डिप्रेशन (Depression )

डिप्रेशन (Depression )

डिप्रेशन

डिप्रेशन की समस्या आम समस्या बन गई है जिसके बहुत से कारण हो सकते हैं|भारत में लगभग 1 मिलियन लोग डिप्रेशन के शिकार हो चुके हैं|डिप्रेशन की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसके कारण बच्चे हों या बड़े सब तनाव से पीड़ित होते जा रहे हैं| लंबे समय तक तनाव रहने से चिंता का विषय बन सकता है| दुनिया भर में हो रही ज्यादा बीमारियों का कारण तनाव भी है| तेजी से बदलता लाइफ़स्टाइल , खानपान में लापरवाही आदि कुछ ऐसे कारण है जिसमें आदमी तनाव का शिकार होता जा रहा है| आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां तनाव को कम करने में आपकी मदद कर सकती हैं|

डिप्रेशन
डिप्रेशन

डिप्रेशन के लक्षण

  • हमेशा थकान जैसा अनुभव करना
  • किसी भी काम में मन का न लगना
  • किसी भी काम का निर्णय न ले पाना
  • चिड़चिड़ा हो जाना
  • वजन का घटना बढ़ना और अनिद्रा का शिकार हो जाना
  • खालीपन की भावना

डिप्रेशन के कारण

  • हार्मोन में परिवर्तन-हार्मोन में बदलाव तनाव का कारण बन सकता है| हार्मोन में बदलाव जैसे-रजोनिवृत्ति , थायराइड की समस्या आदि विकार डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं|
  • अनुवांशिकता- अगर आपके परिवार के जिमी पहले किसी को तनाव हुआ है तो आप भी तनाव का अनुभव कर सकते हैं|
  • मानसिक समस्या-कुछ लोगों में ही दिमाग में परिवर्तन के कारण तनाव हो सकता है|

डिप्रेशन से मुक्त करने वाली आयुर्वेदिक औषधियां

  1. अश्वगंधा- इस औषधि का प्रयोग करने से मन में नकारात्मक विचार आने बंद हो जाते हैं और इससे तनाव भी कम होता है|अश्वगंधा में  स्टेरायडल लैक्टोन,  सैपोनिन, एल्कलॉइड जैसे सक्रिय यौगिकों की उपस्थिति होती है जिसे तनाव और चिंता को दूर करने के लिए जाना जाता है|ये एंटी-इंफ़्लामेट्री और एंटी एंग्जायटी गुण प्रदान करते हैं। 
  2. ब्राह्मी-ब्राह्मी जड़ी बूटी के प्रभाव से तनाव और मानसिक रोग दूर हो जाते हैं और शरीर में समरण शक्ति का विकास भी हो जाता हैब्राह्मी के सेवन से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है, जिससे मन शांत होता है |
  3. हल्दी-हल्दी एक एंटीऑक्सीडेंट पदार्थ है जिसे शारीरिक और मानसिक रोगों से हमें निजात मिलता है|
  4. जटामांसी-इस औषधि के प्रयोग से व्यक्ति की मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होती है और इससे तनाव भी दूर होता हैयह अपने  एंटीडिप्रैंसेंट और  एंटी स्ट्रेस गुणों के लिए भी जाना जाती है। 
  5. मैग्निशियम– मैग्नीशियम की कमी के कारण हमारी याददाश्त कमजोर होने लगती है और तनाव भी बढ़ सकता है इसलिए हमें काजू बदाम अंजीर का सेवन करना चाहिए जिसमें मैग्निशियम पर्याप्त मात्रा में होता है|
  6. जिंक-जिंक की कमी से डिप्रेशन की समस्या उत्पन्न हो सकती है इसलिए हमें मूंगफली , लहसुन , सोयाबीन , बादाम आदि का सेवन करना चाहिए जिसमें जिंक भरपूर मात्रा में होता है|
  7. ओमेगा 3– ओमेगा थ्री के नियमित सेवन से हम डिप्रेशन से बच सकते हैं इसलिए मछली सरसों के बीज , सोयाबीन , हरी बींस इन में ओमेगा 3 पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है|
  8. आयोडीन -आयोडीन के लिए भी लहसुन आदि का सेवन किया जा सकता है| नमक में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन पाया जाता है इसका सेवन करने से हम डिप्रेशनसे निजात पा सकते हैं|
हल्दी
हल्दी

