फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में रसौली| यूटरस के अंदर बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉएड  कहते हैं। यह अंगूर के आकार के या खरबूजे के आकार के भी हो सकते हैं ज्यादातर में कैंसर होने का खतरा नहीं होता। 0.2 प्रतिशत मामलों में ही कैंसर होने की सम्भाव्ना होती है|बच्चेदानी या गर्भाशय फाइब्रॉएड वो असामान्य ग्रोथ होती हैं जो किसी महिला के गर्भाशय में विकसित होती है। कभी-कभी ये ट्यूमर काफी बड़े हो जाते हैं और गंभीर पेट का दर्द और हैवी पीरियड फ्लो का कारण बनते हैं। फाइब्रॉएड छोटे हो या फिर यूटरस के बाहर हो तो उसमें किसी भी तरह के लक्षण नजर नहीं आएंगे। जो फाइब्रॉएड यूटरस के अंदर कैविटी में आ रहे होते हैं उनकी वजह से हेवी ब्लीडिंग होती है। इन्हें सबम्यूकस फाइब्रॉएड कहते हैं।  ऐसे बड़े फाइब्रॉएड जो यूटरस के साइज और उसकी कैविटी को बड़ा कर देते हैं हेवी ब्लीडिंग का कारण बनते हैं।

फाइब्रॉएड
फाइब्रॉएड

फाइब्रॉएड के प्रकार

गर्भाशय में रसौली के 5प्रकार होते हैं-

  1. इंट्रा मरल फाइब्रॉएड-यह गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार के भीतर दिखाई देता है यह काफी बड़ा हो सकता है और गर्भ में फैल सकता है
  2. सब्सक्राइबर फाइब्रॉएड -यह गर्भाशय के बाहर स्थित होता है जिससे सेरोसा कहते हैं बीच में मांसपेशी परत में विकसित होते हैं यह अन्य फेवरेट की तरह आम नहीं है|
  3. सब मयू कौसल फाइब्रॉएड -सब मयू कौशल फाइब्रॉएड यानी गर्भाशय में रसौली| यूटरस के अंदर बनने वाली मांसपेशियों के ट्यूमर को फाइब्रॉएड  कहते हैं। यह अंगूर के आकार के या खरबूजे के आकार के भी हो सकते हैं ज्यादातर में कैंसर होने का खतरा नहीं होता। यह आपके गर्भाशय के बीच में मांसपेशी परत में विकसित होते हैं यह अन्य फेवरेट की तरह आम नहीं है |
  4. पिडनकुलेटेड फाइब्रॉएड-सब्ससिरोज़ल ट्यूमर एक स्टेम विकसित कर सकते हैं, एक पतला आधार जो ट्यूमर का समर्थन करता है।
  5. सर्वाइकल फाइब्रॉएड-यह फाइब्रॉएड गर्भ की गर्दन में विकसित होते हैं, जिसे सर्विक्स नाम से जाना जाता है।

गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षण

  • पेट में दर्द होना|
  • गर्भाशय रक्त स्त्राव फाइब्रॉयड का मुख्य लक्षण है|
  • योनि पर दबाव आने के कारण ज्यादा पेशाब आना|
  • फाइब्रॉयड के कारण ज्यादा ब्लीडिंग होने पर महिलाएं आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से ग्रस्त हो जाती हैं|

गर्भाशय में फाइब्रॉएड के कारण

  1. अनुवांशिकता-अगर आपके परिवार में किसी सदस्य को फाइब्रॉएड है तो आपको भी फाइब्रॉएड होने की संभावना है|
  2. हार्मोन-एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन जो गर्भधारण के लिए प्रत्येक मासिक चक्र के दौरान गर्भाशय के अस्तर के विकास को प्रोत्साहित करते हैं जिस कारण फाइब्रॉएड अत्यधिक मात्रा में हो जाता हैफाइब्रॉयड हार्मोन उत्पादन में कमी के कारण रजोनिवृत्ति के बाद कम हो जाते हैं|
  3. अन्य वृद्धि कारक– जो पदार्थ कास को प्रभावित करते हैं गर्भाशय फाइब्रॉएड धीरे या तेजी से भी बढ़ सकते हैं कई फाइब्रॉएड जो गर्भावस्था में मौजूद होते हैं या गर्भावस्था के बाद या तो सिकुड़ जाते हैं या खत्म हो जाते हैं क्योंकि गर्भाशय समान ने आकार में वापस आ जाता है
  4. असंतुलित भोजन: अगर आप रेड मीट या फिर जंक फूड ज्यादा खाती हैं और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कम करती हैं, तो आप इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।
  5. आयु:  फाइब्रॉएड प्रजनन काल के दौरान विकसित होते हैं। खासतौर पर 30 की आयु से लेकर 40 की आयु के बीच या फिर रजनोवृत्ति शुरू होने तक इसके होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। माना जाता है कि रजनोवृत्ति शुरू होने के बाद ये कम होने लगते हैं।

