स्लीप एपनिया (sleep apnea )

स्लीप एपनिया (sleep apnea )

sleep apnea
स्लीप एपनिया ( sleep apnea using crap machine )

स्लीप एपनिया

स्लीप एपनिया यानि खर्राटे लेने की समस्या एक आम समस्या बन गई है|रात को सोने के दौरान सांस लेने में रुकावट आने लग जाती है| रात को सोने के दौरान श्वसन मार्ग के बंद होने के कारण हवा का प्रवाह फेफड़ों तक नहीं हो पाता जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है| स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति तेजी  से खर्राटे मारने लगते हैं| स्लीप एपनिया की समस्या महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है|65 वर्ष से अधिक उम्र वालों में अधिक पाई जाती है| स्लीप एपनिया होने पर तेजी से खराटे आना ,सोते वक्त पसीना आना , बार-बार जागना ,याददाश्त कमजोर होना , बीपी हाई हो जाना , सोते समय सांस रुकने पर बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण नजर आते हैं|खर्राटे आने के कारण व्यक्ति को शर्मिंदगी महसूस होने लगती है|

स्लीप एपनिया के सिम्पट्म्स (sleep apnea symptoms)

  • सुबह उठने पर सिर दर्द होना|
  • सोते टाइम सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना|
  • सोते समय तेज खर्राटे आना स्लीप एपनिया का मुख्य लक्षण है|
  • सोते वक्त पसीना आना|
  • किसी चीज पर ध्यान केंद्रित न कर पाना|
  • सोते समय सांस रूकने पर बेचैनी और घबराहट जैसे लक्षण नजर आते हैं|
  • दिन में ज्यादा नींद आना, चिड़चिड़ापन होना |
  • याददाश्त कमजोर होने जैसे लक्षण नज़र आते है|
  • बीपी हाई हो जाता है|
  • बार बार पेशाब करने के लिए उठना|
  • बार-बार जागना|
  • तनाव होना|
  • अच्छे से नींद कर लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करना|
  • जागते समय मुंह का सूख जाना|

स्लीप एपनिया के कारण (sleep apnea causes)

1.वजन का अधिक होना- अधिक वजन होने के कारण मुंह ,गले ,नाक ,कान के आंतरिक हिस्सों का आकार कम हो जाता है लेकिन गले का आकार बढ़ जाता है जिसके कारण स्लीप एपनिया की समस्या होती है|

2.मांसपेशियों का संकीर्ण होना रात को सोते समय वायु मार्ग की मांसपेशियों संकीर्ण हो जाती है| जिस कारण फेफड़ों को हवा नहीं मिल पाती और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|

3.धूम्रपान करना- शराब का सेवन करने से या बीड़ी, तंबाकू, गुटखा आदि का सेवन करने से स्लीप एपनिया की समस्या हो जाती है| फेफड़ों पर गहरा प्रभाव पड़ता है और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं और सांस लेने में भी कठिनाई का अनुभव होता है|

4.उम्र का बढ़ना- उम्र के बढ़ने के साथ-साथ स्लीप एपनिया की समस्या बढ़ने लगती है| 65 वर्ष की उम्र के लोगों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है | महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह समस्या अधिक होती है|

5.ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप रात को सोते समय वायु मार्ग में उतको के अधिक हो जाने के कारण फेफड़ों तक हवा का प्रवाह नहीं हो पाता| सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है और तेज खराटे आने लगते हैं|

6.जबड़े का छोटा होना जबड़े का छोटा होना खराटे आने का मुख्य कारण है| जबड़ा छोटा होने के कारण लेटने पर जीभ पीछे की तरफ होने लगती है जिससे सांस की नली में रुकावट आती है और सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होता है|

7.पीठ के बल सोना– पीठ के बल सोने से भी खराटे होने की समस्या उत्पन्न होती है| पेट के बल सोने से जीभ पीछे की ओर मुड़ जाती है और सांस लेने में कठिनाई होने लगती है|

स्लीप एपनिया टेस्ट (sleep apnea test)

1.पॉलीसोम्नोग्राफी– यह एक प्रकार का टेस्ट है| सोने के दौरान व्यक्ति की गतिविधियों पर मशीनों द्वारा नजर रखी जाती है| इस टेस्ट में व्यक्ति के हाथों पैरों की गतिविधि खून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा खर्राटे लेने का तरीका आदि गतिविधियों पर मशीनों द्वारा नजर रखी जाती है| और सांस में कितनी देर के लिए रुकावट आती है| इस बात को भी अब्ज़र्व किया जाता है|

2.डायनेमिक एमआरआई- यह भी एक प्रकार का टेस्ट है| खर्राटों के सतर को जांचने के लिए एम आर आई टेस्ट किया जाता है जिससे सोने का तरीका खर्राटे लेने जैसी गतिविधियों को ऑब्जर्व किया जाता है|स्लीप एपनिया से पीड़ित होने पर व्यक्ति के ऑक्सीजन का सतर में गिरावट पाई जाती है|

स्लीप एपनिया होने पर आयुर्वेदिक उपाय(sleep apnea treatment in ayurveda)

1.हल्दी– हल्दी में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं| रात को सोने से पहले दूध मे हल्दी पकाकर सेवन करने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या को दूर किया जा सकता है|

Haldi
हल्दी ( Haldi )

2.दालचीनी- दालचीनी अपने सूजन कम करने के गुणों के कारण प्रसिद्ध है| एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद का सेवन करने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या दूर होती है|

3.ओलिव ऑयल- इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं| ओलिव ऑयल का प्रयोग करने से श्वसन तंत्र ठीक ढंग से कार्य करता है|

4.इलायची –रात को सोने से पहले इलायची के दानों को गुनगुने पानी में उबालकर फिर छानकर पानी पीने से स्लीप एपनिया यानि खर्राटों की समस्या को दूर किया जा सकता है|

इलायची
इलायची

5.पुदीने का तेल- रात को सोने से पहले पुदीने के तेल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर गरारे करने से स्लीप एपनिया यानि खराटो की समस्या दूर होती है| पुदीने का तेल नासा छिद्रो की सूजन को कम करने में भी सहायक है|

6.तुलसी- तुलसी के पत्तों में एंटीफंगल और बैक्टीरिया से लड़ने की एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं| इसलिए प्रतिदिन के आहार में पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से स्लीप एपनिया से छुटकारा मिलता है|

7.प्याज- एक प्याज को काटकर कर 15 मिनट उबलते पानी में डालकर उसके बाद एक तोलिए के साथ अपने सिर को ढक कर भाप लेने से नसिका मार्ग की जीवाणु नष्ट होते हैं जिससे स्लीप एपनिया यानि खराटों की समस्या दूर होती है|

8.तिल का तेल– तिल का तेल स्लीप एपनिया की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| तिल के तेल की कुछ बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से यह समस्या दूर होती है|

9.लहसुन– लहसुन को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना कर भाप लेने से स्लीप एपनिया की समस्या दूर होती है|

बवासीर का ईलाज

बवासीर का ईलाज

बवासीर

बवासीर एक खतरनाक बीमारी है गुदा के पास सूजन नसों को बवासीर के रूप में जाना जाता है। बवासीर दो प्रकार की होती है| बवासीर को आम भाषा में खूनी और बादी बवासीर भी कहते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

1.खूनी बवासीर- खूनी बवासीर में किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होती सिर्फ खून आता है इसका मुख्य कारण मस्सा है जो अंदर की तरफ होता है फिर बाद में बाहर आने लगता है|

2.बादी बवासीर- बादी बवासीर होने पर पेट खराब रहता है व गैस बन जाती है| कब्ज बनी रहती है| बवासीर की वजह से पेट खराब रहता है इस में दर्द, जलन ,खुजली व शरीर में बेचैनी इत्यादि यह लक्षण सामने आते हैं|

बवासीर
बवासीर

बवासीर के लक्षण

  • मल त्याग करते समय गुदाद्वार में दर्द सा महसूस होना|
  • बवासीर होने पर कई बार रोगी को मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगता है कि उसका पेट अभी साफ नहीं हुआ |यह बवासीर के मस्से होने का प्रथम लक्षण  है|
  • मल त्याग शौच करते समय गुदाद्वार में खून निकलना बवासीर का  मुख्य कारण है|
  • गुदाद्वार की नसों में जब किसी कारण वश दबाव पड़ता है तो उन में सूजन आ जाती है जिसे हम मस्सा कहते हैं|
  • बवासीर होने पर गुदाद्वार में से श्लेष्मा भी निकलता है|
  • गुदा के आसपास चरम खुजली।

बवासीर के कारण

  1. रक्त -इसे खुनी बवासीर भी कहते हैं इसमें रक्त गिरता है|
  2. कड़वा खट्टा नमकीन वस्तुओं को अधिक आना, अधिक कसरत करना ,धूप में अधिक रहना , गरम देश में रहना व गरम पदार्थों का खाना आदि मुख्य कारण है|
  3. दवाओं का सेवन करना अत्यधिक दवाओं का सेवन करने से भी बवासीर हो जाता है
  4. भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी बवासीर हो जाता है|
  5. अधिक तला या मसालेदार भोजन खाने से भी बवासीर की समस्या उत्पन्न हो जाती है|
  6. प्रसव  के दौरान भी बवासीर होने  की संभावना बढ़ जाती है

