डिमेंशिया (मनोभ्रंश)

डिमेंशिया (मनोभ्रंश)

डिमेंशिया

डिमेंशिया (Dementia) किसी विशेष बीमारी का नाम नहीं, बल्कि के लक्षणों के समूह का नाम है, जो मस्तिष्क की हानि से सम्बंधित है|लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं यह मुख्यत याददाश्त की समस्या है| डिमेंशिया के लक्षण चिंताजनक होते हैं जो कई रोगों के कारण पैदा होते हैं| यह सभी लोग मस्तिष्क को हानि पहुंचाते हैं क्योंकि हम सभी कामों के लिए अपने मस्तिष्क पर निर्भर है|अधिवेशन से पीड़ित व्यक्ति अपने दैनिक कार्य ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं| कभी-कभी वे यह भी भूल जाते हैं कि वह किस शहर में है ,कौन सा साल महीना चल रहा है| डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है और व्यक्ति की स्थिति खराब हो जाती है| बढ़ती उम्र के चलते उन्हें काम में भी दिक्कत आने लगती है जैसे -चल पाना , बात करना , ठीक ढंग से खाना-पीना छोटी चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर करते हैं|

जब डिमेंशिया के लक्षण आने शुरू हो जाते हैं तब परिवार के लोग यह नहीं समझ पाते कि व्यक्ति अजीब तरह से क्यों व्यवहार कर रहा है इसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और वे डिमेंशिया का शिकार हो जाता है|

डिमेंशिया
डिमेंशिया

डिमेंशिया के प्रकार (Dementia types)

  1. अल्जाइमर रोग- डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है|अल्जाइमर रोग इस रोग के होने के कारण व्यक्ति की मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे व्यक्ति में मस्तिष्क का आकार घटता जाता है|
  2. मिश्रित डिमेंशिया- इसमें व्यक्ति को एक ही समय में अल्जाइमर रोग और वैस्कुलर डिमेंशिया दोनों हो सकते हैं|
  3. लेवी बॉडीज डिमेंशिया – इसमें व्यक्ति की याददाश्त में कमी , भ्रम , असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है|
  4. पार्किंसंस रोग: यह वह रोग है जिसमें तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुँचती है  जो डिमेंशिया पैदा कर सकती है|बाद में अल्जाइमर का रुप धारन कर लेती है इस बीमारी के कारण अन्य गतिविधियों में कठिनाई होने लगती है. मगर इसके कारण कुछ लोगों को डिमेंशिया भी हो जाता है|
  5. फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया-यह डिमेंशिया का वह प्रकार है जिसमें व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है और व्यक्ति को बोलने में भी कठिनाई हो सकती है इसमें व्यक्ति के सोचने समझने की क्षमता भी कम हो जाती है|

डिमेंशिया के लक्षण (Dementia symptoms)

  • व्यक्ति के रोजमर्रा के कामों में भी कर आने लगती है
  • इस रोग में व्यक्ति का व्यवहार सामान्य नहीं रहता वह अजीब सा व्यवहार करने लगता है
  • जरूरी चीजें भूल जाना और याददाश्त का कमजोर होना
  • छोटी-छोटी समस्याओं को भी न सुलझा पाना
  • सोचने में कठिनाई का अनुभव होना
  • ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • कोई भी चित्र देखकर न पहचान पाना की यह क्या है

डिमेंशिया के कारण (Dementia causes)

  1. डिमेंशिया रोग का मुख्य कारण अल्जाइमर रोग है अल्जाइमर जैसी बीमारी से मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो जाता है और व्यक्ति सब कामों के लिए दूसरे पर निर्भर करता है|
  2. डिमेंशिया सिर की चोट, स्ट्रोक, मस्तिष्क ट्यूमर या एचआईवी संक्रमण के कारण भी हो सकता है|
  3. मस्तिष्क की कोशिकाओं में अधिकांश परिवर्तन होता है जो डिमेंशिया का मुख्य कारण है|

डिमेंशिया के तीन चरण होते हैं प्रारंभिक ,मध्यम और अंतिम

1.प्रारंभिक-इस अवस्था में व्यक्ति के मस्तिष्क को ज्यादा हानि नहीं पहुंचती और वह अपने काम स्वयं कर लेता है इस रोग में लक्षणों पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को डिमेंशिया किस रोग के कारण हुआ है अगर अल्जाइमर रोग है तो व्यक्ति के बोलने की क्षमता कम हो जाती है अगर फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया हैं तो व्यक्ति के बोली में दिक्कत और स्वभाव में परिवर्तन आ आ जाता है इसमें व्यक्ति को पता नहीं लगता है किस रोग के लक्षण है इसलिए डॉक्टर से तुरंत ही सलाह लेनी चाहिए|