गर्भाशय में रसौली को रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

गर्भाशय में रसौली को रोकने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. अदरक-अदरक गर्भाशय फाइब्रॉएड के इलाज के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध हुई है अदरक गर्भाशय में रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देने में इसका इस्तेमाल किया जाता है रक्त का प्रवाह बढ़ने के कारण गर्भाशय में सूजन कम हो जाती है|
  2. मिल्क थिसल-यह नुस्खा मेटाबॉलिज्म कि मदद कर एस्ट्रोजन से छुटकारा पाने में सहायता करता है एस्ट्रोजन नामक हार्मोन कोशिकाओं को उत्तेजित करता है इसे फाइब्रॉएड में विकास होता है|जड़ी-बूटी से बने मिश्रण की 15 से 20 बूंदे दो-तीन महीनों के लिए ले|
  3. गुग्गुल-यह बहुत ही लाभकारी जड़ी बूटी है फाइब्रॉएड की समस्या होने पर आप इसका सेवन सुबह शाम गुड़ के साथ करें यह नुस्खा आपको आराम दिलाने में सहायक है|
  4. सिंहपर्णी-सिंहपर्णी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी गर्भाशय फाइब्रॉएड के लिए सबसे लाभ्कारीहै। यह लिवर को विषाक्‍त पदार्थों से मुक्‍त कर शरीर से अतिरिक्‍त एस्‍ट्रोजन को साफ करता है। इसे बनाने के लिए 2-3 कप पानी लेकर उसमें सिंहपर्णी की जड़ की तीन चम्‍मच मिलाकर, 15 मिनट के लिए उबालें। फिर इसे हल्‍का ठंडा होने के लिए रख दें। इसे कम से कम 3 महीने के लिए दिन में 3 बार लें। 
अदरक
अदरक

वजन कम होना (Weight loss)

वजन कम होना (Weight loss)

वजन कम होना महिलाओं के लिए एक आम समस्या हो गई है| किसी का वजन कम होता है तो वह उसे बढ़ाकर फिट होना चाहता है और अगर किसी का वजन ज्यादा होता है तो वह इसे घटाकर फिट होने की कोशिश करता है|आप डाइटिंग नहीं कर रहे, आप वज़न घटाने के लिए वर्कआउट भी नहीं कर रहे तब भी तेज़ी से आपका वज़न घटता जा रहा है।  बिना किसी कोशिश के वजन घटना और थकान बहुत सी बीमारियों के दो आम लक्षण हैं।वजन का तेजी से घटना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।अचानक वजन घटने से आपकी जीवन प्रक्रिया में परिवर्तन आ सकता है पर्याप्त नींद न होना भूख कम लगना समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है|

वजन कम होने के कारण (Weight loss reasons)

  1. डायबिटीज –डायबिटीज एक मेटाबॉलिक समस्या है|व्यक्ति के शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता हैऔर रोगियों में इंसुलिन का उत्पादन नहीं होता है|इसके दो कारण हो सकते हैं, या तो ये कि आपके शरीर में इंसुलिन का निर्माण न हो पा रहा हो या फिर आपका शरीर इंसुलिन के लिए प्रतिक्रिया नहीं कर पा रहा हो, या फिर ये दोनों ही कारण हो सकते हैं। वज़न कम होना ,भूख क्म लग्ना इत्यादि इस रोग के मुख्य लक्षणहैं|
  2. थॉयराइड –थॉयराइड होने पर महिलाओं का वजन कम होने लगता है| थायरॉयड ग्लैंड हार्मोन थायरॉयड का निर्माण करते हैं जो कि शरीर का मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करते हैं। इसलिए थायरॉयड के कारण वजन पर प्रभाव हो सकता है। अगर मेटाबोलिज्म बढ़ जाता है तो शरीर का वजन कम होने लगता है उदाहरण के लिए, आपके दिल की धड़कन, जल्दी कैलोरी बर्न करते हैं और पाचन क्रिया। ये शरीर में कैल्शियम के स्तर को भी नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉयड ग्लैंड बहुत अधिक थायरॉयड का निर्माण कर देते हैं तो उस स्थिति को हाइपरथायरॉयडिज़्म कहते हैं।
  3. ट्यूबरक्लॉसिस यानी टीबी-तपेदिक संक्रामक रोग होता है जो माइकोबैक्टिरीअम ट्यूबरक्लॉसिस नामक जीवाणु के कारण होता है।ट्यूबरकुलोसिस के कारण भी तेजी से वजन घटने लगता है टीवी होने का सबसे पहला लक्षण लगातार 2 सप्ताह तक खांसी आना ,रात में सोते वक्त पसीना होना थकान और सीने में दर्द के मुख्य लक्षण है|
  4.  कैंसर-कैंसर होने पर महिलाओं का वजन तेजी से घटने लगता है और शरीर कमजोर दिखने लगता है|कैंसर एक खतरनाक बीमारी है और इसका समय पर पता नहीं लगाया जाए तो यह गंभीर रूप धारण कर सकती है|वज़न कम होना , थकान, मांसपेशियों और जोड़ों में बिना किसी कारण दर्द, रात में पसीने आना, त्वचा में परिवर्तन आदि।
  5. आंत में सूजन-आईबीडी (inflammatory bowel disease) भी कहा जाता है। इसमें आंतों में सूजन आ जाती है जिससे पेट में दर्द होता है और कुपोषण की समस्या भी हो जाती है।पेट में दर्द और ऐंठन, कम भूथ लगना, वज़न घटनाआदि मुख्य लक्षण है|
  6. फेफड़ों की बीमारियां (सीओपीडी)-इस बीमारी के होने पर व्यक्ति का वजन तेजी से घटने लगता है|व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नली ब्लॉक ईयर में सूजन आ जाती है जिसके कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंचता है|

