बुलिमिया नर्वोसा (bulimia nervosa)

बुलिमिया नर्वोसा (bulimia nervosa)

बुलिमिया नर्वोसा

बुलिमिया नर्वोसा एक तरह का ईटिंग डिसऑर्डर है| इस रोग के होने पर व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाना खाने लगता है और खाने को उल्टी के माध्यम से निकालने का पर्यतन करता है जिसके कारण पाचन तंत्र पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है|व्यक्ति अपने वजन को लेकर चिंतित रहते हैं| कैलोरीज घटाने के लिए उल्टियां करते हैं| बुलिमिया नर्वोसा डिसऑर्डर किशोरावस्था में अधिक देखने को मिलता है पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में बुलिमिया नर्वोसा डिसऑर्डर होने की ज्यादा संभावना होती है|

बुलिमिया नर्वोसा के लक्षण (bulimia nervosa symptoms)

  • जरूरत से ज्यादा खाना खाना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना
  • कैलोरी घटाने के लिए उल्टियां करते रहना
  • थकान का अनुभव होना
  • वजन को लेकर चिंतित रहना
  • बार बार पेशाब करना
  • हृदय की धड़कन का अनियमित होना
  • आंखों की रक्त वाहिकाओं का टूट जाना
  • डिहाइड्रेशन की समस्या होना
  • अवसाद

बुलिमिया नर्वोसा के कारण (causes of bulimia nervosa )

  1. आत्मविश्वास में कमी होना– आत्मविश्वास में कमी होने के कारण बुलिमिया नर्वोसा की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  2. अनुवांशिकता- अगर आपके किसी परिवार के सदस्य को बुलिमिया नर्वोसा ईटिंग डिसऑर्डर है तो आपको यह रोग होने की संभावना हो सकती है|
  3. मानसिक विकार– मानसिक विकार के कारण भी आपको ज्यादा भूख लगने लगती है जो बुलिमिया नर्वोसा का कारण बनती है|

खाना खाने के विकार (binge eating disorder)

खाना खाने के विकार को बिंज ईटिंग डिसऑर्डर कहते हैं इसमें व्यक्ति शुरू से ज्यादा खाना खाते हैं और खुद पर नियंत्रण नहीं कर पाते अभी खाना खाने के बाद आप पेट भरा हुआ महसूस करते हैं और वजन बढ़ने के डर से जड़ी बूटियों का प्रयोग कर उल्टियां करते हैं व खुद को बीमार कर लेते हैं| बिंज ईटिंग डिसऑर्डर किशोरावस्था में लोगों को होने लगता है| पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को बिंज ईटिंग डिसऑर्डर होने की संभावना ज्यादा होती है| महिलाओं में किसी बात को लेकर चिंता तनाव डिप्रेशन होने पर बिंज ईटिंग की समस्या उत्पन्न होती है इसी व्यक्ति वजन को लेकर चिंतित रहता है|

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण (binge eating disorder symptoms)

  • जरूरत से ज्यादा खाना खाना
  • भूख न होने पर भी भोजन करना
  • मांसपेशियों का कमजोर होना
  • थकान और कमजोरी का अनुभव होना
  • कब्ज होना
  • धूम्रपान का सेवन करने से लीवर संबंधित समस्या होना
  • यौन संबंध में रुचि न रखना
  • उल्टी होने पर गर्भधारण करने में असमर्थ होना
  • गुर्दों में हानि पहुंचना
  • दिल की धड़कन का असामान्य होना
  • पेट में दर्द जलन होना

बुलिमिया नर्वोसा से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय ( bulimia nervosa treatment)

  1. इलायची– इलायची का सेवन करने से बुलिमिया नर्वोसा यानी भूख की कमी को दूर किया जा सकता है खाने में इलायची का सेवन करने से भूख को बढ़ाया जा सकता है|
  2. अदरक- अदरक में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं खाना खाने से पहले अदरक के छोटे टुकड़े को काला नमक और नींबू लगाकर खाने से मुंह में पाए जाने वाले टेस्ट बड्स को सहायता मिलती है यह पाचन क्रिया के लिए भी सहायक है|
  3. ग्रीन टी- ग्रीन टी का सेवन करने से वह को बढ़ाने में मदद मिलती है ग्रीन टी का सेवन करने से तनाव चिंता और थकान को दूर किया जा सकता है|
  4. संतरा- संतरे का जूस पीने से भूख बढ़ने में सहायता मिलती है संत्री पाचन तंत्र को भी बढ़ावा देने में हमारी सहायता करते हैं और संतरे के छिलकों के गंध से डिप्रेशन तनाव को कम करने में मदद मिलती है|
  5. मिंट- प्रतिदिन मिंट टी का सेवन करने से भूख को बढ़ाया जा सकता है और यह भावनात्मक तनाव को दूर करने में भी सहायक है|
  6. पुदीना- अपनी प्रतिदिन के आहार में पुदीने को शामिल करना चाहिए पूरी ना भूख को बढ़ाने में भी सहायक है और तनाव को कम करता है|
  7. लहसुन- एक कप पानी में चार से पांच कलियां लहसुन की उबालें इसका प्रतिदिन सेवन करने से भूख बढ़ने में मदद मिलती है|
लहसुन
लहसुन