बवासीर को दूर करने के आयुर्वेदिक नुस्खे

1.प्याज के रस में घी और चीनी मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|

2.काले तिल 1 तोला तोले भर मक्खन में मिलाकर सुबह सुबह रोज खाने से 8 दिन में खूनी बवासीर आराम हो जाती है|

3.जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर और सेंधा नमक डालकर रोटी के साथ 8 दिन खाने से बवासीर नष्ट हो जाती है|असीस, कूड़े की छाल ,इंद्रजौ और रसौत इनके चूर्ण को शहद में मिलाकरचावलों के पानी के साथ लेने से खूनी बवासीर ठीक हो जाती है|

Broccoli
Broccoli( जंगली गोभी )

4.काले तिलों का चूर्ण, नागकेसर और मिश्री इन सब को पीसकर मक्खन में मिलाकर खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

5.नागकेसर और मिश्री छह- छह माशे से लेकर 9 माशे ताजा मक्खन में मिलाकर सुबह शाम खाने से 7 दिन में खाने से खूनी बवासीर में आराम मिलता है|

6.कड़वी नीम के पके हुए फलों को गुदा 3 माह लेकर 6 माशे से गुड में मिलाकर 7 दिन तक खाने से बवासीर में आराम मिलता है|प्याज के महीन टुकड़े करके धूप में सुखा लें| सुखे टुकड़ों में से एक तोला प्याज लेकर घी मे तले फिर उसमें एक माशे  तिल और दो तोले मिश्री मिलाकर हर रोज सेवन करें इससे बवासीर में आराम मिलता है|कमल का नरम पत्ता पीसकर मिश्री के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है|

7.सवेरे ही बकरी का दूध पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

8.गेंदे की पत्तियां 6 मासी से 1 तोले तक और काली मिर्च 2 मासी से 3 मासी तक  इकट्ठा कर ले और पीस छानकर पी जाए इससे बवासीर का खून बंद हो जाता है|

9.कमल की केसर, शहद,ताजा मक्खन, चीनी और नागकेसर सब को एक में मिलाकर खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

10.आम की कोपल पानी में पीस जानकर थोड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

11.एक नारियल के ऊपर का छिलका लेकर जलाएं और उसकी राख के बराबर शक्कर मिलाकर तीन खुराक बनाए| इसको एक- एक खुराक हर रोज सेवन करने से बवासीर का खून बंद हो जाता है|

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है (What is Bronchitis Disease)

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है (What is Bronchitis Disease)

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है

ब्रोंकाइटिस बीमारी क्या है ?ब्रोंकाइटिस एक श्वसन संबंधी बीमारी है इसमें मुंह और नाक और फेफड़ों के बीच हवा के मार्ग सूज जाते हैं ब्रोंकाइटिस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों में फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है और वायु मार्ग पर कफ का निर्माण होने लगता है ब्रोंकाइटिस फेफड़ों की लंबी अवधि तक रहने वाली बीमारी है ब्रोंकाइटिस फेफड़ों में होने वाले रोगों  सीओपीडी या लंबे समय तक रहने वाले फुसफुस रोग कहते हैं मे से एक है क्रानिक ब्रोंकाइटिस एक गम्भीर बीमारी है जिसमें श्वासनलि मे निरन्तर जलन या सूजन रहती हैं और अकसर यह सिगरेट के सेवन से होता हैं। ब्रोंकाइटिस में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है

ब्रोंकाइटिस (दमा) फेफड़ों की एक बीमारी है जिसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। ब्रोंकाइटिस को अस्थमा के नाम से भी जाना जाता है ब्रोंकाइटिस होने पर श्वास नलियों में सूजन आ जाती है जिस कारण श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है। श्वसन नली में सिकुड़न के चलते रोगी को सांस लेने में परेशानी, सांस लेते समय आवाज आना, सीने में जकड़न, खांसी आदि समस्‍याएं होने लगती हैं। लक्षणों के आधार अस्थमा के दो प्रकार होते हैं- बाहरी और आंतरिक अस्थमा। 

bronchitis
ब्रोंकाइटिस (bronchitis)

ब्रोंकाइटिस तीन प्रकार का होता है (Three types of bronchitis )

1.एक्यून ब्रोंकाइटिस-फ्लू के कारण होने वाली खांसी जैसे – ब्रोंकाइटिस को एक्यून ब्रोंकाइटिस कहते हैं |इसकी अवधि 3 सप्ताह की होती है|

2.क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस– यह सिगरेट शराब आदि का सेवन करने से सांस की नली में सिकुड़न के कारण होती है इसकी अवधि 2 वर्षों तक होती है|

3.एलर्जीक ब्रोंकाइटिस-इसे अस्थमा के नाम से भी जाना जाता है|

ब्रोंकाइटिस के लक्षण (bronchitis symptoms)

  • इस रोग में व्यक्ति को शरीर में दर्द और थकान का अनुभव होता है|
  • व्यक्ति के गले में खराश हो जाती है|
  • नाक का बहना|
  • इसमें व्यक्ति को लगातार बुखार और खांसी रहता है|
  • व्यक्ति को खांसी के साथ बलगम में खून आने लगता है|
  • मांसपेशियों में दर्द होना|
  • इस रोग में व्यक्ति को गहरी सांस लेते हुए सीने में दर्द का अनुभव होता है|
  • छाती में जकड़न यह बेचैनी का अनुभव होता है|

ब्रोंकाइटिस के कारण(bronchitis causes)

ब्रोंकाइटिस के प्रमुख कारणों में सिगरेट धूम्रपान, सल्फर डी-ऑक्साइड के उच्च स्तर के संपर्क और वातावरण में अन्य प्रदूषकों के संपर्क में शामिल हैं।

1.वायरल संक्रमण– यह वह वायरस जो आम सर्दी या फ्लू करते हैं ब्रोंकाइटिस का भी कारण बन सकते हैं|

2.उत्तेजक पदार्थ -उत्तेजक पदार्थ जैसे धुआं रासायनिक धुएं में सांस लेने से आपकी वायु मार्ग में सूजन पैदा हो जाती है जिससे एक्यूट ब्रोंकाइटिस हो सकता है|

3.बैक्टीरिया का संक्रमण– बैक्टीरिया की वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल ब्रोंकाइटिस विकसित हो जाता है|

4: धूम्रपान करना– बीड़ी सिगरेट शराब तंबाकू का सेवन करने से कई बार ब्रोंकाइटिस होने की समस्या उत्पन्न हो जाती है|

5.अनुवांशिकता-यदि आपके परिवार के किसी सदस्य को यह रोग है तो आप भी ब्रोंकाइटिस का शिकार हो सकते हैं|

6.व्यायाम करना-अधिक व्यायाम करने से भी इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है|

ब्रोंकाइटिस का आयुर्वेदिक इलाज

Garlic
लहसुन ( Garlic )
  1. लहसुन-लहसुनअस्थमा के इलाज में काफी लाभदायक है 50 मिलीलीटर बॉयज में लहसुन की 7 से 8 कलियां उबालें और प्रतिदिन इस पेस्ट का सेवन करने से अस्थमा में आराम मिलता है|
  2. अदरक– अदरक की चाय में लहसुन की तीन कलियां पीसकर मिलाकर पीने से अस्थमा रोग में आराम मिलता है|
  3. अजवाइन– पानी में अजवाइन मिलाकर उबालें और इसकी भाप ले यह घरेलू नुस्खा काफी फायदेमंद है|
  4. लोंग-5 से 6 लोग ले और डेढ़ सौ मिलीलीटर पानी में 5 मिनट तक उबालें| इस मिश्रण को ठंडा होने पर उसमें शहद मिलाएं और गरम-गरम पी लें प्रतिदिन इस मिश्रण का सेवन करने से लाभ मिलता है|
  5. मेथी दाना– एक चम्मच मेथी दाना और एक कप पानी उबाले प्रतिदिन इस मिश्रण का सेवन करने से आपको लाभ अवश्य मिलेगा|
ginger
अदरक ( ginger )

हीमोग्लोबिन (hemoglobin)

हीमोग्लोबिन (hemoglobin)

 हीमोग्लोबिन

हिमोग्लोबिन हमारी रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला लो युक्त प्रोटीन है| यह हमारे शरीर में ऑक्सीजन के प्रभाव को संतुलित करता है| हिमोग्लोबिन हमारी कोशिकाओं से कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक लाने का कार्य करता है और ऑक्सीजन को फेफड़ों से उतको तक पहुंचाने का कार्य करता है |जब  हिमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है तो हमारा शरीर कई बीमारियों का शिकार हो सकता है जैसे- चक्कर आना, आंखों का पीलापन, दिल की धड़कन का असामान्य होना आदि लक्षण सामने आते है।हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से आप एनीमिया के शिकार हो सकते हैं यानी आपके शरीर में खून की कमी आ जाती है|

हिमोग्लोबिन के लक्षण(Low hemoglobin symptoms)

