माइग्रेन

माइग्रेन

माइग्रेन की समस्या इन दिनों काफी आम हो चुकी है।इसकी सबसे बड़ी वजह है अनियमित दिनचर्या, खान-पान की गलत आदतें व तनावलेना।माइग्रेन में सिरदर्द की समस्या सबसे ज्यादा होती है। माइग्रेन के शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है।इसमें असहनीय दर्द होता है।माइग्रेनका दर्द 2 घंटे से लेकर कई दिनों तक बना रहता है।माइग्रेन के कारण दिमाग का खून का संचार तेजी से होने लगता है। जो कि सिरदर्द का कारण बनता है।सिर के दाएं तो कभी बाएं हिस्से में अचानक उठने वाला दर्द को माइग्रेन कहा जाता है।पुरुषों की बजाए महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है।महिलाओं में दर्द की तीव्रता भी अधिक होती है। माइग्रेन का उपचार दर्द की तीव्रता पर भी निर्भर करता है।

आम बोलचाल की भाषा में इसे अर्द्धकपाली भी कहा जाता है।यह प्राय: शाम के समय शुरू होता है।  इसमें दर्द 2 से 72 घंटेतक हो सकता है। लोग समझते हैं कि माइग्रेन सिर्फ सिर के आधे हिस्से में तहोता है, लेकिन ऐसा नहीं है।माइग्रेन आधे, पूरे या सिर के किसी भी भाग में हो सकता है।आइये जानते है माइग्रेन होने पर क्या क्या लक्षण नज़र आते है|

माइग्रेन
माइग्रेन

माइग्रेन के प्रकार

माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं

  1. कॉमन माइग्रेन-कॉमन माइग्रेन में सिर के एक हिस्से में हल्का या बहुत तेज दर्द शुरू होकर पूरे सिर में फैल जाता है। यह दर्द 4 से 72 घंटे तक रह सकता है।
  2. औरा माइग्रेन- इसमे दर्द कॉमन माइग्रेन की तरह ही होता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति को चेतावनी के लक्षण पहले से दिखने लगते हैं। ऑरा यानी चमक कौंधना , काले धब्बे दिखना, चीजें घूमती हुई नजर आना, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट, बोलने के समय कठिनाई महसूस करना जैसा प्रतीत होगा। 

माइग्रेन होने के लक्षण

  • माइग्रेन एक प्रकार का दीर्घकालिक सिरदर्द है, जिसमें कई घंटों या कई दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। इस दौरान सिरदर्द , जी मिचलाने, उल्टी, कानों काबजना, सुनने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • माइग्रेन एक प्रकार का दीर्घकालिक सिरदर्द है, जिसमें कई घंटों या कई दिनों तक तेज दर्द रह सकता है। इस दौरान सिरदर्द , जी मिचलाने, उल्टी, कानों का बजना, सुनने में तकलीफ जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • नींद अच्छे से न आना।
  • माइग्रेन होने से पहले खाने का अधिक मन होना।
  • बार-बार पेशाब आना।
  • माइग्रेन होने पर जी मचलने लगता है, शरीर असहज महसूस करने लगता है।
  • सिर में भारी पन होने लगता है ।
  • सिर के पीछे की भाग जो गर्दन से सटा होता है उसमे दर्द महसूस करना।
  • तेज रोशनी से आंख में जोर पड़ना ।
  • ज्यादा आवाज या शोर होने पर चिड़चिड़ापन महसूस करना।
  • हर वक्त तनाव में रहना। 
  • माइग्रेन के कारण आंखों में भी तकलीफ रहती है।

माइग्रेन होने के कारण

  1. तनाव-ध्यान करने से तनाव कम होता है हमें प्रतिदिन 20 से 40 मिनट तक ध्यान करना चाहिए|
  2. मन और शरीर की थकावट-ध्यान करने से मन और शरीर की थकावट भी दूर होती है यह आपको पूरी तरह विश्राम देता है|
  3. नींद का पूरा नहीं होना-प्रतिदिन ध्यान करने से आपकी नींद की गुणवत्ता बढ़ती है लंबे समय तक काम करना और अत्यधिक काम करने की आदत आदि सभी बहाने है रात को देर से सोने के|
  4. फोन पर ज्यादा देर बात करना-यह भी सिर दर्द का मुख्य कारण है जब भी आपको चक्कर आने लगे तो थोड़ी देर ध्यान कर लेना चाहिए इससे आपका तनाव दूर होगा|
  5. जरूरत से ज्यादा सोचना-टेंशन होना भी सिर दर्द का मुख्य कारण है हमें जरूरत से ज्यादा सोचना बंद कर देना चाहिए|

माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए उपचार

  1. प्रोटीन युक्त आहार-माइग्रेन से बचने के लिए प्रोटीन युक्त आहार ले इसके अलावा हरी सब्जियों को रोजाना सेवन करें|
  2. अच्छी नींद-कम से कम 8 घंटे सोना जरूरी है|
  3. योग करना-माइग्रेन होने पर योग पर ध्यान दें इससे तनाव कम होगा|प्रोटीन युक्त युक्त आहार जैसे-दूध,दही,पनीर,दाल इत्यादि का सेवन करें|
  4. शांति बनाए रखना-दिमाग को शांत बनाए रखना बेहद जरूरी है इससे आपके मस्तिष्क को आराम मिलता है और दर्द भी भी छुटकारा मिलता है|
  5. तुलसी का रस-तुलसी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर खाने के पहले या खाने का बाद सेवन करने से माइग्रेन में काफी लाभ होगा।

माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय

  • रोज 10 से 12 बादाम खाएं। यह माइग्रेन का बढिया उपचार है।
  • रोज सुबह-शाम एक गिलास अंगूर का रस पीयें। यह काफी कारगार उपाय है।
  • बंदगोभी को पीसकर इस पेस्ट को एक सूती कपडे में ठीक ढंग से बिछाकर माथे में बांधें। और जब पेस्ट सूखने लगे तो नया पेस्ट बनाकर पट्टी बांधें। इससे आपको सर दर्द से काफी फायदा मिलेगा।
  • माथे में नींबू के छिलके का पेस्ट बना कर बांधें काफी आराम मिलेगा।
  • गाय का शुद्ध ताजा घी सुबह-शाम दो-चार बूंद नाक में रुई से टपकाने से माइग्रेन से काफी राहत मिलेगी।
  • गाजर का रस और पालक के रस को मिलाकर पीए। इससे आपको फायदा मिलेगा।

मासिक धर्म

मासिक धर्म

मासिक धर्म मे स्त्रियों में योनि मार्ग से रक्त स्त्राव होने लगता है|स्त्रियां जब योन अवस्था में प्रवेश करने लगती है तब पहली बार मासिक धर्म शुरू होता है यह स्त्राव योनि मार्ग से महीने में एक बार एक निश्चित अवधि में होता है जो प्राय 3 से 4 दिन तक रहता है कई स्त्रियों में यह 6 या 7 दिन तक भी रहता है|

मासिक धर्म
मासिक धर्म

मासिक धर्म का समय

किसी स्त्री को प्रथम मासिक धर्म के बाद दूसरा मासिक धर्म 24 दिन तो किसी को 28 दिन में होता है| उस स्थिति को ऋतु चक्र के अनुसार नियत समय पर होना जरूरी है इस क्रिया से स्त्रियों का गर्भाशय एवं प्रजनन संस्थान शुद्ध स्वच्छ और स्वस्थ होकर गर्भाधान के लिए उपयुक्त क्षेत्र बने रहते हैं और स्त्रियों का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है|

जब गर्भाशय या प्रजनन संस्थान किसी कारण से रोग से ग्रस्त हो जाते हैं तो ऋतु चक्र बिगड़ जाता है और उन्हें अनेक प्रकार की मानसिक और शारीरिक तौर पर कष्ट पहुंचने लगता है जैसे-मासिक धर्म का अनियमित आना, मासिक धर्म का कष्ट से आना|

  1. अनियमित मासिक धर्म
  2. मासिक धर्म का कष्ट से आना
  1. अनियमित मासिक धर्म-स्त्रियों को मासिक धर्म 28 दिन के बाद हुआ करता है लेकिन कई औरतों में 24 दिन के बाद हो जाता है और कईयों को 32 दिन के बाद हो जाता है अगर मासिक धर्म 28 या 32 दिन के बाद आए तो वह नियम अनुसार नहीं है|मासिक धर्म को समय पर लाने के लिए डोडा कपास का गुड्डा , 28 ग्राम गुदा अमलताश , 30 ग्राम सौंफ , तुखम , गाजर , सोया , गुलाब , फशा , 1010 ग्राम पुराना गुड , 30 ग्राम से 240 ग्राम पानी में आंच पर पकाएं जब पानी एक पाव रह जाए तो छानकर पिलाएं माहवारी खुलकर आएगी गर्भवती स्त्री को ने पिलाएं वरना गर्भ गिर जाएगा|
  2. मासिक धर्म का कष्ट से आना-इस रोग में औरतों के मासिक धर्म के आरंभ होने से 1 दिन या 1 सप्ताह पहले ही पेट में दर्द शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे सिर दर्द , सिर चकराना और बेचैनी बढ़ जाती है|इस रोग में जंगली अखरोट की मिंगी आवश्यकता के अनुसार लेकर बारीक पीस लें और उसमें पुराना गुड़ मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना ले गुड अधिक पुराना नहीं हो यदि पीड़ा अधिक हो तो दो गोली नहीं तो एक गोली गर्म दूध के साथ खिलाएं|