वजन कम करना चाहते हैं तो सुबह उठकर ये एक्सरसाइज करे(Weight loss exercise)

वजन कम करने के लिए योग एक्सरसाइज, डाइटिंग करने पड़ते हैं| वजन कम करने के लिए सबसे अच्छा तरीका सुबह उठकर एक्सरसाइज करना होता है। सुबह के समय शरीर में ऊर्जा होने की वजह से आप ज्यादा देर तक एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। कुछ एक्सरसाइज को रोजाना सुबह करके जल्द से जल्द वजन कम किया जा सकता है। आइए उन एक्सरसाइजस के बारे में जानते हैं जिससे हम जल्दी से अपना वजन कम कर सकते हैं|

  1. स्ट्रेचिंग:अपनी जीवनशैली में अगर आप स्ट्रेचिंग कर लेते हैं तो यह आपकी मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के साथ जोड़ों में दर्द को दूर करते हैं। स्ट्रेचिंग करने से मसल्स टोन होती हैं।
  2. किक बॉक्सिंग:वजन कम करने और आपके शरीर को मजबूत बनाने के लिए किक बॉक्सिंग फायदेमंद होती है। सुबह किक बॉक्सिंग करने से यह फैट को बर्न करता है जिससे आपको एक्सरसाइज करने के लिए ताकत मिलती है।
  3. सूर्य नमस्कार –रोजाना सुबह उठकर सूर्य के सामने बैठकर सूर्य नमस्कार करने से आपका वजन तेजी से कम होने लगता है सूर्य नमस्कार में अलग-अलग प्रकार के आसन होते हैं|
  4. वॉकिंग –शायद आप यह बात नहीं जानते कि सुबह उठकर खाली पेट वह करने से आपको बहुत फायदे हैं अगर आप सुबह उठकर प्रतिदिन 30 से 40 मिनट वॉकिंग करें तो यह आपकी कैलोरी को घटा देता है| सुबह उठकर पार्क में वॉकिंग करने पर आपको शुद्ध ऑक्सीजन मिलती है साथ ही आपका वजन भी कम होने लगता है|वॉकिंग करने से आपका शरीर स्वस्थ रहता है।
  5. स्क्वाट-तेजी से वजन कम करने के लिए यह बहुत फेमस एक्सरसाइज है इस एक्सरसाइज को करने से आपकी बॉडी का वेट कंट्रोल होता है इसी प्रतिदिन ट्राई करें|
  6. Crunches –इस एक्सरसाइज में आप कमर के बल लेट जाएं और अपने घुटनों को मोर ले अब दोनों हाथों को सर के पीछे ले जाएं और अपने कंधों को ऊपर उठाएं फिर वापस नीचे लाए फिर ऊपर करें यह एक्सरसाइज रेगुलर करेंक्रंचिंग एक्सरसाइज प्रतिदिन करने से आप अपने वजन को घटा सकते हैं क्रंचिंग एक्सरसाइज खाली पेट ही करें खाना खाने के बाद एक्सरसाइज करने फिल्म से आपके पेट की समस्या उत्पन्न हो सकती है|

वजन कम करने के आयुर्वेदिक नुस्खे(Weight loss home remedies)

  1. शहद और नींबू– एक गिलास हल्के गर्म पानी में शहद, नींबू का रस और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं। इस मिश्रण को हर सुबह खाली पेट लें। नींबू और शहद को एक साथ मिलाकर पीने से वजन कम होता है।
  2. ग्रीनटी –ग्रीन टी एक बहुत ही अच्छा एंटीऑक्सीडेंट जिससे आपका वजन तेजी से कम होने लगता है| ग्रीन टी में विशेष प्रकार के पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जिससे शरीर में फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है।
  3. लोकी- सुबह नाश्ते में लौकी का सेवन करने से आपका वजन तेजी से कम होने लगेगा और आपकी त्वचा में भी निखार आएगा 200 ग्राम लौकी के जूस में 25 ग्राम कैलोरी ही होती है जो आपकी फैट को बर्न करने में मदद करती है|
  4. बंद गोभी- बंद गोभी का सेवन करने से आपका वजन कम होने लगता है बंदगोभी में 33 कैलोरी होती है जो हमारे फैट को बर्न करते हैं बंद गोभी से हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह वर्षा की मात्रा को कम करता है|
  5. सौंफ-वजन घटाने के लिए सौंफ बहुत फायदेमंद है|सौंफ को रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट इस पानी को छानकर पी ले आपका वजन तेजी से कम होने लगेगा|