  • व्यक्ति को थकान होने लगती है और उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता|
  • व्यक्ति की आंखों में पीलापन आ जाता है| हाथ की हथेलियों और नाखूनों में भी पीलापन नजर आ सकता है|
  • व्यक्ति का अचानक से वजन घटने लगता है|
  • बालों का झड़ना|
  • दिल की धड़कन क असामान्य हो जाना और थोड़ा सा चलने पर सांस फूलने लगती है|
  • लगातार सिरदर्द रहने लगता है|
  • हाथों और पैरों का सुन्न पड़ जाना|
  • सीने में जलन और दर्द होने लगता है|
  • पीरियड्स में रक्त स्त्राव होना और शरीर में कमजोरी आना जैसे लक्षण होते हैं|

हिमोग्लोबिन की कमी के कारण(Low hemoglobin causes)

1.आयरन की कमी– शरीर में आयरन की कमी होने से खून की कमी हो जाती है जिसके कारण रक्त कोशिकाएं भी  और कमजोर पड़ जाती है जिससे ऑकसीजन का प्रवाह ठीक ढंग से नहीं हो पाता इससे हमारे कार्य करने की क्षमता भी कम हो जाती है|

2.रेड ब्लड सेल्स का देरी से नष्ट होना-जब शरीर के रक्त में लाल कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर उनके निर्माण की सबसे अधिक होती है तब एनीमिया की समस्या उत्पन्न होती है|

3.रेड ब्लड सेल्स की संख्या का कम होना– शरीर में रेड ब्लड सेल्स या हिमोग्लोबिन की संख्या कम होने पर हम कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं जैसे एनीमिया की समस्या|

4.अन्य बीमारी में खून का बहना– एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं के प्रसव के दौरान खून बहने लगता है ना और महिला की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है|

5.गर्भावस्था के दौरान– गर्भवती महिलाओं को बढ़ते शिशु के लिए रखने का निर्माण करना पड़ता है कई महिलाओं को गर्भावस्था में एनीमिया होने की समस्या की संभावना बढ़ जाती है|

6.विटामिन की कमी– शरीर में विटामिन B12 की कमी के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने लगती है जिससे खून की कमी हो जाती है|इसके साथ- साथ शरीर में मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटेशियम की कमी के कारण भी खून में कमी आ जाती है

हीमोग्लोबिन क्या है, आपकी बॉडी में कितना लोहा होना चाहिए?(Low hemoglobin levels)

हड्डियों की अंदरूनी भाग में पाया जाने वाला अस्थि मज्जा है अस्थि मजा में लाल रक्त कण पाए जाते हैं 1 क्यूबिक मिलीलीटर रक्त में लगभग 5000000 रक्त लाल रक्त कण मौजूद होते हैं एक बूंद खून को सूक्ष्म दर्शी से देखने पर लाल रक्त कण गोल लग जाते हैं जो किनारे पर मोटे और बीच में से पतले दिखाई देते हैं|

लाल रक्त कणों के अंदर हीमोग्लोबिन पाया जाता है लाल रक्त कणों के अंदर 30 से 35% भाग हीमोग्लोबिन का होता है।

लाल रक्त कणिकाएँ (Red Blood Cells)
लाल रक्त कणिकाएँ (Red Blood Cells)

मानव शरीर में लोहे की मात्रा-मानव शरीर के कुल वजन का 0.004 प्रतिशत भाग लोहा होता है। इसकी कुल मात्रा शरीर के वजन के अनुसार 3 से 5 ग्राम होती है। इसका 70 प्रतिशत भाग रक्त में लाल कणों के अंदर मौजूद हीमोग्लोबिन में, 4 प्रतिशत भाग मांसपेशियों के प्रोटीन मायोग्लोबिन में, 25 प्रतिशत भाग लीवर में, अस्थिमज्जा, प्लीहा व गुर्दे में संचित भंडार के रूप में तथा शेष 1 प्रतिशत भाग रक्त प्लाज्मा के तरल अंश व कोशिकाओं के एंजाइम्स में रहता है।

हिमोग्लोबिन की कमी को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(Low hemoglobin treatment)

  1. अंकुरित आहार –प्रतिदिन सुबह उठकर अंकुरित अनाज जैसी मूंग चना और गेहूं आदि में नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन करने से हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है।
  2. तिल-तिल का सेवन प्रतिदिन अपने आहार में करने से हिमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है और एनीमिया की समस्या दूर होती है।
  3. गुड-प्रतिदिन अपने आहार मे खाने के बाद गुड़ का सेवन करें ऐसा करने से शरीर में खून की कमी नहीं होगी और हीमोग्लोबिन लेवल में बढ़ोतरी होगी।
  4. अखरोट-अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा पाई जाती है अखरोट में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है इसलिए अखरोट का सेवन करने से हिमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है और खून की कमी नहीं होती।
  5. बादाम- बादाम में मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है जिससे हीमोग्लोबिन की कमी दूर होती है।
  6. अंजीर –अंजीर में विटामिंस, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, सोडियम व पोटेशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है इसलिए अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह उसका सेवन करने से हिमोग्लोबिन की लेवल में बढ़ोतरी होती है।
  7. सेब –सेब का सेवन करने से हिमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है इसलिए प्रतिदिन अपने आहार में सेब को शामिल करना चाहिए।
  8. अनार –अनार कैल्शियम, विटामिन सी और आयरन काफी मात्रा में पाया जाता है इसलिए गुनगुने दूध में दो चम्मच अनार का पाउडर डालकर पीने से हीमोग्लोबिन की कमी की समस्या दूर होती है।
  9. नींबू -नींबू का सेवन करने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है क्योंकि नींबू में विटामिन से भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

10)चुकंदर-चुकंदर की पत्तियों का सेवन करने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है।


सामान्य परिसर(Normal range)

एक हीमोग्लोबिन स्तर को आमतौर पर पूर्ण रक्त गणना (सीबीसी) के एक भाग के रूप में जांचा जाता है, हीमोग्लोबिन की सामान्य सीमा उम्र और लिंग के आधार पर भिन्न होती है। एक वयस्क पुरुष के लिए औसत सीमा 14-18 ग्राम / डीएल और एक वयस्क महिला के लिए 12-16 ग्राम प्रति डेसीलीटर है।

हीमोग्लोबिन संरचना(Hemoglobin structure)

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटीन है जो चार श्रृंखलाओं से बना होता है। इनमें से प्रत्येक श्रृंखला में हीम के रूप में जाना जाने वाला एक यौगिक होता है, जिसमें बदले में लोहा होता है, जो रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन को स्थानांतरित करता है।

Himoglobin Structure
हीमोग्लोबिन संरचना(Hemoglobin structure)

हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं के आकार के लिए जिम्मेदार है, जो आमतौर पर डोनट्स की तरह दिखाई देते हैं लेकिन छेद के बजाय एक पतली केंद्र के साथ। जिन स्थितियों में हीमोग्लोबिन असामान्य है, जैसे कि सिकल सेल एनीमिया, लाल रक्त कोशिकाओं के असामान्य आकार के परिणामस्वरूप समस्याएं हो सकती हैं। रक्त के लाल रंग के लिए हीमोग्लोबिन में वर्णक जिम्मेदार है।

ड्रग एलर्जी (Drug allergy)

ड्रग एलर्जी (Drug allergy)

ड्रग एलर्जी

जब दवाओं का सेवन करने से दवाओं के प्रति शरीर कोई हानिकारक प्रतिक्रिया देता है तो इसे ड्रग एलर्जी कहा जाता है ड्रग एलर्जी का पता लगाने के लिए स्किन टेस्ट नामक परीक्षण किया जाता है कई दवाओं के साइड इफेक्ट्स होते हैं कुछ लोगों में एंटी हिस्टामिन दवाइयों का सेवन करने से साइड इफैक्ट्स होने के कारण सांस लेने में दिक्कत ब्लड प्रेशर कम होना त्वचा पर लाल दाने होना, चक्कर आना ,नाक बहना ,आंखों में खुजली होना आदि लक्षण नजर आने लगते हैं|

ड्रग एलर्जी सिम्पटम्स (drug allergy symptoms)

  • सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना|
  • त्वचा पर लाल चकत्ते होना और उम्मीद से द्रव पदार्थ का निकलना|
  • ब्लड प्रेशर कम होना|
  • आंखों में खुजली ,आंखे लाल होना और आंखों से पानी आना|
  • थकावट महसूस करना है जिसके कारण चक्कर आने लगते हैं|

ड्रग एलर्जी के कारण(drug allergy causes)

  1. सल्फा ड्रग्स
  2. कंट्रास्ट डाई
  3. एस्पिरिन और इबुप्रोफेन
  4. अतिगलग्रंथिता के लिए दवाएं
  5. टीके
  6. आक्षेपरोधी
  7. कीमोथेरेपी दवाएं