प्रारंभिक अवस्था के लक्षण

  • इसमें व्यक्ति की यादाश्त कमजोर हो जाती है और उन्हें हाल में हुई बातें याद  भी नहीं रहती
  • उनके सोचने समझने की क्षमता कम हो जाती है उन्हें बोलने में कठिनाई महसूस होती है
  • हिसाब रखने में और पैसे गिनने में दिक्कत आती है
  • ऐसे लोग चुपचाप सहमे हुए रहते हैं लोगों से मिलना पसंद नहीं करते

2.मध्य अवस्था-डिमेंशिया के बीच की अवस्था में आते आते परिवार वालों को व्यक्ति की परेशानियां यानी लक्षण नजर आने लगते हैं और व्यक्ति असमंजस में पड़ जाता है व्यक्ति के स्वभाव में बदलाव आ जाता है धीरे-धीरे उनके काम करने की क्षमता भी कम हो जाती है वह दूसरों पर निर्भर रहने लगता है ऐसे व्यक्ति अकेले रहना पसंद करते हैं|

3.अंतिम अवस्था-इस अवस्था तक पहुंचने पर डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में बहुत हानि फैल जाती है और व्यक्ति के चलने फिरने बात करनी मैं बदलाव आ जाता है और वह लाचार हो जाते हैं वे सभी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं ऐसी व्यक्तियों को खुद खाना खाने में भी कठिनाई का अनुभव होता है|

अंतिम अवस्था के लक्षण

  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपनी मल मूत्र पर नियंत्रण खो देते हैं|
  • इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपनी दिनचर्या के काम नहीं कर पाते|
  • उन्हें खाने-पीने में भी दिक्कत होती है और खाने के कारण फेफड़ों में चले जाने से कई बार फेफड़ों में इन्फेक्शन हो जाता है|
  • अंत में पूरी तरह से बिस्तर पकड़ लेते हैं और इससे व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना भी बढ़ जाती है|

आंखों में एलर्जी (Eye allergy)

आंखों में एलर्जी (Eye allergy)

आंखों में एलर्जी

आंखों में एलर्जी एक आम समस्या बन गई है जब हमारी आंखों में एलर्जी पैदा करने वाले तत्व जैसे परागकण कॉस्मेटिक , परफ्यूम , धुंआ आदि चले जाते हैं तो इसका असर हमारे कंजक्टिवा पर पड़ता है जिससे आंखों में जलन होने लगती है आंखों में होने वाली एलर्जी को कंजक्टिवा इटिस कहा जाता है| आंखों में एलर्जी पर्यावरण के पदार्थों पर निर्भर करती है एलर्जी कंजक्टिवा इटिस होने पर आंखों में जलन , आंखों में खुजली होना , आंखों से पानी आना , आंख लाल होना आदि लक्षण नजर आने लगते हैं कई बार आंखों से मवाद निकलने लगता है और आंखों की पलकों में सूजन आ जाती है|सही समय पर इलाज करने पर आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं|

आंखों में एलर्जी
आंखों में एलर्जी

आंखों में एलर्जी के लक्षण (Eye allergy symptoms )

  • आंखों में एलर्जी होने पर व्यक्ति की आंखों से पानी आने लगता है
  • आंखें लाल होना
  • आंखों में सूजन आना
  • आंखों से मवाद निकलना और पलकों में सूजन आ जाना
  • आंखों के चारों और पपड़ी का जम जाना
  • दृष्टि धुंधली हो जाना ,कई बार आंखों के आगे अंधेरा आने लगता है
  • पढ़ने में कठिनाई का अनुभव होना
  • चीजों का रंग ढंग से दिखाई न देना
  • आंखों के चारों ओर पपड़ी का जम जाना
  • आंखों का तेज रोशनी की ओर संवेदनशील हो जाना

