एसिडिटी (Acidity)

एसिडिटी (Acidity)

एसिडिटी

एसिडिटी की समस्या पेट से संबंधित एक आम समस्या है गर्मी में एसिडिटी की समस्या बढ़ जाती है, पाचन करने वाले किसी भी अंग में कोई खराबी हो जाने के कारण पेट से संबंधित समस्याएं शुरू हो जाती है खट्टी डकार आना, सीने में जलन होना , उल्टी आना, पेशाब में जलन आदि एसिडिटी के मुख्य लक्षण है जिनकी पाचन शक्ति खराब होती है उन्हें एसिडिटी की समस्या अधिक रहती है पेट में हाइड्रो क्लोरिक एसिड पाया जाता है जो खाने कोर्ट छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करता है और यह भोजन नली के संपर्क में नहीं आता कई बार विकृति आने पर भोजन नली अपने आप खुल जाती है और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन नली में पहुंच जाता है जिसके कारण सीने में जलन पेट से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती है एसिडिटी के रोगियों में कब्ज जैसी समस्याएं देखने को मिलती है|

एसिडिटी के लक्षण(Acidity symptoms)

  • गले में जलन और बेचैनी का अनुभव होना
  • पेट और सीने में जलन होना एसिडिटी रोग का लक्षण है
  • मछली या उल्टी आना भी एसिडिटी रोग का लक्षण है
  • गले की समस्याएं जैसे गले में खराश होना कई बार सीने में जलन के कारण पेट का अम्लीय द्रव गले तक वापस आ जाता है जिससे खट्टी डकार आने लगती है
  • लगातार सूखी खांसी आना भी एसिडिटी रोग का लक्षण है
  • वजन का घटना
  • कब्ज की शिकायत होना
  • पेट में गैस बन जाने के कारण पेट का फूलना एसिडिटी रोग का मुख्य लक्षण है
  • मुंह में सफेद परत का जमा हो जाना

एसिडिटी क्यों होती है (Acidity causes)

  1. धूम्रपान– धूम्रपान और शराब का सेवन करने से अमाशय में बहुत अधिक मात्रा में एसिडिटी बढ़ जाती है इसलिए धूम्रपान का कम सेवन करना चाहिए|
  2. तनाव– मनुष्य के शरीर में किसी भी बात को लेकर चिंता बढ़ती है और मन में तनाव बढ़ता है तो अमाशय में एसिड निकलने की मात्रा भी बढ़ जाती है|
  3. चटपटा और मसालेदार भोजन– चटपटा और मसालेदार भोजन खाने से एसिडिटी होने लगती है और खट्टी डकार आने लगती है जिसे सीने में जलन पेट से संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती है|
  4. मांसाहारी खाना– मांसाहारी खाने में फैट की मात्रा ज्यादा होती है ऊपर से उससे बनाने के लिए तेल जैसे खाद्य पदार्थ का उपयोग किया जाता है जिस से एसिडिटी होने की संभावना बढ़ जाती है|
  5. रसायनों के संपर्क में आने से– किसानों की कीटनाशक और उर्वरक रसायन के संपर्क में आने से पेट में एसिडिटी होने की आशंका बढ़ जाती है|

एसिड रिफ्लक्स के लक्षण (Acid re flux symptoms)

  • एसिड रिफ्लक्स की समस्या होने पर पाचन क्रिया ठीक नहीं रहती और सीने में छाती में जलन होने लगती है
  • पेट के निचले हिस्से में जलन का महसूस होना
  • मूह मे वापिस भोजन के आने से डकारे आने लगती है
  • कई बार व्यक्ति को घबराहट भी होने लगती है

एसिड रिफ्लक्स के लिए घरेलू उपाय (Acid re flux remedies)

  • एसिड रिफ्लक्स होने पर मुलेठी का चूर्ण का सेवन करने से हमें एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है
  • गुड़ में मैगनीशियम होता हैएसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए खाना खाने के तुरंत बाद गुड़ का सेवन करें ऐसा करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए त्रिफला चूर्ण का प्रयोग भी लाभदायक है
  • दूध में मुनक्का डालकर उबाल कर इसे ठंडा करके पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और काली मिर्च मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • कच्चे जीरे को चबाने के बाद आधा गिलास पानी पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • कच्ची सौंफ चबाने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या से निजात मिलता है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या दूर होती है
  • तुलसी एसिड रिफ्लक्स की समस्या को कम करने में लाभदायक है तुलसी के कुछ पत्ते प्रतिदिन सुबह चबाने  से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  •   नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • पुदीने की पत्तियों को पानी में उबालकर पानी का सेवन करने से एसिडिटी में फायदा होता है
  • मूली का सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • नीम की छाल का चूर्ण या नीम की छाल को पानी में भिगोकर रात भर रखने से प्रतिदिन सुबह पानी का छानकर सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
Neem
नीम ( Ne em )

एसिडिटी मे क्या खाना चाहिए (Acid re-flux food to avoid)

  • खरबूजा- खरबूजे पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है इसलिए इसका सेवन करने से पाचन क्रिया ठीक रहती है और एसिडिटी की समस्या भी भी दूर होती है
  • सौंफ-सौंफ की पत्तियों को खाने से नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • ब्रोकली-ब्रोकली ,गाजर का सेवन करने से पेट और सीने में जलन की समस्या दूर होती है एसिडिटी को भी ठीक करती है
  • पालक– हरी पत्तेदार सब्जियां कैसे पालक को प्रतिदिन की आहार में शामिल करना चाहिए अपनी पालक का प्रतिदिन सेवन करने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • धनिया-धनिया में पर्याप्त मात्रा में पानी पाया जाता है जिससे एसिडिटी की समस्या दूर होती है
  • अजवाइन– अजवाइन का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से एसिडिटी की समस्या से आराम मिलता है
  • केला-केले का सेवन करने से जलन की समस्या दूर होती है यह प्रति दिन की आहार में केले का सेवन करना चाहिए
  • पाइनएप्पल– पाइनएप्पल में डाइजेस्टिव एंजाइम काफी मात्रा में पाया जाता है जो एसिड के स्तर को कम करता है व एसिडिटी की समस्या से आराम मिलता है
  • अदरक-अदरक में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होती है जो पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं जिससे कब्ज की समस्या दूर होती है