ड्रग्स से होने वाली एलर्जी का इलाज

1।एंटी हिस्टामिन –जब आपका शरीर किसी एलर्जन पदार्थ के संपर्क में आता है तो वर्जन को हानिकारक पदार्थ समझने लगता है जिसके कारण शरीर में खुजली और त्वचा संबंधी एलर्जी होने लगती है एंटी हिस्टामिन दवाओं का सेवन करने से ड्रग एलर्जी की समस्या दूर होती है और यह है 1 दिन में एक ही बार प्रयोग में लाने पर इसका असर 24 घंटे तक रहता है|

2.नेजल कॉर्टिकोस्टेरॉइड-किसी दवा से एलर्जी होने के कारण श्वसन मार्ग में सूजन आने पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड जैसी दवाओं का सेवन करने से सूजन को खत्म किया जा सकता हैनेजल कॉर्टिकोस्टेरॉइड सप्रे नामक दवाओं का सेवन करने से ड्रग एलर्जी के लक्षण खत्म हो जाते हैं और इनका शरीर पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं भी नहीं पड़ता|

3.ब्रोंकोडाइलेटर- ब्रोंकोडाइलेटर जैसी दवाओं का सेवन करने से एलर्जी के कारण हुई खांसी से निजात मिलता है और आप को सांस लेने में कठिनाई का अनुभव नहीं होता|

ड्रग एलर्जी टेस्ट(Drug allergy test)

ड्रग एलर्जी एक संवेदनशील प्रतिक्रिया है जो पदार्थ शरीर के संपर्क में आते हैं ऐसे पदार्थों के खिलाफ प्रतिक्रिया प्रतिरक्षा प्रणाली की जाती है|

एलर्जी टेस्ट दो प्रकार से किया जाता है जिसमें स्किन टेस्ट और ब्लड टेस्ट शामिल है एलर्जी टेस्ट से यह पता लगाया जाता है कि आपको किस चीज से एलर्जी है|

एलर्जी टेस्ट के प्रकार:-

1.स्किनटेस्ट-.स्किन टेस्ट में एलर्जी पदार्थ को रोगी की त्वचा के संपर्क में लाया जाता है और परीक्षण किया जाता है कि प्रतिक्रिया होती है या नहीं| एलर्जी स्किन टेस्ट का रिजल्ट कुछ ही घंटों में पता लग जाता है स्किन टेस्ट तीन प्रकार के होते हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है:-

  • स्किन प्रिक टेस्ट -इस टेस्ट में एलर्जी पदार्थ की कुछ बूंदे इंजेक्शन के द्वारा त्वचा के अंदर भेजी जाती है अगर त्वचा पर हानिकारक प्रभाव जैसे -खुजली ,सूजन आदि दिखने लगता है तो यह माना जाता है कि व्यक्ति को इन पदार्थों से एलर्जी है|
  • इंट्रा डर्मलटेस्ट-जब किसी एलर्जी पदार्थ की कुछ बूंदें इंजेक्शन के माध्यम से त्वचा के अंदर डाली जाती है अगर मरीज कोई प्रतिक्रिया नहीं करता तो इंट् रेडर्मल टेस्ट का उपयोग किया जाता है|
  • स्किनपैचटेस्ट– इस टेस्ट में अर्जित पदार्थ को एक पेड़ पर लगाकर उसे स्किन पर बांध दिया जाता है कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस स्किन से संबंधित रोग का पता लगाने के लिए इस टेस्ट का उपयोग किया जाता है|

2.ब्लडटेस्ट-ब्लड टेस्ट में व्यक्ति के खून की कुछ मात्रा इंजेक्शन के द्वारा ली जाती है ब्लड टेस्ट खून में एंटी बॉडीज नामक पदार्थ के स्तर का मापन करता है एलर्जी टेस्ट के द्वारा अगर आपको त्वचा संबंधी संक्रमण है तो उसका पता लगाया जा सकता है अस्थमा रोग की जांच के लिए भी एलर्जी ब्लड टेस्ट का उपयोग किया जाता है|

ड्रग एलर्जी को खत्म करने के आयुर्वेदिक उपाय(drug allergy treatment)

1.मुल्तानीमिट्टी– मुल्तानी मिट्टी को पानी में मिलाकर इसका मिश्रण तैयार कर लें और इसको शरीर पर लगा ले और सूखने पर स्नान कर ले इससे आपको खुजली की समस्या से निजात मिल सकता है|

2.कपूर और नारियलतेल-कपूर को पीसकर उसमें नारियल तेल मिलाकर मिश्रण बना लें अब इस मिश्रण को प्रभावित जगह पर लगाएं ऐसा करने सेआराम मिलेगा|

3.बेकिंग सोडा –नहाते समय पानी में बेकिंग सोडे की कुछ मात्रा डालकर नहाने से खुजली से संबंधित समस्या दूर होती है|

4.एलोवेरा –एलोवेरा में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं एलोवेरा में से जेल को निकालकर लाल चकते पर लगाने से जलन और सूजन की समस्या दूर होती है|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

5.कच्चा आलू –आलू की स्लाइस को काटकर प्रभावित स्थान पर रख दें कच्चा आलू घमोरियां होने की स्थिति में बहुत फायदेमंद है और इससे खुजली की समस्या भी दूर होती है|

6.अदरक-अदरक के छिलके को छीलकर उसकी टुकड़े को पीसकर उबलते हुए पानी में थोड़ी देर के लिए भिगो दें इस मिश्रण का सेवन करने से ड्रग एलर्जी की समस्या दूर होती है|

7.पानीकासेवन-हमें प्रतिदिन अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ यूरिन के साथ बाहर निकल जाते हैं इसलिए ज्यादा पानी पीने से स्किन एलर्जी की समस्या दूरहोती है|

8.करौंदा-करौंदे का सेवन करने से हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है सोने के पाउडर में शहद को मिलाकर इसका मिश्रण बनालें और रात को सोने से पहले इसका सेवन करें यह नुस्खा बहुत ही लाभदायक है|

9.चंदन-चंदन में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो घमौरियों के दर्द को कम करने में हमारी मदद करते हैं चंदन के पाउडर मैं थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना ले इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से जलन से राहत मिलती है|

10.अरंडीकातेल-नाक की एलर्जी होने पर आधा कप पानी मे अरंडी के तेल की चार से पांच बूंदें डालकर सुबह खाली पेट पीने से ड्रग एलर्जी की समस्या दूर होती है|

11.नीम- नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं इसलिए नीम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर पीस लें और इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से घमौरिया की समस्या दूर होती है नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करने से खुजली की समस्या दूर होती है|

Ne em
नीम (Ne em )

किडनी स्टोन यानी पथरी( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन ( Kidney stone pain)

किडनी स्टोन यानी पथरी एक छोटे आकार का पत्थर होता है जो कैलशियम मिनिरल्स सॉल्ट और अन्य अक्ष आर्य तत्वों के मिलने से धीरे-धीरे बड़े कठोर पत्थर के रूप में मूत्र मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है जो किडनी स्टोन छोटी होती है किडनी स्टोन आसानी से मूत्र वाहिनी से बाहर निकल जाती है लेकिन जब यह बड़ी हो जाती है तो पेट के निचले हिस्से में दर्द होना शुरू हो जाता है और सूजन आ जाती है जिससे मूत्र मार्ग में संक्रमण हो जाता है|

kidney stone
किडनी स्टोन ( kidney stone )

किडनी स्टोन के लक्षण(kidney stone symptoms)

  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों का यूरिन गुलाबी लाल या भूरे रंग का आने लगता है पेशाब करने में दिक्कत आ सकती है|
  • किडनी स्टोन से पीड़ित लोगों को पेट के निचले हिस्से में दर्द रहने लगता है और यह दर्द कुछ मिनटों या घंटों तक बना रहता है|
  • किडनी स्टोन के शुरूआती लक्षण में से  एक है उल्टी आना उल्टी दो कारणों से बाहर आती है |पहला स्टोन की स्थानांतरण के कारण और दूसरा किडनी शरीर के अंदर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करती है|
  • किडनी रोग से पीड़ित व्यक्ति का यूरिन मटमैला और बदबूदार होता है|
  • इस रोग में तेज बुखार और ठंड लगने की संभावना होती है|
  • किडनी स्टोन के बड़ा होने पर यह मूत्राशय को ब्लॉक कर देती है जिससे किडनी में दर्दनाक सूजन पैदा हो जाती है और पेट और कमर में दर्द का अनुभव होने लगता है|
  • किडनी स्टोन बड़ा होने पर व्यक्ति को बैठने में परेशानी हो सकती है|
  • किडनी स्टोन के मूत्र मार्ग से मूत्राशय में चले जाने पर बेहद दर्दनाक होता है|

किडनी स्टोन के कारण (Kidney stone causes)

1.प्रोस्टेड फूड का अधिक सेवन करने से-

प्रोस्टेडफूड का अधिक सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है प्रोस्टेड में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जिससे मूत्र मार्ग में सोडियम की मात्रा बढ़ती है| साथ ही साथ कैल्शियम का अधिक उत्सर्जन होने लगता है |प्रोस्टेट फूड में फाइबर की मात्रा कम होती है जिससे यूरिक एसिड की प्रक्रिया में रुकावट आती है|