यीस्ट संक्रमण

यीस्ट संक्रमण

यीस्ट संक्रमण अधिकतर जननांगों में होने वाला फंगल इनफेक्शन है इसके कारण खुजली जैसे रोग होते हैं पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में यह रोग अधिक देखने को मिलता है योनि में यीस्ट संक्रमण तब होता है जब कैंडिडा एलबीकैंस जो एक प्रकार का इष्ट है आपके पाचन तंत्र या योनि में पाया जाता है यह फंगल संख्या में तेजी से वृद्धि करता है और योनि के ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है|

यीस्ट संक्रमण
यीस्ट संक्रमण

यीस्ट संक्रमण के लक्षण

  • योनी में खुजली या जलन का अनुभव होना
  • योनी में दर्द का अनुभव होना
  • सेक्स के समय दर्द का अनुभव होना
  • योनी पर लाल दानों का होना
  • योनी में सूजन आ जाती है
  • योनी में खुजली के दौरान योनि के आसपास सूजन आ जाना
  • योनी से कभी कभी सफेद पानी का निकलना भी मुख्य लक्षण है

यीस्ट संक्रमण के कारण

  1. गर्भावस्था-गर्भावस्था में योनि यीस्ट संक्रमण का मुख्य कारण एस्ट्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर है|
  2. शुगर- जिन महिलाओं में शुगर की मात्रा ज्यादा है उन महिलाओं को फंगल इंफेक्शन होने का ज्यादा खतरा बना रहता है और महिलाओं के हार्मोन संतुलन में परिवर्तन आता है|
  3. एंटीबायोटिक्स-अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना आपकी योनि में पाए जाने वाले बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है यह यीस्ट संक्रमण का मुख्य कारण है|
  4. माहवारी- मासिक धर्म के चक्र के दौरान हार्मोन के सतर में परिवर्तन आपकी योनि की त्वचा प्रभावित करता है यह यीस्ट संक्रमण  का मुख्य कारण है|
  5. पर्याप्त नींद न लेना –अधिक तनाव में रहने से और पर्याप्त नींद ना लेने से हमारे शरीर का हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है जिससे फंगल संक्रमण होने की आशंका रहती है जिन महिलाओं को पहले ही फंगल संक्रमण है उन्हें योन संबंध नहीं बनाना चाहिए|

यीस्ट संक्रमण से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. योनि में जलन हो तो आंवले के रस में खांड डालकर पिएं|
  2. कफ से दूषित योनी में पीपल,काली मिर्च, सोया, उड़द ,सेंधा नमक इन को पीसकर तर्जनी उंगली के बराबर मोटी बत्ती बनाकर योनी में रखने से लाभ होता है|
  3. गिलोय, हरड़, बहेड़ा, आंवला और जमालगोटा इनके काढ़े की धार बांधकर धोने से योनी की खुजली दूर हो जाती है|
  4. यदि पित से योनी रोग उत्पन्न हुआ हो तो तेल लगाएं ,फाया रखें और पित्त नाशक उपाय करें|
  5. महावारी के बाद स्नान की हुई स्त्री अश्वगंधा को दूध में पकाकर घी डालकर सुबह शाम पिए तो गर्भ रह जाता है|
  6. बोरिक एसिड का प्रयोग योनी में कर सकते हैं इससे फंगल इन्फेक्शन नहीं होता है|
  7. लहसुन का प्रयोग योनी में होने वाले फंगल संक्रमण को रोकता है|
  8. दही मे लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु होता है जो  बैक्टीरिया की संख्या को बढ़ाता है और होने वाले संक्रमण को रोकता है|
  9. पोषक तत्वों से भरपूर फल व सब्जियां खाएं और खूब पानी पीये|
  10. नारियल के तेल के साथ कपूर डालकर योनी में लगाने से  खुजली की समस्या दूर होती है|

फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए उपाय

  1. कॉटन की पेंटी या सूती लेगिंग्स का प्रयोग करें|
  2. सुगंधित सेनेटरी पैड का प्रयोग करने से बचें इस से आपकी योनि में नमी बढ़ेगी जिससे बैक्टीरिया पनपने लगेंगे|
  3. योनी में क्रीम लगाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से धो लें|
  4. मासिक धर्म में गीले कपड़ों को पहनने से बचें|
  5. बात टब में स्नान करने से बचें|
  6. ढीले ढाले पेंट्स या स्कर्ट पहने|