डिप्रेशन से मुक्त होने के लिए सावधानियां

  1. वजन कम करें-यदि वजन बढ़ने से आपको तनाव हो रहा है तो वजन कम करने के बाद आपका मूड सामान्य हो सकता है| फिटनेस स्वास्थ्य भी में सुधार लाती है|
  2. नकारात्मक लोगों से दूर रहे-नकारात्मक लोगों से दूर रहने से मन को शांति का अनुभव होता है और नकारात्मक विचारों से निजात मिलता|
  3. मनोचिकित्सक की सलाह लें-तनाव को दूर करने के लिए सबसे आसान तरीका है कि आप गुरु चिकित्सक की सलाह ले ऐसा करने से आपको तनाव से निजात पाने में मदद मिलेगी|
  4. पर्याप्त मात्रा में नींद करना-सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में नींद करनी चाहिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटे सोने वाले व्यक्ति में तनाव के लक्षण कम मिलते हैं|
  5. व्यायाम करना– तनाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है व्यायाम करना| व्यायाम करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैव्यायाम करने से शरीर में सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है जिस से नकारात्मक विचार दूर होते हैं|
  6. संतुलित आहार का सेवन -फल सब्जी मास कार्बोहाइड्रेट आदि का सेवन करने से मन शांत रहता है|
  7. इमोशनल स्किल्स ड्व्लोप करिए-बहुत से लोग तनाव कोशिश फील्डिंग नहीं कर पाते हैं और भावुक हो जाते हैं इमोशनल स्किल्स आपको तनाव से दूर करती है|
  8. मदद मांगीए-अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं तो इस बात को नहीं छुपाए इसे छिपाना इसे बढ़ावा देता है इसलिए अपनी किसी भी परिवार के सदस्य से डिसकस कीजिए और मशवरा लीजिए इससे आपको डिप्रेशनसे राहत मिलेगी|

सोमरोग

सोमरोग

सोमरोग एक खतरनाक स्त्री रोग है|स्त्री की योनि से जब निर्मल, शीतल, गंधरहित, साफ, सफेद और पीड़ा रहित सफेद पानी लगातार बहुत ज्यादा बहता रहता है, तब महिला  सफेद पानी के वेग को रोक नहीं पाती इसे अमृतम आयुर्वेद में सोमरोग कहा गया है ।

सोमरोग की उत्पत्ति– जिन कारणों से “प्रदररोग” (लगातार सफेद पानी आना) होता है । इसे लिकोरिया व्हाइट डिस्चार्ज ( white discharge ) भी कहते हैं ।प्रदररोग की समय पर आयुर्वेदिक चिकित्सा न होने, लापरवाही तथा पुराना होने से यही सोमरोग कहलाता है ।

सोमरोग के लक्षण

  1. बेहोशी आने लगती है|
  2. प्रलाप होता रहता है|
  3. सेक्स की इच्छा खत्म होने से पुरुष भटक जाता है|
  4. भूख भी कम लगती है खाने पीने का मन नहीं करता|
  5. जब स्त्री का सोम रोग पुराना हो जाता है तब वह मुद्रा प्रसार हो जाता है|
  6. पहले तो सोम रोग की हालत में पानी सा पदार्थ बहा करता है किंतु इस दशा में बारंबार पेशाब होते हैं और पेशाब की भी ज्यादा होती है|
  7. स्त्री जरा भी पेशाब को रोकना चाहती है तो रोक नहीं सकती परिणाम यह होता है कि स्त्री का सारा बल नष्ट हो जाता है और अंत में वह मर जाती है|
  8. एकदम कमजोर हो जाने की वजह से बेचैन रहती है|
  9. माथा शिथिल हो जाता है|
  10. मुंह और तालु सूखने लगते हैं|

सोमरोग होने के कारण

  1. सोमरोग कई बार महिला के अधिक मास मच्छी खाने चाय पीने शराब का सेवन करने से भी हो जाता है|
  2. मासिक धर्म की अनियमित समय पर होने के कारण भी यह रोग हो सकता है |
  3. बार बार गर्भधारण करने पर भी यह रोग हो सकता है |
  4. इसके अलावा योनि के ऊपरी भाग में किसी प्रकार की फोड़े फुंसी रसोली होने के कारण भी सोमरोग हो जाता है|