मासिक धर्म के लक्षण यानी पूर्व चिन्ह

  1. जब स्त्री को मासिक स्त्राव होने लगता है तो उसके पेट में भारीपन , कमर में दर्द , बेचैनी और थकावट और सोच की बार बार इच्छा होती है इनमें से कुछ भी लक्षण दिखाई दे तो यह समझ जाना चाहिए कि मासिक धर्म होने को है|
  2. शुद्ध राज यानि खुन जब कपड़े पर लगा हुआ दाग धोने से छूट जाए और मासिक स्त्राव आने पर दर्द का अनुभव न हो और खून का रंग लाख के समान हो और दुर्गंध से रहित हो तो वह राज शुद्ध कहलाता है|
  3. जब मासिक स्त्राव में खून का रंग काला , पीला आदि अनेक रंगो का हो और कम या अधिक मात्रा में जल्दी या देर से हो या रुक रुक कर आए और रक्त स्त्राव के समय जलन व खुजली का अनुभव हो तो समझ जाना चाहिए कि वह अशुद्ध रक्त है|

मासिक धर्म में दर्द

  1. कम नींद लेना भी पीरियड में दर्द का मुख्य कारण बन सकता है अगर कम हो रही है तो आपका शरीर सिस्टम बिगड़ सकता है|
  2. एल्कोहल यानी शराब ने सिर्फ आपके शरीर में पानी की कमी कर देता है बल्कि इसका सेवन करने से मैग्नीशियम का सत्र भी कम हो जाता है मैग्नीशियम की कमी से मासिक धर्म में दर्द का सादा अनुभव होता है|
  3. कैफ़ीन ड्रिंक्स, कैफिन ड्रिंक्स मतलब कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए|कॉफी का सेवन करने से महिलाओं को मासिक धर्म में दर्द का अनुभव ज्यादा होता है|
  4. धूम्रपान करना भी मासिक धर्म के दिनों में दर्द होने का मुख्य कारण है|

मासिक धर्म न होने के कारण

  1. प्रकृति के नियम के अनुसार 40 से 50 वर्ष की आयु में हमेशा के लिए मासिक धर्म का होना बंद हो जाता है और शरीर में खून का दौरा भी कम हो जाता है|गर्भाश्य से न होने के कारण भग का मुंह बंद होने से भग का मुंह अत्यंत कम होने से और योनि छिद्र् न होने से मासिक धर्म नहीं होता परन्तु इनमें से योनि छिद्र काटकर रक्त स्त्राव जारी किया जा सकता है|
  2. खून में कमी होने से, स्त्रियों में सोम रोग हो जाने पर या छोटी या उम्र में विवाह करने से और मासिक धर्म के दिनों में स्नान करने से या अन्य रोग के कारण क्षण हो जाने पर मासिक धर्म नहीं होता|
  3. भोजन ठीक प्रकार से हजम ना होने से शारीरिक कमजोरी होने के कारण या दिन में सोने और रात को जागने के कारण और गर्म वस्तुओं के सेवन करने से मासिक धर्म में रुकावट आ जाती है|गर्भवती हो जाने के बाद भी मासिक धर्म नहीं होता और बच्चे को दूध पिलाते रहने की अवस्था में भी मासिक धर्म नहीं होता|