योनी छोटी करने की विधि

  • अधिक संभोग करने या अत्यंत संतान होने से या ऐसे ही कुछ अन्य कारणों से योनि बड़ी हो जाती है ऐसी स्थिति में उसे सिकुड़ने के लिए उपाय करने चाहिए
  • बकरी और गाय दोनों के मट्ठे को मिला कर उससे योनि में छींटे लगाएं और इसी से धोया करें
  • गेंदा को जलाकर उसकी राख योनि में रखकर मले परंतु ध्यान रखें कि उसे कपड़े छान कर ले ताकि कोई कठिन अंश में रह जाए अन्यथा मलने से लाभ किबजाए योनि के छिल जाने से हानि भी हो सकती है
  • बढ़िया भांग पीस कर छान लें फिर कपड़े में इस की पोटली बांधकर योनि में रखें
  • माजूफल, धाय के फूल, फिटकरी इनको पीस कर बेर के समान गोली बनाकर योनि में रखें
  • ढाक की छाल, गूलर के फल इनको समान भाग लेकर चूर्ण कर ले फिर शहद और तिल का तेल मिलाकर योनि में लेप कर ले
  • सूखे हुए बैंगन को पीसकर योनि में रखें
  • लोंग को घोड़ी के दूध में भिगोकर सुखा लें बाद को पीसकर योनि में रखें
  • बबूल,बेर, कचनार ,अनार ,नर्सरी इन को बराबर बराबर लेकर जल में औटाय उसी समय एक कपड़ा उसमें भी भिगो ने फिर उस पानी के छींटे दे और वह कपड़ा योनि में रखें

ओवेरियन सिस्ट मीनिंग

ओवेरियन सिस्ट मीनिंग

ओवेरियन सिस्ट मीनिंग महिलाओं में एक आम समस्या है।ओवेरियन सिस्ट मीनिंग एक तरल पदार्थ से भरी हुई थैली है जो महिलाओं के एक या दोनों अण्डाशयों (ovaries) में बन सकता है | यह एक आम बीमारी है जो किसी भी महिला को हो सकती है और ज़्यादातर हानिकारक नहीं होता ओवेरियन सिस्ट यानि अंडाशय के ऊपर एक परत का बन जाना। कई मामलों में यह सिस्ट बिल्कुल सामान्य होती है लेकिन अगर यह परत सामान्य से अधिक मोटी है तो यह मासिक धर्म को प्रभावित करती है साथ ही गर्भावस्था के लिए भी खतरनाक है। कुछ स्थितियों में ओवेरियन सिस्ट कैंसर भी पैदा कर सकती हैं।

ओवेरियन सिस्ट
ओवेरियन सिस्ट

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण

  1. दर्द के साथ पेट पर सूजन – पेट के निचले भाग में दर्द के साथ-साथ सूजन का होना, ओवेरियन सिस्ट का पहला गंभीर लक्षण है। यदि आप अक्सर ऐसा महसूस करती हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर संपर्क करें।
  2. अपचन और जलन – कई बार बहुत कम खाने के बावजूद आप अपना पेट भरा हुआ महसूस करती हैं, तो यह पेट पर पड़ने वाले दबाव के कारण है। इस स्थिति में आप अपचन संबंधी समस्याएं भी महसूस कर सकते हैं।
  3. कमर दर्द –ओवेरियन सिस्ट मे आपकी कमर पर भी दबाव पड़ता है जिसके कारण मासिक धर्म के समान कमर दर्द होना सामान्य हो जाता है।
  4. व्जाइना– ओवेरियन सिस्ट होने पर पेशाब करते समय दर्द या तकलीफ होने के साथ-साथ लगतार यूरिनेशन की समस्या हो सकती है।
  5. मासिक धर्म–ओवेरियन सिस्ट का मुख्य लक्षण लंबे समय तक मासिक धर्म समय पर न होना इस स्थ‍िति में पेट के एकदम निचले भाग में तेज या हल्का दर्द भी हो सकता है।
  6. उल्टी आना – अंडाशय की ऊपरी झिल्ली का झरण नहीं होने पर कई बार उबकाई या ऊल्टी आने की स्थिति भी बन सकती है। इस समय तुरंत देखभाल एवं उपचार की जरुरत होती है ताकि इंफेक्शन न फैले।
  7. वजन बढ़ना – यदि बेहद कम समय में आपका वजन बहुत ज्यादा और तेजी से बढ़ रहा है, तो इसका कारण ओवेरियन सिस्ट भी हो सकता है। इस स्थिति को भांपकर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

ओवेरियन सिस्ट के कारण

  • फॉलिकल सिस्ट: महिलाओं में पीरियड्स के दौरान थैलीनुमा आकृति में बनने वाले अंडो को फॉलिकल कहा जाता है। ये थैली महिलाओं के अंडाशय के अंदर होती है, अधिकतर ये थैली फट जाती है और अंडे बाहर निकल जाते हैं, लेकिन जब ये थैली नहीं फटती है तब अंडाशय में मौजूद तरल पदार्थ सिस्ट या गांठ बना देता है।
  • कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट: आमतौर पर ये फॉलिकल के निकलने के बाद खुद नष्ट हो जाते हैं, अगर ये नष्ट नहीं हो पाते हैं, तो इसमें जगह से ज्यादा तरल इकठ्ठा हो जाता है जो कॉपर्स ल्यूटियम सिस्ट बनने का कारण बन जाता है।
  • पॉलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम – कुछ महिलाओं में पॉलिसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम भी हो जाता है। इसमें अंडाशय के अंदर कई सारे छोटे-छोटे सिस्ट या गांठ हो जाती है जिसके बढ़ने पर महिलाओं को बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है।