सोमरोग से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. केले की पक्की फली आमलो का स्वरस शहद और मिश्री इन सबको मिलाकर खाने से सोम रोग और मुद्रा प्रसार नष्ट हो जाते हैं|
  2. उड़द का आटा मुलेठी शहद विदारीकंद और मिश्री इन सबको मिलाकर सवेरे ही दूध के साथ सेवन करने से सोम रोग नष्ट हो जाता है|
  3. आवलों के बीजों को जल में पीसकर फिर उसमें शहद और चीनी मिलाकर पीने से 3 दिन में ही श्वेत प्रदर और मुद्रा प्रसार नष्ट हो जाते हैं|
  4. यदि सोम रोग में पीड़ा भी हो और पेशाब के साथ सोम धातु बारंबार निकलती हो तो ताजा शराब में इलायची और तेजपात का चूर्ण मिलाकर पीना चाहिए यह बहुत लाभदायक है|
  5. शतावर का चूर्ण फॉक्कर ऊपर से दूध पीने से सोम रोग नष्ट हो जाता है |
  6. माशे नागकेसर को मीठे में पीसकर 3 दिन तक पीने और मट्ठे के साथ भात खाने से श्वेत प्रदर और सोम रोग नष्ट हो जाते हैं|

चिकन पॉक्स (छोटी माता)

चिकन पॉक्स (छोटी माता)

चिकन पॉक्स वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह बहुत ही संक्रामक होती है औरसंक्रमित निसृत पदार्थों को सांस के साथ अंदर ले जाने से फैलती है। चिकन पॉक्स (छोटीमाता) के संक्रमण से पूरे शरीर में फुंसियों जैसे- चक्तियाँविकसित हो जाती है जो कि दिखने में खसरे की बीमारी की तरह भी लगती है। इस बीमारी में पूरे शरीर में खुजली करने का बहुत मन करता है। चिकन पॉक्स का संक्रमण महामारी की तरह फैलता है।

यह रोग बच्चों की आपसी से संपर्क में आने पर फैलता है| अगर रोगी का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है| चिकन पॉक्स होने पर बच्चों को चिकन पॉक्स का टीका लगवाना जरूरी है| यह टीका आपके बच्चे के द्वारा चिकन फॉक्स का संक्रमण दूसरे बच्चों में फैलने से भी बचाता है|

चिकन पॉक्स
चिकन पॉक्स

चिकन पॉक्स के लक्षण

  1. छोटी माता होने पर हल्का सा बुखार होना स्वाभाविक है|
  2. छोटी माता के होने से बच्चों की फुंसियों का मवाद से भरना , फूटना और खुरदरी पड़ना आदि यह समस्या उत्पन्न हो सकती है|
  3. इस रोग में बच्चों के सीने में जकड़न होना स्वभाविक है|
  4. इस रोग में बच्चों के चेहरे पर लाल खुजली दार फुंसियां उभरने लगती है जो बाद में पूरे शरीर में फैल जाती है जैसे- खोपड़ी पर , मुंह में , कानों और गुप्तांगों पर भी|
  5. इस रोग में बच्चों को भूख कम लगना स्वभाविक है|
  6. इस रोग में बच्चों की कमर में दर्द होने की संभावना है|

चिकन पॉक्स (छोटी माता) के कारण

  1. यह रोग वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस के कारण होता है |
  2. यह रोग महामारी की तरह फैलता है, यह रोग संक्रमित व्यक्ति के छीकने से हवा में फैली बूंदों द्वारा दूसरे व्यक्ति के साथ संपर्क में आने से फैलता है|
  3. आपको चिकन पॉक्स कभी नहीं हुआ है या चिकन पॉक्स टीका (वेरिसेलावैक्सीन/टीका) कभी नहीं लगवाया है, तो आपको चिकन पॉक्स होने की संभावना ज़्यादा है ।
  4. जो लोग दूसरी बीमारी या हालत के लिए स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं, जैसे कि वह बच्चे जिन्हे अस्थमा है।उन्हे चिकन पॉक्स होने की संभावनाज़्यादा है|