एनोरेक्सिया नर्वोसा

एनोरेक्सिया नर्वोसा (anorexia nervosa)

एनोरेक्सिया नर्वोसा

एनोरेक्सिया नर्वोसा एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपना वजन बढ़ाने से डरता है| इस रोग में व्यक्ति अपने वजन को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहता है उन्हें हर समय यही डर लगा रहता है कि उनका वजन बढ़ न जाए| एनोरेक्सिया नर्वोसा एक ईटिंग डिसऑर्डर बीमारी है जिसमें व्यक्ति कम से कम खाते हैं और कैलोरी बढ़ाने के लिए अधिक व्यायाम करते हैं|यह मानसिक बीमारी युवावस्था के लोगों में भी देखने को मिलती है लेकिन बच्चों में इस मानसिक बीमारी के होने पर बच्चों की मन में खाने और वजन के प्रति असामान्य विचार आने लगते हैं|जिन व्यक्तियों में एनोरेक्सिया नर्वोसा ईटिंग डिसऑर्डर नामक बीमारी होती है  भूख लगने पर भी वजन बढ़ने के डर से खाना खाने से मना कर देते हैं खाने से दूर भागते हैं|

एनोरेक्सिया नर्वोसा के लक्षण (anorexia nervosa symptoms)

  • व्यक्ति अपने वजन को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं
  • कैलोरीज बढ़ाने के लिए कई प्रकार के एक्सरसाइज करते हैं
  • वजन कम होने पर भी वजन कम करने का प्रयास करते हैं
  • अचानक वजन कम होना
  • खाने की आदतों में बदलाव आना
  • यौन संबंध में रुचि न रखना
  • पीरियड्स का सही समय पर न आना  का मुख्य लक्षण माना जाता है
  • एनोरेक्सिया नर्वोसा की समस्या होने पर व्यक्ति नियमित रूप से अपना वजन जागता  रहता है
  • खाना न खाने से पोषक तत्वों की कमी के के कारण अचानक वजन कम होने लगता है
  • थकान का अनुभव होना
  • पोषक तत्वों की कमी के कारण चेहरे का पीलापन नजरआना
  • बालों का तेजी से झड़ना
  • वजन कम करने के लिए धूम्रपान करना

एनोरेक्सिया नर्वोसा के कारण (causes of anorexia nervosa)

  1. मनोवैज्ञानिक कारण- युवाओं में खाने की भूख होने के बाद भी वजन बढ़ने के डर से भोजन न करना मनोवैज्ञानिक लक्षण होते हैं वजन कम होने पर भी वजन कम करने का प्रयास करते रहना वजन की प्रति चिंतित रहना आदि मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं|
  2. जैविक कारण-आनुवंशिक परिवर्तन के कारण भी कम खाना खाने यानी एनोरेक्सिया का विकास होने की संभावना बढ़ जाती है|
  3. युवा- एनोरेक्सिया नर्वोसा नामक डिसऑर्डर किशोरावस्था में अधिक देखने को मिलता है| यह 40 साल से अधिक उम्र के लोगों में पाया जाता है|
  4. अनुवांशिकता- अगर आपके किसी परिवार के सदस्य को एनोरेक्सिया नर्वोसा ईटिंग डिसऑर्डर है तो आपको यह रोग होने की संभावना हो सकती है|
  5. जेनेटिक्स कारण- जीन में परिवर्तन होने पर एनोरेक्सिया नर्वोसा होने का खतरा बना रहता है|

एनोरेक्सिया नर्वोसा से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय (anorexia nervosa treatment)

