शिशुओं और बच्चों में कान का बहना

शिशुओं और बच्चों में कान का बहना

शिशुओं और बच्चों में कान का बहना नामक समस्या आती है परंतु ज्यादातर माता-पिता इसको इग्नोर कर देते हैं यह समस्या अगर समय पर इलाज न करवाएँ जाए तो आने वाले टाइम में गंभीर रुप धारण कर सकती है| इस समस्या की वजह सें कम सुनाई देना, कान में दर्द होना, खारिश होना और भी कुछ समस्या हो सकती है|कान के अंदर से मवाद जैसा पानी निकलना इस बीमारी का मुख्य लक्षण है इसी को ही कान बहना बोलते है|

यह बीमारी किसी को भी हो सकती है मुख्य बच्चों , कुपोषित लोगों और बुखार के रोगियों की होने की संभावना पाई जाती है |

कान का बहना
कान का बहना

शिशुओं और बच्चों में कान दर्द के लक्षण

  1. कान से मवाद जैसा पानी निकलता है|
  2. अपना जबड़ा खोलने में दिक्कत महसूस करता है और उसकी वजह से अच्छी तरह स्तनपान करने में दिक्कत आती है|
  3. ज्यादा दर्द होने से बच्चे को बुखार भी आ जाता है|
  4. अगर शिशु बार-बार अपने कानों को खींचकर या कान पर हाथ रखकर रो रहा है तो समझ जाइये कि बच्चे के कान में दर्द हो रहा है।

शिशुओं और बच्चों में कान बहने के कारण

कान बहने का कारण किसी भी प्रकार का वायरल, वैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है। यह बीमारी जन्म से नहीं होती परन्तु इसके अनेक कारण हो सकते हैं।बाहरी कान में चोट लगने, फोड़ा−फुंसी होने या फंफूद लगने पर कान बहने कीसमस्या हो सकती है।मध्य कान एक नली द्वारा नाक के पिछले तथा गले के ऊपरी हिस्से से जुड़ा होता है। इस कारण नाक तथा गले में होने वाली साइनस तथा टान्सिल जैसीसमस्याएं मध्य कान को प्रभावित करती हैं। इस स्थिति में कान में सूजन होजाती है और इसकी ट्यूब बंद हो जाती है जिसके फलस्वरूप कान के मध्य भाग में एक किस्म का तरल पदार्थ इक्ट्ठा होने लगता है। दबाव बढ़ने पर यह तरल पदार्थकान के पर्दे को हानि पहुंचाता हुआ बाहर निकल आता है।

शिशुओं और बच्चों में कान में दर्द होने के कारण

  1. कान की सफाई का गलत तरीका – कान की सफाई तो करें लेकिन इसमें बहुत अधिक सतर्कता बरतने की भी आवश्यकता होती है। किसी बारीक चीज से कानों की सफाई करने से कान को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जब कभी अपने बच्चे के कान की सफाई करें तो सावधानी के साथ रूई की तीली का ही इस्तेमाल करें।
  2. एलर्जी – कान दर्द होने का एक और कारण एलर्जी भी हो सकता है।इसके अलावा अगर सोते समय में या अन्य किसी वक्त में कान के अंदर चींटी या कोई कीड़ा घुस जाए तो इसकी वजह से भी कान दर्द हो सकता है।
  3. गलत तरीके से स्तनपान – स्तनपान कराने के समय में भी आपको बहुत सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। अगर आप अपने बच्चे को लेटे हुए स्तनपान करा देती हैं ये यूस्टेशियन ट्यूब से होकर बच्चे के कान के पर्दे में इनफेक्शन का कारण बन सकता है। इसकी वजह से आपके बच्चे के कान में मवादआने लगता है। तो इसलिए हमारी सलाह है कि आप स्तनपान कराने के समय में इनबातों का जरूर ख्याल रखें।
  4.  बीमारियों की वजह से भी हो सकता है कान दर्द– डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम या गले में इनफेक्शन इत्यादि समस्याओं के चलते उनके टॉन्सिल्स में सूजन हो जाता है। और इसके चलते भी शिशु के कान में दर्द हो सकता है।

शिशुओं और बच्चों में कान बहने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. कान बहने पर आप नींबू और शहद का प्रयोग भी करें यह सबसे आसान और सरल सा प्रयोग है एक चम्मच शहद में एक चम्मच नीम का तेल मिलाकर अच्छे से मिला लें फिर एक रुई को इस मिश्रण में भिगोकर कानों में इसरो ही को लगा दे इस तरह यह उपाय कान में मवाद आने से बचाता है और वह कान बहने से भी रोकता है|
  2. तिल के तेल में चार से पांच लहसुन की कलियां छिलकर तब तक पकाएं जब तक कि वह कलियां काली ना पड़ जाए फिर इनमें से लहसुन को निकाल कर एक डिब्बी में भर ले अब हर रोज दो लहसुन की कलियां कान में डाले वह 2 से 3 घंटे बाद कान में रुई लगा ले और इस मिश्रण को बाहर निकाल दें इस तरह दिन में दो बार कानों में इस मिश्रण को डालने पर वह बच्चों का कान बहना और मवाद निकलना बंद हो जाता है अगर आप तो इस नुस्खे से आराम न हो तो तो आप तेल की जगह गाय का घी भी प्रयोग कर सकते हैं| 50 ग्राम गाय के घी में दो से चार लड़कों में कली डालकर पकाएं और ऊपर बताए गए विधि के अनुसार कान बहने पर का प्रयोग करें|
  3. प्याज का प्रयोग भी लाभदायक है इसके लिए सबसे पहले रुई की सहायता से कान की मवाद को साफ किया जाता है इसके बाद प्याज के रस की 5-6 बूंदे कान में डालें और वैसे ही लेटे रहे फिर बाद में खड़े होते वक्त कान में रुई लगा ले इस तरह से 1 सप्ताह तक इस घरेलू नुस्खा को आजमाते रहे|
  4. कान से पानी निकलना व अचानक दर्द होने पर आदि को रोकने के लिए खुद के पेशाब की पांच से छह बूंदे कान में डालने से कान में रुई लगा ले घरेलू इलाज में इस नुस्खे को आजमा कर देखिए बहुत लाभकारी है|
  5. हर रोज सुबह और शाम पानी में एक-दो निंबू काट कर डालें और इसको पीने से आपको बहुत लाभ मिलेगा|
  6. छोटी हरड़ 10 ग्राम अजवायन 20 ग्राम और सौंफ 20 ग्राम मेथी के बीज 20 ग्राम काला नमक 20 ग्राम ले इन सब चीजों को बारीक- बारीक पीस लें और पाउडर जैसा चूर्ण बना ले अब हर रोज इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ मिलाकर दिन में तीन बार इसका सेवन करें यह बहुत अच्छा नुस्खा है इससे आपको हंड्रेड परसेंट फायदा मिलेगा|
लहसुन
लहसुन

सर्दी-जुकाम किस वजह से होता है?

सर्दी-जुकाम किस वजह से होता है?

