बच्चों की हाइट

बच्चों की हाइट

बच्चों की हाइट न बढ़ने की समस्या आम समस्या बन गई है|आजकल हर बच्चे के माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों का विकास तेजी से हो लंबाई न बढ़ने के कुछ जेनेटिक कारण भी होते हैं बच्चों की हाइट जींस पर निर्भर करती है यह जींस उन्हें माता-पिता से प्राप्त होते हैं जिन बच्चों के माता-पिता क़द में छोटे होते हैं उनके बच्चों का कुछ जेनेटिक कारणों से शरीर का  विकास रूक जाता है|जिन लोगों की हाइट कम होती है वह यही सोच कर परेशान होते रहते हैं कि उनकी हाइट कैसे बढ़ेगी जिसके कारण उनके अंदर हीन भावना उत्पन्न हो जाती है|अधिकतर लोगों का अधिक लंबाई वाले इंसान की ओर ध्यान केंद्रित होता है और छोटे कद के लोग दूसरे की नजरों में मजाक बन जाते हैं|कुछ आयुर्वेदिक उपाय करने से हम अपनी लंबाई को बढ़ा सकते हैं|

बच्चों की हाइट न बढ़ने के कारण

  1. हार्मोन में असंतुलन –हार्मोन संतुलन का बिगड़ना भी मुख्य कारण है धूम्रपान करने से हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है और शरीर का विकास रुक जाता है|
  2. हेवी वेट लिफ्टिंग-ज्यादा वजन उठाना छोटी उम्र में ही ज्यादा वजन उठाने से शारीरिक विकास रूक जाता है इसलिए बच्चों को छोटी उम्र में ज्यादा वजन नहीं उठाना चाहिए|
  3. अनुवांशिकता –जेनेटिक लंबाई बढ़ने की कुछ लोगों में जेनेटिक कारण भी होते हैं यह चीज हमें अपने माता पिता से प्राप्त होते हैं अगर बच्चों के माता-पिता का कद छोटा है तो यह जींस बच्चे में भी आ सकते है जिससे बच्चों का शारीरिक विकास रुक जाता है|
  4. पौष्टिक आहार न मिलना-आहार में पौष्टिक तत्व की कमी के कारण भी बच्चों का शारीरिक विकास रूक जाता है इसलिए अपनी प्रति दिन की आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए जिसमें पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में हो|
  5. पानी की कमी– पानी की कमी भी बच्चों की हाइट न बढ़ने का मुख्य कारण है इसलिए पानी का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए |
  6. पर्याप्त नींद न लेना- पर्याप्त मात्रा में नींद न लेने से हमारे शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है और शारीरिक विकास रुक जाता है इसलिए हमें प्रतिदिन कम से कम 8 से 9 घंटे नींद लेनी चाहिए|

बच्चों की हाइट बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. दूध- दूध से बने पदार्थ जैसे दही मक्खन पनीर आदि को अपने प्रति दिन के आहार में शामिल करना चाहिए क्योंकि दूध में कैल्शियम काफी मात्रा में पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत होती है और उनका शारीरिक विकास होता है|
  2. गुड और प्याज– गुड और प्याज का सेवन करने से बच्चे का विकास जल्दी से होता है यह बहुत उपयोगी नुस्खा है|
  3. विटामिन डी- अपनी प्रतिदिन के आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए जिसमें विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में हो सूर्य की किरणों से हमें विटामिन डी की प्राप्ति होती है इसके अलावा डालो और बादाम का सेवन करने से भी हमें विटामिन डी मिलता है जो बच्चों की हाइट बढ़ाने में मददगार है|
  4. गाय का दूध– गाय का दूध पीने से भी बच्चों में लंबाई बढ़ती है इसके अलावा हाइट बढ़ाने के लिए थोड़े से मक्खन में 12 काली मिर्च मिलाकर बच्चे को खिलाने से भी विकास तेजी से होने लगता है|
  5. पोषक तत्व-अपने प्रति दिन की आहार में मछली , अंडे , सोयाबीन आदि का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसने पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बच्चों की हाइट को बढ़ाने में सहायक है|
  6. ब्रोकली –ब्रोकली , हरी सब्जियां , फल-फ्रूट , पालक आदि का अधिक मात्रा में सेवन करने से बच्चों  का विकास तेजी से होता है|
  7. अश्वगंधा-अश्वगंधा की जड़ को कूटकर चूर्ण बना ले और अश्वगंधा के चूर्ण का दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से बच्चों की हाइट बढ़ने लगती है|
  8. चने– रात को सोने से पहले चने को पानी में भिगो दें और सुबह इनका सेवन करने से हडिया मजबूत होती है और बच्चों का विकास तेजी से होने लगता है|
  9. वजन न बढ़ने दें– खाद्य पदार्थों का सेवन कम कर दें और अपने वजन को न बढ़ने दे क्योंकि वजन बढ़ने पर शरीर का तेजी से विकास नहीं हो पाता|

बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज

  • तैरना- स्विमिंग करने से हमारी हड्डियों पर खिंचाव पड़ता है और हड्डियां मजबूत होती है इसलिए तैरने से बच्चों की हाइट तेजी से बढ़ने लगती है|
  • रस्सी कूदना– रस्सी कूदने से भी लंबाई तेजी से बढ़ने लगती है और स्टेमिना भी बढ़ता है|
  • साइकिल चलाना– साइकिल चलाने से आपके शरीर पर के खिंचाव पड़ता है और आप की लंबाई तेजी से बढ़ने लगती है प्रतिदिन कम से कम 10 से 12 किलोमीटर से साइकिल चलानी चाहिए|
  • बास्केटबॉल- बास्केटबॉल खेलने से बच्चों के पूरे शरीर पर खिंचाव पड़ता है जिससे बच्चों की हाइट तेजी से बढ़ने लगती है और बच्चों का मानसिक विकास भी होने लगता है|
  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज –एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों मे खींचावट आती है और हाइट भी तेजी से बढ़ती है|
स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज
स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज

बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए योगासन

  1. चक्रासन-चक्रासन में आपका हाथ और कमर पीछे की ओर झुकने लगते हैं जिससे कमर पर खींचा पड़ता है और आप का तेजी से विकास होने लगता है|
  2. ताड़ासन-हाइट को तेजी से बढाने के लिए ताड़ासनएक मह्त्व्पुरण भूमिका निभाता है ताड़ासन को करने के लिए सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाये और अपने दोनों पैर को आपस में मिलाकर अपने दोनों हथेलियों को अपने साइड में रख ले. फिर पूरे शरीर को सीधा रखे और अपने और दोनों पैरों का वजन बराबर रखे. उसके बाद दोनों हथेलियों की उंगलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं हथेलियों को सीधे रखते हुए धीरे – धीरे साँस ले और अपने हाथो को ऊपर की ओर खिन्चे इससे आपके कंधो और छाती में भी खिचावपड़ेगा इसके साथ ही  पैरो की एडी को भी ऊपर उठाये और अंगुलियों में अपना संतुलन बनाये. कुछ देर ऐसे ही खड़े रहे और फिर साँस लेते हुए हाथो को ऊपर को ले जाएँ|
  3. सूर्य नमस्कार –सूर्य नमस्कार नामक आसन करने से बच्चे के पूरे शरीर में खिंचाव पड़ने लगता है जिससे बच्चे की लंबाई तेजी से बढ़ती है|
  4. हलासन –हलासन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर सीधे लेट जाएं और अपने पैरों और हिप्स को ऊपर की ओर उठाएं अब अपने दोनों पैरों से माथे के नीचे की जमीन को छूने की कोशिश करें. इस प्रक्रिया में गहरी सांस लें और पैरों को फिर सांस छोड़ते हुए सीधा करें. धीरे – धीरे पैरों को जमीन पर लाएं और फिर सीधे लेट जाएं. इसका रोजाना अभ्यास आपकी लम्बाई को बढाने में मददगार साबित होगा|इस  आसनको करने से  आपको गैस व एसिडिटी से निजात मिलेगा  बालो को झड़ने की समस्या भी खत्म होगी |
  5. पश्चिमोत्तानासन-पश्चिमोंत्तानासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठ जाए. उसके बाद अपने पैरो को आगे को करे और हाथो को आगे की ओर झुकाकर पाँव के अंगूठों को पकड़ने का प्रयत्न करे इससे आपकी कमर तथा पीठ की मांसपेशियाँ को ऊर्जा की प्रप्त्ति होती है  रीड की हड्डी में खिंचाव पड़ता है जिसके  कारण बच्चों का विकास तेजी से होने लगता है |

भूख की कमी (loss of hunger)

भूख की कमी (loss of hunger)