  1. अदरक- अदरक में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं खाना खाने से पहले अदरक के छोटे टुकड़े को काला नमक और नींबू लगाकर खाने से मुंह में पाए जाने वाले टेस्ट बड्स को सहायता मिलती है यह पाचन क्रिया के लिए भी सहायक है|
  2. संतरा- संतरे का जूस पीने से भूख बढ़ने में सहायता मिलती है संतरे पाचन तंत्र को भी बढ़ावा देने में हमारी सहायता करते हैं और संतरे के छिलकों के गंध से डिप्रेशन तनाव को कम करने में मदद मिलती है|
  3. लहसुन- एक कप पानी में चार से पांच कलियां लहसुन की उबालें इसका प्रतिदिन सेवन करने से भूख बढ़ने में मदद मिलती है|
  4. मिंट टी- प्रतिदिन मिंट टी का सेवन करने से भूख को बढ़ाया जा सकता है और यह भावनात्मक तनाव को दूर करने में भी सहायक है|
  5. ग्रीन टी- ग्रीन टी का सेवन करने से वह को बढ़ाने में मदद मिलती है ग्रीन टी का सेवन करने से तनाव चिंता और थकान को दूर किया जा सकता है|
  6. पुदीना- अपनी प्रतिदिन के आहार में पुदीने को शामिल करना चाहिए पूरी ना भूख को बढ़ाने में भी सहायक है और तनाव को कम करता है|
  7. इलायची– इलायची का सेवन करने से एनोरेक्सिया नर्वोसा यानी भूख की कमी को दूर किया जा सकता है खाने में इलायची का सेवन करने से भूख को बढ़ाया जा सकता है|
अदरक
अदरक

काली खांसी

काली खांसी

आइए, पहले यह जानते हैं कि बच्चों को खांसी होने के पीछे मुख्य वजह क्या है।जब किसी अवरोध के कारण वायुमार्ग बंद होने लगता है, तो खांसने से यह अवरोध हटता है और गले को राहत पहुंचती है। खांसी किसी भी हानिकारक पदार्थ जैसे धूल या खाद्य कणों को साफ करने में मदद करती है, जो किसी वजह से सांस केसाथ अंदर चले जाते हैं। यह श्वसन तंत्र के अतिरिक्त स्राव जैसे बलगम को भी दूर करने में मदद करता है। जब स्राव होता है, तो इसे गीली खांसी के रूप में जाना जाता है, वर्ना इसे सूखी खांसी कहा जाता है।

काली खांसी के लक्षण

काली खांसी एक खतरनाक बीमारी है क्योंकि ये संक्रामक होती है यानि इस बीमारी के वायरस हवा के जरिये एक इंसान से दूसरे तक पहुंचते हैं। इस रोग का कारण हिमोफाइलस परटुसिस नाम के जीवाणु होते हैं। ये जीवाणु रोगी को छूने, साथ खाने और उसकी खांसी के संपर्क में आने से आपको भी हो सकता है। तो आइये आज हम आपको बताते है इस बीमारी से जुड़े लक्षण और इसके उपचार के बारे में।

  • काली खांसी में रोगी को लगातार जोर-जोर से खांसी आती है। खांसते-खांसते रोगी को कई बार उल्टी भी होने लगतीहै और सीने में तेज जलन महसूस होने लगती है।थोड़ी-थोड़ी देर पर खांसी आती ही रहती है इसलिए रोगी का हाल बुरा हो जाता है और उसकी सांस रुकने लगती है। कई बार इस तरह की खांसियों के कुछ और कारण भी हो सकते हैं जैसे टीबी, दमा, फेफड़ों का संक्रमण, अस्थमा आदि। इसलिए इस प्रकार की खांसी होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है ताकि आप खांसी का कारण जान सकें।

काली खांसी होने का कारण

बच्चों को खांसी होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। नीचे हम नवजात शिशुओं और बच्चों में होने वाली खांसी के 10 कारण बता रहे हैं :