सर्दी-जुकाम मुंह, नाक और गले का इनफेक्शन है, जो कि बहुत से अलग-अलग विषाणुओं में से किसी एक की वजह से होता है। शिशुओं को जुकाम ज्यादा इसलिए होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षण प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती।वह अभी संक्रमणों से लड़ने की शक्ति विकसित कर रही होती है।

जब सर्दी-जुकाम से ग्रस्त कोई व्यक्ति छींकता या खांसता है, तो जुकाम के विषाणु हवा में फैल जाते हैं और किसी अन्य व्यक्ति में सांस के जरिये अंदर पहुंच जाते हैं। इसी तरीके से सर्दी-जुकाम एक से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। ये विषाणु हाथ से हाथ के संपर्क से भी फैलते हैं। इसलिए छींकने के बाद हमेशा अपने हाथ धोएं।

सर्दी-जुकाम
सर्दी-जुकाम

सर्दी-जुकाम के लक्षण

  • आंखे लाल हो जाना
  • गले में खराश
  • कान में दर्द
  • श्लेम  से भरी और बहती नाक
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी
  • भूख न लगना

बच्चे को सर्दी-जुकाम होने पर क्या करें?

सर्दी-जुकाम बच्चों को होने वाली एक आम बीमारी है क्योंकि उनमें प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, मौसम में थोडा सा बदलाव उन्हें बीमारी की चपेट में ला सकता है। खासकर नवजात शिशुओं को, जिनका हाल ही में बाहरी मौसम से परिचय हुआ होता है। क्योंकि नवजात शिशु केवल नाक से सांस ले सकते हैं|सर्दी के कारण उनकी सेहत बिगड सकती है।

आप क्या करेंगे? यहां इस बीमारी से निपटने के लिए कुछ तरीके दिए गए हैं, हालांकि गंभीर स्थिति में डॉक्टर इनकी कम आयु के कारण हम किसी भी तरह का प्रयोग नहीं कर सकते। ऐसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। परंतु यदि आपके बच्चे को कभी जुकाम हो जाए और उसकी तबीयत बिगड जाए तो की सलाह लेना बेहतर होगा।फिर भी आप चाहे तो इन घरेलू उपचारों पर एक नजर डाल सकते हैं।

शिशुओं के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ आहार

  1. नमक का पानी – बंद नाक के कारण बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है, इस वजह से बच्चा ना तो ठीक से खाता है ना सोता है। ऐसी स्थिति में उसे नमक के पानी का सेवन कराएं। यह पानी बलगम से छुटकारा दिलाएगा। इसे दिन में दो से तीन बार पिलाएं। शिशुओं का बंद नाक साफ करने के लिए सक्शन बल्ब का इस्तेमाल किया जाता है परंतु यह प्रक्रिया ड़ॉक्टर द्वारा की जाए तो बेहतर है।
  2. शहद चखाएँ – बच्चों को सर्दी-जुकाम से निजात दिलाने में शहद काफी कारगर साबित होता है। आप चाहे तो गर्म पानी में तुलसी के कुछ पत्तों को उबाल कर उसमें शहद मिलाकर भी पिला सकते हैं। एक साल से कम आयु वाले बच्चों को शहद ना चखाएं क्योंकि उनका पाचन तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता, अत: शहद चखाने पर उन्हें बोटुलिज्म हो सकता है।
  3. यदि बुखार हो- यदि आपके शिशु को बुखार है तो डॉक्टर से तुरंद संपर्ककरें। 6 माह से अधिक आयु वाले शिशुओं को एसिटामिनोफेन एवं इबुप्रोफेन जैसी दवाएं दी जा सकती हैं। परंतु बिना ड़ॉक्टर की सलाह के इन्हें देना उचित नहीं होगा। दवा अधिक मात्रा में ना दें तथा दवा से होने वाली एलर्जी पर भी ध्यान दें।

बच्चों की सर्दी-जुकाम के घरेलू उपाय

  1. छोटे बच्चों की सर्दी-जुकाम होने पर छोटी सी लहसुन की कली ले और बारीक पीस लें हल्का सा शहद मिला ले और बच्चे को चटवा दें | यह दिन में दो से तीन बार करें रात को सोने से पहले , सुबह उठने के बाद व दोपहर में |
  2. अदरक को पीसकर उसका 8 से 10 ग्राम रस निकाल ले और एक चम्मच में अच्छे से मिला लें अब इसे शिशु बच्चे को चटा दे बच्चों को सर्दी-जुकाम , खांसी लग जाने पर रोजाना रात को सोते समय , व सुबह उठने के बाद दे यह प्रयोग बुखार को भी दूर करता है| वह सर्दी , जुखाम , खांसी व बुखार इन तीनों का घरेलू उपाय है |यह भी असरदार उपाय हजारों पर प्रयोग किया जा चुका है इसके प्रयोग से 30 मिनट बाद तक पानी ने भी यह बच्चों की सर्दी की दवा है|
  3. एक चम्मच नींबू के रस में दो से तीन चम्मच शहद मिलाएं और हर 2 घंटे के बाद बच्चे को यह मिश्रण पिलाते रहे इसके साथ ही एक गिलास या एक कप गर्म दूध में एक से दो चम्मच शहद मिलाकर भी बच्चों को पिला सकते हैं| दोनों उपाय रामबाण उपचार करते हैं यह छोटा सा प्रयोग सर्दी और खांसी दोनों में लाभप्रद होता है| बच्चों की सर्दी-जुकाम का इलाज में यह सभी उपाय बहुत ही कारीगर है|
  4. सर्दी-जुकाम खांसी होने पर बच्चों को तुलसी में अदरक की चाय पिलाते रहे |
  5. रोजाना बच्चों को रात को सोते समय एक गिलास या एक कप में एक चम्मच हल्दी मिला कर दे|
  6. बुखार आने पर तुलसी का काढ़ा बनाकर पिलाएं|
  7. अपने बच्चों को जिंदगी भर सर्दी खांसी से दूर रखने के लिए उसे रोजाना सुबह के समय खाली पेट तुलसी के तीन चार पत्ते खिलाएं और एक गिलास पानी पिलाएं इससे आपके बच्चे को कभी भी सर्दी , बुखार , खांसी , मलेरिया ,टाइफाइड आदि बिल्कुल भी नहीं होंगे|
  8. खांसी मौसमी परिवर्तन आने पर अपने बच्चों को मौसम के अनुसार कपड़े पहने हुए पूरा बदन ढका हुआ रहे ऐसे कपड़े पहनाए बच्चों को ठंडी हवा में जाने से रोके व अन्य गंदी चीजें खाने से भी रोके|
  9. पतंजलि की एक दवा है जिसका नाम दिव्य धारा है यह मात्र 30 से ₹40 की आती है इसको रोजाना रात को सोते समय जरा सी बच्चों की कपड़े शर्ट की कॉलर के पास लगा दे इसके प्रयोग से बच्चे की सर्दी की वजह से बंद नाक भी खुल जाएगी मैं रात भर खुली रहेगी उसे सांस लेने में तकलीफ भी नहीं होगी इस तरह आपका बच्चा सर्दी-जुकाम से बिल्कुल बचा रहेगा|
अदरक
अदरक