भूख की कमी

भूख की कमी की समस्या एक आम समस्या बन चुकी है अगर इस समस्या पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह चिंता का विषय बन सकती है जब आपकी खाने के प्रति इच्छा नहीं होती तो उसे भूख में कमी  कहा जाता है|भूख की कमी होने पर कोई प्रकार के लक्षण नजर आते हैं जैसे- चक्कर और उल्टियां आना थकान का अनुभव होना ,शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना ,कब्ज होना ,खाने को बीच में अधूरा छोड़ना जैसे लक्षण नजर आते हैं|भूख न लगने की स्थिति को एनोरेक्सिया के नाम से भी जाना जाता है|एनोरेक्सिया एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपना वजन बढ़ाने से डरता है इस रोग में व्यक्ति अपने वजन को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहता है उन्हें हर समय यही डर लगा रहता है कि उनका वजन बढ़ न जाए|

एनोरेक्सिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति कम से कम खाते हैं और कैलोरी बढ़ाने के लिए अधिक व्यायाम करते हैं|यह मानसिक बीमारी युवावस्था के लोगों में भी देखने को मिलती है लेकिन बच्चों में इस मानसिक बीमारी के होने पर बच्चों की मन में खाने और वजन के प्रति असामान्य विचार आने लगते हैं|जिन व्यक्तियों में एनोरेक्सिया ईटिंग डिसऑर्डर नामक बीमारी होती है  भूख लगने पर भी वजन बढ़ने के डर से खाना खाने से मना कर देते हैं खाने से दूर भागते हैं|

भूख की कमी के लक्षण (loss of hunger symptoms)

  • खाना चबाने में कठिनाई का अनुभव होना
  • थोड़ा सा खाना खाकरखाने को बीच में अधूरा छोड़ देना
  • थकान का अनुभव होना
  • चक्कर और मितली आना
  • शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है
  • हाथों और पैरों में सूजन आ जाना
  • कब्ज होना
  • मासिक धर्म समय पर न आने की समस्या उत्पन्न होना
  • ऑस्टियोपोरोसिस जैसे लक्षण प्रतीत होना
  • हृदय की धड़कन की गति असामान्य होना
  • उल्टी करते समय सांसो से बदबू आना
  • भोजन में अधिक वसा होने पर या वजन बढ़ने के डर से चिंतित रहना
  • खाना खाने के बाद बार बार शौच जाना
  • खाना न खाने के लिए बहाने बनाना
  • वजन कम होने पर भी वजन कम करने का प्रयास करना
  • लिवर में जलन और सूजन जैसी समस्या होने लगती है

भूख न लगने के कारण (cause of loss of hunger)

  1. तनाव- एनोरेक्सिया से ग्रस्त लोग वजन बढ़ने के डर से चिंतित रहते हैं और खाना खाने पर जड़ी बूटियों के प्रयोग से उल्टियां करते हैं और शर्मिंदगी महसूस करते हैं|
  2. मानसिक कारण- खाने की विकार से पीड़ित लोगों को मानसिक समस्याएं होने लगती है जो खाने के विकार को विकसित करती हैं|
  3. भोजन की कमी होना या डाइटिंग– खाना कम खाना खाने की विकार को विकसित करने वाला मुख्य कारण है खाने की कमी के कारण तनाव, चिंता , डिप्रेशन , कम भूख लगना जैसी समस्याएं उतपन होने लग जाती है जिसके कारण व्यक्ति एनोरेक्सिया से पीड़ित हो जाता है|
  4. दवाइयां– अवसाद दवाइयों का सेवन करने पर होने वाले साइड इफेक्ट के कारण भूख में कमी जैसी समस्या होने लगती है|
  5. भावनात्मक तनाव- भावनात्मक तनाव जैसे सगे संबंधी को खो देना या रिश्ते टूटना आदि होने के कारण तनाव , चिंता , भूख की कमी का कारण बन सकती है|
  6. अनुवांशिकता– आपके परिवार में से किसी सदस्य माता-पिता में भोजन विकास संबंधी समस्या है तो आप में भी यह समस्या विकसित होने की संभावना बढ़ने लगती है|
  7. एनीमिया- एनीमिया या शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं में कमी होने पर भूख की कमी की समस्या होने लगती है|
  8. डिमेंशिया– डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी होने पर भी बुजुर्गों में भूख की कमी की समस्या होने लगती है|

भूख की कमी के तथ्य (hunger facts)

  1. भोजन को चबाकर खाना चाहिए चबाकर खाने से भूख बढ़ने लगती है और एसिडिटी की समस्या नहीं होती|
  2. खाने में भरपूर मात्रा में पौष्टिक तत्व होनी चाहिए|
  3. भूख की कमी होने की कुछ अनुवांशिक व पर्यावरण  कारण भी होते हैं जिनमें खाने के विकार मौजूद है|
  4. भूख लगने पर ही खाना खाना चाहिए भूख न लगने पर खाया हुआ खाना शरीर को नुकसान पहुंचाता है|
  5. खाने को बैठकर खाना चाहिए जिससे कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्या नहीं होती और भोजन आसानी से पचता है|

भूख बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा

  1. सेब का रस-सेब में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक सेब का सेवन करते रहने से आपको भूख लगने लगती है|
  2. अजवाइन- एक कप पानी में एक चम्मच अजवाइन और थोड़ा सा काला नमक लेकर दोनों को उबाल लें और फिर इस पानी को ठंडा होने दें ठंडी होने पर पानी को छानकर पी लें इस नुस्खे का प्रतिदिन सेवन करने से आपकी भूख बढ़ने लगेगी|
  3. इलायची- एक गिलास पानी में इलायची को डालकर उबालने और पानी को ठंडा होने दें फिर इस पानी को पी ले यह नुस्खा आपकी भूख को बढ़ाता है|
  4. आंवला– आंवले में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है आपली में एंटी डायबीटिक गुण मौजूद होते हैं इसलिए प्रतिदिन सुबह आंवले के जूस का सेवन करने से आपको भूख लगने लगती है और हमारा पाचन तंत्र भी ठीक ढंग से कार्य करता है|
  5. अनार का जूस- अनार में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं और विटामिन की मात्रा भी पाई जाती है इसलिए प्रतिदिन एक गिलास अनार के जूस में शहद मिलाकर सेवन करने से आपको भूख लगने लगती है यह आपकी भूख को बढ़ाता है|
  6. धनिया- यह एक प्रकार की जड़ी बूटी है खाने में भी धनिया का प्रयोग किया जाता है प्रतिदिन सुबहधनिया के पत्तों में पानी को मिलाकर इसका रस निकाल ले इस रस का खाली पेट सेवन करने से आपकी भूख बढ़ने लगती है|
  7. गेहूं- गेहूं के आटे में अजवाइन और सेंधा नमक मिलाकर रोटी खाने से आपकी भूख बढ़ने लगती है|
  8. आंवले का मुरब्बा- प्रतिदिन सुबह खाली पेट आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए या आपकी बुक को बढ़ाता है यह नुस्खा लंबे समय से प्रयोग किया जा रहा है यह काफी लाभदायक है|
  9. ग्रीन टी– हमें प्रतिदिन सुबह और रात को ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए यह आपकी भूख को बढ़ाता है|
  10. नींबू-प्रतिदिन सुबह एक गिलास पानी में नींबू और नमक को डालकर पीने से आपको भूख लगने लगती है|
  11. मुनक्का- मुनक्का और आंवला बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और मुंह में रखने से यह आपकी भूख को बढ़ाता है|
  12. गाजर का रस- प्रतिदिन गाजर का जूस में अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से भूख की कमी की समस्या को दूर किया जा सकता है|
  13. त्रिफला चूर्ण- प्रतिदिन त्रिफला चूर्ण का पानी के साथ सेवन करने से पेट साफ रहता है और आपकी भूख बढ़ने लगती है|
  14. पानी का अधिक सेवन- हमें प्रतिदिन दो से 3 लीटर पानी पीना चाहिए यह आपकी भूख को भी बढ़ाता है|
इलायची
इलायची

चक्कर आने की समस्या (vertigo)

चक्कर आने की समस्या (vertigo)

चक्कर आने की समस्या

चक्कर आने की समस्या को वर्टिगो के नाम से जाना जाता है|वर्टिगो का अर्थ है घूमना| असंतुलन होने के कारण व्यक्ति को पसीना आना, जी मिचलाना, चक्कर आना ,उल्टी आना ,बेचैनी होना, धुंधला दिखाई देना ,आंखों के सामने अंधेरा छा जाना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|शरीर में कमजोरी और थकान होने के कारण भी चक्कर आने लगते हैं| हाई ब्लड प्रेशर  होने के कारण भी चक्कर आ जाते हैं| शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी चक्कर आने लगते हैं| वर्टिगो होने पर कुछ लोगों को लक्षणों का अनुभव नहीं होता|चक्कर आने की समस्या के पीछे माइग्रेन मस्तिष्क की चोट मिनियन रोग आदि कारण शामिल होते हैं|कान में संक्रमण होना भी चक्कर आने का मुख्य कारण बन सकता है इसका समय रहते इलाज न किया जाने पर यह गंभीर रूप धारण कर सकती है|

चक्कर आने की समस्या के लक्षण (vertigo symptoms)