2.सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन करने से-

सॉफ्ट ड्रिंक्स और कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन करने से शरीर में कैल्शियम को ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है जिससे कैल्शियम के उत्सर्जन की संभावना बढ़ जाती है जो किडनी स्टोन का कारण बनती है|

पानी की कमी से पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन कम करने से शरीर में किडनी स्टोन रोग की समस्या उत्पन्न हो जाती है|

3.अनुवांशिकता-कुछ लोगों को अनुवांशिकता के कारण गुर्दे की पथरी की समस्या हो जाती है| कैल्शियम का स्तर बढ़ने के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है|

4.मोटापा -किडनी स्टोन का मुख्य कारण मोटापा है|

5.दवाओं का सेवन करने से– कैल्शियम वाली एंटासिड लेने वाले लोगों की मूत्र में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है| विटामिन डी से भी कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है इसके कारण किडनी स्टोन की समस्या उत्पन्न होती है|

6.सिगरेट- सिगरेट किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है जिससे वे काम करना भी बंद कर देती हैं धूम्रपान करने से धमनियां कड़ी हो जाती है जिससे किडनी के रक्त प्रभाव में रुकावट पैदा होती है और उसके कार्य करने की क्षमता पर भी गहरा असर पड़ता है|

7.सोडियम का अधिक सेवन किडनी रोग होने पर हमें सोडियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए  सोडियम सीधे किडनी को प्रभावित करता है क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बनाए रखने में मदद करता है |

8.अत्यधिक शराब का सेवन शराब का सेवन करने से किडनी की कोशिका क्षतिग्रस्त होने लगती है और किडनी के आकार में वृद्धि हो सकती है|

(किडनी स्टोन के लिए आयुर्वेदिक उपाय)Kidney stone treatment

1. किडनी स्टोन रोग से बचने के लिए अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए|

2.प्रतिदिन 5 से 6 महीने तक तुलसी के रस में शहद मिलाकर पीने से किडनी स्टोन आसानी से पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाता है|

3.अनार और उसके जूस का सेवन करने से किडनी स्टोन से बचा जा सकता है|

4. तरबूज में पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पानी की कमी को पूरा करता है यह मूत्र मार्ग में एसिड की मात्रा को नियंत्रित रखने में मदद करता है|

5. नींबू का रस, चार टुकड़े तरबूज के, चार बर्फ के टुकड़े, एक संतरा आदि सबको पीसकर जूस बना लें और रोजाना इसका सेवन करें|

6.करेले का जूस के रूप में सेवन करें| प्रतिदिन एक गिलास करेले का जूस पिए|

7.प्रतिदिन एक गिलास मूली का रस पीने से पथरी  जल्दी 21 दिनों के भीतर निकल जाती है|

8.प्रतिदिन पत्थरचट्टा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिएं 15 दिन में किडनी स्टोन नामक रोग से आराम मिल जाएगा|

9.प्रतिदिन एक गिलास अजवाइन का जूस पीने से भी किडनी स्टोन की समस्या खत्म हो जाती है|

10. नारियल पानी का सेवन करने से किडनी स्टोन की समस्या दूर होती है |

Ajwain
अजवाइन ( Ajwain )

साइनस क्या होता है? ( What is sinus )

साइनस क्या होता है ?(What is sinus?)

साइनस क्या होता है ?

साइनस की समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है हमारे सिर में बहुत सारे छिद्र पाए जाते हैं इन छिद्रों को साइनस कहते हैं| यह हमारी सांस लेने में मदद करते हैं| नासा के छिद्रों में पीले रंग का बलगम जम जाने पर सांस लेने में कठिनाई हो सकती है |साइनस की समस्या को ही साइनोसाइटिस (sinusitis)के नाम से जाना जाता है| सर्दियों में साइनस की समस्या अधिक होती है जैसे- जुखाम होना, गले में खराश होना, नाक बहना ,नाक बंद होना आदि लक्षण नजर आते हैं|

छिद्रों में इंफेक्शन होने के कारण नाक के आसपास की जगह जैसे- सिर, माथा, गालों मे दर्द होने का अनुभव होने लगता है| नाक की हड्डी बढ़ना, एलर्जी होना आदि कारणों से भी साइनस की समस्या हो जाती है|

साइनस(sinus)
साइनस(sinus)

साइनस के लक्षण (Sinus symptoms)

  • साइनस रोग मे व्यक्ति के सिर में लगातार दर्द रहता है और दवाई लेने पर भी ठीक नहीं होता|
  • साइनस रोग मे व्यक्ति को बुखार और बेचैनी का अनुभव होता है|
  • साइनस रोग मे व्यक्ति की नाक से पीला लिक्विड गिरता है|
  • साइनस रोग मे आंखों के आसपास के हिस्से में दर्द और सूजन होना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस रोग मे व्यक्ति के बाल सफेद हो जाना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस रोग मे नाक का बहना और खांसी होना जैसे लक्षण नजर आते हैं |
  • साइनस की जगह को दबाने पर दर्द का अनुभव होने जैसी परेशानियां होती है|

साइनस के कारण(Sinus causes)

हमारी सिर में कई प्रकार के छिद्र पाए जाते हैं जो सांस लेने में हमारी मदद करते हैं| इन छिद्रोको साइनस कहते हैं| इन छिद्रो के प्रभावित होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया, फंगल इनफेक्शन, वायरल है आइए जानते हैं किन कारणों से साइनस की समस्या उत्पन्न होती है|

1.जुखामसाइनस का सबसे मुख्य कारण जुखाम है| इस रोग में नाक से पीला रंग का लिक्विड निकलता है और सांस लेने में भी कठिनाई का अनुभव होता है| किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से भी जुखाम होने की आशंका बढ़ने लगती है|

2.नाक की हड्डी का बढ़ना- किशोरावस्था में नाक पर चोट लगने के कारण नाक की हड्डी बढ़ जाती है यह टेढ़ी हो जाती है जिसके कारण साइनस की समस्या पैदा हो जाती है| हड्डी का टेढ़ा होना नाक के छिद्र को प्रभावित करता है जिससे व्यक्ति साइनस का शिकार हो जाते हैं|

3.अस्थमा- अस्थमा साइनस होने का मुख्य कारण है जो फेफड़ों और श्वास नली को प्रभावित करता है अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है जिससे व्यक्ति ठीक से सांस नहीं ले पाता और उसकी साइनस की समस्या होने की आशंका बढ़ने लगती है|

4.एलर्जी दूषित वायु के संपर्क में आने से लोगों को नाक से संबंधित एलर्जी की शिकायत रहती है नाक का बहना, गले में दर्द, सिर दर्द यह सब लक्षण सामने आते हैं तो तुरंत ही चिकित्सक से इलाज करवाएं|

5.खानपान- पोस्टिक भोजन ने खाने पर पाचन तंत्र नली प्रभावित होती है जो आगे चलकर साइनस की समस्या का कारण बनती है|

साइनस के घरेलू उपचार (Sinus home remedies)

1.टमाटर का रस-टमाटर के रस में  एक चम्मच नींबू का रस और नमक को मिलाकर  उबाल ले ठंडा होने के बाद इसका सेवन करें टमाटर का रस टमाटर के रस का सेवन करने से बलगम की परत पतली होती है जिससे नाक बहना बंद हो जाता है टमाटर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे आसपास के अंगों में सूजन भी कम होती है|

2.तिल का तेल– तिल का तेल साइनस की समस्या को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| तिल के तेल की कुछ बूंदें दोनों नासिका छिद्रों में डालने से यह समस्या दूर होती है|

3.सेब का सिरका –एक गिलास गुनगुने पानी में दो से तीन चम्मच सेब का सिरका मिलाकर प्रतिदिन दो से तीन बार सेवन करने से आपके साइनस की समस्या दूर होती है|

4.प्याज-एक प्याज को काटकर कर 15 मिनट उबलते पानी में डालकर उसके बाद एक तोलिए के साथ अपने सिर को ढक कर भाप लेने से नसिका मार्ग की जीवाणु नष्ट होते हैं जिससे साइनस की समस्या दूर होती है|

5.हल्दी-हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं हल्दी का भोजन में सेवन करने से साइनस की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है और चाय में हल्दी डालकर पीने से भी आराम महसूस होता है|

6.अदरक-अदरक अपनी सूजन कम करने वाले गुणों के कारण साइनस की आवाज में कारगर है अदरक और थोड़ी देर के लिए पानी में उबालकर फिर छान्कर उसी पानी में शहद मिलाकर पीने से साइनस की  समस्या से निजात पाया जा सकता है|

ginger
अदरक ( ginger )

7.तुलसी-तुलसी के पत्तों में एंटीफंगल और बैक्टीरिया से लड़ने की एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते हैं इसलिए प्रति दिन की आहार में पानी में तुलसी के पत्ते डालकर उसका काढ़ा बनाकर सेवन करने से साइनस से छुटकारा मिलता है|

8.दालचीनी-दालचीनी अपने सूजन कम करने के गुणों के कारण प्रसिद्ध है एक चौथाई चम्मच दालचीनी और शहद का सेवन करने से साइनस की समस्या दूर होती है|