आंखों में एलर्जी होने के कारण (Eye allergy causes

  1. मौसमी एलर्जी – बदलते मौसम के साथ आंखों में जलन , आंखों में पानी , खुजली जैसी समस्याएं पैदा होने लगती है अगर इनका समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप धारण कर लेती है|
  2. संपर्क में होने वाले आंखों के रोग– जो व्यक्ति त्वचा के रोग , आंखों में जलन , आंखों में पानी , दाद ,खाज-खुजली आदि से पीड़ित हो ऐसे व्यक्ति को छूने से या ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से आंखों में एलर्जी होने लगती है|
  3. घास-कई बार घास पेड़ पौधे फूल भी एलर्जी का कारण बन सकते हैं जिसके कारण आंखों में जलन , खुजली होना , आंखों से पानी आना , आंखे लाल होना जैसी समस्याएं होने लगती है|
  4. धूल-हम जिस पर्यावरण में रहते हैं धूल के कण पाए जाते हैं धूल के कणों में माइक्रोब्स की मात्रा पाई जाती है जिनके कारण आंखों में एलर्जी ,आंखें दर्द होना , आंखों से पानी बहना जैसी समस्याएं होने लगती है|
  5. आंखों की सर्जरी – कई बार व्यक्ति को मोतियाबिंद और रेटिना संबंधी बीमारियां होने पर आंखों की सर्जरी की जाती है आंखों की सर्जरी से कई बार आंखों की समस्याएं पैदा होने लगती है|
  6. उम्र का बढ़ना-उम्र के बढ़ने के साथ व्यक्ति की नजरे कमजोर होने लगती है आंखों की दृष्टि धुंधली हो जाती है|
  7. दवाओं का दुष्प्रभाव – अवसाद दवाओं का सेवन करने से भी व्यक्ति को आंखों से संबंधित समस्या होने लगती है|व्यक्ति की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है|
  8. आंखों में ट्यूमर-आंखों में ट्यूमर हो जाना भी आंखों की समस्या का मुख्य कारण है|
  9. दवाओं का दुष्प्रभाव-कई तरह की दवाई और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स एलर्जी होने के मुख्य कारण है|
  10. अनुवांशिकता-अगर आपके परिवार में किसी व्यक्ति को कोई एलर्जी है ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से भी आपको एलर्जी हो सकती है|

आंखों में एलर्जी को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय (Eye allergy treatment)

  1. हल्दी-हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो आंखों की सूजन को कम करते हैं हल्दी के पाउडर को एक बर्तन लेकर गर्म पानी में घोल ले अब इस गर्म पानी में किसी कपड़े को भिगो दे इस कपड़े से आंखों की सिकाई करने से आंखों में एलर्जी की समस्या को दूर किया जा सकता है|
  2. एलोवेरा-एलोवेरा में एंटी बैक्टीरियल और एंटी ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं एलोवेरा की जेल को निकालकर शहद और एल्डर बेरी चाय के साथ मिलाकर इसका मिश्रण बना लें और इस मिश्रण से आंखों को धो ले यह प्रक्रिया दिन में दो से तीन बार दोहराएं जब तक आराम नहीं मिले|
  3. करौंदा-करौंदे का सेवन करने से हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है सोने के पाउडर में शहद को मिलाकर इसका मिश्रण बना लें और रात को सोने से पहले इसका सेवन करें यह नुस्खा बहुत ही लाभदायक है|
  4. ग्रीन टी – एक गिलास पानी में दो से तीन ग्रीन टी को डालकर उबालें इसके ठंडा होने पर इस मिश्रण से आंखों को धोलें यह प्रक्रिया दिन में दो से तीन बार दोहराएं|
  5. खीरा-खीरे में एंटी इरिटेशन गुण पाए जाते है जिससे आंखों में खुजली जलन की समस्या दूर होती है, खीरे की कुछ स्लाइसे को काटकर फ्रिज में रख दे और ठंडा होने पर स्लाइसे को आंखों पर रखें यह प्रक्रिया दिन में तीन से चार बार करें ऐसा करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है|
  6. गुलाब जलआंखों में एलर्जी होने पर गुलाब जल की कुछ बूंदें आंखों में डालने से आंखों में एलर्जी को ठीक किया जा सकता है|आंखों की एलर्जी के लिए गुलाब जल का प्रयोग काफी लाभदायक है|
  7. नमक और पानी-एक गिलास ठंडे पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर नमकीन पानी से आंखों को धोने से आंखों में एलर्जी की समस्या से निजात मिलता है| नमक वाले पानी का प्रयोग करने से आंखों की जलन और सूजन को दूर किया जा सकता है | नमक को गर्म पानी के साथ प्रयोग में लाएं ऐसा करने से आपकी आंखों को नुकसान पहुंच सकता है|

आंखों की एलर्जी से बचने के लिए उपाय (Eye allergy remedies)