  • सिर दर्द होना
  • सिर घूमना
  • आंखों के सामने अंधेरा छा जाने पर चक्कर आना
  • धुंधला दिखाई देना
  • कम सुनाई देना
  • मितली व उल्टी आना
  • बुखार होना जैसे लक्षण नजर आना
  • कानों में ध्वनि का बजना
  • जी मिचलाना
  • बेचैनी और घबराहट का अनुभव होना
  • शरीर में कमजोरी आना
  • पसीना आना
  • खुद पर नियंत्रण न रख पाना
  • आसपास की चीजें घूमती हुई नजराना

चक्कर आने की समस्या के कारण (vertigo causes)

  1. मस्तिष्क की चोट- मस्तिष्क या सिर की चोट लगने पर चक्कर आने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|
  2. वेस्टीबुलर न्यूरोनेटिस- यह संतुलन की नस का वायरल संक्रमण है इस स्थिति में कान में सूजन होती है|
  3. मिनियर का रोग– यह युवाओं में अधिक देखने को मिलता है| कान में मौजूद फ्लुएड जब ज्यादा हो जाता है तो कान में संतुलन बिगड़ जाने पर उल्टियां आने के साथ ही कान में ध्वनि बजने लग जाती है|
  4. मस्तिष्क का ट्यूमर- मस्तिष्क का ट्यूमर भी चक्कर आने का मुख्य कारण बनता है धनिक न्यूरोमा ट्यूमर होने पर ध्वनि तंत्रिका पर प्रभाव पड़ता है जो सिर दर्द का कारण बनता है|
  5. रिकरेंट वेस्टीबुलोपैथी- इसमें मिनियन रोग से संबंधित लक्षण पाए जाते हैं इस रोग में भी उल्टी आने के साथ-साथ कान में घंटियां सुनाई देने लगती है और कान में खिंचाव महसूस होने लगता है और अपने आप ठीक हो जाते हैं बाद में यह मीनियर रोग में बदल जाते हैं इसका इलाज मीनियर रोग की तरह होता है|
  6. कान में संक्रमण- मस्तिष्क या सिर में चोट लग जाने पर और कान में संक्रमण के कारण चक्कर आने जैसी लक्षण नजर आते हैं|
  7. रक्त प्रवाह होना– अचानक से रक्त प्रवाह होने के कारण चक्कर आने लगते हैं|
  8. तनाव- तनाव भी चक्कर आने का मुख्य कारण है शुगर के मरीजों में लो ब्लड प्रेशर के कारण चक्कर आने लगते हैं|

चक्कर आने पर अपनाए जाने वाले आयुर्वेदिक उपाय(vertigo treatments)

  1. आंवला- आंवले में विटामिन ए और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है थोड़े से आंवले में 23 काली मिर्च डालकर पेस्ट बनाकर सेवन करने से चक्कर आने की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है|
  2. नींबू– नींबू में विटामिन सी पाया जाता है| चक्कर आने पर एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और एक नींबू निचोड़ कर पीने से चक्कर आने की समस्या दूर होती है और यह शरीर को हाइड्रेट रखता है|
  3. तुलसी- तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं| तुलसी के पत्तों के रस के साथ शहद का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या दूर होती है|
  4. बादाम– बादाम में विटामिन ए और विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में होता है| गर्म दूध के साथ बदाम के पाउडर का सेवन करने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और चक्कर आने की समस्या से निजात मिलता है|
  5. आयरन– हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें आयरन मौजूद हो जैसे सेब पालक आदि का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या दूर होती है|
  6. अधिक मात्रा में पानी पीना– डिहाइड्रेशन की समस्या होने पर चक्कर आने लगते हैं अधिक मात्रा में पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या को दूर किया जा सकता है|
  7. फोलिक एसिड– हरी सब्जियां जैसे  मूंगफली ,ब्रोकली  आदि में फोलिक एसिड पाया जाता है इन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या से निजात मिलता है|
  8. अदरक- अदरक में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं अदरक का सेवन करने से रक्त का प्रवाह ठीक ढंग से होता है| अदरक के टुकड़ो को खाने की चीजों में शामिल करें|
  9. नारियल पानी- प्रतिदिन नारियल पानी का सेवन करने से चक्कर आने की समस्या को दूर किया जा सकता है|
  10. खरबूजे के बीज– खरबूजे के बीजों को गाय के घी में भूनकर प्रतिदिन सेवन करने से वर्टिगो की समस्या से निजात मिलता है|
अदरक
अदरक

चक्कर आ जाने पर किए जाने वाले व्यायाम (vertigo exercises)

  1. पश्चिमोत्तानासन- पश्चिमोत्तानासन करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा करके बैठ जाए और अपनी दोनों हाथों को ऊपर उठा कर सीधे कर ले अब धीरे-धीरे आगे की और झुके और अपने दोनों हाथों से पैरों के पंजों को पकड़ ले और अपना सिर घुटनों पर रख दे इस आसन को कुछ सेकंड के लिए करें पश्चिमोत्तानासन करने से मांसपेशियों में आराम मिलता है और तनाव से मुक्ति मिलती है रक्त का प्रवाह भी तेजी से होने लगता है|
  2. हलासन -हलासन में शरीरका आकार हल जैसा बनता है, इसीलिए इसे हलासन कहते हैं। इस आसन को पीठ के बललेटकर किया जाता है। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्णहै।हलासन करने से हाथों गर्दन कंधे की मांसपेशियां मजबूत होती है पर यह आसन तनाव को कम करता है स्त्रियों की रजोनिवृत्ति में मदद करता है|
  3. शवासन -शवासन में शरीरको मुर्दे समान बना लेने के कारण ही इस आसन को शवासन कहा जाता है। यह पीठके बल लेटकर किया जाता है और इससे शारीरिक तथा मानसिक शांति मिलती है।शवासन करने से शरीर की कोशिकाओं का निर्माण होता है यह आसन रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है|
  4. कपालभाति प्राणायाम– कपालभाति प्राणायाम आपके तंत्र तंत्रिकाओं और मस्तिष्क की नसों को ऊर्जाप्रदान करता हैं। यह प्राणायाम मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत अच्छा हैंक्योंकि यह पेट की मासपेशियों को सक्रिय करता हैं। यह प्राणायाम रक्तपरिसंचरण को सुधरता हैं व मन को भी शांति प्रदान करता हैंकपालभाति फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य अपशिष्ट गैसों को बाहर निकालती है यह हृदय और फेफड़ों की क्षमता में सुधार करती है इसलिए इस श्वसन संबंधी रोगों जैसे अस्थमा के लिए अच्छी है यह आलस्य दूर करती है|
  5. शीर्षासन – सिर के बलकिए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं। इससे पाचनतंत्र ठीक रहता है साथही मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे की स्मरण शक्ति सही रहती है।

हकलाने की समस्या (stammer)

हकलाने की समस्या (Stammer)

हकलाने की समस्या एक आम समस्या बन गई है| लड़कियों की तुलना में लड़कों में यह समस्या 5 गुना अधिक देखने को मिलती है| ज्यादातर मामलों में इस समस्या का इलाज संभव है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा अटक अटक कर बोलता है और आवाज साफ नहीं आती यह समस्या 3 से 7 वर्ष के छोटे बच्चों में अधिक देखने को मिलती है| कई बार बच्चे दूध लाने भी लगते हैं| हमें कई शब्द समझ में नहीं आते कि वह क्या बोल रहे हैं| हकलाने का मुख्य कारण मानसिक रूप से भाषा कौशल तंत्रिकाओं का विकास न होना है| छोटी उम्र में ही हकलाने की समस्या का इलाज संभव है|अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो बढ़ती उम्र के चलते यह गंभीर समस्या का कारण बन सकता है|

कई बच्चों का विकास होने के साथ-साथ उनके हकलाने की समस्या दूर हो जाती है| अगर किसी बच्ची में 8 से 10 वर्ष की उम्र में हकलाने की समस्या होती है तो वयस्कता में भी यह समस्या बनी रहती है| हकलाने पर बच्चे अपना आत्मविश्वास खो देते है, शर्मिंदगी महसूस करने लगते हैं और अपने शब्द कहने से हिचकी चाते हैं|

हकलाने की समस्या के प्रकार (types of stammering)

हकलाने के दो मुख्य प्रकार हैं जिनका वर्णन इस प्रकार से है :

  1. विकासात्मक हकलाना – हकलाने का सबसे आम प्रकार; यह बचपन में होता है जब भाषण और भाषा कौशल तेजी से विकसित हो रहे होते हैं|
  2. देर से शुरू होने वाला हकलाना – बड़े बच्चों और वयस्कों में सिर की चोट, स्ट्रोक या एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल स्थिति के परिणामस्वरूप होता है|यह कुछ दवाओं या मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक आघात के कारण भी हो सकता है|

हकलाने की समस्या के लक्षण (stammering symptoms)

  • बोलते समय अपनी बात को अटक कर कहना
  • बच्चों की ध्वनि अवरुद्ध हो जाना
  • बोलते समय तेजी से आंखें बिचना
  • जबड़े का हिलना
  • कुछ शब्दों को बोलने से पहले हिचकिचाना
  • कुछ शब्दों की तेज गति से बोलने पर हिचकिचाहट महसूस करना
  • होठों पर कंपन होना
  • बोलते समय आंखों का झपकना
  • किसी शब्द को पुराने कर पाने से पहले ही अटक जाना
  • शब्दों के साथ लंबे समय तक ध्वनि बन्ना
  • पैरों का दोहन
  • चेहरे का कस जाना
  • शब्दों को बार-बार दोहराना