चिकन पॉक्स (छोटी माता) से बचने के लिये आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. काली मिर्च का सेवन-काली मिर्च का सेवन छोटी माता के रोग में बहुत ही फायदेमंद है|1 चम्मच प्याज के रस में 2-3 काली मिर्च पीसकर कुछ दिन तक दिन में 2-3 बार पिएं। इसके सेवन से छोटी और बड़ी माता ठीक हो जाती है।
  2. जई का आटा-चेचक के समय शरीर में काफी खुजली से ब्च्ने के लिये जई के आटे को पानी में मिलाकर लगभग 15 मिनट तक उबाल्कर इस पानी को बाथ टब में डालकर बच्चे को नहलाएं। इससे खुजली से राहत मिलती है।
  3. सिरके का इस्तेमाल –आधा कप सिरके को नहाने के पानी में डालकर स्नान करने से छोटी माता में होने वाली खुजली में राहत मिलती है।
  4. नीम का प्रयोग –नीम के पत्ते को पानी के साथ पीसकर दानो पर लगाएं। नीम के पत्तों को पानी में उबालें, और इस पानी को नहाने में प्रयोग करें। इससे चेचक के फैलने की संभावना कम होती है|
  5. हरी मटर करता है चेचक का जड़ से इलाज-हरी मटर को पानी में पकाएं, और इस पानी को शरीर में लगाएं। इससे चेचक में होने वालेलाल दाने ख्त्म हो जाते हैं।
काली मिर्च
काली मिर्च

चिकन पॉक्स (छोटी माता) में परहेज़

  1. डेयरी उत्पाद, मांस-मच्छी, रोटी या किसी अन्य प्रकार के भारी भोजन  नही खाना चाहिये|
  2. जंक फूड से दूर रहे|
  3. लाल मांस और तले हुए खाद्य पदार्थ न खाएं|
  4. दाने होने पर खुज्ली न करें खुज्ली करने पर निशान पड सक्ते है|

जोड़ों में दर्द (joint pain)

जोड़ों में दर्द (joint pain)

जोड़ों में दर्द एक आम समस्या बन चुकी है जो दोनों जोड़ों को प्रभावित कर सकती हैउम्र बढ़ने के साथ साथ हाथ पांव के जोड़ों में दर्द होने लगता है और हड्डियों में कमजोरी आने लगती है। सबसे ज्यादा ये परेशानी घुटनों में महसूस होती है। 

जोड़ों में दर्द के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे -गठिया , चोट , संक्रमण आदि इनमें से सबसे सामान्य कारण है गठिया| जिस में जोड़ों में सूजन होती है| गठिया के भी कई प्रकार होते हैं|जोड़ों में दर्द का उपचार प्रभावित जोड़ों दर्द की गंभीरता और अन्य कारणों के आधार पर होता है| औपचारिक की मूलभूत कारणों को ठीक करता है और लक्षणों को कम करने में सहायता करता है|

जोड़ों में दर्द के लक्षण (joint pain symptoms)

  • हड्डियों की आपस में घुसने से तेजी से दर्द होना|
  • जोड़ों की गतिशीलता करने की क्षमता में कमी होती है|
  • गठिया में मुख्य रूप से जोड़ों में सूजन होती है |

जोड़ों में दर्द के कारण (joint pain reason)

  1. ज्यादा देर तक बैठे रहना-ऑफिस में एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर को कई बीमारियां घेर लेती हैं। दरअसल, जब आप एक ही जगह पर ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं तो शरीर में खून का संचार सही तरह से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द होने लगता है।ऐसे में काम करते वक्त बीच-बीच में थोड़ा ब्रेक जरूर लें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा और जोड़ों में दर्द की परेशानी नहीं होगी। 
  2. खानपान –फास्ट फूड खाने और स्मोकिंग करने से जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। अपनी डाइट में विटामिन-डी और कैल्शियम युक्त आहार को शामिल करें। 
  3. भरपूर नींद न लेना -काम की वजह से रात को लेट सोने से भी नींद पूरी नहीं होती है जोड़ों में दर्द का कारण भरपूर नींद न लेना भी है। अपने जोड़ों को हैल्दी रखने के लिए 8 घंटे नींद जरूर लें। 
  4. एक्सरसाइज -एक्सरसाइज करने से भी जोड़ों में दर्द हो सकता है|