कोलेस्ट्रोल क्या होता है (What is Cholesterol)

कोलेस्ट्रोल क्या होता है? (What is Cholesterol)

कोलेस्ट्रोल क्या होता है ?

कोलेस्ट्रोल क्या होता है ?कोलेस्ट्रोल (Cholesterol) रक्त में पाया जाने वाला वसा है जो शरीर की कोशिकाओं का निर्माण करता है और ब्लड सरकुलेशन के रूप में जाना जाता है शरीर में कोलेस्ट्रोल का बढ़ा हुआ सतर कोरोनरी धमनीओं में अवरोध पैदा कर देता हैजब रक्त में इसकी मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, तो रक्त में थक्के जम जाते हैं, जिससे खून गाढ़ा होना, हार्ट अटैक ,आर्टरी ब्लॉकेज और दिल से संबंधित बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती हैयह कोशिकाओं की दीवारों का निर्माण करने और विभिन्न हार्मोंस को बैलेंस करने के लिए भी ज़रूरी होता है|

Cholesterol
कोलेस्ट्रोल क्या होता है ? (what is cholesterol )

कोलेस्ट्रोल के लक्षण(Cholesterol symptoms)

  • व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा पसीना आने लगता है
  • व्यक्ति की सांसे फूलने लगती है
  • इसमें व्यक्ति का सिर लगातार दर्द रहने लगता है यह कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने के कारण होता है
  • व्यक्ति का वजन लगातार बढ़ने लगता है
  • ब्लड प्रेशर का सामान्य से अधिक हो जाना कोलेस्ट्रोल बढ़ने का संकेत होता है
  • व्यक्ति को सीने में दर्द और बेचैनी का अनुभव होने लगता है
  • कोलेस्ट्रोल बढ़ने के कारण व्यक्ति की पीठ घुटनों कमर में अचानक दर्द रहने लगता है
  • व्यक्ति के दिल की धड़कन तेज होने लगती है कोलेस्ट्रोल बढ़ने के कारण दिल तक ब्लड सरकुलेशन ठीक ढंग से नहीं हो पाता जिससे धड़कने तेज होने लगते हैं

कोलस्ट्रोल बढ़ने का कारण(Cholesterol causes)

1.धूम्रपान– सिगरेट शराब का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है जिससे हम हार्ट अटैक , डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो सकते हैं

2.बढ़ती उम्र -उम्र के बढ़ने के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल के स्तर में में परिवर्तन आ जाता है

3.फास्ट फूड का सेवन– फास्ट फूड का सेवन करने से भी कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है

4.वसायुक्त भोजन का सेवन– वसायुक्त भोजन जैसी मछली चिकन आदि का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है

5.अनुवांशिकता-अनुवांशिकता भी कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ाने का मुख्य कारण है यदि आपके परिवार के सदस्यों को उच्च कोलेस्ट्रोल था तो आप भी इस समस्या की चपेट में आ सकते हैं

6.गतिविधि– शारीरिक गतिविधि का न  होना कोलेस्ट्रोल के स्तर को बढ़ा सकता है

कोलेस्ट्रोल का सतर(Cholesterol level)

शरीर में नार्मल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 मिलीग्राम होनी चाहिए कोलेस्ट्रोल रक्त में पाया जाने वाला वसा है कोलेस्ट्रोल शरीर में कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और हारमोंस का निर्माण करने का काम करता है शरीर में कोलेस्ट्रोल का बढ़ा हुआ सतर कोरोनरी धमनीओं में अवरोध पैदा कर देता है जिससे खून गाढ़ा होना, हार्ट अटैक ,आर्टरी ब्लॉकेज और दिल से संबंधित बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है

कोलेस्ट्रॉल का स्तर को बैलेंस बनाने के लिए गुड़ का सेवन करना चाहिए गुड कोरोनरी हार्ट डिजीज को होने से रोकता है और यह कॉलेस्ट्रोल को कोशिकाओं से लीवर में ले जाकर वेट पदार्थों के साथ शरीर से निष्कासित हो जाता है

कोलेस्ट्रोल कैसे कम होता है (How to Cholesterol decrease )

1.टमाटर -टमाटर में लाइकोपीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है

2.बादाम -बादाम खाने से कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम किया जा सकता है यह हरदे को स्वस्थ बनाने में मददगार साबित होता है

cholesterol
बादाम (Ba-dam)

3.सेब का सेवन– सेब में पेक्टिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में हमारी सहायता करती है सेब में एंटी ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो कोलेस्ट्रोल के सतर को कंट्रोल करते हैं

4.अनार -अनार में पोली फेनॉल पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने के साथ-सथ हृदय को स्वस्थ बनाए रखता है

5.विटामिन सी– विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा को हमें अपने प्रति दिन के आहार में शामिल करना चाहिए जिनमें आंवला, शिमला, मिर्च ,ब्रोकली आदि शामिल है

6.विटामिन ई– जैतून के तेल मे पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है