ओवेरियन सिस्ट सर्जरी उपचार

  1. ओवरी सिस्ट (अंडाशय में गांठ) के इलाज से पहले इसकी पुष्टि के लिए सीटी स्कैन या अल्ट्रासांउड जरूर करवाएं।
  2. लेप्रोस्कोपी सर्जरी – अगर आपकी सिस्ट छोटी है तो इस थेरेपी के जरिए डाक्टर्स नाभि के पास एक छोटा सी चीरा लगाकर सिस्ट को बाहर निकाल लेते हैं।
  3. लैपरोटॉमी सर्जरी – अगर आपकी सिस्ट बड़ी है तो डॉक्टर्स उसे लैपरोटॉमी सर्जरी के जरिए नाभि के पास एक बड़ा चीरा लगाकर बाहर निकाल देते हैं। यही नही, अगर सिस्ट की वजह से गर्भाशय या अंडाशय में कैंसर फैलने का खतरा हो तो वो उन दोनों को भी शरीर से बाहर निकाल सकते हैं।
  4. ओवरी सिस्ट (अंडाशय में गांठ) के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही दवाई लें।

ओवेरियन सिस्ट का आयुर्वेदिक इलाज

  1. सेंधा नमक-एक चम्मच सेंधा नमक को पानी से भरे गर्म पानी के टब में डालें। अब इस टब में 30मिनट के लिए अपने निचले भाग को डूबो कर रखे। ऐसा करने से दर्द में आराम मिलता है।
  2. गर्म सिकाई-ओवेरियन सिस्ट में गरम सिकाई करने से हमें रात मिलती है गर्म पानी की बोतल से अपने पेट के निचले हिस्से में 15 से 20 मिनट सिकाई करने से हमें आराम मिलता है
  3. हर्बल चाय- हर्बल चाय अंडाशय मे ओवेरियन सिस्ट के इलाज के लिए बहुत लाभदायक है
  4. सेब का सिरका-सेब का सिरका का प्रयोग ओवेरियन सिस्ट में बहुत कारगर साबित होता है क्योंकि ओवेरियन सिस्ट पोटेशियम की कमी के कारण होता है इसलिए सेब के सिरके का प्रयोग करने से ये पोटेशियम की कमी को पूरा करता है और ओवेरियन सिस्ट को  सिकुड़ने और कम करने में मदद करता है।
  5. अदरक- ओवेरियन सिस्ट में अदरक बहुत फायदेमंद है अदरक गर्म होने से शरीर में गर्माहट उत्पन्न करता है जिससे मासिक धर्म के दौरान होने वाली पीड़ा दूर हो जाती है।
  6. बादाम-बादाम सिस्ट के लिए बहुत लाभदायक होता है। इसमें मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है जिससे ओवेरियन के दर्द से राहत मिलती है। इसलिए भुने हुए बादाम का सेवन करें।
  7. पानी-ओवेरियन सिस्ट से ग्रस्त महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए|
  8. अलसी- अलसी का सेवन करने से ओवेरी सिस्ट की समस्या दूर हो जाती है|
  9. चुकंदर-चुकंदर हमारे शरीर के सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को साफ कर लीवर की क्षमता को बढ़ाता है|
बादाम
बादाम

ओस्टियोआर्थराइटिस

ओस्टियोआर्थराइटिस

ओस्टियोआर्थराइटिस(Osteoarthritis) को अंग्रेजी में विअर एंड टिअर या डिजनरेटिव आर्थराइटिस भी कहा जाता हैं।शरीर में ऊतकों के समूह को कार्टिलेज कहा जाता हैं। कार्टिलेज शरीर के ऊतकों को मजबूत बनाने का कार्य करते हैं साथ ही शरीर के जोड़ों को लचीला भी बनाते हैं।

कार्टिलेज को जब हानि पहुँचती है तब हड्डियाँ आपस में रगड़ने लगती है। जिसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन उत्पन्न हो जाती है। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। 

बढ़ती उम्र के साथ ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या भी बढ़ती जा रही है। इस प्रकार की आर्थराइटिस में जोड़ों के कार्टिलेज घिस जाते हैं और उनमें चिकनाहट कम होने लगती है। इस स्थिति को सहज मेडिकल भाषा में ऑस्टियोआर्थराइटिस कहते हैं।ओस्टियोआर्थराइटिस अधिकतर घुटनों, कूल्हों, हाथों, और पैरों में होता है|

ओस्टियोआर्थराइटिस
ओस्टियोआर्थराइटिस ( जोड़ो में दर्द )