जोड़ों में दर्द के आयुर्वेदिक नुस्खे( joint pain treatment in Ayurveda)

  • लहसुन –रोज सुबह लहसुन की 56 कलियां बोल कर खाएं इस में दर्द और सूजन को कम करने वाला साइड साइटोकींस नमक सब्सटेंस होता है|
  • अजवाइन- अजवाइन के तेल की मालिश करने से जॉइंट पैन में बहुत लाभ मिलता है यह दर्द को दूर करने में भी सहायक है|
  • सोंठ –एक चम्मच सोंठ और आधा टुकड़ा जायफल का लेकर दोनों को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर इसमें कपड़ा भिगोकर ज्वाइंट पर पट्टी बांधने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है|
  • हल्दी और अदरक- सबसे पहले दो कप पानी लेकर अच्छे से उबाले फिर इसमें एक चम्मच हल्दी और अदरक का पाउडर डालें अभी से 15 से 20 मिनट तक अच्छे से उबलने दे इसके पश्चात स्वाद अनुसार थोड़ा सा शहद मिला लें इस तरह अदरक और हल्दी की चाय बना कर एक दिन में दो से तीन बार पीए |
  • मेहंदी के पत्ते- मेहंदी के ताजे पत्ते को महीन पीसकर रात को सोते समय गाढ़ा लेप जॉइंट पर लगाएं इसे तब तक करते रहे जब तक घुटनों में दर्द कम न हो|
  • अफीम –आधी रति अफीम और दो रत्ती और दो रत्ती कपूर की गोली बनाकर खाने से खूब पसीना आकर गठिया के पुराने से पुराने रोग में भी लाभ मिलता है|
  • नींबू- नींबू का रस जॉन स्पर्म चलते रहने से जोड़ों में दर्द कम हो जाता है और घुटनों में सूजन भी कम हो जाती है|
  • सौंफ, कासनी के बीज,मकोय, हंसराज सौंफ की जड़ ,कासनी की जड़ ,मुलेठी और बबूल के फूल इन सबको 3-3 माशे लेकर 32 तौले पानी में मिट्टी की हांडी में काढ़ा बनाएं 4 -5 तौले ले पानी रह जाने पर उतारकर मल छान ले और इस काले से गठिया रोग नष्ट होता है यह सुबह शाम पीना चाहिए|
  • धतूरे के फूल, पत्ते, जड़ और फल सब डेढ़ पाव लेकर सिल पर पानी के साथ पीस लें फिर सरसों का तेल आधा पाव तिल्ली का तेल, आधा पाव अरंडी का तेल ,आधा पाव और लुगदी को आग पर चढ़ा कर पकाएं जब दवाइयां जल जाए तेल को उतार ले इस तेल से जोड़ों का दर्द नष्ट हो जाता है|
  • सनाय दो तोले, सुरंजन दो तोले ,हर्ड एक तोले,बादाम 10 माशे ,मेहंदी की पत्ती 7 माशे, केसर 4 माशे इन सबको पीसकर  छान लेंफिर जितना चूर्ण का वजन हो उतनी ही मिश्री मिला दे और शीशी में रख ले इसकी मात्रा एक तोले से 2 तोले तक है सुबह एक मात्रा खाने यह रोग नष्ट होता है|
अदरक
अदरक

 

घमोरियां (heat rash)

घमोरियां (heat rash)

घमोरियां को हिट रेश के नाम से भी जाना जाता है|गर्मी के मौसम में घमौरियों का होना एक सामान्य बात है| घमोरियां होने पर शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने निकलने लगते हैं और खुजली व जलन होने लगती है| यह उन लोगों को ज्यादा होती है जिन्हें अधिक पसीना आता है| यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर होती है जो कपड़ो से ढके रहते हैं जैसे- गर्दन , छाती का ऊपरी भाग , पीठ और जांघों के बीच में आदि घमोरियां तब होती है जब पसीने की ग्रंथियों अवरोध हो जाने के कारण पसीना बाहर नहीं निकाल पाती और पसीना त्वचा के नीचे परतों मे इकठा हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई देने लगते हैं जो कुछ भी का कारण बनते हैं|