  1. सामान्य खांसी: यह आम खांसी होती है और जब ठीक होने लगती है, तो सूखी खांसी रूप लेकर खत्म हो जाती है। सामान्य खांसी के लिए कई वायरस जिम्मेदार होते हैं, जिनमें राइनोवायरस सबसे आम है।
  2. काली खांसी: इसमें खांसी के साथ बलगम भी निकलता है। इसी के साथ लंबी सांस लेते समय आवाज भीआती है। बोर्डेटेला पर्टुसिस बैक्टीरिया के कारण काली खांसी होती है, जोकभी कुछ दिन, तो कभी महीनों तक बनी रहती है।
  3. क्रुप: यह वायुमार्ग में सूजन आने के कारण होने वाली खांसी है। इस वजह से बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होती है।
  4. लंग या साइनस संक्रमण: फेफड़ों के संक्रमण से फेफड़ों में कफ बनने लगता है, जिससे गीली खांसी होती है। वहीं, साइनस इन्फेक्शन से भी कफ बनता है और गले में आने लगता है। फेफड़ों में संक्रमण होने के निम्न कारण हो सकते हैं :शिशुओं और बच्चों को होने वाले फेफड़े के संक्रमण को ब्रोंकियोलाइटिस कहते हैं, जिससे फेफड़ों के अंदर छोटे वायुमार्ग संक्रमित हो जाते हैं।ब्रोंकियोलाइटिस का सबसे आम कारण रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस (आरएसवी) है|कई वायरस और बैक्टीरिया साइनस के संक्रमण का कारण बन सकते हैं। जब संक्रमित स्राव नाक से गले तक जाता है (पोस्ट-नेसल ड्रिप), तो वो गले में जलन पैदाकरते हैं और खांसी होती है।
  5. एलर्जी :बच्चे को एलर्जी होने पर भी खांसी की समस्या हो सकती है। अधिकतर बच्चों को धूल-मिट्टी से एलर्जी होती है, जिस कारण खांसी हो सकती है।
  6. अस्थमा :अस्थमा भी खांसी का एक कारण हो सकता है। इसमें छाती में भारीपन महसूस होता है और सांस लेने में तकलीफ होती है।
  7. टीबी :टीबी की बीमारी भी खांसी का मुख्य कारण हो सकती है। अगर लंबे समय से खांसीहो रही है और इलाज के बाद भी ठीक नहीं हो रही है, तो यह टीबी का संकेत होसकता है।
  8. गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स :इसके कारण होने वालीखांसी गीली होगी, लेकिन इसमें बलगम नहीं बनता। गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स के कारण खांसी तब होती है, जब पेट का एसिड भोजन नलिका में पहुंचकर गले मेंजाता है। ऐसे में बच्चे को डकार और हिचकियों की समस्या हो सकती है।
  9. सिस्टिक फाइब्रोसिस :इस कारण लगातार खांसी होती है, जिसमें काफी सारा बलगम बाहर आता है जो टिशू बलगम, पसीना और पाचन रस बनाते हैं, सिस्टिक फाइब्रोसिस से इन्हें नुकसान पहुंचता है।
  10. एस्पिरेशन :यह कुछ भी खाने या पीनी के बाद अचानक से होने वाली खांसी है। इसके अलावा, अगर बच्चे के गले में कुछ फस जाए, तो भी ऐसी खांसी हो सकती है।