7.लहसुन-प्रतिदिन सुबह लहसुन की एक दो कलियां छीलकर खाने से कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम किया जा सकता है

8.सुबह का नाश्ता -सुबह के नाश्ते में एक कटोरी ओट्स या उपमा का सेवन करना चाहिए और नाश्ते के बाद एक फल जैसे सेब या पपीते का सेवन करना चाहिए जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को बनाए रखने में हमारी मदद करता है

9.रात का भोजन -जैतून के तेल में तला हुआ चिकन और एक कप ब्राउन राइस का सेवन करना चाहिए जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को बनाए रखता है

उच्च कोलेस्ट्रोल को कम करने के आयुर्वेदिक इलाज(High cholesterol treatment)

1.प्याज– एक चम्मच प्याज के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर का प्रतिदिन सेवन करने से कोलेस्ट्रोल को कम किया जा सकता है इसके अलावा प्याज लहसुन व अदरक का सेवन प्रतिदिन अपने आहार में करें

2.आंवला- एक चम्मच आंवला के पाउडर को सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में डालकर पीने से कोलेस्ट्रोल के बढ़ते स्तर को कम किया जा सकता है यह बहुत जल्दी असर करता है

3.नारियल का तेल– नारियल के तेल का सेवन करने से कोलेस्ट्रोल कम होता है

4.संतरे का जूस -संतरे में विटामिन से प्राप्त मात्रा में पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है प्रतिदिन संतरे के जूस का सेवन करने से शरीर में  कोलेस्ट्रोल को कंट्रोल किया जा सकता है

5.ड्राई फ्रूट्स– ड्राई फ्रूट्स को अपने प्रति दिन की आहार में शामिल करने से कोलस्ट्रोल के सत्र को कम किया जा सकता है

6.व्यायाम करना– प्रतिदिन व्यायाम करने से कोलेस्ट्रोल की सेटिंग को कंट्रोल किया जा सकता है

7.: धनियाधनिया को प्रतिदिन के आर में भोजन के साथ उपयोग में लाया जाना चाहिए

8.गुग्ग्ल-यह एक प्रकार की औश्धि होती है जो उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं

कोलेस्ट्रोल टेस्ट(Cholesterol test)

कोलेस्ट्रोल की स्तर की की जांच करने के लिए ब्लड सैंपल ले जाता है यह टेस्ट अधिकतर सुबह खाली पेट की किया जाता है यदि आप अच्छा कोलेस्ट्रोल यानी एचडीएल और कोलेस्ट्रोल सतर का परीक्षण कर रहे हैं तो आप पहले से खाना खा सकते हैं और यदि आप क्राफ्ट कोलेस्ट्रोल यानी एलडीएल और कोलेस्ट्रोल सतर का परीक्षण कर रहे हैं तो आपको अपने परीक्षण से कुछ घंटे पहले पानी के अलावा कुछ भी नहीं खाना चाहिए|

कोलेस्ट्रोल का टेस्ट 20 साल की उम्र से शुरू हो जाता है महिलाओं को 45 साल की उम्र में इसकी जांच शुरू कर देनी चाहिए और पुरुषों में 35 साल की उम्र में कोलेस्ट्रोल के सतर का परीक्षण करना चाहिए यदि आप मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त है तो हर साल कोलेस्ट्रोल का ऑपरेशन करवाते रहना चाहिए|

टीडीएस (Total dissolved solids)

टीडीएस (Total dissolved solids)

टीडीएस

टीडीएस(Total dissolved solids) एक घुलनशील ठोस पदार्थ है जिसमें अकार्बनिक लवण कैल्शियम ,मैग्नीशियम, सोडियम,पोटैशियम ,बाइकार्बोनेट, क्लोराइड और सफेद और कुछ कार्बनिक पदार्थ पानी में पाए जाते हैं|

टीडीएस का उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं,शुद्ध है या नहीं पानी की अशुद्धियों केवल को भी  मापा जाता है टीडीएस यह भी बताते हैं कि पानी में रासायनिक अशुद्धियां मौजूद है या नहीं पानी में अशुद्धियों को बताने वाला टीडीएस कम होना चाहिए पानी से हमारे शरीर को नमक ,खनिज लवण आदि आवश्यक  तत्व मिलते हैं इसलिए पानी में खनिज पदार्थों का होना भी आवश्यक होता है टीडीएस को एमजी प्रति इकाई मात्रा यानी मिलियन की इकाइयों में निर्धारित की जाती है|

फ्लोराइड से नुकसान देने वाले रसायनों को छोड़ दिया जाए तो पीने के पानी में छोटी मात्रा में खनिज रहनी चाहिए लेकिन इसकी मात्रा जरूरत से अधिक नहीं होनी चाहिए|

पीने के पानी में टीडीएस का क्या महत्व होता है (TDS of drinking water)

आइए जानते हैं टीडीएस क्या है टीडीएस का पीने के पानी में क्या महत्व है और प्यूरीफायर कितने प्रकार के होते हैं और किस तरह से कार्य करते हैं इनका वर्णन इस प्रकार से है:-

पानी के बिना जीवन असंभव है हमारे शरीर मे लगभग 60 से 70 परसेंट पानी की मात्रा उपलब्ध है पानी में विधायक गुण होते हैं जिसके कारण गंदगी आसानी से घुल जाती है पानी की वजह से शरीर  के जहरीले पदार्थ जब भी हम पानी पीते हैं तो, हमें यह देखना चाहिए कि पानी पीने योग्य है या नहीं शुद्ध पानी बे स्वाद  और बिना गंध का होता है|

पानी को  टीडीएस के सतर पर निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है:-