  • आंखों में जलन होने पर या खुजली होने पर अपनी आंखों को ठंडे पानी से 9-10 छींटे मारे ऐसा करने से आंखों में एलर्जी की समस्या दूर होने में मदद मिलती है|
  • आंखों में एलर्जी जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए अपनी आंखों को बार बार ठंडे पानी से धोएं ऐसा करने से आंखों की एलर्जी की समस्या से राहत मिलती है|
  • आंखों में एलर्जी होने पर गुलाब जल की दो-तीन बूंदें डालने से आंखों को आराम मिलता है इसका प्रयोग दिन में दो से तीन बार करें|
  • कच्चे दूध मे कई प्रकार के तत्व पाए जाते हैं आंखों की एलर्जी और थकान की समस्या को दूर करने में सहायक है कच्चे और ठंडे दूध से आंखे साफ करने से एलर्जी की समस्या दूर होती है|
  • आंखों में खुजली , थकान और आंखों के नीचे बने डार्क सर्कल को दूर करने के लिए कच्चे आलू की कुछ स्लाइस को काटकर आंखों पररखें यह घरेलू नुस्खा बहुत लाभदायक है|
  • रुई के टुकड़े को कैस्टर ऑयल में भिगोकर थोड़ा सा निचोड़कर आंखों पर लगाने से आंखों में एलर्जी की समस्या से आराम मिलता है|

मिर्गी(epilepsy)

मिर्गी (epilepsy)

मिर्गी

मिर्गी एक मस्तिष्क का विकार है जिसमें लोगों को दौरे का अनुभव होता है मिर्गी यानी एपिलेप्सी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं|मरीज के दिमाग में कई तरह की तरंगें पैदा होने लगती हैं और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और मरीज कुछ देर के लिए बेहोश हो जाता है|डब्ल्यूएचओ के अनुसार पूरी दुनिया में 5 करोड लोग मिर्गी से पीड़ित हैं इसका प्रभाव शरीर के किसी एक हिस्से पर देखने को मिल सकता है जैसे हाथ या पैर पर|

पुरुषों में निम्नलिखित स्थितियों में दौरा पड़ने की संभावना बढ़ती है जैसे-शराब का सेवन करना , तनाव होना , पर्याप्त नींद न लेना, ब्लड प्रेशर का कम हो जाना इत्यादि कारणों में मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं|

मिर्गी के प्रकार (Epilepsy types)

मिर्गी के चार प्रकार होते हैं

1.सामान्यीकृत मिर्गी-सामान्यीकृत मिर्गी यदि आपके पास इस प्रकार की मिर्गी है, तो दौरे मस्तिष्क के दोनों किनारों पर शुरू होते हैं ।अगर पूरे दिमाग में करंट फैलता है और मरीज बेहोश हो जाता है। यह सबके कॉमन है।

 मिर्गी के इस प्रकार के दो मूल प्रकार के दौरे होते हैं:

  • सामान्यीकृत मोटर बरामदगी- इन्हें “ग्रैंड माल” बरामदगी कहा जाता था। वे आपके शरीर को उन तरीकों से स्थानांतरित करने का कारण बनते हैं जिन्हें आप कभी-कभी नाटकीय रूप से नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। टॉनिक-क्लोनिक दौरे एक उदाहरण हैं। जब यह हिट होता है, तो आप चेतना खो देते हैं और आपकी मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं और झटका लगता है। अन्य प्रकार के बारे में आप अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं जिसमें क्लोनिक, टॉनिक और मायोक्लोनिक शामिल हैं।
  • सामान्यीकृत गैर-मोटर (या अनुपस्थिति) बरामदगी- उन्हें “पेटिट माल” बरामदगी कहा जाता था। कुछ विशिष्ट प्रकार जिन्हें आप सुन सकते हैं अपने चिकित्सक का उल्लेख विशिष्ट, atypical और मायोक्लोनिक हैं।

2.फोकल मिर्गी-फोकल मिर्गी इस प्रकार की मिर्गी में, मस्तिष्क के एक तरफ एक विशेष क्षेत्र (या मस्तिष्क कोशिकाओं के नेटवर्क) में दौरे विकसित होते हैं। इन्हें “आंशिक बरामदगी” कहा जाता था।इसमें करंट शरीर के एक हिस्से से निकलता है और उसी हिस्से में रहता है।

3.सामान्यीकृत और फोकल मिर्गी-सामान्यीकृत और फोकल मिर्गी जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह एक प्रकार की मिर्गी है जिसमें लोगों को सामान्य और फोकल दौरे दोनों होते हैं। इसमें मरीज कोई हरकत नहीं करता। गुमसुम बैठा रहता है। हाथ हिलने लगता या मुंह हिलाने लगता है लेकिन बात नहीं करता।

4.अज्ञात यदि सामान्यीकृत या फोकल मिर्गी-अज्ञात यदि सामान्यीकृत या फोकल मिर्गी कभी-कभी, डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी व्यक्ति को मिर्गी है, लेकिन वे नहीं जानते कि बरामदगी फोकल या सामान्यीकृत है या नहीं। यह तब हो सकता है जब आप अकेले थे जब आपके पास दौरे थे, इसलिए कोई भी वर्णन नहीं कर सकता कि क्या हुआ। यदि आपका परीक्षण परिणाम स्पष्ट नहीं हैं, तो आपका डॉक्टर आपके मिर्गी के प्रकार को “अज्ञात या सामान्य और फोकल मिर्गी” के रूप में वर्गीकृत कर सकता है।