हकलाने की समस्या के कारण (stammering causes)

  1. न्यूरोजेनिक हकलाना-यह निम्नलिखित कारणों जैसे सिर में चोट टयूमर मस्तिष्क में रक्त का प्रभाव होना आदि से होता है यह तब होता है जब मस्तिष्क और भाषा कौशल तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के बीच संकेत ठीक ढंग से काम नहीं करते हैं|
  2. अनुवांशिकता-यदि परिवार के किसी सदस्य माता या पिता को हकलाने की समस्या है तो बच्चे में हकलाने की संभावना ज्यादा हो सकती है|
  3. भौतिक कारक– तनावग्रस्त या थकावट होने पर हकलाने  जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है|
  4. भाषाई कारक- बच्चों के हकलाने का मुख्य कारण है जब बच्चे कठिन शब्द को बोलने का प्रयास करते हैं तब हकलाने लगते हैं|
  5. पर्यावरणीय कारक- पर्यावरणीय कारक हकलाने की समस्या का मुख्य कारण है जब बच्चों को किसी से फोन पर बात करते वक्त फोन नंबर या एड्रेस बताना हो तो हकलाने की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं|
  6. मनोवैज्ञानिक कारक- मनोवैज्ञानिक कारक उन लोगों के लिए हकलाने की समस्या गंभीर बना सकते हैं जो पहले से ही हकलाते हैं जब लोगों के बोलने पर शर्म महसूस करना उनकी हकलाने की प्रक्रिया को दर्शाती है|
  7. विकासात्मक कारक- जब बच्चे का मानसिक रूप से या भाषा कौशल तंत्रिका ओं का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाता तब बच्चे में हकलाने की समस्या उत्पन्न होती है कुछ बच्चों में या कल आने के लक्षण दिखाई देते हैं 3 से 7 साल तक के बच्चों में हकलाने की समस्या दिखाई देती है अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप धारण कर लेती है|

हकलाने की समस्या का परीक्षण (stammering diagnosis)

एसएलपी हकलाने की समस्या का परीक्षण करने के लिए व्यक्ति को एसएलपी यानी भाषण भाषा रोग विज्ञानी द्वारा जांच करवानी चाहिए एसएलपी जांच करता है कि व्यक्ति को बोलने पर कितनी बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है| एसएलपी व्यक्ति की प्रतिदिन की गतिविधियों और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है एसएलपी इस बात की जांच करता है कि हकलाने की समस्या किन कारणों से हुई है|

हकलाने की समस्या के आयुर्वेदिक उपाय (stammering treatment)

  1. बादाम-रात को 10 से 15 बादाम भिगोकर रख दें और सुबह भीगे हुए बादाम का का छिलका उतार कर बदाम को पीस लें और थोड़ा सा मक्खन बादाम के पाउडर में मिलाकर प्रतिदिन इसका सेवन करने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  2. काली मिर्च और मिश्री-चार से पांच काली मिर्च लेकर उसमें बादाम का पाउडर और थोड़ी सी मिश्री मिलाकर प्रतिदिन खाने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  3. अदरक-एक चम्मच अदरक के रस में एक चम्मच शहद मिला कर बच्चे को चटाने से बच्चों का दूध लाना दूर होता है|
  4. छुआरा-बच्चों को रात को सोने से पहले दूध में छुहारा उबालकर पिलाने से हकलाने की समस्या दूर हो जाएगी|
  5. आंवला-कच्चे आंवले का सेवन करने से बच्चों की हकलाने की समस्या दूर होती है इसलिए सुबह खाली पेट एक चम्मच आंवले के पाउडर में एक चम्मच देसी घी मिलाकर बच्चों को खिलाने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  6. गाय का देसी घी- बच्चे की हकलाने की समस्या दूर करने के लिए प्रतिदिन सुबह गाय का देसी घी बच्चे को खिला दे|
  7. दालचीनी –दालचीनी के टुकड़े को में डालकर चूसने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  8. फुला सुहागा- शहद में फुला सुहागा मिलाकर बच्चे की जीभ पर रगड़ने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  9. ब्राह्मी तेल- ब्राह्मी तेल से आधा घंटा तेल की मालिश करें ऐसा करने से हकलाने की समस्या दूर होती है|
  10. हरा धनिया- धनिया के पाउडर में अमलतास का गूदा निकालकर पानी के साथ पीसकर मिला ले इस मिश्रण से कुल्ला करते रहने से हकलाने की समस्या जड़ से खत्म हो जाती है|
काली मिर्च
काली मिर्च

पायरीया (pyorrhea )

पायरीया (pyorrhea )

पायरीया मसूड़ों में होने वाली बीमारी है| पायरीया होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया है| दातों की ठीक ढंग से सफाई न करने पर मुंह में बैक्टीरिया पनपने लग जाते हैं जो दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं जिस से पायरीया रोग हो जाता है| जिससे दांतो के पास पाए जाने वाली मांसपेशियों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है| पायरीया रोग से पीड़ित होने पर दांतो का कमजोर होना , मसूड़ों से मवाद निकलना , मसूड़ों में सूजन आना , मसूड़ों से खून आना , दांतो पर मैल जम जाना जैसे लक्षण नजर आते हैं|

पायरीया को पीरियडऑनटाइटिस  के नाम से भी जाना जाता है| शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण विभिन्न रोग होने की संभावना बढ़ जाती है| दांतो की ठीक ढंग से सफाई न करने पर मुंह में बैक्टीरिया में वृद्धि होती है जो पायरीया होने का कारण बनती है| दांतो पर प्लेक जमा हो जाने के कारण मसूड़े की हड्डियों और दातों को नुकसान पहुंचता है इससे पायरीया रोग हो जाता है|

पायरीया
पायरीया

पायरीया के प्रकार (types of pyorrhea)

  1. क्रॉनिक पीरियडोनटाइटिस-यह पायरीया का मुख्य प्रकार है| इस प्रकार का पायरिया वयस्कों में अधिक देखने को मिलता है| बच्चों पर इस प्रकार के पायरीया का कम प्रभाव पड़ता है| पायरीया होने पर मसूड़ों से मवाद निकलना, खून आना, दांतों का हिलना जैसे लक्षण नजर आते हैं| सही समय पर इलाज न करने पर दांतों और मसूड़ों की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है|
  2. अग्रेसिव पीरियडोनटाइटिस- इस प्रकार का पायरिया बच्चों में युवाओं में देखने को मिलता है इस प्रकार के पायरीया से कम लोग पीड़ित होते हैं| दांतो की ठीक ढंग से सफाई न होने पर मुंह में बैक्टीरिया में वृद्धि होती है जो पायरीया होने का कारण बनती है|
  3. नैक्रोटाइजिंग पीरियडोनटाइटिस- जो लोग कैंसर, कुपोषण, एड्स आदि बीमारियों से पीड़ित होते हैं उन लोगों में इस प्रकार के पायरीया होने का खतरा बना रहता है|

पायरीया के लक्षण (pyorrhea  symptoms)

  • दांतों के बीच गैप आना
  • दांतो का कमजोर होना
  • मसूड़ों को छूने पर दर्द का अनुभव होना
  • दांतो का कमजोर होने पर दांतों का हिलना
  • समय से पहले दांतो के कमजोर हो जाने के कारण दांत गिरने लग जाते हैं
  • मसूड़ों से मवाद निकलना
  • ठंडा या गर्म पानी पीने पर दांतों में झनझनाहट महसूस होना
  • सांस लेने पर मुंह से बदबू आने लगना
  • मसूड़ों में सूजन आना
  • मसूड़ों से खून आना
  • मसूड़ों की रंग का लाल बैंगनी हो जाना
  • दातों पर मैल जम जाना और दांत सड़ जाना
  • मुंह का स्वाद बिगड़ जाना

पायरीया के कारण (pyorrhea causes)