9.लहसुन– लहसुन साइनस संक्रमण केरोगाणुओ को नष्ट करता है लहसुन को पानी में उबालकर उसका पेस्ट बना कर भाप लेने से साइनस की समस्या दूर होती है|

Garlic
लहसुन ( Garlic )

10.नीलगिरी का तेल  -उबलते पानी में नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें डालकर उस पानी में  उबाले और फिर पानी को  सोख ले और फिर अच्छी तरह तोलिए को नीचोड़कर  माथे पर रखें इससे साइनस की समस्या से राहत मिलेगी|

साइनस की दवा (sinus antibiotic)


बैक्टीरियल साइनसिसिस का आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। एलर्जी साइनसाइटिस के प्रारंभिक उपचार से माध्यमिक बैक्टीरिया साइनस को रोका जा सकता है। साइनसाइटिस और साइनस के घरेलू उपचार में एसिटामिनोफेन (टाइलेनॉल और अन्य), डिकॉन्गेस्टेंट और म्यूकोलाईटिक्स जैसी ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाएं शामिल हैं।

साइनस के इलाज के लिए दवा लेने भी जरूरी होती है लेकिन कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना यह बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है शुरुआत में साइनस के लक्षण नजर आने पर इसका इलाज संभव है लेकिन वक्त रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो ऑपरेशन होने की संभावना बढ़ जाती है ऑपरेशन करवाने के बाद इलाज जारी रखना चाहिए अन्यथा साइनस की समस्या फिर से उत्पन्न हो सकती है|


साइनसाइटिस न केवल तीव्र संक्रमण या सूजन है, बल्कि बार-बार साइनसाइटिस होने की अंतर्निहित प्रवृत्ति भी है। बार-बार ऊपरी श्वसन संक्रमण या साइनसाइटिस की व्यक्तिगत प्रवृत्ति को व्यक्तिवादी उपचार के होम्योपैथिक दृष्टिकोण के साथ सबसे अच्छा इलाज किया जा सकता है। आवर्ती साइनसिसिस होम्योपैथी के साथ अद्भुत उपचार करता है। होम्योपैथी तीव्र संक्रमण के साथ-साथ संक्रमण या एलर्जी की प्रवृत्ति का इलाज करती है। यदि होम्योपैथिक विकल्प को अपनाया जाए तो एंटीबायोटिक्स और साइनस सर्जरी से बचना लगभग हमेशा संभव है। साइनोसाइटिस के लिए होम्योपैथी का जोरदार सुझाव दिया गया है।

साइनस संक्रमण के लिए होम्योपैथिक उपचार(sinus infection treatment in homeopathy)

1.सिलिसियासाइनस के कारण सिर दर्द का इलाज सिलीसिया के साथ किया जाता है सिलीसिया का उपयोग करने के लिए नासा के छिद्रो में निर्वहन कठिन कवरिंग में बंद हो जाता है।5-5 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए ।

2.बेलाडोना: यह निर्वहन को आसान बनती है और साइनस सिरदर्द के लिए शीर्ष होम्योपैथिक समाधान है: सामान्य होम्योपैथिक पर्चे बेलाडोना साइनस रोगों के लिए एकदम सही होम्योपैथिक उपचार में से एक है जब साइनस सिरदर्द परेशान निर्वहन की वजह से है. बेलाडोना असाधारण रूप से उपयोगी होता है जब एक साइनसिसिटिस रोगी क्रूर सिरदर्द से ग्रस्त होता है. सिर को मजबूती से या वजन लागू करने से रोगी को सिरदर्द से उन्मूलन मिल सकता है|

3.काली बिच्रोम: साइनसिसिटिस के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक समाधान एक बार फिर गले में छोड़ने के साथ होता हैं|5-5 गोली दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए ।

होमयोपथी मे ईलाज

होम्योपैथी में साइनस के इलाज के लिए इस तरह की दवाएं दी जाती हैं जिनसे सिरदर्द में आराम मिले और कैविटी में भरा बलगम जुकाम के जरिए बाहर निकले।ये सभी दवाएं डॉक्टर मरीज की उम्र और बीमारी के लक्षणों के मुताबिक देता है। जब साइनस की प्रॉब्लम पहली बार हो तब ये दवाएं 1 से 2 हफ्ते चलती हैं। जब साइनस की प्रॉब्लम बार-बार हो या बीमारी पुरानी हो जाए तो दवाएं 3 से 6 महीने तक दी जाती हैं।

धूम्रपान(smoking)

धूम्रपान(smoking)

धूम्रपान करने वालों में फेफड़ों की समस्या की संभावना महिलाओ की अपेक्षापुरुसो मे कहीं अधिक होती है। सिगरेट में मौजूद जीव-विष रूपी पदार्थ हमारे फेफड़ों तक ऑक्सीजन को जाने से रोकते हैं जिसके कारण हमें कफ और खांसी के साथ-साथ बीमारी का रुप धारन कर लेती है फेफड़ों के कैंसर से संबंधित 90 प्रतिशत मामलों में यह पायागया है कि ये कैंसर धूम्रपान के कारण ही होता है। 

Causes of smoking

  • सिगरेट में मौजूद केमिकल्स के कारण फेफड़ों की ऊपरी सतह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त व लकवाग्रसत हो जाती है।
  • धूम्रपान के कारण श्वास नली संकरी हो जाती है, जिससे फ्लेम की समस्या बढ़ जाती है और सांस लेने में भी तकलीफ होती है।
  • कार्बन मोनोऑक्साइड, एक प्रकार का जहर है जो रक्त में पहुंचने के साथ ही शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है।यह सिगरेट में मौजूद होता है। 

Short term effects of smoking(धूम्रपान के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव)

1.रक्त वाहिकाओं से रोग-सिगरेट में निकोटिन रक्त वाहिकाओं को कम करने का कारण बनता है यानी रक्त प्रवाह कम हो जाता है इसके साथ ही आपकी त्वचा को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती

2.स्व-प्रतिरक्षित रोग-मनुष्य के शरीर में रोगों और अन्य प्रकार के इन्फेक्शन से लड़ने की शक्ति होती है जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली कहते हैं और इस प्रणाली से जुड़े रोगों को स्व-प्रतिरक्षित रोग कहते हैं। धुम्रपान करने वाले व्यक्ति का प्रतिरक्षा प्रणाली धीरे-धीरे कमज़ोर हो जाती है

3. हड्डियों में कमज़ोरी-धुम्रपान से  ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इसमें हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती है और कुछ भी हादसा होने पर हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर स्मोकिंग करने वाले बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों में इस रोग के होने की सम्भाव्ना ब्ढ जाती है

4. आँखों में मोतियाबिंद -धूम्रपान करने से  आंखों में मोतियाबिंद नामक रोग हो जाता हैआँखों के रेटिना के मध्य भाग में इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। आँखों की देखने की शक्ति कम हो जाती और धुंधलापन सा दीखता है।

5.फेफ्डो क कैंसर-धूम्रपान करने से व्यक्तियों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती हैधूम्रपान करने से सबसे ज्यादा प्रभाव फेफड़ों पर पड़ता हैक्योंकिसबसे पहले सिगरेट से निकलने वाला धुआं फेफड़ों में ही जाता हैधूम्रपान करने से फेफड़ों में पानी पड़ने की संभावना बढ़ जाती है

Smoking facts

1.पांच सिगरेट से अगर निकोटीन को निकाल कर अलग से खाया जाए तो खाने वाले की पांच मिनट में मौत हो सकती है। 

2..सिगरेट पीने की वज़ह से दिल के दौरे,दमा होनेऔर कैंसर होने या खासकर फेफड़ों का कैंसर होने की सम्भाव्ना ब्ढ जाती है

3.. जिन बच्चों के माँ-बाप सिगरेट पीते हैं उनको पैदा होने के एक-दो साल के अंदर ही निमोनिया होनेकी सम्भाव्ना ब्ढ जाती है


4..सिगरेट के धुएँ केनिकोटिन, कार्बन मोनोक्साइड और दूसरे विषैले रसायन, माँ के खून के ज़रिए बच्चे तक पहुँचते रहते हैंजिस्से गर्भ्पात हो स्क्ता है

5..मूत्र में पाया जाने वाला कैमिकल कंपाउंड यूरिया नाइट्रेट का इस्तेमाल सिगरेट का फ्लेवर बढाने के लिए किया जाता है। 

6.सिगरेट में केडमिम (CADMIUM) नामक रसायन पाया जाता है यही केडमिम बैटरी में भी पाया जाता है। बैटरी को तोड़ने पर जो काला टार निकलता है उसमे केडमिम निहित होता है।
7. अगर आप एक दिन में सिगरेट का एक पैकेट पीते हैं तो उससे निकलने वाला रेडिएशन छाती के 200 एक्सरे के जितना होगा।

8. 1सिगरेट बीड़ी छोड़ने के 8 घंटे बाद शरीर से कार्बन मोनोऑक्साइड बाहर निकल जाती है 5 दिनों बाद शरीर में मौजूद सारी निकोटिन बाहर निकल जाती है एक हफ्ते बाद खाने पीने की चीजों में स्वाद आने लगता है 3 हफ्ते बाद फेफड़े 30% बेहतर काम करने लगते हैं