मिर्गी के लक्षण (epilepsy symptoms)

  • व्यक्ति की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है
  • व्यक्ति बेहोश हो जाता है
  • व्यक्ति अचानक गिरकर बेहोश हो जाता है
  • मुंह से झाग निकल जाना
  • हाथ पांव में झटके आना
  • चेहरे का नीला पड़ जाना
  • मरीज का दांतो को चबा लेना
  • कपड़ों में पेशाब निकलना

मिर्गी के कारण (epilepsy causes)

  1. जेनेटिक –जेनेटिक इस रोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जींस की समस्या के कारण दिमाग की नसें ठीक से काम नहीं कर रही हो तो मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं|
  2. सिर पर गंभीर चोट -सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण भी मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है और दौरे पड़ने लगते हैं|
  3. ऑटिज्म-ऑटिज्म की वजह से भी बच्चों और बुजुर्गों में मिर्गी के दौरे पड़ने की संभावना बढ़ जाती है बढ़ती उम्र के साथ यह रोग होने लगता है|
  4. ब्रेन टयूमर-ब्रेन ट्यूमर की समस्या होने पर भी मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं|
  5. रक्त स्त्राव- मस्तिष्क में रक्त स्त्राव या खून का थक्का जम जाने के कारण में मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं यह समानता है मस्तिष्क की कमजोरी के कारण होता है|
  6. संक्रमण –मस्तिष्क में संक्रमण होने के कारण भी मिर्गी के दौरे पड़ने की आशंका बढ़ जाती है|
  7. गर्भावस्था-गर्भावस्था की जटिलताओं के कारण स्त्री में हुए मानसिक संक्रमण से भी मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं|

मिर्गी से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. तुलसी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो मस्तिष्क में फ्री रेडिकल्स को ठीक करते हैं| तुलसी के पत्तों को पीसकर शरीर पर मलने से रोगी को मिर्गी से निजात मिलता है| तुलसी की पत्तियों के साथ कपूर सुंघने  से मिर्गी के रोगी को आराम मिलता है।
  2. प्रोटीन युक्त आहार मिर्गी के रोगी को प्रोटीन और विटामिन युक्त आहार लेना चाहिए सुबह सुबह उठकर मिर्गी के रोगी को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला के चूर्ण का सेवन करना चाहिए|
  3. बकरी का दूध मिर्गी के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होता है एक कप दूध में चौथाई कप मेहंदी के पत्तों का रस मिलाकर प्रतिदिन खाना खाने के बाद दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करना चाहिए इससे मिर्गी रोग से निजात मिलता है|
  4. शहतूत और अंगूर के रस का सेवन मिर्गी के रोगी के लिए काफी लाभदायक है प्रतिदिन सुबह खाली पेट आधा किलो शहतूत और अंगूर का रस का सेवन करना चाहिए|
  5. प्याज के रस के साथ थोड़ा सा पानी मिलाकर पीना मिर्गी के रोगी के लिए लाभदायक है।
  6. मिर्गी के रोगी को अखरोट का सेवन करना चाहिए यह मस्तिष्क को मजबूत बना देता है और मिलने से भी छुटकारा मिलता है|
  7. बादाम को भिगोकर सुबह छील कर खाने से मिर्गी की समस्या दूर होती हैं|
अखरोट
अखरोट

बालों का झड़ना (Hair loss issue)

बालों का झड़ना (Hair loss issue)

बालों का झड़ना

बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गई है|बालों का झड़ना की समस्या से आजकल हर कोई परेशान है|चाहे स्त्री हो या पुरुष आजकल हर कोई बालों को झड़ने से  रोकने के तरीके खोज रहा है कुछ लोगों में यह समस्या जेनेटिक होती है तो वहीं इसके कुछ और कारण भी होते हैं|

बालों का झड़ना की समस्या को डॉक्टरी भाषा में एलोपेसिया कहा जाता है एलोपेसिया होने की समस्या कुछ लोगों में जेनेटिक होती है वहीं इसके कुछ कारण भी होते हैं जैसी पर्याप्त नींद न लेना खानपान आदि हैं|आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन न मिलने से भी बाल झड़ने लगते हैं| और तनाव होने के कारण भी बालों का झड़ना की समस्या हो जाती है|आइए यह जानते हैं कि बालों का झड़ना की समस्या के क्या कारण है?