ओस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण

  • मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और जोड़ों को घुमाने में कठिनाई का अनुभव होता है|
  • प्रभावित जोड़ों पर सूजन हो जाती है|
  • दिनभर की गतिविधि के पश्चात् जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है|
  • लम्बे उपयोग के या लम्बे आराम के बाद जोड़ के प्रभावित क्षेत्र में दर्द का अनुभव होना|
  • लंबी निष्क्रियता के पश्चात् दर्द और जकड़न जो गतिशील होते ही तुरंत चली जाती है|

ओस्टियोआर्थराइटिस के कारण

  1. जोड़ों में चोट लगना-चोट लगने के बाद या जोड़ों के ऑपरेशन के बाद जोड़ों की ठीक ढंग से देखभाल ना करना इसरो का मुख्य कारण बन सकता है|
  2. वजन का बढ़ना-अधिक वजन होने के कारण यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|वजन ज्यादा होने के कारण घुटनों टखनों और कूल्हों आदि के जोड़ों पर बहुत ज्यादा वजन बढ़ना इस रोग का मुख्य कारण है|
  3. अनुवांशिकता के कारण-परिवार में किसी एक महिला को यह रोग होने से दूसरे व्यक्ति में इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|
  4. उम्र का बढ़ना-उम्र बढ़ने के साथ-साथ ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या उत्पन्न हो जाती हैबढ़ी हुई उम्र भी इसके लिए जिम्मेदार है|

जोड़ों में दर्द के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. लहसुन- इसका इस्तेमाल-आप जोड़ों के दर्द से निजात पाने के लिए कर सकते हैं |लहसुन के औषधीय जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करता है इसके लिए लहसुन की दो कलियां प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ खाएं यह बहुत फायदेमंद है|लहसुन के रस को कपूर में मिलाकर मालिश करने से भी दर्द से राहत मिलती है।
  2. हल्दी- हल्दी रक्त के संचार को तेज करता है और जोड़ों के दर्द से आराम दिलाता है गर्म दूध में हल्दी मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीयें।
  3. अदरक- अदरक का प्रयोग करके हम जोड़ों के दर्द से निजात पा सकते हैं|अदरक का पेस्ट बनाकर उसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें|
  4. लाल मिर्च पाउडर-एक कप नारियल के तेल को गर्म करके उसमें दोष बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाएं इस मिश्रण को प्रभावित हिस्से पर लगा कर कम से कम 20 से 30 मिनट के लिए छोड़ दें यह नुस्खा बहुत ही फायदेमंद है|
  5. सेब का सिरका-सेब के सिरके का प्रयोग करने से हमें जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत मिलती है किसी कपड़े को सेब के सिरके में भिगोकर दर्द वाले स्थान पर लपेटे और कुछ समय के लिए छोड़ दें यह घरेलू उपाय बहुत ही लाभदायक है|
  6. मेथी दाना- 5से 10 ग्राम मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर सुबह पानी के साथ लें।यह नुस्खा बहुत ही फायदेमंद है|

ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज

1.एक्‍सरसाइज करें

ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द को दूर करने के लिए एक्‍सरसाइज करें। यह क्षतिग्रस्त जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।यह जोड़ों के आसपास की पेशी का समर्थन मजबूत करता है। और जोड़ों में सुधार और जोड़ों की गतिशीलता बनाये रखता है। 

2.थेरेपी

फिजियोथैरेपी

  • फिजियोथैरेपी गति और लचीलापन की सीमा को बढ़ाने के साथ ही पैर की मांसपेशियां मजबूत बनाती है
  • घुटने के मूवमेंट और लचीलापन को सामान्य करती है
  • बैठने और चलने की तकनीकी में सुधार करती है
  • शरीर के निचले भागों जैसे को ले जोड़ो को मजबूत बनाती है
  • नी कैप के दर्द में कमी और मूवमेंट में सुधार का कारण बनती है की गतिशीलता बनाये रखता है। 

ओस्टियोआर्थराइटिस में लेने वाले आहार

  • आप विटामिन C से समृद्ध आहार जैसे स्ट्रॉबेरी, खट्टे फल, मिर्च, कीवी, हरी-पत्तेदार सब्जियाँ, टमाटर, आलू आदि का सेवन कर सकते है|
  • बीटा-कैरोटीन युक्त आहार जैसे पीले, लाल और नारंगी रंग के फल और सब्ज़ियाँ खा सकते है।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड से समृद्ध आहार जैसे ठन्डे-पानी की मछली, अखरोट, सोया आहार, जैतून, अलसी और अलसी का तेल भी अपने सेवन में शामिल कर सकते है।
हरी सब्जियाँ
हरी सब्जियाँ

