कामेच्छा की कमी(low libido)

कामेच्छा की कमी(low libido)

कामेच्छा की कमी

कामेच्छा की कमी की समस्या एक आम समस्या बन गई है जिसे लिबिडो प्रॉब्लम भी कहते हैं जब पुरुष या स्त्री में यौन संबंध बनाने की उत्तेजना कम हो जाए या बंद हो जाए तो उसे  कामेच्छा की कमी कहा जाता है|स्त्रियों में कामेच्छा की कमी एस्ट्रोजन से संबंधित है|स्त्रियों में एस्ट्रोजन का स्तर सामान्य होना चाहिए|महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा एस्ट्रोजन अधिक मात्रा में होने के कारण कामेच्छा की अधिकता पाई जाती है परंतु हार्मोन में असंतुलन आने के कारण कामेच्छा में कमी आ जाती है|

महिलाओं में हारमोंस में परिवर्तन शराब का सेवन करने, नशीली दवाइयों का सेवन करने आदि कारणों से कामेच्छा में कमी आ जाती है|पोषक तत्वों की कमी के कारण भी कामेच्छा कम हो सकती है| तनाव , थकान या एनीमिया नामक रोग भी सेक्स के प्रति कम रुचि होने का कारण बन सकता है|

कामेच्छा की कमी के लक्षण(low libido symptoms)

  • हार्मोन में असंतुलन होना
  • यौन संबंध बनाने के के बाद दर्द का अनुभव होना
  • शारीरिक कमजोरी और थकान का अनुभव होना
  • एस्ट्रोजन के सत्र में में कमी आना
  • हार्मोन के स्तर में परिवर्तन आना
  • यौन सुख की प्राप्ति न होना
  • ऊर्जा में कमी आना

महिलाओं में कामेच्छा की कमी के कारण(low libido causes)

  1. व्यायाम न करना- व्यायाम न करना योन इच्छा में कमी होने का मुख्य कारण है|कामेच्छा आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती है| इसलिए हमें प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए| व्यायाम करने से शरीर में रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है और यह हार्मोन में संतुलन बनाए रखने में हमारी मदद करता है|
  2. गर्भनिरोधक दवाइयां –गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से हारमोंस के स्तर में कमी आ जाती है जिसके कारण महिलाओं की कामेच्छा में कमी आ जाती है|
  3. व्यायाम न करना- व्यायाम न करना योन इच्छा में कमी होने का मुख्य कारण है| कामेच्छा आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती है| इसलिए हमें प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए व्यायाम करने से शरीर में रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है और यह  हार्मोन में संतुलन बनाए रखने में हमारी मदद करता है|
  4. ब्लड प्रेशर- शुगर से पीड़ित महिलाओं में ब्लड प्रेशर की समस्या देखने को मिलती है| शुगर के कारण रक्त का संचार ठीक ढंग से नहीं हो पाता और सेक्स के प्रति रुचि कम होने लगती है|
  5. शराब का सेवन-शराब में पाए जाने वाले एल्कोहल सेक्स इच्छा पर गहरा असर पड़ता है| शराब का सेवन करने से सेक्स के प्रति रुचि कम होने लगती है|
  6. हार्मोन में असंतुलन- हार्मोन के परिवर्तन आने के कारण भी कामेच्छा की कमी हो जाती है जिसके कारण कामेच्छा में कमी आने लगती है|
  7. मानसिक तनाव-महिलाएं स्वस्थ न होने पर मानसिक तनाव का शिकार हो जाती है|मानसिक तनाव मानसिक तनाव से पीड़ित होने पर सेक्स संबंधी इच्छा खत्म हो जाती है और कामेच्छा की कमी आती है|
  8. सर्जरी के कारण– महिलाओं में सपनों की सर्जरी और जननांगों की सर्जरी होने के कारण उनकी सेक्स के प्रति रुचि कम होने लगती है|
  9. रजोनिवृत्ति- रजोनिवृत्ति महिलाओं में कामेच्छा की कमी का मुख्य कारण है| शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम होने पर हारमोंस में कमी आ जाती है जिसके कारण कामेच्छा में कमी आ जाती है|

कामेच्छा बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय(libido  treatment)