बालों के झड़ने के कारण (Hair loss causes)

  1. टेंशन और स्ट्रेस बाल झड़ने का मुख्य कारण है और इसका सीधा असर उनकी हेल्थ के अलावा बालों पर भी पड़ता है|
  2. विटामिंस जैसे ए ,बी ,सी, डी इन की कमी से भी बाल झड़ने लग जाते हैं बालों को काफी नुकसान पहुंचता है|
  3. बालों में हेयर कलर इस्तेमाल करने से भी बाल झड़ने लग जाते हैं और कमजोर हो जाते हैं|
  4. फंगल इनफेक्शन भी बालों के झड़ने का मुख्य कारण है|बालों में ज्यादा पसीना आने से बाल चिप-चिप से हो जाते हैं जिनकी वजह से लोग शैंपू का प्रयोग ज्यादा करते हैं जिससे बालों का झड़ना और बालों को नुकसान पहुंचता है|
  5. हेयर ड्रायर का इस्तेमाल करने से भी बाल झड़ने लग जाते हैं|
  6. गर्भावस्था में भी हार्मोन में बदलाव के कारण बालों के झड़ने की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  7. बालों के झड़ने का मुख्य कारण डैंड्रफ भी है|
  8. गर्भावस्था में गर्भनिरोधक गोलियां लेने से भी बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं|
  9. प्रोटीन और आयरन  की कमी भी बालों का झड़ना के मुख्य कारण है|
  10. आहार में अचानक बदलाव भी बालों का झड़ना का कारण बन सकता है|

मेनोपॉज के कारण गिरने लगें बाल

मेनोपॉज या बढ़ती उम्र में बालों का पतला होना बहुत ही कॉमन है। ऐसा एस्ट्रोजेन लेवल के कम होने से होता है।मेनोपॉज और एजिंग का असर न सिर्फ स्किन पर दिखता है बल्कि बाल भी प्रभावित होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ बाल सफेद होने के साथ-साथ पतले भी होने लगते हैं। 40 से 50 वर्ष के आसपास महिलाओं को मेनोपॉज का भी सामना करना पड़ता है, जिसका फिजिकल अपीयरेंस पर भी असर पड़ता है। ब्यूटी एक्सपर्ट शहनाज हुसैन कहती हैं कि बढ़ती उम्र और मेनोपॉज का नकारात्मक प्रभाव त्वचा, बालों और फिगर पर भी होता है। इससे अधिकतर महिलाएं यह सोच बैठती हैं कि वे अब पहले की तरह अट्रैक्टिव नहीं रहीं। दरअसल, एजिंग नेचुरल प्रॉसेस है। समय के साथ शरीर बूढ़ा होने लगता है, जिससे ‘साइन ऑफ एजिंग” झलकने लगती है। इससे डील करके आप बहुत हद तक बालों के झड़ने की समस्या से बच सकती हैं।

बाल क्यों होते हैं पतले

मेनोपॉज या बढ़ती उम्र में बालों का पतला होना बहुत ही कॉमन है।यह ऐसाएस्ट्रोजेन लेवल के कम होने से होता है। बाल अलग-अलग व्यक्तित्व विशेषता और वंशानुगत आधार पर भी सफेद होते हैं। सफेद हुए बालों को दोबारा काला सिर्फ कलरिंग के जरिए ही किया जा सकता। बालों को काला करने के लिए हेयर कलर व डाईकॉमन प्रैक्टिस है, लेकिन इसमें मौजूद केमिकल्स से बाल डैमेज, ड्राई और ब्रिटल होने के साथ बालों के झड़ने की समस्या भी होता है।

बालों का झड़ना रोकने के लिए घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय(Hair loss remedies)

  1. बालों की मालिश-बालों में ब्लड सरकुलेशन न हो पानी के कारण आपके बाल झड़ना शुरू हो जाते हैं 1 हफ्ते में दो या तीन बार तेल की मालिश करने पर आपके बालों का झड़ना बंद हो जाएगा|
  2. प्याज का रस-प्याज का रस बालों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ है| प्याज का रस बालों में आने से 1 घंटे के लिए लगाकर छोड़ दे  और फिर बालों को अच्छे से धो लें  यह आप हफ्ते में दो-तीन बार कर सकते हैं इससे आपके बाल मजबूत हो जाती है और बालों का झड़ना कम होने लगता है|प्याज में सल्फर नाम का पदार्थ पाया जाता है|
  3. आंवला और एलोवेरा-बालों को मजबूत बनाने के लिए और झड़ने से रोकने के लिए आंवला का प्रयोग बहुत ही मददगार साबित हुआ है आंवले में विटामिन सी पाया जाता है जो बालों को झड़ने से रोकता है|
  4. बालों में नारियल का तेल लगाएं-बालों में नारियल का तेल और सरसों का तेल लगाने से आपकी बाल झड़ने बंद हो जाएंगे और यह बालों की ग्रोथ के लिए भी  फायदेमंद है|
  5. दही और नींबू-दही और नींबू का मिक्सर से सर को सर को मसाज करने के बाद 30 से 40 मिनट के लिए छोड़ दे और फिर किसी नेचुरल शैंपू से बालों को धो ले इससे आपके बालों का झड़ना बंद हो जाएगा और आपके बाल मजबूत हो जाएंगे|