मासिक धर्म लाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. जिन स्त्रियों को शरीर की कमजोरी और रक्त की कमी के कारण मासिक धर्म नहीं होता उन्हें खून बढ़ाने में कमजोरी को दूर करने वाले पदार्थों का सेवन करना चाहिए|
  2. यदि किसी रोग के कारण मासिक धर्म रुका हो तो उस रोग की चिकित्सा करने के बाद ही मासिक जारी करने के उपाय करने चाहिए|
  3. एक तोला काले तिलों को आधा सेर पानी के साथ कलईदार बर्तन में पकाएं छटा हिस्सा 6 शेष रह जाने पर एक तोला पुराना गुड़ मिलाकर मासिक धर्म होने से 5 दिन पहले सुबह पीना चाहिए मासिक धर्म आना शुरू हो जाएगा|
  4. श्वेत वलाल चंदन का काढा बनाकर पीने से दुर्गंध वाला मासिक भी ठीक हो जाता है|
  5. गाजर का हलवा का सेवन करने से मासिक धर्म समय पर आ जाता है|
  6. काली जीरी , सौठ् ,एलुआ , अंडी की मिंगी प्रत्येक दिन 3 मासी लेकर पीस लें  और गर्म करके योनि में चार-पांच दिन लगाएं इसे तुरंत ही लाभ होगा|
  7. 1 सप्ताह तक कलौंजी , मजीठ , मूर इनको पीसकर सेवन करें और ऊपर से गुनगुना दूध पिए मासिक धर्म होने में लाभ मिलेगा|
  8. अजवाइन, पुदीना ,इलायची और सौंफ इन चारों को अर्क समान मात्रा में लेकर एक छटांक की मात्रा से मासिक के समय पीने से मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाएगी|
  9. कमर तक गुनगुने पानी में बैठे और पेट पर सेक करने के बाद तारपीन के तेल की मालिश करें इससे मासिक धर्म की समस्या दूर हो जाएगी|

अति आर्तव की चिकित्सा

  1. नागकेसर , कमल केसर, पीपल की लाख दो दो माशी और मिश्री 6 माह से सब को मिलाकर फाकने से अति आतंक की समस्या दूर हो जाती है पीली मिट्टी की पट्टी पेट पर रखने से रक्त स्त्राव बंद हो जाता है|
  2. अशोकारिष्ट पीने से लाभ होता है|
  3. मासिक धर्म में अधिक रक्त आने के समय स्त्रियों का सिराना नीचा रखना चाहिए और चारपाई के पाइ का भाग ऊंचा रखना चाहिए|
  4. अफीम एक माशा कपूर 6 रत्ती दोनों जलसे खरल करके मूंग के बराबर गोली बना ले और  गर्म पानी के साथ ले|

ट्यूबरकुलोसिस

ट्यूबरकुलोसिस

ट्यूबरकुलोसिस (क्षय रोग, तपेदिक या टीबी )यह रोग महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक होता है|ट्यूबरकुलोसिस हवा में फैलने वाले बैक्टीरिया से होता है| तंबाकू ,बीड़ी ,सिगरेट, शराब ,धूम्रपान का सेवन करने से पुरुषों को टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है| ट्यूबरकुलोसिस एक खतरनाक बीमारी है अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह मृत्यु का कारण भी बन सकती है|

ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। यह अनुवांशिक स्थिति हो सकती है यानी हर के किसी भी व्यक्ति को यह रोग होने पर दूसरे व्यक्ति को यही रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है|

टीबी
टीबी

ट्यूबरकुलोसिस के लक्षण

  1. सांस लेने में कठिनाई-टीबी होने पर व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है इसे व्यक्ति की सांसे फूलने लगती है और शरीर की हड्डियों मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम में समस्याएं उत्पन्न हो जाती है|
  2. भूख न लगना-यह रोग होने पर व्यक्ति को भूख कम लगती है व्यक्ति खाने पीने में रुचि नहीं रखता|
  3. वजन घटना– क्षय रोग होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से घटने लगता है|
  4. बुखार- बुखार टीबी का मुख्य टीवी के रोगी को हमेशा बुखार रहता है लक्षण है अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह व्यक्ति की जान भी ले सकता है|
  5. थकावट– क्षय रोग होने पर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और व्यक्ति को थकान का अनुभव होता है|
  6. खांसीट्यूबरकुलोसिस रोग होने पर व्यक्ति को लगातार खांसी आती है कई बार खांसी के साथ खून भी आने लगता है|

ट्यूबरकुलोसिस होने के कारण

  • प्रतिरोधक क्षमता कम होने से– शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने से होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • अनुवांशिकता-यह अनुवांशिक स्थिति हो सकती है यानी हर के किसी भी व्यक्ति को यह रोग होने पर दूसरे व्यक्ति को यही रोग फैलने की संभावना बढ़ जाती है|
  • नशीली दवाओं से-नशीली दवाओं का सेवन करने से यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • रोगी के संपर्क से- किसी भी से रोगी के संपर्क में आने से यह रोग फैलता है |
  • खान-पान और रहन-सहन से: जिन व्यक्तियों के खानपान और अनशन का तरीका सही नहीं होता उन्हें यह रोग होने की संभावना ज्यादा होती है|
  • बैक्टीरिया द्वाराट्यूबरकुलोसिस माइकोबैक्टेरियम बैक्टीरिया के कारण होता है यह  बैक्टीरिया जोड़ों , मेरुदंड , हड्डियों आदि पर प्रभाव डालता है
  • कुपोषण द्वारा– वजन कम होने से टीवी के बैक्टीरिया शरीर पर बुरे प्रभाव डालते हैं|
  • धूम्रपान करना बीड़ी सिगरेट शराब तंबाकू का सेवन करने से ट्यूबरकुलोसिस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