  1. अजवाइन- अजवाइन में एंड्रोस्टरॉन नामक तत्व पाया जाता है जो सेक्स के प्रति महिलाओं में कामेच्छा में वृद्धि करता है इसलिए अपने प्रतिदिन के आहार में अजवाइन का प्रयोग करें|
  2. प्याज- प्रतिदिन अपने आहार में प्याज और लहसुन का सेवन करने से कामेच्छा को बढ़ाया जा सकता है|
  3. अश्वगंधा– यह एक प्रकार की जड़ी बूटी है|अश्वगंधा का उपयोग लंबे समय से स्टेमिना बढ़ाने के लिए किया जाता है यह महिलाओं में हारमोंस के स्त्राव बढ़ाने में मदद करता है जिससे सेक्स के प्रति रुचि बढ़ती है|
  4. सेब- अपने प्रति दिन की आहार में सेव को शामिल करना चाहिए क्योंकि सेब में एंटी ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो रक्त के प्रवाह को बढ़ाते हैं|
  5. लौकी- लोकी में एमिनो एसिड पाया जाता है जो कामेच्छा को बढ़ाता है|अपनी प्रतिदिन के आहार में लौकी के बीज का सेवन करना चाहिए|
  6. डार्क चॉकलेट-डार्क चॉकलेट में पाए जाने वाले पोषक तत्व तनाव को दूर करते हैं और दिमाग में पाए जाने वाले डोपामाइन नामक हार्मोन के स्त्राव को बढ़ाते हैं जिससे सेक्स के प्रति उत्तेजना बढ़ती है|
  7. चुकंदर- चुकंदर में मौजूद बोरो तत्व हारमोन के स्तर में वृद्धि करता है जिसके कारण सेक्स के प्रति  कामेच्छा  मी रुचि बढ़ती है और रक्त का संचार तेजी से होता है|
  8. अनार– अनार के रस में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जिसके कारण शरीर में रक्त का प्रवाह तेजी से होने लगता है और यह सेक्स के प्रति इच्छा बढ़ाने में भी सहायक है|
  9. जामुन- जामुन का सेवन करने से सेक्स करने की इच्छा बढ़ती है इसलिए अपने प्रति दिन की आहार में जामुन का सेवन करें|
  10. मेथी दाना- मेथी के बीजों को पीसकर उसका सेवन करने से कामेच्छा के सतर को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है|
  11. बादाम -बादाम में विटामिन ई पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है बादाम का सेवन करने से कामेच्छा की कमी की समस्या दूर होती है और उत्तेजना भी बढ़ती है|
  12. लहसुन-लहसुन में पाए जाने वाले एलिसिन नामक पदार्थ के कारण लहसुन रक्त के प्रवाह  को बढ़ाने में सहायक है और कामेच्छा को भी बढ़ाता है|इसलिए प्रतिदिन 5 से 6 कलियां लहसुन छीलकर सुबह खाली पेट खाने से कामेच्छा की कमी दूर होती है|
  13. अखरोट-अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है व रक्त वाहिकाओं को आराम देता है और रक्त का प्रवाह बढ़ाता है|
अखरोट
अखरोट

ब्रेस्ट साइज कितना होना चाहिए

ब्रेस्ट साइज कितना होना चाहिए

स्तन की संरचना(breast  internal  structure)

ब्रेस्ट साइज कितना होना चाहिए आइये जानते हैं | ब्रेस्ट साइज यानि स्तन का आकार एक समान नहीं होता| बायां सतन का आकार दाएं स्तन की अपेक्षा बड़ा होता है बाएं स्तन के नीचे दिल होता है इसलिए रक्त का प्रवाह तेजी से होता है जिसके कारण बाईं ओर का स्तन बड़ा होता है| स्तन के अंदर वसा ऊतक पाए जाते हैं| स्तन का आकार वसा की मात्रा पर निर्भर करता है हारमोंस में परिवर्तन आने के कारण ब्रेस्ट साइज यानि सतन का आकार बढ़ता है|

स्तन में विशेष प्रकार की ग्रंथियां पाई जाती है जिन्हे ट्यूब लोवोलर ग्रंथियां कहा जाता है जो संशोधित पसीने वाले ग्रंथियां होती है|प्रत्येक ग्रंथि दुखद वाहिनी में खत्म होती है और निप्पल पर एक छोटी छेद के माध्यम से खुलती है प्रत्येक नलिका में एक पतला भाग मौजूद होता है जैसे- लैक्टिफरस साइनस के नाम से जाना जाता है जिसमें दूध जम जाताहै|मायोफ़ीथेलियलकोशिकाएं ग्रंथि में पाई जाती है जो तरल पदार्थों को स्त्रावित करने में हमारी सहायता करती है|