कोरोना वायरस

कोरोना वायरस

कोरोना वायरस देश भर मे चर्चा का विषय बना हुआ है |चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया मे कोहराम मचा रखा है| वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (W.H.O) के अनुसार कोरोना वायरस शुरुआत चीन के हुवेई प्रांत के वुहान शहर के एक सी-फूड बाजार से ही हुई है |चीन के वुहान से शुरू हुए कोरोना वायरस कई देशो मे तेजी से फैल रहा है|चीन के बाद फ्रांस , थाईलैंड, सिंगापुर, जापान ,इटली ,भारत ,ईरान आदि देशों में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज पाये जा रहे हैं| कोरोना वायरस वुहान से ही दुनिया के 31 देशों में फैल चुका है|चीन मे अब तक 8000 से ऊपर लोगों की कोरोना वायरस से  मौत हो चुकी है| कोरोना से यूरोप मे अब तक3,421 लोगो की मौत हो चुकी है| स्पेन मे अब यक 13,700 लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं और 558 लोगों की मौत हो चुकी है | ईरान मे अब तक कोरोना वायरस  से अब तक 1,135 लोगों की मौत हो चुकी है |पाकिस्तान मे अब तक 249 लोग कोरोना एक्टिव पॉजिटिव पाये गए हैं|  देश में कोरोना वायरस के एक्टिव पॉजिटिव मामलों की संख्या 151 हो गई है| 14 लोगों को इलाज के बाद घर भेज दिया गया है|

कोरोना वायरस एक ऐसा वायरस है जिसका संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है जिसमें कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति को सबसे पहले सिर दर्द ,ग्ले मे दर्द ,जुखाम ,खांसी ,सांस लेने मे दिक्कत , बुखार होने लगता है| बुखार निमोनिया का रूप भी धारण कर सकता है और किडनी से संबन्धित समस्या भी हो सकती है | कम से कम 14 दिनों तक इस रोग के लक्षण दिखाई देने लगते हैं |भारत मे अब तक 3 लोगो की मौत हो चुकी है | हाल ही में फ़्रांस से लोटे 63 वर्ष के बुजुर्ग की मुंबई के कस्तूरबा हस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर मृत्यु हो गई| इनमें कर्नाटक में एक 76 साल का व्यक्ति और दिल्ली में 68 साल की एक महिला भी शामिल हैं|

कोरोना वायरस
कोरोना वायरस

कोरोना वायरस(कोविड 19) के लक्षण

  • सिर दर्द होना
  • ग्ले मे दर्द होना
  • जुखाम होना –नाक बहना
  • सांस लेने मे कठिनाई का अनुभव होना
  • बुखार और थकान का अनुभव होना
  • मांसपेशिओ में दर्द होना

कोरोना वायरस के कारण

  1. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क मे आने से विषाणुयक्त कण सांस के जरिए व्यक्ति के शरीर मे प्रवेश करते हैं जिससे कोरोना वायरस तेजी से फैलता है |
  2. संक्रमित धातु को छुने कोरोना वायरस तेजी से फैलता है |
  3. संक्रमित व्यक्ति के छींकते हुए और खांसते हुए उसके थूक के कण हवा मे फैलते हैं जिससे आस –पास के लोगों में कोरोना वायरस होने की संभावना बढ़ जाती है|

कोरोना वायरस से बचने के लिए क्या –क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए

  • छींकते हुए और खांसते हुए अपने मुँह ओर नाक को टीशू से ढकें |
  • भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाएं|
  • ऐसे व्यक्ति के संपर्क मे आने से बचें जो फ्लू से पीड़ित हो |ऐसे व्यक्ति के संपर्क मे आने से कोरोना वायरस तेजी से फैलता है |
  • हाथों पर कोरोना वायरस 10 मिनट तक रहता है इसलिए बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी  से धोते रहें ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचे रहें |
  • हाथों को बिना धोये अपनी नाक ,आँख ,मुंह को न छूएँ|
  • सार्वजनिक स्थान पर जाने से बचें और मास्क का इस्तेमाल करें|
  • अगर कोरोना वायरस किसी धातु पर पड़ा हो तो 12 घंटों तक  ही जीवित रहता है इसलिए संक्रमित धातु को छुने के बाद अपने हाथ साबुन और पानी  से धोएं|
  • कपड़ों पर कोरोना वायरस 9 घंटों तक रहता है इसलिए कपड़ों को अच्छी तरह साबुन से धोएँ और अच्छी तरह धूप में सुखाएँ |
  • सब्जियों और फलों को खाने से पहले अच्छी तरह से धोएँ|
  • अंडे , मछली –माँस आदि खादय पदार्थों का सेवन करने से बचें|
  • अगर आपको खांसी , जुखाम और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत ही अपने डॉक्टर की सलाह लें|

डिप्रेशन (Depression )

डिप्रेशन (Depression )

डिप्रेशन

डिप्रेशन की समस्या आम समस्या बन गई है जिसके बहुत से कारण हो सकते हैं|भारत में लगभग 1 मिलियन लोग डिप्रेशन के शिकार हो चुके हैं|डिप्रेशन की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसके कारण बच्चे हों या बड़े सब तनाव से पीड़ित होते जा रहे हैं| लंबे समय तक तनाव रहने से चिंता का विषय बन सकता है| दुनिया भर में हो रही ज्यादा बीमारियों का कारण तनाव भी है| तेजी से बदलता लाइफ़स्टाइल , खानपान में लापरवाही आदि कुछ ऐसे कारण है जिसमें आदमी तनाव का शिकार होता जा रहा है| आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां तनाव को कम करने में आपकी मदद कर सकती हैं|

डिप्रेशन
डिप्रेशन

डिप्रेशन के लक्षण

  • हमेशा थकान जैसा अनुभव करना
  • किसी भी काम में मन का न लगना
  • किसी भी काम का निर्णय न ले पाना
  • चिड़चिड़ा हो जाना
  • वजन का घटना बढ़ना और अनिद्रा का शिकार हो जाना
  • खालीपन की भावना

डिप्रेशन के कारण

  • हार्मोन में परिवर्तन-हार्मोन में बदलाव तनाव का कारण बन सकता है| हार्मोन में बदलाव जैसे-रजोनिवृत्ति , थायराइड की समस्या आदि विकार डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं|
  • अनुवांशिकता- अगर आपके परिवार के जिमी पहले किसी को तनाव हुआ है तो आप भी तनाव का अनुभव कर सकते हैं|
  • मानसिक समस्या-कुछ लोगों में ही दिमाग में परिवर्तन के कारण तनाव हो सकता है|

