स्लीप एपनिया (sleep apnea )

स्लीप एपनिया (sleep apnea )

sleep apnea
स्लीप एपनिया ( sleep apnea using crap machine )

स्लीप एपनिया

स्लीप एपनिया यानि खर्राटे लेने की समस्या एक आम समस्या बन गई है|रात को सोने के दौरान सांस लेने में रुकावट आने लग जाती है| रात को सोने के दौरान श्वसन मार्ग के बंद होने के कारण हवा का प्रवाह फेफड़ों तक नहीं हो पाता जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है| स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति तेजी  से खर्राटे मारने लगते हैं| स्लीप एपनिया की समस्या महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है|65 वर्ष से अधिक उम्र वालों में अधिक पाई जाती है| स्लीप एपनिया होने पर तेजी से खराटे आना ,सोते वक्त पसीना आना , बार-बार जागना ,याददाश्त कमजोर होना , बीपी हाई हो जाना , सोते समय सांस रुकने पर बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण नजर आते हैं|खर्राटे आने के कारण व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस होने लगती है|

स्लीप एपनिया के सिम्पट्म्स (sleep apnea symptoms)

  • सुबह उठने पर सिर दर्द होना|
  • सोते टाइम सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना|
  • सोते समय तेज खर्राटे आना स्लीप एपनिया का मुख्य लक्षण है|
  • सोते वक्त पसीना आना|
  • किसी चीज पर ध्यान केंद्रित न कर पाना|
  • सोते समय सांस रूकने पर बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण नजर आते हैं|
  • दिन में ज्यादा नींद आना, चिड़चिड़ापन होना |
  • याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण नज़र आते है|
  • बीपी हाई हो जाता है|
  • बार बार पेशाब करने के लिए उठना|
  • बार-बार जागना|
  • तनाव होना|
  • अच्छे से नींद कर लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करना|
  • जागते समय मुंह का सूख जाना|

स्लीप एपनिया के कारण (sleep apnea causes)

1.वजन का अधिक होना- अधिक वजन होने के कारण मुंह ,गले ,नाक ,कान के आंतरिक हिस्सों का आकार कम हो जाता है लेकिन गले का आकार बढ़ जाता है जिसके कारण स्लीप एपनिया की समस्या होती है|

2.मांसपेशियों का संकीर्ण होना रात को सोते समय वायु मार्ग की मांसपेशियों संकीर्ण हो जाती है| जिस कारण फेफड़ों को हवा नहीं मिल पाती और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|

3.धूम्रपान करना- शराब का सेवन करने से या बीड़ी, तंबाकू, गुटखा आदि का सेवन करने से स्लीप एपनिया की समस्या हो जाती है| फेफड़ों पर गहरा प्रभाव पड़ता है और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं और सांस लेने में भी कठिनाई का अनुभव होता है|

4.उम्र का बढ़ना- उम्र के बढ़ने के साथ-साथ स्लीप एपनिया की समस्या बढ़ने लगती है| 65 वर्ष की उम्र के लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है | महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह समस्या अधिक होती है|

5.ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप रात को सोते समय वायु मार्ग में उतको के अधिक हो जाने के कारण फेफड़ों तक हवा का प्रवाह नहीं हो पाता| सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है और तेज खराटे आने लगते हैं|

6.जबड़े का छोटा होना जबड़े का छोटा होना खराटे आने का मुख्य कारण है| जबड़ा छोटा होने के कारण लेटने पर जीभ पीछे की तरफ होने लगती है जिससे सांस की नली में रुकावट आती है और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|

7.पीठ के बल सोना– पीठ के बल सोने से भी खराटे होने की समस्या उत्पन्न होती है| पेट के बल सोने से जीभ पीछे की ओर मुड़ जाती है और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है|

स्लीप एपनिया टेस्ट (sleep apnea test)

1.पॉलीसोम्नोग्राफी– यह एक प्रकार का टेस्ट है| सोने के दौरान व्यक्ति की गतिविधियों पर मशीनों द्वारा नजर रखी जाती है| इस टेस्ट में व्यक्ति के हाथों पैरों की गतिविधि खून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा खर्राटे लेने का तरीका आदि गतिविधियों पर मशीनों द्वारा नजर रखी जाती है| और सांस में कितनी देर के लिए रुकावट आती है| इस बात को भी अब्ज़र्व किया जाता है|

2.डायनेमिक एमआरआई- यह भी एक प्रकार का टेस्ट है| खर्राटों के सतर को जांचने के लिए एम आर आई टेस्ट किया जाता है जिससे सोने का तरीका खर्राटे लेने जैसी गतिविधियों को ऑब्जर्व किया जाता है|स्लीप एपनिया से पीड़ित होने पर व्यक्ति के ऑक्सीजन का सतर में गिरावट पाई जाती है|

स्लीप एपनिया होने पर आयुर्वेदिक उपाय(sleep apnea treatment in ayurveda)

1.हल्दी– हल्दी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं| रात को सोने से पहले दूध मे हल्दी पकाकर सेवन करने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या को दूर किया जा सकता है|

Haldi
हल्दी ( Haldi )

2.दालचीनी- दालचीनी अपने सूजन कम करने के गुणों के कारण प्रसिद्ध है| एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद का सेवन करने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या दूर होती है|

3.ओलिव ऑयल- इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं| ओलिव ऑयल का प्रयोग करने से श्वसन तंत्र ठीक ढंग से कार्य करता है|

4.इलायची –रात को सोने से पहले इलायची के दानों को गुनगुने पानी में उबालकर फिर छानकर पानी पीने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या को दूर किया जा सकता है|

इलायची
इलायची

5.पुदीने का तेल- रात को सोने से पहले पुदीने के तेल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर गरारे करने से स्लीप एपनिया यानि खराटो की समस्या दूर होती है| पुदीने का तेल नासा छिद्रो की सूजन को कम करने में भी सहायक है|

6.तुलसी- तुलसी के पत्तों में एंटीफंगल और बैक्टीरिया से लड़ने की एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं| इसलिए प्रतिदिन के आहार में पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से स्लीप एपनिया से छुटकारा मिलता है|

7.प्याज- एक प्याज को काटकर कर 15 मिनट उबलते पानी में डालकर उसके बाद एक तोलिए के साथ अपने सिर को ढक कर भाप लेने से नसिका मार्ग की जीवाणु नष्ट होते हैं जिससे स्लीप एपनिया यानि खराटों की समस्या दूर होती है|

8.तिल का तेल– तिल का तेल स्लीप एपनिया की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| तिल के तेल की कुछ बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से यह समस्या दूर होती है|

9.लहसुन– लहसुन को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना कर भाप लेने से स्लीप एपनिया की समस्या दूर होती है|