  1. निप्पल– निप्पल स्तन का गहरा क्षेत्र होता है जो हल्के लाल रंग या गहरे काले रंग का होता है निप्पल में वसा यापसीने की ग्रंथियां नहीं होती स्तन के ऊतकों में पाए जाने वाले मांसपेशी फाइबर उत्तेजित होने पर निप्पल को सीधा करने में मदद करते हैं|
  2. डक्ट नलिकाए- प्रत्येक स्तन में 15 से 20 लोब पाए जाते हैं प्रत्येक लोब में 20 से 40 लॉब्यूल्स मौजूद होते हैं जो निप्पल को घेरे रखते हैं छोटी नलिकाए लॉब्यूल्स से जुड़ी होती हैं यह नलिकाएं आपस में जुड़ी होती है प्रत्येक स्तन में कम से कम 10 डक्ट सिस्टम पाए जाते हैं जो निप्पल के साथ जुड़े होते हैं निपल्स में उतको में पाए जाने वाले मांसपेशी फाइबर उत्तेजित होने पर स्तंभ बनने की अनुमति देता है|
  3. लॉब्यूल्स- दूध पैदा करने वाली ग्रंथियों को लॉब्यूल्स कहा जाता है वसायुक्त उत्तक नलिका और लॉब्यूल्स रक्त वाहिकाओं और लसिका वाहिकाओं के आसपास मौजूद होते हैं प्रत्येक सतन में 15 से 20 लोब पाए जाते हैं प्रत्येक लोग में 20 से 40 लॉब्यूल्स मौजूद होते हैं जो निप्पल को घेरे रखते हैं|लॉब्यूल्स मे  छोटे बल्ब मौजूद होते हैं जो दूध का उत्पादन करते हैं नलिका ओं को छोटी ट्यूब दोबारा जोड़ा जाता है जो दूध को निपल्स तक ले जाने का काम करते हैं|
  4. एरोला- निप्पल त्वचा के गहरे अंधेरे क्षेत्र के केंद्र में स्थित होता है| निप्पल को चारों ओर से गिरने वाले भाग को एरोला कहते हैं यह काले गहरे रंग का होता है एरोला में छोटी ग्रंथियां मौजूद होती है जो स्तनपान करवाने के बाद निप्पल को चिकनाहट देने लगती है|

स्तन ब्रेस्ट से जुड़े तथ्य (Myths about the breast size)

  1. बाएं सतन का दाएं सतन से बड़ा होना- स्त्रियों में स्तन समान आकार के नहीं होते| स्त्रियों के बाएं स्तन का आकार उनके दाएं स्तन से बड़ा होता है क्योंकि बाई ओर दिल होता है और रक्त का प्रवाह तेजी से होता है जिसके कारण बाया सतन बड़ा होता है|
  2. सतन की निप्पल के आकार अलग होना– निपल्स हल्के लाल या गहरे काले रंग के होते हैं| हर महिला में निपल्स बड़े या छोटे हो सकते हैं| उनके आसपास बाल भी मौजूद होते हैं जो सामान्य है उल्टी निपल्स जो अंदर की तरफ रह जाते हैं सामान्य होते हैं निपल्स से संभोग करने की उत्तेजना को बढ़ाते हैं|
  3. सतन का लटकना- उम्र के बढ़ने के साथ-साथ महिला के स्तन लटक जाते हैं| इसका मुख्य कारण सतन में पाए जाने वाले उत्तक वसा में परिवर्तित हो जाते हैं जिसके कारण सतन ढीले पड़ जाते हैं|
  4. स्तन का आकार छोटा या बड़ा होना- स्तन में पाए जाने वाले फैटी टिशु और हारमोंस के कारण स्तन का आकार छोटा या बड़ा होता है|
  5. महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना- बीड़ी, सिगरेट, शराब,तंबाकू का सेवन करने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है|रात को ब्रा पहनकर सोने से भी स्तन कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती है|
  6. ब्रा का गलत साइज पहनना– ब्रा के गलत साइज पहनने का मुख्य कारण यह है कि महिलाओं को अपने स्तन की साइज की जानकारी ठीक ढंग से नहीं होती| बहुत सी महिलाओं को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें किस आकार की साइज की ब्रा पहननी चाहिए|
  7. स्तन का आकार बदलते रहना- महिलाओं के स्तन का आकार जीवन की प्रतिदिन गतिविधियों में बदलता रहता है| मासिक धर्म के दौरान स्त्री के सतनों के आकार में परिवर्तन होता रहता है और शादी के दौरान यौन संबंध बनाने से भी स्त्री के स्तन में परिवर्तन होता रहता है और हारमोंस में परिवर्तन आने के कारण सतन का आकार बढ़ता है जब महिला गर्भावस्था में होती है|

उम्र के हिसाब से ब्रेस्ट साइज होना चाहिए(average size as per age)