डिप्रेशन से मुक्त करने वाली आयुर्वेदिक औषधियां

  1. अश्वगंधा- इस औषधि का प्रयोग करने से मन में नकारात्मक विचार आने बंद हो जाते हैं और इससे तनाव भी कम होता है|अश्वगंधा में  स्टेरायडल लैक्टोन,  सैपोनिन, एल्कलॉइड जैसे सक्रिय यौगिकों की उपस्थिति होती है जिसे तनाव और चिंता को दूर करने के लिए जाना जाता है|ये एंटी-इंफ़्लामेट्री और एंटी एंग्जायटी गुण प्रदान करते हैं। 
  2. ब्राह्मी-ब्राह्मी जड़ी बूटी के प्रभाव से तनाव और मानसिक रोग दूर हो जाते हैं और शरीर में समरण शक्ति का विकास भी हो जाता हैब्राह्मी के सेवन से मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है, जिससे मन शांत होता है |
  3. हल्दी-हल्दी एक एंटीऑक्सीडेंट पदार्थ है जिसे शारीरिक और मानसिक रोगों से हमें निजात मिलता है|
  4. जटामांसी-इस औषधि के प्रयोग से व्यक्ति की मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होती है और इससे तनाव भी दूर होता हैयह अपने  एंटीडिप्रैंसेंट और  एंटी स्ट्रेस गुणों के लिए भी जाना जाती है। 
  5. मैग्निशियम– मैग्नीशियम की कमी के कारण हमारी याददाश्त कमजोर होने लगती है और तनाव भी बढ़ सकता है इसलिए हमें काजू बदाम अंजीर का सेवन करना चाहिए जिसमें मैग्निशियम पर्याप्त मात्रा में होता है|
  6. जिंक-जिंक की कमी से डिप्रेशन की समस्या उत्पन्न हो सकती है इसलिए हमें मूंगफली , लहसुन , सोयाबीन , बादाम आदि का सेवन करना चाहिए जिसमें जिंक भरपूर मात्रा में होता है|
  7. ओमेगा 3– ओमेगा थ्री के नियमित सेवन से हम डिप्रेशन से बच सकते हैं इसलिए मछली सरसों के बीज , सोयाबीन , हरी बींस इन में ओमेगा 3 पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है|
  8. आयोडीन -आयोडीन के लिए भी लहसुन आदि का सेवन किया जा सकता है| नमक में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन पाया जाता है इसका सेवन करने से हम डिप्रेशनसे निजात पा सकते हैं|
हल्दी
हल्दी

डिप्रेशन से मुक्त होने के लिए सावधानियां

  1. वजन कम करें-यदि वजन बढ़ने से आपको तनाव हो रहा है तो वजन कम करने के बाद आपका मूड सामान्य हो सकता है| फिटनेस स्वास्थ्य भी में सुधार लाती है|
  2. नकारात्मक लोगों से दूर रहे-नकारात्मक लोगों से दूर रहने से मन को शांति का अनुभव होता है और नकारात्मक विचारों से निजात मिलता|
  3. मनोचिकित्सक की सलाह लें-तनाव को दूर करने के लिए सबसे आसान तरीका है कि आप गुरु चिकित्सक की सलाह ले ऐसा करने से आपको तनाव से निजात पाने में मदद मिलेगी|
  4. पर्याप्त मात्रा में नींद करना-सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए आपको पर्याप्त मात्रा में नींद करनी चाहिए प्रतिदिन 7 से 8 घंटे सोने वाले व्यक्ति में तनाव के लक्षण कम मिलते हैं|
  5. व्यायाम करना– तनाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है व्यायाम करना| व्यायाम करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैव्यायाम करने से शरीर में सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है जिस से नकारात्मक विचार दूर होते हैं|
  6. संतुलित आहार का सेवन -फल सब्जी मास कार्बोहाइड्रेट आदि का सेवन करने से मन शांत रहता है|
  7. इमोशनल स्किल्स ड्व्लोप करिए-बहुत से लोग तनाव कोशिश फील्डिंग नहीं कर पाते हैं और भावुक हो जाते हैं इमोशनल स्किल्स आपको तनाव से दूर करती है|
  8. मदद मांगीए-अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं तो इस बात को नहीं छुपाए इसे छिपाना इसे बढ़ावा देता है इसलिए अपनी किसी भी परिवार के सदस्य से डिसकस कीजिए और मशवरा लीजिए इससे आपको डिप्रेशनसे राहत मिलेगी|

सोमरोग

सोमरोग

सोमरोग एक खतरनाक स्त्री रोग है|स्त्री की योनि से जब निर्मल, शीतल, गंधरहित, साफ, सफेद और पीड़ा रहित सफेद पानी लगातार बहुत ज्यादा बहता रहता है, तब महिला  सफेद पानी के वेग को रोक नहीं पाती इसे अमृतम आयुर्वेद में सोमरोग कहा गया है ।

सोमरोग की उत्पत्ति– जिन कारणों से “प्रदररोग” (लगातार सफेद पानी आना) होता है । इसे लिकोरिया व्हाइट डिस्चार्ज ( white discharge ) भी कहते हैं ।प्रदररोग की समय पर आयुर्वेदिक चिकित्सा न होने, लापरवाही तथा पुराना होने से यही सोमरोग कहलाता है ।

सोमरोग के लक्षण

  1. बेहोशी आने लगती है|
  2. प्रलाप होता रहता है|
  3. सेक्स की इच्छा खत्म होने से पुरुष भटक जाता है|
  4. भूख भी कम लगती है खाने पीने का मन नहीं करता|
  5. जब स्त्री का सोम रोग पुराना हो जाता है तब वह मुद्रा प्रसार हो जाता है|
  6. पहले तो सोम रोग की हालत में पानी सा पदार्थ बहा करता है किंतु इस दशा में बारंबार पेशाब होते हैं और पेशाब की भी ज्यादा होती है|
  7. स्त्री जरा भी पेशाब को रोकना चाहती है तो रोक नहीं सकती परिणाम यह होता है कि स्त्री का सारा बल नष्ट हो जाता है और अंत में वह मर जाती है|
  8. एकदम कमजोर हो जाने की वजह से बेचैन रहती है|
  9. माथा शिथिल हो जाता है|
  10. मुंह और तालु सूखने लगते हैं|

सोमरोग होने के कारण

  1. सोमरोग कई बार महिला के अधिक मास मच्छी खाने चाय पीने शराब का सेवन करने से भी हो जाता है|
  2. मासिक धर्म की अनियमित समय पर होने के कारण भी यह रोग हो सकता है |
  3. बार बार गर्भधारण करने पर भी यह रोग हो सकता है |
  4. इसके अलावा योनि के ऊपरी भाग में किसी प्रकार की फोड़े फुंसी रसोली होने के कारण भी सोमरोग हो जाता है|

सोमरोग से बचने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. केले की पक्की फली आमलो का स्वरस शहद और मिश्री इन सबको मिलाकर खाने से सोम रोग और मुद्रा प्रसार नष्ट हो जाते हैं|
  2. उड़द का आटा मुलेठी शहद विदारीकंद और मिश्री इन सबको मिलाकर सवेरे ही दूध के साथ सेवन करने से सोम रोग नष्ट हो जाता है|
  3. आवलों के बीजों को जल में पीसकर फिर उसमें शहद और चीनी मिलाकर पीने से 3 दिन में ही श्वेत प्रदर और मुद्रा प्रसार नष्ट हो जाते हैं|
  4. यदि सोम रोग में पीड़ा भी हो और पेशाब के साथ सोम धातु बारंबार निकलती हो तो ताजा शराब में इलायची और तेजपात का चूर्ण मिलाकर पीना चाहिए यह बहुत लाभदायक है|
  5. शतावर का चूर्ण फॉक्कर ऊपर से दूध पीने से सोम रोग नष्ट हो जाता है |
  6. माशे नागकेसर को मीठे में पीसकर 3 दिन तक पीने और मट्ठे के साथ भात खाने से श्वेत प्रदर और सोम रोग नष्ट हो जाते हैं|