बच्चों में दस्त (Diarrhea)

बच्चों में दस्त (Diarrhea)

बच्चों में दस्त

बच्चों में दस्त की समस्या को अतिसार भी कहते हैं|यदि आपके बच्चों की पू अचानक बहुत कम या बहुत अधिक पानी होती है, औरअधिक लगता और विपुल होती है, तो आपके बच्चों में दस्त की समस्या हो सकती है|इसका अंग्रेजी नाम Diarrhea है|

बच्चों के मल या पू की स्थिति आमतौर पर बच्चों के आहार के साथ उतरावचढ़ाव होती है, जो बनावट, रंग और पू की गंध को प्रभावित कर सकती है| बोतलद्वारा दूध पिलाए गये बच्चे सामान्य रूप से स्तनपान वाले बच्चों की तुलनामें सामान्यत मजबूत गंध पू होते है| उदाहरण के तौर पर एक व्यस्क की मल केमुकाबले, बच्चे को पहली बार कम ठोस लग सकता है|

बच्चों में दस्त के लक्षण

बच्चों में दस्त होने का सबसे आम कारण एक विषाणु है, जिसका नाम है रोटावायरस। यह विषाणु अंतड़ियों को संक्रमित करता है, जिससे गैस्ट्रोएंटेराइटिस होता है। यह आंत की अंदरुनी परत को क्षति पहुंचाता है। इस क्षतिग्रस्त परत से तरल पदार्थ का रिसाव होता है और पोषक तत्वों का समाहन किए बिना भोजन इसमें से निकल जाता है। कुछ मामलों में रोटावायरस गंभीर मल संक्रमण और शरीरमें पानी की कमी की वजह से होता है (डिहाइड्रेशन) का कारण बन सकता है।

रोटावायरस से सुरक्षा के लिए शिशु के टीकाकारण के तहत टीका लगाया जाएगा। यह एक अनिवार्य टीका है। शिशु को कौन सी वैक्सीन लगाई जा रही है, इसे देखते हुए उसे दो या तीन खुराक मिलनी चाहिए। पहली खुराक उसे छह से आठ हफ्ते की उम्र में मिलनी ​चाहिए, दूसरी खुराक 10 से 16 हफ्तों के बीच और तीसरी खुराक करीब 14 से 24 हफ्तों के बीच लगनी चाहिए।

ध्यान रखें कि छह हफ्ते से कम उम्र और चार महीने से अधिक उम्र के शिशु को इस टीके की पहली खुराक नहीं दी जा सकती है। यदि आपने यह टीका शिशु को नहीं लगवाया है, तो शिशु के डॉक्टर से बात करें।

बच्चों में दस्त के कारण

  • सबसे आम कारण है, की एक बच्चों में दस्त होता है, जब वायरस से संक्रमण होता है| इसे गैस्ट्रोएंटेरिटिस के रूप में संदर्भित किया जाता है, और उल्टी के साथ या इसके बिना हो सकता है| गैस्ट्रोएंटेरिटिस भी वैक्टीरिया यापरजीवी के संपर्क के कारण हो सकता है|
  • वायरस, वैक्टीरिया या परजीवी बच्चे को दुसरे व्यक्ति से संपर्क दूषित भोजन या पानी के उपयोग के माध्यम से या अगर एक शौचालय जैसे-दूषित सतह को छूता है, और उसके बाद मुह में हाथ डालता है तो उसको पारित किया जा सकता है|

मुझे डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

अगर शिशु में नीचे दिए गए ये लक्षण दिखाई दें, तो आपको शिशु के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हालांकि ये लक्षण इतने आम नहीं हैं, मगर फिर भी इन पर ध्यान देने की जरुरत है। जैसे कि:

  • उल्टी, जो 24 घंटो से ज्यादा जारी रहे
  • बुखार, जो 24 घंटो से ज्यादा जारी रहे
  • शिशु कोई तरल पदार्थ नहीं ले रहा है
  • उसके मल में खून आ रहा है
  • काला मल
  • पेट पर सूजन
  • अत्याधिक रोना

