशानी होती है इसलिए व्यक्ति को मोटापे पर नियंत्रण रखना चाहिए|
  6. पेट का कैंसर-शरीर में कैंसर कोशिकाओं के कारण सांस की नली प्रभाव पड़ता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है| लिवर में पेट में तरल पदार्थ जमा हो जाने के कारण पेट में सूजन आने लगती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है|
  7. फेफड़ों के रोग- फेफड़ों के रोग होने पर व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है| सांस की नली जाम हो जाने के कारण फेफड़ों पर दबाव पड़ता है और व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है।
  8. खून की कमी-शरीर में खून की कमी के कारण अभी सांस लेने में परेशानी होती है| खून की कमी के कारण रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन कम हो जाता है जिससे ऑक्सीजन फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाते और सांस लेने में कठिनाई होती है।

सांस की बीमारी से निजात पाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. तुलसी का रस-तुलसी में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो सांस चढ़ने की समस्या में फायदेमंद है तुलसी का रस और शहद का सेवन करने से आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं
  2. शहद-शहद का सेवन करने से छाती में जमे कफ ठीक होती है और सांस की बीमारी दूर होती है इसलिए एक गिलास गुनगुने पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से इस रोग से निजात मिलता है|
  3. प्रोटीन युक्त आहार– राशिफल और हरी सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें |सांस लेने की समस्या होने पर एसिड बनाने वाले पदार्थों का सेवन ना करें|
  4. नींबू का रस- नींबू का रस गुनगुने पानी में मिलाकर पीते रहने से यह समस्या जड़ से खत्म हो जाती है|
  5. लोंग- लॉन्ग और शहद का काढ़ा पीने से श्वास नली में हुई रुकावट को दूर किया जा सकता है इसके लिए तीन से चार लोगों को एक कप पानी में उबालकर उसमें शहद मिलाकर उसका सेवन करने से यह समस्या दूर होती है|
  6. सौंफ-सौंफ का सेवन करने से छाती में जमे कफ की समस्या दूर होती है और सांस लेने में भी कठिनाई नहीं होती|
  7. लहसुन –लहसुन का प्रयोग करने से सांस लेने में कठिनाई से निजात मिलता है इसलिए 3 से 4 कलियों को छीलकर दूध में उबालकर उसे छानकर सोने से पहले पीने से यह समस्या दूर होती है|
  8. अजवाइन- अजवाइन को पीसकर पानी में उबालकर अजवाइन वाले पानी से भाप लेने से श्वास नली को साफ किया जा सकता है| अजवाइन की भाप लेने से गले में सूजन और सांस फूलने की समस्या दूर होती है|
  9. तिल का तेल- तिल के तेल को गुनगुना गर्म करके रात को सोते समय छाती पर मलने से सांस लेने की दिक्कत दूर होती है|
Ajwain
अजवाइन