चिकन पॉक्स (छोटी माता)

चिकन पॉक्स (छोटी माता)

चिकन पॉक्स वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। यह बहुत ही संक्रामक होती है औरसंक्रमित निसृत पदार्थों को सांस के साथ अंदर ले जाने से फैलती है। चिकन पॉक्स (छोटीमाता) के संक्रमण से पूरे शरीर में फुंसियों जैसे- चक्तियाँविकसित हो जाती है जो कि दिखने में खसरे की बीमारी की तरह भी लगती है। इस बीमारी में पूरे शरीर में खुजली करने का बहुत मन करता है। चिकन पॉक्स का संक्रमण महामारी की तरह फैलता है।

यह रोग बच्चों की आपसी से संपर्क में आने पर फैलता है| अगर रोगी का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है| चिकन पॉक्स होने पर बच्चों को चिकन पॉक्स का टीका लगवाना जरूरी है| यह टीका आपके बच्चे के द्वारा चिकन फॉक्स का संक्रमण दूसरे बच्चों में फैलने से भी बचाता है|

चिकन पॉक्स
चिकन पॉक्स

चिकन पॉक्स के लक्षण

  1. छोटी माता होने पर हल्का सा बुखार होना स्वाभाविक है|
  2. छोटी माता के होने से बच्चों की फुंसियों का मवाद से भरना , फूटना और खुरदरी पड़ना आदि यह समस्या उत्पन्न हो सकती है|
  3. इस रोग में बच्चों के सीने में जकड़न होना स्वभाविक है|
  4. इस रोग में बच्चों के चेहरे पर लाल खुजली दार फुंसियां उभरने लगती है जो बाद में पूरे शरीर में फैल जाती है जैसे- खोपड़ी पर , मुंह में , कानों और गुप्तांगों पर भी|
  5. इस रोग में बच्चों को भूख कम लगना स्वभाविक है|
  6. इस रोग में बच्चों की कमर में दर्द होने की संभावना है|

चिकन पॉक्स (छोटी माता) के कारण

  1. यह रोग वेरीसेल्ला जोस्टर वायरस के कारण होता है |
  2. यह रोग महामारी की तरह फैलता है, यह रोग संक्रमित व्यक्ति के छीकने से हवा में फैली बूंदों द्वारा दूसरे व्यक्ति के साथ संपर्क में आने से फैलता है|
  3. आपको चिकन पॉक्स कभी नहीं हुआ है या चिकन पॉक्स टीका (वेरिसेलावैक्सीन/टीका) कभी नहीं लगवाया है, तो आपको चिकन पॉक्स होने की संभावना ज़्यादा है ।
  4. जो लोग दूसरी बीमारी या हालत के लिए स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं, जैसे कि वह बच्चे जिन्हे अस्थमा है।उन्हे चिकन पॉक्स होने की संभावनाज़्यादा है|

चिकन पॉक्स (छोटी माता) से बचने के लिये आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. काली मिर्च का सेवन-काली मिर्च का सेवन छोटी माता के रोग में बहुत ही फायदेमंद है|1 चम्मच प्याज के रस में 2-3 काली मिर्च पीसकर कुछ दिन तक दिन में 2-3 बार पिएं। इसके सेवन से छोटी और बड़ी माता ठीक हो जाती है।
  2. जई का आटा-चेचक के समय शरीर में काफी खुजली से ब्च्ने के लिये जई के आटे को पानी में मिलाकर लगभग 15 मिनट तक उबाल्कर इस पानी को बाथ टब में डालकर बच्चे को नहलाएं। इससे खुजली से राहत मिलती है।
  3. सिरके का इस्तेमाल –आधा कप सिरके को नहाने के पानी में डालकर स्नान करने से छोटी माता में होने वाली खुजली में राहत मिलती है।
  4. नीम का प्रयोग –नीम के पत्ते को पानी के साथ पीसकर दानो पर लगाएं। नीम के पत्तों को पानी में उबालें, और इस पानी को नहाने में प्रयोग करें। इससे चेचक के फैलने की संभावना कम होती है|
  5. हरी मटर करता है चेचक का जड़ से इलाज-हरी मटर को पानी में पकाएं, और इस पानी को शरीर में लगाएं। इससे चेचक में होने वालेलाल दाने ख्त्म हो जाते हैं।
काली मिर्च
काली मिर्च

चिकन पॉक्स (छोटी माता) में परहेज़

  1. डेयरी उत्पाद, मांस-मच्छी, रोटी या किसी अन्य प्रकार के भारी भोजन  नही खाना चाहिये|
  2. जंक फूड से दूर रहे|
  3. लाल मांस और तले हुए खाद्य पदार्थ न खाएं|
  4. दाने होने पर खुज्ली न करें खुज्ली करने पर निशान पड सक्ते है|

जोड़ों में दर्द (joint pain)

जोड़ों में दर्द (joint pain)

जोड़ों में दर्द एक आम समस्या बन चुकी है जो दोनों जोड़ों को प्रभावित कर सकती हैउम्र बढ़ने के साथ साथ हाथ पांव के जोड़ों में दर्द होने लगता है और हड्डियों में कमजोरी आने लगती है। सबसे ज्यादा ये परेशानी घुटनों में महसूस होती है। 

जोड़ों में दर्द के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे -गठिया , चोट , संक्रमण आदि इनमें से सबसे सामान्य कारण है गठिया| जिस में जोड़ों में सूजन होती है| गठिया के भी कई प्रकार होते हैं|जोड़ों में दर्द का उपचार प्रभावित जोड़ों दर्द की गंभीरता और अन्य कारणों के आधार पर होता है| औपचारिक की मूलभूत कारणों को ठीक करता है और लक्षणों को कम करने में सहायता करता है|

जोड़ों में दर्द के लक्षण (joint pain symptoms)

  • हड्डियों की आपस में घुसने से तेजी से दर्द होना|
  • जोड़ों की गतिशीलता करने की क्षमता में कमी होती है|
  • गठिया में मुख्य रूप से जोड़ों में सूजन होती है |

जोड़ों में दर्द के कारण (joint pain reason)

  1. ज्यादा देर तक बैठे रहना-ऑफिस में एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर को कई बीमारियां घेर लेती हैं। दरअसल, जब आप एक ही जगह पर ज्यादा देर तक बैठे रहते हैं तो शरीर में खून का संचार सही तरह से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द होने लगता है।ऐसे में काम करते वक्त बीच-बीच में थोड़ा ब्रेक जरूर लें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा और जोड़ों में दर्द की परेशानी नहीं होगी। 
  2. खानपान –फास्ट फूड खाने और स्मोकिंग करने से जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। अपनी डाइट में विटामिन-डी और कैल्शियम युक्त आहार को शामिल करें। 
  3. भरपूर नींद न लेना -काम की वजह से रात को लेट सोने से भी नींद पूरी नहीं होती है जोड़ों में दर्द का कारण भरपूर नींद न लेना भी है। अपने जोड़ों को हैल्दी रखने के लिए 8 घंटे नींद जरूर लें। 
  4. एक्सरसाइज -एक्सरसाइज करने से भी जोड़ों में दर्द हो सकता है|