  1. बैक्टीरिया के कारण- दांतों की ठीक ढंग से सफाई न करने पर मुंह में बैक्टीरिया पनपने लग जाते हैं जो दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं जिस से पायरीया रोग हो जाता है|
  2. कैल्शियम की कमी– कैल्शियम की कमी के कारण भी दांतों में पायरीया रोग हो जाता है| पायरीया रोग होने पर दांत सड़ने लग जाते हैं और मसूड़े खराब हो जाते हैं मसूड़ों से खून भी आने लगता है|
  3. दांतों की देखभाल न करना- दांतों की ढंग से देखभाल न करने से या दांतो की ठीक ढंग से सफाई न करने पर मुंह में बैक्टीरिया में वृद्धि होती है जो पायरीया होने का मुख्य कारण बनते हैं| दांतों पर प्लेक जमा हो जाने के कारण मसूड़ों के हड्डियों और दातों को नुकसान पहुंचता है जिसे पायरीया रोग कहा जाता है|
  4. धूम्रपान करना-धूम्रपान करना पायरीया का मुख्य कारण है तंबाकू बीड़ी सिगरेट शराब का सेवन करने से इम्यून सिस्टम पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है| धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने से भी पायरीया रोग होने की संभावना बनी रहती है|
  5. पोषक तत्वों की कमी- शरीर में कैल्शियम , विटामिंस , प्रोटींस आदि तत्व मौजूद न होने पर भी पायरीया होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसमें विटामिंस , प्रोटीन और कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो|
  6. हारमोंस में परिवर्तन– मासिक धर्म होने पर हारमोंस में परिवर्तन आने के कारण मी पायरीया रोग होने की संभावना बढ़ जाती है|
  7. खानपान –गलत खानपान जैसे बीड़ी, तंबाकू, गुटका, पान आदि पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करने के कारण भी पायरीया रोग हो जाता है|भोजन को ठीक ढंग से जमा करने खाने से भी पायरीया होने की संभावना बनी रहती है|

पायरीया ठीक होने के आयुर्वेदिक उपाय (pyorrhea treatment)

  1. हल्दी- हल्दी में कुरकुमीन मौजूद होता है जिसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं| हल्दी में नमक और सरसों का तेल मिलाकर दांतों पर मलने से पायरीया रोग जड़ से खत्म होता है व मसूड़ों के दर्द और सूजन को कम किया जा सकता है|
  2. तुलसी- यह एक प्रकार की जड़ी बूटी है तुलसी में एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं| तुलसी का पाउडर बनाकर उसमें सरसों का तेल डालकर मिश्रण बना ले अब इस मिश्रण को दांतों पर रगड़ने से दांतो का दर्द कम होता है|
  3. अमरूद- अमरूद में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए अमरूद पर थोड़ा सा नमक लगाकर खाने से पायरीया की समस्या को ठीक किया जा सकता है|
  4. काली मिर्च– काली मिर्च के पाउडर में थोड़ा सा नमक मिलाकर दांतों पर मलने से बरोग से छुटकारा मिलता है|
  5. लॉन्ग का तेल- लौंग के तेल को गुनगुने पानी में डालकर प्रतिदिन कुर्ला करते रहने से पायरीया की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है|
  6. जामुन की छाल- जामुन की छाल के काढ़े से कुल्ला करते रहने से पायरीया की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है|
  7. फिटकरी- फिटकरी को भून कर पीस लें और इस पेस्ट से दांतो की मालिश करने से पायरीया रोग जड़ से खत्म होता है|
  8. सरसों का तेल– सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दांतों की मालिश करने से मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाता है और पायरीया रोग जड़ से खत्म हो जाता है|
  9. अरंडी का तेल– जरूरत के अनुसार अरंडी के तेल में थोड़ा सा कपूर का पाउडर और शहद मिलाकर पेस्ट बना लें इस पेस्ट से दातों की मालिश करने से पायरीया रोग दूर होता है|
  10. आंवला- आंवले को जलाकर उसमें नमक और सरसों का तेल मिलाकर दांतो की मालिश करने से पायरीया रोग को जड़ से खत्म किया जाता है|
  11. राई का तेल– राई के तेल में नमक मिलाकर मसूड़ों और दांतों पर मलने से पायरीया की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है|
हल्दी
हल्दी

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD)

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD)

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ओसीडी एक प्रकार का मानसिक रोग है यह बीमारी ब्रेन में सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी, स्ट्रेस और इन्फेक्शन के कारण हो जाती है इस रोग से ग्रस्त होने पर व्यक्ति एक ही काम को बार-बार करने लगते हैं जैसे- बार-बार हाथ धोना ऑब्सेसिव कंपल्सिव का मुख्य लक्षण है|कुछ चीजों को बार बार सोचने की लालसा बनी रहती है इस रोग से ग्रस्त होने पर व्यक्ति एक ही चीज को बार-बार गिनते हैं, छूते हैं|ऑब्सेसिव कंपल्सिव से पीड़ित व्यक्ति के मन में कई तरह के विचार पनपने लगते हैं जैसे- इस कार्य को करूं या ना करूं दूसरों से बार बार पूछते रहना कि सब कुछ ठीक है या नहीं आदि लक्षण नजर आते हैं|ऑब्सेसिव कंपल्सिव छोटी उम्र के बच्चों में भी हो सकता है|वयस्कों में 20 से 25 साल की उम्र में यह रोग शुरू होता है 50 में से एक व्यक्ति को अपने जीवन काल में ऑब्सेसिव कंपल्सिव हो सकता है|

ऑब्सेसिव कंपल्सिव के लक्षण (OCD symptoms)

  • किसी और को नुकसान पहुंचाने का डर रहना
  •  कीटाणुओं के संपर्क में आने से डर होना
  •  योन संबंधी विचारों के बारे में सोचते रहना
  • चीजों को बार-बार जांचना
  • बार-बार हाथ धोना
  • बार बार सफाई करते रहना
  •  बिना किसी वजह की माफी मांगने की जरूरत लगना
  • शारीरिक गतिविधियों को बार-बार दोहराना
  •  कुछ चीजों को बार बार सोचने की लालसा होना
  •  दूसरों से बीमारीहो जाने का डर बने रहना
  •  घबराहट महसूस करना व तनावग्रस्त रहना
  •  खराब वस्तुओं को एकत्रित करते रहना

ऑब्सेसिव कंपल्सिव के कारण (causes of OCD)

  1. मस्तिष्क में बदलाव- मस्तिष्क में सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की कमी हो जाती है और सेरोटोनिन नामक रसायन असंतुलित हो जाता है जिसके कारण ऑब्सेसिव कंपल्सिव रोग हो जाता है|
  2. अनुवांशिकता-ऑब्सेसिव कंपल्सिव होने के जेनेटिक कारण भी होते हैं अगर आपके परिवार का कोई सदस्य माता पिता भाई या बहन ओसीडी से पीड़ित है तो आप भी इस रोग की चपेट में आ सकते हैं|ऑब्सेसिव कंपल्सिव के लक्षण नजर आने पर तुरंत ही डॉक्टर से सलाह ले|
  3. तनाव –प्रतिदिन की गतिविधियों में होने वाले बदलाव जैसे परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होना, नौकरी छूटना आदि के कारण व्यक्ति तनाव ग्रस्त हो जाता है|तनाव होने पर ऑब्सेसिव कंपल्सिव होने की संभावना बढ़ जाती है|
  4. संपर्क में आने से- किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आने से जो ओसीडी रोग से ग्रस्त हो आपको भी ऑब्सेसिव कंपल्सिव होने का खतरा बना रहता है|
  5. वातावरण -पर्यावरणीय कारणों के कारण भी ओसीडी होने का खतरा बना रहता है|
  6. व्यक्तित्व –अगर आप एक ही चीज को बार-बार करते हैं जैसे बार-बार हाथ धोना, घंटों शीशे के सामने खड़े रहना, चीजों को बार-बार जांचना आदि लक्षण नजर आने पर ओसीडी का खतरा बना रहता है|

ऑब्सेसिव कंपल्सिव का इलाज

ओसीडी का इलाज करने के लिए काग्नीटीव बिहेवियर थेरेपी की मदद ली जाती है जिसके अंतर्गत ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति को विचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भी नई-नई चीजें सिखाई जाती है|

  • कांगीटीव थेरेपी- यह एक मनोवैज्ञानिक उपचार है जो आपको विचारों के प्रति प्रतिक्रियाओं को बदलने में आपकी सहायता करती है अगर आपको चिंताजनक विचार आते हैं और आप कोई प्रतिक्रिया नहीं करती तो यह थेरेपी सहायक होती है ओसीडी से ग्रस्त व्यक्ति के मन में कई तरह के विचार पनपते रहते हैं ऐसे विचारों से छुटकारा पाने की बजाए उनका सामना करें अगर आपके मन में ऐसे विचार आते हैं तो उनके बारे ध्यान से सोचिए इस थेरेपी की मदद से आप यह निर्णय ले पाते हैं कि किन विचारों को बदलना है यह थेरेपी आपके मन में वास्तविक विचार लाने में आपकी सहायता करेगी|

कमजोरी

कमजोरी

कमजोरी की समस्या एक आम समस्या बन गई है चाहे महिला हो या पुरुष| उम्र के बढ़ने के साथ-साथ व्यक्ति की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है जिसके कारण शारीरिक कमजोरी आने लगती है|अक्सर यह देखा जाता है कि महिलाओं में पीरियड्स के समय रक्त स्त्राव होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है जिसके कारण शारीरिक कमजोरी हो जाती है|महिला को पेट में दर्द ऐठन होने लगती हैऔर थकान का अनुभव होता है या किसी अन्य बीमारी की चपेट में आने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है| पुरुषों में शारीरिक कमजोरी शुक्राणुओं की कमी के कारण होती है| शराब का सेवन करने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण कम होने लगता है और हारमोंस में कमी आ जाती है जिसके कारण पुरुष नपुंसकता का शिकार हो जाते हैं और शारीरिक कमजोरी होने लगती है या किसी अन्य बीमारी जैसे-शुगर की चपेट में आने से व्यक्ति का वजन कम होने लगता है जिसके कारण शरीर में कमजोरी आने लगती है और थकान का अनुभव होता है|