9.धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की उमर धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति की तुलना में बीएफ से 25% कम हो सकती है

10.सिगरेट बीड़ी पीना छोड़ कर आप हार्ट अटैक के खतरे को 50% तक कम कर सकते हैं

11.दुनिया में हर साल तंबाकू का सेवन करने से 700000 लोग मरते हैं और इन 60 लॉक लोगों में से 1000000 लोग भारत के होते हैं इसका मतलब हर दिन भारत में 35 00 मौतें तंबाकू का सेवन करने से होते हैं

12.तंबाकू कानूनी तौर पर बिकने वाला ऐसा पदार्थ है जिसका निर्देशों के अनुसार सेवन करने से भी दुनिया में हर्ष 6 सेकंड में एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है

Smoking quotes

  • तजुर्बा कभी-कभी किस्मत से भी मार खाता है यह देखना है तो आंधी में सिगरेट जला ते लड़कों को देखना
  • यह धूम्रपान की आदत आसानी से कहा छूट पाती है पहले सिगरेट हम फूंकते हैं फिर सिगरेट हमें फुक जाती है
  • भारत में हर साल  10 लाख लोग सिगरेट तंबाकू छोड़ देते हैं क्योंकि ऐसा करने के लिए मैं जिंदा ही नहीं बचते
  • तंबाकू का नशा अनमोल जीवन की दुर्दशा
  • आप सिगरेट को नहीं सिगरेट आपको पीती है इसका नतीजा सिर्फ मौत है
  • सिगरेट जलाई थी तेरी याद भुलाने को मगर कंबख्त धुए ने तेरी तस्वीर बना डाली
  • 31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस
  • नशा छोड़ दो वरना वह आपको निकल जाएगा
  • तंबाखू को जिसने गले लगाया मौत को उसने पास बुलाया
  • धूम्रपान घातक है

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer)

प्रोस्टेट कैंसर(Prostate cancer )

प्रोस्टेट या गदूद एक सेब के आकार का यौन अंग होता है |प्रोस्टेट शरीर में पाई जाने वाली एक ग्रंथि होती है यह केवल पुरुषों में पाई जाती जो उनके प्रजनन प्रणाली का एक अंग है| पुरुष ग्रंथि मूत्र मार्ग के चारों ओर होती है |मूत्र मार्ग मूत्र को मूत्राशय से लिंग के रास्ते से बाहर निकालता है| पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 25 साल की उम्र के बाद बढ़ने लगता है| कई अवस्थाओं में प्रोस्टेट का आकार सामान्य से अधिक होता है| प्रोस्टेट की कोशिकाएं धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं| जिससे यह ग्रंथि सामान्य से ज्यादा बढ़ने लगती है |इससे मुत्र मार्ग पर दबाव पड़ता है और कई समस्याएं उत्पन्न  होती है |प्रोस्टेट ग्रंथि को दो भागों में बांटा जाता है दाएं और बाएं| एक व्यस्क पुरुष में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार 3 सेंटीमीटर मोटा और 4 सेंटीमीटर चौड़ा होता है और इसका वेट यानी वजन 20 ग्राम तक हो सकता है|

Prostate_Cancer
प्रोस्टेट कैंसर ( Prostate_Cancer )

प्रोस्टेट कैंसर की घटना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है |प्रोस्टेट कैंसर प्रोस्टेट की कोशिकाओं से बनने वाला कैंसर होता है| प्रोस्टेट कैंसर बहुत धीरे बढ़ता है| शुरुआत में तो इसके लक्षण दिखाई नहीं देते |जब यह लास्ट स्टेज पर पहुंचता है लक्षण दिखाई देने लगते हैं और कई बार मरीजों को यह पता भी नहीं लगता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है| व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है|

प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण(Prostate cancer symptoms)

  • पेशाब का बार बार आना|
  • पेशाब करने की इच्छा बार बार होना और निष्कासित करते वक्त मूत्र में रुकावट होना|
  • कई बार मूत्र के साथ रक्त का निकलना इस रोग का मुख्य लक्षण है|
  • पेशाब करने के दौरान जलन और कठिनाई का अनुभव होना और मूत्र की बूंद टपकना|
  • कमर में दर्द होना कूल्हो  और जांघ की ऊपरी सतह में दर्द होना|
  • लगातार वजन कम होना भी प्रॉस्टेट कैंसर का लक्षण है। शरीर का वजन तेजी से कम होना भी कैंसर की ओर इशारा है।
  •  जब पाचन क्रिया सही तरह से काम न करे तो समझ लेना चाहिए कि आप प्रोस्टेट कैंसर की चपेट में हैं। वहीं प्रॉस्टेट कैंसर से व्यक्ति के शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है।
  • शरीर के किसी भी हिस्से में दर्दहोना इस रोग का मुख्य लक्षण है|

प्रोस्टेट कैंसर के कारण(Prostate cancer causes)

  • अनुवांशिकता– अगर आपके परिवार में पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर था तो  आपको इस रोग के होने की संभावना बढ़ सकती है|
  • बढ़ती उम्र– उम्र के बढ़ने के साथ-साथ प्रोस्टेट कैंसर के होने की आशंका बढ़ जाती है| यह 25 वर्ष की उम्र के बाद होने लग जाता है|
  • हारमोंस में परिवर्तनप्रोस्टेट कैंसर का मुख्य कारण हारमोंस में परिवर्तन होना है| वसा हार्मोन का उत्पादन और शरीर में ऊंचाहार टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन  प्रोस्टेट कैंसर होने का मुख्य कारण है|
  • धूम्रपान– धूम्रपान करना ,बीड़ी सिगरेट शराब का सेवन करने से भी पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की संभावना बढ़ जाती है| यह कैंसर धीरे धीरे फैलने लगता है| शुरुआत में इसके लक्षण नजर नहीं आते इसलिए कई पुरुषों को पता भी नहीं लग पाता कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है|
  • केमिकल्स के संपर्क में आना केमिकल्स के संपर्क में आने से भी पुरुष इस रोग का शिकार हो जाते हैं|
  • आहार कारक-मछली मांस सोयाबीन उत्पाद चावल डेयरी उत्पादों का सेवन करते रहने से भी प्रोस्टेट कैंसर होने की आशंका बनी रहती है|

प्रोस्टेटकैंसर स्टेजिज(Prostate cancer stages)

प्रोस्टेट कैंसर को चार चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

स्टेज 1. पहले चरण में कैंसर बहुत छोटा होता है और पुरुष ग्रंथि तक ही सीमित रहता है|

स्टेज2.दूसरे चरण में कैंसर पुरुष ग्रंथि में ही होता है लेकिन इसका आकार बड़ा हो जाता है|

स्टेज3.तीसरे चरण में कैंसर प्रोस्टेट के बाहर फैल चुका है और वीर्य को ले जाने वाली ट्यूब्स तक फैल जाता है|

स्टेज4. चौथे चरण में कैंसर प्रोस्टेट ग्रंथि से बाहर के नजदीक ढांचे जैसे लसिका ग्रंथि मूत्राशय या फिर हड्डियों या लीवर जैसे दूर के अंगों में फैल जाता है|

प्रोस्टेट कैंसर किस उम्र के लोगों को होता है?(Prostate cancer age)

प्रोस्टेट कैंसर के बारे मे सबसे पहले हमने यह जाना कि प्रोस्टेट कैंसर किन कारणों की वजह से होता है उम्र के बढ़ने के साथ-साथ इस रोग के होने की आशंका बढ़ जाती है यह रोग 25 वर्ष की आयु के बाद होने लगता है 40 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में यह रोग कम देखने को मिलता है लेकिन 60 वर्ष से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में यह रोग अधिक देखने को मिलता है|

प्रोस्टेट कैंसर के लिए टेस्ट(Prostate cancer test)

1.PSA  Testरक्त परीक्षण(prostate Specific Antigen)

प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए प्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन(prostate Specific Antigen)नामक टेस्ट किया जाता है प्रोस्टेट नामक रसायन का स्तर बढ़ जाने पर प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने के लिए बायोप्सी नामक टेस्ट किया जाता है पता लगाया जा सकता है कि प्रोस्टेट कैंसर इतनी शीघ्रता से फैल रहा है| पीएसी के आधार पर ही डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं प्रोस्टेट कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित न करें इसके लिए सीटी स्कैन  बोन स्कैन टेस्ट भी किया जाता है|

1.PSAप्रॉस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांचने के लिए खून का एक सैंपल लिया जाता है| पीएसए प्रोस्टेट द्वारा बनाया गया एक प्रोटीन है प्रोस्टेट के कैंसर से ग्रस्त पुरुषों के खून में पीएसए के बढ़े हुए सतर होते हैं प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित कुछ पुरुषों में सामान्य पीएसए होता है| पीएसए का सामान्य से ऊंचा  स्तर प्रोस्टेट का कैंसर के कारण हो सकता है| ऐसा मानने पीएसएस ऊपर वाले पुरुषों को आमतौर पर औरपरीक्षणों के लिए भेजा जाता है।