एड्स

एड्स

एड्स का मतलब है उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (Acquired Immune Deficiency syndrome)। एड्स HIV मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (Human immunodeficiency virus) से होता है जो कि मानव की प्राकृतिक प्रतिरोधी क्षमता को कमजोर करता है। जब एच.आई.वी. द्वारा आक्रमण करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता क्षय होने लगती है तो इस सुरक्षा कवच के बिना एड्स पीड़ित लोग भयानक बीमारियों क्षय रोग और कैंसर आदि से पीड़ित हो जाते हैं और शरीर को कई अवसरवादी संक्रमण यानि आम सर्दी जुकाम, फुफ्फुस प्रदाह इत्यादि घेर लेते हैं। एच.आई.वी. रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर हमला करता है। ये पदार्थ मानव को जीवाणु और विषाणु जनित बीमारियों से बचाते हैं और शरीर की रक्षा करते हैं। जब क्षय और कर्क रोग शरीर को घेर लेते हैं तो उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं और मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

क्या है HIV

एड्स यानी एक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिन्ड्रोम एक बीमारी है जो ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस या एचआईवी (HIV) के कारण होती है|एचआईवी संक्रमण होने के तुरंत बाद यह एक ‘फ्लू’ जैसी बीमारी होती है. फ्लू केवल कुछ दिनों तक रहता है और बहुत हल्का होता है इस कारण लोग इसे पहचान नहीं पाते| यह वायरस धीरे-धीरे व्यक्ति की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम कर देता है. जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इतनी कम हो जाती है कि वह संक्रमण का विरोध नहीं कर पाता, तो कहा जाता है कि व्यक्ति को एड्स हो गया है|

एड्स के लक्षण

  • एड्स मे व्यक्ति को सिर दर्द और थकान का अनुभव होता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को बुखार हो जाता है|
  • व्यक्ति के गले में खराश रहती है|
  • इस रोग में व्यक्ति को भूख कम लगती है और उनका वजन कम होने लगता है|
  • इस रोग में व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|
  • शरीर पर कई तरह के निशान  का होना|
  • मतली, उल्टी आना |
  • लसीकाओं में सूजन आ जाती है|
Symptoms_of_AIDS
Symptoms_of_AIDS( एड्स के लक्षण )

एड्स के कारण

  1. अगर सामान्य व्यक्ति किसी पीड़ित व्यक्ति के साथ यौन संबंध स्थापित करता है तो यह रोग होता है|
  2. संक्रमित व्यक्ति का ब्लड अ‍ॅसंक्रमित व्यक्ति को देने से इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|
  3. संक्रमित ऑर्गन ट्रांसप्लांट से भी व्यक्ति को एड्स हो जाता है |
  4. अगर कोई महिला एच आई वायरस से संक्रमित है तो वह स्तनपान के द्वारा अपने बच्चे को भी इस रोग से संक्रमित कर सकती है|

एड्स से बचाव के उपाय

  1. उपयोग किए हुए इंजेक्शन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि ये एच.आई.वी. संक्रमित हो सकते हैं।
  2. डॉक्टर को खून चढ़ाने से पहले पता करना चाहिए कि कहीं खून एच.आई.वी. दूषित तो नहीं है।खून चढ़ाने से पहले उसकी अच्छी तरह से जांच कर लेनी चाहिए|
  3. पीड़ित साथी या व्यक्ति के साथ योनि सम्बन्ध स्थापित नहीं करना चाहिएऔर सावधानीपूर्वक कंडोम का प्रयोग करना चाहिए। 
  4. सामान्य व्यक्ति को एच.आई.वी. संक्रमित व्यक्ति के वीर्य, योनि स्राव अथवा रक्त के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
  5. दूषित रक्त के संपर्क में आने से बचना चाहिए|

एड्स से बचने के लिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. काली तुलसी के पत्ते , गिलोय के जड़ की खाल , हरसिंगार के पत्ते , नीम के कोमल एवं ग्वारपाठा का गूदा इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर खूब महीन पीसकर 1 घंटे तक खरल में घोटेइसमें 10 दाने काली मिर्च के डालकर आधा घंटा तक घोटे| इस मिश्रण का 50 ग्राम सुबह,50 ग्राम शाम को पीने से शरीर के सभी प्रकार के विषाणु नष्ट हो जाते हैं और शरीर स्वस्थ होकर गुलाब की तरह  खिल जाता है|
  2. धतूरे की जड़ की छाल , बरगद के कोमल टू से इन दोनों को खूब किस कर चार गुना पानी और बराबर मात्रा में गाय का घी लेकर एक मिट्टी की हांडी में रखकर गर्म करें| हल्की आंच पर गर्म करते हुए जब सारा पानी जलकर केवल  घी रह जाए तो उसे छानकर बोतल में बंद कर ले|10 ग्राम  प्रतिदिन खाएं साथ में ग्वारपाठे की गुदे का शरबत एवं गिलोय का काढ़ा पिएइस नुस्खे से शरीर के विषाणु नष्ट होते हैं और रक्त के श्वेत कणों में वृद्धि होती है|
  3. केले के तने प्रतिदिन सुबह बासी मुंह पिएशाम में एक चावल भर केसर गर्म दूध के साथ पिए|