कमजोरी के लक्षण

  • अचानक बेहोश हो जाना
  • शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाने से भी कमजोरी आने लगती है
  • चिंता व डिप्रेशन होने के कारण भी शरीर में कमजोरी आ सकती है
  • बोलने में कठिनाई का अनुभव होना
  • मांसपेशियों में दर्द व ऐठन रहना
  • भूख का कम लगना और प्यास का अधिक लगना
  • कमजोरी होने पर बुखार और थकान जैसे लक्षण नजर आते हैं
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में कठिनाई का अनुभव होना

कमजोरी के कारण

  1. विटामिंस की कमी- शरीर में विटामिंस की कमी होने के कारण में कमजोरी आने लगती है| विटामिंस की कमी के कारण शरीर में लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण कम होने लगता है जिसके कारण शरीर में ऊर्जा की कमी आ जाती है|
  2. थायरॉइड- थायराइड की समस्या होने पर शरीर में थायराइड का कम ज्यादा होने लगता है जिसके कारण शरीर में कमजोरी आने लगती है|
  3. खून की कमी- महिलाओं में पीरियड्स के समय रक्त स्त्राव होने पर शरीर में खून की कमी हो जाती है जिसके कारण शरीर की कमजोरी हो जाती है या किसी अन्य बीमारी जैसे शुगर की चपेट में आने के कारण भी माहिलाओ या पुरुषों में खून की कमी हो जाती है और वजन कम होने लगता है|
  4. बढ़ती उम्र- उम्र के बढ़ने के साथ साथ व्यक्ति की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है और शारीरिक कमजोरी होने लगती है|
  5. नींद की कमी– पर्याप्त मात्रा में नींद न लेने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है और थकावट होने लगती है|
  6. पोषक तत्वों की कमी- शरीर में कैल्शियम , पोटैशियम , मैग्निशियम , फास्फोरस , प्रोटीन , विटामिंस आदि पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में कमजोरी आने लगती है इसलिए हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिसने पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में हो जैसे-दूध , दही , पनीर , अंडा , सोयाबीन , मछली , मास आदि|
  7. तनाव- किसी भी बात को लेकर चिंता या तनाव होने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है|

कमजोरी को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

  1. केला- केले में पोटेशियम और मिनरल पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो केले में पाई जाने वाली शर्करा जो शरीर को एनर्जी देते हैंजैसे-ग्लूकोस , फ्रुक्टोज आदि को ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है| हमें प्रतिदिन के आहार में केले को शामिल करना चाहिए जो कमजोरी को दूर करता है|
  2. लहसुन– लहसुन में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं प्रतिदिन सुबह खाली पेट दो या तीन लहसुन की कलियों को छीलकर पानी के साथ सेवन करने से इम्यून सिस्टम की कमजोरी को दूर किया जा सकता है|
  3. बादाम- बादाम में काफी मात्रा में ही मैग्निशियम मौजूद होता है|बादाम को रात को पानी में भिगोकर सुबह छिलके उतारकर बादाम का सेवन करने से कमजोरी दूर होती है|
  4. आंवला- आंवले में कैल्शियम , प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट , पोटेशियम , फास्फोरस , विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं|आंवले के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से कमजोरी को दूर किया जा सकता है|
  5. दूध- दूध में कैल्शियम मौजूद होता है| एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर  सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है और शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है|
  6. अंडा-अंडे में विटामिन ए और राइबोफ्लेविन मौजूद होते हैं इसलिए हमें प्रतिदिन सुबह या शाम को उबले हुए अंडे का सेवन करना चाहिए अंडों को खाने से शरीर को प्रोटीन मिलता है और कमजोरी  का अनुभव नहीं  होता|
  7. अनार- अनार का जूस पीने से खून बढ़ने लगता है और रक्त का संचार ठीक ढंग से होता है इसलिए अपने प्रति दिन की आहार में अनार का जूस पीने से शरीर की कमजोरी को दूर किया जा सकता है|
  8. हरी मेथी– हरी मेथी का प्रतिदिन सेवन करने से शरीर में खून की कमी और शारीरिक कमजोरी को दूर किया जा सकता है|
  9. गाजर– हमें प्रतिदिन के आहार में गाजर को शामिल करना चाहिए गाजर का जूस पीने से खून में वृद्घि होती है और शारीरिक कमजोरी दूर होती है|
  10. अलसी के बीज- एक गिलास गुनगुने दूध के साथ अलसी के बीजों का सेवन करने से कमजोरी दूर होती है|
  11. नीम की छाल– नीम की छाल एक जड़ी बूटी है| नीम की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है|
बादाम
बादाम

पीलिया(jaundice)

पीलिया(jaundice)

पीलिया होने का मुख्य कारण बिलीरुबिन नामक पदार्थ है| बिलीरुबिन पीले रंग का पदार्थ होता है जो रक्त में पाया जाता है शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती है जिसके कारण बिलीरुबिन के स्तर में वृद्धि होने लगती है जो पीलिया होने का कारण बनता है| बिलीरुबिन का सामान्य सतर मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने में हमारी सहायता करता है|

पीलिया को जोंडिस के नाम से भी जाना जाता है जो लोग मलेरिया , थैलासीमिया और ऑटोइम्यून से ग्रस्त होते है उन लोगों में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगती है और बिलीरुबिन के सत्तर में वृद्धि होती है जो पीलिया होने का कारण बनता है| पित्त नलिका में रुकावट आने के कारण भी बच्चों को पीलिया हो सकता है| नवजात शिशु और मां का ब्लड ग्रुप भिन्न होने पर भी बच्चों को पीलिया होने का खतरा बना रहता है| शिशु बच्चों में पीलिया होने पर त्वचा और आंखों का पीला पड़ जाना , पेट में दर्द रहना , नाखूनों का पीला होना , पेशाब का रंग पीला पड़ना और चेहरे की त्वचा पीली पढ़ना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|शिशु बच्चों में पीलिया अधिक हो जाता है| शिशु बच्चों में पीलिया होना अधिक चिंता का विषय नहीं है लेकिन वयस्कों में पीलिया होना चिंताजनक विषय बन जाता है|

पीलिया
पीलिया

पीलिया के प्रकार(jaundice types)

  1. हेमॉलिटिक जॉन्डिस-लाल रक्त कोशिकाओं के समय से पहले टूट जाने पर बिलीरुबिन केस्तर में इतनी ज्यादा वृद्धि हो जाती है कि लिवर ठीक ढंग से कार्य नहीं करता| बिलीरुबिन के स्तर में वृद्धि होना पीलिया होने का कारण बनता है| आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है जिसे हेमॉलिटिक पीलिया कहा जाता है|
  2. हैपेटॉसेल्यूलर जॉन्डिस-शिशु बच्चों में एंजाइम की परिपक्वता की कमी होने के कारण उनका लिवर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता जो पीलिया होने का कारण बनता है और वयस्कों में शराब का सेवन करने से पेट में दाहिने ओर पाए जाने वाली थैली जिसमें पाचन रस होता है यानी यकृत पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसे रोग हो जाते हैं जो बिलीरुबिन के स्तर को कमजोर करते हैं और पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है|
  3. पोस्ट हैपेटिक जॉन्डिस-पित्त नलिका में रुकावट आने के कारण भी पीलिया हो सकता है शरीर में पित्त नलिकाए संकीर्ण हो जाती है जिसके कारण बिलीरुबिन युक्त पित्त निकलने लग जाता है और पीलिया होने का कारण बन जाता है|

पीलिया के लक्षण(symptoms of jaundice)

  • शरीर में खुजली होना
  • वजन का कम होना
  • भूख न लगना
  • पेशाब का रंग पीला पड़ जाना
  • स्किन और आंखों मे पीलापन आना
  • पेट में दर्द होना
  • थकान और कमजोरी का अनुभव होना
  • लगातार बुखार रहना जैसे लक्षण नजर आते हैं
  • नाखूनों का रंग पीला होना
  • बिलीरुबिन का सतर बढ़ने से त्वचा आंखों में और नाखूनों का रंग पीला पड़ना जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं
  • सिर दर्द होना
  • कब्ज होना और उल्टी आना
  • चेहरे की त्वचा पीली पड़ना

पीलिया के कारण(jaundice causes)