काली खांसी को जड़ से खत्म करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. तुलसी के पत्ते –तुलसी के पत्ते भी खांसी-जुकाम में बहुत फायदेमंद होते हैं। काली खांसी से राहत के लिए तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बना लें और इसे दिन में तीन बार चूसें। ये छोटी गोलियां आपकी खांसी को मिटाकर आपका गला साफ कर देंगी।
  2. लहसुन –लहसुन सर्दी, जुकाम और खांसी तीनों के इलाज के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। रोजाना खाने में लहसुन के प्रयोग से आप इन रोगों से दूर रह सकते हैं।काली खांसी से छुटकारे के लिए लहसुन की 5-6 कलियों को छीलकर बारीक काट लें औरउन्हें पानी में डालकर उबाल लें। अब इस पानी से भाप लें। रोज ऐसा करने से 8-10 दिन में काली खांसी जड़ से खत्म हो जाती है।
  3. बादाम- बादाम भी काली खांसी के इलाज में कारगर है।बच्चों की काली खांसी में तीन-चार बादाम रात को पानी में भिगाकर रख दें। सुबह बादाम के छिलके उतार लें और इसे एक कली लहसुन और थोड़ी सी मिश्री के साथ पीस लें। अब इस पेस्ट की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर बच्चे को खिलाएं। इससे खांसी में आराम मिलेगा।
  4. शहद-शहद भी सर्दी–खांसी ठीक करने के उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है। एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को आधा चम्मच शहद दूध में मिलाकर दिन में दो बार दिया जा सकता है।
  5. नींबू-विटामिन सी से भरपूर होने के कारण नींबू शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक होता है। नींबू के रस में थोड़ा सा शहद और बहुत सारा पानी मिलकर अगर एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को पिलाया जाये तो उससे छोटे बच्चों को सर्दी–खांसी में बहुत आराम आएगा।
  6. दालचीनी-दालचीनी एक प्रभावशाली एंटी बैक्टीरिया, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरिया के गुणों से भरपूर होने के कारण बहुत फायदेकी चीज है। एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को यह बहुत आराम से दी जा सकती है। एक चम्मच शहद में ¼ चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर बच्चे को हर चार घंटे के अंतराल पर दें। जैसे ही सर्दी खांसी की शुरुआत हो तो यह मिक्स्चर देने से तुरंत आराम आ जाता है। 
  7. हल्दी-नवजात शिशुओं के लिए इस उपाय के रूप में सूखी हल्दी का एक छोटा टुकड़ा ले लें औरइसे मोमबत्ती या फिर छोटे दिये की लौ में हल्का सा जला दें। इसके बाद बच्चे को इस जली हुई हल्दी के धुएँ को एक मिनट तक सुंघाएँ । घबराएँ नहीं, यहधुआँ एक पतले धागे की तरह होता है इसलिए बच्चे को इससे कोई खतरा नहीं होगा। याद रखें की दो वर्ष से ऊपर के बच्चों को थोड़ी सी हल्दी दूध में मिलाकर भी दी जा सकती है।बच्चों की सर्दी खांसी ठीक करने का यह एक अच्छा उपाय है।
  8. विक्स वेपोरब-ठीक करने के लिए विक्स एक बहुत अच्छा उपाय है । बच्चे के पाँव में इसकी मालिश करके उसे मोज़े पहना दें। अगर चाहें तो इसकी मालिश छाती और गले पर भी कर दें।
  9. भाप दें-बहुत बच्चों को कभी भी भाप उस तरह नहीं दी जाती है जैसे हम वयस्क व्यक्ति कोदेते हैं। इसके लिए आप कमरे में के बाल्टी या बाथरूम में बाथटब गरम पानी से भर लें। ऐसे में छोटे बच्चे को अपनी बाँहों में लेकर भाप के वातावरण मेंखड़े हो जाएँ । इससे छाती में जमा बलगम आसानी से ढीला पड़ सकता है ।नन्हें बच्चों की सर्दी–खांसी में इससे बहुत जल्दी आराम आने की संभावना होती है।
हल्दी
हल्दी

डार्क प्राइवेट पार्ट्स

डार्क प्राइवेट पार्ट्स

महिलाओं को यह समझने की जरूरत है कि उनकी योनि काले या बदलते रंग बिल्कुल स्वाभाविक है, अधिकांश भाग के लिए। योनि की त्वचा का रंग महिला से महिला में भिन्न होता है। यह गुलाबी, लाल से लेकर बरगंडी तक कई अलग तरह के शेड्स हो सकते हैं। कुछ महिलाएं इस बारे में चिंता करती हैं कि क्या योनि काली हो जाती है, इसे खराब स्वच्छता या संक्रमण से जोड़ते हैं। ज्यादातर मामलों में, योनि की त्वचा का यह काला पड़ना पूरी तरह से सामान्य है|डार्क प्राइवेट पार्ट्स जैसे योनि की त्वचा का रंग न केवल महिला से भिन्न हो सकता है, बल्कि कई अलग-अलग कारकों के आधार पर बदल सकता है|

डार्क प्राइवेट पार्ट्स के कारण

यह एक तथ्य है कि आपके निपल्स, अंडर आर्म्स, योनि और आंतरिक जांघ क्षेत्र आपके शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में गहरे रंग के होने की संभावना है। जबकि कुछ महिलाओं को लगता है कि नियमित शेविंग (अंडरआर्म्स और योनि क्षेत्र) इसका कारण है, या वेंटिलेशन – आपके निजी क्षेत्र ज्यादातर समय सीमित होते हैं, ताजी हवा प्राप्त नहीं करते हैं। यह निश्चित रूप से त्वचा की बनावट और रंग को बदलता है।