ट्यूबरकुलोसिस को खत्म करने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. लहसुन– इस में सल्फ्यूरिक एसिड पाया जाता है यह टीबी के कीटाणुओं को नष्ट करने में हमारी सहायता करता है| एक चम्मच मैसूर एक कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालें जब यह पेस्ट एक चौथाई रह जाए तो इसका दिन में तीन बार सेवन करने से टीवी के रोग से राहत मिलती है|
  2. आंवला– कच्चे आंवले को पीसकर और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करने से टीबी के रोग से राहत मिलती है
  3. काली मिर्च– काली मिर्च का सेवन करने से फेफड़ों में हुई खांसी दूर हो जाती है थोड़े से मक्खन में 4 से 5 काली मिर्च फ्राई करें और उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर इस का मिश्रण बना लें इस मिश्रण का प्रतिदिन सेवन करें|
  4. अखरोट– अखरोट का सेवन करने से हमें इस रोग से आराम मिलता है अखरोट को पीसकर पाउडर बना लें इसमें कुछ लहसुन की कलिओ का पेस्ट और मक्खन मिलाकर खाए|
  5. केला-1 पके हुए केले को मसलकर नारियल पानी में मिलाकर इस्मे शहद और दही मिलाएं। इसे दिन में दोसे तीन बार खाने से रोगी को फायदा होता है। इसके अलावा कच्चे केले का जूस बनाकर भी रोजाना पीना भी लाभ्दाय्क है|
  6. संतरा-इसके लिए ताजा संतरे के जूस में नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करेया संतरा खाने से भी टीबी के रोगी को फायदा होता है।
अखरोट
अखरोट

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या ‘पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर’ यानि P COD/P COS ” इसमें महिला के गर्भाशय में मेल हार्मोन एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है परिणामस्वरूप ओवरी में सिस्ट्स बनने लगते यह समस्या महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मोटापा या तनाव के कारण उत्पन्न होती हैं। साथ ही यह जैनेटिकली भी होती है। शरीर में अधिक चर्बी होने की वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है,जिससे ओवरी में सिस्ट बनता है। वर्तमान में देखें तो हर दस में से एक प्रसव उम्र की महिला इसका शिकार हो रही हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जो महिलाएं तनाव भरा जीवन व्यतीत करती हैं उनमें पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है।

शरीर में कुछ असामान्यता जैसे -जलन ,सूजन  महसूस हो, तो यह हार्मोन के असंतुलन के कारण भी हो सकता है। अलग-अलग मानसिक परिस्थि‍तियों से गुजरने पर शरीर के आंतरिक अंगों में संबंधि‍त हार्मोन का सक्रिय होना सामान्य बात है। साथ ही महिलाओं में प्रेग्नेंसी, मासिक धर्मऔर मेनोपॉज के समय भी हार्मोन का स्त्राव और बदलाव होता है। लेकिन कभी-कभी  स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षण

  1. महिलाओं में मासिक धर्म की समयावधि‍ में परिवर्तन हार्मोन्स के कारण होता है। सामान्यत: 24 से 28 दिन के अंदर शुरू होने वाला मासिक धर्मसमय पर नहीं हो रहा हो, तो यह एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन्स की अधि‍कता या कमी के कारण हो सकता है। यह पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के मुख्य लक्षण है
  2. पर्याप्त नींद नहीं ले पाना भी हार्मोन असंतुलन का लक्षण है ओवरी से स्त्रावित होने वाला हार्मोन प्रोजेस्टेरॉन आपको नींद लेने के लिए प्रेरित करता है। 
  3. महिलाओं में मासिक धर्म के समय चेहरे पर मुहांसों की समस्या होना सामान्य है अगर मुंहासे या पिंपल्स हटने का नाम ले ले तो यह हार्मोन में असंतुलन हो सकता है
  4. हार्मोन असंतुलन के कारण थकान का अनुभव भी हो सकता है
  5. एस्ट्रोजन की सतह में कमी आने के कारण व्यक्ति अपने स्वभाव में चिड़चिड़ापन महसूस करता है साथ ही आपका वजन तेजी से बढ़ सकता है यह हार्मोन असंतुलन का मुख्य लक्षण है
  6. स्ट्रेस के कारण जो हार्मोंस में बदलाव होता है, उससे कई समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें से पाचन से जुड़ी समस्या भी एक है. गैस, बदहज़मी या कब्ज़ की समस्या हार्मोंस में बदलाव का संकेत भी हो सकती है. 
  7. अचानक रात को तेज़ गर्मी व पसीना आने का मतलब है हार्मोंस में परिवर्तन हो रहा है. यह ख़ासतौर से मेनोपॉज़ के समय होता है, जब हार्मोंस काफ़ी तेज़ी से बदलते हैं|