  1. अल्कोहल का सेवन- शराब का सेवन करने से पेट में दाहिनी और पाए जाने वाली थैली जिसमें पाचन रस होता है यानी यकृत पर बुरा प्रभाव पड़ता है जिसके कारण हेपिटाइटिस और सिरोसिस जैसे रोग हो जाते हैं जो बिलीरुबिन के सतर को कमजोर करने लगते हैं और पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है|
  2. अनुवांशिककारक- जो लोग मलेरिया, थैलासीमिया और ऑटो इम्यून से ग्रस्त है उन लोगों में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से टूटने लगती है और बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि होती है जो पीलिया होने का कारण बनता है|
  3. पित्त नलिका में रुकावट-पित्त नलिका में रुकावट आने के कारण भी पीलिया हो सकता है शरीर में पित्त नलिकाए संकीर्ण हो जाती है जिसके कारण बिलीरुबिन युक्त पित्त निकलने लग जाता है और पीलिया होने का कारण बन जाता है|
  4. ब्लड ग्रुप अलग होना- नवजात शिशु और मां का ब्लड ग्रुप अलग अलग होने पर शिशु को पीलिया होने का खतरा बना रहता है|
  5. स्तनपान –जब शिशु बच्चा स्तनपान नहीं कर पाता और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण बच्चे की आंतों में रुकावट आने के कारण शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती है और बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि होती है जो पीलिया का कारण बनता है|
  6. सेफलोहेमेटोमा- गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु के रक्त के थक्के जमने लग जाते हैं जबये थक्के खत्म होने लगते हैं तब लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के कारण बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि होती है जिसके कारण शिशु बच्चों में पीलिया होने की संभावना बढ़ जाती है|

पीलिया से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(jaundice treatment)

  1. लहसुन- लहसुन में ऐसीलीन मौजूद होता है लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं इसलिए लहसुन और दो से 3 लोंग को पीसकर इसका प्रतिदिन सेवन करने से पीलिया होने की संभावना कम हो जाती है|
  2. टमाटर- टमाटर में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं इसलिए टमाटर के जूस में स्वाद अनुसार काली मिर्च और नमक मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से पीलिया की समस्या से निजात मिलता है|
  3. नीम- पीलिया से ग्रस्त व्यक्ति को प्रतिदिन नीम के पत्तों का रस पिलाने से पीलिया से निजात मिलता है|
  4. नींबू- पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन नींबू का रस पीनिंग से पीलिया से छुटकारा मिलता है नींबू की शिकंजी लाकर भी आप प्रयोग में ला सकते हैं|
  5. गन्ने का रस– हमें प्रतिदिन एक या दो गिलास गन्ने के रस का सेवन करना चाहिए गन्ने के रस का सेवन करने से बिलीरुबिन के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है और गन्ने का रस पीलिया की समस्या को जड़ से खत्म करता है|
  6. अत्यधिक पानी पीना– हमें प्रतिदिन दो या 3 लीटर पानी पीना चाहिए पानी यकृत को स्वस्थ रखने में सहायक है|
  7. अखरोट -अखरोट में विटामिन ई व फ्लोलिक एसिड पाया जाता है इसलिए अखरोट का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए अखरोट का सेवन करने से यकृत भी स्वस्थ रहता है और बिलीरुबिन का सतर नियंत्रित रहता है|
  8. गिलोय– गिलोय एक प्रकार की जड़ी बूटी है गिलोय की 40 ग्राम रस में 15 ग्राम शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीने से पीलिया रोग में आराम मिलता है गिलोय लीवर की कोशिकाओं का निर्माण करने में भी सहायक है|
  9. जौ पाउडर– गर्म पानी में भुने हुए जौ के पाउडर और शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीने से पीलिया रोग को काफी हद तक कम किया जा सकता है|
  10. फिटकरी– फिटकरी का सेवन करने से पीलिया को जड़ से खत्म किया जा सकता है इसलिए फिटकरी को पीसकर उसमें थोड़ा सा मक्खन मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से पीलिया रोग जड़ से खत्म होता है|
  11. अरंड के पत्तों का रस-गाय के कच्चे दूध के साथ अरंडी के पत्तों के रस का सेवन करने पर कुछ ही दिनों में पीलिया रोग जड़ से खत्म होता है|
  12. मूली का रस- मूली का रस पीने से पीलिया रोग जड़ से खत्म होता है|
गिलोय
गिलोय

हाइपरसोम्निया यानी अति निंद्रा (hypersomnia)

हाइपरसोम्निया यानी अति निंद्रा (hypersomnia)

हाइपरसोम्निया

हाइपरसोम्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा नींद आने लगती है इसमें व्यक्ति को लगता है कि आपको दिन के समय भी नींद आ रही है जबकि आपको जगने की इच्छा होती है| सामान्यतः ऐसा रात में न सोने के कारण होता है जो लोग हाइपरसोम्निया से ग्रस्त होते हैं भी किसी भी समय कहीं भी सो सकते हैं |अगर आपको रात में पूरी नींद लेने के बाद भी लगातार एक या दो हफ्तों तक आपको ज्यादा नींद आ रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क कर लेना चाहिए कुछ शारीरिक बीमारियां जैसे थायराइड, शुगर ,वायरल बुखार आदि हाइपरसोम्निया होने का कारण हो सकते हैं|

नींद हर 24 घंटे में नियमित रूप से आने वाला वह वक्त है जब हम अचेतन अवस्था में होते हैं और आसपास की चीजों से अनजान रहते हैं|

हाइपरसोम्निया या ज्यादा नींद आने के प्रकार(hypersomnia types)

नारकोलेप्सी यह कम पाया जाने वाला रोग है जिससे चिकित्सक इसे पहचानने में गलती कर देते हैं अगर आप को दिन भर नींद आने लगती है और अचानक नींद के  गहरे  झटके आने लगते हैं और आप रोक नहीं पाते और जब आप गुस्से में होते हैं यहां हंस रहे होते हैं तो अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण खो देते हैं और गिर जाते हैं ऐसी समस्या को कैटालेप्सी कहा जाता है| उम्र के बढ़ने के साथ-साथ यह समस्या ठीक हो जाती है|

हाइपरसोम्निया के लक्षण(hypersomnia symptoms)

  • दिन भर बहुत नींद का महसूस होना और अचानक नींद के झटके आना इस रोग के मुख्य लक्षण है
  • नींद से उठने के बाद दोबारा सोने जैसे लक्षण नजर आते हैं
  • अधिक नींद आने के कारण व्यक्ति की ऊर्जा में कमी आने लगती है
  • भूख न लगना
  • अधिक नींद आने के कारण व्यक्ति स्वभाव मैं चिड़चिड़ा हो जाता है
  • तनाव और चिंता का अनुभव होना
  • घबराहट और बेचैनी का अनुभव होना
  • दिन के 24 घंटों में से लगातार 9 से 10 घंटे नींद आना सामान्य है
  • थकान का अनुभव होना
  • काम में मन का न लगना

हाइपरसोम्निया के कारण(hypersomnia causes)

  1. नारकोलेप्सी (दिन में ज्यादा सोना)- नारकोलेप्सी होने का मुख्य कारण हाईपोक्रिटिन नामक तत्व की कमी के कारण होता हैनारकोलेप्सी यह कम पाया जाने वाला रोग है जिससे चिकित्सक इसे पहचानने में गलती कर देते हैं अगर आप को दिन भर नींद आने लगती है और अचानक नींद के  गहरे  झटके आने लगते हैं और आप रोक नहीं पाते और जब आप गुस्से में होते हैं यहां हंस रहे होते हैं तो अपनी मांसपेशियों पर नियंत्रण खो देते हैं और गिर जाते हैं ऐसी समस्या को कैटालेप्सी कहा जाता है|
  2. अनुवांशिकता-बीपीडी होने की अनुवांशिक कारण भी होते हैं अगर आपके परिवार के सदस्य माता या पिता इस रोग से पीड़ित है तो बच्चों में इस रोग के होने की संभावना ज्यादा होती है क्योंकि माता पिता से जीन बच्चों मेंआते हैं |
  3. न्यूरोलॉजिकल बीमारी- किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो जाने के कारण भी हाइपरसोम्निया होने की संभावना बढ़ जाती है अन्य रोग जैसे मधुमेह थायराइड संबंधी समस्या इस रोग का कारण हो सकते हैं|
  4. वजन का अधिक होना- अधिक वजन होने के कारण हाइपरसोम्निया कि समस्या होती है|
  5. तनाव-तनाव बीडीपी होने का मुख्य कारण है प्रतिदिन की गतिविधियों में होने वाले बदलाव जैसे परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होना या कोई मानसिक तनावइस बीमारी का कारण बनता है|
  6. सिर पर चोट लगना– सिर पर चोट लगना भी हाइपरसोम्निया होने का मुख्य कारण है ऐसा भी हो सकता है कि सोते या उठते वक्त आप कुछ बोल नहीं पाए|
  7. नशीले पदार्थों का सेवन- नशीले पदार्थों जैसी शराब का सेवन ड्रग्स कैफिन का सेवन करने से हाइपरसोम्निया यानी अति निद्रा होने की संभावना बढ़ जाती है|

होंठ फटने के कारण और उपाय

होंठ फटने के कारण और उपाय

होंठ फटने के कारण और उपाय का वरणन इस प्रकार से है|होंठ फटने की समस्या एक आम समस्या बन गई है| चाहे महिला हो या पुरुष होंठ आपकी खूबसूरती और आकर्षण को बढ़ाते हैं| मौसम में परिवर्तन आने के कारण होठों की नमी कहीं खो सी जाती है और होंठ फटने की समस्या उत्पन्न हो जाती है| क्या आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपके होंठ वास्तव में फटते क्यों है? होंठ फटने का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन की समस्या है|शरीर में पानी की कमी के कारण में होंठ फटने लग जाते हैं| होठों में खुर्दरापन और होठ सूखे दिखने लगते हैं|