घमोरियां
घमोरियां

घमोरियां के लक्षण(heat rash symptoms)

  • त्वचा पर लाल चकत्ते होना
  • दानों से द्रव पदार्थ का निकलना
  • पसीना निकलने पर बेचैनी का अनुभव होना
  • गर्मियों में लगातार शरीर में खुजली होना
  • थकान का अनुभव होना
  • खुजली करने पर जलन और चुभन का अनुभव होना

हीट रैश के कारण(heat rash causes)

  1. अविकसित ग्रंथियां-पसीने की ग्रंथियों अवरुद्ध  हो जाने के कारण पसीना बाहर नहीं निकल पाता और पसीना त्वचा के नीचे परतों मे इकठा हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर लाल चकत्ते होने लगते है|
  2. मौसम में बदलाव- मौसम में बदलाव आने के कारण बीमारियां हो सकती हैं| गरम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घमोरियां होने की संभावना बढ़ जाती है |
  3. शारीरिक गतिविधि-दिनचर्या का हमारी शरीर स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है इसमें ज्यादा व्यायाम करना और कड़ी मेहनत करने से ज्यादा पसीना आता है और घमोरियां होने की आशंका बढ़ जाती है|
  4. उम्र– वयस्कों की तुलना में नवजात शिशु में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है|
  5. तापमान के अचानक बढ़जाना– तापमान के अचानक बढ़ जाने पर घमोरियां होने की संभावना बढ़ जाती है|

घमौरियों के प्रकार(heat rash types)

घमोरियां के तीन प्रकार होते हैं:

  1. क्रिस्टलीय-यह घमौरी का सबसे सामान्य प्रकार है|इस स्थिति में त्वचा की सतह पर पसीने या द्रव से भरे छोटे सफेद दाने होते हैं जो आसानी से फूट जाते हैं यह वयस्कों की तुलना में शिशु बच्चों में अधिक देखने को मिलता है इसमें खुजली या दर्द नहीं होता|
  2. रुब्रा– इस प्रकार में लाल दाने और पसीना न आ नहीं के समान होती है| यह त्वचा के नीचे गहरी परतों में होता है|
  3. गहरा– यह घमौरियों का सबसे असामान्य प्रकार होता है| यह त्वचा के नीचे गहरी परत में होता है यह प्रकार बड़े मजबूत और गांठ के रूप में होता है इसे मिली अरियां प्रोफंडा भी कहते हैं|

हीट रैश की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(heat rash remedies)

  1. चंदन-चंदन में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो घमौरियों के दर्द को कम करने में हमारी मदद करते हैं चंदन के पाउडर मैं थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना ले इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से जलन से राहत मिलती है|
  2. नीम- नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं इसलिए नीम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर पीस लें और इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से घमोरियां की समस्या दूर होती है|नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करने से खुजली की समस्या दूर होती है|
  3. बर्फ से सिकाई– बर्फ से सिकाई घमोरियां होने पर प्रभावित स्थान पर बर्फ से सिकाई करने से राहत मिलतीहै|
  4. खानपान- अपने प्रति दिन की आहार में पपीता , आंवला , नींबू का रस , तरबूज , दही , खीरा आदि को शामिल करें फल और सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से घमौरियों की समस्या काफी हद तक कम होती है|
  5. मुल्तानीमिट्टी-मुल्तानी मिट्टी को पानी में मिलाकर इसका मिश्रण तैयार कर लें और इसको शरीर पर लगा ले और सूखने पर स्नान कर ले इससे आपको खुजली की समस्या से निजात मिल सकता है|
  6. बेकिंग सोडा –नहाते समय पानी में बेकिंग सोडे की कुछ मात्रा डालकर नहाने से खुजली से संबंधित समस्या दूर होती है|
  7. एलोवेरा –एलोवेरा में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं |एलोवेरा में से जेल को निकालकर लाल चकते पर लगाने से जलन और सूजन की समस्या दूर होती है|
  8. कच्चा आलू –आलू की स्लाइस को काटकर प्रभावित स्थान पर रख दें| कच्चा आलू घमोरियां होने की स्थिति में बहुत फायदेमंद है और इससे खुजली की समस्या भी दूर होती है|
एलोवेरा
एलोवेरा