स्तन के आकार का उनकी संवेदनशीलता से कोई संबंध नहीं है सतन का आकार उनके गुण सूत्रों द्वारा निर्धारित किया जाता है| मांसपेशियों का भी  स्तन पर प्रभाव पड़ने लगता है| महिलाओं के  स्तन का आकार उनके वजन बढ़ने पर भी बढ़ सकता है|महिलाओं के स्तन का आकार शरीर की संरचना उनके जीन पर निर्भर करता है 16 वर्ष या उससे अधिक आयु वाली महिलाओं के स्तन का आकार 30 से 38 तक हो सकता है|

ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. मेथी– मेथी में एस्ट्रोजन नामक हार्मोन पाया जाता है जो स्तन को बड़े करने में हमारी मदद करता है| मेथी के तेल से स्तन की मालिश करने से स्तनों का विकास तेजी से होने लगता है|
  2. सौंफ- सौंफ के बीजों में फ्लेवोनॉयड्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो स्तन का विकास करने में सहायक है| थोड़े से सौंफ पानी में 8 से 10 मिनट तक उबालें और पानी को छानकर उसमें शहद मिलाकर सेवन करने से एस्ट्रोजन का उत्पादन भी बढ़ता है|
  3. विटामिंस- हमें अपने प्रति दिन की आहार में फलों और सब्जियों को शामिल करना चाहिए जिनमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में हो विटामिन ए से कॉलेजन का उत्पादन बढ़ता है जो स्तनो को मजबूत बनाने में सहायक है| विटामिन बी में रक्त का संचार ठीक ढंग से होता है| विटामिन सी यह भी कोलेजन का उत्पादन करता है और हारमोंस को संतुलित रखता है| इन विटामिंस वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से स्तन का विकास तेजी से होने लगता है|
  4. अलसी- अलसी में लिगनेन नामक पोषक तत्व मौजूद होते हैं| अलसी के तेल से सतन की मालिश करने से स्तनो का आकार तेजी से बढ़ने लगता है|
  5. दूध- दूध में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रोन मौजूद होता है जो स्तनो के आकार को बढ़ाने में सहायक है इसलिए प्रतिदिन के आहार में दूध को शामिल करें|
  6. मूली– मूली का सेवन करने से रक्त का प्रवाह तेजी से होता है जिसके कारण स्तनों का आकार बढ़ने लगता है इसलिए प्रतिदिन मूली का सेवन करें|
  7. प्याज- दो चम्मच प्याज के रस में एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण बना लें अब इस मिश्रण को रात को सोने से पहले सतन पर लगा ले और सुबह धोले ऐसा करने से स्तनों के आकार में वृद्धि होती है|
  8. अश्वगंधा -अश्वगंधा के पाउडर को दूध में मिलाकर सेवन करने से स्तनों का आकार बढ़ने लगता है|
  9. सोयाबीन– सोयाबीन में आइसोफ्लेवोन नामक फाइटोएस्ट्रोजन काफी मात्रा में होते हैं| सोयाबीन का सेवन करने से स्तनों का आकार बढ़ने लगता है और यह एस्ट्रोजन को बढ़ाने में भी सहायक है|
  10. शतावरी पाउडर- शतावरी पाउडर का इस्तेमाल करने से हार्मोन संतुलित होता है| आधा गिलास दूध में 2 से 3 ग्राम शतावरी पाउडर का सेवन करने से स्तनों का आकार बढ़ने लगता है|
  11. व्यायाम करना– स्तन के आकार को बढ़ाने के लिए हमें प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए जैसे पुश अप| प्रतिदिन पुश अप करने से सतन का ढीलापन दूर हो जाएगा और आपके स्तन सुडोल और आकर्षण देने वाले बन जाएंगे| स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करने से भी स्तनो का आकार बढ़ने लगता है|

श्वेत प्रदर रोग

श्वेत प्रदर रोग

 श्वेत प्रदर रोग उस रोग को कहते हैं जिसमें स्त्री का मासिक धर्म अधिक समय तक जारी रहता है या योनि  से सफेद लेस दार पदार्थ के रूप में धातु निकलती रहती है|

अत्यंत मैथुन करने, गर्भपात कराने, दिन में बहुत सोने या कृत्रिम विश का योग होने आदि कारणों से स्त्रियों को श्वेत प्रदर रोग उत्पन्न होता है इस प्रदर रोग के अत्यंत बढ़ने पर जलन कमजोरी मोह मद तृष्णा और बहुत से वात रोग हो जाते हैं|