  • मीठा पानी-मीठे पानी में टीडीएस का सतर एमजी या लेटर में व्यक्त किया जाता है मीठे पानी में टीडीएस का सतर 500 मिलीग्राम या लीटर से कम यानी टीडीएस जीरो पॉइंट 5 पीपीटी होना चाहिए|
  • खारा पानी-खारे पानी में टीडीएस का सतर पीपीएम में व्यक्त किया जाता है खारे पानी में टीडीएस का सतर 30000 से 40000 मिलीग्राम मीटर यानी टीडीएस 30 से 40 पीपीटी होना चाहिए|
  • ब्रैकिशपानी-ब्रैकिश पानी में टीडीएस का सतर 500 से 30000 मिलीग्राम लीटर यानी टीडीएस जीरो पॉइंट 5 से 30 पीपीटी होना चाहिए
  • हाइपर सलाइन पानी-इसमें टीडीएस का सतर  40,000 से अधिक मिलीग्राम लीटर यानी टीडीएस 40 पीपीटी या इससे अधिक होना चाहिए|

500 मिलीग्राम लीटर पानी के टीडीएस मुल्य को कठोर माना जाता है और टीडीएस के मूल्य को कम करने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे पानी शुद्ध किया जा सके जैसे- कार्बन फिल्टर आरो यानी रिवर्स ऑस्मोसिस है:-

1RO(reverse osmosis) -आरो को रिवर्स ऑस्मोसिस के नाम से जाना जाता है आरओ वाटर प्यूरीफायर ऐसी तकनीक है  जिसमें  प्रेशर डाल कर  पानी को शुद्ध किया जाता है आरो का उपयोग करने पर घुले हुए ठोस पदार्थ नष्ट हो जाते हैंआरओ वाटर प्यूरीफायर का पानी हर कोई प्रयोग मिला रहा है लेकिन वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार आरओ वाटर प्यूरीफायर का पानी का लगातार सेवन करने से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती हैआरो को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है|

  • सेडिमेंट फिल्टर: इसका मुख्य कार्य पानी से रेत धूल के कण निकालकर पानी को शुद्ध करना है|
  • कार्बन फिल्टर: इसका उपयोग पानी के रंग और गंदगी को दूर करने में किया जाता है रिवर्स ऑस्मोसिस मेंब्रेन: इसका उपयोग पानी में पाए जाने वाले सॉलिड पार्टिकल को बाहर करने के लिए किया जाता है|
  • यूवी लैंप: आरो मेंब्रेन पानी में पाई जाने वाली मैग्निशियम , क्लोरीन , आयरन , सोडियम को नष्ट कर देता है जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है यह आरो का मुख्य प्रकार है|

पानी में पाए जाने वाले अकार्बनिक पदार्थ मैग्निशियम, कैलशियम, पोटैशियम  आदि जो निश्चित मात्रा में स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है लेकिन जब इन का स्तर बढ़ जाता है तो यह चिंता का विषय बन जाता है पानी की शुद्धता का पता लगाने के लिए टीडीएस को प्रयोग में लाया जाता है पानी में टीडीएस का सतर 500 पीपीएम तक पीने योग्य है अगर इसका सतर बढ़ जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

2.यू एफ- (UF)अल्ट्रा फिल्ट्रेशन यूएफको अल्ट्रा निस्पंदन के नाम से जाना जाता है यू एस निलंबित ठोस पदार्थ और वजन वाली सामग्री को पानी से बाहर निकाल देता है|

3.यूवी वाटर प्यूरीफायर यह ट्यूब के माध्यम से पानी को शुद्ध करता है इसका उपयोग पानी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवो को मारने के लिए किया जाता है यह पानी को साफ करता है|

TDS of drinking water
TDS of drinking water

टीडीएस का सत्तर (TDS quantity)

टीडीएस का उपयोग पानी की शुद्धता को जांचने के लिए किया जाता है और पानी की कठोरता को मापने के लिए टीडीएस मीटर उपकरण को प्रयोग में लाया जाता है पानी में टीडीएस का सतर कम होना चाहिए पानी में टीडीएस कम करने के लिए आरओ प्यूरीफायर यू एफ यूवी अभी तक नीतियों को प्रयोग में लाया जाता है यह पानी के सूक्ष्म जीवो को नष्ट कर देता है और पानी को शुद्ध करता है।

डब्ल्यूएचओ(WHO) वर्ल्ड स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 100 से डेढ़ सौ टीडीएस के पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और हजार टीडीएस से ज्यादा सतर वाला पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है यह व्यक्ति की मृत्यु का कारण भी बन सकता है|

BIS मानक ब्यूरो के अनुसार पानी में टीडीएस का स्तर 500 पीपीएम सही माना गया है अगर पीने के पानी का कोई स्रोत नहीं है तो इसका सतर हजार पीपीएम तक नियंत्रित किया जा सकता है लगभग 300 पीपीएम का पानी पीने की योग्य माना गया है टीडीएस के स्तर को कम करने से पानी के पीएच पर भी असर पड़ सकता है बीआईएस के अनुसार पीएच का सतर 6 .5 से 8 .5 सही माना गया है।

टीडीएस मीटर (TDS Meter)

टीडीएस मीटर पानी की कठोरता को जांचने के लिए टीडीएस मीटर का उपयोग किया जाता है यह एक डिजिटल टीडीएस मीटर है जिससे पानी को शुद्ध किया जाता है टीडीएस मीटर उपकरण की मदद से पानी की टीडीएस स्तर को मापा जाता है इसका प्रयोग हैंड पंप बारिश के पानी नहर का पानी वाटर प्यूरीफायर के पानी आदि की टीडीएस स्तर को मापने के लिए किया जा सकता है टीडीएस का कम सतर हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है|