2.बायोप्सी-एक बायोप्सी शरीर से लिया गया ऊतक का एक नमूना है ताकि इसे और अधिक बारीकी से जांच की जा सके।बायोप्सी एक सुई से ली जाती है जोकि पीछे के मार्ग  की दीवार से डाली जाती है इसे TRUS बायोप्सी कहते हैं| बायोप्सी अल्ट्रासाउंड के साथ ही की जाती है| बायोप्सी वृषण के पीछे की त्वचा से भी ली जा सकती है| इसे ट्रांसपेरिनियल बायोप्सी कहते हैंऐसा भी हो सकता है कि प्रोस्टेट में कैंसर हो पर वह बायोप्सी से पता नहीं लगाया जाए ऐसे कैंसर का पता लगाने के लिए एमआरआई स्कैन भी किया जा सकता है फिर बायोप्सी को फिर से करना पड़ सकता है यदि पीएसए का सत्र बढ़ने लगे तो बायोप्सी को फिर से किया जा सकता है|

3.MRI(Magnetic Resonance Imaging)-एमआरआई के लिए शक्तिशाली चुंबक  रेडियो किरणों और कंप्यूटर का प्रयोग किया जाता है जिसकी मदद से शरीर की जानकारी को विस्तृत तस्वीरों के माध्यम से प्राप्त किया जाता है एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल शरीर के लगभग हर हिस्से को जांचने के लिए किया जाता है जैसे अंदरुनी अंग लीवर गर्भाशय और पुरुष ग्रंथि आदि की जांच की जाती है|

अतिरिक्त जांच यदि बायोप्सी में पता लग जाता है कि कैंसर है तो वह प्रोस्टेट ग्रंथि से आगे फैला है या नहीं इसका पता करने के लिए अतिरिक्त टेस्टों की आवश्यकता पड़ सकती है| जिम में शामिल है :हड्डियों का स्कैन, सीटी स्कैन ,एक्स रे|

प्रोस्टेट कैंसर से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

1.लहसुन– लहसुन में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैं जैसे कि विटामिन सी विटामिन बी जो प्रोस्टेट कैंसर को होने से रोकते हैं|

2.ब्रोकली– ब्रोकली के अंकुर मे पाया जाने वाला फाइटोकेमिकल्स कैंसर के कीटाणुओं से लड़ने में हमारी मदद करता है इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को ब्रोकली का सेवन करना चाहिए|

ब्रोकली
ब्रोकली

3.अमरूद– अमरूद मे लाइकोपिन नामक पदार्थ पाया जाता है जो कैंसर से लड़ने में हमारी मदद करता है|

4.सोयाबीन– प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन अपने आहार में सोयाबीन का सेवन करना चाहिए|

5.एलोवेरा– एलोवेरा में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं इसलिए प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन एलोवेरा का सेवन करना चाहिए|

Alovera
एलोवेरा ( Alovera )

6.ग्रीन टी-प्रतिदिन ग्रीन टी का सेवन करने से हम कैंसर होने से बच सकते हैं|

7.अंगूर– अंगूर में पोरंथोसाइनिडीसभरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे ट्रोजन के निर्माण में कमी होती है और हमें कैंसर रोग से निजात मिलता है|                                                                                                              

गायनेकोमैस्टिया का इलाज (Gynecomastia Treatment )

गायनेकोमैस्टिया का इलाज (Gynecomastia Treatment )

गायनेकोमैस्टिया का इलाज

गायनेकोमैस्टिया का इलाज ? गायनेकोमैस्टिया नामक रोग पुरुषों में पाया जाता है | पुरुषों में जब सतन के ऊतकों में सूजन आ जाती है तो उस स्थिति को गायनेकोमैस्टिया कहते हैं| यह समस्या पुरुषों में हार्मोन असंतुलन के कारण होती है |यह टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन हार्मोन के बढ़ने की वजह से होता है| गायनेकोमैस्टिया की वजह से ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना होती है |गायनेकोमैस्टिया होने पर पुरुषों के स्तन उभर आते हैं| 50 वर्ष ऊपर आयु  के पुरुषों में यह समस्या हो सकती है|

गायनेकोमैस्टिया हमेशा से पुरुषों के मानसिक तनाव का कारण रहा है और सही जानकारी व उचित इलाज के आभाव में इससे पहले छुटकारा पाना मुश्किल था, लेकिन कॉस्मेटिक सर्जरी के जरिए बिना किसी निशान या कॉम्प्लिकेशन के एक दिन में गायनेकोमैस्टिया नामक रोग को रिमूव किया जा सकता है।

Gynecomastia
गायनेकोमैस्टिया (Gynecomastia)

गायनेकोमैस्टिया के लक्षण (Symptoms of Gynecomastia )

  • गायनेकोमैस्टिया रोग के होने पर पुरुषों के स्तनों में सूजन आ जाती है|
  • किशोरावस्था में निपल्स का बड़ा दिखाई देना इसका मुख्य लक्षण है|
  • सामान्य ग्रंथियों के उत्तक और वसा की वृध्दि होना इस रोग के मुख्य लक्षण है|
  • निपल्स से द्रव का निकलना गायनेकोमैस्टिया रोग का मुख्य लक्षण है|
  • ज्ञानेंद्रिय में हार्मोन की अतिरिक्त ए सामान्यता मान्यता हो सकती है या शरीर के बालों में भी परिवर्तन आ सकता है|

गायनेकोमैस्टिया के कारण (Causes of Gynecomastia)

  • अनुवांशिकता –आपके परिवार के किसी भी सदस्य को यह समस्या है तो आप गायनेकोमैस्टिया की चपेट में आ सकते हैं|
  • धूम्रपान करने से-अल्कोहल का सेवन करने से गायनेकोमैस्टिया रोग की होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • मोटापा –मोटापा गायनेकोमैस्टिया नामक रोग का मुख्य कारण है| मोटापे के कारण पुरुषों के सत्नो के आस पास अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है जिस्से यह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|
  • उम्र का पड़ाव- गायनेकोमैस्टिया की समस्या जब बच्चे युवावस्था में प्रवेश करते हैं तो यह समस्या उत्पन्न हो जाती है क्योंकि इस दौरान हारमोंस में परिवर्तन होता है | बढ़ती उम्र के साथ-साथ गायनेकोमैस्टिया नामक रोग के होने की संभावना में विकास हो जाता है|

गायनेकोमेमैस्टिया के घरेलू उपाय

1.हल्दी– हल्दी पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने का काम करती है |इसका सेवन करने से पुरुष गायनेकोमैस्टिया की समस्या से बच सकते हैं|

2.अलसी और सोया-अलसी और सोया टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को बढ़ाने में मददगार नहीं होती लेकिन यह एस्ट्रोजन का स्तर कम करने में सहायक होते हैं| अपनी प्रतिदिन के आहार में अलसी के तेल को शामिल करें यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी सहायक है|

3.ओमेगा 3 फैटी एसिड– यह टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को बढ़ाने में सहायता करता है मछली में 3 फैटी एसिड सबसे ज्यादा पाया जाता है जो गायनेकोमैस्टिया से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हुआ है|

4.गुग्गुल– यह जड़ी बूटी है| यह एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने और पुरुष हार्मोन के उत्पादन को बढ़ाने में हमारी मदद करती है| इसका उपयोग पुरुषों के स्तन के उसको की सूजन कम हो जाती है|

गायनेकोमैस्टिया सर्जरी (Gynecomastia Surgery)

1.मैस्टेक्टमीसर्जरी-इस सर्जरी में सतन की ग्रंथि उत्तक को काटकर बाहर निकाल दिया जाता है|

2.पुल थ्रू सर्जरी: इस सर्जरी में निप्पल के पास एक छोटे से छेद के  माध्यम से चर्बी और ग्रंथि युक्त टिशूज को बाहर निकाल दिया जाता है| इस सर्जरी से शरीर पर बहुत कम निशान पढ़ते हैं| इस सर्जरी के होने पर साफ सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है अन्यथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है|

Gynecomastia surgery
गायनेकोमैस्टिया सर्जरी (Gynecomastia surgery)

गाइनेकोमैस्टिया से बचाव 

1.बढ़ती उम्र -उम्र बढ़ने के साथ-साथ हारमोंस में बदलाव आता है और गायनेकोमैस्टिया नामक रोग के होने की संभावना दिन प्रतिदिन बढ़ती है|

2.शराब का सेवन न करें– अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से गायनेकोमैस्टिया की समस्या उत्पन्न हो जाती है| इसलिए शराब का सेवन अधिक ना करें|

3.एंटीबायोटिक से -एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से गायनेकोमैस्टिया होने की संभावना बढ़ जाती है| ये हारमोंस को प्रभावित करते हैं| इसकी वजह से पुरुषों के सपनों में बदलाव हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह ले|

4.अनुवांशिकता– आपके परिवार के किसी भी सदस्य को यह समस्या कोई है तो आप गायनेकोमैस्टिया नामक रोग की चपेट में आ सकते हैं|

5.वजन कम करें– मोटापे के कारण भी पुरुषों के सत्नो  में सूजन आ जाती है|