  1. नमी – कारावास के कारण, आपके निजी क्षेत्र बहुत अधिक नमी जमा करते हैं, जिससे त्वचा का रंग बदल सकता है।
  2. रेजर- रेजर का प्रयोग कर्ते रह्ने से योनी मे कालेपन की सम्स्या आ जाती है और योनी मे सूखापन आ जाता है|
  3. पसीना – पसीना आपके शरीर के भीतर से बेकार है। इसमें आपके शरीर से अलग-अलग रसायन होते हैं। क्योंकि आपके निजी क्षेत्र अधिकतर समय सीमित होते हैं, कोई भी हल्का पसीना त्वचा पर तब तक रहता है जब तक आप स्नान नहीं करते। इससे त्वचा का रंग बदल जाता है।
  4. ब्लीच क्रीम- योनी पर ब्लीच क्रीम का निरंतर प्र्योग करते रह्ने से योनी मे त्व्चा का रंग गहरा हो जाता है|
  5. चुस्त कपड़े – तंग कपड़ों में अपने निजी क्षेत्रों को सीमित करने से त्वचा को सांस लेने से रोका जाता है, जिससे त्वचा का रंग गहरा होता है।
  6. त्वचा की सतहों के बीच निरंतर घर्षण आपके निजी क्षेत्रों की बनावट और रंग को बदल देता है।
  7. उम्र – उम्र के बढ्ने के साथ -2 आपके निजी क्षेत्र स्वाभाविक रूप से काले हो जाते हैं। यह हार्मोनल परिवर्तनों के लिए जिम्मेदार है।
  8. आनुवांशिकी – आपको ऐसे जीन विरासत में मिल सकते हैं जो आपके निजी क्षेत्रों में गहरे रंग की त्वचा का कारण बनते हैं।
  9. गर्भावस्था – जबकि आपके निजी क्षेत्रों में गहरे रंग की त्वचा नहीं हो सकती है, आप गर्भावस्था के दौरान भी इसका विकास कर सकते हैं।
  10. हार्मोनल असंतुलन-एस्ट्रोजन एक हार्मोन्स है जो कि यौनी के ऊत्तकों को स्वस्थ रखने का काम करता है। यह हार्मोन्स यौनी में लुब्रिकेंट, एसिडिटी लेवल और इलास्टिसिटी को बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब एस्ट्रोजन के लेवल में कमी आती है तो यौनी में लुब्रिकेंट की कमी, यौनी में ढीलापन जैसी परेशानियां होने लगती है|

योनी के रंग को प्राक्रतिक तरीके से गोरा बनाने के घरेलू उपाय

  1. नींबू का रस और शहद का उपयोग- नींबू में सिट्रस एसिड और विटामिन सी होता है तो कि रंग को साफ करने में सहायक होता है। 1 चम्‍मच नींबू के रस में कुछ बूंद शहद की मिलाएं और इस घोल में रूई भिगो कर प्रभावित जगह पर लगाएं। 5 मिनट के बाद पानी से धो लें। ऐसा दिन में 2 से 3 बार करें। इसके साथ ही आप अकेले नींबू को ल्गाकर योनी के रंग को गोरा कर सक्ते है|
  2. एलोवेरा का उपयोग-इस्का उप्योग कर्के आप योनी के रंग को गोरा कर सकते है| एलोवेरा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो स्‍किन के कलर को हल्‍का बनाते हैं। एक चुटकी हल्‍दी में 1 चम्‍मच एलोवेरा मिलाएं और इससे प्रभावित जगह को साफ करें। फिर इसे तौलिये से पोछ लें और 30 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। फिर इसे धो कर इस विधि को 2 से 3 बार दिन में करें। इसके आलावा आप एलोवेरा का गुदा निकलकर अपनी योनी/vagina पर मसाज कर्के सूखने के बाद धो ले|
  3. नारियल तेल का उपयोग –नारियल का तेल एंटीसेप्‍टिक, एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी फंगल गुणों से भरा होता है। इससे पिगमेंटेशन और कई तरह के स्‍किन इंफेक्‍शन दूर होते हैं। अपने पाइवेट पार्ट को साफ कर लें और फिर वहां पर इस तेल को लगाएं। इसके साथ ही तेल को अच्‍छी तरह से स्‍किन में समा जाने दीजिये। अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिये नारियल के तेल का प्रयोग रोजाना कीजिये। आप  का प्रयोग रोजाना कीजिये। आप नारियल के तेल से हलके हाथो से योनी/vagina पर मसाज कर्ने से जरुर लाभ प्राप्त होगा|
  4. आलू के रस का प्रयोग-आलू के रस का प्रयोग योनि के रंग को निखारने में हमारी मदद करता है इसका प्रयोग करने के लिए आलू को अच्छी तरह पीसकर उसका रस निकाल कर फिर अपनी योनि पर अच्छी तरह लगाकर मसाज कीजिए इसका नियमित प्रयोग करने से आपकी योनि का रंग साफ हो जाएगा|
  5. अंडे का सफेद हिस्‍सा-अंडे के सफेद हिस्से में प्रोटीन नामक पदार्थ होता है जो कि स्किन को गोरा करता है अंडे का सफेद हिस्सा एक कटोरी में लेकर अच्छी तरह से फेंट लें। बाद में इसे अपनी स्‍किन पर लगाएं और जब वह सूख जाए तब उसे कॉटन की मदद से पोंछ लें।
एलोवेरा
एलोवेरा