TDS Meter
टीडीएस मीटर ( TDS Meter )

आरो का पानी पीने के नुकसान (Side effect of RO water)

पानी में प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व मौजूद होते हैं जैसे:- मैग्नीशियम , पोटेशियम , कैल्शियम , आयरन आदि मिनरल्स शामिल होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है|

वाटर प्यूरीफायर जब पानी को प्यूरिफाई करता है तो इसमें पोषक तत्व जैसे- मैग्निशियम , पोटैशियम ,आईरन , कैल्शियम आदि मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं और हमारे शरीर को पोषक तत्वों ने मिलने के कारण हम कई तरह की बीमारियों की चपेट में आने लगते हैं जो लोग लंबे समय से वॉटर प्यूरिफाई के पानी का प्रयोग कर रहे हैं उन्हें दिल की बीमारी मानसिक कमजोरी सिरदर्द पाचन क्रिया में समस्या होने लगती है|

1.मांसपेशियों में कमजोरी-आरो के पानी का सेवन करने से पानी में पाए जाने वाले कैल्शियम पूरी तरह से नष्ट हो जाता है और हमारे शरीर को पोषक तत्वों ने मिलने के कारण हड्डियों में कमजोरी आने लगती है और हड्डियों में दर्द देने लगता है इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेता है|

2थकान और कमजोरी का अनुभव -आरो का पानी पीने से पानी में पाए जाने वाले एंटी ऑक्सीडेंट मैग्निशियम , कैलशियम , पोटैशियम नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण हमारे शरीर में ऊर्जा का संचार ठीक ढंग से नहीं हो पाता और हम थकान का अनुभव करते हैं।

3.मानसिक तनाव– आरो के पानी का सेवन करने से मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती है भिन्न को नियंत्रित क्रियाशील बनाए रखने के लिए एंटी ऑक्सीडेंट की आवश्यकता होती है जो प्यूरीफायर के कारण नष्ट हो जाते हैं और मानसिक तनाव के शिकार हो जाते हैं|

4.दिल की बीमारियां –आरो का पानी पीने से दिल से संबंधित बीमारियां होने लगती है जैसे हार्ट अटैक।

आरओ का पानी पीने के फायदे(benefit of RO water)

RO वाटर प्यूरीफायर पानी को प्यूरिफाई कर के सभी अशुद्धियों को नष्ट कर देता है और क्लोरीन जैसी हानिकारक पदार्थों को बाहर निकाल देता है

वॉटर प्यूरीफायर पीने के पानी का भारीपन दूर कर देता है और पानी को प्यूरिफाई करके भूल कर निकाल कर बाहर कर देता है

आरो का पानी पीने से पाचन तंत्र एक तरह से काम करता है इस पानी के सेवन करने से खाना भी अच्छी तरह से बनता है|

एलर्जी नाक की (Allergic rhinitis)

एलर्जी नाक की (Allergic rhinitis)

एलर्जी नाक की

एलर्जी नाक की समस्या एक आम समस्या बन गई है| यह नाक से जुड़ी बीमारी है| यह आजकल सभी लोगों में देखने को मिलती है| हमारी नाक प्रतिदिन की शरीर की क्रियाओं में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है| यह सांस के द्वारा शरीर में प्रवेश करने वाले धूल के कणों और हानिकारक पदार्थों को अंदर जाने से रोकती है लेकिन जब यह पदार्थ किसी तरह से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं तो हमारा इम्यून सिस्टम इनके प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करता है और हमें एलर्जी की समस्या होने लगती है|

एलर्जी नाक की एनर्जन  की वजह से होती है इसमें लगातार छीके आना, नाक से पानी बहना और नाक में खुजली होने जैसे लक्षण नजर आते हैं| इसके अलावा बुखार होने की संभावना भी बढ़ जाती है| नाक में होने वाली एलर्जी को एलर्जीक राइनाइटिस कहते हैं| धूल, मिट्टी, प्रदूषण, मौसमी बदलाव और परागकण के शरीर के संपर्क में आने से एलर्जीक राइनाइटिस की समस्या उत्पन्न होती है |यह बीमारी हमारी दिनचर्या को अत्यधिक प्रभावित करती है| इसका सही समय पर इलाज न करने पर अन्य बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है| एलर्जीक राईनाइट्स होने पर अन्य बीमारियों जैसे- साइनस और अस्थमा जैसी-समस्याएं उत्पन्न हो सकती है|

Allergic rhinitis
एलर्जीक राईनाइट्स (Allergic rhinitis)

एलर्जीक राईनाइट्स के लक्षण(Rhinitis symptoms)

  • छींके आना
  • नाक से पानी  बहना
  • आंखों और नाक में खुजली होना
  • लगातार सिर दर्द रहना
  • नाक का बंद होना
  • ग्ले मे खराश और दर्द होना
  • एलर्जी के कारण कुछ लोग अस्थमा बीमारी के शिकार हो जाते हैं और व्यक्ति को सांस लेने मे कठिनाई का अनुभव होता है|
Allergic rhinitis
एलर्जीक राईनाइट्स ( Allergic rhinitis )

एलर्जीक राईनाइट्स के कारण(Rhinitis causes)    

1.परागकण-कुछ लोगों को फूलों के पराग कणों के कारण एलर्जी की समस्या हो सकती है |ऐसे पर्यावरण में जहां अधिक पेड़-पौधे हो वहां आपको एलर्जीक राईनाइट्स होने की संभावना ज्यादा होती है|