हमें अपने होठों का अच्छी तरह से ख्याल रखना चाहिए ताकि वह कोमल मुलायम बनी रहे|होठों को बार-बार दांतो से चबाने से होठों पर जीभ फेरने से घटिया कॉस्मेटिक उत्पादों को प्रयोग में लाने से होंठ फटने लग जाते हैं| हारमोंस में असंतुलन भी और फटने का मुख्य कारण है| होंठ फटने पर होठों में जलन , सूजन , होठों का सिकुड़ना फोटो पर दरारें होने के कारण खून निकलना कैसे लक्षण नजर आने लगते हैं|

होंठ फटने के लक्षण(chapped lips symptoms)

  • होठों पर चोट न लगने पर भी होठों का सूज जाना
  • होठों पर सूखापन आना
  •  होठों का सिकुड़ना
  •  होठों पर दरारे आना
  •  होठों पर खुरदरापन होना
  • होठों पर दरारें होने के कारण खून निकलना
  •  होठों में  लल्लापन आना व जलन होना

होंठ फटने के कारण(chapped lips causes)

  1. विटामिन की कमी-शरीर में विटामिंस की कमी होना होंठ फटने का मुख्य कारण है| शरीर में विटामिन बी की कमी के कारण होंठ फटने लगते हैं और विटामिन ए अधिक मात्रा में पाए जाने के कारण भी होंठ फटने की समस्या हो जाती है|
  2. डिहाइड्रेशन की समस्या-शरीर में डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी होने के कारण भी होंठ फटने लगते हैं और होठों में खुरदुरापन व सूखापन आ जाता है इसलिए हमें अत्यधिक पानी पीना चाहिए|
  3. आयरन की कमी -शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयरन ने मिलने पर होंठ फटने का मुख्य कारण बन सकता है इसलिए हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनमें आयरन पर्याप्त मात्रा में हो जैसे अंडे, मछली आदि|
  4. हार्मोन में असंतुलन-हारमोंस में असंतुलन आने के कारण भी होंठ फटने की समस्या हो जाती है|
  5. होठों की सफाई न करना-युवी किरणों के संपर्क में आने से  होंठ फटने लगते हैं और होंठ सूख जाते है|
  6. पोषक तत्व की कमी-शरीर में पोषक तत्व की कमी के कारण भी होंठ फटने लगते हैं इसी हमें ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना  चाहिए जिसमें पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो|
  7. धूम्रपान करना-बीड़ी , सिगरेट , तंबाकू का सेवन करने से होंठ फटने की समस्या हो जाती है|
  8. कॉस्मेटिक उत्पाद-घटिया कॉस्मेटिक उत्पादों को प्रयोग में लाने पर भी होंठ फटने लगते हैं घटिया कॉस्मेटिक उत्पादकोंमें केमिकल की मिलावट होने के कारण होंठ सूख जाते हैं|
  9. होठों को चाटने से-बार-बार होठों पर जीभ फेरने से होंठ फटने लग जाते हैं और होठों में सूखापन खुरदुरा पर आ जाता है|

होंठ फटने के आयुर्वेदिक उपाय

  1. शहद-शहद फटे हुए होठों के लिए काफी लाभदायक है शहद में सुहागा का मिश्रण मिलाकर दिन में तीन चार बार होठों पर मलने पर फटे हुए होंठ ठीक हो जाते हैं|
  2. नारियलतेल –नारियल के तेल में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और फैटी एसिड गुण पाए जाते हैं जो त्वचा को पोषण देते हैं|रात को सोने से पहले नारियल के तेल से होठों की मसाज करने पर फटे होंठ ठीक हो जाते हैं|
  3. हल्दी-हल्दी के पाउडर को होठों पर लगाने से फटे हुए होंठ ठीक हो जाते हैं और हल्दी पाउडर को मलाई के साथ होठों पर मिलने से होठों का कालापन भी दूर होता है|
  4. दही-दही में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ फटने की समस्या दूर होती है|
  5. मुलेठी –मुलेठी , गूगल , देवदारू, लोबान, राम आदि को बराबर मात्रा में पीसकर छानकर होठों पर लगाने से फटे होंठ ठीक हो जाते हैं|
  6. मेथी-प्रतिदिन सुबह और शाम मेथी के बीज के चूर्ण के साथ गुड़ का सेवन करने से फटे होंठ ठीक हो जाते हैं और होठों से खून निकलना भी बंद हो जाता है|
  7. धनिया-धनिया ,गेरू, मॉम, सेंधा नमक और घी को बराबर मात्रा में पीसकर छानकर पेस्ट बना लें अब इस पेस्ट को होठों पर लगाने से होठों संबंधी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं|
  8. जायफल-जायफल को पीसकर होठों पर मलने से फटे होठों की शिकायत दूर होती है|
  9. घी और नमक-घी और नमक मिलाकर प्रतिदिन दो से तीन बार नाभि पर मलने से होठों के फटने की समस्या दूर होती है|
  10. इलायची-इलायची को मक्खन में मिलाकर प्रतिदिन दो से तीन बार होठों पर लगाने से फटे हुए होंठ ठीक हो जाते हैं|
  11. बादाम रोगन तेल-रात को सोते समय बादाम रोगन शिरीन तेल होठों पर मलने से होठों पर पपड़ी नहीं जमेगी|
  12. एलोवेरा-एलोवेरा की जेल को निकाल कर कुछ बूंदे होठों पर लगाने से फटे होठों की समस्या दूर होती है और होंठ मुलायम भी होते हैं|
  13. पपीता– पपीते के रस को अपने होठों की मसाज करने से फटे होंठ ठीक हो जाते हैं|
मुलेठी
मुलेठी

लिप स्क्रब(lip scrub)

  1. मिंट लिप स्क्रब– मिंट लिप स्क्रब बनाने के लिए दो चम्मच जैतून या नारियल का तेल ले ले उसमें दो चम्मच चीनी और 7-8 बूंदे पुदीने के तेल की मिला ले और फिर इस मिश्रण में अंगूर के बीज का तेल मिला कर पेस्ट बना लें अब इस स्क्रब को होठों पर कुछ मिनट के लिए मसाज करें और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से धो लें|पुदीने का तेल आपके रक्त संचार को बढ़ाने में सहायक है और आपके होठों को आकर्षित बनाता है आपके होठों की त्वचा कोमल बनती है इसके अलावा अंगूर के बीच में भी एक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो आपकी होठों को कोमल बनाते हैं|
  2. नारियल और शहद का लिप स्क्रब– नारियल के तेल में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट और फैटी एसिड गुण पाए जाते हैं जो त्वचा को पोषण देते हैं और शहद से होठों को नमी मिलती है एक चम्मच नारियल तेल में एक चम्मच शहद , दो चम्मच चीनी , आधा चम्मच गुनगुना पानी मिलाकर पेस्ट तैयार कर ले अब इस पेस्ट को होठों पर कुछ मिनट के लिए मसाज करें और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से धो लें|
  3. चॉकलेट लिप स्क्रब- इस स्क्रब को बनाने के लिए एक चम्मच कोको पाउडर ले इसमें 2 चम्मच ब्राउन शुगर, एक चम्मच वनीला एक्सट्रैक्ट और 1 चम्मच शहद व दो चम्मच जैतून का तेल ले| अब इन सामग्रियों को मिलाकर एक पेस्ट बना लें अब इस पेस्ट को अपने होठों पर मसाज करने से आपकी होठों की फटने की समस्या दूर होती है कोको पाउडर आपकी होठों को मॉइश्चराइज करने में सहायक है|
  4. संतरे के छिलके का स्क्रब- इसस्क्रब को बनाने के लिए संतरे के सूखे हुए छिलकों के दो चम्मच पाउडर में दो चम्मच ब्राउन शुगर और कुछ बूंदे बदाम के तेल की मिला ले अब इस पेस्ट को होठों पर हल्के हाथों से मसाज करें और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से धो ले संतरे के छिलके का पाउडर से आपके होंठ गुलाबी बनते हैं और बादाम तेल आपके होठों के रूखे पन की समस्या को दूर करता है|
  5. कॉफी और शहद का स्क्रब- इस स्क्रब को बनाने के लिए एक चम्मच कॉफी पाउडर में एक चम्मच शहद मिलाकर स्क्रब को होठों पर मलने से होठों के फटने की समस्या दूर होती है|
  6. दूध और गुलाब का स्क्रब– इसस्क्रब को बनाने के लिए गुलाब की कुछ पंक्तियों को दूध के साथ अच्छे से पीसकर पेस्ट बना लें अब इस पेस्ट को कुछ मिनटों तक होठों पर भतार आपके होठों की फटने की समस्या दूर होती है साथ ही साथ गुलाब में एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं|गुलाब की पंखुड़ियां आपके होठों को गुलाबी बनाने में सहायक है|