जोड़ों में दर्द के आयुर्वेदिक नुस्खे( joint pain treatment in Ayurveda)

  • लहसुन –रोज सुबह लहसुन की 56 कलियां बोल कर खाएं इस में दर्द और सूजन को कम करने वाला साइड साइटोकींस नमक सब्सटेंस होता है|
  • अजवाइन- अजवाइन के तेल की मालिश करने से जॉइंट पैन में बहुत लाभ मिलता है यह दर्द को दूर करने में भी सहायक है|
  • सोंठ –एक चम्मच सोंठ और आधा टुकड़ा जायफल का लेकर दोनों को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर इसमें कपड़ा भिगोकर ज्वाइंट पर पट्टी बांधने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है|
  • हल्दी और अदरक- सबसे पहले दो कप पानी लेकर अच्छे से उबाले फिर इसमें एक चम्मच हल्दी और अदरक का पाउडर डालें अभी से 15 से 20 मिनट तक अच्छे से उबलने दे इसके पश्चात स्वाद अनुसार थोड़ा सा शहद मिला लें इस तरह अदरक और हल्दी की चाय बना कर एक दिन में दो से तीन बार पीए |
  • मेहंदी के पत्ते- मेहंदी के ताजे पत्ते को महीन पीसकर रात को सोते समय गाढ़ा लेप जॉइंट पर लगाएं इसे तब तक करते रहे जब तक घुटनों में दर्द कम न हो|
  • अफीम –आधी रति अफीम और दो रत्ती और दो रत्ती कपूर की गोली बनाकर खाने से खूब पसीना आकर गठिया के पुराने से पुराने रोग में भी लाभ मिलता है|
  • नींबू- नींबू का रस जॉन स्पर्म चलते रहने से जोड़ों में दर्द कम हो जाता है और घुटनों में सूजन भी कम हो जाती है|
  • सौंफ, कासनी के बीज,मकोय, हंसराज सौंफ की जड़ ,कासनी की जड़ ,मुलेठी और बबूल के फूल इन सबको 3-3 माशे लेकर 32 तौले पानी में मिट्टी की हांडी में काढ़ा बनाएं 4 -5 तौले ले पानी रह जाने पर उतारकर मल छान ले और इस काले से गठिया रोग नष्ट होता है यह सुबह शाम पीना चाहिए|
  • धतूरे के फूल, पत्ते, जड़ और फल सब डेढ़ पाव लेकर सिल पर पानी के साथ पीस लें फिर सरसों का तेल आधा पाव तिल्ली का तेल, आधा पाव अरंडी का तेल ,आधा पाव और लुगदी को आग पर चढ़ा कर पकाएं जब दवाइयां जल जाए तेल को उतार ले इस तेल से जोड़ों का दर्द नष्ट हो जाता है|
  • सनाय दो तोले, सुरंजन दो तोले ,हर्ड एक तोले,बादाम 10 माशे ,मेहंदी की पत्ती 7 माशे, केसर 4 माशे इन सबको पीसकर  छान लेंफिर जितना चूर्ण का वजन हो उतनी ही मिश्री मिला दे और शीशी में रख ले इसकी मात्रा एक तोले से 2 तोले तक है सुबह एक मात्रा खाने यह रोग नष्ट होता है|
अदरक
अदरक

 

घमोरियां (heat rash)

घमोरियां (heat rash)

घमोरियां को हिट रेश के नाम से भी जाना जाता है|गर्मी के मौसम में घमौरियों का होना एक सामान्य बात है| घमोरियां होने पर शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने निकलने लगते हैं और खुजली व जलन होने लगती है| यह उन लोगों को ज्यादा होती है जिन्हें अधिक पसीना आता है| यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर होती है जो कपड़ो से ढके रहते हैं जैसे- गर्दन , छाती का ऊपरी भाग , पीठ और जांघों के बीच में आदि घमोरियां तब होती है जब पसीने की ग्रंथियों अवरोध हो जाने के कारण पसीना बाहर नहीं निकाल पाती और पसीना त्वचा के नीचे परतों मे इकठा हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई देने लगते हैं जो कुछ भी का कारण बनते हैं|

घमोरियां
घमोरियां

घमोरियां के लक्षण(heat rash symptoms)

  • त्वचा पर लाल चकत्ते होना
  • दानों से द्रव पदार्थ का निकलना
  • पसीना निकलने पर बेचैनी का अनुभव होना
  • गर्मियों में लगातार शरीर में खुजली होना
  • थकान का अनुभव होना
  • खुजली करने पर जलन और चुभन का अनुभव होना

हीट रैश के कारण(heat rash causes)

  1. अविकसित ग्रंथियां-पसीने की ग्रंथियों अवरुद्ध  हो जाने के कारण पसीना बाहर नहीं निकल पाता और पसीना त्वचा के नीचे परतों मे इकठा हो जाता है जिसके कारण त्वचा पर लाल चकत्ते होने लगते है|
  2. मौसम में बदलाव- मौसम में बदलाव आने के कारण बीमारियां हो सकती हैं| गरम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को घमोरियां होने की संभावना बढ़ जाती है |
  3. शारीरिक गतिविधि-दिनचर्या का हमारी शरीर स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है इसमें ज्यादा व्यायाम करना और कड़ी मेहनत करने से ज्यादा पसीना आता है और घमोरियां होने की आशंका बढ़ जाती है|
  4. उम्र– वयस्कों की तुलना में नवजात शिशु में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है|
  5. तापमान के अचानक बढ़जाना– तापमान के अचानक बढ़ जाने पर घमोरियां होने की संभावना बढ़ जाती है|

घमौरियों के प्रकार(heat rash types)

घमोरियां के तीन प्रकार होते हैं:

  1. क्रिस्टलीय-यह घमौरी का सबसे सामान्य प्रकार है|इस स्थिति में त्वचा की सतह पर पसीने या द्रव से भरे छोटे सफेद दाने होते हैं जो आसानी से फूट जाते हैं यह वयस्कों की तुलना में शिशु बच्चों में अधिक देखने को मिलता है इसमें खुजली या दर्द नहीं होता|
  2. रुब्रा– इस प्रकार में लाल दाने और पसीना न आ नहीं के समान होती है| यह त्वचा के नीचे गहरी परतों में होता है|
  3. गहरा– यह घमौरियों का सबसे असामान्य प्रकार होता है| यह त्वचा के नीचे गहरी परत में होता है यह प्रकार बड़े मजबूत और गांठ के रूप में होता है इसे मिली अरियां प्रोफंडा भी कहते हैं|

हीट रैश की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय(heat rash remedies)