श्वेत प्रदर रोग
श्वेत प्रदर रोग

 श्वेत प्रदर रोग

सभी महिलाएं व्हाइट डिस्चार्ज या वैजाइनल डिस्चार्ज का अनुभव करती हैं|व्हाइट डिस्चार्ज महिलाओं में होने वाली एक समस्या है। व्हाइट डिस्चार्ज को सफेद पानी भी कहते हैं। व्हाइट डिस्चार्ज (सफेद पानी) सामान्य तौर पर महिलाओं को पीरियड्स के पहले या बाद में होता है।श्वेत प्रदर या सफेद पानी का योनी मार्ग से निकलना ल्यूकोरिया कहलाता है। 

श्वेत प्रदर रोग के प्रकार

श्वेत प्रदर रोग के निम्नलिखित चार प्रकार होते हैं

  1. वातज प्रदर
  2. पितज प्रदर
  3. कफज् प्रदर
  4. सन्निपात्ज प्रदर

1.वातज प्रदर-

अगर वात के कारण प्रदर रोग होता है तो रुखा, लाल झाग दार और थोड़ा- थोड़ा खून बहा करता है|

2.पितज प्रदर-

अगर पित्त के कारण से प्रदर रोग होता है तो पीला, नीला ,काला, लाल और गर्म खून बारंबार बहता है इसमें पित की वजह से  जलन आदि समस्याएं उत्पन्न होती है|

3.कफज् प्रदर-

अगर कफ से प्रदर होता है तो कच्चे रस वाला सेमल आदि के गोंद जैसा चिकना और तुच्छ  धन्य के धोवन के समान कौन रहता है|

4.सन्निपात्ज प्रदर-

वात, पित्त, कफ इन तीनों दोषों के कोप से प्रदर रोग होता है तो शहद घी और हड़ताल के रंग वाली मजाऔर शंख की सी गंध वाला खून बहता है|

श्वेत प्रदर रोग होने के कारण

श्वेत प्रदर का रोग कई बार महिला के अधिक मास मच्छी खाने , चाय पीने , शराब का सेवन करने से भी हो जाता है| मासिक धर्म की अनियमित समय पर होने के कारण भी यह रोग हो सकता है बार बार गर्भधारण करने पर भी यह रोग हो सकता है| इसके अलावा योनि के ऊपरी भाग में किसी प्रकार की फोड़े फुंसी रसोली होने के कारण भी यह रोग हो जाता है|

श्वेत प्रदर रोग के लक्षण

श्वेत प्रदर रोग  के होने पर महिलाओं की योनि मार्ग से गाढ़ा सफेद पानी निकलता है यह पानी चिपचिपा ,हल्का लाल और बदबूदार होता है| यह श्वेत प्रदर के रोग का गंभीर मुख्य लक्षण होता है|

इस रोग के होने पर हाथ पैरों में जलन होती है| इससे महिलाओं की सरल शक्ति भी कम हो जाती है और शारीरिक कमजोरी भी होती है| इस रोग के होने पर शरीर में कैल्शियम की कमी आ जाती है और भूख भी कम लगती है योनि में खुजली ,जलन, यूनिकॉर्न की समस्या उत्पन्न होने की संभावना ज्यादा रहती है|