2.लाइफ़स्टाइल-आपकी दिनचर्या का आपके स्वास्थ्य पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है| आपके घर की गद्दी और तकिए गंदे होने पर धूलके कण आसानी से शरीर में प्रवेश करने लगते हैं और आपको एलर्जीक राईनाइट्स होने की संभावना बढ़ जाती है|

3.फफूंदफफूंद भी एलर्जी होने का मुख्य कारण है इसलिए अपने बाथरूम और खिड़कियों पर फफूंद न जमने दे |

4.संपर्क में आने सेकिसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से जो इस रोग से पहले से ही ग्रस्त हो आपको इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

5.धूम्रपान गर आपको धूम्रपान से एलर्जी है तो धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने से आपको एलर्जीक राईनाइट्स होने की आशंका होती है|

6.तापमान में अचानक परिवर्तन आने के कारण-तापमान में अचानक परिवर्तन आने के कारण धूल कण किसी भी तरह शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और आप एलर्जीक राईनाइट्स के शिकार हो जाते हैं|

7.मौसम में बदलाव- मौसम में बदलाव आने के कारण एलर्जीक राइनाइटिस होने की संभावना बढ़ती है|

8.खुशबु -ब्यूटी प्रोडक्ट्स जैसे –पाउडर,परफ्यूम,साबुन ,शैम्पू आदि का प्रयोग करने से सिर दर्द और नाक की एलर्जी से संबन्धित समस्याएँ उत्पन हो सकती हैं |

9.प्रदूषण से एलर्जी –कारखानो व चिमनियों से निकलने वाला धूँआ, हवा और पानी को दूषित कर देते हैं| हवा और पानी के संपर्क मे आने से एलर्जी होने लगती है |

10.कीटपतंग –घर के आस पास कॉकरोच,मकड़ी, डेंगू,टीडी आदि के काटने से एलर्जी होने लगती है |

11.आनुवांशिकता-अगर आपके घर मे किसी व्यक्ति को कोई एलर्गी है तो ऐसे व्यक्ति के संपर्क मे आने से आपको एलर्जी हो सकती है |

एलर्जीक राइनाइटिस से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे (Rhinitis treatment)

1.भाप लेने सेएक बर्तन में डेढ़ से दो गिलास गरम पानी ले और उसमें 8 से 10 बूंदें किसी भी तेल की डाल ले अब अपने सिर को तौलिए से ढक ले और झुककर भाप को सांस के द्वारा अंदर ले भाप लेने से एलर्जी की समस्या को खत्म किया जा सकता है और यह बंद नाक को खोलने में हमारी मदद करता है|

2.सेब का सिरका एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद और एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से नाक बहने की समस्या से निजात मिलता है और यह सूजन को भी कम करने में सहायक है|

3.हल्दी रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में हल्दी मिलाकर इसका सेवन करने से नाक की एलर्जी की समस्या दूर होती है और यह सूजन को भी कम करता है|

4.अदरक-अदरक में एंटीहिस्टामाइन गुण पाए जाते हैं जो सूजन को कम करने में हमारी मदद करते हैं किसी बर्तन में तो एक गिलास पानी गर्म करके उसमें छोटा सा अदरक का टुकड़ा डालकर उबाल ले जब मैं पानी आधा रह जाए तब उसमें एक चम्मच शहद और एक नींबू का रस मिलाकर पी ले ऐसा करने से एलर्जीक राईनाइटिस की समस्या दूर होती है|

5.अरंडीकातेल-नाक की एलर्जी होने पर आधा कप पानी मे अरंडी के तेल की 4 से 5 बुँदे डालकर सुबह खाली पेट पीने से एलर्जी की समस्या दूर होती है |  

6.लहसुन-लहसुन में एंटीहिस्टामाइन गुण होते हैं इसलिए प्रतिदिन सुबह उठकर लहसुन की दो से तीन कच्ची कलियों को खाने से एलर्जी की समस्या दूर होती है|

7.मुलेठी-मुलेठी का प्रयोग करने से एलर्जीक राइनाइटिस यानी नाक की एलर्जी के उपचार में मदद मिलती है इसलिए एक गिलास पानी में मुलेठी को उबालकर जब उसका पानी आधा रह जाए तब इस पानी का सेवन करें|

8.नींबू और शहद-1 गिलास गुंगुने पानी मे 1 नींबू निचोड़ लें और 1 चममच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से एलर्जी की समस्या से निजात मिलता है और शहद का सेवन करने से शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकाल आते हैं और वजन भी कम होने लगता है |

 9.ग्रीनटी ग्रीन टी मे शहद मिलाकर इसका सेवन करने से एलर्जी नाक की समस्या से निजात मिलता है|

एलर्जीक राइनाइटिस होने पर सावधानियां

1.घर में वेक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें|

2.धूल कणों और तापमान में परिवर्तन होने पर यह समस्या उत्पन्न होती है इसलिए तब तापमान में अचानक परिवर्तन आने पर बचाव करें|

3..घर से बाहर निकलने पर मुंह पर कपड़ा बांधे और आंखों पर चश्मा लगाएं|

4.गर्म वातावरण से ठंडे वातावरण में प्रवेश न करें|

5.गद्दो औरतकियों पर कवर चढ़ा कर रखें और इन्हें हफ्ते में एक बार तो कर धूप लगवा दें|

6.फफूंद भी एलर्जी होने का मुख्य कारण है इसलिए बाथरूम और खिड़कियों पर फफूंद न जमने दे इसलिए पानी को लीक न होने दे|

7.जिस पदार्थ से हमें एलर्जी है हमें उस पदार्थ के संपर्क में नहीं आना चाहिए|

8.अधिक एलर्जी होने पर दवाओं का सेवन करें|

9.अगर आपको पालतू जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में न रखें और बाल वाले जानवरों से दूर रहें|