  1. चंदन-चंदन में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो घमौरियों के दर्द को कम करने में हमारी मदद करते हैं चंदन के पाउडर मैं थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बना ले इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से जलन से राहत मिलती है|
  2. नीम- नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं इसलिए नीम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर पीस लें और इस मिश्रण को लाल दानों पर लगाने से घमोरियां की समस्या दूर होती है|नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करने से खुजली की समस्या दूर होती है|
  3. बर्फ से सिकाई– बर्फ से सिकाई घमोरियां होने पर प्रभावित स्थान पर बर्फ से सिकाई करने से राहत मिलतीहै|
  4. खानपान- अपने प्रति दिन की आहार में पपीता , आंवला , नींबू का रस , तरबूज , दही , खीरा आदि को शामिल करें फल और सब्जियों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से घमौरियों की समस्या काफी हद तक कम होती है|
  5. मुल्तानीमिट्टी-मुल्तानी मिट्टी को पानी में मिलाकर इसका मिश्रण तैयार कर लें और इसको शरीर पर लगा ले और सूखने पर स्नान कर ले इससे आपको खुजली की समस्या से निजात मिल सकता है|
  6. बेकिंग सोडा –नहाते समय पानी में बेकिंग सोडे की कुछ मात्रा डालकर नहाने से खुजली से संबंधित समस्या दूर होती है|
  7. एलोवेरा –एलोवेरा में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं |एलोवेरा में से जेल को निकालकर लाल चकते पर लगाने से जलन और सूजन की समस्या दूर होती है|
  8. कच्चा आलू –आलू की स्लाइस को काटकर प्रभावित स्थान पर रख दें| कच्चा आलू घमोरियां होने की स्थिति में बहुत फायदेमंद है और इससे खुजली की समस्या भी दूर होती है|
एलोवेरा
एलोवेरा

डैंड्रफ हेयर (Dandruff hair)

डैंड्रफ हेयर (Dandruff hair)

डैंड्रफ हेयर की समस्या एक आम समस्या बन गई है महिला हो या पुरुष सब लोगों में यह समस्या देखने को मिलती है|डैंड्रफ को स्क्रफ के नाम से भी जाना जाता है जब सिर की त्वचा की कोशिकाएं मर जाती है तो वह पपड़ी की तरह हट नहीं लगती है जिसे रूसी कहा जाता है| रूसी होने पर बाल रूखे हो जाते हैं और बेजान से लगते हैं|बालों की रूसी के प्रति सावधानियां बरतनी चाहिए ऐसा न करने पर हम गंजेपन का शिकार भी हो सकते हैं| बालों की ठीक तरह से देखभाल न करने पर रूसी की समस्या उत्पन्न हो जाती है जिससे बाल पतले और  झड़ने लग जाते हैं|

धूल मिट्टी के संपर्क में आने से, तनाव होने पर , मौसम में बदलाव आने के कारण, हारमोंस में परिवर्तन आने के कारण, बालों में डैंड्रफ होने की समस्या बढ़ जाती है|कई बार धूप में जाने से भी विटामिंस कम हो जाते हैं जिससे बालों में डैंड्रफ की समस्या उत्पन्न हो जाती है|कुछ आयुर्वेदिक उपाय करने पर डैंड्रफ हेयर की समस्या को दूर किया जा सकता है|

डैंड्रफ हेयर
डैंड्रफ हेयर

डैंड्रफ हेयर के लक्षण (Dandruff symptoms)

  • सिर में रूसी होने के कारण खुजली होने लगती है|
  • डैंड्रफ होने के कारण सिर में दाने निकल आते हैं जिन में द्रव पदार्थ भरा होता है|
  • बालों का झड़ना|
  • बालों का पतला होना|
  • बालों में रूखापन आ जाना|
  • बालों में त्वचा का लाल हो जाना|

डैंड्रफ हेयर होने के कारण (Dandruff causes)

  1. चरम रोग- त्वचा के रोग होने पर डैंड्रफ की समस्या होने लगती है जब किसी को एक्जिमा नामक त्वचा संबंधी रोग होते हैं तो डैंड्रफ की समस्या उत्पन्न होती है|
  2. मानसिक तनाव– मानसिक तनाव होने के कारण भी सिर में डैंड्रफ की समस्या उत्पन्न हो जाती है इसलिए मानसिक तनाव को दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद करनी चाहिए|
  3. गरम पानी का प्रयोग- सर्दियों में गर्म पानी से नहाने से सिर में डैंड्रफ की समस्या हो जाती है|
  4. शैंपू का ज्यादा प्रयोग- शैंपू का ज्यादा प्रयोग करने से बालों में रूसी और  डैंड्रफ जैसी समस्याएं होने लगती है| डैंड्रफ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए हर्बल शैंपू को प्रयोग में लाना चाहिए|
  5. हारमोंस में परिवर्तन –हारमोंस में परिवर्तन आने के कारण सिर में रूखी की समस्या हो जाती है और डैंड्रफ बढ़ने लगता है|
  6. मौसमी बदलाव- मौसम में बदलाव आने के कारण डैंड्रफ जैसी समस्या बढ़ जाती है|
  7. ऑयली बाल- जंक फूड का सेवन करने से बाल ऑयली हो जाती है जिसके कारण सिर में डैंड्रफ की समस्या हो जाती हैऔर हेयर फॉल होने लगता है|
  8. रूखी त्वचा- अगर आप की सिर की त्वचा रूखी है तो आपके सिर में डैंड्रफ होने की आशंका बढ़ जाती है|
  9. ठीक ढंग से कंघी ना करना- प्रतिदिन ठीक ढंग से कंगी ने करने से बाल रूखे हो जाते हैं और डैंड्रफ हेयर की समस्या हो जाती है|
  10. अन्य कारण-एड्स और थायराइड से ग्रस्त लोगों में डैंड्रफ की समस्या अधिक देखने को मिलती है|महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है|

बालों में रूसी हटाने के आयुर्वेदिक उपाय (Dandruff treatment)

  1. कपूर और नारियल का तेल- थोड़ा सा नारियल तेल ले उसमे आधा चम्मच कपूर का पाउडर मिलाकर बालों की जड़ों में लगा ले और थोड़ी देर बाद बालों को धो ले ऐसा करने से डैंड्रफ हेयर की समस्या दूर होती है|
  2. सरसों का तेल और नींबू- थोड़े से सरसों के तेल में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर बालों में मसाज कर लें और आधे घंटे बाद सिर को धो ले ऐसा करने से रूसी की समस्या दूर होगी|
  3. नीम-नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उबले हुए पानी से सिर धोने से डैंड्रफ हेयर की समस्या दूर होती है|
  4. बादाम रोगन शिरीन तेल- बादाम रोगन शिरीन तेल को बालों में लगाने से रूसी की समस्या दूर होती है|
  5. मुल्तानी मिट्टी- मुल्तानी मिट्टी को लस्सी में भिगोकर सिर धोने से भी रूसी की समस्या दूर होती है|
  6. आंवला –आंवला, रीठा, शिकाकाई को रात को पानी में भिगोकर सुबह इस पानी से सिर धोने से डैंड्रफ हेयर की समस्या होती है|
  7. अंडा– अंडे को बालों में लगाने से डेंड्रफ की समस्या दूर होती है और बाल चमकदार बनते हैं अंडे को बालों में थोड़ी देर लगा कर थोड़ी देर बाद फिर धो ले|
  8. काली मिर्च और सीताफल के बीज– सीताफल की आठ-दस बीज  और चार पांच काली मिर्च पानी में पीसकर देसी घी में मिलाकर मालिश करने से डेंड्रफ की समस्या से निजात मिलता है|
  9. प्याज का रस-प्याज को पीसकर प्याज का रस निकालकर बालों में मसाज करने से डैंड्रफ हेयर की समस्या से निजात मिलता है|
नीम
नीम