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण

  • अनुवांशिकता– हारमोंस में असंतुलन इस बीमारी का मुख्य कारण है लेकिन अगर  आपकी मां को यह समस्या रही है तो संभावना है कि आप इस रोग की चपेट में आ सकते हैं|
  • पुरुष हार्मोन -पीसीओएस की स्थिति में पुरुष हार्मोन का अत्यधिक मात्रा में उत्पादन होता है, जिस कारण ओव्यूलेशन प्रक्रिया के दौरान अंडाणु बाहर नहीं निकल पाते हैं। इस स्थिति को हाइपरएंड्रोजनिसम कहा जाता है |
  • इंसुलिन– इंसुलिन इस बीमारी का मुख्य कारण है शरीर में मौजूद इंसुलिन हार्मोन, शुगर, स्टार्च व भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करता है। जब इंसुलिन असंतुलित हो जाता है, तो एंड्रोजन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है और ओव्यूलेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है। परिणामस्वरूप महिलाओं को पीसीओएस का सामना करना पड़ता है |

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिएआयुर्वेदिकनुस्खे

  1. अदरक , लहसुन , काली मिर्च , जीरा , कड़ी पत्ता आदि में हार्मोन को संतुलित रखने के गुण होते हैं इन सभी को प्रतिदिन डाइट में शामिल करना चाहिए|
  2. हल्दी हारमोंस को संतुलित रखने में मददगार साबित हुई है|
  3. दही शरीर में बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखता है और हारमोंस को भी संतुलित रखता है इम्यूनिटी सिस्टम को भी बढ़ाता है|
  4. पानी को अत्यधिक मात्रा में पीना चाहिए क्योंकि हाइड्रेशन के कारण हार्मोन का निर्माण अत्यधिक होने लगता है|
  5. बादाम में प्रोटीन फाइबर और कई तरह के पोषक तत्व होते हैं बादाम का सेवन करना चाहिए|
  6. अखरोट में मेलाटोनिन होता है यह एक तरह का हार्मोन होता है जो पर्याप्त मात्रा में नींद में सहायक होता है|
  7. ग्रीन टी हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को बेहतर करके फैट्स भी बर्न करती है|
  8. फूल गोभी और पत्ता गोभी सब्जियों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा होती है जो टॉक्सिन को कंट्रोल करके हारमोंस में संतुलन बनाए रखते हैं|
हल्दी
हल्दी

उदर रोग

उदर रोग

 उदर रोग का तात्पर्य संबंधित रोगों की है यह रोग कब्जियत यानी मंदाग्नि से पैदा होता है इसके अनेक रूप होते है अफारा , कमजोरी अग्नि का मंदा पन सूजन अंगों में गिलानी ,मल का रुकना  , जलन होना|

उदर रोग के लक्षण

बच्चों और वयस्कों में उदर रोग के लक्षण अलग-अलग होते हैं वयस्कों के लिए सबसे आम संकेत है जैसे-

  • इस रोग में व्यक्ति को थकान का अनुभव होता है|
  • इस रोग में व्यक्ति का वजन घट जाता है|
  • इस रोग में व्यक्ति के पेट में गैस यानी कब्ज और व्यक्ति को उल्टी का भी अनुभव हो सकता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को दस्त लग जाते हैं|
  • इस रोग में व्यक्ति का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को पेशाब और सीने में जलन का एहसास होता है |

उदर रोग के कारण

  1.   मूत्राघात-: अत्यंत तीव्रता से गमन धूप में चलना , मल मूत्र के वेग को रोकना , अधिक शर्म दूषित योनि वाली स्त्रियों के सहवास खट्टी वस्तुओं का सेवन और चोट लगने से स्त्री पुरुषों की मूत्र इंद्री में जख्म और वीर्य क्षीण होने लगता है इसी को मूत्रघात कहते हैं|