योनि के सूखापन होने के लक्षण

  1. योनि में जलन होना
  2. योनि में ढीलापन आ जाना

योनि के सुखापन होने के कारण

यौनी में सुखापन होने के कई कारण होते हैं। जैसे हार्मोनल परिवर्तन, मनोवैज्ञानिक परिवर्तन आदि।

  1. योनी में जलन-योनि में सूखापन होने से कई महिलाओं को योनि में जलन की समस्या उत्पन्न हो जाती है इसके मुख्य कारण है साबुन डे परफ्यूम आदि से एलर्जी हो जाती है|
  2. दवाओं के इस्तेमाल से-यदि आप महिलाएं वेजाइनल क्लीनजर का उपयोग करती है तो क्लींजर की वजह से भी योनि में सूखापन आ जाता है|
  3. चिंता और तनाव- चिंता और तनाव की वजह से महिलाओं की योनि में रक्त का प्रवाह सही तरह से नहीं हो पाता और योनि में लुब्रिकेंट की कमी आ जाती है|
  4. अपर्याप्त कामोत्तेजना- अपर्याप्त कामोत्तेजना यानी पुरुष का स्त्री के साथ कम संभोग का प्रदर्शन भी योनि में सूखे पन  का कारण बन सकता है|
  5. हारमोंस में परिवर्तन- एस्ट्रोजन नामक हार्मोन योनि के ऊतकों को स्वस्थ रखने का कार्य करता है यह योनि में एसिडिटी लेवल को बनाए रखता है जब एस्ट्रोजन के लेवल में कमी आ जाती है तो योनि में ढीलापन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं|

योनि के सूखापन को दूर करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपचार

  1. एलोवेरा जेल के साथ केसर और अश्वगंधा दूध को बराबर मात्रा में मिलाएं और इसका सेवन करें इससे यह समस्या दूर हो जाएगी|
  2. शरीर में पानी की कमी के कारण भी होनी में सूखा बना जाता है इसलिए दिन में दो से 3 लीटर पानी पीना जरूरी है|
 

ईटिंग डिसऑर्डर (eating disorders)

ईटिंग डिसऑर्डर (eating disorders)

ईटिंग डिसऑर्डर

ईटिंग डिसऑर्डर को खानपान के विकार (eating disorder) की बीमारी भी कहा जाता है अभी खाना खाने पर वजन बढ़ने के डर से जड़ी बूटियों का प्रयोग करने पर जो हमारे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है उसे ईटिंग डिसऑर्डर(eating disorder) कहते हैं|इसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें आती है जैसे-अधिक खाना और बहुत कम खाना व कैलोरीज घटाने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का प्रयोग करना ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या  किशोरावस्था में होती है|यह लड़कों और पुरुषों की अपेक्षा लड़कियों और महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है| ईटिंग डिसऑर्डर(eating disorder) होने की कोई उम्र नहीं होती यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है| यह 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगो में अधिक पाया जाता है जो लोग बचपन में मोटापे से पीड़ित होते हैं उनमें ईटिंग डिसऑर्डर होने की संभावना ज्यादा होती है|ईटिंग डिसऑर्डर से ग्रस्त लोग कैलोरीज घटाने के लिए एक्सरसाइजेज या व्यायाम करते हैं| कई लोग वजन कम करने के लिए धूम्रपान का सेवन करते हैं|इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं:

  1. एनोरेक्सिया नर्वोसा(anorexia nervosa)
  2. बुलिमिया नर्वोसा(bulimia nervosa)

ईटिंग डिसऑर्डर के दोनों प्रकारों एनोरेक्सिया नर्वोसा (anorexia nervosa) व बुलिमिया नर्वोसा (bulimia nervosa)में एक जैसे लक्षण नजर आते हैं शुरुआत में व्यक्ति को एनोरेक्सिया के लक्षण नजर आते हैं और उसके बाद बुलिमिया के लक्षणों में बदल जाते हैं|

ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण (eating disorder symptoms)