डैंड्रफ हटाने के लिए शैंपू(Dandruff shampoo)

  1. काया एंटी डैंड्रफ शैंपू-काया एंटी डैंड्रफ शैंपू का प्रयोग करने से डैंड्रफ की समस्या दूर होती है खुजली की समस्या से निजात मिलता है और बालों के रूखे पन की समस्या भी दूर होती है|
  2. आयुष एंटी डैंड्रफ नीम शैंपू– इस शैंपू का प्रयोग करने से बालों की जड़ों को पोषण मिलता है जिससे बाल लंबे होने लगते हैं और खुजली की समस्या भी दूर होती है व डैंड्रफ हेयर की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है|
  3. खादी नीम और एलोवेरा शैंपू-शैंपू का प्रयोग करने से डैंड्रफ हेयर की समस्या दूर होती है|
  4. हिमालया हर्बल एंटी डैंड्रफ शैंपू –इस शैंपू में एंटीमाइक्रोबियल्स गुण पाए जाते हैं शैंपू का प्रयोग करने से बालों की रूसी की समस्या दूर होती है और बालों को पोषण भी मिलता है जिससे बाल मजबूत बनते हैं|
  5. मैट्रिक्स बॉयोलाज एडवांस स्कैल्प प्योर डैंड्रफ शैंपू-शैंपू में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं और पायरी थियून जिंक भी पाया जाता है जो डैंड्रफ को कम करता है|शैंपू खुजली की समस्या भी दूर होती है|
  6. हेड एंड शोल्डर स्मूथ एंड सिल्की शैंपू-यह शैंपू लंबे समय से प्रयोग में लाया जा रहा है शैंपू को प्रयोग में लाने से बालों की रूखी की समस्या डैंड्रफ हेयर की समस्या दूर होती है|

ब्रेस्ट कैंसर क्या है

ब्रेस्ट कैंसर क्या है

ब्रेस्ट कैंसर की समस्या एक आम समस्या हो चुकी है |पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है|अगर इस समस्या का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह बीमारी का गंभीर रूप धारण कर सक्ती है |सही समय पर लक्षण पता चलने पर इलाज शुरू होने से ब्रेस्ट कैंसर नामक बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है |इस रोग में व्यक्ति को गांठ का अनुभव होता है| गांठ होना कैंसर की शुरुआत का मुख्य कारण है| अगर आपको ऐसा अनुभव होता है तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए|

ब्रेस्ट कैंसर
ब्रेस्ट कैंसर

क्यों होता है ब्रेस्ट कैंसर

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने के मुख्य कारण हो सकते हैं जिन महिलाओं में मासिक धर्म जल्दी शुरू होकर देर से खत्म होता है या जिन महिलाओं के बच्चे ने हो और जो देर से ही मां बनी हो उन महिलाओं को इस रोग का खतरा होने की संभावना ज्यादा होती है|

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

  • स्तन की गोलाई में कोई बदलाव, जैसे- एक से दूसरे का बड़ा होना स्तन कैंसर का मुख्य लक्षण है|
  • स्तन में दर्द या गांठ का महसूस होना स्तन कैंसर का मुख्य लक्षण है|
  • स्तन से रस जैसे कुछ पदार्थ का निकलना|
  • निपल्स का लाल पड़ना|
  • स्तन में सूजन |
  • स्तन के आकार में बदलाव |
  • स्तन को दबाने पर दर्द न होना|

ब्रेस्ट कैंसर होने के कारण

  • बढ़ती उम्र|
  • ज़्यादा उम्र में पहले बच्चे का जन्म|
  • आनुवांशिकता (heredity)
  • शराब जैसे पेय पदार्थ का अधिक सेवन|

ब्रेस्ट कैंसर को रोकने के घरेलू उपाय

  1. आयोडीन-कई बार खाने में आयोडीन की कमी होने पर शरीर में गांठ पड़नेलगती है इसलिए अपने खाने में आयोडीन युक्त नमक का सेवन करें। 
  2. कैफीनन ले-कोई भी ऐसा पेय पदार्थ पीने से परहेज रखें जिसमें कैफीन का मात्रा हो। कैफीन से गांठ का विकास घटने की बजाए बढ़ता है। 
  3. हरी सब्जियां-भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां जरूर शामिल करें। इनमें एस्‍ट्रोजन होता है जो किसी भी तरह की दर्द और खिंचाव से आराम दिलाता है। 
  4. स्‍तनों की मसाज-स्‍तनों की मसाज सही तरीके से करने से भी गांठ पिघल जाती है। इससे रक्‍त का संचार अच्‍छी तरह होता है और लम्‍फ ग्‍लैंड्स के द्वारा सिस्‍ट से फ्लूएड बाहर निकल जाता है|
  5. जूस-हर रोज अंगूर या अनार का जूस पीने से कैंसर से बचाव होता है|
  6. लहसुन-.प्रतिदिन लहसुन का सेवन करने से स्तन कैंसर की संभावनाओं को रोक सकते हैं|
  7. ग्रीन टी-.एक गिलास पानी में हर्बल ग्रीन टी को आधा होने तक उबालें और फिर पी लें |

ब्रेस्ट कैंसर को  रोकने के लिए कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. काली मिर्च-काली मिर्च में बहुत अधिक मात्रा में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं इसलिए यह किसी भी प्रकार के कैंसर से आपकी सुरक्षा करता है। इसमें पैपरीन होता है, जो एंटी कैंसर के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  2. लहसुन-लहसुन में भी एंटीऑक्‍सीडेंट अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे यह भी एंटी कैंसर आहार माना जाता है। यह कार्सिनोजेनिक कंपाउन्‍ड को बनने से रोकता है और कैंसर से शरीर की सुरक्षा करता है।
  3. हल्‍दी-हल्दी प्रकृति की अद्भुत देन है, जिसमें कई सारे अवगुणों से लड़ने की शक्ति होती है। यह शरीर में कैंसर की बीमारी पैदा होने से बचाती है। यहहमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है। इसके साथ ही हल्‍दी में करक्यूमिन  नामक फाइटोन्‍यूट्रिएंट होता है, जो कैंसर से शरीर की सुरक्षा करता है।
  4. अखरोट-अखरोट का सेवन भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बचाने में मदद करता है|
  5. गर्भनिरोधक गोलियां – गर्भनिरोधक गोलियांज्यादा खाने से ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहिए|
  6. फलो का सेवन-खट्टे फलों का सेवन करना भी सतन का कैंसर होने से बचाता है|
हल्दी
हल्दी