स्लीप एपनिया (sleep apnea )

स्लीप एपनिया (sleep apnea )

sleep apnea
स्लीप एपनिया ( sleep apnea using crap machine )

स्लीप एपनिया

स्लीप एपनिया यानि खर्राटे लेने की समस्या एक आम समस्या बन गई है|रात को सोने के दौरान सांस लेने में रुकावट आने लग जाती है| रात को सोने के दौरान श्वसन मार्ग के बंद होने के कारण हवा का प्रवाह फेफड़ों तक नहीं हो पाता जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है| स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति तेजी  से खर्राटे मारने लगते हैं| स्लीप एपनिया की समस्या महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है|65 वर्ष से अधिक उम्र वालों में अधिक पाई जाती है| स्लीप एपनिया होने पर तेजी से खराटे आना ,सोते वक्त पसीना आना , बार-बार जागना ,याददाश्त कमजोर होना , बीपी हाई हो जाना , सोते समय सांस रुकने पर बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण नजर आते हैं|खर्राटे आने के कारण व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस होने लगती है|

स्लीप एपनिया के सिम्पट्म्स (sleep apnea symptoms)

  • सुबह उठने पर सिर दर्द होना|
  • सोते टाइम सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना|
  • सोते समय तेज खर्राटे आना स्लीप एपनिया का मुख्य लक्षण है|
  • सोते वक्त पसीना आना|
  • किसी चीज पर ध्यान केंद्रित न कर पाना|
  • सोते समय सांस रूकने पर बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण नजर आते हैं|
  • दिन में ज्यादा नींद आना, चिड़चिड़ापन होना |
  • याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण नज़र आते है|
  • बीपी हाई हो जाता है|
  • बार बार पेशाब करने के लिए उठना|
  • बार-बार जागना|
  • तनाव होना|
  • अच्छे से नींद कर लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करना|
  • जागते समय मुंह का सूख जाना|

स्लीप एपनिया के कारण (sleep apnea causes)

1.वजन का अधिक होना- अधिक वजन होने के कारण मुंह ,गले ,नाक ,कान के आंतरिक हिस्सों का आकार कम हो जाता है लेकिन गले का आकार बढ़ जाता है जिसके कारण स्लीप एपनिया की समस्या होती है|

2.मांसपेशियों का संकीर्ण होना रात को सोते समय वायु मार्ग की मांसपेशियों संकीर्ण हो जाती है| जिस कारण फेफड़ों को हवा नहीं मिल पाती और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|

3.धूम्रपान करना- शराब का सेवन करने से या बीड़ी, तंबाकू, गुटखा आदि का सेवन करने से स्लीप एपनिया की समस्या हो जाती है| फेफड़ों पर गहरा प्रभाव पड़ता है और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं और सांस लेने में भी कठिनाई का अनुभव होता है|

4.उम्र का बढ़ना- उम्र के बढ़ने के साथ-साथ स्लीप एपनिया की समस्या बढ़ने लगती है| 65 वर्ष की उम्र के लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है | महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह समस्या अधिक होती है|

5.ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप रात को सोते समय वायु मार्ग में उतको के अधिक हो जाने के कारण फेफड़ों तक हवा का प्रवाह नहीं हो पाता| सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है और तेज खराटे आने लगते हैं|

6.जबड़े का छोटा होना जबड़े का छोटा होना खराटे आने का मुख्य कारण है| जबड़ा छोटा होने के कारण लेटने पर जीभ पीछे की तरफ होने लगती है जिससे सांस की नली में रुकावट आती है और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|

7.पीठ के बल सोना– पीठ के बल सोने से भी खराटे होने की समस्या उत्पन्न होती है| पेट के बल सोने से जीभ पीछे की ओर मुड़ जाती है और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है|

स्लीप एपनिया टेस्ट (sleep apnea test)

1.पॉलीसोम्नोग्राफी– यह एक प्रकार का टेस्ट है| सोने के दौरान व्यक्ति की गतिविधियों पर मशीनों द्वारा नजर रखी जाती है| इस टेस्ट में व्यक्ति के हाथों पैरों की गतिविधि खून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा खर्राटे लेने का तरीका आदि गतिविधियों पर मशीनों द्वारा नजर रखी जाती है| और सांस में कितनी देर के लिए रुकावट आती है| इस बात को भी अब्ज़र्व किया जाता है|

2.डायनेमिक एमआरआई- यह भी एक प्रकार का टेस्ट है| खर्राटों के सतर को जांचने के लिए एम आर आई टेस्ट किया जाता है जिससे सोने का तरीका खर्राटे लेने जैसी गतिविधियों को ऑब्जर्व किया जाता है|स्लीप एपनिया से पीड़ित होने पर व्यक्ति के ऑक्सीजन का सतर में गिरावट पाई जाती है|

स्लीप एपनिया होने पर आयुर्वेदिक उपाय(sleep apnea treatment in ayurveda)

1.हल्दी– हल्दी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं| रात को सोने से पहले दूध मे हल्दी पकाकर सेवन करने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या को दूर किया जा सकता है|

Haldi
हल्दी ( Haldi )

2.दालचीनी- दालचीनी अपने सूजन कम करने के गुणों के कारण प्रसिद्ध है| एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद का सेवन करने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या दूर होती है|

3.ओलिव ऑयल- इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं| ओलिव ऑयल का प्रयोग करने से श्वसन तंत्र ठीक ढंग से कार्य करता है|