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • शराब में काला नमक मिलाकर पीने से मूत्रघातरोग आराम हो जाता है
  • गोखरू , अरंडी , कीचड़ और शतावर को दूध में औटा कर पीने से आराम हो जाते हैं |
  • गुड , घी और दूध इनको मिलाकर पीने से  पेशाब के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं|
  • सफेद चंदन को चावलों के जल में घिसकर और मिश्री मिलाकर पीने और औटाये  हुए दूध को शीतल करके उसके साथ भोजन करने से खून समेत उषण वात रोग नष्ट हो जाता है|
  • लोहे की भसम महीन पीसकर और शहद में मिलाकर 3 दिन खाने से इस रोग में आराम मिलता है|
  • मिश्री पीसकर दही के तोड़ के साथ खाने से सब तरह के मूत्र कृचछरोग आराम हो जाते हैं|
  • आमलोके छह मासे चूर्ण में गुड मिलाकर खाने से सब तरह के रोग नष्ट हो जाते हैं|

2.प्लीहा रोग-प्लीहा  पीलली को कहते हैं रुधिर एवं कफ के दूषित हो जाने से मलेरिया आदि जबर से अत्यधिक कुनैन सेवन से या जबर में खाने से इसकी वृद्धि होती है |

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • यदि तिल्ली में दर्द अत्यधिक हो तो दर्द का नाश करने का उपाय करना चाहिए जैसे गर्म जल से सेक करे|
  • प्लीहा चिकित्सा में रोगी का पेट साफ करना आवश्यक होता है इसका पहले उपाय करना चाहिए नई तिल्लीवाले को दस्तावर दवा दे सकते हैं पर पुरानीतिल्लीमें द्स्तावरदवा या जुलाब देना हानिकारक होता है|
  • मूली के बीज पीसकर सिरके में मिलाकर खाने से तिल्ली गल जाती है|
  • लड़के का तीन चुल्लू पेशाब सवेरे नित्य कुछ दिन तक पीने से रोग नष्ट हो जाता है|
  • झाऊ की पत्तियां लाकर सुखा ले और पीस छान ले फिर बराबर की शक्कर मिलाकर रख दे इनमें से 4 माशे दवा नित्य खाने से तिल्ली आराम हो जाती है|
  • ऊंटनी का दूध और पेशाब पीने से तिल्ली आराम हो जाती है|
  • नमदें का टुकड़ा सिरके में भिगोकर तिल्ली पर बांधने से तिल्ली रोग आराम हो जाता है
  • अजवाइन खाने से भी तिल्ली रोग नष्ट हो जाता है|
  • काली मिर्च .टी पीपर भुनी फिटकरी ,गुना सहागा ,अजवाइन, कटाई खारी नॉन, लाहोरी नून ,आमा हल्दी और जवाखार बराबर बराबर लेकर  पीस छानकर पानी के साथ खरल करें और जंगली बेर के समान गोलियां बनाकर खाने से लाभ होता है|

3.यकृत रोग-प्लीहा और यकृत एक ही कारण से बढ़ते हैं इसके अतिरिक्त अधिक शराब पीने और बवासीर आदि के रोगों का खून बहना आदि के बंद हो जाने से भी यकृत बढ़ता है अंग्रेजी में इसे लीवर कहते हैं जब यह बढ़ता है तो अनेक रोगों को साथ लेकर आता है बच्चों में यह रोग अधिक होता है|

यकृत
यकृत

यकृत चिकित्सा आयुर्वेदिक नुस्खे

  • यकृत के बढ़ जाने से उसमें पीड़ा मालूम हो तो उस पर बारंबार अलसी की  पुलिटस बांधने से लाभ होता है
  • अगर यकृत की खराबी से पित्त बहुत ही बढ़ गया हो नेत्र मुख मल मूत्र पीले पड़ गए हो तो आमले गिलोय और हर्ट के दो तोले काडे में दो रत्ती मंडूर भस्म डालकर पीने अथवा कासनी और मकोय के दो तोले सवरस में जरा सा शहद मिलाकर पीने से लाभ मिलता है|
  • चार रती घीक्वार के रस में दो रत्ती हल्दी का चूर्ण और दो रत्ती से धानमक का चूर्ण मिलाकर सवेरे शाम खाने से यकृत का बढ़ना बंद हो जाता है|
  • यकृत और प्लीहा की सूजन पर मकोय और पुनर्नवा का सबरस गरम लेप करने या तारपीन के तेल में कपड़ा भिगोकर सूजन पर रखने से यकृत और तिल्ली की सूजन नष्ट हो जाती है|
  • करेले के फल या पत्तों के रस में जरा सा शहद मिलाकर पीने से यकृत और प्लीहा की  विकृति नष्ट हो जाती है|