श्वेत प्रदर रोग को रोकने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. केवल भिंडी का सेवन करने से भी श्वेत प्रदर का रोग ठीक हो जाता हैं| इस रोग को ठीक करने के लिए रोजाना सुबह खाली पेट कच्ची भिंडी का सेवन करें| आपको इस रोग से आराम मिलेगा|
  2. कपास की जड़ चावलों के धोवन में घिसकर पीने से भी श्वेत प्रदर नष्ट हो जाता है|
  3. पके हुए केले की फली दूध में कई बार डाल कर लगातार कुछ दिन खाने से योनि से खून गिरना बंद हो जाता है|
  4. केले के पत्ते खूब महीन पीसकर दूध में खीर बनाकर दो-तीन दिन खाने से प्रदर रोग में लाभ मिलता है|
  5. गिलोय भी  प्रदर रोग को नष्ट करता है|
  6. काला नमक ,सफेद जीरा ,मुलेठी और नीलकमल इनको पीस शंकर दही में मिलाए और जरा सा शहद मिलाकर पी ले इससे बादी से हुआ प्रदर रोग नष्ट हो जाता है| नीलकमल ना मिले तो नीलोफर भी ले सकते हैं चारो चीजे डेढ़-डेढ़ माशे दही चार तोले और शहद 8 माशे लेना चाहिए|
  7. अकेली नागकेसर  को चावलों के धोवन के साथ पीसकर और चीनी मिलाकर पीने से प्रदर रोग नष्ट हो जाता है|
  8. आंवला, हरड़ और रसौत का चूर्ण योनि से ज्यादा खून गिरने और सब तरह के प्रदर रोग को दूर करता है|
  9. नीलकमल ,लाल शाली चावल, अजवाइन, गेरू और जवासा इन सबको बराबर बराबर लेकर पीस जानकर शहद में मिलाकर पीने से प्रदर रोग नष्ट हो जाता है|
  10. कमल की जड़ व वबथुए की जड़ को दूध या पानी में पकाकर 3 दिन पीने से प्रदर रोग शांत हो जाता है|
  11. त्रिफला, देवदारु, दूध, खिले, बच, अडूसा और लाजवंती इन का काढ़ा बनाकर शीतल करके फिर शहद मिलाकर पीने से सब तरह के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  12. मुलेठी, त्रिफला, लोध, शहद, मदिरा, नीम की गिलोय ,ऊंट कटारा,सोरठ की मिट्टी इन सब को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से कब का प्रदर रोग में आराम मिलता है|
  13. नागकेसर को पीसकर और माठा या छाछ में मिलाकर 3 दिन पीने से श्वेत प्रदर रोग में आराम मिलता है|
  14. दारू, हल्दी को सिल पर पीसकर लुगदी बना ले फिर इसमें शहद मिलाकर पीने से श्वेत प्रदर रोग में आराम मिलता है|
  15. मकोय की जड़ चावलों के धोवन के साथ पीने से पांडू प्रदर रोग नष्ट हो जाता है|
  16. आवलो के कलक को पानी में मिलाकर ऊपर से शहद और मिश्री डालकर पीने से प्रदर रोग मैं आराम मिलता है|
  17. दो तोले अशोक की छाल, गाय के दूध में पकाकर और मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दोनों समय लगातार कुछ दिन पीने से रक्त प्रदर में आराम मिलता है|

चर्म रोग या त्वचा विकार

चर्म रोग या त्वचा विकार

चर्म रोग या त्वचा विकार जो मानव त्वचा को प्रभावित करते हैं उन्हें कहा जाता है| बच्चों को प्रभावित करने वाले कई रोग त्वचा की परतों में शुरू होते हैं यह विभिन्न प्रकार के आंतरिक रोगों के निदान में मदद करते हैं|

आजकल महिलाओं में एलर्जी की समस्या आम हो गई है पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इस रोग से ज्यादा पीड़ित है स्त्रियों में यह रोग सदा देखने को मिलता है|आइए हम त्वचा से संबंधित समस्याओं के बारे में जानते हैं अगर आपको इन समस्याओं में से कोई त्वचा संबंधी समस्या हो तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह ले|

चर्म रोग या त्वचा विकार
चर्म रोग या त्वचा विकार

चर्म रोग या त्वचा विकार के प्रकार

चर्म रोग या त्वचा विकार की निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

  • दाद
  • खाज- खुजली
  • फोड़ेनिक्ल्ना
  • मुंहासे
  • तिल
  • रूखी त्वचा ,लाल दाने होना
  • सफेद दाग
  • त्वचा का कैंसर
  • मस्से

चर्म रोग या त्वचा विकार के लक्षण

  • सुखी व फटी त्वचा
  • त्वचा का रंग बिगड़ना
  • खुजली वाली लाल दानों का होना
  • त्वचा का खुरदुरा पन
  • त्वचा पर जख्मों का होना
  • मवाद और छाले होना

चर्म रोग या त्वचा विकार होने के कारण

  • खुजली का रोग ज़्यादातर शरीर में खून की खराबी के कारण उत्पन्न होता है।
  • गरम और तीखीं चिज़े खाने पर फुंसी और फोड़े निकल आ सकते हैं।
  • शरीर पर लंबे समय से धूल मिट्टी जमे रहने से भी चरम रोग हो सकता है|
  • महिलाओं में मासिक चक्र अनियमितता की समस्या होने पर उन्हें चर्म रोग या त्वचा विकार होने की संभावना बढ़ती है शरीर पर लंबे समय से धूल मिट्टी जमे रहने से भी चर्मरोग हो सकता है|
  • खाना खाने के तुरंत बाद ही व्यायाम करने से चर्म रोग होने की संभावना बढ़ती है|