4.इलायची –रात को सोने से पहले इलायची के दानों को गुनगुने पानी में उबालकर फिर छानकर पानी पीने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या को दूर किया जा सकता है|

इलायची
इलायची

5.पुदीने का तेल- रात को सोने से पहले पुदीने के तेल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर गरारे करने से स्लीप एपनिया यानि खराटो की समस्या दूर होती है| पुदीने का तेल नासा छिद्रो की सूजन को कम करने में भी सहायक है|

6.तुलसी- तुलसी के पत्तों में एंटीफंगल और बैक्टीरिया से लड़ने की एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं| इसलिए प्रतिदिन के आहार में पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से स्लीप एपनिया से छुटकारा मिलता है|

7.प्याज- एक प्याज को काटकर कर 15 मिनट उबलते पानी में डालकर उसके बाद एक तोलिए के साथ अपने सिर को ढक कर भाप लेने से नसिका मार्ग की जीवाणु नष्ट होते हैं जिससे स्लीप एपनिया यानि खराटों की समस्या दूर होती है|

8.तिल का तेल– तिल का तेल स्लीप एपनिया की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| तिल के तेल की कुछ बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से यह समस्या दूर होती है|

9.लहसुन– लहसुन को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना कर भाप लेने से स्लीप एपनिया की समस्या दूर होती है|

बवासीर का ईलाज

बवासीर का ईलाज

बवासीर

बवासीर एक खतरनाक बीमारी है गुदा के पास सूजन नसों को बवासीर के रूप में जाना जाता है। बवासीर दो प्रकार की होती है| बवासीर को आम भाषा में खूनी और बादी बवासीर भी कहते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

1.खूनी बवासीर- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती सिर्फ खून आता है इसका मुख्य कारण मस्सा है जो अंदर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है|

2.बादी बवासीर- बादी बवासीर होने पर पेट खराब रहता है व गैस बन जाती है| कब्ज बनी रहती है| बवासीर की वजह से पेट खराब रहता है इस में दर्द, जलन ,खुजली व शरीर में बेचैनी इत्यादि यह लक्षण सामने आते हैं|

बवासीर
बवासीर

बवासीर के लक्षण

  • मल त्याग करते समय गुदाद्वार में दर्द सा महसूस होना|
  • बवासीर होने पर कई बार रोगी को मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगता है कि उसका पेट अभी साफ नहीं हुआ |यह बवासीर के मस्से होने का प्रथम लक्षण  है|
  • मल त्याग शौच करते समय गुदाद्वार में खून निकलना बवासीर का  मुख्य कारण है|
  • गुदाद्वार की नसों में जब किसी कारण वश दबाव पड़ता है तो उन में सूजन आ जाती है जिसे हम मस्सा कहते हैं|
  • बवासीर होने पर गुदाद्वार में से श्लेष्मा भी निकलता है|
  • गुदा के आसपास चरम खुजली।

बवासीर के कारण

  1. रक्त -इसे खुनी बवासीर भी कहते हैं इसमें रक्त गिरता है|
  2. कड़वा खट्टा नमकीन वस्तुओं को अधिक आना, अधिक कसरत करना ,धूप में अधिक रहना , गरम देश में रहना व गरम पदार्थों का खाना आदि मुख्य कारण है|
  3. दवाओं का सेवन करना अत्यधिक दवाओं का सेवन करने से भी बवासीर हो जाता है
  4. भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी बवासीर हो जाता है|
  5. अधिक तला या मसालेदार भोजन खाने से भी बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  6. प्रसव  के दौरान भी बवासीर होने  की संभावना बढ़ जाती है

बवासीर को दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

1.प्याज के रस में घी और चीनी मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|

2.काले तिल 1 तोला तोले भर मक्खन में मिलाकर सुबह सुबह रोज खाने से 8 दिन में खूनी बवासीर आराम हो जाती है|

3.जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर और सेंधा नमक डालकर रोटी के साथ 8 दिन खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|असीस, कूड़े की छाल ,इंद्रजौ और रसौत इनके चूर्ण को शहद में मिलाकरचावलों के पानी के साथ लेने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है|

Broccoli
Broccoli( जंगली गोभी )

4.काले तिलों का चूर्ण, नागकेसर और मिश्री इन सब को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

5.नागकेसर और मिश्री छह- छह माशे से लेकर 9 माशे ताजा मक्खन में मिलाकर सुबह शाम खाने से 7 दिन में खाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है|

6.कड़वी नीम के पके हुए फलों को गुदा 3 माह लेकर 6 माशे से गुड में मिलाकर 7 दिन तक खाने से बवासीर में आराम मिलता है|प्याज के महीन टुकड़े करके धूप में सुखा लें| सुखे टुकड़ों में से एक तोला प्याज लेकर घी मे तले फिर उसमें एक माशे  तिल और दो तोले मिश्री मिलाकर हर रोज सेवन करें इससे बवासीर में आराम मिलता है|कमल का नरम पत्ता पीसकर मिश्री के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

7.सवेरे ही बकरी का दूध पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

8.गेंदे की पत्तियां 6 मासी से 1 तोले तक और काली मिर्च 2 मासी से 3 मासी तक  इकट्ठा कर ले और पीस छानकर पी जाए इससे बवासीर का खून बंद हो जाता है|

9.कमल की केसर, शहद,ताजा मक्खन, चीनी और नागकेसर सब को एक में मिलाकर खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

10.आम की कोपल पानी में पीस जानकर थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

11.एक नारियल के ऊपर का छिलका लेकर जलाएं और उसकी राख के बराबर शक्कर मिलाकर तीन खुराक बनाए| इसको एक- एक खुराक हर रोज सेवन करने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|