  • खाना न खाने के लिए बहाने बनाना
  • वजन कम होने पर भी वजन कम करने का प्रयास करना
  • खाना खाने के बाद बार-बार शौच जाना
  • वजन को लेकर चिंतित रहना
  • जरूरत से ज्यादा खाने के बाद पेट भरा हुआ पेट महसूस होना और जड़ी बूटियों का प्रयोग करके उल्टियां करना व खुद की तबीयत खराब करना और शर्मिंदगी महसूस करना
  • एनोरेक्सिया से पीड़ित लोग वजन कम करने के लिए अधिक व्यायाम करते हैं और कई प्रकार की एक्सरसाइज करते हैं कम से कम खाना खाते हैं और भूख लगने पर भी खाना नहीं खाने के बहाने बनाते हैं
  • बुलिमिया नर्वोसा से ग्रस्त लोग कैलोरी घटाने के लिए जड़ी बूटियों का प्रयोग करके उल्टियां करते हैं और खुद की तबीयत खराब कर लेते हैं
  • जरूरत से ज्यादा खाना खाने पर व्यक्ति शर्मिंदगी महसूस करने लगता है
  • थकान का अनुभव होता है
  • आप अपने आप को दोषी महसूस करते हैं

ईटिंग डिसऑर्डर के कारण (cause of eating disorder)

  1. अनुवांशिकता– आपके परिवार में से किसी सदस्य माता-पिता में भोजन विकास संबंधी समस्या है तो आप में भी यह समस्या विकसित होने की संभावना बढ़ने लगती है|
  2. तनाव- एनोरेक्सिया से ग्रस्त लोग वजन बढ़ने के डर से चिंतित रहते हैं और खाना खाने पर जड़ी बूटियों के प्रयोग से उल्टियां करते हैं और शर्मिंदगी महसूस करते हैं|
  3. मानसिक कारण- खाने की विकार से पीड़ित लोगों को मानसिक समस्याएं होने लगती है जो खाने के विकार को विकसित करती हैं|
  4. युवा- ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या किशोरा अवस्था में ही देखने को मिलती है पुरुषों की अपेक्षा यह समस्या महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है|
  5. हीन भावना- एनोरेक्सिया और बुलिमिया ईटिंग डिसऑर्डर से पीड़ित लोग दूसरों की तुलना में अपने आप को कमजोर महसूस करते हैं और वजन बढ़ने की भावनाओं को विकसित करते हैं|
  6. शारीरिक कारण- ईटिंग डिसऑर्डर पुरुषों में अधिक देखने को मिलता है यह उन व्यवस्याओं में अधिक देखने को मिलता है जहां कम वजन की मांग होती है|
  7. भोजन की कमी होना या डाइटिंग– खाना कम खाना खाने की विकार को विकसित करने वाला मुख्य कारण है खाने की कमी के कारण तनाव, चिंता डिप्रेशन कम भूख लगना जैसी समस्याएं उतपन होने लग जाती है जिसके कारण व्यक्ति एनोरेक्सिया से पीड़ित हो जाता है|

ईटिंग डिसऑर्डर से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय (eating disorder treatment)

  1. अदरक- अदरक में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं| खाना खाने से पहले अदरक के छोटे टुकड़े को काला नमक और नींबू लगाकर खाने से मुंह में पाए जाने वाले टेस्ट बड्स को सहायता मिलती है यह पाचन क्रिया के लिए भी सहायक है|
  2. संतरा- संतरे का जूस पीने से भूख बढ़ने में सहायता मिलती है| संतरे पाचन तंत्र को भी बढ़ावा देने में हमारी सहायता करते हैं और संतरे के छिलकों के गंध से डिप्रेशन तनाव को कम करने में मदद मिलती है|
  3. लहसुन- एक कप पानी में चार से पांच कलियां लहसुन की उबालें इसका प्रतिदिन सेवन करने से भूख बढ़ने में मदद मिलती है|
  4. मिंट टी- प्रतिदिन मिंट टी का सेवन करने से भूख को बढ़ाया जा सकता है और यह भावनात्मक तनाव को दूर करने में भी सहायक है|
  5. ग्रीन टी- ग्रीन टी का सेवन करने से वह को बढ़ाने में मदद मिलती है ग्रीन टी का सेवन करने से तनाव चिंता और थकान को दूर किया जा सकता है|
  6. पुदीना- अपनी प्रतिदिन के आहार में पुदीने को शामिल करना चाहिए पूरी ना भूख को बढ़ाने में भी सहायक है और तनाव को कम करता है|
  7. इलायची– इलायची का सेवन करने से एनोरेक्सिया नर्वोसा यानी भूख की कमी को दूर किया जा सकता है खाने में इलायची का सेवन करने से भूख को बढ़ाया जा सकता है|
इलायची
इलायची