चर्म रोग या त्वचा विकार क्यों होते हैं

1.स्किन डिजीज-

  • त्वचा के छिद्रोऔर बालों के रोम में फंसे बैक्टीरिया
  • त्वचा पर रहने वाले कवक परजीवी या सूक्ष्म जीव स्किन डिजीज का मुख्य कारण है
  • किसी अन्य व्यक्ति की संक्रमित त्वचा के साथ संपर्क में आना इस रोग का मुख्य कारण है
  • थायराइड प्रतिरक्षा प्रणाली गुर्दे और अन्य शरीर प्रणालियों को प्रभावित करने वाले बीमारियों से पीड़ित होना

2.त्वचा के संक्रमण या स्किन इंफेक्शन-

  • वायरस से हुआ त्वचा का संक्रमण- वायरस तीन प्र्कार के होते है पोक्स वायरस,ह्यूमन पैपीलोमा वायरस और हर्पीस वायरस
  • परजीवी त्वचा संक्रमण- त्वचा के नीचे छोटे जीव जो वही अंडे देते हैं त्वचा संक्रमण का कारण बन सकते हैं
  • फंगल संक्रमण-फंगल संक्रमण स्किन इन्फेक्शन का मुख्य कारण है

चर्म रोग या त्वचा विकार में आयुर्वेदिक व घरेलू उपचार

  1. सरसो क तेल –सरसों के तेल में लहसुन की कुछ कलीयों को डाल कर उसे हल्का सा गर्म करके उसे त्वचा पर लगाया जाए तो खुजली और खाज की समस्या दूर हो जाती है।सूखी चमड़ी की शिकायत रहती हों तो सरसों के तैल में हल्दी मिश्रित कर के उससे त्वचा पर हल्की मालिश करने से त्वचा का सूखापन दूर हो जाता है।
  2. अजवायन का प्रयोग- अजवायन को पानी में उबाल कर जख्म धोने से उसमे आराम मिल जाता है।
  3. पोदीने काप्रयोग- पिसा हुआ पोदीना लेप बना कर चहेरे पर लगाया जाए और फिर थोड़ी देर के बाद चहेरे को ठंडे पानी से धो लिया जाए तो चहेरे की गरमी दूर हो जाती है, तथा स्किन चमकदार बनती है।
  4. मूली का प्रयोग-मूली में मेग्नेशियम की मात्रा भी मौजूद होती है, यह तत्व पाचन क्रिया नियमन में सहायक होता है। जब पेट साफ होगा तो चमड़ी के रोग होने की नौबत ही नहीं होगी। मूली खाने से चहरे पर हुए दाग, धब्बे, झाईयां, और मुहासे ठीक हो जाते हैं।
  5. लह्सुन का प्रयोग-जहां भी फोड़े और फुंसी हुए हों, वहाँ पर लहसुन का रस लगाने से फौरन आराम मिल जाता है।
  6. करेले का प्रयोग-दाद, खाज और खुजली जैसे रोग, दूर करने के लिए त्वचा पर करेले का रस लगाना चाहिए।
  7. गाजर का रस- यह संक्रमण दूर करने वाला और किटाणु नाशक होता है, गाजर खून को भी साफ करता है, इस लिए रोज़ गाजर खाने वाले व्यक्ति को फोड़े फुंसी, मुहासे और अन्य चर्म रोग नहीं होते हैं।पालक और गाजर का रस समान मात्रा में मिला कर उसमें दो चम्मच शहद  मिला कर पीने से, सभी प्रकार के चर्म रोग या त्वचा विकार नाश होते हैं।
  8. अफीम –अफीम को तिल के तेल में जलाकर मलने से खुजली  नष्ट हो जाती है|
  9. चमेली का तेल- छटक भर चमेली के तेल में एक तोला कपूर मिलाकर मालिश करने से सूखी खुजली नष्ट हो जाती है|
  10. सह्ज्ने-सह्ज्ने की जड़ कड़वे तेल में डालकर आग पर जलाए और तेल को छानकर मले इससे खुजली नष्ट हो जाती है|
  11. नीम-नीम की पत्तियां दही में पीसकर लगाने से दाद नष्ट हो जाता है|
  12. पवार –पवार के बीज पानी में भिगो दे जब वह सड़ जाए सील पर पीसकर दाद या गिली सुखी खुजली पर लगाएं और गर्म जल से नहाए इससे दाद और खुजली नष्ट हो जाते हैं|
  13. कलौंजी को सिरके में पीसकर मलने से दाद नष्ट हो जाते हैं|

मधुमेह

मधुमेह

मधुमेह को धीमी मौत भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के शरीर को पकड़ ले तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं। इस बीमारी का जो सबसे बुरा पक्ष है वह यह है कि यह शरीर में अन्य कई बीमारियों को भी निमंत्रण देती है। मधुमेह रोगियों को आंखों में दिक्कत, किडनी और लीवर की बीमारी और पैरों में दिक्कत होना आम है। पहले यह बीमारी चालीस की उम्र के बाद ही होती थी लेकिन आजकल बच्चों में भी इसका मिलना चिंता का एक बड़ा कारण हो गया है। 