4.उदा व्रत रोग यानी गैस्टिक-शरीर के 13 वेगो को रोकने से एवं काम क्रोध मद लोभ ईर्ष्या द्वेष आदि मानसिक वेगो के आवेश से यह रोग उत्पन्न होता है इसमें उधर के नीचे की ओर चलने वाली अधो वायु चक्कर खाकर ऊपर की ओर बढ़ती है और अपने साथ मल मूत्र या उसकी प्रदूषित हवा वायु भी ऊपर ले जाती है|

आयुर्वेदिक नुस्खे

  • मन रोकने से पैदा हुए उदा व्रत में यह क्रियाएं हितकारी है दस्ता वर अन्न देना दस्तावर दवा देना तेल दवा देना तेल की मालिश करवाना सेक के पसीने दिलाना एवं गुदा में पिचकारी लगाना|
  • डकार रोकने की उदा व्रत में चिकनाई मिले हुए पदार्थों का धुआं पीना चाहिए तथा शराब में काला नमक और बिजोरा का रस मिलाकर पीना चाहिए|
  • भूख रोकने के उदावत रोग में चिकनी गरम रुचि कारी और मनचाहे पदार्थ थोड़े-थोड़े खानी चाहिए|
  • थकान में सांस रोकने से हुए उदा व्रत में मांस रस के साथ भोजन करना और आराम करना चाहिए|
  • जवा से का काढ़ा बनाकर पीने से उदावत नष्ट हो जाता है|
  • अर्जुन वृक्ष की छाल का काढ़ा पीने से उदा व्रत नष्ट हो जाता है|
  • कटोरी का सवरस पीने से उदावर्त रोग नष्ट हो जाता है|
  • मिश्री  ,दूध, दाख, मुलेठी का रस पीने से यह रोग नष्ट हो जाता है बच का चूर्ण खा कर ऊपर से जल मिला दूध पीने से यह रोग नष्ट हो जाता |

उदर रोग को रोकने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. अदरक , देवदारु और चीते का काढ़ा पीने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  2. जवाखार , सब्जी , चीता , त्रिकुटा ,नीली और पांचों नमक इनको पीसकर और घी में मिलाकर खाने से सब तरह के उदर रोग दूर होते हैं|
  3. पीपलो को थूहर के दूध में भावना देकर उनमें से अपनी शक्ति अनुसार एक से आरंभ करके हजार तक खाने से सभी तरह के उदर रोग दूर हो जाते हैं|
  4. दुर्गंध, करंज के बीज, मूली के बीज, गरहेडूब,की जड़ और शंख भस्म को मिलाकर कांची के साथ पीने से उदर रोग आराम हो जाता है|
  5. इंद्रायण, शंखपुष्पी ,दंती, नीली वृक्ष, त्रिफला, हल्दी ,बायविंडग और कबीला इनका चूर्ण गोमूत्र के साथ पीने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  6. अरंडी का तेल गर्म दूध या जल अथवा गोमूत्र में मिलाकर पीने से सभी तरह के उदर रोग दूर हो जाते हैं|
  7. मालकांगनी का तेल पीने से सभी तरह के उदर रोग नष्ट हो जाते हैं|
  8. कनकुष्ठ का चूर्ण गर्म जल के साथ सेवन करने से आठ  तरह के रोग नष्ट रोग नष्ट हो जाते हैं|
  9. पुराने मरकंद को पीसकर उसने दुगनी चावल मिलाकर जल और दूध  मैं खीर बनाकर उस चीज को खाने से वातओ दर सूजन संग्रहणी और पांडु रोग नष्ट हो जातेहै|
  10. 7 दिन तक अन्न जल छोड़कर केवल भैंस का मूत्र दूध मिलाकर पीने से यह रोग नष्ट हो जाता है|
  11. एक चम्मच पुदीने का रस एक कप पानी में मिलाकर पी इससे भी आपको उधर की पीड़ा में काफी राहत महसूस होगी और इसके सेवन से तुरंत आराम मिलता है|
  12. गुनगुने पानी के साथ अजवाइन लेने से भी उधर की पीड़ा से काफी आराम मिलता है इसमें अगर बराबर मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाए तो यह ज्यादा असरदार होता है|