बच्चों में दस्त को दोबारा होने से ब्चाने के  उपाय

  • अपने शिशु के हाथ भी अक्सर धोना याद रखें। आपका शिशु अपनी उंगलियां मुंह में लेकर डायरिया पैदा करने वाले इनफेक्शन की चपेट में आ सकता है। इसी कारण शिशु के खेलने की जगह पर गंदा पानी या गंदे खिलौने या कोई अन्य दूषित चीज नहीं होनी चाहिए।
  • यदि आपके घर में पालतू जानवर है, तो सुनिश्चित करें कि वे घर में मल त्याग न करें। अस्वस्थ जानवर को पशुओं के डॉक्टर के पास ले जाएं और पूरी तरह ठीक होने तक उसे शिशु के कमरे में न आने दें।
  • साथ ही, खाना बनाने और कच्चे मांस और सब्जियों का काम करने के बाद आप अपने हाथ अवश्य धोएं। सुनिश्चित करें कि आप खाना तैयार करने और पकाने के सुरक्षित तरीकों का पालन करें।
  • अपने शिशु को स्वस्थ रखने के लिए यह जरुरी है कि उसे अच्छा पालन-पोषण मिले। सुनिश्चित करें कि आप शिशु का टीकाकरण समय पर कराएं। यदि आपको टीकों को लेकर कोई चिंता या सवाल हैं तो डॉक्टर से बात करें।

बच्चों में दस्त के लिए घरेलू उपचार

  1. केला-केले में भी पेक्टिन होता है। पेक्टिन, अंतडियों के आस-पास एक सुरक्षात्मक परत का निर्माण करता है तथा अंतडों में मौजूद अधित द्रव पदार्थ को सोखता है। इसके अलावा, केलों में पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है| जोइलेक्ट्रोलाइट्स को घटाने में मदद करते हैं।आप अपने बच्चे को 1 केला खाने को दे सकते है ।
  2. मेथी दाना-मेथी के दाने बहुत गरम होते हैं जिसके कारण इसे दस्त के इलाज में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका इस्तेमाल दस्त से निजात पाने के लिए किया जाता है। इसके लिए आप दिन में 2-3 बार एक चम्मच भिगोए हुए मेथी के दानों को एक कप दही में मिलाकर अपने बच्चे को खिलाये।
  3. दही-दही में लाइव-क्लटर्स; नामक बैक्टीरिया होता है। यह बैक्टीरिया दस्त से छुटकारा पाने के लिए लैक्टिक एसिड को उत्पन्नकरता है तथा अंतडों को एक सुरक्षात्मक कवच प्रदान करता है।आप अपने बच्चे को दही खाने की आदत जरुर डाले। 10 ग्राम दही मे 1 चमच्च खसखस मिलाकर बच्चो को देने से लाभ होता है।
  4. आलू-चावल के अलावा, आलू में भी भारी मात्रा में स्टार्च पाया जाता है। अतः दस्त के इलाज में आलू के फायदेमंद विकल्प साबित होगा।इसके लिए आपको आलूओं को उबालकर खाने की जरुरत है। उबले हुए आलूओं पर मिर्च-मसाला या चाट पाउडर डालकर ना खाएं।साथ ही, इन्हें फ्रेंच फ्राइज़ के रुप में भी ना खिलाये क्योंकि इस तरह उनका पेट और खराब हो सकता है।आपको एक बात पर ध्यान देने की जरुरत है कि दस्त से निजात पाने के लिए आपको स्टार्च की जरुरत है ना कि मसालेदार चटपटे व्यंजनों की।
  5. चायपत्ती-नवजात और छोटे बच्चों को चाय पत्ती को पानी में घोलकर वह पानी एक या दो चम्मच करके पिलाया जा सकता है। इससे भी दस्त रूक जाएंगे।
  6. सौंफ-10ग्राम सोंफ को कुट्कर उबलते हुए पानी मे डाल दे और थंडा कर ले ।थंडा होने के बाद उसे मसलकर छान ले और 1 चम्मच पानी1 या 2 चम्मच दुध मे मिलाकर दिन मे तीन बार बच्चे को पिलाने से मरोड़ , अपच ,पेट फुलना ,दस्त आदि नही होते है।दिन निकलते समय यह सौंफ का पानी बच्चे को पिलाने से बच्चे ठीक रहता है।
  7. अदरक-डायरिया के इलाज में अदरक एक स्वस्थ व प्रभावी विकल्प है। अदरक खाने को पचाने में मदद करता है तथा पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखता है।सोंठ या जायफल आथवा दोनो को पानी मे घिसकर 3 रती सुबह- शाम देने से फायदा होता है|
सौंफ
सौंफ