यह रोग महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक होता है।शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने से हार्मोनल बदलाव होता है और कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं जिससे खून की नलिकाएं और नसें दोनों प्रभावित होती हैं। इससे धमनी में रुकावट आ सकती है या हार्ट अटैक हो सकता है। स्ट्रोक का खतरा भी मधुमेह रोगी को बढ़ जाता है। डायबिटीज का लंबे समय तक इलाज न करने पर यह आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे व्यक्ति हमेशा केलिए अंधा भी हो सकता है।

मधुमेह
मधुमेह

मधुमेह के लक्षण

  • ज्यादा प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब का आना
  • आँखों की रौशनी कम होना
  • कोई भी चोट या जख्म देरी से भरना
  • हाथों, पैरों और गुप्तांगों पर खुजली वाले जख्म
  • बार-बार फोड़े-फुंसियां निकलना
  • चक्कर आना
  • इंसुलिन बनना बंद होने से शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण सिर दर्द होने लगता है
  • मधुमेह में महिलाओं को कई बार कम दिखने लगता है और कभी घुंधला दिखाई पड़ता है।

मधुमेह होने के कारण

मधुमेह के कारण जेनेटिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधी और पर्यावरणीय कारकों के आधार पर अलग-अलग होते हैं। शुगर का कोई निश्चित कारण नहीं है। हर व्यक्ति के लिए इसके प्रकार और कारण भिन्न होते हैं।

इंसुलिन प्रतिरोध: शुगर आम तौर पर इंसुलिन प्रतिरोध से शुरू होता है। ये ऐसी स्थिति होती है जिसमें मांसपेशियों, यकृत और वसा कोशिकाओं में इंसुलिनअच्छी तरह से प्रयोग नहीं हो पाता है।

मधुमेह से बचाव के यह कुछ उपाय

  1. दिन में तीन समय खाने की बजाय उतने ही खाने को छह या सात बार में खाएं। 
  2. गेहूं और जौ 2-2 किलो की मात्रा में लेकर एक किलो चने के साथ पिसवा लें। इस आटे की बनी चपातियां ही भोजन में खाएं।
  3. मधुमेह रोगियों को अपने भोजन में करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, ब्रौकोली, टमाटर, बंद गोभी और पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।
  4. मेथी दाना रात को भिगो दें और सुबह प्रतिदिन खाली पेट उसे खाना चाहिए।
  5. फलों में जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, खरबूजा, कच्चा अमरूद, संतरा, मौसमी, जायफल, नाशपाती को शामिल करें। आम, केला, सेब, खजूर तथा अंगूर नहींखाना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर ज्यादा होता है
  6. कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। भोजन में मीठे को बिलकुल खत्म कर दें। सब्जियां, ताज़े फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पादों और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपनेभोजन में शामिल कीजिये।
  7. अपने ग्लूकोज स्तर को जांचें और भोजन से पहले यह 100 और भोजन के बाद 125 सेज्यादा है तो सतर्क हो जाएं। हर तीन महीने पर HbA1c टेस्ट कराते रहें ताकिआपके शरीर में शुगर के वास्तविक स्तर का पता चलता रहे। उसी के अनुरूप आप डॉक्टर से परामर्श कर दवाइयां लें|

मधुमेह के लिए योगासन

  1. कपालभात‍ि :  अगर मधुमेह रोगी कपालभाति को नियमित रूप से करता है तो उसे काफी लाभ होता है। इसको करने के लिये जमीन पर सीधे बैठ जाएं और नाक से सांस को तेजी से बाहर की ओर छोड़ें। यह करते समय पेट को भी अंदर की ओर संकुचित करें। फिर तुरंत ही नाक से सांस को अंदर खींचे और पेट को बाहर निकालें। इस क्रिया को रोजाना 40 से 400बार करें।
  2. अनुलोम-विलोम प्राणायाम : इसे करने के लिये जमीन पर आराम से बैठ जाएं।दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छेद को बंद कर लें और नाक के बाएं छेदसे 4 तक की गिनती में सांस को भरे और फिर बायीं नाक को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। तत्पश्चात दाएं नाक से अंगूठे को हटा दें औरदाएं नाक से सांस को बाहर निकालें। अब दाएं नाक से ही सांस को 4 की गिनती तक भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नाक खोलकर सांस को 8 की गिनती मेंबाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक कर सकते है।